मुख्य सामग्री पर जाएं
पेपर III · इकाई II

वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग

वित्त आयोग क्या है, अनुच्छेद 280 के तहत गठन और कार्य, बँटवारे का तरीक़ा, सोलहवें आयोग की सिफ़ारिशें (1 फ़रवरी 2026 तक), राज्य वित्त आयोग और राजस्थान, सरल हिंदी में।

  • वित्त आयोग
  • अनुच्छेद 280
  • 16वाँ आयोग
  • राज्य वित्त आयोग
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II: "Union Government and Administrative Institutions. Institutions: UPSC, Election Commission of India, C&AG, Finance Commission, Lokpal, NITI Aayog." इस पृष्ठ पर वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) और राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243-I, 243-Y) हैं। नीति आयोग का अलग पृष्ठ है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में वित्त आयोग पर कोई सीधा प्रश्न नहीं आया। फिर भी यह सिलेबस में नामित संस्था है और 2013-2024 के पेपरों में संघ-राज्य संबंध और संघवाद के प्रश्न बार-बार आए हैं, जिनके उत्तर का वित्तीय हिस्सा वित्त आयोग से बनता है।
  • 2021 में योजना आयोग और नीति आयोग का संघवाद वाला 10 अंक का प्रश्न आया था। उसके उत्तर में "असली वित्तीय संघवाद वित्त आयोग में है" लिखना ऊँचा मूल्य जोड़ता है; इसलिए दोनों पृष्ठ साथ पढ़ें।
  • सोलहवाँ वित्त आयोग 1 फ़रवरी 2026 को संसद में रखा गया और उसकी अवधि 1 अप्रैल 2026 से शुरू है। "हाल की सिफ़ारिशें" जैसा कोई भी चालू-घटनाओं वाला प्रश्न आ सकता है; इस पृष्ठ पर आँकड़े आधिकारिक रिपोर्ट से मिलाए गए हैं।

पहले सरल भाषा में: संयुक्त परिवार का साझा खाता

मान लीजिए एक बड़ा संयुक्त परिवार है। कमाई का बड़ा हिस्सा सबसे पुराने बैंक-खाते में आता है, जो मुखिया सँभालते हैं, पर बच्चों की पढ़ाई, बुज़ुर्गों की दवा और घर की मरम्मत जैसे ख़र्च अलग-अलग घरों को उठाने पड़ते हैं। हर साल यह तय करना पड़ता है कि साझा खाते से किस घर को कितना जाए। अगर मुखिया ख़ुद तय करें तो झगड़ा हो सकता है। इसलिए परिवार एक निष्पक्ष पंच नियुक्त करता है, जो सबकी ज़रूरतें देखकर बँटवारे का फ़ॉर्मूला सुझाए। (यह समझाने के लिए गढ़ी गई तुलना है, किसी वास्तविक परिवार का वर्णन नहीं।)

भारत के संघीय ढाँचे में वही पंच वित्त आयोग (Finance Commission) है। केंद्र के पास आयकर, निगम कर जैसे बड़े कर-स्रोत हैं, जबकि स्वास्थ्य, पुलिस, कृषि जैसे बहुत से ख़र्च राज्यों पर हैं। इस असंतुलन को सुधारने के लिए संविधान ने एक स्वतंत्र आयोग रखा है, जो तय करता है कि केंद्रीय करों की शुद्ध आय केंद्र और राज्यों के बीच कैसे बँटे (ऊर्ध्वाधर बँटवारा, vertical devolution) और राज्यों के हिस्से का आपस में कैसे वितरण हो (क्षैतिज बँटवारा, horizontal devolution)।

परीक्षा के लिए सटीक परिभाषा: वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा हर पाँचवें वर्ष के अंत पर, या उससे पहले, आदेश द्वारा गठित स्वतंत्र सलाहकारी संस्था है, जो केंद्र-राज्य राजस्व-बँटवारे, राज्यों को सहायता-अनुदान के सिद्धांतों और स्थानीय निकायों के संसाधन बढ़ाने के उपायों पर राष्ट्रपति को सिफ़ारिशें देती है। अनुच्छेद 280(4) आयोग को अपनी प्रक्रिया ख़ुद तय करने की शक्ति देता है।

