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पेपर III · इकाई II

पुलिस प्रशासन: राजस्थान पुलिस अधिनियम 2007, आयुक्तालय और पुलिस सुधार

राज्य स्तर पर पुलिस का संगठन, राजस्थान पुलिस अधिनियम 2007 की धाराएँ, आयुक्तालय, और प्रकाश सिंह निर्णय, NPC व मॉडल पुलिस अधिनियम के साथ सुधार की तुलनात्मक तस्वीर, उत्तर-लेखन की दृष्टि से।

  • राजस्थान पुलिस अधिनियम 2007
  • DGP
  • आयुक्तालय
  • प्रकाश सिंह 2006
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II, "State and District Administration": "State: Governor, Chief Minister, Council of Ministers, State Secretariat, Chief Secretary, role of Directorates, police administration, Revenue Board, State Election Commission, State Human Rights Commission, Lokayukta." ज़िला-स्तर की "law and order administration" अलग मद है। इस पृष्ठ पर राज्य-स्तर का पुलिस संगठन और पुलिस सुधार हैं; ज़िले में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की भूमिका तथा BNSS की धाराएँ कानून-व्यवस्था प्रशासन के पृष्ठ पर हैं। इकाई III (Law) में BNSS की धाराएँ 14-17, 148-149, 163-167 आदि अलग से सिलेबस में हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में "पुलिस प्रशासन" पर कोई सीधा प्रश्न नहीं मिला; ज़िला-स्तर का एक प्रश्न 2021 में 10 अंक का आया था (कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की भूमिका), जो कानून-व्यवस्था वाले पृष्ठ पर हल है। यह 2013-2024 के पेपरों में देखा गया रुझान है, परीक्षा की भविष्यवाणी नहीं। यह पृष्ठ सिलेबस की सीधी पंक्ति "police administration" पर बना है।
  • सिलेबस (09-01-2026) अब BNSS की धाराएँ भी सीधे गिनाता है, इसलिए पुलिस का संगठन, सुधार और नई आपराधिक संहिता, तीनों साथ तैयार रखें।
  • इस विषय में अंक दिलाने वाला उत्तर तीन परतों का होता है: (1) राज्य पुलिस का ढाँचा, (2) सर्वोच्च न्यायालय के 2006 के निर्देश, (3) राजस्थान के 2007 के अधिनियम ने उन निर्देशों को कितना अपनाया। तीसरी परत वाला उत्तर आम उत्तरों से अलग दिखता है (विश्लेषण)।

पहले सरल भाषा में: थाने की शिकायत से मुख्यालय तक

मान लीजिए गाँव की एक महिला का मोबाइल छीन लिया गया और वह थाने पहुँचती है। थाने का प्रभारी (उप-निरीक्षक या उससे ऊपर) रिपोर्ट दर्ज करता है और जाँच शुरू होती है। उसके ऊपर सर्कल का उप अधीक्षक निगरानी करता है, फिर ज़िले का पुलिस अधीक्षक, फिर रेंज का उप महानिरीक्षक और सबसे ऊपर राज्य मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक (DGP)। यह सीढ़ी स्कूल जैसी है: कक्षा-अध्यापक, विभागाध्यक्ष, प्राचार्य, और सबके ऊपर प्रबंध-समिति। पुलिस की प्रबंध-समिति राज्य सरकार है। (यह समझाने के लिए गढ़ा गया दृश्य है, किसी वास्तविक घटना का वर्णन नहीं।)

परीक्षा के लिए परिभाषा (विश्लेषण): पुलिस प्रशासन राज्य के उस संगठित बल का संचालन है जो अपराध की रोकथाम, पता लगाने और लोक व्यवस्था बनाए रखने का काम क़ानून के दायरे में, राजनीतिक कार्यपालिका के अधीक्षण में और जवाबदेही की व्यवस्थाओं के साथ करता है।

संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में प्रविष्टि 1 "लोक व्यवस्था" है और प्रविष्टि 2 "पुलिस (रेल और ग्राम पुलिस सहित)", जो संघ सूची की प्रविष्टि 2A के अधीन है। इसलिए हर राज्य का अपना पुलिस क़ानून है। PRS के पत्र के अनुसार राज्यों के पुलिस बल उनके अपने क़ानूनों से शासित हैं और कुछ राज्यों ने अपने क़ानून 1861 के केंद्रीय पुलिस अधिनियम के आधार पर बनाए हैं।

