मुख्य सामग्री पर जाएं
पेपर III · इकाई II

नीति आयोग

नीति आयोग क्या है, योजना आयोग से कैसे अलग है, उसकी बनावट और काम, सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद, सूचकांक और 2021 का हल प्रश्न, सरल हिंदी में।

  • नीति आयोग
  • योजना आयोग
  • गवर्निंग काउंसिल
  • संघवाद
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II: "Union Government and Administrative Institutions. Institutions: UPSC, Election Commission of India, C&AG, Finance Commission, Lokpal, NITI Aayog." इस पृष्ठ पर नीति आयोग है; वित्त आयोग का अलग पृष्ठ है। संघ-राज्य संबंधों का बड़ा संदर्भ संघ-राज्य संबंध वाले पृष्ठ में है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2021 के पेपर III में 10 अंक (100 शब्द) का सीधा प्रश्न आया: योजना आयोग और नीति आयोग की कार्यप्रणाली में अंतर और भारतीय संघवाद पर उसका प्रभाव। संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में नीति आयोग का यही एक प्रश्न मिला है, इसलिए इसे "तुलना + मूल्यांकन" के साँचे में तैयार करें।
  • यह प्रश्न दो हिस्सों का है: अंतर बताना (तथ्य) और संघवाद पर असर (विश्लेषण)। 10 अंक के उत्तर में दोनों हिस्सों को जगह दें: एक तुलना-तालिका या तीन-चार बिंदु, फिर संतुलित मूल्यांकन।
  • तारीख़ें, गवर्निंग काउंसिल की बनावट और सूचकांकों के नाम 2 अंक या 5 अंक में भी पूछे जा सकते हैं। नीचे के "मुख्य तथ्य" और समय-रेखा को दोहराने के लिए रखें।

पहले सरल भाषा में: हेड ऑफ़िस का फ़रमान बनाम परिवार की बैठक

सोचिए कि एक बड़ी कंपनी की देशभर में शाखाएँ हैं। एक तरीक़ा यह है कि मुख्यालय हर शाखा के लिए लक्ष्य और बजट तय करके भेज दे; शाखा-प्रबंधक सिर्फ़ पालन करे। दूसरा तरीक़ा यह है कि मुख्यालय एक सलाहकार-मंडल बनाए, जिसमें सभी शाखाओं के प्रमुख बैठें, सब मिलकर दिशा तय करें, और मंडल का काम सलाह देना, अच्छे उदाहरण फैलाना और काम की निगरानी करना हो। पहला तरीक़ा योजना आयोग की याद दिलाता है और दूसरा नीति आयोग की सोच। (यह समझाने के लिए गढ़ी गई तुलना है, किसी वास्तविक संस्था का वर्णन नहीं।)

अब परीक्षा के लिए सटीक परिभाषा। नीति आयोग (National Institution for Transforming India) भारत सरकार की वह संस्था है जिसे मंत्रिमंडल सचिवालय के 1 जनवरी 2015 के संकल्प से बनाया गया। इस संकल्प ने 15 मार्च 1950 के उस संकल्प को निरस्त किया जिससे योजना आयोग बना था। संकल्प के शब्दों में इसे सरकार का "थिंक टैंक" और "दिशा देने वाली तथा नीति-निर्माण की शक्ति" बनना है, जो केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को रणनीतिक और तकनीकी सलाह दे। इसका घोषित उद्देश्य राज्यों के साथ सहकारी संघवाद (cooperative federalism) को बढ़ावा देना है।

