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पेपर III · इकाई II

नियंत्रण-क्षेत्र (Span of Control): पदानुक्रम और आदेश की एकता के साथ

नियंत्रण-क्षेत्र क्या है, ग्रेइकुनास का सूत्र कैसे हल होता है, विद्वान कितनी संख्या बताते हैं, साइमन ने क्या आपत्ति की, और भारत में यह कहाँ दिखता है: उत्तर-लेखन केंद्रित तैयारी।

  • ग्रेइकुनास सूत्र
  • हल किया उदाहरण
  • 6 PYQ हल सहित
  • राजस्थान: भू-राजस्व अधिनियम धारा 24
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II — "Principles of organisation: hierarchy, unity of command, span of control, delegation, centralisation and decentralisation, coordination, authority and responsibility, accountability." इस पृष्ठ का केंद्र नियंत्रण-क्षेत्र (span of control) है; पदानुक्रम और आदेश की एकता यहाँ संक्षेप में हैं और अपने अलग पृष्ठों पर विस्तार से आएँगे।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • हमारे संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में से पाँच में नियंत्रण-क्षेत्र पर सवाल आया; इस पृष्ठ से जुड़े कुल 6 प्रश्न हैं।
  • 2013-2024 के पेपरों में देखा गया: 2 अंक में परिभाषा और चार कारक, 5 अंक में निर्धारक तत्त्व, और 10 अंक में दो बार गहरे सवाल (2023 में ग्रेइकुनास का सूत्र हल करना, 2024 में साइमन की आलोचना)।
  • 10 अंक के दोनों सवालों के लिए सूत्र, एक हल किया हुआ अंक-उदाहरण और साइमन की दुविधा याद होनी चाहिए; यही तीन चीज़ें इस पृष्ठ का सार हैं।

सरल भाषा में: नियंत्रण-क्षेत्र क्या है

मान लीजिए किसी ज़िले का कलेक्टर रोज़ सुबह उन अधिकारियों से मिलता है जो सीधे उसे रिपोर्ट करते हैं। पाँच-छह अधिकारी हों तो वह हर किसी की बात सुन सकता है, उनके कामों का आपसी तालमेल बैठा सकता है और शाम तक फ़ाइलें भी निपटा सकता है। यही अधिकारी तीस हों तो हर एक को मिलने का समय घट जाएगा, किसके काम का किस पर असर पड़ रहा है यह कोई नहीं देख पाएगा, और फ़ैसले अटकने लगेंगे। उलटी हालत में कलेक्टर के नीचे केवल दो अधिकारी हों, उनके नीचे भी दो-दो, तो हर फ़ाइल को कलेक्टर तक पहुँचने में कई सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ेंगी और हर सीढ़ी पर देरी जुड़ेगी। (यह कल्पित उदाहरण समझाने के लिए है, किसी वास्तविक ज़िले का आँकड़ा नहीं।)

इसी उलझन का नाम नियंत्रण-क्षेत्र है। सवाल यह है कि एक अधिकारी के सीधे अधीन कितने लोग रखे जाएँ कि वह उन्हें सँभाल भी सके और संगठन में सीढ़ियाँ भी बहुत न बढ़ें। गुलिक (1937) ने इसे यों कहा: जैसे पियानो पर हाथ सीमित स्वरों तक ही फैल सकता है, वैसे ही मनुष्य का मन और इच्छाशक्ति सीमित संख्या के सीधे प्रबंधकीय संपर्क ही सँभाल सकती है; और यह सीमा ज्ञान से भी ज़्यादा समय और ऊर्जा की सीमा है।

परीक्षा के लिए परिभाषा

नियंत्रण-क्षेत्र (Span of Control; इसे Span of Management या Span of Supervision भी कहते हैं) उन अधीनस्थों की संख्या है जो किसी एक वरिष्ठ अधिकारी को सीधे रिपोर्ट करते हैं और जिनका वह प्रभावी ढंग से पर्यवेक्षण, निर्देशन और समन्वय कर सकता है।

