राज्य निर्वाचन आयोग (SEC)
पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव कराने वाला राज्य निर्वाचन आयोग: अनुच्छेद 243K और 243ZA, नियुक्ति और हटाने की सुरक्षा, कार्य और शक्तियाँ, भारत निर्वाचन आयोग से अंतर और राजस्थान का क़ानूनी ढाँचा।
- अनुच्छेद 243K
- अनुच्छेद 243ZA
- राज्य निर्वाचन आयुक्त
- ECI से अंतर
- राजस्थान
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II, "State and District Administration": "State: Governor, Chief Minister, Council of Ministers, State Secretariat, Chief Secretary, role of Directorates, police administration, Revenue Board, State Election Commission, State Human Rights Commission, Lokayukta." इस पृष्ठ पर राज्य निर्वाचन आयोग है; भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का पृष्ठ अलग है और यहाँ केवल तुलना के लिए आता है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2023 के पेपर III में "राज्य निर्वाचन आयोग का मुख्य कार्य" 2 अंक (15 शब्द) में पूछा गया। इतने छोटे प्रश्न में अनुच्छेद का नाम और कार्य का सार, दोनों एक-एक वाक्य में चाहिए।
- स्थानीय शासन परिवार का हिस्सा होने से यह विषय अकेला नहीं पूछा जाता: 2023 में अनुच्छेद 243W (नगरीय निकायों के विषय, 5 अंक), 2024 में अनुसूचित क्षेत्र पंचायती राज अधिनियम की चुनौतियाँ (10 अंक) और 2016 में पंचायतों में महिला-आरक्षण का प्रभाव (5 अंक) आए। 2013-2024 के पेपरों में देखा गया रुझान है कि SEC को इन प्रश्नों के साथ जोड़कर लिखने से उत्तर गहरा बनता है।
- परीक्षार्थी सबसे ज़्यादा राज्य निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग को मिलाते हैं। नियुक्त करने वाला, चुनाव का दायरा और हटाने की रीति, तीनों में अंतर साफ़ रखिए।
पहले सरल भाषा में: अपने ही मैच में अंपायर कौन?
सोचिए गाँव में सरपंच का चुनाव है। मतदाता-सूची कौन बनाए, मतदान की तारीख़ कौन तय करे, गिनती कौन कराए? अगर यह सब वही सरकार करे जिसके दल के लोग चुनाव लड़ रहे हैं, तो निष्पक्षता पर सवाल उठेगा, ठीक वैसे जैसे किसी मैच में एक टीम का कप्तान ही अंपायर बन जाए। इसलिए संविधान ने स्थानीय चुनावों के लिए अलग, स्वतंत्र अंपायर बनाया: राज्य निर्वाचन आयोग। (यह समझाने के लिए गढ़ा गया उदाहरण है; तर्क विश्लेषण है, किसी दस्तावेज़ का उद्धरण नहीं।)
परीक्षा के लिए सटीक परिभाषा: राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) वह संवैधानिक निकाय है जो अनुच्छेद 243K के अंतर्गत पंचायतों के और अनुच्छेद 243ZA के अंतर्गत नगरपालिकाओं के सभी चुनावों तथा उनकी मतदाता-सूची की तैयारी का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करता है। इसमें एक राज्य निर्वाचन आयुक्त होता है, जिसे राज्यपाल नियुक्त करता है।
यह निकाय केवल स्थानीय निकायों के चुनाव देखता है। लोकसभा, विधानसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव अनुच्छेद 324 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग कराता है।
संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 243K और 243ZA