अनुच्छेद 280: गठन, बनावट और कार्य

अनुच्छेद 280(1) कहता है कि राष्ट्रपति संविधान लागू होने के दो वर्ष के भीतर और उसके बाद हर पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर, या उससे पहले जब उचित समझे, आदेश द्वारा वित्त आयोग का गठन करेगा। आयोग में एक अध्यक्ष और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त चार अन्य सदस्य होंगे। अनुच्छेद 280(2) संसद को अधिकार देता है कि वह सदस्यों की योग्यता और चयन का ढंग क़ानून से तय करे; यह काम वित्त आयोग (विविध उपबंध) अधिनियम, 1951 से हुआ है। वित्त आयोग की वेबसाइट पर दिए अधिनियम के सार के अनुसार अध्यक्ष "लोक-कार्यों के अनुभव" वाले व्यक्तियों में से चुना जाता है, और अन्य सदस्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या उसकी योग्यता वाले, शासन के वित्त और लेखा का विशेष ज्ञान रखने वाले, वित्तीय मामलों और प्रशासन में व्यापक अनुभव वाले, या अर्थशास्त्र का विशेष ज्ञान रखने वाले होते हैं।

अनुच्छेद 280(3) के अनुसार आयोग का कर्तव्य राष्ट्रपति को सिफ़ारिश करना है: (क) अध्याय I, भाग XII के अंतर्गत जो कर केंद्र और राज्यों के बीच बाँटे जाने हैं, उनकी शुद्ध आय का केंद्र-राज्य बँटवारा और राज्यों के बीच आपसी आवंटन; (ख) राज्यों के राजस्व को भारत की संचित निधि से सहायता-अनुदान देने के सिद्धांत; (खख) राज्य वित्त आयोग की सिफ़ारिशों के आधार पर पंचायतों के संसाधन बढ़ाने के लिए राज्य की संचित निधि बढ़ाने के उपाय; (ग) इसी तरह नगरपालिकाओं के लिए उपाय; और (घ) राष्ट्रपति द्वारा सौंपा कोई अन्य मामला। अनुच्छेद 280(4) आयोग को अपनी प्रक्रिया तय करने और संसद द्वारा दिए अधिकारों का प्रयोग करने की छूट देता है।

अनुच्छेद 281 का सार यह है कि राष्ट्रपति आयोग की हर सिफ़ारिश और उस पर की गई कार्रवाई के स्पष्टीकरण-ज्ञापन (explanatory memorandum) को संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखवाता है। यहाँ सरकार को सिफ़ारिश मानने की बाध्यता का उल्लेख नहीं है; वह सिफ़ारिश के साथ बताती है कि क्या स्वीकार हुआ और क्या नहीं। इसी से "सिफ़ारिशें सलाहकारी होती हैं" निष्कर्ष निकलता है, पर व्यवहार में 16वें आयोग की ज़्यादातर मुख्य सिफ़ारिशें स्वीकार हुईं (नीचे तालिका में)।

संबंधित अनुच्छेद एक नज़र में

अनुच्छेदविषयसार
270केंद्र द्वारा लगाए और वसूले करों का बँटवारासंघ सूची के अधिकांश कर बँटवारे में आते हैं; उपकर (cess) और अनुच्छेद 271 का अधिभार (surcharge) बाहर
275संघ से कुछ राज्यों को सहायता-अनुदानसंसद जिन राज्यों को सहायता का पात्र माने, उनके राजस्व के लिए संचित निधि से अनुदान; अनुसूचित जनजातियों और असम के लिए अलग प्रावधान
279'शुद्ध आय' की गणनाआय में से संग्रह-लागत घटाकर; CAG का प्रमाण-पत्र अंतिम
280वित्त आयोगअध्यक्ष और चार सदस्य; पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले
281सिफ़ारिशें संसद के सामनेसिफ़ारिशें और कार्रवाई का स्पष्टीकरण-ज्ञापन दोनों सदनों में
282सार्वजनिक प्रयोजन के अनुदानसंघ या राज्य किसी भी सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान दे सकता है, चाहे विषय क़ानून बनाने की उसकी सूची में न हो
243-I और 243-Yराज्य वित्त आयोगपंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए राज्यपाल द्वारा गठित आयोग