ध्यान रखें कि गिनती केवल सीधे रिपोर्ट करने वालों की होती है, नीचे के पूरे अमले की नहीं। किसी विभाग में कुल कर्मचारी बहुत हो सकते हैं, पर किसी अधिकारी का नियंत्रण-क्षेत्र वही है जितने लोग सीधे उसके अधीन हैं। यह भी याद रखें कि यहाँ कोई जादुई संख्या नहीं है; आगे की तालिका दिखाती है कि अलग-अलग विद्वानों ने अलग-अलग संख्या बताई और गुलिक ने ख़ुद माना कि इस पर पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ है।

तीन सिद्धांत, एक तस्वीर: पदानुक्रम, आदेश की एकता, नियंत्रण-क्षेत्र

पदानुक्रम (Hierarchy) का अर्थ है अधिकार की सीढ़ी: ऊपर से नीचे हर पद अपने ऊपर के पद के अधीन। फेयोल ने इसे 'स्केलर चेन' कहा: सर्वोच्च अधिकारी से सबसे निचले पद तक वरिष्ठों की वह शृंखला, जिसकी हर कड़ी से होकर ऊपर जाने और नीचे आने वाले संदेश गुज़रते हैं। फेयोल ने माना कि यह मार्ग संचार की ज़रूरत और आदेश की एकता, दोनों से तय होता है, पर हमेशा सबसे तेज़ नहीं होता; बड़ी संस्थाओं में, ख़ासकर सरकारी विभागों में, कभी-कभी बेहद लंबा हो जाता है।

आदेश की एकता (Unity of Command) के बारे में फेयोल का सूत्र है: किसी भी काम के लिए कर्मचारी को आदेश केवल एक वरिष्ठ से मिलने चाहिए। उनके अनुसार इसके टूटने पर अधिकार कमज़ोर पड़ता है और अनुशासन ख़तरे में आ जाता है। गुलिक ने इसे सरल रूप में रखा: जिसे कई वरिष्ठों के आदेश मिलें वह भ्रमित, अकुशल और ज़िम्मेदारी से बचने वाला हो जाता है। आदेश की एकता का संबंध उनसे है जिन्हें आदेश दिया जाता है; जबकि आदेश की एकता से अलग निर्देश की एकता (Unity of Direction) का अर्थ है एक ही उद्देश्य वाली गतिविधियों के लिए एक मुखिया और एक योजना।

फेयोल ने इस शृंखला के लिए 'गैंगप्लैंक' का इलाज भी सुझाया: एक ही स्तर के दो कर्मचारी अपने-अपने वरिष्ठों की अनुमति से सीधे बात कर लें और बाद में वरिष्ठों को सूचित कर दें; सहमति टूटते ही पुरानी शृंखला लौट आए। नियंत्रण-क्षेत्र इन दोनों सिद्धांतों के साथ बैठता है, और नीचे की तालिका तीनों का फ़र्क़ एक नज़र में रख देती है।

तीनों सिद्धांत एक साथ

सिद्धांतक्या कहता हैचार्ट में किस दिशा मेंमुख्य स्रोत
पदानुक्रम (Hierarchy)अधिकार की सीढ़ी: हर पद अपने ऊपर के किसी एक पद के अधीनऊर्ध्वाधर: कुल कितनी मंज़िलें (स्तर)फेयोल ('स्केलर चेन')
आदेश की एकता (Unity of Command)एक कर्मचारी को आदेश केवल एक वरिष्ठ सेऊर्ध्वाधर: हर पद से ऊपर जाने वाली रेखा एक हीफेयोल (1916), गुलिक (1937)
नियंत्रण-क्षेत्र (Span of Control)एक वरिष्ठ के सीधे अधीन कितने अधीनस्थक्षैतिज: एक स्तर पर हर पद से नीचे कितनी रेखाएँग्रेइकुनास (1933), उर्विक (1937), गुलिक (1937)