योजना आयोग से नीति आयोग तक: सरकार ने ख़ुद क्या कारण बताए

1 जनवरी 2015 के संकल्प की भूमिका पढ़ने लायक़ है, क्योंकि परीक्षा में "क्यों बदला गया" पूछा जाए तो उत्तर यहीं से बनता है। संकल्प कहता है कि योजना आयोग को बने लगभग 65 वर्ष हो गए थे और देश "अल्प-विकसित" से उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था बन चुका था। राज्य अब "केंद्र के उपांग मात्र" नहीं रहना चाहते थे और वे आर्थिक वृद्धि के ढाँचे में निर्णायक भूमिका चाहते थे। संकल्प का तर्क है कि केंद्रीय योजना में निहित "सबके लिए एक ही नाप" (one-size-fits-all) का तरीक़ा अनावश्यक तनाव पैदा कर सकता है। इसी संदर्भ में वह डॉ. आंबेडकर का कथन उद्धृत करता है कि जहाँ केंद्रीय नियंत्रण और एकरूपता स्पष्ट रूप से अनिवार्य या व्यावहारिक न हो, वहाँ शक्तियों का केंद्रीकरण अनुचित है।

संकल्प में दूसरा कारण सरकार की भूमिका का बदलना है: सरकार को उद्योग-सेवा क्षेत्र में "खिलाड़ी" के बजाय "सक्षमकर्ता" (enabler) बनना है। तीसरा, नीति-प्रक्रिया की "प्रक्रिया" (process) और "रणनीति" (strategy) को अलग करने की ज़रूरत बताई गई है। सबसे अहम पंक्ति यह है कि पहले की तरह केंद्र से राज्य की ओर नीति का एकतरफ़ा प्रवाह बदलकर राज्यों के साथ "वास्तविक और सतत साझेदारी" होनी चाहिए। यह भी लिखा है कि कोई एक विदेशी मॉडल सीधे भारत में नहीं उतारा जा सकता, अपनी राह ख़ुद खोजनी होगी।

ध्यान रखें कि ये बातें सरकार का अपना घोषित तर्क हैं। वे नीति आयोग के पक्ष में लिखा गया दस्तावेज़ हैं। इसलिए उत्तर में "संकल्प के अनुसार" लिखकर तर्क दें और अपना मूल्यांकन अलग से जोड़ें, जैसा आगे संघवाद वाले खंड में किया गया है।

योजना आयोग बनाम नीति आयोग (2021 का सीधा प्रश्न)

योजना आयोग (Planning Commission)

स्थापना का आधारमंत्रिमंडल का संकल्प, 15 मार्च 1950

स्वरूपयोजना बनाने और योजना-प्रयोजन के अनुदान देने वाली संस्था

राज्यों से रिश्तासंकल्प के शब्दों में केंद्र से राज्य की ओर नीति का एकतरफ़ा प्रवाह

योजना का तरीक़ाकेंद्रीय योजना; "सबके लिए एक नाप" का जोखिम (संकल्प का आकलन)

धन पर भूमिकायोजना-प्रयोजन के अनुदान की शक्ति योजना आयोग के पास (NIPFP का अध्ययन)

सामान्य अंतरणवित्त आयोग का दायरा गैर-योजना तक सीमित

बनावट1 जनवरी 2015 के संकल्प में इसकी बनावट का वर्णन नहीं है

नीति आयोग (NITI Aayog)

स्थापना का आधारमंत्रिमंडल सचिवालय का संकल्प, 1 जनवरी 2015; इसी से 1950 का संकल्प निरस्त

स्वरूपथिंक-टैंक; रणनीतिक और तकनीकी सलाह, साझा दृष्टि, निगरानी

राज्यों से रिश्ताराज्यों के साथ सतत साझेदारी; सभी मुख्यमंत्री गवर्निंग काउंसिल में

योजना का तरीक़ासाझा राष्ट्रीय एजेंडा; गाँव स्तर पर विश्वसनीय योजनाएँ बनाकर ऊपर जोड़ने का तंत्र

धन पर भूमिकासंकल्प के 13 उद्देश्यों में अनुदान-आवंटन की शक्ति नहीं है (विश्लेषण)

सामान्य अंतरण14वें वित्त आयोग के बाद सारे सामान्य-प्रयोजन अंतरण वित्त आयोग से; विशिष्ट-प्रयोजन अंतरण केंद्रीय मंत्रालयों से