73वें संविधान संशोधन ने 24 अप्रैल 1993 से भाग IX (पंचायतें) जोड़ा, और 74वें संशोधन ने 1 जून 1993 से भाग IXA (नगरपालिकाएँ)। इन्हीं भागों के अनुच्छेद 243K और 243ZA राज्य निर्वाचन आयोग की नींव हैं। अनुच्छेद 243K(1) कहता है कि पंचायतों की मतदाता-सूची की तैयारी का और सभी पंचायत-चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा, जिसमें राज्यपाल द्वारा नियुक्त एक राज्य निर्वाचन आयुक्त होगा। अनुच्छेद 243ZA(1) यही काम नगरपालिकाओं के लिए उसी आयोग को सौंपता है; यानी अलग आयोग नहीं, एक ही आयोग।
तीन और बातें याद रखें। एक, आयोग "एक-सदस्यीय" है: अनुच्छेद 243K में एक राज्य निर्वाचन आयुक्त का ही उल्लेख है, जबकि ECI में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के साथ अन्य निर्वाचन आयुक्त भी हो सकते हैं (अनुच्छेद 324(2))। दो, चुनाव कब तक होने चाहिए यह भी संविधान ने तय किया है: पंचायत (243E(3)) और नगरपालिका (243U(3)) की पाँच वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले, और विघटन की स्थिति में विघटन से छह माह के भीतर। तीन, चुनाव को चुनौती केवल चुनाव-याचिका से दी जा सकती है, जो राज्य के क़ानून में तय प्राधिकारी के सामने होती है (243O(ख) और 243ZG(ख)), यानी साधारण मुक़दमों के रास्ते नहीं।
संबंधित अनुच्छेदों का सार
| अनुच्छेद | क्या कहता है |
|---|---|
| 243K(1) | पंचायतों की मतदाता-सूची और चुनाव का अधीक्षण, निर्देशन, नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग में; आयोग में राज्यपाल द्वारा नियुक्त एक राज्य निर्वाचन आयुक्त |
| 243K(2) | सेवा-शर्तें और कार्यकाल राज्य के क़ानून के अधीन राज्यपाल के नियम से; आयुक्त को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भाँति ही हटाया जा सकता है; सेवा-शर्तें नियुक्ति के बाद नुक़सान की दिशा में नहीं बदलेंगी |
| 243K(3) | आयोग के अनुरोध पर राज्यपाल आवश्यक कर्मचारी उपलब्ध कराएगा |
| 243K(4) | चुनावों से जुड़े सभी विषयों पर राज्य विधानमंडल, संविधान के अधीन, क़ानून बना सकता है |
| 243ZA(1) | नगरपालिकाओं के चुनाव और मतदाता-सूची का अधीक्षण, निर्देशन, नियंत्रण भी इसी आयोग में |
| 243ZA(2) | नगरपालिका-चुनावों पर राज्य विधानमंडल क़ानून बना सकता है |
| 243E(3), 243U(3) | पंचायत/नगरपालिका का चुनाव अवधि की समाप्ति से पहले, या विघटन से छह माह के भीतर पूरा हो |
नियुक्ति, कार्यकाल और हटाना: स्वतंत्रता की तीन परतें
नियुक्ति राज्यपाल करता है। संविधान न आयुक्त की योग्यता बताता है, न कार्यकाल की संख्या; अनुच्छेद 243K(2) कहता है कि सेवा-शर्तें और पद की अवधि राज्य विधानमंडल के क़ानून के अधीन रहकर राज्यपाल के बनाए नियम से तय होंगी। इसलिए योग्यता और कार्यकाल राज्य-दर-राज्य अलग हो सकते हैं।
स्वतंत्रता की पहली परत है हटाने की कठिन प्रक्रिया: आयुक्त को उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिन पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को। विश्लेषण: अनुच्छेद 217(1)(ख) और 218 के माध्यम से अनुच्छेद 124(4) लागू होता है, जिसके अनुसार संसद के हर सदन का, कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित-मतदान करने वालों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से समर्थित, समावेदन (address) राष्ट्रपति को मिलने पर ही, सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर, हटाया जा सकता है। यानी मुख्यमंत्री या राज्यपाल सीधे नहीं हटा सकते।