अनुच्छेद 279 और 270 की भाषा संविधान से; "सार" स्तंभ संक्षेप है।

बँटवारा कैसे होता है: विभाज्य पूल से राज्य के हिस्से तक

पहला चरण: विभाज्य पूल (divisible pool) बनता है। PRS के सार के अनुसार यह कुल केंद्रीय कर राजस्व में से संग्रह-लागत और उपकर तथा अधिभार घटाकर बचा हिस्सा है। संविधान का पाठ भी यही कहता है कि उपकर और अनुच्छेद 271 का अधिभार अनुच्छेद 270 के बँटवारे में नहीं आते। यह बिंदु संघवाद की बहस में बार-बार आता है, क्योंकि जिन करों का रूप उपकर या अधिभार हो, वे पूरी तरह केंद्र के पास रहते हैं (विश्लेषण)।

दूसरा चरण: ऊर्ध्वाधर बँटवारा। आयोग तय करता है कि विभाज्य पूल का कितना प्रतिशत राज्यों को जाए। सोलहवें आयोग की रिपोर्ट बताती है कि राज्यों का हिस्सा FC-11 में 29.5%, FC-12 में 30.5%, FC-13 में 32% और FC-14 में 42% रहा। 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से बने संघ राज्य क्षेत्रों का हिस्सा लगभग 1% आँककर FC-15 ने शेष 28 राज्यों का हिस्सा 41% रखा। FC-16 ने भी 41% बनाए रखा; रिपोर्ट के शब्दों में विभाज्य पूल अब राज्यों और संघ के बीच 41:59 के अनुपात में बँटता है।

तीसरा चरण: क्षैतिज बँटवारा। राज्यों के 41% हिस्से को 28 राज्यों में छह मानदंडों और भारों से बाँटा जाता है (नीचे तालिका)। मोटे तौर पर ग़रीब राज्य को ज़्यादा हिस्सा मिले, इसके लिए "आय-दूरी" (per capita GSDP distance) का भार सबसे ज़्यादा 42.5% है। FC-16 ने 15वें आयोग का "कर और राजकोषीय प्रयास" (2.5%) मानदंड हटाकर "GDP में राज्य का योगदान" (10%) जोड़ा।

चौथा चरण: सहायता-अनुदान। टैक्स-बँटवारे के अलावा आयोग अनुदान सुझाता है। FC-16 ने स्थानीय निकायों और आपदा प्रबंधन के लिए अनुदान सुझाए, पर राजस्व-घाटा अनुदान, क्षेत्र-विशिष्ट और राज्य-विशिष्ट अनुदान नहीं सुझाए (ज्ञापन, पैरा 6)। 14वें आयोग के बाद सारे सामान्य-प्रयोजन अंतरण वित्त आयोग की सिफ़ारिश पर होते हैं, जबकि विशिष्ट-प्रयोजन अंतरण केंद्रीय मंत्रालय देते हैं (NIPFP का अध्ययन)।

क्षैतिज बँटवारे के मानदंड: 15वाँ बनाम 16वाँ वित्त आयोग

15वाँ आयोग (2021-26)

आय-दूरी (प्रति व्यक्ति GSDP का अंतर)45%

जनसंख्या (2011)15%

जनसांख्यिकीय प्रदर्शन12.5%

क्षेत्रफल15%

वन10%

कर और राजकोषीय प्रयास2.5%

GDP में योगदानलागू नहीं

कुल100%

16वाँ आयोग (2026-31)

आय-दूरी (प्रति व्यक्ति GSDP का अंतर)42.5%

जनसंख्या (2011)17.5%

जनसांख्यिकीय प्रदर्शन10%

क्षेत्रफल10%

वन10%

कर और राजकोषीय प्रयासलागू नहीं

GDP में योगदान10%

कुल100%

सोलहवाँ वित्त आयोग: गठन, सदस्य और स्थिति

सोलहवें आयोग का गठन राष्ट्रपति ने 31 दिसंबर 2023 की अधिसूचना (S.O. 5533(E)) से किया; उसे 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पाँच वर्षों के लिए सिफ़ारिशें देनी थीं। अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया हैं, जो नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर रहे हैं। 30 जनवरी 2024 की अधिसूचना से सदस्य नियुक्त हुए। बाद में बदलाव हुए: एक सदस्य के कार्यभार न सँभालने पर 5 अप्रैल 2024 को डॉ. मनोज पांडा पूर्णकालिक सदस्य बने, श्री अजय नारायण झा ने 8 अप्रैल 2025 से इस्तीफ़ा दिया और 7 जून 2025 को श्री टी. रबी शंकर अंशकालिक सदस्य नियुक्त हुए।