सिद्धांतों के विस्तृत पृष्ठ क्रमशः पदानुक्रम और आदेश की एकता पर अलग से आएँगे।

तीनों का आपसी रिश्ता

संगठन-चार्ट की कल्पना कीजिए। पदानुक्रम बताता है कि चार्ट में कितनी मंज़िलें हैं। आदेश की एकता कहती है कि हर डिब्बे से ऊपर की ओर एक ही रेखा जाए। और नियंत्रण-क्षेत्र तय करता है कि हर डिब्बे से नीचे कितनी रेखाएँ निकलें। उर्विक ने यही पुरानी बनावट बताई है: A अपने चार अधीनस्थों B, C, D, E की निगरानी करता है; B अपने चार की; और हर स्तर का पर्यवेक्षक अपने अधीनस्थों के काम के हर पहलू के लिए पूरा उत्तरदायी रहता है।

विश्लेषण: कुल कर्मचारी जितने अधिक हों, नीचे की रेखाएँ कम रखने पर मंज़िलें उतनी बढ़ती हैं (ऊँची संरचना, tall); रेखाएँ बढ़ाने पर मंज़िलें घटती हैं (चपटी संरचना, flat)। यानी नियंत्रण-क्षेत्र और स्तरों की संख्या एक-दूसरे के विपरीत चलते हैं। साइमन की आलोचना का केंद्र यही तनाव है, जिस पर आगे अलग खंड है। हिसाब कैसे लगता है, यह 'स्तर बनाम नियंत्रण-क्षेत्र' वाले हल किए उदाहरण में देखें।

ग्रेइकुनास (1933): संख्या की सीमा का गणित

फ़्रांस की राजधानी पेरिस में काम करने वाले प्रबंध-सलाहकार वी. ए. ग्रेइकुनास (V. A. Graicunas) का लेख 'Relationship in Organization' पहले मार्च 1933 में 'बुलेटिन ऑफ़ द इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट' में छपा और 1937 में गुलिक और उर्विक के संपादित संग्रह 'Papers on the Science of Administration' में पुनर्मुद्रित हुआ। उनका तर्क था कि अनुभव से तो सब जानते थे कि बहुत ज़्यादा अधीनस्थ देरी और भ्रम पैदा करते हैं, पर इसका सैद्धांतिक आधार नहीं था। पहला आधार उन्होंने मनोविज्ञान के 'ध्यान-विस्तार' (span of attention) को बताया: अधिकांश लोग एक साथ छह अंकों से अधिक पर ध्यान नहीं रख पाते। ऊपर से अधिकारी अपना बोझ सिर्फ़ इस गिनती से मापते हैं कि कितने लोग सीधे उन्हें रिपोर्ट करते हैं; जबकि असली बोझ तीन तरह के संबंधों से बनता है।

उनका सरल उदाहरण: टॉम के दो अधीनस्थ हैं, डिक और हैरी। टॉम डिक से अकेले बात कर सकता है, हैरी से अकेले, या दोनों से साथ। हैरी की मौजूदगी में डिक का व्यवहार बदल जाता है, और डिक की मौजूदगी में हैरी का। साथ ही डिक हैरी के बारे में क्या सोचता है और हैरी डिक के बारे में, ये दो अंतर-संबंध हैं जो टॉम को तब ध्यान में रखने पड़ते हैं जब दोनों को मिलकर कोई काम करना हो। इस तरह केवल दो अधीनस्थों पर भी टॉम को 2 एकल, 2 समूह और 2 अंतर-संबंध, यानी कुल 6 संबंध सँभालने पड़ते हैं।

तीन प्रकार: (1) प्रत्यक्ष एकल संबंध (Direct Single): अधिकारी और हर अधीनस्थ के बीच अलग-अलग; (2) प्रत्यक्ष समूह संबंध (Direct Group): अधिकारी और अधीनस्थों के हर संभव संयोजन के बीच, जैसे डिक की उपस्थिति में हैरी से व्यवहार; (3) अंतर-संबंध (Cross): अधीनस्थों के आपस में, दोनों दिशाओं में। ग्रेइकुनास की 'अधिकतम' गणना-पद्धति (जिसे परीक्षा में प्रयोग करें) के सूत्र नीचे हैं, जहाँ n अधीनस्थों की संख्या है।

ग्रेइकुनास के सूत्र और मान

अधीनस्थ (n)एकल: nसमूह: n(2^(n−1) − 1)अंतर: n(n − 1)कुल: n(2^(n−1) + n − 1)
22226
339618
44281244
557520100
6618630222
7744142490
881,016561,080

