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पेपर III · इकाई II

ज़िला राजस्व प्रशासन: संभाग, ज़िला, उपखंड, तहसील और पटवार मंडल

राजस्व प्रशासन की सीढ़ी (संभाग, ज़िला, उपखंड, तहसील, पटवार मंडल), तहसील को लघु ज़िला क्यों कहते हैं और ब्लॉक से तहसील का अंतर, भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराओं के साथ।

  • राजस्व प्रशासन
  • तहसील
  • ब्लॉक बनाम तहसील
  • पटवार मंडल
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II, 'State and District Administration': "District: District Collector, law and order administration, revenue administration, development administration." इस पृष्ठ पर राजस्व प्रशासन है; कलेक्टर, कानून-व्यवस्था, राजस्व मंडल और विकास प्रशासन के अलग पृष्ठ हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • इसी विषय के दो प्रश्न संकलित पेपरों में आए: 2016 में "तहसील को प्रायः लघु ज़िला क्यों कहा जाता है?" (5 अंक) और 2024 में "ब्लॉक और तहसील में अंतर" (2 अंक)। छह संकलित पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में से दो में यह विषय मिला, यानी 2013-2024 के पेपरों में देखा गया रुझान हर तीसरे पेपर का है।
  • दोनों प्रश्न "क्यों" और "अंतर" वाले हैं, रटने वाले नहीं। जो उम्मीदवार तहसील, उपखंड और ज़िले का ढाँचा क़ानून की धारा के साथ लिखता है, उसका उत्तर बाक़ियों से अलग दिखता है।
  • यह पृष्ठ राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की नींव भी है। इसी अधिनियम से पूछे गए नामांतरण, अधिकार-अभिलेख और नज़ूल भूमि जैसे प्रश्न (विधि इकाई) इसी ढाँचे पर टिके हैं।

पहले सरल भाषा में: एक किसान की फ़ाइल की यात्रा

मान लीजिए गाँव के किसान रामलाल को अपने खेत की जमाबंदी की नकल चाहिए और पड़ोसी से मेड़ का झगड़ा भी चल रहा है। (यह समझाने के लिए गढ़ा गया उदाहरण है।) वह पहले गाँव के पटवारी के पास जाता है, जो खेतों का हिसाब-किताब रखता है। पटवारी के रजिस्टर की निगरानी गिरदावर करता है। झगड़ा बड़ा हो तो मामला तहसीलदार के सामने जाता है, और उसके फ़ैसले से असंतोष हो तो आगे अपील का रास्ता क़ानून में तय है। यानी ज़मीन से जुड़े तीन काम, रिकॉर्ड, वसूली और विवाद, नीचे से ऊपर एक सीढ़ी पर चलते हैं। इसी सीढ़ी को राजस्व प्रशासन (revenue administration) कहते हैं।

परीक्षा के लिए कार्यकारी परिभाषा (विश्लेषण; अधिनियम की धाराओं से निकाली गई): राजस्व प्रशासन वह तंत्र है जो (क) हर गाँव के भूमि-अभिलेख बनाकर अद्यतन रखता है, (ख) भू-राजस्व, किराया और अन्य सरकारी माँगें वसूल करवाता है, और (ग) भूमि-संबंधी वादों का न्यायिक निपटारा करता है। भू-राजस्व अधिनियम की धारा 31 पटवारी का काम वार्षिक रजिस्टर व अभिलेख रखना तथा किराया, राजस्व और अन्य माँगें वसूलना बताती है, और धारा 23 राजस्व के न्यायिक और गैर-न्यायिक मामलों का नियंत्रण बाँटती है। तीनों काम इसी परिभाषा में आ जाते हैं।