अंतिम सूची: अध्यक्ष डॉ. पनगढ़िया; पूर्णकालिक सदस्य श्रीमती एनी जॉर्ज मैथ्यू और डॉ. मनोज पांडा; अंशकालिक सदस्य श्री टी. रबी शंकर और डॉ. सौम्य कांति घोष। रिपोर्ट 17 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति को सौंपी गई; समय-सीमा 31 अक्टूबर 2025 से बढ़ाकर 30 नवंबर 2025 की गई थी। 1 फ़रवरी 2026 को रिपोर्ट स्पष्टीकरण-ज्ञापन के साथ संसद में रखी गई। संदर्भ-शर्तें (ToR) सीधे संविधान की भाषा पर टिकी थीं: बँटवारा, सहायता-अनुदान के सिद्धांत, स्थानीय निकायों के संसाधन; और आपदा प्रबंधन के वित्तपोषण की समीक्षा की छूट।

सोलहवें आयोग की प्रमुख सिफ़ारिशें और सरकार का रुख़ (1 फ़रवरी 2026 का ज्ञापन)

विषयसिफ़ारिशसरकार का रुख़
राज्यों का हिस्साविभाज्य पूल का 41%स्वीकार
पारदर्शिताविभाज्य पूल के CAG-प्रमाणित (अनुच्छेद 279) आँकड़े सार्वजनिक होंस्वीकार
क्षैतिज बँटवाराछह मानदंड, तालिका 8.8; राज्यवार हिस्से तालिका 8.9स्वीकार
राजस्व-घाटा, क्षेत्र-विशिष्ट, राज्य-विशिष्ट अनुदानइनकी सिफ़ारिश नहींआकलन पर संज्ञान
स्थानीय निकाय अनुदान2026-27 से 2030-31 के लिए ₹7,91,493 करोड़ (ग्रामीण ₹4,35,236 करोड़; शहरी ₹3,56,257 करोड़); आधार 80%, प्रदर्शन 20%; तीन प्रवेश-शर्तेंस्वीकार
आपदा प्रबंधनSDRF और SDMF का कुल कोष ₹2,04,401 करोड़; केंद्र:राज्य 75:25 (अन्य राज्य) और 90:10 (पूर्वोत्तर तथा पहाड़ी राज्य)स्वीकार
राजकोषीय घाटाराज्य: GSDP का 3%; केंद्र: अवधि के अंत तक GDP का 3.5%; ऑफ़-बजट उधारी बंदराशि सैद्धांतिक रूप से स्वीकार; शेष की अलग जाँच
अन्यकेंद्र प्रायोजित योजनाओं का पुनर्गठन, बिजली, सब्सिडी और सार्वजनिक उपक्रम सुधारयथासमय जाँच

लागू करने के आदेश अनुच्छेद 270 के अंतर्गत राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद जारी होने की बात ज्ञापन में है।

स्थानीय निकायों के अनुदान की शर्तें और अब तक की स्थिति

स्थानीय निकाय अनुदान का केंद्र इस पृष्ठ के विषय से सीधे जुड़ता है, क्योंकि अनुच्छेद 280(3)(खख) और (ग) आयोग को स्थानीय निकायों के लिए राज्यों की संचित निधि बढ़ाने के उपाय सुझाने को कहते हैं। ज्ञापन के अनुसार आयोग ने तीन प्रवेश-शर्तें रखी हैं। पहली, संविधान के भाग IX और IX-A के अनुसार विधिवत गठित निकाय। दूसरी, सार्वजनिक क्षेत्र में निकायों के अनंतिम और अंकेक्षित लेखे। तीसरी, पाँच वर्ष बीतने पर राज्य वित्त आयोग का समय से गठन और उसकी रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन (ATR) छह महीनों में राज्य विधानमंडल में रखना। इस तरह अनुच्छेद 243-I का पालन केंद्र के अनुदान की शर्त बन गया है।

