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पेपर III · इकाई II

वैज्ञानिक प्रबंध (Scientific Management)

टेलर का वैज्ञानिक प्रबंध क्या है, उसके चार सिद्धांत और तकनीकें, पिग-आयरन का असली प्रयोग, मानसिक क्रांति, फ़ेयोल से अंतर और आलोचना, उत्तर-लेखन की दृष्टि से।

  • टेलर
  • चार सिद्धांत
  • मानसिक क्रांति
  • आलोचना
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II: "Public Administration: Theories and Principles. ... Theories and approaches: Scientific Management, Human Relations, Behavioural, Structural-Functional, Ecological. Principles of organisation: hierarchy, unity of command, span of control, delegation, centralisation and decentralisation, coordination, authority and responsibility, accountability. Administrative behaviour: leadership, communication, morale." इस पृष्ठ पर वैज्ञानिक प्रबंध (Scientific Management) है। मानव संबंध और व्यवहारवादी उपागम के अलग पृष्ठ हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में "वैज्ञानिक प्रबंध" पर सीधा प्रश्न नहीं मिला। फिर भी यह सिलेबस की पहली सूचीबद्ध उपागम है और बाक़ी उपागम (मानव संबंध, व्यवहारवादी) इसकी प्रतिक्रिया में ही समझ आते हैं, इसलिए तुलना-आधारित प्रश्नों की तैयारी यहीं से होती है।
  • इसी शास्त्रीय परिवार के सवाल पूछे गए हैं: 2024 में "शास्त्रीय सिद्धांत कहावतें और मिथक हैं" (10 अंक) और 2018 में फ़ेयोल के प्रबंध-कार्य (2 अंक)। 2013-2024 के पेपरों में देखा गया रुझान है कि परीक्षक इस परिवार से अवधारणा के साथ आलोचना भी माँगता है।
  • उत्तर में अंक दिलाने वाली बातें हैं: टेलर के चार सिद्धांत, एक ठोस प्रयोग (पिग-आयरन या फावड़ा), "मानसिक क्रांति" और आलोचना। नीचे हर बात स्रोत के साथ दी गई है और अभ्यास-प्रश्न हल किए गए हैं।

पहले सरल भाषा में: डाक-शाखा की मेज़

सोचिए, एक दफ़्तर की डाक-शाखा में पाँच बाबू हैं। एक चिट्ठी को खोलना, तारीख़ की मुहर लगाना, रजिस्टर में चढ़ाना और फ़ाइल में रखना, यह सब पाँचों अपने-अपने ढंग से करते हैं। कोई मुहर बाएँ हाथ से लगाता है, कोई पहले सारी चिट्ठियाँ खोलकर ढेर बनाता है, कोई एक-एक चिट्ठी निपटाता है। शाखा अधिकारी एक दिन स्टॉपवॉच लेकर सबसे फुर्तीले बाबू का काम देखता है, फ़ालतू हरकतें हटाता है, मेज़ पर सामान का क्रम बदलता है, फिर वही तरीक़ा लिखकर सबको सिखाता है और तय करता है कि इस तरीक़े से एक दिन में इतनी चिट्ठियाँ निपटनी चाहिए। जो इससे ज़्यादा निपटाए, उसे अलग से इनाम मिले। यही सोच वैज्ञानिक प्रबंध (Scientific Management) की जड़ है। (यह समझाने के लिए गढ़ा गया उदाहरण है, किसी वास्तविक दफ़्तर का वर्णन नहीं।)

अब परीक्षा के लिए सटीक रूप। वैज्ञानिक प्रबंध एक प्रबंध-दर्शन है जिसे फ़्रेडरिक विंस्लो टेलर (Frederick Winslow Taylor) ने दिया। इसका केंद्रीय विचार है कि काम करने के पुराने, अंदाज़े वाले तरीक़ों (rule of thumb) की जगह हर काम का वैज्ञानिक अध्ययन करके "एक सर्वोत्तम तरीक़ा" खोजा जाए, सही व्यक्ति चुना और प्रशिक्षित किया जाए, और प्रबंध तथा श्रमिक मिलकर काम करें। टेलर के शब्दों में, जैसा NCERT ने उद्धृत किया है, वैज्ञानिक प्रबंध का अर्थ है यह ठीक-ठीक जानना कि आप लोगों से क्या करवाना चाहते हैं और यह देखना कि वे उसे सबसे अच्छे और सबसे सस्ते ढंग से करें।

