कार्मिक प्रशासन: भर्ती, प्रशिक्षण और पदोन्नति
क्रिकेट अकादमी की मिसाल से भर्ती, प्रशिक्षण और पदोन्नति का चक्र समझिए, फिर अनुच्छेद 315 से 323, DPC, APAR और मिशन कर्मयोगी के सत्यापित तथ्यों के साथ उत्तर लिखिए।
- भर्ती
- प्रशिक्षण
- पदोन्नति
- 2 PYQ हल
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II, लोक प्रशासन: "Personnel administration: recruitment, training, promotion, neutrality and anonymity in civil services, code of conduct." यह पन्ना पहले तीन पदों (भर्ती, प्रशिक्षण, पदोन्नति) को पूरा कवर करता है। तटस्थता, अनामता और आचरण संहिता का अलग पन्ना है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013-2024 के उपलब्ध पेपरों में इस विषय से सीधे दो प्रश्न देखे गए: 2024 में सेवा से हटाने (removal) और बर्ख़ास्तगी (dismissal) का अंतर (2 अंक) तथा 2021 में उच्च लोक सेवाओं में पार्श्विक प्रवेश (lateral entry) के प्रभाव का विश्लेषण (5 अंक)।
- 2023 में अनुच्छेद 315 (राज्य लोक सेवा आयोग) पर 5 अंक का प्रश्न भी आया था। इसलिए अनुच्छेद 315 से 323 का पूरा ढाँचा इसी पन्ने से तैयार कर लें।
- परीक्षक सही शब्दावली (जैसे removal बनाम dismissal), संवैधानिक अनुच्छेद और ताज़ा उदाहरण (मिशन कर्मयोगी, लेटरल एंट्री) देखता है। इसलिए हर तथ्य के साथ वर्ष और स्रोत याद रखें।
सबसे पहले सरल भाषा में
किसी क्रिकेट अकादमी को सोचिए। पहले ट्रायल से खिलाड़ी चुने जाते हैं (भर्ती)। फिर कोचिंग कैंप में उनकी तकनीक सुधरती है (प्रशिक्षण)। हर सीज़न के प्रदर्शन पर कुछ खिलाड़ी ऊपर की टीम या कप्तानी तक पहुँचते हैं (पदोन्नति)। सरकारी विभाग में यही चक्र चलता है, बस खिलाड़ी की जगह पटवारी, तहसीलदार या RAS अधिकारी होते हैं।
इस चक्र में तीन सवाल हैं: किसे चुना जाए, उसे कैसे तैयार किया जाए, और आगे कौन बढ़े? जवाब क्रम से भर्ती-व्यवस्था, प्रशिक्षण संस्थान और पदोन्नति के नियम देते हैं, जिनके बीच सालाना मूल्यांकन (APAR) कड़ी का काम करता है। नियम तोड़ने पर अनुशासन की प्रक्रिया चलती है, जिसके दो सबसे कड़े नतीजे हैं सेवा से हटाया जाना और बर्ख़ास्तगी। 2024 के पेपर में इन्हीं का अंतर पूछा गया था।
परीक्षा के लिए सटीक परिभाषाएँ
कार्मिक प्रशासन (Personnel administration): सरकारी सेवाओं के लिए लोगों को चुनने, प्रशिक्षित करने, उनके काम का मूल्यांकन करने, पदोन्नत करने और अनुशासित रखने की पूरी व्यवस्था। (सारांश-परिभाषा, किसी लेखक का उद्धरण नहीं।)
भर्ती (Recruitment): रिक्त पदों के लिए योग्य उम्मीदवार आकर्षित करना और चयन-प्रक्रिया से नियुक्ति तक पहुँचाना। प्रशिक्षण (Training): पद के लिए ज़रूरी ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण विकसित करना। पदोन्नति (Promotion): कर्मचारी को उच्च पद, ग्रेड या वेतन-स्तर पर ले जाना, जिसके साथ ज़िम्मेदारी बढ़ती है।
मेरिट प्रणाली (Merit system): नियुक्ति और पदोन्नति का आधार योग्यता यानी परीक्षा, प्रदर्शन और उपयुक्तता। लूट प्रणाली (Spoils system): जीतने वाला राजनीतिक दल अपने समर्थकों को सरकारी पद बाँटता है।
मेरिट प्रणाली बनाम लूट प्रणाली: अंतर एक नज़र में
मेरिट प्रणाली (Merit system)
चयन का आधारयोग्यता, परीक्षा और प्रदर्शन
कार्यकालस्थायी सेवा, सरकार बदलने से असर नहीं
तटस्थताहर सरकार की सेवा कर सकता है
उदाहरणब्रिटेन: नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट (1854); अमेरिका: पेंडलटन अधिनियम (1883)
लूट प्रणाली (Spoils system)
चयन का आधारराजनीतिक वफ़ादारी और दल की सेवा
कार्यकालसरकार बदलते ही पद बदलने का चलन
तटस्थतासत्ताधारी दल के दबाव में
उदाहरणअमेरिका में 1828 में जैक्सन के चुनाव तक पूरी तरह स्थापित
पहली चार पंक्तियाँ तुलना का विश्लेषण हैं। अंतिम पंक्ति अमेरिकी राष्ट्रीय अभिलेखागार और ब्रिटिश संसद पुस्तकालय के स्रोतों पर आधारित है।
लूट से मेरिट तक: तीन देशों की कहानी
अमेरिका: राष्ट्रीय अभिलेखागार के अनुसार 1828 में एंड्रयू जैक्सन के चुनाव तक "स्पॉयल्स सिस्टम" पूरी तरह जम चुका था, जिसका नाम "to the victor go the spoils" यानी जीतने वाले को लूट का माल वाली कहावत से आया। राष्ट्रपति गारफ़ील्ड की हत्या एक नाराज़ नौकरी-माँगने वाले ने की, जिसके बाद 16 जनवरी 1883 को पेंडलटन अधिनियम बना। इसने प्रतियोगी परीक्षा से चयन की व्यवस्था की, राजनीतिक कारणों से बर्ख़ास्तगी या पदावनति को ग़ैरक़ानूनी बनाया और Civil Service Commission बनाया। शुरू में यह कुल 1,32,000 कर्मचारियों में से केवल 10 प्रतिशत पर लागू था।
ब्रिटेन: फ़रवरी 1854 की नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट ने प्रतियोगी परीक्षा से भर्ती, योग्यता पर आंतरिक पदोन्नति और सेवा के एकीकृत ढाँचे की सिफ़ारिश की। ब्रिटिश संसद पुस्तकालय के अनुसार इसने राजनीतिक रूप से निरपेक्ष, स्थायी सिविल सेवा की नींव रखी।