बनावटप्रधानमंत्री अध्यक्ष; गवर्निंग काउंसिल; क्षेत्रीय परिषदें; उपाध्यक्ष, सदस्य, CEO

"विश्लेषण" वाली पंक्ति संकल्प के पाठ से निकला निष्कर्ष है।

नीति आयोग की बनावट

संकल्प के पैरा 13 के अनुसार नीति आयोग में प्रधानमंत्री अध्यक्ष हैं। गवर्निंग काउंसिल (Governing Council) शीर्ष मंच है। मूल संकल्प में इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और संघ राज्य क्षेत्रों के उपराज्यपाल थे। 16 फ़रवरी 2015 के संशोधन के बाद यह इस तरह है: सभी राज्यों और विधानमंडल वाले संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्री, तथा अन्य संघ राज्य क्षेत्रों के उपराज्यपाल। परीक्षा में यह बारीकी अक्सर ग़लत लिखी जाती है।

क्षेत्रीय परिषदें (Regional Councils) एक से अधिक राज्य या क्षेत्र को प्रभावित करने वाले विशिष्ट मुद्दों के लिए तय अवधि के लिए बनती हैं। प्रधानमंत्री इन्हें बुलाते हैं, और अध्यक्षता नीति आयोग के अध्यक्ष या उनके नामित व्यक्ति करते हैं। प्रधानमंत्री विषय-विशेषज्ञों को विशेष आमंत्रित (special invitees) के रूप में नामित कर सकते हैं। पूर्णकालिक ढाँचे में उपाध्यक्ष (प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त), पूर्णकालिक सदस्य, अधिकतम दो अंशकालिक सदस्य (बारी-बारी से, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से), प्रधानमंत्री द्वारा नामित अधिकतम चार पदेन सदस्य (केंद्रीय मंत्रिपरिषद से), मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO, भारत सरकार के सचिव स्तर का, निश्चित कार्यकाल) और सचिवालय आते हैं।

नीति आयोग की संरचना एक नज़र में

घटककौन / कितनेभूमिका
अध्यक्षप्रधानमंत्रीआयोग की अध्यक्षता
गवर्निंग काउंसिलसभी राज्यों और विधानमंडल वाले संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्री; अन्य संघ राज्य क्षेत्रों के उपराज्यपालराज्यों की भागीदारी वाला शीर्ष मंच
क्षेत्रीय परिषदेंसंबंधित क्षेत्र के मुख्यमंत्री और उपराज्यपालएक से अधिक राज्य के विशिष्ट मुद्दे; तय कार्यकाल
विशेष आमंत्रितप्रधानमंत्री द्वारा नामित विशेषज्ञविषयगत ज्ञान
उपाध्यक्षप्रधानमंत्री द्वारा नियुक्तपूर्णकालिक ढाँचे का प्रमुख
सदस्यपूर्णकालिक; अधिकतम 2 अंशकालिक (बारी-बारी); अधिकतम 4 पदेन केंद्रीय मंत्रीनीति-सलाह
CEOसचिव स्तर, निश्चित कार्यकाल, प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्तप्रशासनिक प्रमुख

पदधारकों के नाम जानबूझकर नहीं दिए गए, क्योंकि वे बदलते रहते हैं।

कार्य और उद्देश्य: संकल्प के 13 बिंदु, छह समूहों में

संकल्प के पैरा 12 में नीति आयोग के 13 उद्देश्य (a से m) गिनाए गए हैं। इन्हें रटने के बजाय छह समूहों में याद रखें। पहला, साझा दृष्टि: राज्यों की सक्रिय भागीदारी से राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों का साझा दृष्टिकोण, जो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के लिए "राष्ट्रीय एजेंडा" का ढाँचा बने। दूसरा, सहकारी संघवाद: संरचित सहायता और तंत्रों के ज़रिये, इस भाव से कि मज़बूत राज्य ही मज़बूत राष्ट्र बनाते हैं।

