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पेपर III · इकाई II

ज़िला स्तर पर विकास प्रशासन : अवधारणा, संस्थाएँ और योजनाएँ

थाना और तालाब का फ़र्क़ समझिए, फिर वेडनर-रिग्स की परिभाषा, DRDA से ज़िला परिषद तक का सफ़र, ज़िला योजना समिति और ताज़ा योजनाएँ: सब वर्ष-सहित आँकड़ों और हल PYQ के साथ।

  • विकास प्रशासन
  • DRDA
  • ज़िला योजना समिति
  • VB-G RAM G
  • राजीविका
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II : "ज़िला : ज़िला कलेक्टर, क़ानून-व्यवस्था प्रशासन, राजस्व प्रशासन, विकास प्रशासन।" (मूल पाठ: District: District Collector, law and order administration, revenue administration, development administration.) इस पेज में अंतिम हिस्से, यानी ज़िला स्तर के विकास प्रशासन, की अवधारणा, संस्थाएँ, योजनाएँ और केस-स्टडी दी गई हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013-2024 के संकलित छह पेपरों, उनमें विकास प्रशासन पर सीधे प्रश्न 2016 (2 अंक और 10 अंक) और 2021 (5 अंक) में आए; 2024 में ब्लॉक और तहसील का अंतर पूछा गया।
  • प्रश्न अवधारणा के तुलनात्मक रूप में आते हैं: परंपरागत बनाम विकास प्रशासन, नियामकीय बनाम विकास प्रशासन, और वह भी उदाहरण माँगते हुए। उदाहरण ज़िला स्तर के हों तो उत्तर सिलेबस से सीधा जुड़ता है।
  • सिलेबस की शब्दावली ज़िले की है, इसलिए ज़िला परिषद, उसका CEO, ज़िला योजना समिति और मुख्य योजनाओं (रोज़गार गारंटी, ग्रामीण आवास, आजीविका मिशन) की जानकारी उत्तर में वज़न देती है।

पहले एक तस्वीर: थाना और तालाब

सुबह दस बजे ज़िला कलेक्टर की मेज़ पर दो फ़ाइलें आती हैं। पहली में एक क़स्बे में तनाव को देखते हुए निषेधाज्ञा आदेश का मामला है। इसका काम है जो चल रहा है उसे बिगड़ने से रोकना, यानी व्यवस्था बनाए रखना। दूसरी फ़ाइल में उसी ज़िले के एक गाँव के लिए तालाब की खुदाई, पक्के मकान और महिला स्वयं सहायता समूह की योजना है। इसका काम है जो नहीं है उसे बनाना, यानी गाँव की हालत बदलना। पहली फ़ाइल नियामकीय प्रशासन (regulatory administration) की है और दूसरी विकास प्रशासन (development administration) की।

पहचान का आसान तरीक़ा यह है। नियामकीय प्रशासन से हम पूछते हैं: क़ानून का पालन हुआ या नहीं? विकास प्रशासन से हम पूछते हैं: गाँव की हालत पहले से बेहतर हुई या नहीं? पहले में सफलता का मतलब है शिकायतें कम रहना और नियम न टूटना। दूसरे में सफलता का मतलब है भूजल ऊपर आना, लोगों को घर और आमदनी मिलना।

अवधारणा: वेडनर, रिग्स और परीक्षा-योग्य परिभाषा

विकास प्रशासन की चर्चा में दो नाम बार-बार आते हैं। एडवर्ड वेडनर (Edward Weidner) के अनुसार यह वह प्रक्रिया है जिसमें किसी संगठन को प्रगतिशील राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक उद्देश्यों की ओर ले जाया जाता है। उनकी नज़र में यह कार्य-उन्मुख (action-oriented) और लक्ष्य-उन्मुख (goal-oriented) प्रशासनिक तंत्र है।