इकाइयों की सीढ़ी: क़ानून क्या कहता है

राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 15 पूरी रूपरेखा देती है। राज्य राजस्व और सामान्य प्रशासन के लिए उतने संभाग (division) और ज़िले (district) बनाएगा जितने राज्य सरकार उचित समझे। संभाग या तो एक ज़िला होगा या कई ज़िलों से मिलकर बनेगा। ज़िले को उपखंडों (sub-divisions) में बाँटा जा सकता है और हर उपखंड में एक या अधिक तहसीलें होंगी। तहसील को उप-तहसीलों में बाँटा जा सकता है। सबकी सीमाएँ राज्य सरकार तय करती है और राजपत्र में अधिसूचित करती है; धारा 16 के अनुसार सरकार अधिसूचना से इन इकाइयों को बना सकती है, ख़त्म कर सकती है या उनकी सीमा बदल सकती है।

इसका सीधा परिणाम यह है कि संभागों, ज़िलों और तहसीलों की संख्या स्थायी तथ्य नहीं है। उत्तर में संख्या लिखनी हो तो राजपत्र की तारीख़ वाली अधिसूचना या राज्य सरकार की वेबसाइट देखें और स्रोत-वर्ष साथ लिखें।

अब अधिकारी। धारा 17 के अनुसार राज्य सरकार हर संभाग में एक आयुक्त (Commissioner) नियुक्त करती है। धारा 20 के अनुसार हर ज़िले में एक कलेक्टर होगा, जो उसी ज़िले का भू-अभिलेख अधिकारी (Land Records Officer) भी होगा, और हर तहसील में एक तहसीलदार। उपखंड का प्रभार सहायक कलेक्टर के पास रहता है, जिसे धारा 24 और 25 में उपखंड अधिकारी (Sub-Divisional Officer, SDO) कहा गया है। उप-तहसील का प्रभार तहसीलदार या नायब तहसीलदार को दिया जाता है। राज्य स्तर पर बंदोबस्त आयुक्त (धारा 18) और भू-अभिलेख निदेशक (धारा 19) होते हैं, और सबसे ऊपर राजस्व मंडल (अलग पृष्ठ पर)।

ऊपर-नीचे का रिश्ता धारा 24 से तय होता है। संभाग के सभी कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, SDO, सहायक कलेक्टर, तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार आयुक्त के अधीन हैं। ज़िले के अतिरिक्त कलेक्टर, SDO, सहायक कलेक्टर और तहसीलदार आदि कलेक्टर के अधीन हैं। उपखंड के तहसीलदार आदि SDO के अधीन हैं, और तहसील के अतिरिक्त तहसीलदार व नायब तहसीलदार तहसीलदार के अधीन। (यह धारा 24 के पहले चार उपखंडों का सार है; बंदोबस्त और भू-अभिलेख से जुड़ी अधीनता उसी धारा में अलग से दी गई है।)

राजस्व प्रशासन की सीढ़ी (भू-राजस्व अधिनियम, 1956)

इकाईप्रमुख अधिकारीधाराध्यान देने की बात
राज्यराजस्व मंडल (अध्यक्ष और सदस्य); बंदोबस्त आयुक्त; भू-अभिलेख निदेशक4, 18, 19, 25(2)-(3)निदेशक पूरे राज्य में सर्वेक्षण और भू-अभिलेख के रखरखाव का प्रभारी है
संभाग (Division)संभागीय आयुक्त; अतिरिक्त आयुक्त15(1)-(2), 17, 24संभाग एक ज़िला भी हो सकता है और कई ज़िले मिलकर भी
ज़िला (District)कलेक्टर, जो भू-अभिलेख अधिकारी भी है; अतिरिक्त कलेक्टर; सहायक कलेक्टर15(1), 20, 24कलेक्टर के पास उपखंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की शक्तियाँ भी समाई हैं (धारा 27)
उपखंड (Sub-division)उपखंड अधिकारी (सहायक कलेक्टर)15(3), 20, 24(3)एक उपखंड में एक या अधिक तहसीलें
तहसील (Tehsil)तहसीलदार; अतिरिक्त तहसीलदार; नायब तहसीलदार15(3), 20, 24(4)तहसीलदार अपने क्षेत्र में अपनी शक्तियों का प्रयोग करता है (धारा 25(1))
उप-तहसीलतहसीलदार या नायब तहसीलदार15(4), 20तहसील को बाँटकर राज्य सरकार बनाती है
भू-अभिलेख निरीक्षण मंडलगिरदावर कानूनगो (भू-अभिलेख निरीक्षक)32, 33कई पटवार मंडलों को मिलाकर; कलेक्टर नियुक्त करता है
पटवार मंडल (Patwar circle)पटवारी30, 31ज़िले के गाँवों को निदेशक पटवार मंडलों में बाँटता है; कलेक्टर पटवारी नियुक्त करता है
ज़िले में पर्यवेक्षणसदर कानूनगो34गिरदावरों और पटवारियों के काम की निगरानी