तीसरा, नीचे से योजना: गाँव स्तर पर विश्वसनीय योजनाएँ बनाने के तंत्र और उन्हें क्रमशः ऊपर के स्तरों पर जोड़ना। चौथा, रणनीति और निगरानी: दीर्घकालिक नीति और कार्यक्रम-ढाँचे बनाना, उनकी प्रगति और प्रभावशीलता की निगरानी करना, और सीख के आधार पर बीच में सुधार (mid-course corrections) करना। पाँचवाँ, ज्ञान और साझेदारी: थिंक-टैंकों और शोध संस्थानों के साथ साझेदारी, अच्छी पद्धतियों का भंडार (resource centre), नवाचार और उद्यमिता का सहयोगी तंत्र, तकनीक उन्नयन और क्षमता-निर्माण। छठा, समन्वय और संवेदनशीलता: अंतर-क्षेत्रीय और अंतर-विभागीय मुद्दों के निपटारे का मंच, राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों का आर्थिक रणनीति में समावेश (जहाँ विशेष रूप से कहा जाए), और ऐसे वर्गों पर ख़ास ध्यान जो आर्थिक प्रगति से लाभ पाने से वंचित रह सकते हैं।

विश्लेषण: इन 13 बिंदुओं में कोई भी "निधि बाँटना" या "राज्य की योजना मंज़ूर करना" नहीं है। यही वह मुख्य बिंदु है जो नीति आयोग को योजना आयोग से अलग करता है, और इसी से संघवाद पर इसका असर समझ में आता है।

गवर्निंग काउंसिल: बैठकें और राज्यों की आवाज़

नीति आयोग की वेबसाइट पर दर्ज सूची के अनुसार गवर्निंग काउंसिल की ग्यारह बैठकें हुई हैं: 8 फ़रवरी 2015, 15 जुलाई 2015, 23 अप्रैल 2017, 17 जून 2018, 15 जून 2019, 20 फ़रवरी 2021, 7 अगस्त 2022, 27 मई 2023, 27 जुलाई 2024, 24 मई 2025 और 11 जून 2026। ग्यारहवीं बैठक की थीम "Inclusive Human Development for Viksit Bharat @2047" थी। PIB की घोषणा के अनुसार इसमें दिसंबर 2025 के पाँचवें राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन की सिफ़ारिशें (प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल, उच्च शिक्षा, खेल आदि) पर चर्चा होनी थी।

विश्लेषण: इस सूची से सीधा हिसाब निकलता है कि फ़रवरी 2015 से जून 2026 के 11 वर्ष से कुछ अधिक समय में 11 बैठकें हुईं, यानी औसतन साल में एक। बैठकों के बीच का अंतर कभी लगभग पौने दो वर्ष (जुलाई 2015 से अप्रैल 2017) तक भी रहा है। यह तथ्य संघवाद के मूल्यांकन में उपयोगी है: मंच है, पर वह निरंतर संवाद का मंच कितना बन सका, इस पर बहस हो सकती है।

सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद: नीति आयोग का दावा और काम

सहकारी संघवाद (cooperative federalism) का अर्थ है कि केंद्र और राज्य टकराव के बजाय साझी नीति और साझे संसाधनों से काम करें। नीति आयोग के संकल्प में यह दो तरह से दिखता है: राज्यों के मुख्यमंत्रियों का काउंसिल में बैठना, और "संरचित सहायता और तंत्रों" के ज़रिये राज्यों के साथ सतत जुड़ाव। प्रतिस्पर्धी संघवाद (competitive federalism) का अर्थ है कि राज्य एक-दूसरे से बेहतर प्रदर्शन में होड़ करें। संकल्प में यह शब्द-रूप में नहीं है; यह व्यवहार में नीति आयोग के सूचकांकों और रैंकिंग से आया है (विश्लेषण)।