फ़्रेड रिग्स (Fred W. Riggs) ने इसके दो पहलू बताए। पहला, विकास का प्रशासन (administration of development), यानी विकास की नीतियों और योजनाओं को लागू करना। दूसरा, प्रशासन का विकास (development of administration), यानी प्रशासन की अपनी क्षमता बढ़ाना। दोनों एक-दूसरे पर टिके हैं: कमज़ोर प्रशासन अच्छी योजना भी नहीं चला पाता और योजनाएँ चलाते-चलाते ही प्रशासन की क्षमता बढ़ती है। रिग्स का यह भी मत है कि आसपास की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियाँ बदले बिना प्रशासन में बहुत सुधार नहीं हो सकता।

परीक्षा के लिए एक पंक्ति में परिभाषा: विकास प्रशासन वह परिवर्तन-उन्मुख और लक्ष्य-केंद्रित प्रशासन है जो नियोजित आर्थिक-सामाजिक प्रगति के कार्यक्रमों को लागू करता है और साथ ही स्वयं की क्षमता भी बढ़ाता है।

दो सावधानियाँ। पहली, विकासात्मक और ग़ैर-विकासात्मक प्रशासन के बीच की रेखा मात्रा की है, पूर्ण नहीं: कलेक्टर का दफ़्तर दोनों काम करता है। दूसरी, शब्द के पहले प्रयोग को लेकर लेखकों में मतभेद है। एक अध्ययन-सामग्री में यू.एल. गोस्वामी के 1955 के लेख का हवाला है, पर दूसरे स्रोत से इसकी पुष्टि नहीं हुई, इसलिए उत्तर में 'वेडनर ने शब्द गढ़ा' लिखने के बजाय 'वेडनर और रिग्स ने अवधारणा को व्यवस्थित रूप दिया' लिखना सुरक्षित है (विश्लेषण).

विकास प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ

परिभाषाएँ याद करने के बाद सवाल उठता है कि विकास प्रशासन को पहचाना कैसे जाए। विश्वविद्यालयों की अध्ययन-सामग्री उसके कुछ लक्षण गिनाती है, और दोनों जगह ये बातें समान हैं: वह परिवर्तन-उन्मुख (change-oriented) है, यानी यथास्थिति से आगे बढ़कर प्रगति की ओर चलता है; लक्ष्य-उन्मुख (goal-oriented) है, यानी हर काम का कोई तय नतीजा होता है; नवाचार (innovation) की ज़्यादा माँग करता है; और नागरिक को केवल आदेश माननेवाला नहीं, लाभार्थी और भागीदार मानता है।

एक स्रोत इन्हें ग्यारह गुणों में रखता है: परिवर्तन-उन्मुखता, लक्ष्य-उन्मुखता, प्रगतिवाद (राजनीतिक भागीदारी, आर्थिक समानता और सामाजिक-सांस्कृतिक उन्नति), योजना, नवाचार और रचनात्मकता, लचीलापन (नियमों का विवेकपूर्ण प्रयोग), उच्च अभिप्रेरणा, जन-उन्मुखता, भागीदारी, प्रभावी एकीकरण (संस्थाओं और संसाधनों का तालमेल) और परिवेश की चुनौतियों से निपटने की क्षमता। परीक्षा के 50 शब्दों में चार-पाँच गुण एक-एक उदाहरण के साथ लिखना काफ़ी है; सारे ग्यारह रटने की ज़रूरत नहीं।

ज़िले की तस्वीर में इन्हें ऐसे पहचानिए। भागीदारी तब दिखती है जब ग्राम सभा गाँव के काम तय करती है। एकीकरण तब, जब ज़िला योजना समिति पंचायतों और नगरपालिकाओं की अलग-अलग योजनाओं को जोड़कर पूरे ज़िले की एक प्रारूप योजना बनाती है। लचीलापन तब, जब सूखे की स्थिति में कलेक्टर विभागों से रोज़गार के कामों की प्राथमिकता बदलवाकर पानी के काम आगे करवाता है (यह समझाने के लिए गढ़ा गया उदाहरण है, किसी वास्तविक आदेश का वर्णन नहीं)।