टेलर और उनकी पृष्ठभूमि

टेलर अमेरिकी मैकेनिकल इंजीनियर थे (जन्म 20 मार्च 1856, मृत्यु 21 मार्च 1915)। उन्होंने कारख़ानों में, ख़ासकर इस्पात उद्योग में, काम किया और अपने अनुभव अपनी पुस्तक The Principles of Scientific Management (1911) में लिखे। उस दौर में कारख़ाने बड़े हो रहे थे, पर उन्हें चलाने का कोई स्थापित सिद्धांत नहीं था। प्रबंधक अपने निजी अनुभव और अंदाज़े पर चलते थे; NCERT इसी को अंगूठा-नियम (rule of thumb) कहती है, जिसमें हर प्रबंधक का तरीक़ा अलग था और यह पता नहीं चलता था कि क्या चलता है और क्यों चलता है।

टेलर ने कारख़ानों में एक आम बीमारी पहचानी: श्रमिक जानबूझकर धीमा काम करते थे, जिसे वे "सोल्जरिंग" (soldiering) कहते हैं। उनके अनुसार धीमे काम के तीन कारण थे। पहला, यह ग़लत धारणा कि ज़्यादा काम करने से नौकरियाँ घटेंगी। दूसरा, प्रबंध की ख़राब व्यवस्था, जैसे पीस-रेट घटा दिए जाने का डर, जिससे श्रमिक उत्पादन छिपाते थे और मालिक को विरोधी मानने लगते थे। तीसरा, अकुशल अंगूठा-नियम वाले तरीक़े जिनमें श्रम और समय बर्बाद होता था। टेलर का समाधान था कि तीसरा कारण विज्ञान से और पहले दो कारण नए प्रबंध-संबंध से हटाए जाएँ।

टेलर के चार सिद्धांत

टेलर ने अपने दर्शन को चार बुनियादी सिद्धांतों में समेटा, जिन्हें वे प्रबंध का सार मानते थे। पहला, सच्चे विज्ञान का विकास: काम के हर छोटे अंश के लिए अंदाज़े की जगह मापा और परखा हुआ नियम। दूसरा, श्रमिक का वैज्ञानिक चयन: काम और व्यक्ति की क्षमता का मेल। तीसरा, उसकी वैज्ञानिक शिक्षा और विकास: चुने हुए व्यक्ति को वही सर्वोत्तम तरीक़ा सिखाना, ताकि वह ख़ुद अधिक कमाए और संस्था को भी लाभ हो। चौथा, प्रबंध और श्रमिक के बीच घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण सहयोग: दोनों के बीच काम और ज़िम्मेदारी का लगभग बराबर बँटवारा, जिसमें प्रबंध योजना बनाए और श्रमिक उसे निभाए।

NCERT इन्हें अपनी भाषा में चार शीर्षकों से सजाती है: विज्ञान, अंगूठा-नियम नहीं; सामंजस्य, कलह नहीं; सहयोग, व्यक्तिवाद नहीं; और प्रत्येक व्यक्ति का उसकी अधिकतम कार्यकुशलता और समृद्धि तक विकास। परीक्षा में दोनों में से कोई भी रूप लिखा जा सकता है, बशर्ते चारों बिंदु पूरे हों।

पुरानी "अंदाज़ी" पद्धति बनाम वैज्ञानिक प्रबंध

पुरानी पद्धति (अंगूठा-नियम)