संभाग, ज़िला और तहसील की संख्या राजपत्र अधिसूचना पर निर्भर है।

ऊपर से नीचे: राजस्व प्रशासन की सीढ़ी

  1. राज्य

    राजस्व मंडल, बंदोबस्त आयुक्त, भू-अभिलेख निदेशक

  2. संभाग

    आयुक्त (धारा 17)

  3. ज़िला

    कलेक्टर और भू-अभिलेख अधिकारी (धारा 20)

  4. उपखंड

    उपखंड अधिकारी, यानी सहायक कलेक्टर

  5. तहसील

    तहसीलदार; उप-तहसील पर नायब तहसीलदार

  6. भू-अभिलेख निरीक्षण मंडल

    गिरदावर कानूनगो (धारा 32-33)

  7. पटवार मंडल

    पटवारी: रजिस्टर और वसूली (धारा 30-31)

हर पायदान ऊपर वाले के अधीन है (धारा 24); अपील नीचे से ऊपर इसी क्रम में चलती है।

ज़मीनी मशीनरी: पटवार मंडल, गिरदावर और सदर कानूनगो

भू-अभिलेख की बुनियाद पटवारी है। धारा 30 के अनुसार भू-अभिलेख निदेशक, राज्य सरकार की पूर्व मंज़ूरी से, ज़िले के गाँवों को पटवार मंडलों में बाँटता है और मंडलों की संख्या व सीमा बदल सकता है। धारा 31 के अनुसार कलेक्टर, नियमों के अधीन, हर मंडल में एक पटवारी नियुक्त करता है। उसका काम है वार्षिक रजिस्टरों और अभिलेखों का रखरखाव व सुधार, तथा मंडल के भू-धारकों और काश्तकारों से किराया, राजस्व और अन्य माँगों की वसूली। धारा 36 कहती है कि जिस व्यक्ति के अधिकार या दायित्व किसी सरकारी रजिस्टर में दर्ज होने हैं, उसे सही रिकॉर्ड बनाने के लिए माँगी गई सारी जानकारी देनी होगी।

पटवारियों का काम जाँचने की व्यवस्था भी क़ानून में है। धारा 32 के अनुसार निदेशक कई पटवार मंडलों को मिलाकर भू-अभिलेख निरीक्षण मंडल बनाता है; धारा 33 के अनुसार कलेक्टर हर निरीक्षण मंडल में एक गिरदावर कानूनगो (भू-अभिलेख निरीक्षक) नियुक्त करता है; और धारा 34 के अनुसार निदेशक हर ज़िले में एक या अधिक सदर कानूनगो नियुक्त करता है, जो गिरदावरों और पटवारियों के काम का पर्यवेक्षण करते हैं। इस प्रकार तीन परतें बनती हैं: लिखने वाला (पटवारी), जाँचने वाला (गिरदावर) और निगरानी करने वाला (सदर कानूनगो)।

एक भेद पर ध्यान दें: पटवार मंडल और पंचायत मंडल (panchayat circle) एक नहीं हैं। अधिनियम की धारा 3 'पंचायत सर्किल' का अर्थ पंचायत क़ानून से लेती है, जबकि पटवार मंडल राजस्व-अभिलेख की इकाई है और निदेशक उसे गाँवों को मिलाकर बनाता है। विश्लेषण: व्यवहार में दोनों की सीमाएँ अलग हो सकती हैं, इसलिए उत्तर में दोनों को एक न लिखें।

