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पेपर III · इकाई II

राजस्थान राजस्व मंडल (Board of Revenue), अजमेर

राजस्थान राजस्व मंडल का गठन, मुख्यालय अजमेर, अपील-पुनरीक्षण-संदर्भ की शक्तियाँ, राजस्व अपील की सीढ़ी और न्यायिक-गैर-न्यायिक नियंत्रण, भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराओं के साथ (अभ्यास-आधारित पृष्ठ)।

  • राजस्व मंडल
  • अजमेर
  • अपील और पुनरीक्षण
  • धारा 8
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II, 'State and District Administration': "State: Governor, Chief Minister, Council of Ministers, State Secretariat, Chief Secretary, role of Directorates, police administration, Revenue Board, State Election Commission, State Human Rights Commission, Lokayukta." इस पृष्ठ पर राजस्व मंडल (Revenue Board) है; ज़िला-स्तर का ढाँचा राजस्व प्रशासन के पृष्ठ पर है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013, 2016, 2018, 2021, 2023 और 2024 के पेपरों में राजस्व मंडल पर कोई सीधा प्रश्न नहीं पूछा गया (2013-2024 के पेपरों में देखा गया)। फिर भी सिलेबस में इसका नाम सीधे लिखा है, इसलिए यह पृष्ठ अभ्यास-आधारित है: तथ्य पक्के करें और उत्तर-ढाँचा तैयार रखें।
  • इसी अधिनियम से पूछे गए नामांतरण (2024), अधिकार-अभिलेख (2021) और वार्षिक रजिस्टर (2018) जैसे प्रश्न राजस्व अपील-सीढ़ी के बिना अधूरे हैं, और उस सीढ़ी का शिखर राजस्व मंडल है।
  • तथ्य-आधारित 2 अंक के प्रश्न की संभावना वाले पक्के बिंदु (विश्लेषण): मुख्यालय अजमेर (धारा 6), सदस्य राज्यपाल की प्रसन्नता तक (धारा 5), मंडल में अपील की सीमा 90 दिन (धारा 78), मंडल सर्वोच्च राजस्व अपील-पुनरीक्षण-संदर्भ न्यायालय (धारा 8)।

पहले सरल भाषा में: ज़मीन के झगड़ों की आख़िरी सीढ़ी

दीवानी मामलों में जैसे ज़िला अदालत के ऊपर उच्च न्यायालय होता है, वैसे ही ज़मीन के राजस्व-झगड़ों में तहसील और ज़िले की सीढ़ियों के ऊपर राजस्व मंडल (Board of Revenue) है। एक फ़र्क़ ज़रूर है: यह सरकार के प्रशासनिक ढाँचे का भी हिस्सा है, यानी एक ही संस्था अदालत भी है और राजस्व-प्रशासन की सर्वोच्च नियंत्रक भी। राजस्व मंडल के अध्यक्ष के राजस्थान सरकार की वेबसाइट पर प्रकाशित एक संबोधन (2018) में इसे राजस्व मामलों का "मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी" (Chief Controlling Revenue Authority) कहा गया है।

परीक्षा-योग्य परिभाषा: राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 के अध्याय 2 के अंतर्गत स्थापित वह निकाय, जो राजस्थान में राजस्व मामलों की सर्वोच्च अपील, पुनरीक्षण और संदर्भ की अदालत है (धारा 8) तथा सभी राजस्व अदालतों और राजस्व अधिकारियों पर सामान्य अधीक्षण और नियंत्रण रखता है (धारा 9)। इसका मुख्यालय अजमेर में है (धारा 6)।

गठन: धारा 4 से 7

धारा 4(1) के अनुसार राजस्थान राज्य के लिए एक राजस्व मंडल स्थापित है। धारा 4(2) कहती है कि मंडल में एक अध्यक्ष (Chairman) और तीन से कम नहीं तथा एक सीमा से अधिक नहीं अन्य सदस्य होंगे। यह सीमा अलग-अलग प्रतियों में अलग लिखी मिलती है: PRS की प्रति में "पंद्रह" है, जबकि अद्यतन पाठ (Indian Kanoon) में "बीस" है और राजस्व मंडल अध्यक्ष के 2018 के संबोधन में भी अध्यक्ष के साथ 20 सदस्यों का उल्लेख है। इसलिए उत्तर में सदस्य-संख्या लिखनी हो तो "अध्यक्ष और सदस्य, संख्या अधिनियम की सीमा के भीतर" लिखना सुरक्षित है; किसी विशेष तिथि की वास्तविक संख्या बिना आधिकारिक स्रोत के न लिखें।