क़ानून की सीढ़ी: 1861 से राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 तक

राजस्थान का पुलिस क़ानून राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 (अधिनियम सं. 14/2007) है। राज्यपाल की स्वीकृति 30 अक्टूबर 2007 को मिली। अधिनियम के उद्देश्य-कथन में कहा गया है कि 1861 का भारतीय पुलिस अधिनियम 141 वर्ष से चल रहा था और पुलिस-कार्य की चुनौतियाँ बहुत जटिल हो चुकी हैं, इसलिए समुदाय की ज़रूरतों के अनुरूप नया कानूनी ढाँचा चाहिए। धारा 73 के अनुसार राजस्थान में लागू रूप में 1861 का अधिनियम और राजस्थान पुलिस एकीकरण अध्यादेश, 1949 निरस्त हो गए। यानी उत्तर में 1861 का अधिनियम राजस्थान के आज के क़ानून के रूप में न लिखें। (पुलिस नियमों के लिए गृह विभाग की सूची में राजस्थान पुलिस नियम, 2008 है।)

अधिनियम की धारा 1(3) के अनुसार वह राज्य सरकार की अधिसूचना से तय तारीख़ से लागू होना था, अलग-अलग प्रावधानों के लिए अलग तारीख़ भी संभव थी। इसलिए इस पृष्ठ पर लागू होने की तारीख़ नहीं दी गई है। अधिनियम में बाद में संशोधन भी हुए हैं (उदाहरण के लिए 2015 और 2020 में); नीचे के संगठन-संबंधी प्रावधान 2007 के मूल पाठ से हैं।

नई संहिता का सेतु: अधिनियम का 2007 का पाठ दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 का हवाला देता है। उस संहिता को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) ने धारा 531 से निरस्त किया और BNSS 1 जुलाई 2024 से लागू है। इसलिए आज के उत्तर में प्रक्रिया-संबंधी हवाले BNSS के अनुसार लिखें; कलेक्टर-SP के BNSS प्रावधान कानून-व्यवस्था वाले पृष्ठ पर हैं।

राजस्थान पुलिस का ढाँचा (राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007)

स्तरप्रमुख अधिकारीअधिनियम की धाराध्यान देने की बात
राज्यपुलिस महानिदेशक (DGP)धारा 13राज्य सरकार नियुक्त करती है; "समग्र नियंत्रण, पर्यवेक्षण और निर्देशन"। सहायता के लिए अपर महानिदेशक, महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक और अधीक्षक नियुक्त हो सकते हैं (13(5))
रेंजउप महानिरीक्षक (DIG) या उससे ऊपर के पद का अधिकारीधारा 4, 14महानगर क्षेत्र को छोड़कर पूरे राज्य को रेंजों में बाँटा जा सकता है; न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष
महानगर क्षेत्रपुलिस आयुक्त (महानिरीक्षक से कम पद का नहीं)धारा 5, 1510 लाख से अधिक आबादी वाला नगर महानगर क्षेत्र घोषित किया जाना है; आयुक्त की नियुक्ति मुख्य सचिव, गृह सचिव, कार्मिक सचिव और DGP की समिति के पैनल से; सहायता के लिए अपर, संयुक्त, उप और सहायक आयुक्त
पुलिस ज़िलाज़िला पुलिस अधीक्षकधारा 6, 16महानगर में यही पद "उप आयुक्त" कहलाता है; न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष; सहायता के लिए अपर, उप और सहायक अधीक्षक
सर्कलउप अधीक्षक (DSP) या उससे ऊपर का अधिकारीधारा 7, 17महानगर में "सहायक आयुक्त"; न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष
थाना और चौकीउप-निरीक्षक (SI) या उससे ऊपर का अधिकारीधारा 8, 19थाने के भीतर चौकी बनाई जा सकती है; थाना-प्रभारी और अपराध अन्वेषण इकाई के प्रभारी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष
रेल क्षेत्रमहानिरीक्षक (क्षेत्र-प्रभारी); रेल पुलिस ज़िले में अधीक्षकधारा 9, 18रेल क्षेत्र के लिए अलग पुलिस ज़िले बनाए जा सकते हैं