तहसील को "लघु ज़िला" क्यों कहा जाता है (2016 का प्रश्न)

ज़िले को एक बड़ा घर और तहसील को उसी नक़्शे पर बना छोटा घर समझिए: वही कमरे, वही ढाँचा, बस पैमाना छोटा। "लघु ज़िला" (miniature district) शब्द क़ानून की भाषा नहीं है, यह प्रशासन और परीक्षा में प्रचलित उपमा है (विश्लेषण)। नीचे की तालिका में हर समानता को अधिनियम की धारा से जोड़ा गया है, ताकि उत्तर में केवल दावा नहीं, आधार भी दिखे।

कलेक्टर और तहसीलदार: समानता का नक़्शा

पहलूज़िलातहसीलआधार
क्षेत्र का मुख्य अधिकारीकलेक्टरतहसीलदारधारा 20: हर ज़िले में कलेक्टर, हर तहसील में तहसीलदार
अपने क्षेत्र में शक्ति का प्रयोगकलेक्टर अपने ज़िले में सारी शक्तियाँ और कर्तव्य निभाता हैतहसीलदार अपनी तहसील में वही करता हैधारा 25(1)
अधीनस्थ अमलाअतिरिक्त कलेक्टर, SDO, सहायक कलेक्टर, तहसीलदार आदि कलेक्टर के अधीनअतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार तहसीलदार के अधीनधारा 24(2), 24(4)
शक्तियों का समावेशकलेक्टर में उपखंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की शक्तियाँतहसीलदार में नायब तहसीलदार की शक्तियाँधारा 27(ख), 27(ङ)
पद स्थायी रूप से ख़ाली होने परअस्थायी उत्तराधिकारी ज़िले का मुख्य कार्यपालक प्रशासन सँभालता हैतहसील के लिए भी यही व्यवस्थाधारा 28 (संभाग, ज़िला, उपखंड और तहसील चारों के लिए एक-सा पाठ)
ज़मीनी अभिलेख और वसूलीकलेक्टर पटवारी और गिरदावर नियुक्त करता हैपटवार मंडल व्यवहार में तहसील के गाँवों से बनते हैं (विश्लेषण)धारा 31, 33
अपीलकलेक्टर के मूल आदेश की अपील राजस्व अपील अधिकारी के पासतहसीलदार के मूल आदेश (बंदोबस्त और भू-अभिलेख से असंबंधित) की अपील कलेक्टर के पासधारा 75(क), 75(ख)

निष्कर्ष: तहसीलदार अपने क्षेत्र में वही भूमिकाएँ निभाता है जो कलेक्टर ज़िले में, इसलिए तहसील "लघु ज़िला" है। पर शक्तियों का समावेश एकतरफ़ा है: कलेक्टर में तहसीलदार समाया है, तहसीलदार में कलेक्टर नहीं।

ब्लॉक और तहसील: एक-सी दिखती, पर अलग इकाइयाँ (2024 का प्रश्न)

आम बोलचाल में कई लोग ब्लॉक और तहसील को एक मान लेते हैं, पर दोनों के पीछे अलग क़ानून, अलग अधिकारी और अलग उद्देश्य हैं। तहसील राजस्व प्रशासन की इकाई है: भू-राजस्व अधिनियम की धारा 15(3)-(4) के तहत राज्य सरकार ज़िले को उपखंडों और तहसीलों में बाँटती है, और हर तहसील का मुखिया तहसीलदार है। ब्लॉक विकास और पंचायती राज की इकाई है। राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 2(1)(ii) कहती है कि "ब्लॉक" का अर्थ वह स्थानीय क्षेत्र है जिस पर पंचायत समिति का क्षेत्राधिकार है, और धारा 10 के अनुसार राज्य सरकार अधिसूचना से ज़िले के भीतर किसी स्थानीय क्षेत्र को ब्लॉक घोषित करती है और हर ब्लॉक के लिए एक पंचायत समिति होती है।