ग्रेइकुनास की 'अधिकतम' पद्धति; मानों को सूत्र से स्वयं जोड़कर ग्रेइकुनास की मूल तालिका से मिलाया गया है।

ग्रेइकुनास निष्कर्ष और सीमाएँ

चार से पाँच अधीनस्थ करने पर कुल संबंध 44 से 100 हो जाते हैं। ग्रेइकुनास के शब्दों में यह काम की क्षमता में 20 प्रतिशत की वृद्धि के बदले जटिलता में 127 प्रतिशत की वृद्धि है। पाँचवाँ अधीनस्थ अधिकारी के साथ 20 नए संबंध लाता है और पहले से मौजूद हर सहकर्मी के साथ 9 और। उन्होंने माना कि एक पर्यवेक्षक अधिकतम 12 अंतर-संबंध और 28 प्रत्यक्ष समूह-संबंध देख सकता है; ये दोनों संख्याएँ चार अधीनस्थों के मान हैं। इसी से उनका निष्कर्ष निकला कि हर स्तर पर पार्श्विक विभाजन अधिकतम पाँच और अधिक संभावना यह कि चार ही रखे जाएँ।

सीमाएँ उन्होंने स्वयं बताईं। अलग-अलग तरह के संबंधों का समान भार नहीं हो सकता, इसलिए सबसे समावेशी गिनती को ही मानक माना गया। और नियमित, दोहराव वाले काम में, जहाँ अधीनस्थों के बीच अंतर्निर्भरता कम है, समूह व अंतर-संबंध कम असर डालते हैं और बड़े समूह चल जाते हैं। उन्होंने न्यूनतम (minimum) आधार वाले सूत्र भी दिए थे; परीक्षा में आम तौर पर ऊपर वाला कुल-सूत्र पूछा जाता है। 2023 का प्रश्न भी इसी सूत्र से हल होता है।

कितनी संख्या ठीक है: विद्वानों के मत

हैमिल्टन की यह पंक्ति ग्रेइकुनास और गुलिक, दोनों ने उद्धृत की है: शीर्ष के जितना क़रीब जाएँ, तीन के समूहों की ओर बढ़ना चाहिए; और संगठन की जड़ के जितना क़रीब, छह के समूहों की ओर। हैमिल्टन का एक उप-नियम भी है: समूह-सदस्य की ज़िम्मेदारी जितनी छोटी हो, समूह उतना बड़ा हो सकता है, और उलटा भी। नीचे सभी मत एक जगह रखे हैं।

नियंत्रण-क्षेत्र की संख्या पर प्रमुख मत

विद्वान / समितिक्या कहास्रोत
सर इयान हैमिल्टन (पुस्तक 'The Soul and Body of an Army', 1921)शीर्ष पर तीन, सबसे निचले स्तर पर छह के समूहग्रेइकुनास और गुलिक द्वारा उद्धृत
ग्रेइकुनास (1933)अधिकतम पाँच, संभवतः चारPapers on the Science of Administration (1937)
उर्विक (संग्रह 1937)कोई मस्तिष्क ऐसे पाँच, अधिक से अधिक छह लोगों से अधिक का सीधा पर्यवेक्षण न करे जिनका काम आपस में जुड़ा होउर्विक का निबंध, उसी संग्रह में
फेयोल (1923 का भाषण, गुलिक द्वारा उद्धृत)प्रशासन-सिद्धांत में पाँच-छह; पर फ़्रांस में एक मंत्री के बीस सहायकगुलिक, 1937
ब्रिटेन की Machinery of Government Committee (1918)मंत्रिमंडल 'preferably ten or, at most, twelve'गुलिक द्वारा उद्धृत
गुलिक (1937)कोई अंतिम संख्या नहीं; यह क्षेत्र अभी पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन में नहीं आयाPapers on the Science of Administration

हैमिल्टन के प्रकाशन-वर्ष के लिए ग्रेइकुनास और गुलिक दोनों के पाद-टिप्पणी में 1921 है।