अधिनियम की कई धाराओं में "सकती है" (may) है और कुछ में "करेगी" (shall); उत्तर में दोनों का फ़र्क़ ध्यान रखें। अधिनियम पुलिस की रैंक-श्रृंखला (सिपाही से ऊपर तक) का ब्योरा नियमों पर छोड़ता है।

DGP, अधीक्षण और दो संस्थाएँ: पुलिस आयोग और स्थापना बोर्ड

अधिनियम की धारा 12 के अनुसार पुलिस बल के अधीक्षण (superintendence) की शक्ति राज्य सरकार में निहित है। धारा 2(1)(l) इस शक्ति को खोलकर बताती है: सभी प्रशासनिक मामलों में निर्देश, मार्गदर्शन और हिदायत देने की शक्ति, और अधिनियम के तहत किसी प्राधिकारी का आदेश रद्द करने, पलटने या बदलने की शक्ति, पर जाँच से जुड़े प्रावधानों के अधीन। यह परिभाषा काफ़ी व्यापक है, जबकि सुधार-समितियाँ अधीक्षण को सीमित करने की बात करती रही हैं (नीचे देखें)।

DGP की नियुक्ति धारा 13 के अनुसार राज्य सरकार करती है, उस पैनल से जिसमें महानिदेशक रैंक के अधिकारी और वे अधिकारी हों जिन्हें अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के तहत गठित समिति ने महानिदेशक पद की पदोन्नति के योग्य पाया; पैनल महानिदेशक के स्वीकृत कैडर पदों की संख्या के दुगुने से अधिक नहीं हो सकता। न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष है (अखिल भारतीय सेवा नियमों के अधीन)। उसे समय से पहले हटाने के आधार गिनाए गए हैं: सज़ा या आरोप-निर्धारण, अनुशासनिक दंड, निलंबन, शारीरिक या मानसिक अक्षमता, अपना अनुरोध, और "लिखित में दर्ज प्रशासनिक आवश्यकता" (धारा 13(4))। यह अंतिम आधार आलोचना का केंद्र है, क्योंकि CHRI के 2009 के विश्लेषण के अनुसार यह अस्पष्ट कारण से हटाने की गुंजाइश देता है।

राज्य पुलिस आयोग (धारा 21-27): अध्यक्ष गृह विभाग के प्रभारी मंत्री; सदस्य नेता प्रतिपक्ष, मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP और तीन स्वतंत्र सदस्य (कम से कम एक कमज़ोर वर्ग से)। स्वतंत्र सदस्य मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले पैनल (नेता प्रतिपक्ष, गृह मंत्री और राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष) की सिफ़ारिश पर नियुक्त होते हैं और कार्यकाल तीन वर्ष है, पुनर्नियुक्ति नहीं। आयोग "कर सकता है": नीति पर सलाह, कामकाज के संकेतक, पाँच वर्ष की योजना, प्रशिक्षण-नीति; उसकी वार्षिक रिपोर्ट बजट सत्र में विधानसभा में रखी जाती है।

पुलिस स्थापना बोर्ड (धारा 28): अध्यक्ष DGP, और चार सदस्य महानिरीक्षक से कम पद के नहीं। यह कांस्टेबल की भर्ती, अधीनस्थ रैंकों की पदोन्नति, उनके और उप अधीक्षक के स्थानांतरण देखता है, अपर अधीक्षक के स्थानांतरण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजता है और पुलिसकर्मियों की शिकायतों का विश्लेषण कर उपाय सुझाता है।

महानगर और ज़िले में कमान: आयुक्तालय और ज़िला मजिस्ट्रेट

आयुक्तालय प्रणाली का सामान्य विवरण और दोहरे नियंत्रण से उसकी तुलना कानून-व्यवस्था वाले पृष्ठ पर है। राजस्थान के अपने क़ानून में आधार यह है: धारा 5 राज्य सरकार को 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगर को महानगर क्षेत्र घोषित करने को कहती है, और धारा 15 के अनुसार महानगर क्षेत्र में राज्य सरकार पुलिस आयुक्त नियुक्त करेगी, जिसके पास DGP के समग्र नियंत्रण के अधीन क्षेत्र में पुलिस का नियंत्रण, पर्यवेक्षण और निर्देशन होगा।