दायरे के बारे में अध्ययन-सामग्री यह भी कहती है कि विकासात्मक और ग़ैर-विकासात्मक प्रशासन का भेद केवल ज़ोर की मात्रा (degree of emphasis) का है, इसलिए उत्तर में "पूरी तरह अलग" जैसे शब्द न लिखें। उसके कार्य-क्षेत्र में कृषि, सिंचाई, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज-कल्याण का प्रशासन आते हैं। इसी वजह से इस पृष्ठ में आगे सिंचाई-जल, आवास, रोज़गार और आजीविका के उदाहरण ज़िले की संस्थाओं के साथ जोड़े गए हैं।

परंपरागत (नियामकीय) बनाम विकास प्रशासन

परंपरागत / नियामकीय प्रशासन

मुख्य उद्देश्यक़ानून-व्यवस्था और यथास्थिति बनाए रखना

सफलता की कसौटीनियम का पालन, मितव्ययिता और दक्षता (efficiency)

संरचनाकठोर पदानुक्रम, ऊपर से आदेश

निर्णय की शैलीकेंद्रित निर्णय

काम की प्रकृतिनियमित, दोहराव वाला

जनता से रिश्तानागरिक नियमों के अधीन

ज़िले का उदाहरणनिषेधाज्ञा आदेश, भू-अभिलेख और राजस्व वसूली (तहसीलदार), पुलिस थाना

विकास प्रशासन

मुख्य उद्देश्यपरिवर्तन लाना और प्रगति के लक्ष्य पाना

सफलता की कसौटीपरिणाम और प्रभावशीलता (effectiveness)

संरचनालचीला और गतिशील ढाँचा

निर्णय की शैलीसहभागी और विकेंद्रित निर्णय

काम की प्रकृतिनवाचार और रचनात्मकता की ज़्यादा माँग

जनता से रिश्तानागरिक भागीदार और लाभार्थी

ज़िले का उदाहरणतालाब और जल-संरक्षण के काम, ग्रामीण आवास, स्वयं सहायता समूह

यही तालिका 2021 के 5 अंक और 2016 के 10 अंक के प्रश्न का आधार है। अंतर प्रवृत्ति का है, पूर्ण नहीं।

ज़िले में विकास प्रशासन का ढाँचा

1992 के 73वें संशोधन से संविधान के भाग IX में गाँव, मध्यवर्ती और ज़िला स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था बनी। राजस्थान में ये तीन स्तर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद हैं। विकास का बहुत सा काम अब इन्हीं निर्वाचित संस्थाओं के माध्यम से होता है और कलेक्टर की भूमिका सीधे हुक्म चलाने की जगह तालमेल बैठाने की ज़्यादा है।

राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 10 के अनुसार राज्य सरकार किसी स्थानीय क्षेत्र को अधिसूचना से 'ब्लॉक' घोषित करती है और हर ब्लॉक के लिए एक पंचायत समिति होती है। धारा 2 में ब्लॉक का अर्थ उस क्षेत्र से है जिसमें पंचायत समिति का अधिकार चलता है। पंचायत समिति का कार्यकारी अधिकारी 'विकास अधिकारी' होता है, जिसे राज्य सरकार नियुक्त करती है (धारा 79)।

ज़िला परिषद का मुखिया निर्वाचित प्रमुख होता है, पर प्रशासनिक काम की कमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पास रहती है। धारा 82 के अनुसार भारतीय प्रशासनिक सेवा या राजस्थान प्रशासनिक सेवा का अधिकारी, या ग्रामीण विकास विभाग द्वारा विशेष रूप से चुना गया परियोजना निदेशक, CEO होता है और सरकार उसे नियुक्त करती है। सरकार प्रत्येक ज़िला परिषद के लिए मुख्य लेखा अधिकारी और मुख्य योजना अधिकारी भी नियुक्त करती है।

CEO की भूमिका को धारा 84 के आधार पर ऐसे समझें। वह ज़िला परिषद के निर्णयों और नीतियों को लागू करवाता है, परिषद के अधिकारियों-कर्मचारियों पर नियंत्रण रखता है (परिषद की समग्र निगरानी के अधीन), परिषद की बैठक में बिना मताधिकार के भाग लेता है और अगर कोई प्रस्ताव अधिनियम या क़ानून के विरुद्ध लगे तो उसे परिषद के ध्यान में लाना उसका कर्तव्य है। प्रमुख उस पर प्रशासनिक निगरानी रखता है और साल के अंत में उसके काम की रिपोर्ट पंचायती राज निदेशक को भेजता है (धारा 35)। यानी निर्वाचित नेतृत्व और स्थायी अधिकारी का संतुलन क़ानून में ही बैठाया गया है।