भारत: भारत सरकार अधिनियम, 1919 और ली आयोग (1924) के बाद 1 अक्टूबर 1926 को लोक सेवा आयोग बना। बाद में यह फ़ेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन कहलाया और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) बना (PIB, 12 अगस्त 2025)।
समय-रेखा: मेरिट आधारित सेवा के पड़ाव
फ़रवरी 1854
ब्रिटेन: नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट, परीक्षा से भर्ती और योग्यता पर पदोन्नति की सिफ़ारिश
16 जनवरी 1883
अमेरिका: पेंडलटन अधिनियम, प्रतियोगी परीक्षा से चयन और Civil Service Commission
1 अक्टूबर 1926
भारत: लोक सेवा आयोग की स्थापना
26 जनवरी 1950
संविधान लागू, आयोग का नाम UPSC, भाग XIV में अनुच्छेद 315 से 323
2019
10 संयुक्त सचिव पदों के लिए पार्श्विक प्रवेश, UPSC ने नौ नाम सुझाए
सितंबर 2020
राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (मिशन कर्मयोगी) को मंज़ूरी
20 अगस्त 2024
45 पदों का पार्श्विक प्रवेश विज्ञापन रद्द किया गया
भर्ती के तरीक़े: सीधी भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और पार्श्विक प्रवेश
सीधी भर्ती (direct recruitment) में पद के लिए खुली प्रतियोगिता होती है और चयन आयोग या बोर्ड करता है। अनुच्छेद 320(1) संघ और राज्य आयोगों का कर्तव्य बताता है कि वे क्रमशः संघ और राज्य की सेवाओं के लिए परीक्षाएँ कराएँ। अनुच्छेद 309 के अनुसार भर्ती और सेवा-शर्तें विधानमंडल के अधिनियम से तय होती हैं, और अधिनियम बनने तक राष्ट्रपति या राज्यपाल नियम बना सकते हैं।
पदोन्नति (promotion) में पद उसी सेवा के कर्मचारियों से भरा जाता है। DoPT के दिशानिर्देशों के अनुसार यह तब होता है जब भर्ती नियमों में उसे भर्ती का तरीक़ा बताया गया हो, और उपयुक्तता का आकलन वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष होना चाहिए।
प्रतिनियुक्ति (deputation) की सामान्य परिभाषा: अधिकारी मूल विभाग से निश्चित अवधि के लिए दूसरे विभाग या संस्था में जाता है और बाद में लौटता है। केंद्र में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों के लिए Central Staffing Scheme इसकी व्यवस्थित प्रणाली है, जिसमें संगठित समूह A सेवाओं में समाहित या UPSC द्वारा भरे जाने वाले पद शामिल नहीं हैं (DoPT, 28 मार्च 2024)। पार्श्विक प्रवेश (lateral entry) में बाहर के विशेषज्ञ को खुले विज्ञापन से सीधे मध्य या वरिष्ठ स्तर पर लाया जाता है; 2019 में इसका चयन UPSC को सौंपा गया था।
IAS का उदाहरण: IAS (भर्ती) नियम, 1954 के नियम 4(1) में तीन रास्ते हैं: (क) प्रतियोगी परीक्षा, (ख) राज्य सिविल सेवा के स्थायी सदस्य की पदोन्नति, (ग) विशेष मामलों में राज्य सिविल सेवा से बाहर के राजपत्रित अधिकारियों में से चयन।
भर्ती के तरीक़ों की तुलना
| तरीक़ा | कौन आता है | चयन कैसे | लाभ (विश्लेषण) | सीमा (विश्लेषण) |
|---|---|---|---|---|
| सीधी भर्ती | बाहर के उम्मीदवार, प्रवेश-स्तर पर | आयोग या बोर्ड की परीक्षा | नई प्रतिभा | विभाग का अनुभव नहीं |
| पदोन्नति | उसी सेवा के कर्मचारी | DPC का आकलन | अनुभव का सम्मान | जड़ता |
| प्रतिनियुक्ति | दूसरे विभाग का अधिकारी | केंद्रीय स्टाफ़िंग योजना या सेवा-नियम | तुरंत अनुभव | अस्थायी, निरंतरता कम |
| पार्श्विक प्रवेश | बाहर के विशेषज्ञ | खुला विज्ञापन, UPSC चयन (2019) | विशेषज्ञता | आरक्षण, तटस्थता के प्रश्न |
पहले तीन कॉलम तथ्य आधारित हैं (DoPT, संविधान, PIB)। अंतिम दो कॉलम लेखक का विश्लेषण हैं।
संविधान का ढाँचा: अनुच्छेद 309, 311, 312 और 315 से 323
सरकारी सेवा का संवैधानिक आधार भाग XIV में है। अनुच्छेद 309 भर्ती और सेवा-शर्तों का अधिकार विधायिका को देता है, अनुच्छेद 311 हटाने और बर्ख़ास्तगी में सुरक्षा देता है, और अनुच्छेद 312 में राज्यसभा के दो-तिहाई उपस्थित सदस्यों के प्रस्ताव पर संसद नई अखिल भारतीय सेवा बना सकती है (IAS और IPS इसी अनुच्छेद से बनी माने गए हैं)।
अनुच्छेद 315 से 323 लोक सेवा आयोगों का अध्याय हैं। आयोग वह निष्पक्ष चयन-समिति है जो मंत्री से स्वतंत्र रहकर तय करती है कि कौन योग्य है, जैसे बोर्ड परीक्षा में कॉपी जाँचने वाला शिक्षक छात्र को पहचानता नहीं। इस स्वतंत्रता के लिए संविधान ने नियुक्ति, कार्यकाल, हटाने की प्रक्रिया और ख़र्च तक तय किए हैं।
अनुच्छेद 315 से 323 एक नज़र में
| अनुच्छेद | क्या कहता है |
|---|---|
| 315 | संघ और प्रत्येक राज्य के लिए एक आयोग; राज्य सहमत हों तो संयुक्त आयोग; राज्यपाल के अनुरोध और राष्ट्रपति की मंज़ूरी से UPSC किसी राज्य की ज़रूरतें भी पूरी कर सकता है। |