राजस्थान पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट की इकाई-सूची में दो आयुक्तालय दिखते हैं, जयपुर और जोधपुर, और जोधपुर पुलिस की वेबसाइट पुलिस आयुक्त तथा पूर्व व पश्चिम के दो पुलिस उपायुक्तों का उल्लेख करती है (दोनों पृष्ठ 1 अक्टूबर 2026 को देखे गए; सूची-पृष्ठ पर तारीख़ नहीं है)। स्थापना की तारीख़ें आधिकारिक स्रोत से सत्यापित नहीं हुईं, इसलिए उन्हें न लिखें।

अब वह बिंदु जो कानून-व्यवस्था वाले पृष्ठ में सत्यापित नहीं हो सका था: ज़िला मजिस्ट्रेट और पुलिस का संबंध राजस्थान के अपने अधिनियम में कैसे है। धारा 70 कहती है कि ज़िला मजिस्ट्रेट पुलिस के कामकाज का ज़िला प्रशासन की अन्य एजेंसियों से समन्वय कर सकता है, इन मामलों में: लोक-शांति में बाधा, भूमि-विवादों का निपटारा, किसी लोक निकाय के चुनाव, प्राकृतिक आपदा और पुनर्वास, बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति, ऐसे सामान्य जनहित के मामले जो किसी एक विभाग के दायरे में नहीं, और किसी लोक शिकायत का निवारण। इन मामलों में वह पुलिस या संबंधित एजेंसी से रिपोर्ट माँग सकता है और आवश्यक निर्देश दे सकता है। इसी तरह धारा 43 और 44 में पुलिस अधीक्षक की सार्वजनिक स्थान आरक्षित करने और जुलूस-सभाओं के विनियमन की शक्तियाँ ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा तय जाँच-सीमाओं के अधीन हैं, और धारा 10 में विशेष पुलिस अधिकारी की नियुक्ति पुलिस अधीक्षक ज़िला मजिस्ट्रेट से परामर्श के बाद करता है।

विश्लेषण: यानी राजस्थान में ज़िले में पुलिस पर आज भी नागरिक प्रशासन का सीमित पर स्पष्ट प्रभाव है, पर बल का आंतरिक प्रबंधन अधीक्षक के पास है। "दोहरा नियंत्रण" लिखते समय इन धाराओं का हवाला देने से उत्तर राजस्थान-विशिष्ट बनता है।

पुलिस के कार्य और जनता से रिश्ता

धारा 29 पुलिस अधिकारी के कार्य गिनाती है: क़ानून लागू करना और लोगों के जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति, गरिमा और मानवाधिकारों की रक्षा, अपराध और लोक-उपद्रव की रोकथाम, लोक व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और आतंकी गतिविधियों की रोकथाम, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, अपराधों का पता लगाकर अपराधियों को न्याय के कठघरे में लाना, आपदा में सहायता, यातायात का नियमन और ख़ुफ़िया सूचनाएँ जुटाना। धारा 30 वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और कमज़ोर वर्गों के प्रति शिष्टाचार और सहायता के सामाजिक दायित्व जोड़ती है।

तीन प्रावधान ख़ास हैं। धारा 31(2): अगर थाना-प्रभारी संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करने से इनकार करे और पीड़ित ज़िला पुलिस अधीक्षक को सूचना भेजे, तो अधीक्षक को तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी या करानी होगी। धारा 42: राज्य सरकार थानों में अलग अपराध अन्वेषण इकाई (उप-निरीक्षक के नेतृत्व में) बना सकती है, और साइबर व संगठित अपराध जैसे मामलों के लिए निरीक्षक या उससे ऊपर के अधिकारी के नेतृत्व में विशेष इकाइयाँ, जिनके अधिकारियों से अन्य ड्यूटी नहीं ली जाएगी। धारा 55: ज़िला पुलिस अधीक्षक हर थाने के लिए सामुदायिक संपर्क समूह (Community Liaison Group) बनाएगा और हर पंचायत के लिए कम से कम एक समूह होगा।