काम का तरीक़ाहर श्रमिक और प्रबंधक अपनी आदत और अनुभव से तय करता है

औज़ारश्रमिक अपने औज़ार ख़ुद चुनता है

चयन और प्रशिक्षणजो आ गया, वही रखा; सीखना अपने भरोसे

योजना और अमलयोजना और अमल दोनों काम करने वाले के हाथ में

प्रबंध-श्रमिक संबंधटकराव, हर पक्ष अपना हित अलग देखता है

पारिश्रमिकएक-सा वेतन या सीधी पीस-रेट; बेहतर काम पर कोई ख़ास प्रोत्साहन नहीं

वैज्ञानिक प्रबंध

काम का तरीक़ाअध्ययन से खोजा गया एक मानक तरीक़ा, सब पर लागू

औज़ारमानकीकृत औज़ार, जैसे काम के अनुसार अलग-अलग फावड़े

चयन और प्रशिक्षणक्षमता देखकर चयन और सर्वोत्तम तरीक़े का प्रशिक्षण

योजना और अमलयोजना प्रबंध की, अमल श्रमिक का (योजना और अमल का अलगाव)

प्रबंध-श्रमिक संबंधसहयोग, दोनों का हित एक माना जाता है

पारिश्रमिकनिर्धारित कार्य पर बोनस और अलग-अलग दर (differential rate)

तालिका की तुलना टेलर के अपने विरोध-जोड़ों (rule of thumb बनाम science) पर आधारित है।

टेलर की तकनीकें: विज्ञान कैसे लगाया गया

सिद्धांत तब तक हवा में रहते हैं जब तक उनके औज़ार न हों। टेलर और उनके सहयोगियों ने कई तकनीकें बनाईं। समय अध्ययन (time study) में एक अच्छे श्रमिक के काम के हर हिस्से को स्टॉपवॉच से कई बार नापा जाता है और उससे मानक समय निकाला जाता है; इसी से यह तय होता है कि दिन भर में कितना काम "उचित" है। गति अध्ययन (motion study) में हाथ, पैर और शरीर की हर हरकत देखी जाती है और जो फ़ालतू हैं, उन्हें हटाया जाता है। थकान अध्ययन (fatigue study) यह तय करता है कि कितने अंतराल पर कितना विश्राम देने से श्रमिक की क्षमता बनी रहती है। विधि अध्ययन (method study) काम करने का सर्वोत्तम ढंग खोजता है।

इसके साथ मानकीकरण (standardisation) आता है: औज़ार, कच्चा माल, काम की विधि और काम की परिस्थितियाँ सब एक मानक पर लाई जाती हैं। भेदात्मक पीस-दर (differential piece rate) में मानक से ऊँचे प्रदर्शन के लिए ऊँची दर और उससे नीचे के लिए नीची दर होती है, ताकि कुशल श्रमिक को खुला फ़ायदा दिखे। कार्यात्मक फ़ोरमैनशिप (functional foremanship) में एक अकेले फ़ोरमैन की जगह आठ विशेषज्ञ होते हैं, जिनमें से हर एक अपने क्षेत्र का शिक्षक है: चार योजना-पक्ष (निर्देश-पत्र लिपिक, मार्ग लिपिक, समय और लागत लिपिक, अनुशासक) और चार उत्पादन-पक्ष (गति नियंत्रक, टोली नियंत्रक, मरम्मत नियंत्रक, निरीक्षक)। टेलर ने कहा कि कोई एक व्यक्ति सारे गुणों वाला फ़ोरमैन नहीं हो सकता, इसलिए काम बाँटना ही ठीक है।

टेलर के चार प्रसिद्ध उदाहरण एक नज़र में

प्रयोगक्या किया गयापरिणाम (टेलर और NCERT के अनुसार)
पिग-आयरन ढुलाई (बेथलेहम स्टील)चुने हुए श्रमिक को निर्देश, बारी-बारी से काम और विश्राम, निर्धारित कार्यप्रति व्यक्ति प्रति दिन लगभग 12.5 टन से लगभग 47 टन; मज़दूरी 1.15 डॉलर से 1.85 डॉलर, यानी लगभग 60 प्रतिशत अधिक
फावड़े का अध्ययनअलग-अलग भार के साथ प्रयोग करके सबसे उत्पादक भार खोजासर्वोत्तम भार लगभग 21 पाउंड; भार के अनुसार 8 से 10 प्रकार के फावड़े
ईंट-चिनाई (फ्रैंक गिलब्रेथ का काम)गति-अध्ययन, ऊँचाई-समायोज्य मचान, दोनों हाथों से एक साथ कामप्रति ईंट गतियाँ 18 से घटकर 5
कार्यात्मक फ़ोरमैनशिपएक फ़ोरमैन की जगह आठ विशेषज्ञयोजना और अमल का अलग-अलग होना