लाइन विभाग (line departments) वे विभाग हैं जिनका ढाँचा ऊपर राज्य सचिवालय से नीचे ज़िले तक सीधा चलता है, जैसे कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल, पशुपालन। इनके ज़िला अधिकारी तकनीकी रूप से अपने निदेशालय से जुड़े होते हैं, पर विकास के काम में उन्हें ज़िला परिषद, पंचायत समिति और कलेक्टर के तालमेल से चलना पड़ता है। धारा 82(3) राज्य सरकार को यह अधिकार देती है कि वह ज़िला परिषद में अपने अधिकारियों को ज़रूरत के अनुसार तैनात करे।

ज़िले के विकास-पदाधिकारी: कौन, किसका और क्या

पदकैसे बनता हैविकास में भूमिका
ज़िला परिषद प्रमुखनिर्वाचितज़िला परिषद की अध्यक्षता, CEO पर प्रशासनिक निगरानी; राजस्थान में ज़िला योजना समिति का अध्यक्ष (धारा 121)
ज़िला परिषद CEOIAS/RAS या चयनित परियोजना निदेशक; सरकार नियुक्त करती है (धारा 82)परिषद के निर्णय लागू करवाना, स्टाफ़ पर नियंत्रण, क़ानून-विरुद्ध प्रस्ताव पर चेताना (धारा 84)
मुख्य योजना अधिकारीसरकार नियुक्त करती है (धारा 82(2))ज़िला परिषद के लिए योजना-कार्य
विकास अधिकारी (ब्लॉक)राज्य सरकार नियुक्त करती है (धारा 79)पंचायत समिति का कार्यकारी अधिकारी; ब्लॉक स्तर की योजनाओं का क्रियान्वयन
ज़िला कलेक्टरभू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 20 के तहत नियुक्त; भू-अभिलेख अधिकारी भीराजस्व का मुखिया; VB-G RAM G अधिनियम 2025 (धारा 17) में ज़िला कार्यक्रम समन्वयक
तहसीलदारहर तहसील में सरकार नियुक्त करती है (भू-राजस्व अधिनियम, धारा 20)राजस्व और भू-अभिलेख की इकाई; ब्लॉक से अलग

ज़िले में विकास का तंत्र

ज़िला स्तर पर विकास प्रशासन

ज़िला कलेक्टर

  • राजस्व और भू-अभिलेख
  • विभागों में तालमेल
  • VB-G RAM G में ज़िला कार्यक्रम समन्वयक

ज़िला परिषद

  • प्रमुख (निर्वाचित)
  • CEO (IAS/RAS)
  • मुख्य योजना अधिकारी

पंचायत समिति (ब्लॉक)

  • प्रधान (निर्वाचित)
  • विकास अधिकारी
  • कार्यक्रम अधिकारी (PO)

ज़िला योजना समिति

  • अनुच्छेद 243ZD
  • पंचायत और नगरपालिका की योजनाओं का समेकन
  • प्रारूप विकास योजना

लाइन विभाग

  • कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल
  • निदेशालय से तकनीकी जुड़ाव
  • ज़िला स्तर पर समन्वय
कलेक्टर, निर्वाचित पंचायती राज संस्थाएँ और लाइन विभाग एक ही ज़िले में विकास का काम साझा करते हैं।

DRDA: जन्म से ज़िला परिषद में विलय तक

ज़िला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) कभी ज़िले में ग्रामीण ग़रीबी-उन्मूलन योजनाओं की मुख्य एजेंसी था। ग्रामीण विकास मंत्रालय की 2012 की समिति रिपोर्ट के अनुसार एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) 1978 में चुनिंदा ब्लॉकों में शुरू हुआ और 2 अक्टूबर 1980 को सभी ब्लॉकों में लागू किया गया; तभी DRDA पंजीकृत समितियों के रूप में बने। यानी एक अलग समिति सरकार के पैसे को ज़िले में खर्च करवाती थी, जिसमें पंचायतों की भूमिका सीमित थी।