नियुक्तियाँ राजपत्र में अधिसूचित होती हैं (धारा 4(3)); अध्यक्ष और सदस्य बनने की योग्यता, चयन की विधि और सेवा-शर्तें राज्य सरकार तय करती है (धारा 4(4)); और किसी सदस्य के पद ख़ाली होने या अनुपस्थित रहने से मंडल का गठन अवैध नहीं होता (धारा 4(5))। धारा 5 के अनुसार सभी सदस्य राज्यपाल की प्रसन्नता तक पद पर रहते हैं। धारा 6 के अनुसार मुख्यालय अजमेर है, पर राज्य सरकार के सामान्य या विशेष आदेश के अधीन मंडल अपने क्षेत्राधिकार में कहीं भी बैठ सकता है। धारा 7 के अनुसार मंडल के लिए एक रजिस्ट्रार और अन्य मंत्रालयिक अधिकारी नियुक्त हो सकते हैं, जो मंडल के निर्देशानुसार काम करते हैं।

एक नज़र में: राजस्व मंडल और भू-राजस्व अधिनियम, 1956

धाराविषयक्या कहती है
4गठनअध्यक्ष और अन्य सदस्य; नियुक्तियाँ राजपत्र में; योग्यता और सेवा-शर्तें राज्य सरकार तय करती है
5कार्यकालसदस्य राज्यपाल की प्रसन्नता तक पद पर
6स्थानमुख्यालय अजमेर; राज्य सरकार के आदेश के अधीन कहीं भी बैठक
7मंत्रालयिक अधिकारीरजिस्ट्रार और अन्य अधिकारी, मंडल के निर्देशानुसार
8शक्तियाँराजस्थान में सर्वोच्च राजस्व अपील, पुनरीक्षण और संदर्भ न्यायालय; सरकार द्वारा सौंपे या अन्य क़ानूनों से मिले कार्य भी
9सामान्य अधीक्षणसभी राजस्व अदालतों और राजस्व अधिकारियों पर सामान्य अधीक्षण और नियंत्रण; वे सब मंडल के अधीन
10क्षेत्राधिकार का प्रयोगअध्यक्ष या कोई सदस्य अकेले, या दो या अधिक सदस्यों की पीठ; एकल सदस्य के निर्णय की विशेष अपील एक माह में, यदि निर्णय देने वाला सदस्य उपयुक्त घोषित करे; अध्यक्ष कार्य-वितरण करता है
11पीठ को संदर्भएकल सदस्य, कारण लिखकर, कानून या रूढ़ि के प्रश्न पर पीठ की राय माँग सकता है
12उच्च न्यायालय को संदर्भपीठ, लोक-महत्व का प्रश्न हो तो, उच्च न्यायालय की राय माँग सकती है; निर्णय उसी राय के अनुसार
13मतभेदनिर्णय बहुमत से; बराबर मत हों तो मामला एक और सदस्य को, और बहुमत के अनुसार निर्णय
14रजिस्टरआवश्यक रजिस्टर, बहियाँ और लेखे रखना
23नियंत्रण का बँटवारागैर-न्यायिक राजस्व मामले राज्य सरकार के नियंत्रण में; न्यायिक और बंदोबस्त के मामले मंडल के

राजस्व मंडल की शक्तियाँ: अपील, पुनरीक्षण, संदर्भ और पुनर्विलोकन

धारा 8 मंडल को तीन नाम देती है: अपील (appeal), पुनरीक्षण (revision) और संदर्भ (reference)। सरल भाषा में: अपील का मतलब है नीचे वाले के फ़ैसले से असंतुष्ट पक्ष का ऊपर जाना; पुनरीक्षण का मतलब है कि जहाँ अपील का अधिकार नहीं, वहाँ भी मंडल खुद रिकॉर्ड मँगाकर देख सकता है कि नीचे वाले ने क़ानून के दायरे में काम किया या नहीं; और संदर्भ का मतलब है कि कोई अधिकारी या पीठ क़ानूनी उलझन पर ऊपर से राय माँगे। धारा 8 की शर्त है कि यह सब "अधिनियम या काश्तकारी अधिनियम, 1955 या अन्य क़ानून के अधीन" है, यानी मंडल की शक्ति उन्हीं क़ानूनों से आती है। राजस्व मंडल अध्यक्ष के 2018 के संबोधन में भी राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 के अधीन अपील, पुनरीक्षण और संदर्भ की धाराओं का उल्लेख है।