समय-रेखा: पुलिस सुधार की मुख्य कड़ियाँ

  1. 1861

    भारतीय पुलिस अधिनियम; राजस्थान में लागू रूप में 2007 के अधिनियम की धारा 73 से निरस्त

  2. 1977-81

    राष्ट्रीय पुलिस आयोग (NPC): आठ रिपोर्ट

  3. 22 सितंबर 2006

    प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ: सात निर्देश, अनुपालन की तारीख़ 31 दिसंबर 2006

  4. 30 अक्टूबर 2006

    मॉडल पुलिस अधिनियम (सोराबजी समिति) गृह मंत्रालय को सौंपा गया; 31.10.2006 को राज्यों को भेजा गया

  5. 30 अक्टूबर 2007

    राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 को राज्यपाल की स्वीकृति

  6. 3 जुलाई 2018

    सर्वोच्च न्यायालय का आदेश: DGP-चयन में UPSC का पैनल; कोई कार्यवाहक DGP नहीं

  7. 1 जुलाई 2024

    BNSS, 2023 का प्रवर्तन; CrPC, 1973 निरस्त

तारीख़ें तुलना के प्रश्नों में काम आती हैं। 2018 के आदेश की तारीख़ और ब्योरे प्रेस-स्रोतों से हैं (मूल आदेश का पाठ नहीं खोला गया)।

सुधार-निकाय और निर्णय: कौन क्या कह गया

वर्षनिकाय या निर्णयमुख्य बात
1977-81राष्ट्रीय पुलिस आयोग (NPC)आठ रिपोर्ट। अधीक्षण की परिभाषा क़ानून में हो और उसमें विधि-प्रक्रिया में दख़ल, परिचालन-निर्णयों या स्थानांतरण-भर्ती में अनुचित प्रभाव शामिल न हो; आयोग ने नया पुलिस विधेयक भी सुझाया (PRS)
2006मॉडल पुलिस अधिनियम (सोराबजी समिति)राज्य में एक पुलिस सेवा, प्रमुख DGP; राज्य पुलिस बोर्ड; पुलिस जवाबदेही आयोग; DGP और थाना-प्रभारी जैसे पदों का न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल; ड्यूटी सामान्यतः 8 घंटे (असाधारण में 12); विशेष अपराध-अन्वेषण इकाई (PRS)
2006प्रकाश सिंह बनाम भारत संघसात निर्देश: राज्य सुरक्षा आयोग, DGP का चयन-कार्यकाल, ऑपरेशनल अधिकारियों का कार्यकाल, जाँच-कानून व्यवस्था का पृथक्करण, पुलिस स्थापना बोर्ड, पुलिस शिकायत प्राधिकरण (राज्य के लिए), राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (केंद्र के लिए)
2007द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग, पाँचवीं रिपोर्ट "Public Order"राजनीतिक कार्यपालिका का नियंत्रण पुलिस को प्रभावित करने के लिए दुरुपयोग हुआ है; अधीक्षण की शक्ति पेशेवर कुशलता और विधि-अनुपालन तक सीमित हो (PRS)। केंद्र सरकार के निर्णय में राज्य की जवाबदेही और पुलिस की "कार्यात्मक स्वायत्तता" वाले अंश स्वीकार हुए (DARPG)
2018सर्वोच्च न्यायालय का DGP-आदेशराज्य DGP के लिए नाम UPSC को भेजें; UPSC तीन अधिकारियों का पैनल बनाए; राज्य उसी में से नियुक्ति करे; कार्यवाहक DGP नहीं

NPC और मॉडल पुलिस अधिनियम को मिलाइए नहीं: दोनों अलग हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश बनाम राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007

