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पेपर III · इकाई II

राज्य सचिवालय और मुख्य सचिव

राज्य सचिवालय क्या करता है, अनुच्छेद 166 के नियमों से वह कैसे चलता है, मुख्य सचिव की भूमिका, और सचिवालय तथा निदेशालय में अंतर, उत्तर-लेखन की दृष्टि से।

  • सचिवालय
  • अनुच्छेद 166
  • मुख्य सचिव
  • सचिवालय बनाम निदेशालय
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II, "State and District Administration": "State: Governor, Chief Minister, Council of Ministers, State Secretariat, Chief Secretary, role of Directorates, police administration, Revenue Board, State Election Commission, State Human Rights Commission, Lokayukta." इस पृष्ठ पर राज्य सचिवालय और मुख्य सचिव हैं, साथ में सचिवालय बनाम निदेशालय का अंतर; निदेशालयों की भूमिका और राजस्थान के निदेशालयों के मुख्यालय अलग पृष्ठ पर हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • "सचिवालय बनाम निदेशालय" 2013 (2 अंक) और 2021 (5 अंक) में सीधे पूछा गया; दोनों बार भेद माँगा गया था। इसलिए तालिका रटने के बजाय एक उदाहरण के साथ लिखना सीखें।
  • सिलेबस में "State Secretariat" और "Chief Secretary" दोनों नाम से हैं। 2013-2024 के छह संकलित पेपरों में मुख्य सचिव पर सीधा प्रश्न दर्ज नहीं है, पर सूची में नाम होने से 2 या 5 अंक का प्रश्न कभी भी आ सकता है; इसीलिए इस पृष्ठ पर उसकी भूमिका अलग से दी है।
  • यहाँ का ढाँचा बाक़ी राज्य-प्रशासन के उत्तरों में भी काम आता है: मुख्यमंत्री की भूमिका, राज्यपाल, कलेक्टर, प्रशासनिक सुधार और प्रत्यायोजन, सब इसी "नीति ऊपर, अमल नीचे" वाली रेखा से जुड़ते हैं।

पहले सरल भाषा में: नीति की मेज़ और काम की कुर्सी

मान लीजिए राज्य सरकार तय करती है कि हर गाँव के राशन-डिपो पर तौल की जाँच कड़ी होगी। यह फ़ैसला कहाँ बनता है? राजधानी की उस इमारत में जहाँ संबंधित विभाग का मंत्री और उसके साथ सचिव फ़ाइल पर चर्चा करते हैं, वित्त और विधि विभाग की राय लेते हैं और अंत में आदेश का मसौदा तैयार होता है। यही काम सचिवालय (Secretariat) का है: सोचना, योजना बनाना, नियम गढ़ना, बजट की मंज़ूरी दिलाना और मंत्री को सलाह देना। पर तराज़ू जाँचने कौन जाएगा? निरीक्षक, ज़िले के अधिकारी और उनके ऊपर बैठा निदेशक। अमल का यह ढाँचा निदेशालय (Directorate) कहलाता है। (यह समझाने के लिए गढ़ा गया उदाहरण है; किसी वास्तविक आदेश का वर्णन नहीं।)

परीक्षा के लिए सटीक रूप: राज्य सचिवालय राज्य सरकार का शीर्ष प्रशासनिक कार्यालय-समूह है, जिसमें अलग-अलग प्रशासनिक विभाग मंत्री के राजनीतिक नेतृत्व और सचिव के प्रशासनिक नेतृत्व में नीति-निर्माण, क़ानून और नियमों का मसौदा, बजट, समन्वय और निगरानी का काम करते हैं। निदेशालय विभागाध्यक्ष (Head of Department) का कार्यालय है, जो इन नीतियों को संभाग, ज़िला और ब्लॉक के कार्यालयों के सहारे लागू कराता है। दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC, 2009) ने सचिवालय को राज्य प्रशासन का शीर्ष स्तर (top most echelon) बताया है, जिसका मुख्य काम मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को सहायता देना है।