| 316 | नियुक्ति: UPSC और संयुक्त आयोग में राष्ट्रपति, राज्य आयोग में राज्यपाल। लगभग आधे सदस्य कम से कम दस वर्ष सरकारी पद पर रहे हों। कार्यकाल छह वर्ष या आयु 65 (UPSC) और 62 (राज्य, संयुक्त) तक, जो पहले हो। पुनर्नियुक्ति नहीं। |
| 317 | हटाना केवल राष्ट्रपति के आदेश से, दुराचरण पर, सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद। दिवालिया होने, बाहर वेतनभोगी काम करने या शारीरिक या मानसिक अक्षमता पर राष्ट्रपति बिना जाँच भी हटा सकते हैं। |
| 318 और 319 | सेवा-शर्तें नियम से तय, नियुक्ति के बाद सदस्य के नुक़सान में नहीं बदलतीं। पद छोड़ने पर UPSC अध्यक्ष को आगे सरकारी रोज़गार नहीं; अन्य सदस्यों को केवल कुछ आयोग-पद। |
| 320 | परीक्षाएँ कराना; भर्ती-पद्धति, नियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण के सिद्धांतों, उपयुक्तता और अनुशासनात्मक मामलों पर परामर्श। अनुच्छेद 16(4) के प्रावधान और अनुच्छेद 335 पर परामर्श अनिवार्य नहीं। |
| 321 से 323 | अतिरिक्त कार्य क़ानून से संभव; ख़र्च संचित निधि पर भारित; हर वर्ष रिपोर्ट, और सलाह न मानने पर कारण-ज्ञापन विधायिका में रखा जाता है। |
RPSC और UPSC की भूमिका: क्या बाध्यकारी है, क्या नहीं
राजस्थान में अनुच्छेद 315(1) के अनुसार राज्य का आयोग RPSC है। इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं (अनुच्छेद 316), पर हटाने का आदेश राष्ट्रपति देते हैं, वह भी सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद (अनुच्छेद 317)। परीक्षा में यही अंतर अक्सर चूकता है।
अनुच्छेद 320(3) में शब्द "consulted" है, यानी आयोग से सलाह ली जाती है। अनुच्छेद 323 के अनुसार सलाह न मानने पर कारणों का ज्ञापन विधायिका के सामने रखना होता है। इसलिए आयोग की सलाह परामर्शी है, बाध्यकारी नहीं।
समानता और आरक्षण: अनुच्छेद 16(1) सरकारी रोज़गार में सभी नागरिकों को अवसर की समानता देता है। अनुच्छेद 16(4) कहता है कि राज्य ऐसे पिछड़े वर्ग के लिए पदों के आरक्षण का प्रावधान कर सकता है, जिसका सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व राज्य की राय में नहीं है। पदोन्नति में आरक्षण के लिए अलग खंड 16(4A) है। इन्हें यहाँ केवल संवैधानिक प्रावधान के रूप में पढ़ें।
प्रशिक्षण: तैयारी के तीन मौक़े
प्रशिक्षण का काम वही है जो ड्राइविंग स्कूल का होता है: पद की ज़िम्मेदारी निभाने लायक़ बनाना। सामान्य वर्गीकरण (विश्लेषण) में तीन चरण हैं: नियुक्ति के बाद का बुनियादी प्रशिक्षण (foundation), सेवा के दौरान का प्रशिक्षण (in-service) और ऊँचे पदों के लिए मध्य-कैरियर प्रशिक्षण।
LBSNAA, मसूरी: संस्थान के इतिहास-पृष्ठ के अनुसार 15 अप्रैल 1958 को गृह मंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने लोकसभा में राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी की घोषणा की। दिल्ली के IAS ट्रेनिंग स्कूल और शिमला के IAS स्टाफ़ कॉलेज को मिलाया गया। 1959 में प्रशिक्षण मेटकाफ़ हाउस से मसूरी की चार्लेविल एस्टेट में गया। नाम 1972 में "लाल बहादुर शास्त्री एकेडमी ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन" और 1973 में "नेशनल" जुड़कर वर्तमान बना। 1960 में IAS, IFS और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए सामान्य फ़ाउंडेशन कोर्स शुरू हुआ।
HCM रीपा, जयपुर: संस्थान की वेबसाइट के अनुसार राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी प्रशिक्षण विद्यालय 14 नवंबर 1957 को जोधपुर में अस्तित्व में आया। ब्रोशर इसे राज्य और अखिल भारतीय सिविल सेवाओं के अधिकारियों के प्रशिक्षण का राजस्थान सरकार का प्रमुख संस्थान बताता है। राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएँ (संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा द्वारा सीधी भर्ती) नियम, 1999 से नियुक्त लोगों का बुनियादी प्रशिक्षण यहीं होता है।
LBSNAA बनाम HCM रीपा
LBSNAA
स्थानमसूरी (उत्तराखंड)
शुरुआत1959 में मसूरी में एकीकृत अकादमी (घोषणा 15 अप्रैल 1958)
सरकारकेंद्र सरकार की राष्ट्रीय अकादमी
किसे प्रशिक्षणIAS और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए फ़ाउंडेशन कोर्स
वर्तमान नामलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (नाम 1972 और 1973 में बदला)
HCM रीपा
स्थानजयपुर, चार क्षेत्रीय केंद्र: उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा
शुरुआत14 नवंबर 1957, जोधपुर में अधिकारी प्रशिक्षण विद्यालय के रूप में
सरकारराजस्थान सरकार का प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान
किसे प्रशिक्षणराजस्थान की राज्य और अधीनस्थ सेवाओं के अधिकारी, 1999 के नियमों के अंतर्गत बुनियादी प्रशिक्षण
वर्तमान नामहरिश्चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान
LBSNAA पंक्तियाँ संस्थान के इतिहास-पृष्ठ से। HCM रीपा पंक्तियाँ राजस्थान सरकार की संस्थान-वेबसाइट और ब्रोशर से।