निर्देशसर्वोच्च न्यायालय (22.9.2006)राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007अंतर (विश्लेषण / CHRI 2009)
1. राज्य सुरक्षा आयोगअध्यक्ष मुख्यमंत्री या गृह मंत्री, DGP पदेन सचिव; सदस्य ऐसे हों कि आयोग सरकारी नियंत्रण से स्वतंत्र काम करे; सिफ़ारिशें राज्य सरकार पर बाध्यकारी; नीति, मूल्यांकन और विधायिका के लिए रिपोर्ट"राज्य पुलिस आयोग" (धारा 21-27): अध्यक्ष गृह मंत्री; नेता प्रतिपक्ष, मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP और तीन स्वतंत्र सदस्य; कार्य "कर सकता है" (सलाह, संकेतक, योजना, प्रशिक्षण); वार्षिक रिपोर्ट सदन मेंनाम और रूप अलग; भूमिका सलाहकारी; सिफ़ारिशों को बाध्यकारी बताने वाला प्रावधान पाठ में नहीं
2. DGP का चयन और कार्यकालतीन वरिष्ठतम अधिकारियों में से, जिन्हें UPSC ने पदोन्नति के लिए पैनल में रखा; न्यूनतम दो वर्ष, सेवानिवृत्ति-तिथि से निरपेक्ष; हटाना हो तो राज्य सुरक्षा आयोग से परामर्शधारा 13: DG रैंक व पदोन्नति-योग्य अधिकारियों का पैनल (अखिल भारतीय सेवा अधिनियम की समिति से छँटाई); न्यूनतम दो वर्ष (सेवा नियमों के अधीन); हटाने का एक आधार "लिखित प्रशासनिक आवश्यकता"UPSC की भूमिका पाठ में नहीं; "प्रशासनिक आवश्यकता" से हटाने की गुंजाइश; 2018 के आदेश के बाद UPSC-पैनल की प्रक्रिया अलग से जुड़ी
3. ऑपरेशनल अधिकारियों का कार्यकालज़ोन के IG, रेंज के DIG, ज़िले के SP और थाना-प्रभारी का न्यूनतम दो वर्षधाराएँ 14, 16, 17, 19: रेंज, ज़िला, सर्कल और थाना/अपराध अन्वेषण इकाई प्रभारी के लिए दो वर्षकार्यकाल का नियम है, पर हर जगह "प्रशासनिक आवश्यकता" से स्थानांतरण का रास्ता खुला है
4. जाँच का पृथक्करणजाँच-पुलिस को कानून-व्यवस्था-पुलिस से अलग किया जाए, दोनों में पूरा समन्वय रहे; शुरुआत 10 लाख या अधिक आबादी के नगरों सेधारा 42: राज्य सरकार थानों में अपराध अन्वेषण इकाई "बना सकती है"; महानगर क्षेत्र में अधिसूचना से पाँच वर्ष के भीतर; विशेष इकाइयाँ DGP-कार्यालय या ज़िले में"may" की भाषा; पृथक्करण की बाध्यता नहीं; CHRI के अनुसार 2009 तक कोई ज़मीनी अधिसूचना नहीं थी
5. पुलिस स्थापना बोर्डDGP और चार वरिष्ठ अधिकारी; उप अधीक्षक और नीचे के स्थानांतरण, तैनाती, पदोन्नति तय करे; SP और ऊपर के लिए सिफ़ारिश; सरकार असाधारण स्थिति में कारण लिखकर ही दख़ल देधारा 28: DGP और चार IG-स्तर के अधिकारी; भर्ती, अधीनस्थ पदोन्नति, अधीनस्थ और उप अधीक्षक के स्थानांतरण; अपर अधीक्षक के स्थानांतरण का प्रस्ताव सरकार कोSP-स्तर की सिफ़ारिश और अपील-मंच जैसे कार्य पाठ में नहीं दिखते (विश्लेषण; CHRI भी SP-स्तर की कमी दर्ज करता है)
6. पुलिस शिकायत प्राधिकरणज़िला स्तर: सेवानिवृत्त ज़िला न्यायाधीश की अध्यक्षता (उप अधीक्षक तक); राज्य स्तर: सेवानिवृत्त उच्च/सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (अधीक्षक व ऊपर); सिफ़ारिशें बाध्यकारीधाराएँ 62-69: राज्य और ज़िला "पुलिस उत्तरदायित्व समितियाँ", जिन्हें सरकार "स्थापित कर सकती है"; हर समिति में पाँच सदस्य (चार स्वतंत्र, जिनमें एक कमज़ोर वर्ग से और एक महिला; एक सदस्य-सचिव ADGP या अपर SP); अध्यक्ष स्वतंत्र सदस्यों में से सरकार चुनती है; ज़िला समिति की सिफ़ारिश पर अनुशासनिक प्राधिकारी तीन माह में निर्णय करेअध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश नहीं; सिफ़ारिशें अनुशंसात्मक (CHRI 2009, 2020); "गंभीर कदाचार" की परिभाषा धारा 64 में दी है
7. राष्ट्रीय सुरक्षा आयोगकेंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुखों के चयन के लिए पैनल (केंद्र के लिए निर्देश)राज्य अधिनियम का विषय नहींकेवल केंद्र के लिए