दूसरी परत: सेवा-शर्तें नियुक्ति के बाद नुक़सान की दिशा में नहीं बदली जा सकतीं। तीसरी परत: राज्यपाल को आयोग के अनुरोध पर कर्मचारी उपलब्ध कराने होते हैं (243K(3)), यानी आयोग को अपने काम के लिए सरकार से अनुमति माँगने की स्थिति में नहीं छोड़ा गया। उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने भी इसी आधार पर माना है कि राज्य निर्वाचन आयोग का दर्जा स्वतंत्र है (नीचे केस स्टडी)।
कार्य और शक्तियाँ
मुख्य कार्य एक वाक्य में: स्थानीय निकायों की मतदाता-सूची तैयार कराना और उनके चुनाव कराना। "चुनाव कराना" में समय-सारणी और अधिसूचना, नामांकन, मतदान और मतगणना की पूरी व्यवस्था आती है (विश्लेषण)। उच्चतम न्यायालय ने ECI के "अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण" तथा "चुनाव-संचालन" जैसे शब्दों की व्याख्या "व्यापकतम अर्थ में" की है, और किशनसिंह तोमर (2006) में कहा कि अपने क्षेत्र में राज्य निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ ECI की शक्तियों से कम नहीं हैं।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 इसी व्यापक शक्ति को ठोस रूप देता है। धारा 119 के अनुसार मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य सरकार का वह अधिकारी होता है जिसे आयोग सरकार से परामर्श करके नामित करे; वह आयोग के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में मतदाता-सूची और चुनावों की देख-रेख करता है। हर ज़िले में आयोग एक ज़िला निर्वाचन अधिकारी भी नामित करता है। धारा 119-B के अनुसार चुनाव और मतदाता-सूची के काम में लगे अधिकारी और कर्मचारी उस अवधि में आयोग के नियंत्रण में प्रतिनियुक्ति पर माने जाते हैं। धारा 120 के अनुसार आयोग के कार्य उप-निर्वाचन आयुक्त या आयोग के सचिव भी कर सकते हैं।
आयोग की एक और शक्ति धारा 22-A में है: चुनाव-अवधि में वह उम्मीदवार के वाहनों, लाउडस्पीकरों और कट-आउट, होर्डिंग, पोस्टर और बैनर पर उचित प्रतिबंध लगा सकता है। प्रतिबंध तोड़ने पर दोषसिद्ध होने पर दो हज़ार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है और आयोग के आदेश से व्यक्ति छह वर्ष तक पंचायती राज संस्था का सदस्य बनने के अयोग्य हो सकता है; आयोग बाद में कारण दर्ज करके अयोग्यता हटा या घटा भी सकता है। अपराध का संज्ञान केवल आयोग द्वारा अधिकृत अधिकारी की शिकायत पर लिया जाता है।
सीमाएँ: आयोग लोकसभा, विधानसभा, राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव नहीं कराता; वह चुनाव-विवाद का निर्णय भी नहीं करता, क्योंकि चुनाव-याचिका राज्य के क़ानून द्वारा तय प्राधिकारी सुनता है; और उसे राज्य विधानमंडल के बनाए चुनाव-संबंधी क़ानूनों के अधीन काम करना होता है, जब तक वे उसकी संवैधानिक शक्तियों का अतिक्रमण न करें (अनुच्छेद 243K(4); किशनसिंह तोमर)।
आयोग के कार्य और उनका क़ानूनी आधार: एक नज़र में
| कार्य | आधार |
|---|---|
| पंचायतों और नगरपालिकाओं की मतदाता-सूची तैयार कराना | अनुच्छेद 243K(1), 243ZA(1); राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, धारा 119 |
| सभी चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण | अनुच्छेद 243K(1), 243ZA(1) |
| मुख्य निर्वाचन अधिकारी और ज़िला निर्वाचन अधिकारी नामित करना | राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, धारा 119(1), (3) |
| चुनाव-कर्मचारियों पर नियंत्रण | अनुच्छेद 243K(3); धारा 119, 119-B |
| चुनाव-काल में वाहन, लाउडस्पीकर, होर्डिंग आदि पर प्रतिबंध | राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, धारा 22-A |