एक और बात याद रखने लायक़ है। मंत्री निश्चित अवधि के लिए चुने जाते हैं, पर सचिवालय के अधिकारी स्थायी सेवा में रहते हैं। इसलिए आयोग के शब्दों में सचिवालय सरकार की "स्मृति-निधि" (memory bank) है: सरकार बदले तो भी नीतियों और योजनाओं की निरंतरता यही बनाए रखता है।

संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 163, 166 और 167

अनुच्छेद 163(1) कहता है कि राज्यपाल को उसके कार्यों में सहायता और सलाह देने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद होगी, सिवाय उन मामलों के जिनमें संविधान के अनुसार राज्यपाल को अपने विवेक से काम करना है। यानी सरकार का राजनीतिक नेतृत्व मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के हाथ में है। सचिवालय इसी नेतृत्व का प्रशासनिक सहारा है।

अनुच्छेद 166 बताता है कि राज्य की सरकार का कामकाज कैसे चलेगा। 166(1): राज्य की कार्यपालिका की सब कार्रवाई राज्यपाल के नाम से की जाएगी। यही कारण है कि सरकारी आदेशों में "राज्यपाल महोदय की स्वीकृति से" या "By order of the Governor" जैसे शब्द आते हैं। 166(2): राज्यपाल के नाम से बने आदेश उन नियमों के अनुसार प्रमाणित होंगे जो राज्यपाल बनाएगा, और प्रमाणित आदेश पर यह कहकर आपत्ति नहीं की जा सकेगी कि वह राज्यपाल ने स्वयं नहीं बनाया। 166(3): राज्यपाल राज्य सरकार के कार्य के अधिक सुविधाजनक संचालन के लिए और मंत्रियों में उस कार्य के आवंटन के लिए नियम बनाएगा, उन मामलों को छोड़कर जिनमें राज्यपाल को संविधान के अनुसार विवेक से काम करना है। इन्हीं नियमों को आम बोलचाल में कार्य-संचालन नियम या Rules of Business कहते हैं।

नियमों का असली अर्थ समझिए। जैसे किसी विद्यालय में समय-सारिणी तय करती है कि कौन-सा विषय किस अध्यापक के पास रहेगा, वैसे ही ये नियम तय करते हैं कि कौन-सा विषय किस मंत्री और किस विभाग के पास रहेगा। इसी बँटवारे से सचिवालय के विभाग बनते हैं: एक विभाग यानी मंत्री को आवंटित कार्य का एक समूह (विश्लेषण)। अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि वह मंत्रिपरिषद के प्रशासन-संबंधी सब निर्णय और विधायी प्रस्ताव राज्यपाल को बताए, माँगी गई सूचना दे, और राज्यपाल चाहें तो किसी मंत्री द्वारा लिया गया पर परिषद के सामने न आया निर्णय परिषद के विचार के लिए रखे।

दो जाल जिनसे बचें। पहला: संविधान में "Secretariat" शब्द केवल संसद के सचिवालय (अनुच्छेद 98) और राज्य विधानमंडल के सचिवालय (अनुच्छेद 187) के लिए आता है। विधानसभा का सचिवालय और राज्य सरकार का सचिवालय अलग-अलग संस्थाएँ हैं। दूसरा: संविधान के पाठ में राज्य सरकार के सचिवालय या निदेशालय पर कोई अनुच्छेद नहीं है; यह कार्यपालिका की अपनी व्यवस्था है, जो अनुच्छेद 166(3) के नियमों और सरकारी आदेशों से चलती है (पाठ में खोज के आधार पर विश्लेषण)। केंद्र के लिए यही व्यवस्था अनुच्छेद 77(3) में है, जहाँ राष्ट्रपति नियम बनाते हैं।

सचिवालय के सात कार्य (2nd ARC, 15वीं रिपोर्ट, पैरा 2.3.3.1)