अपील: धारा 75(छ) के अनुसार आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, राजस्व अपील अधिकारी या बंदोबस्त आयुक्त के मूल आदेश की पहली अपील मंडल के पास आती है; और धारा 76(घ) के अनुसार आयुक्त, राजस्व अपील अधिकारी या बंदोबस्त आयुक्त के अपीलीय आदेश की (दूसरी) अपील भी मंडल के पास आती है। अपील मंडल में आदेश की तिथि से 90 दिन के भीतर करनी होती है (धारा 78(ग))। धारा 74 की कसौटी याद रखें: अधिनियम में जहाँ व्यवस्था नहीं है, वहाँ अपील नहीं होती। धारा 77(1) के अनुसार अंतरिम आदेश से और अपील या पुनर्विलोकन-आवेदन को परिसीमा-आधार पर स्वीकार करने के आदेश से अपील नहीं होती।

पुनरीक्षण: धारा 84 के अनुसार जिस न्यायिक (या बंदोबस्त से जुड़े) मामले में मंडल के पास अपील नहीं आती, उसका रिकॉर्ड मंडल तब मँगा सकता है जब निचली अदालत या अधिकारी ने ऐसा क्षेत्राधिकार प्रयोग किया जो उसके पास नहीं था, या अपना क्षेत्राधिकार प्रयोग ही नहीं किया, या क़ानून के विरुद्ध अथवा महत्त्वपूर्ण अनियमितता से काम किया। धारा 85 के अनुसार किसी का अहित करने वाला आदेश उसे सुने बिना नहीं दिया जा सकता। धारा 82 के अनुसार बंदोबस्त आयुक्त, भू-अभिलेख निदेशक या कलेक्टर अपने अधीनस्थ के मामले का रिकॉर्ड देखकर राय सहित मामला मंडल (न्यायिक या बंदोबस्त का हो तो) या राज्य सरकार (गैर-न्यायिक हो तो) को भेज सकते हैं; यही "संदर्भ" का एक रूप है।

पुनर्विलोकन (review): धारा 86(1) के अनुसार मंडल अपने या अपने सदस्यों के किसी आदेश का स्वयं या पक्षकार के आवेदन पर पुनर्विलोकन कर उसे रद्द, परिवर्तित या पुष्ट कर सकता है। अंत में एक विशेष सूचना: यदि किसी मामले में यह संदेह हो कि विवाद दीवानी अदालत का है या राजस्व अदालत का, तो धारा 8 के परंतुक के अनुसार उच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम है और मंडल सहित सब पर बाध्यकारी।

अपील की सीढ़ी: किसके आदेश की अपील किसके पास

आदेश किसकाअपील किसके पासधारासमय-सीमा
तहसीलदार का मूल आदेश (बंदोबस्त और भू-अभिलेख से असंबंधित मामला)कलेक्टर75(क)30 दिन (धारा 78(क))
सहायक कलेक्टर, उपखंड अधिकारी या कलेक्टर का मूल आदेश (बंदोबस्त से असंबंधित)राजस्व अपील अधिकारी75(ख)60 दिन (धारा 78(ख))
कलेक्टर का अपीलीय आदेश (बंदोबस्त और भू-अभिलेख से असंबंधित)राजस्व अपील अधिकारी76(क)60 दिन (धारा 78(ख))
आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, राजस्व अपील अधिकारी या बंदोबस्त आयुक्त का मूल आदेशराजस्व मंडल75(छ)90 दिन (धारा 78(ग))
आयुक्त, राजस्व अपील अधिकारी या बंदोबस्त आयुक्त का अपीलीय आदेशराजस्व मंडल76(घ)90 दिन (धारा 78(ग))

बंदोबस्त और भू-अभिलेख के मामलों की अलग कड़ियाँ (बंदोबस्त अधिकारी, बंदोबस्त आयुक्त, भू-अभिलेख अधिकारी, भू-अभिलेख निदेशक) धारा 75(ग)-(च) और 76(ख)-(ग) में हैं। परिसीमा अधिनियम भी लागू है (धारा 87)।

