केस 9.9: तालिका में सबसे ऊपर
- काल्पनिक केस
- कठिनाई
- मध्यम
- पाठ्यक्रम बिंदु
- 4: गीता: निष्काम कर्म, कर्तव्य और फल
- परखे जाने वाले मूल्य और कानून
- निष्काम कर्म (गीता 2.47), समत्व (गीता 2.48), सत्यनिष्ठा; आँकड़ों की ईमानदारी; आचरण नियम 3(1)
उदाहरण (काल्पनिक)तालिका में सबसे ऊपर
मधु राजस्थान के एक जिले में उपखंड अधिकारी हैं। राज्य ने "राशन कार्ड आधार-जुड़ाव अभियान" शुरू किया है और हर सोमवार जिलों की तालिका निकलती है। मधु का उपखंड घर-घर सत्यापन पर ज़ोर देता है, इसलिए प्रतिशत धीमा है और तालिका में नीचे है। ऊपर के अधिकारी फ़ोन पर कहते हैं, "बाकी जगह तो कर्मचारी अंगूठे के निशान खुद चढ़ा देते हैं। आपकी वार्षिक रिपोर्ट पर असर पड़ेगा। आँकड़े ऊपर कीजिए, चाहे कैसे भी।" कुछ अधीनस्थ कहते हैं, "मैडम, आधा प्रतिशत के लिए हम रात भर बैठ जाएँगे।" मधु का मन चिंता में है, क्योंकि उन्हें पता है कि सही सत्यापन में कई विधवाओं और दिव्यांगों के नाम असल में जुड़ पाएँगे, पर वह समय माँगता है। यह तालिका सभी जिला अधिकारियों को भेजी जाती है, इसलिए हर किसी की स्थिति सबको दिखती है। अन्य उपखंडों के दो सहकर्मी पहले ही 100 प्रतिशत बता चुके हैं, जिस पर मधु को निजी तौर पर संदेह है।
- हितधारक
- विधवाएँ, दिव्यांग और अन्य पात्र परिवार (सबसे कमज़ोर पक्ष), कर्मचारी, ऊपर के अधिकारी, विभाग, मधु।
- मुद्दा
- सही और ईमानदार काम बनाम तालिका की स्थिति और अपने मूल्यांकन का भय; फल की चिंता बनाम कर्म की शुद्धता।
- विकल्प
- क. फ़र्ज़ी अंगूठे चढ़ाकर ऊपर आना (रैंक और सुरक्षा; पर जालसाज़ी, असली पात्र बाद में छूटेंगे, आचरण का उल्लंघन)। ख. बिल्कुल बेपरवाह होकर धीमे चलना और कहना "मुझे परिणाम से क्या" (साफ़ मन; पर लक्ष्य की ज़िम्मेदारी से भागना, गीता का अर्थ भी गलत)। ग. सत्यापन की गुणवत्ता रखते हुए गति बढ़ाना: अधिक शिविर, गाँव-वार टीमें, घर पर सुविधा; ऊपर के अधिकारी को लिखकर सच्ची स्थिति और कारण बताना, और सूचक में "सत्यापित" और "लंबित" अलग दिखाना (मेहनत ज़्यादा; पर कर्म भी ईमानदार और परिणाम भी प्रयास से)।
- सर्वश्रेष्ठ
- ग। गीता 2.47 कर्म पर अधिकार और फल की आसक्ति से बचने की बात कहती है; गीता 2.48 सफलता और असफलता में समभाव को योग कहती है। आचरण नियम 3(1) हर समय सत्यनिष्ठा माँगता है।
सीख
कार्रवाई: अल्प: शिविर बढ़ाना, दिव्यांगों और वृद्धों के लिए घर पर सत्यापन, ऊपर के अधिकारी को सच्ची रिपोर्ट, कर्मचारियों को प्रेरणा। दीर्घ: तालिका में "सत्यापित" और "गुणवत्ता" के स्तंभ, सही काम करने वालों की सराहना, लक्ष्य के साथ संसाधन।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
(10 अंक, 100 शब्द) मधु को क्या करना चाहिए? पाँच चरणों के कार्ड से हल कीजिए।
आदर्श उत्तर
हितधारक हैं विधवाएँ, दिव्यांग और पात्र परिवार (सबसे कमज़ोर), कर्मचारी, ऊपर के अधिकारी, विभाग और मैं। मुद्दा ईमानदार कर्म बनाम तालिका की स्थिति के भय का है। रास्ते तीन हैं: फ़र्ज़ी अंगूठे चढ़ाना, परिणाम से बेपरवाह होकर धीमे चलना, या गुणवत्ता रखकर गति बढ़ाना। पहला जालसाज़ी है; दूसरा गीता का अर्थ गलत लेता है। मैं तीसरा चुनूँगी, क्योंकि गीता 2.47 कर्म की शुद्धता और फल की अनासक्ति सिखाती है और आचरण नियम 3(1) सत्यनिष्ठा माँगता है। अभी शिविर बढ़ाऊँगी, पात्रों के घर जाकर सत्यापन करूँगी और ऊपर सच्ची रिपोर्ट भेजूँगी। दीर्घकाल में तालिका में गुणवत्ता का स्तंभ माँगूँगी।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) "कर्म करो, फल की चिंता मत करो" का इस केस में सही और गलत अर्थ बताइए।
आदर्श उत्तर
सही अर्थ: प्रयास पूरा, तरीका शुद्ध, परिणाम पर चिंता और लालच नहीं; गलत अर्थ: परिणाम की उपेक्षा।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) लक्ष्य और गुणवत्ता में संतुलन के दीर्घकालिक उपाय बताइए।
आदर्श उत्तर
गुणवत्ता और संख्या दोनों के सूचक, संसाधन, सच्चे काम की सराहना।