सूचकांकों के उदाहरण नीचे की तालिका में हैं। सबका सार यह है कि राज्य के आँकड़े प्रकाशित होते हैं, राज्यों की तुलना होती है और "पिछड़ने" का दबाव बनता है। लाभ यह है कि सुधार के लिए प्रेरणा मिलती है; सीमा यह है कि रैंकिंग में अलग-अलग शुरुआती स्थितियों वाले राज्यों की तुलना अपूर्ण हो सकती है, और अच्छे अंक के लिए आँकड़े "बनाने" का जोखिम भी रहता है (विश्लेषण)।

नीति आयोग के प्रमुख सूचकांक और कार्यक्रम

नामतिथिमुख्य तथ्य
SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 (चौथा संस्करण)12 जुलाई 2024राष्ट्रीय संयुक्त अंक 57 (2018), 66 (2020-21) और 71 (2023-24); 113 संकेतक; PIB के अनुसार 32 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र "फ़्रंट रनर" (65 से 99 अंक), पहले 22
बहुआयामी ग़रीबी चर्चा-पत्र15 जनवरी 2024ग़रीबी का अनुपात 29.17% (2013-14) से घटकर 11.28% (2022-23, अनुमानित); 24.82 करोड़ लोग बाहर आए; प्रमुख 4 राज्य: उत्तर प्रदेश 5.94, बिहार 3.77, मध्य प्रदेश 2.30, राजस्थान 1.87 करोड़
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2025 (पहला)24 जनवरी 202518 प्रमुख राज्य; पाँच उप-सूचकांक (व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाना, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक, ऋण-संधारणीयता); ओडिशा 67.8 के साथ पहले, छत्तीसगढ़ 55.2 और गोवा 53.6
आकांक्षी ज़िला कार्यक्रमजनवरी 2018 से112 ज़िले; 49 संकेतकों (81 डेटा-बिंदु) पर प्रगति; संपूर्णता अभियान 4 जुलाई से 30 सितंबर 2024 (112 ज़िले और 500 ब्लॉक)

2013-14 और 2022-23 के ग़रीबी-अनुमान "प्रोजेक्टेड" हैं, यानी सर्वे पर नहीं, रुझान पर आधारित।

भारतीय संघवाद पर प्रभाव: मूल्यांकन के लिए तर्क

सकारात्मक पक्ष, तथ्य के रूप में: (क) गवर्निंग काउंसिल में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति है, जो योजना आयोग वाली व्यवस्था से अलग है जिसके बारे में संकल्प स्वयं एकतरफ़ा प्रवाह की बात करता है। (ख) संकल्प "नीचे से योजना" और क्षेत्रीय परिषदों जैसे मंच देता है। (ग) 14वें वित्त आयोग के बाद, NIPFP के अध्ययन के अनुसार, सारे सामान्य-प्रयोजन अंतरण वित्त आयोग की सिफ़ारिश पर होते हैं, जिससे योजना-प्रयोजन के अनुदान की पुरानी व्यवस्था अप्रासंगिक हो गई। राज्यों का हिस्सा 32% से 42% हुआ (PIB, 24 फ़रवरी 2015), जो राज्यों को ज़्यादा बे-शर्त पैसा देता है।

सीमाएँ, विश्लेषण के रूप में: (क) नीति आयोग सलाहकार संस्था है; संकल्प में उसके पास निधि-आवंटन या राज्यों के लिए बाध्यकारी निर्णय की शक्ति नहीं है। (ख) वह संविधान या संसद के क़ानून की बजाय कार्यकारी संकल्प से बना है, और प्रधानमंत्री उसके अध्यक्ष हैं। इसलिए राज्य उसके निर्णयों को चुनौती या बदलने की संस्थागत ताक़त नहीं रखते; उसकी भूमिका सलाह और संवाद की है। (ग) विशिष्ट-प्रयोजन अंतरण अब भी केंद्रीय मंत्रालय तय करते हैं (NIPFP), इसलिए राज्यों की वास्तविक वित्तीय स्वायत्तता पर असली असर वित्त आयोग और केंद्रीय योजनाओं का है, नीति आयोग का नहीं। (घ) गवर्निंग काउंसिल की बैठकों की आवृत्ति सीमित रही है (ऊपर का हिसाब)।