| अपने कार्य उप-निर्वाचन आयुक्त या सचिव से करवाना | राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, धारा 120 |
यह आयोग क्यों ज़रूरी हुआ: विकेंद्रीकरण की चुनावी नींव
विश्लेषण: संविधान संशोधनों ने पंचायतों और नगरपालिकाओं को पाँच वर्ष की निश्चित अवधि दी (243E, 243U), पर अवधि का अर्थ तभी है जब चुनाव समय पर हों। यदि चुनाव की तारीख़ और मतदाता-सूची का नियंत्रण उसी सरकार के पास रहे जिसके विधायक और मंत्री स्थानीय राजनीति से जुड़े हैं, तो असुविधाजनक समय पर चुनाव टालने का प्रलोभन रहेगा। राज्य निर्वाचन आयोग इसी जोखिम को घटाने की संस्थागत व्यवस्था है: आयोग स्वतंत्र है, आयुक्त आसानी से हटाया नहीं जा सकता और समय-सीमा संविधान में लिखी है।
इसीलिए इसे पंचायती राज की लोकतांत्रिक नींव कहा जा सकता है। कार्य, धन और कर्मचारी (3F) का हस्तांतरण स्थानीय निकायों को शक्ति देता है, और नियमित स्वतंत्र चुनाव यह तय करते हैं कि वह शक्ति जनता के प्रति जवाबदेह रहे। 3F का पूरा विवरण केंद्रीकरण-विकेंद्रीकरण वाले पृष्ठ पर है।
सीमाएँ और चुनौतियाँ (विश्लेषण)
स्वतंत्रता के बावजूद चार कमज़ोरियाँ गिनाई जा सकती हैं। एक, कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार पर निर्भरता: अनुच्छेद 243K(3) में राज्यपाल कर्मचारी उपलब्ध कराता है और राजस्थान के अधिनियम की धारा 119-B में चुनाव-कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर माने जाते हैं, इसलिए आयोग की अपनी स्थायी मशीनरी सीमित रहती है। दो, योग्यता और कार्यकाल राज्य-दर-राज्य अलग हैं, क्योंकि संविधान ने इन्हें राज्यपाल के नियम और राज्य के क़ानून पर छोड़ा है; इसलिए स्वतंत्रता की मज़बूती भी राज्यों में समान नहीं।
तीन, अनुच्छेद 243K(4) और 243ZA(2) के अनुसार चुनाव-संबंधी क़ानून राज्य विधानमंडल बनाता है; इसलिए आयोग की कार्य-प्रक्रिया पर राज्य के क़ानून का असर रहता है, जिसकी सीमा संविधान और न्यायालय तय करते हैं (किशनसिंह तोमर)। चार, आयोग के पास ECI जैसा बहु-सदस्यीय ढाँचा नहीं है, इसलिए निर्णय एक ही व्यक्ति पर टिके हैं। उत्तर में इन्हें "सीमाएँ" शीर्षक से दो-तीन बिंदुओं में लिखना काफ़ी है।
राज्य निर्वाचन आयोग बनाम भारत निर्वाचन आयोग
राज्य निर्वाचन आयोग (SEC)
संवैधानिक आधारअनुच्छेद 243K (पंचायत) और 243ZA (नगरपालिका)
कौन-से चुनावपंचायतों और नगरपालिकाओं के
बनावटएक राज्य निर्वाचन आयुक्त
नियुक्त करने वालाराज्यपाल
हटाने की रीतिउच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भाँति
सेवा-शर्तें किसके अधीनराज्य विधानमंडल के क़ानून के अधीन राज्यपाल के नियम
चुनाव-संबंधी क़ानूनराज्य विधानमंडल (243K(4), 243ZA(2))
भारत निर्वाचन आयोग (ECI)
संवैधानिक आधारअनुच्छेद 324
कौन-से चुनावसंसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के
बनावटमुख्य निर्वाचन आयुक्त और राष्ट्रपति द्वारा तय संख्या में अन्य निर्वाचन आयुक्त
नियुक्त करने वालाराष्ट्रपति (संसद के क़ानून के अधीन)
हटाने की रीतिमुख्य निर्वाचन आयुक्त: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की भाँति
सेवा-शर्तें किसके अधीनसंसद के क़ानून के अधीन राष्ट्रपति के नियम
चुनाव-संबंधी क़ानूनसंसद और राज्य विधानमंडल (अनुच्छेद 327, 328)
ECI का पूरा विवरण अलग पृष्ठ पर है; यहाँ केवल अंतर दिए गए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव तक: राजस्थान का क़ानूनी ढाँचा
राज्यपाल राज्य निर्वाचन आयुक्त को नियुक्त करता है