नियंत्रण-क्षेत्र को प्रभावित करने वाले कारक

गुलिक का निष्कर्ष यह था कि विद्वानों के बीच संख्या का अंतर इसलिए है कि देखे गए अधिकारियों की क्षमता और कार्य-शैली अलग थी, और जिन कामों की तुलना हुई वे समान नहीं थे। उन्होंने तीन तत्त्वों पर ध्यान दिलाया: कार्य का विविधीकरण, समय और स्थान। एक लोक-निर्माण प्रमुख अधिक अधीनस्थ सँभाल सकता है क्योंकि सब इंजीनियरी के दायरे में हैं, जबकि सेनापति के अधीन संचार, रसायन, उड्डयन, आयुध, आपूर्ति जैसे अलग-अलग तकनीकी समूह होते हैं। स्थिर संगठन में क्षेत्र चौड़ा हो सकता है और नए या बदलते संगठन में संकरा। एक भवन में बैठा संगठन अधिक अधीनस्थों से चल सकता है; कई शहरों में बिखरा हो तो कम।

नीचे की तालिका में गुलिक और हैमिल्टन से सत्यापित कारक पहले हैं और अंत की दो पंक्तियाँ हमारा अपना विश्लेषण हैं, जिन्हें उत्तर में 'अन्य कारक' कहकर जोड़ा जा सकता है।

कारक: संकरा बनाम चौड़ा क्षेत्र

कारकसंकरा क्षेत्र (कम अधीनस्थ)चौड़ा क्षेत्र (अधिक अधीनस्थ)आधार
कार्य की प्रकृतिविविध, गुणात्मक, जिसे नापना कठिन हो, आपस में जुड़ा कामनियमित, दोहराव वाला, मापने योग्य, समरूप; गुलिक के अनुसार एक व्यक्ति कई बीसियों कामगार सँभाल सकता हैगुलिक 1937; ग्रेइकुनास 1933
स्थानकर्मचारी कई जगह बिखरेसब एक भवन मेंगुलिक 1937
समय / स्थिरतासंगठन नया या बदल रहासंगठन स्थिर और पुरानागुलिक 1937
पद का स्तरशीर्ष पर: बड़ी ज़िम्मेदारी वाले अधीनस्थनिचले स्तर पर: छोटी ज़िम्मेदारी वाले अधीनस्थहैमिल्टन का उप-नियम
अधिकारी की क्षमता और शैलीब्योरे में दख़ल देने वाला, प्रत्यायोजन न करने वालाकुशल, प्रत्यायोजन करने वालागुलिक 1937
अधीनस्थों की योग्यता और प्रशिक्षणनए या कम प्रशिक्षितअनुभवी और प्रशिक्षितविश्लेषण
नियम, प्रक्रिया और संचार-साधनअस्पष्ट नियम, कमज़ोर सूचना-प्रणालीस्पष्ट प्रक्रिया, ई-ऑफ़िस जैसे साधनविश्लेषण

2 अंक में चार कारक पूछे जाएँ तो पहले चार में से कोई भी चार लिखना सुरक्षित है।

साइमन की आलोचना: 'प्रशासन की कहावतें' (1946)

हर्बर्ट साइमन का लेख 'The Proverbs of Administration' पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन रिव्यू के खंड 6, अंक 1 (शीतकाल 1946), पृष्ठ 53-67 में छपा। साइमन ने उस समय के चार प्रचलित 'सिद्धांत' जाँचे: कार्य का विशेषीकरण, अधिकार का निश्चित पदानुक्रम (आदेश की एकता के लिए), नियंत्रण-क्षेत्र को छोटा रखना, और काम को उद्देश्य, प्रक्रिया, ग्राहक या स्थान के आधार पर समूहबद्ध करना। उनकी केंद्रीय बात थी कि लगभग हर सिद्धांत के बराबर विश्वसनीय एक उलटा सिद्धांत भी मौजूद है; दोनों संगठन के बारे में उलटी सिफ़ारिशें करते हैं और सिद्धांत में यह नहीं बताया जाता कि कब कौन-सा ठीक है। उनके अनुसार वे कहावतों की तरह 'बहुत कुछ सिद्ध कर देते हैं', इसलिए वैज्ञानिक सिद्धांत की कसौटी पर कमज़ोर हैं।