निष्कर्ष का सुझाव: नीति आयोग ने केंद्र-राज्य संवाद का एक मंच और सूचकांकों के ज़रिये होड़ का वातावरण दिया है, पर संघवाद की वास्तविक शक्ति-संतुलन वाली संस्थाएँ अब भी वित्त आयोग, अंतर-राज्य परिषद और संवैधानिक वित्त-व्यवस्था हैं। इसलिए इसे "संघवाद का सहायक" कहना सही रहेगा, "संघवाद का आधार" नहीं।

सोच का बदलाव: योजना आयोग से नीति आयोग

  1. योजना आयोग (1950)

    केंद्रीय योजना; योजना-अनुदान का वितरण; संकल्प के शब्दों में केंद्र से राज्य की ओर एकतरफ़ा प्रवाह

  2. 14वाँ वित्त आयोग (2015)

    राज्यों का हिस्सा 32% से 42%; सामान्य अंतरण वित्त आयोग से

  3. नीति आयोग (1 जनवरी 2015)

    थिंक-टैंक; गवर्निंग काउंसिल में सभी मुख्यमंत्री; सहकारी संघवाद का उद्देश्य

  4. सूचकांक और प्रतिस्पर्धा

    SDG इंडिया इंडेक्स, राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक, आकांक्षी ज़िले (प्रतिस्पर्धी संघवाद, विश्लेषण)

तीर क्रम का संकेत हैं, कारण-कार्य संबंध का नहीं। 14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट 24 फ़रवरी 2015 को प्रस्तुत हुई, यानी संकल्प के बाद।

समय-रेखा: नीति आयोग

  1. 15 मार्च 1950

    मंत्रिमंडल संकल्प से योजना आयोग की स्थापना

  2. 1 जनवरी 2015

    मंत्रिमंडल सचिवालय का संकल्प: नीति आयोग; 1950 का संकल्प निरस्त

  3. 8 फ़रवरी 2015

    गवर्निंग काउंसिल की पहली बैठक

  4. 16 फ़रवरी 2015

    संशोधन: गवर्निंग काउंसिल में विधानमंडल वाले संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्री

  5. 24 फ़रवरी 2015

    14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट संसद में; राज्यों का हिस्सा 42%

  6. जनवरी 2018

    आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम

  7. 15 जनवरी 2024

    बहुआयामी ग़रीबी चर्चा-पत्र

  8. 12 जुलाई 2024

    SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24

  9. 24 जनवरी 2025

    पहला राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक

  10. 11 जून 2026

    गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक

तारीख़ें परीक्षा में तुलना या क्रम के लिए पूछी जा सकती हैं।

एक नज़र में: नीति आयोग

नीति आयोग

जन्म

  • संकल्प 1-1-2015
  • योजना आयोग (1950) की जगह
  • कार्यकारी संकल्प

बनावट

  • अध्यक्ष: प्रधानमंत्री
  • गवर्निंग काउंसिल
  • क्षेत्रीय परिषदें
  • उपाध्यक्ष, सदस्य, CEO

काम

  • सलाह और साझा दृष्टि
  • सहकारी संघवाद
  • गाँव से ऊपर की योजना
  • निगरानी और मूल्यांकन

सूचकांक

  • SDG इंडिया इंडेक्स
  • बहुआयामी ग़रीबी
  • राजकोषीय स्वास्थ्य
  • आकांक्षी ज़िले

सीमाएँ (विश्लेषण)