73वें संशोधन के बाद यह ढाँचा खटकने लगा, क्योंकि ज़िला स्तर पर अब एक निर्वाचित ज़िला परिषद भी थी। 1995 के दिशानिर्देशों में कहा गया कि DRDA ज़िला परिषद की देखरेख, नियंत्रण और मार्गदर्शन में काम करे; ज़िला परिषद का अध्यक्ष DRDA की गवर्निंग बॉडी का पदेन अध्यक्ष हो और जहाँ ज़िला मजिस्ट्रेट पदेन न हो वहाँ ज़िला परिषद का CEO सदस्य-सचिव हो। इसके आगे का क़दम विलय था। समिति रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक में 1987 में और 73वें संशोधन के बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और केरल में DRDA को ज़िला परिषद में मिला दिया गया। द्वितीय ARC की 15वीं रिपोर्ट (2009) ने भी सिफ़ारिश की कि अन्य राज्य भी DRDA को ज़िला पंचायतों में मिलाएँ।

विलय का तर्क सीधा है: एक ही ज़िले में ग्रामीण विकास की दो समानांतर संस्थाएँ दोहराव और जवाबदेही की उलझन पैदा करती हैं (विश्लेषण)। राजस्थान में विलय की सटीक तिथि के लिए राज्य की अधिसूचना देखें; यहाँ तिथि नहीं दी गई है।

DRDA की समय-रेखा

  1. 1978

    IRDP चुनिंदा ब्लॉकों में शुरू

  2. 2 अक्टूबर 1980

    IRDP सभी ब्लॉकों में; DRDA पंजीकृत समितियों के रूप में

  3. 1987

    कर्नाटक में DRDA ज़िला परिषद में विलीन

  4. 1995

    दिशानिर्देश: DRDA ज़िला परिषद की देखरेख में, प्रमुख पदेन अध्यक्ष

  5. अप्रैल 2009

    द्वितीय ARC की 15वीं रिपोर्ट: अन्य राज्य भी DRDA का विलय करें

  6. जनवरी 2012

    ग्रामीण विकास मंत्रालय की DRDA पुनर्गठन समिति की रिपोर्ट; राजस्थान विलय वाले राज्यों में गिना गया

ज़िला योजना समिति (अनुच्छेद 243ZD)

मान लीजिए ज़िले की हर ग्राम पंचायत ने अपनी योजना बनाई और हर नगरपालिका ने अपनी। अगर कोई इन सबको जोड़कर पूरे ज़िले की एक तस्वीर न बनाए तो एक गाँव का तालाब पड़ोसी गाँव के नाले को सुखा सकता है या सड़क और पानी की पाइपलाइन अलग-अलग दिशाओं में चल सकती हैं। यही काम ज़िला योजना समिति (District Planning Committee, DPC) का है।

अनुच्छेद 243ZD के अनुसार हर राज्य में ज़िला स्तर पर एक ऐसी समिति बनेगी जो ज़िले की पंचायतों और नगरपालिकाओं की योजनाओं को एकत्र (consolidate) करके पूरे ज़िले की प्रारूप विकास योजना तैयार करे। समिति के कम से कम चार-पाँचवें सदस्य ज़िला स्तर की पंचायत और ज़िले की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों में से, ग्रामीण और शहरी आबादी के अनुपात में, चुने जाएँगे। योजना बनाते समय पंचायतों और नगरपालिकाओं के साझा हितों (स्थानिक नियोजन, जल व अन्य संसाधनों का बँटवारा, बुनियादी ढाँचा, पर्यावरण) और उपलब्ध संसाधनों का ध्यान रखना होता है तथा राज्यपाल द्वारा निर्दिष्ट संस्थाओं से सलाह ली जाती है। समिति का अध्यक्ष योजना राज्य सरकार को भेजता है।