बाएँ से दूसरा खाना निर्णय के पाठ से; तीसरा खाना राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 के पाठ से; अंतिम खाना हमारा विश्लेषण है जहाँ CHRI लिखा है वह एक गैर-सरकारी संस्था (CHRI) का मूल्यांकन है, सरकारी नहीं।

शिकायत से जवाबदेही तक का रास्ता (राजस्थान पुलिस अधिनियम)

  1. थाना

    थाना-प्रभारी संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करे (धारा 31(1))

  2. ज़िला पुलिस अधीक्षक

    दर्ज करने से इनकार हो तो पीड़ित अधीक्षक को सूचना दे; अधीक्षक तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई करे या कराए (धारा 31(2))

  3. सेवा-अभिलेख

    दिया गया दंड सेवा-अभिलेख में दर्ज और दक्षता-मूल्यांकन में गिना जाए (धारा 31(3))

  4. उत्तरदायित्व समिति

    गंभीर कदाचार: ज़िला समिति अधीनस्थ रैंक के और राज्य समिति पर्यवेक्षी रैंक के मामले देखे (धारा 64, 67)

  5. निर्णय

    ज़िला समिति की सिफ़ारिश पर अनुशासनिक प्राधिकारी तीन माह में निर्णय करे; राज्य समिति सरकार को सिफ़ारिश करे (धारा 67, 64(c))

समितियाँ सरकार "स्थापित कर सकती है" (धारा 62); उनके वास्तविक गठन की वर्तमान स्थिति आधिकारिक स्रोत से सत्यापित नहीं है।

एक नज़र में: पुलिस प्रशासन

पुलिस प्रशासन

संवैधानिक आधार

  • राज्य सूची प्रविष्टि 1: लोक व्यवस्था
  • राज्य सूची प्रविष्टि 2: पुलिस
  • सूची I की प्रविष्टि 2A के अधीन

राजस्थान का क़ानून

  • अधिनियम 14/2007
  • स्वीकृति 30-10-2007
  • धारा 73: 1861 का अधिनियम निरस्त

संगठन

  • DGP (धारा 13)
  • रेंज DIG (14)
  • आयुक्त (15)
  • ज़िला SP (16)
  • सर्कल DSP (17)
  • थाना SI+ (8)

संस्थाएँ

  • राज्य पुलिस आयोग (21)
  • स्थापना बोर्ड (28)
  • उत्तरदायित्व समितियाँ (62-69)

सुधार

  • NPC 1977-81
  • प्रकाश सिंह 2006
  • मॉडल पुलिस अधिनियम 2006
  • 2018 का DGP-आदेश

मुख्य तथ्य

पुलिस और लोक व्यवस्था
राज्य सूची की प्रविष्टि 2 और 1
राजस्थान पुलिस अधिनियम
अधिनियम सं. 14/2007; राज्यपाल की स्वीकृति 30 अक्टूबर 2007 (2007)
1861 के अधिनियम की स्थिति
राजस्थान में लागू रूप में धारा 73 से निरस्त (2007)
DGP (धारा 13)
राज्य सरकार नियुक्त करती है; पैनल; न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष (2007)
पुलिस आयुक्त (धारा 15)
महानगर क्षेत्र में; महानिरीक्षक से कम पद का नहीं; चार-सदस्यीय समिति का पैनल (2007)
राज्य पुलिस आयोग (धारा 21)
अध्यक्ष गृह मंत्री; तीन स्वतंत्र सदस्य (2007)
पुलिस स्थापना बोर्ड (धारा 28)
DGP और चार IG-स्तर के अधिकारी (2007)
पुलिस उत्तरदायित्व समितियाँ (धाराएँ 62-69)
राज्य और ज़िला; पाँच-पाँच सदस्य; सरकार "स्थापित कर सकती है" (2007)
प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ
22 सितंबर 2006; सात निर्देश (छह राज्यों/UT को, एक केंद्र को); अनुपालन-तिथि 31 दिसंबर 2006
मॉडल पुलिस अधिनियम
सोराबजी समिति; 30 अक्टूबर 2006 को सौंपा; 31.10.2006 को राज्यों को भेजा (2006)
राष्ट्रीय पुलिस आयोग
1977 में गठित; आठ रिपोर्ट (1979-81)
सर्वोच्च न्यायालय का DGP-आदेश
3 जुलाई 2018; UPSC का तीन-नामों का पैनल; कार्यवाहक DGP नहीं
CrPC से BNSS
BNSS की धारा 531 से CrPC, 1973 निरस्त; प्रवर्तन 1 जुलाई 2024
अंतिम जाँच
1 अक्टूबर 2026 (धाराएँ दो पाठों से मिलाईं; 2015 और 2020 के संशोधनों का असर संगठन-धाराओं पर सत्यापित नहीं)

