केस 9.10: नामों की दीवार
- काल्पनिक केस
- कठिनाई
- कठिन
- पाठ्यक्रम बिंदु
- 5: गांधीवादी नैतिकता: साधन और साध्य की पवित्रता
- परखे जाने वाले मूल्य और कानून
- साधन-साध्य, सत्य, अहिंसा (ज़बरदस्ती नहीं), मानवीय गरिमा; हिंद स्वराज, अध्याय 16 (बीज और वृक्ष); अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा)
उदाहरण (काल्पनिक)नामों की दीवार
मीना राजस्थान के एक ब्लॉक में खंड विकास अधिकारी हैं। जिले का लक्ष्य है कि महीने के अंत तक ब्लॉक की सभी पंचायतें "खुले में शौच से मुक्त" घोषित हों। एक पंचायत में अस्सी प्रतिशत घरों में शौचालय बन चुके हैं। बाकी घरों में कुछ को सहायता की किश्त नहीं मिली, कुछ बुज़ुर्ग और विधवाएँ हैं जिनके पास बनवाने वाला कोई नहीं, और कुछ आदत के कारण टाल रहे हैं। एक अधिकारी सुझाता है, "इन घरों के नाम पंचायत भवन की दीवार पर लिखवा दो, सुबह सीटी बजाकर पहरा लगवाओ और राशन रोकने की चेतावनी दे दो। हफ़्ते भर में सब बन जाएगा।" दूसरा कहता है, "पंचायत की घोषणा की रिपोर्ट भेज दीजिए, बाकी बाद में देख लेंगे।" मीना जानती हैं कि लक्ष्य जनस्वास्थ्य और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सही है। पर उन्हें आशंका है कि दबाव में बने शौचालय इस्तेमाल में नहीं आएँगे। एक बुज़ुर्ग विधवा कहती हैं कि उनके पास पैसे और जगह, दोनों की दिक्कत है।
- हितधारक
- बाकी बचे परिवार, विशेषकर बुज़ुर्ग विधवाएँ और गरीब घर (सबसे कमज़ोर पक्ष), जिन घरों में शौचालय बन चुके हैं, पंचायत और सरपंच, महिलाएँ और बच्चे (स्वच्छता से लाभ), ऊपर के अधिकारी, मीना, जिले का स्वास्थ्य तंत्र।
- मुद्दा
- समय-सीमा में लक्ष्य पूरा करना बनाम गरिमा, सत्य और बिना ज़बरदस्ती का तरीका। साध्य (स्वच्छता) सही है; सवाल साधन का है।
- विकल्प
- क. नामों की दीवार, पहरा और राशन की चेतावनी (असर जल्दी दिखता है; पर अपमान और ज़बरदस्ती है, और राशन जैसा हक रोकने की धमकी अनुचित है; दबाव हटते ही शौचालय छूट सकते हैं)। ख. बिना पूरे हुए घोषणा की रिपोर्ट भेजना (ऊपर से दबाव घटता है; पर रिपोर्ट असत्य है और असली समस्या वहीं रहती है)। ग. घर-घर संवाद और सहायता: अटकी किश्त दिलवाना, बुज़ुर्गों और विधवाओं के लिए मिस्त्री और जगह का इंतज़ाम, पंचायत के स्वच्छता-साथी, सही स्थिति की रिपोर्ट और ज़रूरत हो तो ऊपर से अतिरिक्त समय माँगना (धीमा और कठिन; पर साधन भी शुद्ध और असर टिकाऊ)।
- सर्वश्रेष्ठ
- ग। हिंद स्वराज, अध्याय 16 में गांधीजी कहते हैं कि साधन बीज हैं और साध्य वृक्ष; दोनों में अटूट संबंध है। वे स्वच्छता को सेवा मानते थे, थोपने की चीज़ नहीं। अनुच्छेद 21 में जीवन के साथ गरिमा भी है।
सीख
कार्रवाई: अल्प: अटकी किश्तों की सूची और भुगतान, बुज़ुर्गों के लिए सामूहिक निर्माण-सहायता, नामों की सूची का कोई सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं, ऊपर के अधिकारी को सही स्थिति और समय का अनुरोध लिखित में। दीर्घ: घोषणा के साथ बाद में उपयोग की स्वतंत्र जाँच, कमज़ोर परिवारों के लिए पहले सहायता का नियम, पंचायत-स्तर पर साथी और व्यवहार-परिवर्तन।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
(10 अंक, 100 शब्द) मीना को क्या करना चाहिए? पाँच चरणों के कार्ड से हल कीजिए।
आदर्श उत्तर
सबसे कमज़ोर हितधारक वे बुज़ुर्ग और विधवाएँ हैं जिनके शौचालय अधूरे हैं; पंचायत, ऊपर के अधिकारी और जिला भी जुड़े हैं। मुद्दा समय-सीमा में लक्ष्य बनाम गरिमा और सत्य का है; साध्य सही है, साधन का प्रश्न है। रास्ते तीन हैं: नामों की दीवार और राशन की चेतावनी, बिना पूरे हुए घोषणा, या सहायता और संवाद के साथ सच्ची रिपोर्ट। पहला अपमान करता है, दूसरा असत्य है। मैं तीसरा चुनूँगा, क्योंकि गांधीजी के अनुसार साधन बीज हैं और साध्य वृक्ष, और अनुच्छेद 21 गरिमा देता है। मैं किश्त, सहायता और संवाद देकर सही स्थिति लिखूँगा। दीर्घकाल में उपयोग की जाँच कराऊँगा।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) "साध्य अच्छा हो तो साधन कैसा भी चलेगा" पर गांधीजी का मत इस केस में समझाइए।
आदर्श उत्तर
गांधीजी के लिए शुद्ध साध्य अशुद्ध साधन से नहीं मिलता; नाम की दीवार और झूठी रिपोर्ट सत्य और अहिंसा के विरुद्ध हैं, और दबाव से आई आदत टिकती नहीं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) लक्ष्य-आधारित कार्यक्रमों में साधन की शुद्धता बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था सुझाइए।
आदर्श उत्तर
घोषणा से पहले और बाद में स्वतंत्र जाँच, कमज़ोरों को पहले सहायता, नाम-उजागर करने और हक रोकने पर रोक, साथी और संवाद।