नियंत्रण-क्षेत्र पर उनका तर्क: मान्यता है कि दक्षता तब बढ़ती है जब सीधे रिपोर्ट करने वालों की संख्या छोटी रखी जाए, कोई छह जैसी। पर उतनी ही विश्वसनीय उलटी कहावत है कि दक्षता तब बढ़ती है जब फ़ैसले तक किसी मामले को जितने स्तरों से गुज़रना पड़े, उनकी संख्या न्यूनतम रखी जाए। दुविधा यह है कि बड़े संगठन में, जहाँ सदस्यों के आपसी संबंध जटिल हों, संकरा क्षेत्र अनिवार्यतः लालफ़ीताशाही पैदा करता है, क्योंकि दो सदस्यों का हर संपर्क साझा वरिष्ठ मिलने तक कई स्तर ऊपर ले जाना पड़ता है और फिर आदेश नीचे लौटते हैं। क्षेत्र चौड़ा करें तो समस्या यह है कि बहुत अधीनस्थों पर वरिष्ठ का नियंत्रण ढीला पड़ता है। साइमन ने यह भी कहा कि तीन, पाँच, यहाँ तक कि ग्यारह जैसी संख्याएँ सुझाने वालों ने कहीं यह नहीं बताया कि वह संख्या किस तर्क से चुनी।

आदेश की एकता पर साइमन का तर्क और कड़ा था: गुलिक के अर्थ में यह किसी भी वास्तविक संगठन में कभी रही ही नहीं, क्योंकि अधिकार क्षेत्रों में बँटा (zoned) होता है। उदाहरण: माँग-पत्र की प्रक्रिया में लाइन-अधिकारी लेखा विभाग के नियम मानता है, तो उस क्षेत्र में वह लेखा विभाग के अधिकार में है; यह टेलर के अलग-अलग फ़ोरमैनों वाली व्यवस्था से सिद्धांततः भिन्न नहीं। सीमित रूप में वे इसे बचाने योग्य मानते हैं: दो आदेश टकराएँ तो एक निश्चित व्यक्ति हो जिसकी बात माननी है। पर तब भी यह विशेषज्ञता के सिद्धांत से टकराता है: नगर का प्रशिक्षण अधिकारी पुलिस के प्रशिक्षण-अधिकारी पर केवल कार्यात्मक पर्यवेक्षण रखे और पुलिस प्रमुख से मतभेद हो, तो पुलिस-संबंधी विशेषज्ञता ही निर्णय तय करेगी।

साइमन का रचनात्मक सुझाव यह था कि सिद्धांतों को बिना शर्त की जगह उन परिस्थितियों के साथ पढ़ा जाए जिनमें कोई सिद्धांत लागू हो; लेख के अंत में वे बताते हैं कि साहित्य में 'संगठन उद्देश्य के आधार पर हो' की जगह 'अमुक शर्तों में उद्देश्य-आधारित संगठन ठीक है' जैसी भाषा आ रही है। विश्लेषण: उत्तर में आलोचना के साथ यह भी लिखिए कि सिद्धांत बेकार नहीं हुए, बल्कि शर्तों के साथ उपयोगी रहे।

सिलेबस के अन्य विषयों से संबंध

नियंत्रण-क्षेत्र चौड़ा करने के लिए प्रत्यायोजन (delegation) और विकेंद्रीकरण ज़रूरी हैं, क्योंकि अधिकारी हर काम ख़ुद नहीं देख सकता; यह बात दोनों के पृष्ठों पर विस्तार से आएगी। समन्वय (coordination) का सीधा संबंध ग्रेइकुनास के अंतर-संबंधों से है, क्योंकि समन्वय की ज़रूरत वहीं पड़ती है जहाँ अधीनस्थों का काम आपस में जुड़ा हो। टेलर के कार्यात्मक फ़ोरमैनों वाली व्यवस्था पर गुलिक और फेयोल दोनों ने आदेश की एकता के आधार पर आपत्ति की; इस बारे में वैज्ञानिक प्रबंध के पृष्ठ में पढ़ें। ज़िले के पदानुक्रम का भारतीय उदाहरण आगे राजस्थान खंड में है।