राजस्व वाद की सीढ़ी (धारा 75, 76, 78, 84)

  1. मूल आदेश

    तहसीलदार, उपखंड अधिकारी या कलेक्टर

  2. पहली अपील

    कलेक्टर (तहसीलदार के आदेश पर) या राजस्व अपील अधिकारी (SDO या कलेक्टर के आदेश पर)

  3. राजस्व अपील अधिकारी / आयुक्त

    अपील पर आदेश, समय-सीमा 60 दिन

  4. राजस्व मंडल

    अपील 90 दिन के भीतर (धारा 76(घ)); जहाँ अपील नहीं, वहाँ पुनरीक्षण (धारा 84)

  5. मंडल के भीतर

    विशेष अपील पीठ में (धारा 10), पुनर्विलोकन (धारा 86), उच्च न्यायालय को संदर्भ (धारा 12)

सीढ़ी का क्रम मामले के प्रकार (बंदोबस्त, भू-अभिलेख, अन्य) पर बदलता है; ऊपर का क्रम बंदोबस्त और भू-अभिलेख से असंबंधित मामलों का है।

राजस्व मंडल और राज्य सरकार: कौन किसका नियंत्रक (धारा 23)

धारा 23(1) कहती है कि राजस्व से जुड़े सभी गैर-न्यायिक मामलों का नियंत्रण (बंदोबस्त से जुड़े मामलों को छोड़कर) राज्य सरकार के पास है, और सभी न्यायिक मामलों तथा बंदोबस्त से जुड़े सभी मामलों का नियंत्रण राजस्व मंडल के पास। धारा 23(2) "न्यायिक मामला" उसे कहती है जिसमें कोई राजस्व अदालत या अधिकारी पक्षकारों के अधिकारों और दायित्वों का निर्धारण करता है; प्रथम अनुसूची में दिए अपील, पुनरीक्षण और संदर्भ भी न्यायिक माने गए हैं। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि राज्य सरकार प्रशासनिक मामलों में आदेश दे सकती है (धारा 83), पर किसी विवाद में पक्षकारों के अधिकार तय करने वाली राजस्व अदालत पर वह नहीं, मंडल नियंत्रण रखता है।

विश्लेषण: इसीलिए राजस्व मंडल को "दोहरी भूमिका" वाली संस्था कहा जाता है: न्यायिक पक्ष (अपील, पुनरीक्षण) में वह उच्च राजस्व अदालत है, और धारा 8(2) के तहत सरकार जो अन्य कार्य सौंपे, उन्हें करते समय वह प्रशासनिक संस्था भी है। उत्तर में इस भेद को लिखने से "अदालत और प्रशासक" की समझ झलकती है।

न्यायिक बनाम गैर-न्यायिक राजस्व मामले (धारा 23)

न्यायिक मामले और बंदोबस्त

नियंत्रण किसके पासराजस्व मंडल

क्या हैपक्षकारों के अधिकार-दायित्व तय करने वाली कार्यवाही; प्रथम अनुसूची के मामले

अभिलेख मँगाकर आदेश बदलने की शक्तिमंडल, धारा 84 (जहाँ अपील मंडल में नहीं आती)

अधीनस्थ से संदर्भबंदोबस्त आयुक्त, भू-अभिलेख निदेशक या कलेक्टर के राय सहित भेजे मामले मंडल को (धारा 82)

गैर-न्यायिक मामले

नियंत्रण किसके पासराज्य सरकार

क्या हैराजस्व से जुड़े वे प्रशासनिक मामले जिनमें अधिकारों का निर्धारण नहीं होता

अभिलेख मँगाकर आदेश बदलने की शक्तिराज्य सरकार, धारा 83

अधीनस्थ से संदर्भवही अधिकारी गैर-न्यायिक मामले राज्य सरकार को भेजते हैं (धारा 82)

दूसरी पंक्ति की व्याख्या धारा 23(2) पर आधारित।

एक नज़र में: राजस्व मंडल

राजस्व मंडल, अजमेर

गठन (धारा 4-7)

  • अध्यक्ष और सदस्य
  • राजपत्र में नियुक्ति
  • राज्यपाल की प्रसन्नता तक
  • मुख्यालय अजमेर
  • रजिस्ट्रार

शक्तियाँ (धारा 8, 9)

  • सर्वोच्च अपील
  • पुनरीक्षण
  • संदर्भ
  • सामान्य अधीक्षण

पीठें (धारा 10-13)