कार्यआसान भाषा मेंगढ़ा हुआ उदाहरण
मंत्रियों को नीति-निर्माण में सहायतासामाजिक-आर्थिक विकास की नीतियों का मसौदा और विकल्पछात्रवृत्ति की नई योजना का प्रस्ताव
नियामक कार्यलाइसेंस, अनुमति, प्रतिबंध जैसे नियंत्रण-संबंधी निर्णयकिसी व्यवसाय के लिए पंजीकरण की शर्तें
क़ानून, नियम और विनियम का मसौदाविधेयक और अधीनस्थ विधान तैयार करनायोजना का क़ानूनी ढाँचा बनाना
समन्वय, निगरानी और परिणाम-विश्लेषणअलग-अलग विभागों की नीतियों को जोड़ना, प्रगति देखनाशिक्षा और पोषण विभाग की योजनाओं का मेल
बजट बनाना और व्यय पर नियंत्रणधन की व्यवस्था और ख़र्च की निगरानीयोजना के लिए राशि की मंज़ूरी
केंद्र सरकार के विभागों से संपर्ककेंद्र की योजनाओं और राज्य के बीच कड़ीकेंद्र प्रायोजित योजना की किस्त का मामला
प्रशासन-तंत्र की निगरानी और सुधारतंत्र की कुशलता, क्षमता और संवेदनशीलता बढ़ानाफ़ाइल-निपटान की समय-सीमा तय करना

पहला स्तंभ ARC की सूची का सार है; तीसरे स्तंभ के उदाहरण समझाने के लिए गढ़े गए हैं, वास्तविक आदेश नहीं।

सचिवालय का ढाँचा: मंत्री, सचिव और शाखाएँ

हर विभाग के दो नेता होते हैं। राजनीतिक नेता मंत्री है, जो जनता के प्रति जवाबदेह है। प्रशासनिक नेता सचिव है, जो स्थायी सेवा का अधिकारी है। केंद्र सरकार की कार्यालय-प्रक्रिया पुस्तिका (CSMOP) में सचिव को विभाग का प्रशासनिक प्रमुख और मंत्री का नीति-संबंधी मुख्य सलाहकार कहा गया है और उसकी ज़िम्मेदारी पूर्ण तथा अविभाजित बताई गई है। राज्य में भी ढाँचा इसी जैसा माना जाता है (विश्लेषण, केंद्र की व्यवस्था से समतुल्यता)।

राजस्थान के पदनाम सरकार के अपने दस्तावेज़ों में दिखते हैं। वित्त विभाग के आदेशों में प्रतिलिपि-सूची में "Additional Chief Secretaries / Principal Secretaries / Secretaries / Special Secretaries to the Government", और हस्ताक्षर करने वालों में "Secretary to the Government, Finance (Budget)" तथा "Joint Secretary to the Government" मिलते हैं। सूची में "All Sections of the Secretariat" भी है, यानी सचिवालय में काम शाखाओं (sections) में बँटा है और विभाग के अलावा मुख्यमंत्री का अपना कार्यालय अलग दिखता है ("ACS to Hon'ble Chief Minister")। इससे अधिक अंदर की पदानुक्रम-श्रेणियाँ (उप सचिव, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारी) राजस्थान के किसी आधिकारिक नियम से यहाँ सत्यापित नहीं हैं, इसलिए उन्हें पृष्ठ पर नहीं गिनाया गया।

फ़ाइल कितने स्तर से गुज़रे? 2nd ARC ने केंद्रीय सचिवालय के लिए सुझाया कि किसी फ़ाइल को निर्णय तक तीन से अधिक स्तरों से न गुज़रना पड़े, जहाँ मंत्री की मंज़ूरी चाहिए वहाँ फ़ाइल उप सचिव या निदेशक से शुरू होकर संयुक्त सचिव और सचिव के रास्ते मंत्री तक पहुँचे, और सचिव की मंज़ूरी वाले मामले केवल दो स्तरों से जाएँ। आयोग ने कहा कि ये सुझाव राज्यों के लिए भी प्रासंगिक हैं और कार्यालय-प्रक्रिया पुस्तिका नए सिरे से बनाने की बात की (पैरा 2.3.6.1)। यह सुझाव है, राजस्थान का नियम नहीं।