संख्याएँ टेलर की अपनी पुस्तक (1911) में हैं और NCERT से मेल खाती हैं। टेलर का अपना कार्य-विवरण उन्हीं के दृष्टिकोण से है, इसलिए इसे आलोचनात्मक पढ़ें।

मानसिक क्रांति (Mental Revolution)

टेलर ने कहा कि वैज्ञानिक प्रबंध का असली सार इन तकनीकों में नहीं, बल्कि सोच में बदलाव में है। उनके अनुसार असली समस्या "पहल और प्रोत्साहन" वाले पुराने प्रबंध से वैज्ञानिक प्रबंध की ओर जाने में प्रबंधकों और श्रमिकों दोनों के मानसिक रवैये और आदतों में पूर्ण परिवर्तन की है। NCERT इसे "मानसिक क्रांति" (mental revolution) कहती है: श्रमिक और प्रबंधक दोनों इस सोच को छोड़ें कि मुनाफ़े का बँटवारा आपसी झगड़े का विषय है, और समझें कि दोनों का हित एक है और पहले बड़ा पाई (surplus) बनाना ज़रूरी है। टेलर के अपने शब्दों में, वैज्ञानिक प्रबंध की नींव यह दृढ़ विश्वास है कि नियोक्ता और कर्मचारी के सच्चे हित एक ही हैं।

इसका एक व्यावहारिक पहलू है: टेलर कहते हैं कि यह बदलाव धीरे-धीरे और ठोस उदाहरणों से आता है; उन्होंने एक साधारण संस्था में भी बदलाव में दो से तीन साल और कभी-कभी चार से पाँच साल लगने की चेतावनी दी। यानी वे जल्दबाज़ी वाले "तकनीक की नक़ल" के ख़िलाफ़ थे: उनके अनुसार जब तकनीकें बिना सही दर्शन के अपनाई जाती हैं तो नतीजे अक्सर ख़राब होते हैं। (एक बात ध्यान रखें: "मेंटल रिवोल्यूशन" का पदबंध NCERT में है; टेलर के 1911 के पाठ में वाक्यांश "mental attitude में पूर्ण क्रांति" है।)

फ़ेयोल से तुलना (केवल अंतर समझने के लिए)

फ़ेयोल (Henri Fayol, 1841-1925) फ़्रांसीसी खनन इंजीनियर थे और उनकी पुस्तक का फ़्रेंच मूल 1916 का (NCERT पुस्तक-रूप में 1917 बताती है) और अंग्रेज़ी अनुवाद General and Industrial Management 1949 का है। NCERT का सार है कि टेलर ने कारख़ाने की शॉप-फ़्लोर को बदला (सर्वोत्तम तरीक़ा, उचित दिन का काम, भेदात्मक दर, कार्यात्मक फ़ोरमैनशिप), जबकि फ़ेयोल ने बताया कि प्रबंधक का काम क्या है और उसे किन सिद्धांतों पर करना चाहिए। उनके 14 सिद्धांतों में से कार्य-विभाजन, अधिकार और उत्तरदायित्व, आदेश की एकता और केंद्रीकरण जैसे सिद्धांत लोक प्रशासन के सिद्धांतों वाले हिस्से में अलग से आते हैं।

टेलर बनाम फ़ेयोल

टेलर

देखने का स्तरकार्यशाला या शॉप-फ़्लोर, यानी नीचे से ऊपर

केंद्रीय प्रश्नएक काम सबसे अच्छे ढंग से कैसे हो

मुख्य योगदानसमय और गति अध्ययन, भेदात्मक दर, कार्यात्मक फ़ोरमैनशिप

प्रमुख पुस्तकThe Principles of Scientific Management (1911)