  • एकल सदस्य
  • दो या अधिक की पीठ
  • विशेष अपील: 1 माह
  • बहुमत से निर्णय
  • उच्च न्यायालय को संदर्भ

अपील और पुनरीक्षण

  • अपील 90 दिन (धारा 78)
  • पुनरीक्षण धारा 84
  • पुनर्विलोकन धारा 86

नियंत्रण (धारा 23)

  • न्यायिक और बंदोबस्त: मंडल
  • गैर-न्यायिक: राज्य सरकार

मुख्य तथ्य

राजस्व मंडल की स्थापना
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956, धारा 4(1)
सदस्य-संख्या
अध्यक्ष और तीन से कम नहीं तथा अधिनियम में तय अधिकतम तक अन्य सदस्य (PRS की प्रति में 'पंद्रह', अद्यतन पाठ में 'बीस'); संख्या के लिए अद्यतन पाठ देखें
सदस्यों का कार्यकाल
राज्यपाल की प्रसन्नता तक (धारा 5)
मुख्यालय
अजमेर (धारा 6)
मंडल की स्थिति
राजस्थान में सर्वोच्च राजस्व अपील, पुनरीक्षण और संदर्भ न्यायालय (धारा 8)
सामान्य अधीक्षण
सभी राजस्व अदालतों और अधिकारियों पर (धारा 9)
पीठ और विशेष अपील
एकल सदस्य या दो-या-अधिक की पीठ; एकल सदस्य के निर्णय की विशेष अपील एक माह में (धारा 10)
मंडल में अपील की सीमा
आदेश की तिथि से 90 दिन (धारा 78(ग))
पुनरीक्षण
जहाँ मंडल में अपील नहीं आती, क्षेत्राधिकार-दोष या अवैधता पर (धारा 84)
नियंत्रण का बँटवारा
गैर-न्यायिक: राज्य सरकार; न्यायिक और बंदोबस्त: राजस्व मंडल (धारा 23)
अंतिम जाँच
1 अक्टूबर 2026 (धाराएँ दो प्रतियों से मिलाईं)

राजस्थान का पहलू

राजस्व मंडल राजस्थान की ही संस्था है: इसकी स्थापना और मुख्यालय (अजमेर) का आधार राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराएँ 4 और 6 हैं, और राजस्व मंडल अध्यक्ष का 2018 का संबोधन राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है (अभिगम 1 अक्टूबर 2026)। मंडल के सदस्यों की वर्तमान संख्या, लंबित मामलों की गिनती या निर्णय-गति जैसे आँकड़े आधिकारिक सूचना की तारीख़ के बिना इस पृष्ठ पर नहीं दिए गए हैं; उत्तर में दें तो स्रोत-वर्ष साथ लिखें।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • राजस्व मंडल को केवल प्रशासनिक संस्था या केवल अदालत लिखना: वह दोनों है, यानी न्यायिक पक्ष में उच्च राजस्व अदालत और धारा 8(2) के कार्यों में प्रशासनिक संस्था।
  • सदस्य-संख्या एक निश्चित अंक की तरह लिख देना: PRS की पुरानी प्रति और अद्यतन पाठ में सीमा अलग है; "अध्यक्ष और अन्य सदस्य, अधिनियम की सीमा में" लिखना सुरक्षित है।
  • राजस्व मंडल को उच्च न्यायालय की जगह बताना: उच्च न्यायालय राजस्व और दीवानी अदालत के क्षेत्राधिकार के विवाद में अंतिम निर्णायक है (धारा 8 का परंतुक)।
  • अपील की सीमाएँ गड़बड़ाना: 30 दिन (कलेक्टर आदि), 60 दिन (राजस्व अपील अधिकारी, बंदोबस्त आयुक्त, भू-अभिलेख निदेशक), 90 दिन (राजस्व मंडल)।
  • अपील और पुनरीक्षण को एक मान लेना: अपील अधिकार है और अधिनियम से ही मिलती है (धारा 74); पुनरीक्षण मंडल का अपना अधिकार है, संकरी कसौटी पर (धारा 84)।
  • मुख्यालय का नाम ग़लत लिखना: मंडल का मुख्यालय अजमेर है (धारा 6), जयपुर नहीं; बैठक राज्य सरकार के आदेश से अन्यत्र हो सकती है।