अनुच्छेद 243K(1)
आयोग मुख्य निर्वाचन अधिकारी और ज़िला निर्वाचन अधिकारी नामित करता है
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, धारा 119, सरकार से परामर्श से
मतदाता-सूची तैयार और संशोधित होती है
आयोग के अधीक्षण में; सरकार या स्थानीय प्राधिकारी आयोग द्वारा नामित (धारा 119)
चुनाव का संचालन
अधिकारी और कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर आयोग के नियंत्रण में (धारा 119-B)
चुनाव-विवाद
राज्य के क़ानून द्वारा तय प्राधिकारी को चुनाव-याचिका (अनुच्छेद 243O(ख))
एक नज़र में: राज्य निर्वाचन आयोग
राज्य निर्वाचन आयोग
आधार
- अनुच्छेद 243K: पंचायतें
- अनुच्छेद 243ZA: नगरपालिकाएँ
- 73वाँ (24-4-1993), 74वाँ (1-6-1993)
नियुक्ति और हटाना
- राज्यपाल नियुक्त करता है
- एक राज्य निर्वाचन आयुक्त
- हटाना: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भाँति
कार्य
- मतदाता-सूची की तैयारी
- सभी चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन, नियंत्रण
- आचरण-प्रतिबंध (राजस्थान: धारा 22-A)
सीमाएँ
- विधानसभा/लोकसभा चुनाव ECI के
- चुनाव-याचिका राज्य के प्राधिकारी को
- राज्य के चुनाव-क़ानूनों के अधीन
मुख्य तथ्य
- पंचायतों के चुनाव का आधार
- अनुच्छेद 243K (भाग IX; 73वाँ संशोधन, 24-4-1993 से)
- नगरपालिकाओं के चुनाव का आधार
- अनुच्छेद 243ZA (भाग IXA; 74वाँ संशोधन, 1-6-1993 से)
- बनावट
- एक राज्य निर्वाचन आयुक्त, राज्यपाल द्वारा नियुक्त (243K(1))
- हटाने की रीति
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भाँति (243K(2) का परंतुक)
- कर्मचारी
- आयोग के अनुरोध पर राज्यपाल उपलब्ध कराता है (243K(3))
- चुनाव की समय-सीमा
- अवधि समाप्त होने से पहले, या विघटन से छह माह के भीतर (243E(3), 243U(3))
- चुनाव-याचिका
- राज्य के क़ानून द्वारा तय प्राधिकारी को (243O(ख), 243ZG(ख))
- संविधान पीठ का निर्णय
- किशनसिंह तोमर बनाम अहमदाबाद नगर निगम, 19-10-2006: SEC की शक्तियाँ अपने क्षेत्र में ECI से कम नहीं
- राजस्थान में चुनाव-मशीनरी
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी और ज़िला निर्वाचन अधिकारी आयोग द्वारा नामित (राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994, धारा 119)
राजस्थान का पहलू
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 2(1)(xxii) "राज्य निर्वाचन आयोग" को संविधान के अनुच्छेद 243K में वर्णित आयुक्त के रूप में परिभाषित करती है; धारा 119, 119-B और 120 में आयोग की निर्वाचन-मशीनरी की व्यवस्था है, और धारा 22-A में चुनाव-काल के आचरण-प्रतिबंध (अधिनियम का संशोधन-सहित पाठ, PRS पर उपलब्ध)। संविधान के अनुच्छेद 243K और 243ZA के अनुसार आयोग राजस्थान में पंचायतों (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, ज़िला परिषद) और नगरपालिकाओं के चुनाव कराता है। पदधारक आयुक्त का नाम समय के साथ बदलता है, इसलिए रटने के बजाय आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देख लें।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- राज्य निर्वाचन आयोग को विधानसभा या लोकसभा के चुनाव कराने वाला बताना: ये अनुच्छेद 324 के अंतर्गत ECI का काम हैं। SEC केवल पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव कराता है।