आधार घटक का आधा हिस्सा "बंधित" (tied) है, जो स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन और जल प्रबंधन पर ख़र्च होगा; आधार का शेष आधा और पूरा प्रदर्शन घटक अबंधित है, पर उसे वेतन या स्थापना ख़र्च पर नहीं लगाया जा सकता और सड़कों पर 20% से ज़्यादा नहीं। राज्य को केंद्र से मिला अनुदान दस कार्यदिवसों में निकायों को देना है, देरी पर ब्याज देना होगा। क्रियान्वयन की स्थिति: पंचायती राज मंत्रालय ने 3 जुलाई 2026 को राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों की राष्ट्रीय कार्यशाला इन सिफ़ारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर की; ग्रामीण निकायों के लिए ₹4,35,236 करोड़ की राशि PIB और ज्ञापन-आधारित सार, दोनों में है।

अनुच्छेद 270 के अंतर्गत राष्ट्रपति के आदेश स्वीकृत सिफ़ारिशों (राज्यों का हिस्सा, स्थानीय निकाय अनुदान, आपदा प्रबंधन वित्तपोषण) पर राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद जारी होंगे, ऐसा ज्ञापन के पैरा 28 में है। सरकार ने 1 फ़रवरी 2026 को 41% की सिफ़ारिश स्वीकार करने की घोषणा की और ज्ञापन में स्थानीय निकाय तथा आपदा अनुदान की सिफ़ारिशें भी स्वीकार कीं।

राज्य वित्त आयोग: अनुच्छेद 243-I और 243-Y

जैसे केंद्र और राज्य के बीच बँटवारे के लिए वित्त आयोग है, वैसे ही राज्य और स्थानीय निकायों के बीच बँटवारे के लिए राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission, SFC) है। इसे 73वें और 74वें संशोधन ने जोड़ा। अनुच्छेद 243-I के अनुसार राज्यपाल 73वें संशोधन के प्रारंभ से एक वर्ष के भीतर और उसके बाद हर पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए वित्त आयोग गठित करेगा। अनुच्छेद 243-Y कहता है कि वही आयोग नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की भी समीक्षा करेगा।

आयोग राज्यपाल को सिफ़ारिश करता है: (क) राज्य और स्थानीय निकायों के बीच राज्य के करों, शुल्कों, पथकर और फ़ीस की शुद्ध आय के बँटवारे तथा निकायों के विभिन्न स्तरों के बीच उनके हिस्से के आवंटन के सिद्धांत; (ख) निकायों को सौंपे या उनके द्वारा विनियोजित किए जा सकने वाले करों की पहचान; (ग) राज्य की संचित निधि से निकायों को सहायता-अनुदान; (घ) निकायों की वित्तीय स्थिति सुधारने के उपाय; और (ङ) राज्यपाल द्वारा सौंपा कोई अन्य मामला। आयोग की बनावट, सदस्यों की योग्यता और चयन के बारे में राज्य का विधानमंडल क़ानून बनाता है (243-I(2))। राज्यपाल सिफ़ारिशें और की गई कार्रवाई का स्पष्टीकरण-ज्ञापन राज्य विधानमंडल के पटल पर रखवाता है (243-I(4), 243-Y(2))।

केंद्र और राज्य की तुलना: वित्त आयोग राष्ट्रपति को सिफ़ारिश देता है और रिपोर्ट संसद में रखी जाती है; राज्य वित्त आयोग राज्यपाल को सिफ़ारिश देता है और रिपोर्ट विधानमंडल में रखी जाती है। केंद्रीय आयोग का अनुच्छेद 280(3)(खख) और (ग) में दायित्व है कि वह राज्य वित्त आयोग की सिफ़ारिशों के आधार पर स्थानीय निकायों के लिए राज्यों की संचित निधि को बढ़ाने के उपाय सुझाए। यानी केंद्रीय अनुदान राज्य के अपने हस्तांतरण का पूरक है, विकल्प नहीं; 16वें आयोग की रिपोर्ट भी यही कहती है।

वित्त आयोग बनाम राज्य वित्त आयोग

वित्त आयोग (अनुच्छेद 280)