संबंधश्रमिक की कार्यक्षमता

फ़ेयोल

देखने का स्तरसमूचा प्रबंध, यानी ऊपर से नीचे

केंद्रीय प्रश्नप्रबंधक का काम क्या है और किन सिद्धांतों पर हो

मुख्य योगदानप्रबंध के 14 सिद्धांत, प्रबंध-कार्य (योजना, संगठन, आदेश, समन्वय, नियंत्रण)

प्रमुख पुस्तकGeneral and Industrial Management (फ़्रेंच 1916; अंग्रेज़ी अनुवाद 1949)

संबंधप्रबंधकीय कार्यक्षमता

आलोचना: क्या छूट गया

वैज्ञानिक प्रबंध की सबसे पहली आलोचना यह है कि वह मनुष्य को मुख्यतः आर्थिक प्राणी मानता है, यानी यह मानता है कि ऊँची मज़दूरी का वादा काफ़ी प्रेरणा है। NCERT इसे शास्त्रीय दौर के "तर्कसंगत आर्थिक दृष्टिकोण" में गिनती है, जिसमें माना गया था कि लोग मुख्यतः आर्थिक लाभ से प्रेरित होते हैं। Britannica इसी ओर इशारा करती है कि यह उपागम मानवीय प्रेरणाओं की अनदेखी करके श्रमिक असंतोष तक ले जा सकता है। इसी कमी के कारण अगली पीढ़ी के अध्ययन सामाजिक आवश्यकताओं और समूह-व्यवहार की ओर मुड़े; Harvard Business School का अपना विवरण भी बताता है कि वहाँ ज़ोर "scientific management" और अनुप्रयुक्त अर्थशास्त्र से हटकर मानव संबंधों की ओर गया।

दूसरी आलोचना श्रमिक के साथ व्यवहार की है। टेलर अपने पिग-आयरन श्रमिक का वर्णन ऐसे करते हैं जैसे वह "मानसिक रूप से सुस्त" हो और उससे ऐसी भाषा में बात करने को ठीक ठहराते हैं; यह वर्णन आज की दृष्टि से पितृसत्तात्मक और अपमानजनक लगता है। फिर, योजना और अमल को पूरी तरह अलग कर देने से श्रमिक की भूमिका केवल आदेश-पालन तक सिमट जाती है, जबकि टेलर स्वयं सुझाव को प्रोत्साहन देने की बात भी करते हैं। साइमन (1946) एक और कमी की ओर इशारा करते हैं। उनके अनुसार व्यक्ति की क्षमता की तीन सीमाएँ हैं: कौशल, आदत और शरीर की सीमा; मूल्य और निष्ठा की सीमा; और ज्ञान की सीमा। इनमें पहला पक्ष वही है जिसे टेलर के अनुयायियों ने सबसे सफलतापूर्वक विकसित किया, पर ज्ञान की सीमा वाला पक्ष (कौन-सा ज्ञान कैसे पहुँचे और बँटे) उनके शब्दों में शायद प्रशासन-सिद्धांत का अनखोजा क्षेत्र (terra incognita) है।

तीसरी आलोचना श्रमिक-संगठनों से संबंधित है। टेलर ने स्वयं लिखा है कि लगभग हर श्रमिक संघ उत्पादन घटाने वाले नियम बनाता है और इसे वे ग़लत धारणा बताते हैं। NCERT के अनुसार वे यह भी मानते थे कि खुले संवाद और सद्भाव में किसी संघ की ज़रूरत नहीं रहेगी। श्रमिक-पक्ष इसे अपने सामूहिक सौदेबाज़ी के अधिकार पर प्रश्न की तरह पढ़ता था। विश्लेषण: जब मानक-कार्य बहुत ऊँचा तय हो या दर बाद में कम कर दी जाए तो वही अविश्वास लौट आता है जिसे टेलर मिटाना चाहते थे; इसलिए मानक की निष्पक्षता पूरे तंत्र की धुरी है।