- मुख्यमंत्री या राज्य सरकार को आयुक्त का नियुक्तिकर्ता लिखना: अनुच्छेद 243K(1) में नियुक्ति राज्यपाल करता है। (विश्लेषण: व्यवहार में राज्यपाल सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह से कार्य करता है, पर संवैधानिक पाठ "राज्यपाल" कहता है।)
- आयोग को बहु-सदस्यीय बताना: 243K में एक राज्य निर्वाचन आयुक्त है।
- 243K और 243ZA को गडमड करना: 243K पंचायतों के लिए है, 243ZA नगरपालिकाओं के लिए, और नगरपालिकाओं के लिए आयोग वही है जो 243K में बताया गया।
- यह लिखना कि संविधान आयुक्त की योग्यता और कार्यकाल तय करता है: यह राज्यपाल के नियमों और राज्य के क़ानून पर छोड़ा गया है।
- हटाने की रीति में 'राज्यपाल हटाता है' लिखना: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी कठिन प्रक्रिया लागू होती है।
- 2 अंक के उत्तर में केवल "चुनाव कराता है" लिखना: अनुच्छेद, मतदाता-सूची और "अधीक्षण, निर्देशन, नियंत्रण" शब्द जोड़ें।
केस स्टडी: किशनसिंह तोमर बनाम अहमदाबाद नगर निगम (2006)
केस स्टडीक्या राज्य निर्वाचन आयोग राज्य सरकार की मर्ज़ी पर चलता है?
किशनसिंह तोमर ने गुजरात उच्च न्यायालय में रिट याचिका लगाकर अहमदाबाद नगर निगम, गुजरात राज्य और गुजरात राज्य निर्वाचन आयोग से माँग की कि निगम की अवधि समाप्त होने से पहले चुनाव कराने के लिए सभी आवश्यक क़दम उठाए जाएँ। उच्च न्यायालय की खंडपीठ के निर्णय के विरुद्ध अपील उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ (मुख्य न्यायाधीश वाई.के. सभरवाल सहित पाँच न्यायाधीश) के सामने आई और 19 अक्टूबर 2006 को निर्णय हुआ। यहाँ निर्णय का केवल वह सिद्धांत लिया गया है जो इस पृष्ठ के विषय के लिए काम का है।
- शब्दों की व्याख्या
- न्यायालय ने कहा कि "अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण" तथा "चुनाव-संचालन" की व्याख्या ECI के संदर्भ में व्यापकतम अर्थ में की गई है, और प्रश्न यह था कि क्या यही बात राज्य निर्वाचन आयोग पर भी लागू होती है।
- समान शक्तियाँ
- न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि चुनाव-संचालन में राज्य निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ अपने-अपने क्षेत्र में भारत निर्वाचन आयोग से कम नहीं हैं।
- क़ानून की सीमा
- ये शक्तियाँ संसद या राज्य विधानमंडल के क़ानूनों के अधीन हैं, पर तभी तक जब तक क़ानून इन आयोगों की पूर्ण (plenary) शक्तियों का अतिक्रमण न करें।
- स्वतंत्र दर्जा
- न्यायालय ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव और मतदाता-सूची में अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए संबंधित राज्य सरकारों से स्वतंत्र रूप से कार्य करना है, और अनुच्छेद 243K(3) भी आयोग के स्वतंत्र दर्जे को मान्यता देता है।
सीख
संविधान ने राज्य निर्वाचन आयोग को केवल एक सरकारी विभाग नहीं, बल्कि स्वतंत्र संवैधानिक अंपायर बनाया है। उत्तर में "स्वतंत्रता" की बात लिखते समय अनुच्छेद 243K(2) (हटाने की रीति), 243K(3) (कर्मचारी) और इस निर्णय का उल्लेख अंक बढ़ाता है।
कार्य-उदाहरण: चुनाव कब तक पूरा होना चाहिए (कल्पित तिथियाँ)
हल सहित उदाहरणअनुच्छेद 243E(3) की समय-सीमा का हिसाब
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; पंचायत और तिथियाँ काल्पनिक हैं।
- एक पंचायत की पहली बैठक 10 जनवरी 2021 को हुई।
- अनुच्छेद 243E(1): पंचायत पहली बैठक की तिथि से पाँच वर्ष तक चलती है। 243E(3): चुनाव अवधि समाप्त होने से पहले, या विघटन से छह माह के भीतर पूरा होना चाहिए।