संविधान बनाम राजस्थान का क़ानून: ज़िला योजना समिति

अनुच्छेद 243ZD

गठनराज्य में ज़िला स्तर पर समिति

कामपंचायतों-नगरपालिकाओं की योजनाओं का समेकन, ज़िले की प्रारूप विकास योजना

निर्वाचित सदस्यकम से कम चार-पाँचवें, ज़िला स्तर की पंचायत और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों में से

अध्यक्षराज्य का क़ानून तय करेगा

योजना का आगे का सफ़रअध्यक्ष योजना राज्य सरकार को भेजेगा

राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994, धारा 121

गठनसरकार हर ज़िले में समिति गठित करेगी

कामवही काम

निर्वाचित सदस्यकम से कम चार-पाँचवें, ज़िला परिषद और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों में से

अध्यक्षज़िला परिषद का प्रमुख

योजना का आगे का सफ़रअध्यक्ष योजना सरकार को भेजेगा

राजस्थान की धारा 121 का पाठ PRS द्वारा प्रकाशित अधिनियम (2021 तक के संशोधन) से है; अधिकृत पाठ के लिए राज-पत्र देखें।

प्रमुख कार्यक्रम: एक नज़र

ज़िले में विकास की रोज़मर्रा की तस्वीर इन्हीं कार्यक्रमों से बनती है: रोज़गार के लिए ग्रामीण रोज़गार गारंटी, घर के लिए ग्रामीण आवास योजना और आमदनी के लिए आजीविका मिशन। आँकड़े लिखते समय हमेशा वर्ष या तारीख़ साथ लिखिए; ये हर महीने बदलते हैं।

MGNREGA अब निरसित है: नोट्स में यह बदलाव दिखाइए

MGNREGA 2005 के तहत 1 जुलाई 2026 से VB-G RAM G अधिनियम 2025 लागू है और पुराना अधिनियम निरसित (repealed) है (PIB, 11 मई 2026)। संसद ने विधेयक 18 दिसंबर 2025 को पारित किया (PRS) और राष्ट्रपति की स्वीकृति दिसंबर 2025 में मिली (PIB)। सिलेबस या पुरानी किताबों में 'MGNREGA' लिखा मिले तो उसका इतिहास और उपलब्धि लिखिए और अंत में एक पंक्ति में नए अधिनियम का उल्लेख कर दीजिए (विश्लेषण: ऐसा उत्तर अद्यतन भी दिखता है और सिलेबस के शब्दों से भी मेल खाता है)।

तीन प्रमुख कार्यक्रम: आधिकारिक तथ्य और आँकड़े (वर्ष सहित)

कार्यक्रमशुरुआत और मूल प्रावधानआधिकारिक आँकड़ा (वर्ष/तिथि सहित)ज़िला स्तर पर
रोज़गार गारंटी: MGNREGA 2005, अब VB-G RAM G 2025MGNREGA: फ़रवरी 2006 से पहले चरण में 200 ज़िलों में, अप्रैल 2008 तक सभी ग्रामीण ज़िलों में; 100 दिन की गारंटी। VB-G RAM G: 1 जुलाई 2026 से, 125 दिन की गारंटीVB-G RAM G: 2026-27 के बजट अनुमान में केंद्र का हिस्सा 95,692.31 करोड़ रुपये; कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित (PIB, 11-05-2026)कलेक्टर या समकक्ष अधिकारी ज़िला कार्यक्रम समन्वयक (धारा 17); ब्लॉक पर कार्यक्रम अधिकारी, पद BDO से नीचे का नहीं (धारा 18)
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G)20 नवंबर 2016 से। 9 अगस्त 2024 को कैबिनेट ने 2024-25 से 2028-29 के लिए 2 करोड़ अतिरिक्त मकानों को मंज़ूरी दी; इकाई सहायता मैदानी क्षेत्रों में 1.20 लाख रुपये9 दिसंबर 2025 तक 3.86 करोड़ मकान स्वीकृत और 2.92 करोड़ पूर्ण (PIB ईयर एंडर 2025)क्रियान्वयन-ढाँचा राज्य की व्यवस्था पर निर्भर
DAY-NRLM (आजीविका मिशन)जून 2011 से, केंद्र प्रायोजित; महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के ज़रिए आजीविका30 नवंबर 2025 तक 90.90 लाख SHG और 10.05 करोड़ महिलाएँ संगठित; 2 करोड़ से अधिक लखपति दीदी (PIB ईयर एंडर 2025)राजस्थान में राजीविका (RGAVP) के माध्यम से (नीचे राजस्थान का पहलू देखें)