सचिवालय की समस्याएँ और 2nd ARC के सुझाव

आयोग का निदान कठोर है। उसके अनुसार सरकारी गतिविधियाँ बढ़ने, तंत्र की अपनी सुविधा और मजबूरियों के कारण राज्य सचिवालयों का आकार बहुत बढ़ा है, और कई विभाग प्रशासनिक तर्क से नहीं बने: ऐसे निकट कार्य जिनमें स्टाफ़ का कौशल भी एक जैसा था, टुकड़ों में बाँटकर अलग विभाग बना दिए गए, और कभी बहुत छोटा कार्य भी पूरा विभाग बन गया। आयोग की समग्र छाप थी कि सचिवालय "भारी-भरकम, धीमी चाल वाला" संगठन है, जिसमें देरी का स्वभाव अंदर बैठा है। आयोग ने यह भी लिखा कि गठबंधन सरकारों में बड़ी मंत्रिपरिषद के कारण विभाग बढ़ते हैं।

विभाग बहुत हों तो क्या नुक़सान? आयोग ने तीन गिनाए: ज़िम्मेदारी और जवाबदेही कई पदाधिकारियों में बिखर जाती है; समन्वय कठिन और निर्णय लंबे हो जाते हैं; और नौकरशाही बेवजह फैलती है, संरचना ख़ुद ही कार्यकुशलता और जनसेवा से अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए सुझाव मिला कि राज्य अपने विभागों की संख्या युक्तिसंगत करें: परस्पर जुड़े विषयों को एक विभाग में रखें, विभागों में तालमेल हो, बहुत-से कार्य पंचायतों और शहरी निकायों को सौंपे जाएँ, सचिवों को ग़ैर-ज़रूरी कार्यकारी काम से मुक्त किया जाए और निर्णय-प्रक्रिया सरल हो। आयोग के उदाहरण में बिहार में पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभागों को मिलाने और कृषि, पशु संसाधन तथा डेयरी को एक करने की बात है (पैरा 2.3.3.8)।

नीति और अमल का अलगाव इस विषय का दूसरा बड़ा सुझाव है। आयोग के अनुसार मंत्रालय/सचिवालय नीति और रणनीतिक निर्णय, बजट, क्रियान्वयन की निगरानी, प्रमुख कार्मिकों की नियुक्ति, समन्वय और मूल्यांकन पर ध्यान दें, जबकि संलग्न और अधीनस्थ कार्यालय क्रियान्वयन पर (पैरा 2.3.4.6)। साथ ही आयोग ने साफ़ माना कि नीति और क्रियान्वयन के बीच कोई जल-अभेद्य दीवार नहीं हो सकती, क्योंकि मंत्री अंततः दोनों के लिए विधानमंडल के प्रति जवाबदेह है (पैरा 2.3.4.5)। निष्कर्ष: सचिवालय और निदेशालय का भेद वास्तविक है, पर रेखा धुँधली है।

सचिवालय बनाम निदेशालय (2013 और 2021 का सीधा प्रश्न)

सचिवालय का विभाग

मूल कामनीति बनाना, क़ानून-नियम का मसौदा, बजट, समन्वय, निगरानी

नेतृत्वमंत्री (राजनीतिक) और सचिव (प्रशासनिक)

जनता से संपर्कसीधा कम; निर्णय राजधानी में

निर्णय की प्रकृतिनीतिगत और रणनीतिक

मुख्य दायित्वमंत्री को सलाह; विधानमंडल के प्रति मंत्री की जवाबदेही निभाने में मदद

राजस्थान का उदाहरण (सरकारी दस्तावेज़ से)वित्त विभाग (नियम प्रभाग) आदेश जारी करता है: Secretary/Joint Secretary to the Government के हस्ताक्षर से

निदेशालय (विभागाध्यक्ष का कार्यालय)