मिशन कर्मयोगी: प्रशिक्षण की नई सोच
मिशन कर्मयोगी, यानी राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (NPCSCB), को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 सितंबर 2020 को मंज़ूरी दी। पहले कर्मचारी को रैंक के हिसाब से नियम पढ़ाए जाते थे; अब काम की भूमिका के हिसाब से ज़रूरी योग्यताएँ सिखाने का इरादा है। सरकार ने इसे 'नियम-आधारित (rules based)' से 'भूमिका-आधारित (roles based)' HR प्रबंधन की ओर बदलाव कहा है। मंच का नाम Integrated Government Online Training, यानी iGOT-कर्मयोगी, है।
17 सितंबर 2020 के PIB उत्तर के अनुसार इसके छह स्तंभ हैं: नीति, संस्थागत, योग्यता और डिजिटल लर्निंग (iGOT-कर्मयोगी) के ढाँचे, e-HRMS तथा निगरानी-मूल्यांकन ढाँचा। संस्थागत ढाँचे में प्रधानमंत्री की सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद, कैबिनेट सचिवालय की समन्वय इकाई, क्षमता निर्माण आयोग (CBC), धारा 8 की विशेष प्रयोजन इकाई (SPV) और कार्यक्रम प्रबंधन इकाई हैं।
2020 की मंज़ूरी में लगभग 46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 2020-21 से 2024-25 तक 510.86 करोड़ रुपये का प्रावधान था। 6 फ़रवरी 2026 तक iGOT पर 1.49 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े, पाठ्यक्रम 4,342 से अधिक हैं और 23 भाषाओं में उपलब्ध हैं (PIB, 11 फ़रवरी 2026)। 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ त्रिपक्षीय MoU हो चुके हैं (PIB, 5 फ़रवरी 2026)।
मिशन कर्मयोगी का ढाँचा
मिशन कर्मयोगी (NPCSCB)
संस्थागत ढाँचा
- प्रधानमंत्री की सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद
- क्षमता निर्माण आयोग (CBC)
- विशेष प्रयोजन इकाई (धारा 8 कंपनी)
- कैबिनेट सचिवालय की समन्वय इकाई
छह स्तंभ
- नीति ढाँचा
- संस्थागत ढाँचा
- योग्यता ढाँचा
- iGOT-कर्मयोगी (डिजिटल लर्निंग)
- e-HRMS
- निगरानी और मूल्यांकन
मूल सोच
- नियम-आधारित से भूमिका-आधारित HR
- भूमिका, गतिविधि, योग्यता का ढाँचा (FRACs)
- ऑन-साइट और ऑफ़-साइट सीख
फ़रवरी 2026 की स्थिति (PIB)
- 1.49 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता
- 4,342 से अधिक पाठ्यक्रम, 23 भाषाएँ
- 28 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से MoU
पदोन्नति: वरिष्ठता बनाम योग्यता
पदोन्नति के पीछे दो तर्क हैं। वरिष्ठता (seniority): जो पहले आया उसे पहले मौक़ा, इससे पक्षपात घटता है पर औसत प्रदर्शन भी ऊपर पहुँच सकता है। योग्यता (merit): जो ज़्यादा सक्षम हो वही ऊपर जाए, इससे दक्षता बढ़ती है पर आकलन में पसंद-नापसंद का ख़तरा रहता है। कक्षा में मॉनिटर चुनने का उदाहरण लें: केवल रोल-नंबर देखें तो वरिष्ठता, केवल अंक देखें तो योग्यता। (यह तुलना विश्लेषण है।) सरकारी व्यवस्था में दोनों का मिश्रण है, जैसा आगे DPC के नियमों में दिखता है।
DPC और पदोन्नति के मौजूदा नियम
विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) पदोन्नति के लिए अधिकारियों की उपयुक्तता परखती है। DoPT के दिशानिर्देशों के अनुसार समूह A और B के पदों की DPC में पदोन्नति वाले पद से कम से कम एक स्तर ऊपर के अधिकारी होते हैं। समूह B से समूह A में पदोन्नति में UPSC से परामर्श आवश्यक है और तब आयोग का अध्यक्ष या सदस्य DPC की अध्यक्षता करता है (DoPT, 15 मार्च 2024)।
इन दिशानिर्देशों में पदोन्नति का तरीक़ा अब केवल 'चयन (selection)' है; 'selection by merit' और 'selection-cum-seniority' के पुराने भेद हटा दिए गए। कड़ाई बेंचमार्क से तय होती है: वेतन स्तर 12 और ऊपर के पदों के लिए 'Very Good' और उससे नीचे के ग्रेड के लिए (निचले समूह से समूह A सहित) 'Good'।
DPC अधिकारी को केवल 'उपयुक्त (fit)' या 'अनुपयुक्त (unfit)' ठहराती है। उपयुक्तों का पैनल फ़ीडर ग्रेड की आपसी वरिष्ठता के क्रम में बनता है और उनके बीच अतिक्रमण (supersession) नहीं होता। नियुक्तियाँ पैनल के क्रम में होती हैं। आकलन में APAR के साथ दंड या अप्रसन्नता का रिकॉर्ड भी देखा जाता है। स्तर 14 और ऊपर के पदों के लिए DPC यह सुनिश्चित कर सकती है कि पाँचों वर्षों के सभी APAR में 'Very Good' बेंचमार्क पूरा हो।
APAR: सालाना रिपोर्ट-कार्ड
APAR (Annual Performance Assessment Report) अधिकारी का सालाना रिपोर्ट-कार्ड है; 2008-09 से पहले इसे वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) कहते थे। MCR HRD संस्थान की पठन-सामग्री के अनुसार इसके दो उद्देश्य हैं: वर्तमान काम में सुधार और भावी अवसरों के लिए क्षमता का आकलन। इसे विकासात्मक होना चाहिए, नियंत्रण का औज़ार नहीं।