राजस्थान का पहलू

राजस्थान सरकार के गृह विभाग की वेबसाइट पर राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 का पाठ उपलब्ध है (अधिनियम सं. 14/2007; राज्यपाल की स्वीकृति 30 अक्टूबर 2007) और राजस्थान पुलिस नियम, 2008 सूची में हैं। अधिनियम के पाठ के अनुसार राज्य सरकार DGP नियुक्त करती है (धारा 13), 10 लाख से अधिक आबादी वाले महानगर क्षेत्र में पुलिस आयुक्त (धारा 15), और राज्य पुलिस आयोग (धारा 21) व पुलिस स्थापना बोर्ड (धारा 28) बनाती है। राजस्थान पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट की इकाई-सूची में जयपुर और जोधपुर आयुक्तालय तथा अजमेर, भरतपुर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, ATS-SOG और GRP रेंज दिखती हैं, और जोधपुर पुलिस की वेबसाइट पुलिस आयुक्त व पूर्व/पश्चिम के पुलिस उपायुक्तों का उल्लेख करती है (अभिगम 1 अक्टूबर 2026; सूची-पृष्ठ पर तारीख़ नहीं)। थानों, सर्कलों और ज़िलों की संख्या, आयुक्तालयों की स्थापना की तारीख़ें और पुलिस आयोग तथा उत्तरदायित्व समितियों के वर्तमान गठन की स्थिति आधिकारिक अधिसूचना में प्रकाशित नहीं मिली, इसलिए नहीं दी गई।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • प्रकाश सिंह के "सात निर्देश" को सात के सात राज्यों के लिए बता देना: छह निर्देश राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए हैं और एक (राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग) केंद्र के लिए (गृह मंत्रालय का लोक सभा उत्तर, 1.4.2025)।
  • राजस्थान में "State Security Commission" लिख देना: राजस्थान के 2007 के अधिनियम में संस्था का नाम "राज्य पुलिस आयोग" है (धारा 21), और वह सलाहकारी है। उत्तर में नाम और भूमिका दोनों सही लिखें।
  • 1861 के अधिनियम को राजस्थान के आज के क़ानून के रूप में लिखना: राजस्थान में वह धारा 73 से निरस्त है। 1861 को ऐतिहासिक जड़ के रूप में लिखें।
  • आयुक्तालय को राज्य की हर जगह की व्यवस्था बताना: राजस्थान की आधिकारिक सूची में दो आयुक्तालय दिखते हैं (जयपुर, जोधपुर); संख्या या तारीख़ बिना आधिकारिक स्रोत के न लिखें।
  • राष्ट्रीय पुलिस आयोग (1977-81) और मॉडल पुलिस अधिनियम (2006, सोराबजी समिति) को एक बता देना, या दोनों के वर्ष उलट देना।
  • DGP-चयन में UPSC की भूमिका को राजस्थान अधिनियम के 2007 के पाठ में बताना: वह भूमिका सर्वोच्च न्यायालय के 2006 के निर्देश और 2018 के आदेश से आती है।
  • पुराने क़ानूनी नंबर लिखना: प्रक्रिया-संबंधी उत्तर में CrPC की जगह BNSS लिखें और पुराना नंबर केवल एक पंक्ति के सेतु के रूप में।