मूल कामनीति और आदेशों का क्षेत्र में क्रियान्वयन, सेवाओं की सीधी आपूर्ति

नेतृत्वनिदेशक या आयुक्त जैसा विभागाध्यक्ष; वह प्रशासनिक विभाग के अधीन रहता है

जनता से संपर्कअधिक; संभाग, ज़िला और ब्लॉक कार्यालयों के सहारे

निर्णय की प्रकृतिसंचालन-स्तर के निर्णय, तकनीकी सलाह, निरीक्षण

मुख्य दायित्वतय नीति के अनुसार परिणाम देना और विभाग को तकनीकी सलाह

राजस्थान का उदाहरण (सरकारी दस्तावेज़ से)निदेशक कोष एवं लेखा और निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क, जयपुर; आयुर्वेद निदेशालय, अजमेर (संपर्क-सूची, अप्रैल 2023)

केंद्र की पुस्तिका (CSMOP) में विभाग नीति और क्रियान्वयन दोनों का उत्तरदायी है, attached office तकनीकी सलाह और कार्यकारी निर्देश देते हैं, और subordinate office क्षेत्रीय प्रतिष्ठान होते हैं। राज्य पर यही ढाँचा लगाना विश्लेषण है। राजस्थान की पंक्ति में वित्त विभाग के आदेश और राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पोर्टल पर आयुर्वेद निदेशालय की संपर्क-सूची (13 अप्रैल 2023) का उपयोग हुआ है।

आदेश की यात्रा: राज्यपाल के नाम से जनता तक

  1. राज्यपाल

    कार्यपालिका की सब कार्रवाई उसके नाम से (अनुच्छेद 166(1))

  2. मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद

    राजनीतिक निर्णय (अनुच्छेद 163)

  3. सचिवालय का विभाग

    मंत्री + सचिव: नीति, क़ानून, बजट, समन्वय

  4. निदेशालय / विभागाध्यक्ष

    क्रियान्वयन, तकनीकी सलाह, निगरानी

  5. संभाग, ज़िला और ब्लॉक के कार्यालय

    क्षेत्रीय प्रतिष्ठान, सीधा सेवा-वितरण

  6. जनता

    लाभ और सेवा; शिकायत का फ़ीडबैक ऊपर लौटता है

तीर नीति और आदेश का नीचे की ओर प्रवाह दिखाते हैं; जवाबदेही उलटी दिशा में, ऊपर की ओर बढ़ती है। चित्र समझाने के लिए बनाया गया सरलीकरण है (विश्लेषण)।

मुख्य सचिव (Chief Secretary): पद और भूमिका

मुख्य सचिव राज्य के प्रशासनिक तंत्र का शिखर-पद है। पाठ्यपुस्तकों में उसकी भूमिका ऐसे बताई जाती है: राज्य की सिविल सेवा का सबसे वरिष्ठ अधिकारी, मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल का मुख्य प्रशासनिक सलाहकार, विभागों के बीच समन्वय की केंद्रीय कड़ी और संकट की घड़ी में प्रशासन की धुरी। यह वर्णन सामान्य मान्यता है (विश्लेषण); राजस्थान के कार्य-संचालन नियमों के पाठ से इसकी पंक्ति-दर-पंक्ति पुष्टि यहाँ उपलब्ध नहीं, इसलिए उत्तर में इसे "प्रचलित मान्यता" की तरह लिखें।

जो बातें आधिकारिक दस्तावेज़ों से पक्की हैं, वे ये हैं। पहली: 2nd ARC ने संकट-प्रबंधन के लिए राज्य में एक समान शीर्ष ढाँचे की सिफ़ारिश की, जिसका नेतृत्व राजनीतिक स्तर पर मुख्यमंत्री और प्रशासनिक स्तर पर मुख्य सचिव करे, और कहा कि राज्य में मुख्य सचिव के अधीन मौजूदा समन्वय-व्यवस्था चलती रहे (पैरा 2.2.6.2)। दूसरी: आयोग ने मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए ऐसा कॉलेजियम सुझाया जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा नामित मंत्री, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और मौजूदा मुख्य सचिव हों, कम से कम दो वर्ष का कार्यकाल हो, और पैनल में तय वरिष्ठता (जैसे 30 वर्ष) से ऊपर के सभी अधिकारी आ सकें; साथ ही प्रत्येक राज्य में "राज्य सिविल सेवा प्राधिकरण" बनाने की बात कही (पैरा 2.4.2.4 से 2.4.2.6)। ये सिफ़ारिशें हैं, लागू क़ानून नहीं।