DoPT के निर्देशों में रिपोर्टिंग और समीक्षा अधिकारी मूल्यांकन करते हैं, और जहाँ व्यवस्था है वहाँ स्वीकारकर्ता प्राधिकारी भी। 2008-09 की रिपोर्ट से पूरी APAR अधिकारी को बताई जाती है ताकि वह प्रतिवेदन दे सके। ऑनलाइन भरने के लिए NIC का SPARROW सॉफ़्टवेयर है। DPC इसी APAR के ग्रेड को पदोन्नति का आधार बनाती है।
APAR का चक्र
स्व-मूल्यांकन
अधिकारी अपना काम स्वयं लिखता है
रिपोर्टिंग अधिकारी
मूल्यांकन और ग्रेड
समीक्षा अधिकारी
समीक्षा, मतभेद दर्ज
स्वीकारकर्ता प्राधिकारी
जहाँ व्यवस्था है, जैसे अखिल भारतीय सेवाएँ
खुलासा और प्रतिवेदन
अधिकारी को प्रविष्टियाँ बताई जाती हैं
DPC में उपयोग
पदोन्नति के आकलन में आधार
हटाना बनाम बर्ख़ास्तगी: अनुशासन की सबसे ऊँची सीढ़ी
अनुशासन के दंड छोटे और बड़े होते हैं। केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 के नियम 11 में बड़े दंडों में (vii) अनिवार्य सेवानिवृत्ति, (viii) सेवा से हटाना, जो भविष्य की सरकारी नौकरी के लिए अयोग्यता नहीं होगा, और (ix) बर्ख़ास्त करना, जो सामान्यतः अयोग्यता होगा, गिनाए गए हैं। परंतुक के अनुसार आय से अधिक संपत्ति या रिश्वत का आरोप सिद्ध होने पर (viii) या (ix) का दंड दिया जाना है, पर असाधारण मामले में लिखित कारण देकर अन्य दंड संभव है।
संवैधानिक सुरक्षा: अनुच्छेद 311(1) के अनुसार नागरिक सेवक को नियुक्त करने वाले प्राधिकारी से अधीनस्थ अधिकारी बर्ख़ास्त या सेवा से हटा नहीं सकता। अनुच्छेद 311(2) में बर्ख़ास्तगी, हटाने या पदावनति से पहले जाँच, आरोपों की जानकारी और सुनवाई का उचित अवसर ज़रूरी है। तीन अपवाद हैं: आपराधिक दोषसिद्धि वाला आचरण; जाँच व्यावहारिक रूप से संभव न होना (कारण लिखित में); राज्य की सुरक्षा के हित में राष्ट्रपति या राज्यपाल की संतुष्टि।
राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1958 के नियम 14 में भी हटाना और बर्ख़ास्तगी बड़े दंडों के रूप में अलग-अलग गिनाए गए हैं।
हटाना (removal) बनाम बर्ख़ास्तगी (dismissal)
सेवा से हटाना (removal)
दंड का वर्गबड़ा दंड
CCS (CCA) नियम, 1965 का नियम 11खंड (viii)
भविष्य की सरकारी नौकरीअयोग्यता नहीं होगी (केंद्रीय नियम); राजस्थान के नियम 14 में 'सामान्यतः' अयोग्यता नहीं
अनुच्छेद 311 की सुरक्षालागू: नियुक्ति-प्राधिकारी से अधीनस्थ नहीं हटा सकता, जाँच और सुनवाई ज़रूरी
राजस्थान CCA नियम, 1958 का नियम 14खंड (vi)
बर्ख़ास्तगी (dismissal)
दंड का वर्गबड़ा दंड
CCS (CCA) नियम, 1965 का नियम 11खंड (ix)
भविष्य की सरकारी नौकरीसामान्यतः अयोग्यता होगी
अनुच्छेद 311 की सुरक्षालागू: वही सुरक्षा
राजस्थान CCA नियम, 1958 का नियम 14खंड (vii), सामान्यतः आगे की नौकरी में अयोग्यता
एक पंक्ति में उत्तर: दोनों बड़े दंड हैं और दोनों पर अनुच्छेद 311 लागू है; अंतर यह है कि हटाना सामान्यतः भविष्य की सरकारी नौकरी में बाधा नहीं बनता, बर्ख़ास्तगी सामान्यतः बनती है।
पार्श्विक प्रवेश (lateral entry): प्रभाव का विश्लेषण
तथ्य: PIB (4 जुलाई 2019) के अनुसार NITI Aayog की तीन वर्षीय कार्य-योजना और फ़रवरी 2017 की सचिवों के क्षेत्रीय समूह की रिपोर्ट ने मध्य और वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर बाहरी कर्मियों को लाने की सिफ़ारिश की थी। इसी आधार पर 10 संयुक्त सचिव और 40 उप सचिव या निदेशक स्तर के पदों पर बाहरी विशेषज्ञ लाने का सिद्धांततः निर्णय हुआ।
विश्लेषण (लाभ): विशेषज्ञता का सीधा प्रवेश, नई सोच, कैरियर सेवा पर प्रतिस्पर्धा का दबाव। विश्लेषण (जोखिम): भीतर के अधिकारियों का मनोबल, तटस्थता और हितों के टकराव का प्रश्न, संस्थागत स्मृति की कमी और आरक्षण का सवाल। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अगस्त 2024 में UPSC अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा कि इन पदों को विशेषज्ञ और एकल-संवर्ग (single-cadre) पद माना गया था, इसलिए इनमें आरक्षण का प्रावधान नहीं रहा।
उत्तर का निष्कर्ष संतुलित रखें: UPSC जैसी संवैधानिक संस्था से पारदर्शी चयन, स्पष्ट आचरण-नियम, सामाजिक न्याय पर स्पष्टता और अवधि के बाद जवाबदेही।
मुख्य तथ्य
- संघ लोक सेवा आयोग
- 1 अक्टूबर 1926 को लोक सेवा आयोग बना; 26 जनवरी 1950 से UPSC (PIB, 2025)
- राज्य आयोग का आधार
- अनुच्छेद 315(1): संघ और प्रत्येक राज्य के लिए आयोग; सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष या आयु 65 (UPSC) और 62 (राज्य) तक (अनुच्छेद 316), संविधान का 2024 का पाठ
- सदस्य को हटाना
- राष्ट्रपति के आदेश से, दुराचरण पर, सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद (अनुच्छेद 317), संविधान का 2024 का पाठ
- आयोग का परामर्श
- अनुच्छेद 320(3): भर्ती-पद्धति, पदोन्नति के सिद्धांत, अनुशासन आदि पर परामर्श; अनुच्छेद 16(4) के प्रावधान पर परामर्श अनिवार्य नहीं (320(4)), संविधान का 2024 का पाठ
- आरक्षण (संवैधानिक तथ्य)