एक नज़र में: राजस्थान की राजस्व अधीनता-शृंखला

  1. संभाग: आयुक्त

    धारा 17, भू-राजस्व अधिनियम 1956

  2. ज़िला: कलेक्टर

    धारा 20; ज़िले का भू-अभिलेख अधिकारी भी

  3. उपखंड: उपखंड अधिकारी

    धारा 20 और 24(iii)

  4. तहसील: तहसीलदार

    धारा 20 और 24

  5. नायब तहसीलदार / अतिरिक्त तहसीलदार

    धारा 24(iv)

धारा 24 के अनुसार अधीनता-क्रम: आयुक्त से नीचे कलेक्टर, फिर उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार।

एक नज़र में: नियंत्रण-क्षेत्र

नियंत्रण-क्षेत्र

परिभाषा

  • सीधे रिपोर्ट करने वाले अधीनस्थ
  • प्रभावी पर्यवेक्षण की संख्या

ग्रेइकुनास 1933

  • एकल n
  • समूह n(2^(n−1)−1)
  • अंतर n(n−1)
  • कुल n(2^(n−1)+n−1)
  • 4 → 44, 5 → 100

मत

  • हैमिल्टन: 3 ऊपर, 6 नीचे
  • ग्रेइकुनास: 5, प्रायः 4
  • उर्विक: 5, अधिक से अधिक 6
  • गुलिक: कोई अंतिम संख्या नहीं

कारक

  • कार्य की प्रकृति
  • स्थान
  • समय/स्थिरता
  • पद का स्तर
  • अधिकारी की क्षमता

आलोचना

  • साइमन 1946
  • संकरा क्षेत्र: लालफ़ीताशाही
  • चौड़ा क्षेत्र: ढीला नियंत्रण

भारत

  • CSMOP: विंग-डिवीज़न-ब्रांच-सेक्शन
  • डीलेयरिंग 2022
  • भू-राजस्व अधिनियम धारा 24
परीक्षा-कक्ष में इन छह शाखाओं से 10 अंक के उत्तर की रूपरेखा बन जाती है।

क्रम से: नियंत्रण-क्षेत्र का चिंतन

  1. 1916

    फेयोल का Administration industrielle et générale: आदेश की एकता, निर्देश की एकता, स्केलर चेन

  2. 1921

    हैमिल्टन की पुस्तक: शीर्ष पर तीन, तल पर छह के समूह

  3. मार्च 1933

    ग्रेइकुनास का लेख 'Relationship in Organization'

  4. 1937

    गुलिक और उर्विक का संग्रह: उर्विक की पाँच-छह की सीमा, गुलिक के कारक

  5. 1946

    साइमन: 'प्रशासन की कहावतें', नियंत्रण-क्षेत्र बनाम स्तर की दुविधा

  6. 2022

    CSMOP 16वाँ संस्करण: डीलेयरिंग और प्रत्यायोजन (भारत)

मुख्य तथ्य

ग्रेइकुनास का लेख
'Relationship in Organization', मार्च 1933 (बुलेटिन); 1937 के संग्रह में पुनर्मुद्रित
ग्रेइकुनास: कुल संबंध
n(2^(n−1) + n − 1)
4 अधीनस्थ / 5 अधीनस्थ / 6 अधीनस्थ
44 / 100 / 222 संबंध
4 से 5 पर वृद्धि
जटिलता में 127 प्रतिशत, क्षमता में 20 प्रतिशत (ग्रेइकुनास का कथन)
ग्रेइकुनास की सीमा
अधिकतम पाँच, संभवतः चार
हैमिल्टन
शीर्ष पर तीन, तल पर छह; पुस्तक 1921
उर्विक (संग्रह 1937)
पाँच, अधिक से अधिक छह, जब अधीनस्थों का काम आपस में जुड़ा हो
फेयोल का मूल ग्रंथ
1916 (फ़्रेंच); अंग्रेज़ी अनुवाद 1949
साइमन का लेख
Public Administration Review, खंड 6, अंक 1, शीतकाल 1946, पृ. 53-67
CSMOP 13वाँ संस्करण
सितंबर 2010; फ़ाइल-स्तर तीन से अधिक नहीं
CSMOP 16वाँ संस्करण
2022; प्रस्तुति-चैनल चार से अधिक नहीं; समीक्षा कम से कम हर तीन साल
डीलेयरिंग की समीक्षा (PIB, 2022)
95 प्रतिशत मंत्रालयों/विभागों में
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956
धारा 17, 20, 24 में आयुक्त-कलेक्टर-उपखंड अधिकारी-तहसीलदार-नायब तहसीलदार का क्रम
अंतिम जाँच
01-10-2026