MGNREGA बनाम VB-G RAM G: वही और नया

MGNREGA 2005

रोज़गार की गारंटीप्रति ग्रामीण परिवार वित्त वर्ष में कम से कम 100 दिन

मज़दूरी भुगतानसाप्ताहिक आधार पर या काम के बाद अधिकतम पखवाड़े में

बेरोज़गारी भत्ताआवेदन के 15 दिन में काम न मिले तो भत्ता

योजना बनाने का तरीक़ाग्राम सभा कामों की प्राथमिकता तय करती है

कृषि-व्यस्तता का विरामकोई प्रावधान स्रोतों में उल्लिखित नहीं

प्रशासनिक व्यय की सीमास्रोतों में उल्लिखित नहीं

VB-G RAM G अधिनियम 2025

रोज़गार की गारंटीकम से कम 125 दिन (धारा 5)

मज़दूरी भुगतानवही मानक: साप्ताहिक या पखवाड़े के भीतर (धारा 5); देरी पर 16वें दिन के बाद प्रति दिन अवैतनिक मज़दूरी का 0.05 प्रतिशत मुआवज़ा (PIB नोट)

बेरोज़गारी भत्ताआवेदन के 15 दिन में काम न मिले तो पहले 30 दिन मज़दूरी दर का एक-चौथाई, फिर आधा (धारा 11)

योजना बनाने का तरीक़ाग्राम सभा से स्वीकृत 'विकसित ग्राम पंचायत योजना', जो ब्लॉक और ज़िला स्तर पर समेकित होती है

कृषि-व्यस्तता का विरामराज्य कुल 60 दिन तक का विराम-काल घोषित कर सकते हैं (धारा 6)

प्रशासनिक व्यय की सीमा6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत (PIB)

योजना से भुगतान तक का प्रवाह

  1. ग्राम सभा

    प्राथमिकता तय

  2. ग्राम पंचायत योजना

    विकसित ग्राम पंचायत योजना

  3. ब्लॉक और ज़िला

    समेकन; कार्यक्रम अधिकारी और ज़िला समन्वयक

  4. माँग और पंजीकरण

    जॉब कार्ड, फ़ॉर्म-6

  5. कार्यस्थल

    NMMS, चेहरे से हाज़िरी

  6. मस्टर रोल बंद

    भुगतान की गिनती (PIB नोट)

  7. DBT भुगतान

    साप्ताहिक या 15 दिन में

  8. अंकेक्षण

    सामाजिक अंकेक्षण, जनता-बोर्ड

राज्य की योजना में अंतिम ढाँचा अधिसूचित होना है।

मुख्य तथ्य

DRDA का गठन
2 अक्टूबर 1980 (IRDP सभी ब्लॉकों में); IRDP की शुरुआत 1978
DRDA पर 1995 के दिशानिर्देश
DRDA ज़िला परिषद की देखरेख में; प्रमुख पदेन अध्यक्ष
राजस्थान सहित राज्यों में DRDA का ज़िला परिषद में विलय
73वें संशोधन के बाद (समिति रिपोर्ट, जनवरी 2012)
द्वितीय ARC की DRDA-विलय सिफ़ारिश
15वीं रिपोर्ट, अप्रैल 2009
ज़िला योजना समिति
अनुच्छेद 243ZD; राजस्थान में पंचायती राज अधिनियम 1994, धारा 121
ज़िला परिषद के CEO
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994, धारा 82 (नियुक्ति) और 84 (कार्य)
संविधान के 11वीं अनुसूची के विषय
29 विषय (73वाँ संशोधन, 1992)
MGNREGA का पहला चरण
फ़रवरी 2006, 200 ज़िले; अप्रैल 2008 तक सभी ग्रामीण ज़िले
VB-G RAM G अधिनियम लागू
1 जुलाई 2026; 125 दिन की गारंटी; विधेयक 18-12-2025 को पारित
PMAY-G (9 दिसंबर 2025 तक)
3.86 करोड़ स्वीकृत, 2.92 करोड़ पूर्ण
DAY-NRLM (30 नवंबर 2025 तक)
90.90 लाख SHG; 10.05 करोड़ महिलाएँ
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान की शुरुआत
27 जनवरी 2016
अंतिम जाँच
सभी लिंक और आँकड़े 01-10-2026 को जाँचे गए; योजनाओं के आँकड़े बदलते रहते हैं।