- 1चरण 1: अवधि का अंत 10 जनवरी 2021 से पाँच वर्ष पूरे होते हैं 9 जनवरी 2026 को; नई पंचायत का चुनाव इस अवधि की समाप्ति से पहले पूरा हो जाना चाहिए।
- 2चरण 2: समय से पहले विघटन मान लीजिए यह पंचायत 10 जनवरी 2025 को भंग हो जाती है। बची हुई अवधि लगभग एक वर्ष (जनवरी 2026 तक) है, जो छह माह से अधिक है।
- 3चरण 3: छह माह की सीमा चूँकि बची अवधि छह माह से अधिक है, नया चुनाव विघटन से छह माह के भीतर, यानी 10 जुलाई 2025 तक, पूरा होना चाहिए (243E(3)(ख))।
- 4चरण 4: नई पंचायत का कार्यकाल इस तरह चुनी गई पंचायत केवल बची हुई अवधि, यानी 9 जनवरी 2026 तक चलेगी (243E(4)), पाँच वर्ष नहीं।
- 5चरण 5: अपवाद यदि विघटन के समय बची अवधि छह माह से कम होती, तो उस बची अवधि के लिए चुनाव कराना आवश्यक नहीं होता (243E(3) का परंतुक)।
निष्कर्ष: आयोग का काम इसी संवैधानिक घड़ी के भीतर चुनाव पूरा कराना है; घड़ी तय करना आयोग का नहीं, संविधान का काम है। नगरपालिकाओं के लिए यही नियम अनुच्छेद 243U(3) में है।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2023RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
Main function of the State Election Commission
आदर्श उत्तर
पंचायतों-नगरपालिकाओं की मतदाता-सूची बनवाना और उनके चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन, नियंत्रण करना (अनु. 243K, 243ZA)।
अभ्यास प्रश्न (हमारे अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
राज्य निर्वाचन आयुक्त को कौन नियुक्त करता है और उसे कैसे हटाया जाता है?
आदर्श उत्तर
राज्यपाल नियुक्त करता है; हटाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी रीति से ही संभव (अनु. 243K)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
राज्य निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग में अंतर लिखिए।
आदर्श उत्तर
राज्य निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 243K और 243ZA से पंचायतों व नगरपालिकाओं के चुनाव कराता है; भारत निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 324 से संसद, विधानमंडल, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के। SEC में राज्यपाल-नियुक्त एक आयुक्त होता है, ECI में राष्ट्रपति-नियुक्त मुख्य आयुक्त सहित अन्य आयुक्त। हटाने की रीति क्रमशः उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
राज्य निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता किन प्रावधानों से सुनिश्चित होती है?
आदर्श उत्तर
अनुच्छेद 243K में आयुक्त को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भाँति ही हटाया जा सकता है, और उसकी सेवा-शर्तें नियुक्ति के बाद नुक़सान की दिशा में नहीं बदली जा सकतीं। राज्यपाल को आयोग के अनुरोध पर कर्मचारी देने होते हैं। किशनसिंह तोमर (2006) में उच्चतम न्यायालय ने आयोग को राज्य सरकार से स्वतंत्र माना।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्य और शक्तियों की व्याख्या राजस्थान के संदर्भ में कीजिए।
आदर्श उत्तर