ब्लॉक के प्रशासनिक अमले में राज्य सरकार हर पंचायत समिति के लिए एक विकास अधिकारी नियुक्त करती है (धारा 79), जो प्रतिनियुक्ति पर समिति के पास रहता है और राज्य सरकार द्वारा स्थानांतरण-योग्य है। पंचायत समिति के कार्य अधिनियम की दूसरी अनुसूची में हैं (धारा 51)। इसके ऊपर ज़िला परिषद है, जिसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राज्य सरकार नियुक्त करती है (धारा 82)। विश्लेषण: इसीलिए ज़िले के नीचे दो समानांतर सीढ़ियाँ चलती हैं: एक राजस्व की (उपखंड, तहसील, पटवार मंडल) और एक विकास की (पंचायत समिति और उसके नीचे ग्राम पंचायतें)। दोनों की सीमाएँ मिलना ज़रूरी नहीं, क्योंकि पंचायत समिति का क्षेत्र नगरपालिका या छावनी बोर्ड में आने वाले हिस्से को छोड़ देता है (धारा 10(1))।

ब्लॉक बनाम तहसील (2024 का प्रश्न)

तहसील

प्रकृतिराजस्व प्रशासन की इकाई

क़ानूनी आधारराजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956, धारा 15 और 16

किसके अधीनउपखंड, फिर ज़िला; कलेक्टर तक राजस्व की श्रृंखला

प्रमुखतहसीलदार (नियुक्त अधिकारी)

निर्वाचित निकायनहीं

मुख्य कामभू-अभिलेख, राजस्व वसूली, राजस्व वादों का निपटारा

अधिकारी का स्वरूपराजस्व-अधिकारी, न्यायिक शक्तियों सहित

सीमा तय करने वालाराज्य सरकार, राजपत्र अधिसूचना (धारा 15(6), 16)

ब्लॉक

प्रकृतिविकास और पंचायती राज की इकाई

क़ानूनी आधारराजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994, धारा 2(1)(ii) और 10

किसके अधीनज़िले के भीतर पंचायत समिति; ऊपर ज़िला परिषद

प्रमुखपंचायत समिति का प्रधान (जनप्रतिनिधि) और विकास अधिकारी (नियुक्त अधिकारी)

निर्वाचित निकायहाँ, पंचायत समिति

मुख्य कामअनुसूची में दिए विकास-कार्य, ग्राम पंचायतों से तालमेल

अधिकारी का स्वरूपविकास अधिकारी, राज्य सरकार का प्रतिनियुक्त अधिकारी

सीमा तय करने वालाराज्य सरकार, राजपत्र अधिसूचना (धारा 10(1))

'मुख्य काम' की पंक्ति में तहसील का हिस्सा धारा 31 और 23 पर तथा ब्लॉक का हिस्सा धारा 51 पर आधारित है।

एक नज़र में: राजस्व प्रशासन

राजस्व प्रशासन

तीन काम

  • भू-अभिलेख
  • राजस्व वसूली
  • राजस्व वादों का निपटारा

इकाइयाँ (धारा 15)

  • संभाग: आयुक्त
  • ज़िला: कलेक्टर
  • उपखंड: SDO
  • तहसील: तहसीलदार
  • उप-तहसील

ज़मीनी अमला

  • पटवारी (धारा 31)
  • गिरदावर कानूनगो (धारा 33)
  • सदर कानूनगो (धारा 34)

लघु ज़िला

  • अपने क्षेत्र का मुखिया
  • अधीनस्थ अमला
  • शक्तियों का समावेश (धारा 27)
  • अपील ऊपर (धारा 75)