- अनुच्छेद 16(4): राज्य पर्याप्त प्रतिनिधित्व न पाने वाले पिछड़े वर्ग के लिए पदों में आरक्षण का प्रावधान कर सकता है; संविधान का 2024 का पाठ
- IAS में भर्ती के तरीक़े
- नियम 4(1), IAS (भर्ती) नियम, 1954: प्रतियोगी परीक्षा, राज्य सिविल सेवा से पदोन्नति, विशेष मामलों में चयन
- LBSNAA
- राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी की घोषणा 15 अप्रैल 1958; 1959 में मसूरी; नाम 1972 और 1973 में बदला (संस्थान का इतिहास-पृष्ठ)
- HCM रीपा, जयपुर
- अधिकारी प्रशिक्षण विद्यालय 14 नवंबर 1957 को जोधपुर में; पहुँच: 1 अक्टूबर 2026
- HCM रीपा के क्षेत्रीय केंद्र
- उदयपुर 1 दिसंबर 1982; बीकानेर, जोधपुर, कोटा अगस्त 1983 (ब्रोशर 2023)
- मिशन कर्मयोगी की मंज़ूरी
- 2 सितंबर 2020; 510.86 करोड़ रुपये, 2020-21 से 2024-25, लगभग 46 लाख केंद्रीय कर्मचारी
- iGOT-कर्मयोगी
- 6 फ़रवरी 2026 तक 1.49 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता, 4,342 से अधिक पाठ्यक्रम, 23 भाषाएँ (PIB, 11 फ़रवरी 2026)
- हटाना और बर्ख़ास्तगी
- CCS (CCA) नियम, 1965 के नियम 11 के खंड (viii) और (ix); हटाना भविष्य की नौकरी में अयोग्यता नहीं, बर्ख़ास्तगी सामान्यतः अयोग्यता
- DPC का बेंचमार्क
- वेतन स्तर 12 और ऊपर 'Very Good', उससे नीचे 'Good'; तरीक़ा केवल 'selection' (DoPT के 2002 के ज्ञापन का समेकित पाठ, 15 मार्च 2024)
- ACR से APAR
- 2008-09 से पहले वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) कहलाती थी
- पार्श्विक प्रवेश 2019
- 10 संयुक्त सचिव पदों का विज्ञापन; UPSC ने नौ की सिफ़ारिश की (राज्यसभा उत्तर, 4 जुलाई 2019)
- पार्श्विक प्रवेश 2024
- 45 पदों का UPSC विज्ञापन 20 अगस्त 2024 को DoPT के निर्देश पर रद्द
- अंतिम जाँच
- 1 अक्टूबर 2026
राजस्थान का पहलू
नीचे के तथ्य राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार के आधिकारिक स्रोतों से हैं, पहुँच-तिथि 1 अक्टूबर 2026। (1) RPSC राजस्थान का राज्य लोक सेवा आयोग है और अनुच्छेद 315(1) के अंतर्गत संवैधानिक निकाय है। इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं (अनुच्छेद 316)। (2) HCM रीपा, जयपुर राजस्थान सरकार का प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है। यह 14 नवंबर 1957 को जोधपुर में अधिकारी प्रशिक्षण विद्यालय के रूप में अस्तित्व में आया। राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएँ (संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा द्वारा सीधी भर्ती) नियम, 1999 से नियुक्त लोगों का बुनियादी प्रशिक्षण यहाँ होता है। इसके क्षेत्रीय केंद्र उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर और कोटा में हैं। (3) राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1958 के नियम 14 में सेवा से हटाना (खंड vi) और बर्ख़ास्तगी (खंड vii) अलग बड़े दंड हैं। (4) PIB की वर्षांत समीक्षा 2025 (24 दिसंबर 2025) के अनुसार 2025 में क्षमता निर्माण आयोग के साथ MoU करने वाले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में राजस्थान शामिल है।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- हटाने (removal) और बर्ख़ास्तगी (dismissal) को एक ही मान लेना। उत्तर में भविष्य की सरकारी नौकरी वाला अंतर और अनुच्छेद 311 की सुरक्षा दोनों लिखें।
- यह लिखना कि राज्य आयोग के सदस्य को राज्यपाल हटाते हैं। नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, पर हटाने का आदेश राष्ट्रपति देते हैं और वह भी सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद (अनुच्छेद 317)।
- आयोग की सलाह को बाध्यकारी बताना। अनुच्छेद 320(3) में परामर्श है, और अनुच्छेद 323 के अनुसार सलाह न मानने पर कारण-ज्ञापन रखा जाता है।
- पदोन्नति में आज भी 'selection by merit' और 'selection-cum-seniority' दो श्रेणियाँ बताना। मौजूदा दिशानिर्देशों में केवल 'selection' है और कड़ाई बेंचमार्क से तय होती है।
- मिशन कर्मयोगी को केवल ऑनलाइन कोर्स का पोर्टल समझना। यह नियम-आधारित से भूमिका-आधारित HR की ओर बदलाव का कार्यक्रम है, iGOT उसका मंच है।
- लेटरल एंट्री के 2024 के विज्ञापन के रद्द होने का कारण बिना बताए केवल 'विवाद' लिख देना। DoPT के निर्देश, आरक्षण और सामाजिक न्याय का संदर्भ साथ दें।
- आरक्षण के प्रतिशत या सूची बिना आधिकारिक स्रोत के लिख देना। इस विषय में अनुच्छेद 16(4) का नाम और उसका सार काफ़ी है।
- APAR को आज भी ACR लिखना। 2008-09 से पहले ACR कहा जाता था।
वास्तविक मामला
केस स्टडीपार्श्विक प्रवेश: 2019 की पहली भर्ती और अगस्त 2024 में रद्द हुआ विज्ञापन
भारत सरकार ने संयुक्त सचिव स्तर पर बाहर के विशेषज्ञ लाने की योजना बनाई। 2019 में UPSC की चयन-प्रक्रिया से पहली भर्ती हुई। अगस्त 2024 में UPSC ने 45 पदों का बड़ा विज्ञापन निकाला, जिसे कुछ ही दिन में रद्द करना पड़ा।