तीसरी: राजस्थान के वित्त विभाग के आदेशों की प्रतिलिपि-सूचियों में "Joint Secretary to Chief Secretary" (दिसंबर 2025) और "Sr. D.S. to Chief Secretary" (जनवरी 2020) जैसे पद दिखते हैं। यानी मुख्य सचिव का अपना कार्यालय-तंत्र है और आदेश उसकी जानकारी में भी जाते हैं। इन्हीं आदेशों की सूचियों में "ACS to Hon'ble Chief Minister" (दिसंबर 2025) और "Principal Secretary to Hon'ble Chief Minister" (जनवरी 2020) अलग पद हैं: मुख्यमंत्री का अपना कार्यालय और मुख्य सचिव का कार्यालय एक नहीं हैं। यह भेद उत्तर में काम आता है।

मुख्य सचिव: क्या पक्का है और क्या सामान्य मान्यता

बातस्थितिआधार
संकट-प्रबंधन का प्रशासनिक प्रमुख; मुख्य सचिव के अधीन समन्वय-व्यवस्था जारी रहेसिफ़ारिश (ARC), आधिकारिक रिपोर्ट2nd ARC 15वीं रिपोर्ट, पैरा 2.2.6.2
नियुक्ति के लिए कॉलेजियम, कम से कम 2 वर्ष का कार्यकालसिफ़ारिश, लागू क़ानून नहींARC पैरा 2.4.2.4 और 2.4.2.6
मुख्य सचिव का अपना कार्यालय (संयुक्त सचिव, वरिष्ठ उप-सचिव आदि)राजस्थान वित्त विभाग के आदेशों में प्रतिलिपि-सूची से सिद्धवित्त विभाग का आदेश दिसंबर 2025; ज्ञापन जनवरी 2020
सिविल सेवा का प्रमुख, मुख्यमंत्री का मुख्य प्रशासनिक सलाहकार, अंतर-विभागीय समन्वयसामान्य मान्यता (विश्लेषण)प्रशासन की पाठ्यपुस्तकों में प्रचलित वर्णन; राजस्थान के नियम-पाठ से मिलान उपलब्ध नहीं

तीसरी और चौथी पंक्ति में अंतर देखिए: पहले दो और तीसरी बात दस्तावेज़ों से सिद्ध हैं, चौथी प्रचलित व्याख्या है।

एक नज़र में: राज्य सचिवालय और मुख्य सचिव

राज्य सचिवालय और मुख्य सचिव

संवैधानिक आधार

  • अनुच्छेद 163: मंत्रिपरिषद
  • 166(1): राज्यपाल के नाम से कार्रवाई
  • 166(3): कार्य-संचालन नियम
  • 167: मुख्यमंत्री के कर्तव्य

सचिवालय

  • शीर्ष स्तर, स्मृति-निधि
  • मंत्री + सचिव
  • नीति, क़ानून, बजट, समन्वय
  • शाखाओं में बँटा काम

निदेशालय

  • विभागाध्यक्ष का कार्यालय
  • क्रियान्वयन
  • संभाग और ज़िला कार्यालय

मुख्य सचिव

  • संकट-प्रबंधन का प्रशासनिक प्रमुख (ARC)
  • नियुक्ति: कॉलेजियम का सुझाव
  • अपना कार्यालय-तंत्र
  • सिविल सेवा का प्रमुख (प्रचलित मान्यता)

सुधार (ARC 2009)

  • विभाग घटाना
  • नीति और अमल का अलगाव
  • executive agencies
ARC के सुझाव सुझाव हैं, लागू क़ानून नहीं।