  • निधि-शक्ति नहीं
  • बाध्यकारी नहीं
  • बैठकें कम

मुख्य तथ्य

नीति आयोग की स्थापना
मंत्रिमंडल सचिवालय का संकल्प, 1 जनवरी 2015 (संकल्प सं. 511/2/1/2015-Cab)
निरस्त संकल्प
15 मार्च 1950 का योजना आयोग वाला संकल्प
पूरा नाम
National Institution for Transforming India
संकल्प के उद्देश्य
13 (a से m); सहकारी संघवाद उद्देश्य (b)
गवर्निंग काउंसिल (संशोधन 16 फ़रवरी 2015)
विधानमंडल वाले संघ राज्य क्षेत्रों सहित सभी मुख्यमंत्री; अन्य संघ राज्य क्षेत्रों के उपराज्यपाल
GC की पहली और 11वीं बैठक
8 फ़रवरी 2015 और 11 जून 2026
11वीं बैठक की थीम
Inclusive Human Development for Viksit Bharat @2047 (2026)
14वाँ वित्त आयोग
राज्यों का हिस्सा 32% से 42% (रिपोर्ट 24 फ़रवरी 2015)
SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24
राष्ट्रीय अंक 71 (66 से), चौथा संस्करण, 12 जुलाई 2024
बहुआयामी ग़रीबी (चर्चा-पत्र)
29.17% से 11.28% (अनुमानित, 2013-14 से 2022-23); 24.82 करोड़ बाहर (15 जनवरी 2024)
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2025
ओडिशा पहले (67.8), 18 राज्य; 24 जनवरी 2025
आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम
112 ज़िले, 49 संकेतक (81 डेटा-बिंदु), जनवरी 2018 से

राजस्थान का पहलू

नीति आयोग से जुड़ा कोई ऐसा तथ्य, जो राजस्थान सरकार के आधिकारिक स्रोत से सत्यापित हो, यहाँ नहीं दिया गया है। केंद्र के आधिकारिक स्रोत (नीति आयोग का चर्चा-पत्र और PIB, 15 जनवरी 2024) के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच अनुमानित रूप से 1.87 करोड़ लोग राजस्थान में बहुआयामी ग़रीबी से बाहर आए; संख्या के हिसाब से उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान चौथे स्थान पर है। ये प्रोजेक्टेड अनुमान हैं। (केंद्र के स्रोत से तथ्य मिलान, 1 अक्टूबर 2026।)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • "नीति आयोग संवैधानिक या वैधानिक निकाय है" लिखना: ग़लत। उसे मंत्रिमंडल सचिवालय के संकल्प से बनाया गया है। यही बात योजना आयोग के लिए भी सही है (मंत्रिमंडल संकल्प, 1950)।
  • "नीति आयोग राज्यों को धन बाँटता है" लिखना: संकल्प में निधि-आवंटन की शक्ति नहीं है; सामान्य अंतरण वित्त आयोग से और विशिष्ट अंतरण केंद्रीय मंत्रालयों से होते हैं।
  • गवर्निंग काउंसिल में "केवल राज्यों के मुख्यमंत्री" लिखना: संशोधन के बाद विधानमंडल वाले संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्री भी हैं और अन्य संघ राज्य क्षेत्रों के उपराज्यपाल भी।
  • तारीख़ें मिलाना: संकल्प 1 जनवरी 2015, संशोधन 16 फ़रवरी 2015, पहली GC बैठक 8 फ़रवरी 2015, 14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट 24 फ़रवरी 2015।
  • सहकारी संघवाद को ही "प्रतिस्पर्धी संघवाद" बता देना। सहकारी: साझेदारी और संवाद; प्रतिस्पर्धी: राज्यों में बेहतर प्रदर्शन की होड़, जो सूचकांकों से व्यवहार में आई।
  • 10 अंक के प्रश्न में सिर्फ़ तारीख़ें और संरचना लिख देना; अंतर और "संघवाद पर प्रभाव" दोनों हिस्से, और अंत में संतुलित निष्कर्ष ज़रूरी है।