वैज्ञानिक प्रबंध: योगदान और सीमाएँ

योगदानसीमा या आलोचना
काम के अध्ययन में वैज्ञानिक पद्धति: मापन, प्रयोग, मानकीकरणमनुष्य को मुख्यतः आर्थिक प्राणी मानना; सामाजिक और भावनात्मक पक्ष की उपेक्षा
चयन, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन को प्रबंध का हिस्सा बनायाश्रमिक का वर्णन और योजना-अमल का कठोर अलगाव श्रमिक को सिर्फ़ आदेश-पालक बना देता है
अधिक उत्पादन और अधिक वेतन दोनों का वादा (पिग-आयरन में दिखा)श्रमिक संघों से टकराव; मानक का निष्पक्ष होना कठिन
आधुनिक कार्य-अध्ययन, मानक संचालन-विधि और प्रक्रिया-सुधार की नींव (विश्लेषण)अकेले तकनीकें अपनाने पर टेलर की अपनी चेतावनी: दर्शन के बिना परिणाम अक्सर ख़राब

आलोचना-पंक्तियाँ Britannica, Harvard Business School, साइमन (1946) और टेलर के अपने पाठ से; अंतिम पंक्ति का पहला खंड विश्लेषण है।

लोक प्रशासन में प्रासंगिकता (विश्लेषण)

विश्लेषण (स्रोत-आधारित तथ्य नहीं): सरकारी दफ़्तर में वैज्ञानिक प्रबंध की सोच आज भी दिखती है, भले नाम बदल गया हो। फ़ाइल कितने हाथों से गुज़रती है, कौन-सा कदम हटाया जा सकता है, किस काम की मानक समय-सीमा हो, किसे कौन-सा प्रशिक्षण मिले, ये सब कार्य-अध्ययन के ही सवाल हैं। पर लोक सेवा में नतीजा केवल उत्पादन (फ़ाइलें निपटाई) नहीं, गुणवत्ता और नागरिक के साथ व्यवहार भी है, इसलिए यहाँ टेलर की सीख को साइमन और मानव संबंध उपागम की सीख के साथ पढ़ना चाहिए।

साइमन (1946) बताते हैं कि व्यक्ति की सीमाओं का पहला पक्ष कौशल, आदत और शरीर की सीमा है, जहाँ प्रशासन-सिद्धांत को शरीर-क्रिया और कौशल-प्रशिक्षण के नियमों से काम लेना होता है। यह वही क्षेत्र है जिसे टेलर के अनुयायियों ने सबसे सफलतापूर्वक विकसित किया और जिसमें समय-और-गति अध्ययन विकसित हुआ। यानी वैज्ञानिक प्रबंध की उपलब्धि वास्तविक है, पर साइमन के अनुसार वह मानव-सीमाओं के तीन पक्षों में से केवल एक को छूती है।

टेलर की कार्य-पद्धति कदम दर कदम

  1. अवलोकन

    कुशल श्रमिक का काम देखना

  2. समय और गति अध्ययन

    फ़ालतू हरकत हटाना, मानक समय निकालना

  3. मानकीकरण

    औज़ार, विधि, परिस्थिति एक मानक पर

  4. चयन और प्रशिक्षण

    सही व्यक्ति, सर्वोत्तम तरीक़ा सिखाना

  5. निर्धारित कार्य और प्रोत्साहन

    मानक कार्य, बोनस, भेदात्मक दर

  6. योजना और अमल का अलगाव

    आठ कार्यात्मक विशेषज्ञ; प्रबंध की योजना

क्रम टेलर की विधि का सार है; निर्धारित कार्य का तर्क ऊपर के कार्य-उदाहरण में।

एक नज़र में: वैज्ञानिक प्रबंध

वैज्ञानिक प्रबंध

चार सिद्धांत

  • विज्ञान, अंगूठा-नियम नहीं
  • वैज्ञानिक चयन
  • शिक्षा और विकास
  • प्रबंध-श्रमिक सहयोग