मुख्य तथ्य

राज्य के कार्य-संचालन के नियम बनाने की शक्ति
राज्यपाल, अनुच्छेद 166(3); प्रमाणीकरण की रीति 166(2); कार्रवाई राज्यपाल के नाम से 166(1) (संविधान, 2024 पाठ)
केंद्र में समतुल्य व्यवस्था
अनुच्छेद 77(3), राष्ट्रपति के नियम (संविधान, 2024 पाठ)
संविधान में 'Secretariat' शब्द
केवल संसद (अनु. 98) और राज्य विधानमंडल (अनु. 187) के लिए (2022 और 2024 के पाठ में खोज)
सचिवालय के सात कार्य
2nd ARC 15वीं रिपोर्ट (अप्रैल 2009), पैरा 2.3.3.1
नीति और क्रियान्वयन का अलगाव
ARC पैरा 2.3.4.6; executive agencies के लिए 2.3.5.2 और 2.3.5.5
मुख्य सचिव और संकट-प्रबंधन
ARC पैरा 2.2.6.2(ii): राज्य में प्रशासनिक स्तर पर मुख्य सचिव का नेतृत्व (सिफ़ारिश)
मुख्य सचिव की नियुक्ति (ARC सिफ़ारिश)
कॉलेजियम; कम से कम 2 वर्ष का कार्यकाल (पैरा 2.4.2.6)
केंद्र में विभाग और attached/subordinate offices
विभाग नीति और क्रियान्वयन दोनों; attached: तकनीकी सलाह + कार्यकारी निर्देश; subordinate: क्षेत्रीय प्रतिष्ठान (CSMOP, अध्याय 2)
राजस्थान: राज्यपाल के आदेश-वाक्य का नमूना
वित्त विभाग का आदेश F. 6(5)FD/Rules/2024, दिसंबर 2025
राजस्थान: प्रत्यायोजन का नमूना
असाधारण छुट्टी: 1 माह तक नियुक्ति प्राधिकारी; उससे अधिक प्रशासनिक विभाग (ज्ञापन, जनवरी 2020)

राजस्थान का पहलू

राजस्थान की सरकारी वेबसाइट (वित्त विभाग) के दो आदेश, दिसंबर 2025 और जनवरी 2020 के, सचिवालय की रोज़ की कार्यप्रणाली दिखाते हैं: विभाग का सचिव या संयुक्त सचिव आदेश जारी करता है, "the Governor is pleased to order" जैसा वाक्य आता है, और प्रतिलिपि सचिवालय की शाखाओं, विभागाध्यक्षों, निदेशकों और कोषाधिकारियों तक जाती है (राजस्थान सरकार की वेबसाइट से तथ्य मिलान, 1 अक्टूबर 2026)। राजस्थान के कार्य-संचालन नियमों का नाम, वर्ष और धाराएँ, सचिवालय के विभागों की वर्तमान संख्या तथा मुख्य सचिव के कार्यों की नियम-वार सूची जानबूझकर नहीं दी गई, क्योंकि उनके लिए अधिसूचना या नियम-पाठ वाला आधिकारिक स्रोत चाहिए, जो सत्यापित नहीं हो सका।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • सचिवालय को सिर्फ़ "फ़ाइलें रखने की जगह" बताना: उसका मुख्य काम नीति-निर्माण, बजट और समन्वय है।
  • विधानसभा के सचिवालय (अनुच्छेद 187) और राज्य सरकार के सचिवालय को एक मान लेना; दोनों अलग हैं।
  • यह लिख देना कि संविधान में राज्य सचिवालय या निदेशालय का अनुच्छेद है: संविधान केवल अनुच्छेद 166(3) में कार्य-संचालन के नियम बनाने की शक्ति देता है।
  • "सचिवालय सब निर्णय लेता है, निदेशालय कोई निर्णय नहीं" कहना: निदेशालय भी संचालन-स्तर पर निर्णय लेता है; भेद नीतिगत बनाम क्रियान्वयन का है, और ARC ने माना कि कोई जल-अभेद्य दीवार नहीं।
  • मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव का कार्यालय एक बताना: राजस्थान के आदेशों की सूची में दोनों के अलग कार्यालय दिखते हैं।
  • ARC की सिफ़ारिशों (कॉलेजियम, दो वर्ष का कार्यकाल, विभाग घटाना) को लागू क़ानून की तरह लिखना: ये सिफ़ारिशें हैं।