- सिफ़ारिश
- NITI Aayog की तीन वर्षीय कार्य-योजना और 2017 की SGoS रिपोर्ट ने बाहरी विशेषज्ञों को मध्य और वरिष्ठ स्तर पर लाने की बात कही।
- 2019 की भर्ती
- DoPT ने दस पहचाने गए मंत्रालयों या विभागों में संयुक्त सचिव पदों का खुला विज्ञापन निकाला। पूरी चयन-प्रक्रिया UPSC को सौंपी गई, जिसने नौ व्यक्तियों की सिफ़ारिश की (राज्यसभा उत्तर, 4 जुलाई 2019)।
- 2024 का विज्ञापन
- UPSC ने संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सचिव स्तर के 45 पदों के लिए विज्ञापन दिया, जिस पर विपक्षी दलों ने प्रश्न उठाए।
- रद्द
- 20 अगस्त 2024 को DoPT के निर्देश पर UPSC ने विज्ञापन रद्द किया। मंत्री के पत्र में कहा गया कि पार्श्विक प्रवेश को समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप, ख़ासकर आरक्षण के संदर्भ में, होना चाहिए।
सीख
सीख: विशेषज्ञ को लाना जितना आसान लगता है, उतना नहीं। चयन की निष्पक्षता, आरक्षण की संवैधानिक अपेक्षा और सेवा-संवर्ग का मनोबल, तीनों को साथ रखकर नीति बनानी पड़ती है। उत्तर में इसे उदाहरण के रूप में दें।
काल्पनिक करियर-पथ
उदाहरण (काल्पनिक)एक काल्पनिक राज्य सेवा अधिकारी का करियर
यह उदाहरण काल्पनिक है। पात्र और घटनाएँ केवल इस विषय की प्रक्रिया का क्रम समझाने के लिए गढ़ी गई हैं, इन्हें किसी वास्तविक अधिकारी या पदानुक्रम का वर्णन न समझें।
- प्रवेश
- अनीता आयोग की सीधी भर्ती परीक्षा पास करके राज्य सेवा में आती है। यह भर्ती का सबसे आम और खुला तरीक़ा है।
- बुनियादी प्रशिक्षण
- नियुक्ति के बाद वह राज्य के लोक प्रशासन संस्थान में फ़ाउंडेशन कोर्स करती है और फिर ज़िले में अभ्यास-प्रशिक्षण पाती है।
- परिवीक्षा और पुष्टि
- परिवीक्षा के दौरान उसके काम और आचरण का आकलन होता है कि उसे सेवा में बनाए रखा जाए या नहीं। संतोषजनक होने पर पद की पुष्टि हो जाती है।
- हर साल APAR
- हर साल उसकी रिपोर्ट रिपोर्टिंग और समीक्षा अधिकारी भरते हैं और उसे अपनी प्रविष्टियाँ देखने का मौक़ा मिलता है।
- DPC से पदोन्नति
- कई वर्ष बाद DPC उसके APAR देखती है। यदि बेंचमार्क पूरा होता है तो वह उपयुक्त (fit) ठहरती है और वरिष्ठता के क्रम में पैनल में आती है।
- प्रतिनियुक्ति और नई सीख
- बीच में उसे दूसरे विभाग में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है। वह iGOT जैसे ऑनलाइन मंच से भूमिका के अनुरूप नए कोर्स भी करती है।
सीख
सीख: भर्ती, प्रशिक्षण, मूल्यांकन और पदोन्नति अलग-अलग काम नहीं, एक ही चक्र के हिस्से हैं। कमज़ोर कड़ी (जैसे पक्षपाती APAR) पूरे चक्र को बिगाड़ देती है।
काम करके देखें
हल सहित उदाहरणDPC पैनल कैसे बनता है (काल्पनिक आँकड़े)
दिया है
- एक विभाग में वेतन स्तर 12 से ऊपर के पद की 2 रिक्तियाँ हैं।
- फ़ीडर ग्रेड में वरिष्ठता क्रम से चार अधिकारी हैं: क, ख, ग, घ। ये नाम और आँकड़े काल्पनिक हैं।
- DPC के आकलन में क को 'Very Good', ख को 'Good', ग को 'Very Good' और घ को 'Very Good' मिला।
- 1चरण 1: सामग्री देखना DPC चारों के APAR, किसी दंड या अप्रसन्नता का रिकॉर्ड और अन्य प्रासंगिक सामग्री देखती है।
- 2चरण 2: बेंचमार्क लगाना इस स्तर पर बेंचमार्क 'Very Good' है। क, ग और घ उपयुक्त (fit) ठहरते हैं। ख अनुपयुक्त (unfit) है, क्योंकि उसका ग्रेड 'Good' है।
- 3चरण 3: पैनल बनाना उपयुक्त अधिकारियों का पैनल उनकी आपसी वरिष्ठता के क्रम में बनता है: क, ग, घ।
- 4चरण 4: नियुक्ति दो रिक्तियाँ हैं, इसलिए पैनल के क्रम में क और ग पदोन्नत होते हैं। घ पैनल में अगली रिक्ति के लिए रहता है।
निष्कर्ष: क और ग पदोन्नत होंगे। ख केवल वरिष्ठता के आधार पर आगे नहीं बढ़ा, क्योंकि बेंचमार्क पूरा नहीं हुआ। उपयुक्त अधिकारियों के बीच कोई अतिक्रमण नहीं हुआ।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2024RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
Distinguish removal and dismissal.
आदर्श उत्तर
दोनों बड़े दंड हैं। हटाना सामान्यतः भविष्य की सरकारी नौकरी नहीं रोकता; बर्ख़ास्तगी सामान्यतः रोकती है।
2021RAS मुख्य परीक्षापेपर III5 अंक
उच्च लोक सेवाओं में पार्श्विक प्रवेश (लेटरल एण्ट्री) के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
आदर्श उत्तर
पार्श्विक प्रवेश से बाहरी विशेषज्ञ संयुक्त सचिव जैसे पदों पर आते हैं, जिससे विशेषज्ञता और नई सोच मिलती है; 2019 में UPSC ने नौ नाम सुझाए। किंतु आरक्षण का अभाव, अधिकारियों का मनोबल और तटस्थता के प्रश्न चिंताजनक हैं। अगस्त 2024 में 45 पदों का विज्ञापन इसी बहस में रद्द हुआ। पारदर्शी चयन ज़रूरी है।
अभ्यास प्रश्न (हमारे अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
प्रतिनियुक्ति (deputation) क्या है?