तकनीकें

  • समय और गति अध्ययन
  • थकान और विधि अध्ययन
  • मानकीकरण
  • भेदात्मक दर
  • आठ कार्यात्मक फ़ोरमैन

उदाहरण

  • पिग-आयरन: 12.5 से 47 टन
  • फावड़ा: 21 पाउंड
  • ईंट: 18 से 5 गतियाँ

मानसिक क्रांति

  • दोनों के सच्चे हित एक
  • झगड़ा नहीं, पाई बड़ा करो

आलोचना

  • आर्थिक प्राणी की धारणा
  • श्रमिक संघ से टकराव
  • मानवीय पक्ष की उपेक्षा

समय-रेखा: वैज्ञानिक प्रबंध और आगे

  1. 20 मार्च 1856

    टेलर का जन्म

  2. 1911

    The Principles of Scientific Management

  3. 21 मार्च 1915

    टेलर का निधन

  4. 1916 / 1949

    फ़ेयोल की पुस्तक: फ़्रेंच मूल 1916, अंग्रेज़ी अनुवाद 1949

  5. 1946

    साइमन का 'The Proverbs of Administration'; शास्त्रीय सिद्धांतों की आलोचना

तारीख़ें तुलना-आधारित प्रश्नों में काम आती हैं।

मुख्य तथ्य

टेलर का जीवनकाल
20 मार्च 1856 से 21 मार्च 1915
The Principles of Scientific Management
1911
चार सिद्धांत
विज्ञान; वैज्ञानिक चयन; शिक्षा और विकास; घनिष्ठ सहयोग
पिग-आयरन प्रयोग
12.5 टन से लगभग 47 टन; 1.15 डॉलर से 1.85 डॉलर (लगभग 60 प्रतिशत)
फावड़े का सर्वोत्तम भार
लगभग 21 पाउंड
ईंट-चिनाई में गतियाँ (गिलब्रेथ)
18 से 5
कार्यात्मक फ़ोरमैनशिप
एक फ़ोरमैन की जगह आठ विशेषज्ञ
फ़ेयोल
1841-1925; फ़्रेंच मूल 1916, अंग्रेज़ी अनुवाद 1949; 14 सिद्धांत
अंतिम जाँच
1 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • वैज्ञानिक प्रबंध को केवल "श्रमिक से ज़्यादा काम निकालना" लिख देना: टेलर चयन, प्रशिक्षण, सहयोग और अधिक मज़दूरी को भी इसका हिस्सा बताते हैं। दोनों पक्ष लिखें, फिर आलोचना जोड़ें।
  • टेलर और फ़ेयोल को मिला देना: टेलर शॉप-फ़्लोर पर और फ़ेयोल प्रबंधक के कार्य और सिद्धांतों पर हैं। 14 सिद्धांत फ़ेयोल के हैं, चार सिद्धांत टेलर के।
  • "मानसिक क्रांति" को तकनीक समझना: यह प्रबंध और श्रमिक की सोच में बदलाव है, कोई औज़ार नहीं।
  • तारीख़ें और संख्याएँ बिना स्रोत के लिख देना या बढ़ा-चढ़ा देना: पिग-आयरन की मूल संख्या लगभग 12.5 से 47 टन और 1.15 से 1.85 डॉलर है।
  • गिलब्रेथ का काम टेलर का बताना: ईंट-चिनाई का अध्ययन फ्रैंक गिलब्रेथ का है, जिसे टेलर अपनी पुस्तक में उदाहरण के रूप में लेते हैं।
  • उत्तर में केवल प्रशंसा या केवल आलोचना लिखना: परीक्षक दोनों और निष्कर्ष की अपेक्षा रखते हैं।

पिछले वर्षों के प्रश्न

संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में इस विषय पर सीधा प्रश्न नहीं मिला, इसलिए यहाँ "पिछले वर्षों के प्रश्न" की सूची नहीं है। नीचे के अभ्यास-प्रश्न हमारे अपने हैं और पीवाईक्यू की तरह नहीं पढ़े जाने चाहिए।