अनुच्छेद 243K और 243ZA के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों और नगरपालिकाओं की मतदाता-सूची की तैयारी तथा सभी चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करता है। उच्चतम न्यायालय ने किशनसिंह तोमर (2006) में माना कि अपने क्षेत्र में उसकी शक्तियाँ ECI से कम नहीं हैं।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अनुसार आयोग मुख्य निर्वाचन अधिकारी और ज़िला निर्वाचन अधिकारी नामित करता है (धारा 119), चुनाव-कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर उसके नियंत्रण में रहते हैं (119-B), और वह चुनाव-काल में वाहन, लाउडस्पीकर और होर्डिंग पर प्रतिबंध लगा सकता है (22-A)। चुनाव-विवाद उसके पास नहीं, चुनाव-याचिका प्राधिकारी के पास जाते हैं।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न: "राज्य निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्थिति, स्वतंत्रता और कार्यों का विवेचन कीजिए।" पहले वाक्य में अनुच्छेद 243K और 243ZA, और 73वें-74वें संशोधन का नाम दें।
मुख्य भाग
- बनावट: राज्यपाल-नियुक्त एक राज्य निर्वाचन आयुक्त; कार्य: पंचायतों और नगरपालिकाओं की मतदाता-सूची और सभी चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन, नियंत्रण
- स्वतंत्रता: हटाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भाँति; सेवा-शर्तें नुक़सान की दिशा में नहीं; कर्मचारी राज्यपाल से (243K(3))
- ECI से अंतर: विषय-क्षेत्र (स्थानीय बनाम संसद/विधानमंडल), नियुक्तिकर्ता (राज्यपाल बनाम राष्ट्रपति), बनावट (एक आयुक्त बनाम बहु-सदस्यीय)
- राजस्थान: पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 119 (मुख्य निर्वाचन अधिकारी, ज़िला निर्वाचन अधिकारी), 22-A (आचरण-प्रतिबंध)
- न्यायिक पुष्टि: किशनसिंह तोमर (2006), SEC की शक्तियाँ अपने क्षेत्र में ECI से कम नहीं
निष्कर्ष
निष्कर्ष: विकेंद्रीकरण तभी सार्थक है जब स्थानीय चुनाव नियमित, समय पर और निष्पक्ष हों; इसके लिए स्वतंत्र SEC और समय-सीमा का पालन दोनों ज़रूरी हैं।
अतिरिक्त मूल्य
- 243E(3)/243U(3) की छह माह की समय-सीमा का उल्लेख करें
- हटाने की कठिन प्रक्रिया (243K(2) का परंतुक) को स्वतंत्रता का मुख्य रक्षोपाय बताएँ
- सुझाव (विश्लेषण): राज्य सरकारों द्वारा चुनाव टालने की प्रवृत्ति रोकने के लिए समय-सीमा का सख़्त पालन
त्वरित पुनरावृत्ति
- SEC: अनुच्छेद 243K (पंचायत) और 243ZA (नगरपालिका); भाग IX (24-4-1993) और IXA (1-6-1993)
- बनावट: एक राज्य निर्वाचन आयुक्त; नियुक्ति राज्यपाल
- सेवा-शर्तें और कार्यकाल: राज्यपाल का नियम, राज्य विधानमंडल के क़ानून के अधीन
- हटाना: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भाँति; सेवा-शर्तें नुक़सान की दिशा में नहीं बदलेंगी
- कार्य: मतदाता-सूची की तैयारी और सभी चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन, नियंत्रण
- 243K(3): अनुरोध पर राज्यपाल कर्मचारी उपलब्ध कराएगा; 243K(4): राज्य विधानमंडल चुनाव-संबंधी क़ानून बनाएगा
- चुनाव-अवधि: 243E(3), 243U(3): अवधि समाप्ति से पहले, या विघटन से छह माह के भीतर
- चुनाव-याचिका: राज्य के क़ानून में तय प्राधिकारी (243O(ख), 243ZG(ख))
- किशनसिंह तोमर (19-10-2006): SEC की शक्तियाँ अपने क्षेत्र में ECI से कम नहीं; राज्य सरकार से स्वतंत्र
- राजस्थान: पंचायती राज अधिनियम 1994, धारा 119 (CEO, ज़िला निर्वाचन अधिकारी), 22-A, 119-B, 120
- ECI अलग: अनुच्छेद 324; राष्ट्रपति-नियुक्त; संसद, विधानमंडल, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति के चुनाव
याद रखने योग्य शब्द
- अनुच्छेद 243K
- अनुच्छेद 243ZA
- एक राज्य निर्वाचन आयुक्त
- अधीक्षण निर्देशन नियंत्रण
- 243E(3)
- किशनसिंह तोमर
- धारा 119
- चुनाव-याचिका