गठन करने वालाराष्ट्रपति

अंतरालहर पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले

बनावट तय करने वाला क़ानूनसंसद (अनुच्छेद 280(2)); वित्त आयोग (विविध उपबंध) अधिनियम, 1951

किसके बीच बँटवारासंघ और राज्य; राज्यों के बीच

रिपोर्ट किसके सामनेसंसद के दोनों सदन (अनुच्छेद 281)

सहायता-अनुदानसंचित निधि से राज्यों को (अनुच्छेद 275)

राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243-I, 243-Y)

गठन करने वालाराज्यपाल

अंतराल73वें संशोधन के एक वर्ष के भीतर, फिर हर पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर

बनावट तय करने वाला क़ानूनराज्य विधानमंडल (243-I(2))

किसके बीच बँटवाराराज्य और पंचायत-नगरपालिकाएँ; निकायों के बीच

रिपोर्ट किसके सामनेराज्य विधानमंडल (243-I(4), 243-Y(2))

सहायता-अनुदानराज्य की संचित निधि से निकायों को

रिपोर्ट से निकाय के खाते तक

  1. वित्त आयोग (अनुच्छेद 280)

    राष्ट्रपति को सिफ़ारिश: विभाज्य पूल, मानदंड, अनुदान

  2. संसद (अनुच्छेद 281)

    सिफ़ारिशें और स्पष्टीकरण-ज्ञापन दोनों सदनों में

  3. राष्ट्रपति के आदेश

    अनुच्छेद 270 के आदेश स्वीकृत सिफ़ारिशों पर (ज्ञापन के अनुसार)

  4. राज्य सरकार

    राज्य को हिस्सा; स्थानीय निकाय अनुदान दस कार्यदिवसों में आगे

  5. राज्य वित्त आयोग (243-I/Y)

    राज्य का अपना बँटवारा स्थानीय निकायों में; ATR छह महीनों में विधानमंडल में

  6. पंचायत और नगरपालिका

    आधार और प्रदर्शन अनुदान, शर्तों के साथ

तीर प्रक्रिया का क्रम बताते हैं। स्थानीय निकाय के अनुदान की शर्तें 16वें आयोग की रिपोर्ट से हैं।

समय-रेखा: वित्त आयोग

  1. 1951

    वित्त आयोग (विविध उपबंध) अधिनियम, 1951; पहला आयोग

  2. 24 अप्रैल 1993 / 1 जून 1993

    73वाँ और 74वाँ संशोधन: अनुच्छेद 243-I और 243-Y; 280(3)(खख), (ग)

  3. 24 फ़रवरी 2015

    14वें आयोग की रिपोर्ट; राज्यों का हिस्सा 42%

  4. 31 दिसंबर 2023

    16वें आयोग का गठन (S.O. 5533(E))

  5. 17 नवंबर 2025

    16वें आयोग की रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी गई

  6. 1 फ़रवरी 2026

    रिपोर्ट और स्पष्टीकरण-ज्ञापन संसद में; सरकार का 41% स्वीकार

  7. 1 अप्रैल 2026

    16वें आयोग की अवधि शुरू (2026-27 से 2030-31)

  8. 3 जुलाई 2026

    पंचायती राज मंत्रालय की राष्ट्रीय कार्यशाला: 16वें आयोग की सिफ़ारिशों का क्रियान्वयन

73वें और 74वें संशोधन के प्रवर्तन की तिथियाँ संविधान की पाद-टिप्पणियों में हैं (संशोधन अधिनियम 1992 के)।

एक नज़र में: वित्त आयोग

वित्त आयोग

संवैधानिक आधार

  • अनुच्छेद 280
  • 281: संसद में रखना
  • 270, 275, 279

बनावट

  • अध्यक्ष + 4 सदस्य
  • राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं
  • अधिनियम 1951 में योग्यताएँ

कार्य

  • ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज बँटवारा
  • सहायता-अनुदान के सिद्धांत
  • स्थानीय निकायों के लिए उपाय

16वाँ आयोग

  • अध्यक्ष: डॉ. पनगढ़िया
  • 41% राज्य हिस्सा
  • स्थानीय निकाय ₹7,91,493 करोड़
  • 2026-27 से 2030-31