ब्लॉक बनाम तहसील

  • तहसील: राजस्व
  • ब्लॉक: विकास, पंचायत समिति
  • अलग क़ानून, अलग अधिकारी

मुख्य तथ्य

राजस्व और सामान्य प्रशासन की इकाइयाँ
संभाग, ज़िले, उपखंड, तहसीलें और उप-तहसीलें; सीमाएँ राज्य सरकार तय करती है और राजपत्र में अधिसूचित (धारा 15)
इकाइयों को बनाने, मिटाने या बदलने की शक्ति
राज्य सरकार, राजपत्र अधिसूचना से (धारा 16)
संभाग का अधिकारी
आयुक्त, हर संभाग में (धारा 17)
ज़िले और तहसील के अधिकारी
कलेक्टर (साथ में भू-अभिलेख अधिकारी) और तहसीलदार (धारा 20)
अधीनता
तहसील के अमले तहसीलदार के, तहसीलदार SDO के, SDO आदि कलेक्टर के, और कलेक्टर आदि आयुक्त के अधीन (धारा 24)
शक्तियों का समावेश
कलेक्टर में SDO, सहायक कलेक्टर, तहसीलदार की शक्तियाँ; तहसीलदार में नायब तहसीलदार की (धारा 27)
पटवार मंडल, पटवारी, गिरदावर, सदर कानूनगो
धाराएँ 30, 31, 33, 34
पहली और दूसरी अपील
तहसीलदार के आदेश की अपील कलेक्टर को; कलेक्टर, SDO व सहायक कलेक्टर के आदेश की अपील राजस्व अपील अधिकारी को (धारा 75)
अपील की समय-सीमा
कलेक्टर, भू-अभिलेख अधिकारी, बंदोबस्त अधिकारी को 30 दिन; राजस्व अपील अधिकारी, बंदोबस्त आयुक्त, भू-अभिलेख निदेशक को 60 दिन; राजस्व मंडल को 90 दिन (धारा 78)
ब्लॉक की परिभाषा और गठन
पंचायत समिति के क्षेत्राधिकार का क्षेत्र; राज्य सरकार अधिसूचना से घोषित (पंचायती राज अधिनियम, 1994, धारा 2(1)(ii) और 10)
पंचायत समिति का विकास अधिकारी
राज्य सरकार नियुक्त करती है (धारा 79)
अंतिम जाँच
1 अक्टूबर 2026 (धाराएँ दो प्रतियों से मिलाई गईं)

राजस्थान का पहलू

राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 पूरे राजस्थान पर लागू है (धारा 1(2)), और राजस्व मंडल का मुख्यालय अजमेर में है (धारा 6)। राज्य के संभागों, ज़िलों और तहसीलों की वर्तमान संख्या राज्य सरकार की राजपत्र अधिसूचना (धारा 15(6)) से तय होती है। (अधिनियम का पाठ PRS और Indian Kanoon की प्रतियों से, तथा राजस्व मंडल अध्यक्ष का संबोधन राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग की वेबसाइट से, 1 अक्टूबर 2026 को मिलाया गया।)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • तहसील और ब्लॉक को एक बताना: तहसील राजस्व की इकाई (भू-राजस्व अधिनियम) है और ब्लॉक विकास की इकाई (पंचायती राज अधिनियम, पंचायत समिति)।
  • "लघु ज़िला" को क़ानूनी शब्द लिख देना: यह अधिनियम में कहीं नहीं है, यह उपमा है। इसे "प्रचलित उपमा" लिखकर कारण गिनाएँ।
  • उलटी शक्ति-रेखा लिखना: कलेक्टर में तहसीलदार की शक्तियाँ समाई हैं (धारा 27), तहसीलदार में कलेक्टर की नहीं।
  • पटवार मंडल और पंचायत मंडल को मिला देना: दोनों अलग इकाइयाँ हैं, एक राजस्व-अभिलेख की और एक पंचायत की।
  • ज़िलों, संभागों या तहसीलों की पुरानी गिनती लिख देना: संख्या अधिसूचना से बदलती है, इसलिए वर्ष-सहित स्रोत के बिना न लिखें।
  • अपील की सीमा में गड़बड़ी: 30 दिन (कलेक्टर आदि), 60 दिन (राजस्व अपील अधिकारी आदि), 90 दिन (राजस्व मंडल), धारा 78।