आदर्श उत्तर
निश्चित अवधि के लिए मूल विभाग से दूसरे विभाग में जाना, फिर मूल पद पर लौटना।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
APAR का मुख्य उद्देश्य बताइए।
आदर्श उत्तर
अधिकारी के वर्तमान काम में सुधार करना और भावी अवसरों के लिए उसकी क्षमता का आकलन करना।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
अनुच्छेद 315 के अंतर्गत राज्य लोक सेवा आयोग के प्रावधान लिखिए।
आदर्श उत्तर
अनुच्छेद 315(1) के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होता है। दो या अधिक राज्य संयुक्त आयोग भी बना सकते हैं, जिसके लिए विधायिकाओं का प्रस्ताव और संसद का क़ानून चाहिए। राज्यपाल के अनुरोध और राष्ट्रपति की मंज़ूरी से UPSC भी राज्य की ज़रूरतें पूरी कर सकता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
वरिष्ठता और योग्यता आधारित पदोन्नति की तुलना कीजिए।
आदर्श उत्तर
वरिष्ठता में सेवा-तिथि के क्रम से पदोन्नति होती है। यह सरल और निष्पक्ष दिखती है, पर औसत प्रदर्शन को भी आगे बढ़ा सकती है। योग्यता में APAR, परीक्षा या साक्षात्कार से आकलन होता है, जो दक्षता बढ़ाता है, पर पक्षपात का ख़तरा रखता है। DoPT की व्यवस्था में बेंचमार्क के साथ वरिष्ठता-क्रम का पैनल बनता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
मिशन कर्मयोगी के उद्देश्य और संस्थागत ढाँचे का वर्णन कीजिए।
आदर्श उत्तर
मिशन कर्मयोगी, यानी राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम, को सितंबर 2020 में मंज़ूरी मिली। इसका उद्देश्य नियम-आधारित मानव संसाधन प्रबंधन को भूमिका-आधारित बनाना और अधिकारियों में व्यवहार, कार्यात्मक और विषय-क्षेत्र की योग्यताएँ विकसित करना है।
संस्थागत ढाँचे में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद, कैबिनेट सचिवालय की समन्वय इकाई, प्रशिक्षण संस्थानों की निगरानी करने वाला क्षमता निर्माण आयोग, धारा 8 की विशेष प्रयोजन इकाई और कार्यक्रम प्रबंधन इकाई हैं। डिजिटल मंच iGOT-कर्मयोगी है, जिस पर फ़रवरी 2026 तक 1.49 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े थे। निगरानी के लिए मूल्यांकन ढाँचा भी बनाया गया है।
10 अंक (100 शब्द) का उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
एक पंक्ति में कार्मिक प्रशासन की परिभाषा: सरकारी सेवा में भर्ती, प्रशिक्षण, मूल्यांकन और पदोन्नति की व्यवस्था। साथ में मेरिट-सिद्धांत (नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन 1854) का संदर्भ।
मुख्य भाग
- भर्ती: सीधी भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति, पार्श्विक प्रवेश; संघ और राज्य आयोगों की भूमिका (अनुच्छेद 315 से 323) और अनुच्छेद 16(4) का नाम।
- प्रशिक्षण: LBSNAA, राज्य का संस्थान (जैसे HCM रीपा) और मिशन कर्मयोगी (2020) की भूमिका-आधारित सोच।
- पदोन्नति: वरिष्ठता बनाम योग्यता, DPC, APAR और बेंचमार्क ('Very Good' या 'Good')।
- अनुशासन और सुरक्षा: अनुच्छेद 311, हटाना बनाम बर्ख़ास्तगी।
निष्कर्ष
मेरिट, पारदर्शिता और जवाबदेही का संतुलन ही कुशल और तटस्थ सिविल सेवा बनाता है।
अतिरिक्त मूल्य
- एक ताज़ा उदाहरण: 2019 की पार्श्विक भर्ती और 2024 में रद्द हुआ विज्ञापन।
- मिशन कर्मयोगी का एक आँकड़ा वर्ष सहित: फ़रवरी 2026 तक 1.49 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता।
- एक छोटी तालिका या तीर-चित्र: भर्ती से पदोन्नति तक का चक्र।
त्वरित पुनरावृत्ति
- कार्मिक प्रशासन = भर्ती, प्रशिक्षण, मूल्यांकन, पदोन्नति और अनुशासन की व्यवस्था।
- मेरिट बनाम लूट: ब्रिटेन में नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट (1854), अमेरिका में पेंडलटन अधिनियम (16 जनवरी 1883)।
- भारत में लोक सेवा आयोग: 1 अक्टूबर 1926; UPSC नाम 26 जनवरी 1950 से।
- अनुच्छेद 315 से 323: आयोग; 316 में नियुक्ति और कार्यकाल (छह वर्ष, 65 या 62 की आयु); 317 में हटाने की प्रक्रिया; 320 में कार्य; 323 में रिपोर्ट।
- आयोग की सलाह परामर्शी है; सलाह न मानने पर कारण-ज्ञापन विधायिका में रखा जाता है।
- अनुच्छेद 16(4): पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान, राज्य कर सकता है।
- भर्ती के तरीक़े: सीधी भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति, पार्श्विक प्रवेश; IAS नियम 4(1) में तीन तरीक़े।
- LBSNAA: घोषणा 1958, मसूरी 1959; HCM रीपा: 14 नवंबर 1957, जोधपुर में शुरुआत।
- मिशन कर्मयोगी: 2 सितंबर 2020 की मंज़ूरी; नियम-आधारित से भूमिका-आधारित HR; iGOT मंच; 28 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से MoU।
- DPC: केवल 'selection', बेंचमार्क 'Very Good' (स्तर 12 और ऊपर) या 'Good', उपयुक्तों का पैनल वरिष्ठता-क्रम में।
- APAR 2008-09 से पहले ACR; रिपोर्टिंग, समीक्षा, स्वीकारकर्ता, खुलासा।
- हटाना बनाम बर्ख़ास्तगी: नियम 11(viii) और (ix); हटाने से भविष्य की नौकरी में बाधा नहीं, बर्ख़ास्तगी सामान्यतः बाधा; दोनों पर अनुच्छेद 311।
याद रखने योग्य शब्द
- कार्मिक प्रशासन
- मेरिट प्रणाली
- अनुच्छेद 315 से 323
- अनुच्छेद 311
- DPC
- APAR
- मिशन कर्मयोगी
- iGOT
- पार्श्विक प्रवेश
- प्रतिनियुक्ति
- LBSNAA
- HCM रीपा