राजस्थान का पहलू

राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (PRS पर उपलब्ध पाठ, 2021 तक के संशोधन) में: ब्लॉक पर पंचायत समिति और राज्य सरकार द्वारा नियुक्त विकास अधिकारी (धारा 10, 79); ज़िला परिषद का CEO IAS/RAS अधिकारी या ग्रामीण विकास विभाग द्वारा चयनित परियोजना निदेशक (धारा 82) तथा उसके कार्य (धारा 84); ज़िला योजना समिति में कम से कम चार-पाँचवें निर्वाचित सदस्य और अध्यक्ष ज़िला परिषद प्रमुख (धारा 121)। राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 20 में कलेक्टर ही ज़िले का भू-अभिलेख अधिकारी है और हर तहसील में तहसीलदार नियुक्त होता है। DRDA के बारे में ग्रामीण विकास मंत्रालय की 2012 की समिति रिपोर्ट राजस्थान को उन राज्यों में गिनती है जहाँ DRDA ज़िला परिषद में मिलाए गए। आजीविका के लिए राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका, RGAVP) अक्तूबर 2010 में बनी और राजस्थान में NRLM का क्रियान्वयन अप्रैल 2013 से शुरू हुआ; दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार यह 41 ज़िलों, 352 ब्लॉकों, 11,339 ग्राम पंचायतों और 38,452 गाँवों में है, जिसमें 4,29,525 स्वयं सहायता समूह और लगभग 51.01 लाख महिलाएँ जुड़ी हैं। PIB (22 जुलाई 2025) के अनुसार राजस्थान में 4,27,865 लखपति दीदी हैं। ज़िलों और ब्लॉकों की संख्या सरकारी अधिसूचना से बदल सकती है; परीक्षा से पहले ताज़ा सूची देखें।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • विकास प्रशासन को 'सिर्फ़ योजनाएँ चलाना' लिख देना। रिग्स के अनुसार इसके दो हिस्से हैं: विकास का प्रशासन और प्रशासन का विकास। दूसरा हिस्सा छूटने पर उत्तर अधूरा रहता है।
  • तालिका में सब कुछ काला-सफ़ेद लिखना। अंतर प्रवृत्ति का है; कलेक्टर का एक ही दफ़्तर नियामकीय और विकास, दोनों काम करता है।
  • आँकड़े बिना वर्ष के लिखना। 'PMAY-G में 3.86 करोड़ मकान स्वीकृत' लिखना ग़लत नहीं, पर 9 दिसंबर 2025 की स्थिति लिखे बिना अधूरा है।
  • MGNREGA को अब भी चालू बताना। 1 जुलाई 2026 से VB-G RAM G अधिनियम लागू है; पुराने अधिनियम की गारंटी (100 दिन) और नए की (125 दिन) अलग-अलग लिखें।
  • संविधान और राजस्थान के क़ानून का घालमेल। अनुच्छेद 243ZD में अध्यक्ष का चयन राज्य के क़ानून पर छोड़ा गया है; राजस्थान की धारा 121 में अध्यक्ष ज़िला परिषद प्रमुख है।
  • ब्लॉक और तहसील को एक मान लेना। ब्लॉक पंचायत समिति का विकास-क्षेत्र है, तहसील राजस्व-प्रशासन की इकाई।