राज्य वित्त आयोग

  • अनुच्छेद 243-I, 243-Y
  • राज्यपाल गठित करता है
  • हर पाँचवें वर्ष

मुख्य तथ्य

वित्त आयोग का गठन
अनुच्छेद 280(1): अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य; हर पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले
रिपोर्ट संसद में
अनुच्छेद 281: सिफ़ारिशें और कार्रवाई का स्पष्टीकरण-ज्ञापन
अधिनियम
वित्त आयोग (विविध उपबंध) अधिनियम, 1951 (33/1951)
सोलहवाँ आयोग: गठन
31 दिसंबर 2023 (S.O. 5533(E)); अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031
सोलहवाँ आयोग: रिपोर्ट सौंपी गई
17 नवंबर 2025
सोलहवाँ आयोग: संसद में रखी गई
1 फ़रवरी 2026
राज्यों का हिस्सा
41% (FC-14: 42%; FC-15: 41%)
क्षैतिज मानदंड
आय-दूरी 42.5, जनसंख्या 17.5, जनसांख्यिकीय 10, क्षेत्रफल 10, वन 10, GDP योगदान 10
स्थानीय निकाय अनुदान
₹7,91,493 करोड़ (2026-27 से 2030-31); आधार:प्रदर्शन 80:20
आपदा प्रबंधन कोष (SDRF + SDMF)
₹2,04,401 करोड़
राजकोषीय घाटा सीमा
राज्य: GSDP का 3%; केंद्र: अवधि के अंत तक GDP का 3.5%
राजस्थान का हिस्सा (16वाँ आयोग)
5.926% (तालिका 8.9); 15वें में 6.03%

राजस्थान का पहलू

सोलहवें आयोग की रिपोर्ट (तालिका 8.9) में राजस्थान का हिस्सा 5.926% है; PRS की तालिका के अनुसार यह 14वें में 5.50% और 15वें में 6.03% था। राजस्थान सरकार की प्रस्तुति (पंचायती राज मंत्रालय की साइट पर) के अनुसार छठा राज्य वित्त आयोग 12 अप्रैल 2021 को गठित हुआ, जिसके अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह थे; राज्य ने 2020-24 में अपने शुद्ध कर-राजस्व का 6.75% और 2024-25 में 7% स्थानीय निकायों को हस्तांतरित किया, पंचायतों के हिस्से का बँटवारा ग्राम पंचायत 75%, पंचायत समिति 20% और ज़िला परिषद 5% रहा। राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 118 राज्य वित्त आयोग की बनावट बताती है: अध्यक्ष लोक-कार्य के अनुभव वाला और अधिकतम चार अन्य सदस्य। 16वें आयोग की तालिका 10.4 के अनुसार मई 2025 की स्थिति में राजस्थान में अंतिम गठित आयोग छठा है। (राजस्थान सरकार की प्रस्तुति और रिपोर्ट से तथ्य मिलान, 1 अक्टूबर 2026।)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • वित्त आयोग को स्थायी संस्था बताना: अनुच्छेद 280(1) के अनुसार हर पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले नया आयोग गठित होता है; हर आयोग की अपनी अवधि और अपनी रिपोर्ट होती है।
  • वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को "बाध्यकारी" बताना। अनुच्छेद 281 सिफ़ारिश और कार्रवाई का ज्ञापन संसद में रखने की बात कहता है; स्वीकृति सरकार का निर्णय है (संविधान के पाठ से निष्कर्ष)।
  • अनुच्छेद 280 को योजना आयोग या नीति आयोग से मिलाना। वित्त आयोग संवैधानिक है; नीति आयोग कार्यकारी संकल्प से बना है।
  • ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज बँटवारे को उलट देना: ऊर्ध्वाधर = केंद्र और राज्य के बीच; क्षैतिज = राज्यों के आपसी।
  • विभाज्य पूल में सब कुछ गिनना: उपकर और अनुच्छेद 271 का अधिभार बाहर हैं।
  • राज्य वित्त आयोग को केंद्रीय वित्त आयोग का हिस्सा समझना: दोनों अलग हैं; राज्य वित्त आयोग राज्यपाल गठित करता है और केंद्रीय वित्त आयोग राष्ट्रपति।
  • सोलहवें आयोग के आँकड़े पुराने (14वें-15वें) से मिला देना: 14वाँ 42%, 15वाँ और 16वाँ दोनों 41%।