राजस्थान का पहलू

राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (राजस्व विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रति; 01-10-2026 को देखी) में पदानुक्रम सीधे लिखा है। धारा 17: हर संभाग में एक आयुक्त। धारा 20: हर ज़िले में एक कलेक्टर, जो उस ज़िले का भू-अभिलेख अधिकारी भी होता है, और हर तहसील में एक तहसीलदार; उपखंडों के प्रभारी सहायक कलेक्टर और उप-तहसीलों के प्रभारी तहसीलदार या नायब तहसीलदार। धारा 24: संभाग के कलेक्टर, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार आदि आयुक्त के अधीन; ज़िले के अतिरिक्त कलेक्टर, उपखंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर, तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार कलेक्टर के अधीन; उपखंड के तहसीलदार आदि उपखंड अधिकारी के अधीन; तहसील के अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार तहसीलदार के अधीन। विश्लेषण: (1) इन धाराओं में पद-वर्ग लिखे हैं, पर यह नहीं कि किसके सीधे अधीन कितने अधिकारी हों; यानी नियंत्रण-क्षेत्र का आकार क़ानून नहीं, सरकारी आदेश और व्यवहार तय करते हैं। (2) धारा 24 के खंड (v) और (vii) में कलेक्टर और तहसीलदार बंदोबस्त आयुक्त और भू-अभिलेख निदेशक के भी अधीन बताए गए हैं, और धारा 23 में बंदोबस्त को छोड़कर अ-न्यायिक राजस्व मामलों का नियंत्रण राज्य सरकार को तथा न्यायिक व बंदोबस्त मामलों का बोर्ड को दिया गया है। एक ही अधिकारी पर विषय के आधार पर एक से अधिक नियंत्रण-रेखाएँ होना आदेश की एकता की व्यावहारिक सीमा का उदाहरण है, साइमन के 'अधिकार क्षेत्रों में बँटा होता है' वाले तर्क जैसा।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • नियंत्रण-क्षेत्र में कुल कर्मचारी गिन लेना। गिनती केवल सीधे रिपोर्ट करने वाले अधीनस्थों की है।
  • ग्रेइकुनास का सूत्र ग़लत लिखना। सही कुल सूत्र n(2^(n−1) + n − 1) है; 5 अधीनस्थों पर 100 आता है, 4 पर 44। 4 अधीनस्थ = 100 लिखना ग़लत है।
  • किसी एक संख्या को सर्वमान्य बता देना। हैमिल्टन, ग्रेइकुनास, उर्विक और फेयोल के उद्धरण अलग हैं, और गुलिक का निष्कर्ष है कि अंतिम संख्या पर्याप्त अध्ययन के बिना नहीं दी जा सकती।
  • हैमिल्टन का क्रम उलटना। शीर्ष पर तीन, तल पर छह; यानी ऊपर कम, नीचे अधिक।
  • आदेश की एकता और निर्देश की एकता को एक मान लेना। पहली एक कर्मचारी के एक वरिष्ठ की बात है, दूसरी एक उद्देश्य के लिए एक मुखिया और एक योजना की।
  • साइमन को 'नियंत्रण-क्षेत्र का विरोधी' कह देना। उनकी आलोचना सभी शास्त्रीय सिद्धांतों के बारे में है: हर सिद्धांत के विरुद्ध एक उलटा सिद्धांत है और शर्तें बताई नहीं गईं। वे इन्हें शर्तों के साथ पढ़ने को कहते हैं।
  • 'चपटी संरचना हमेशा बेहतर' या 'ऊँची संरचना हमेशा बेहतर' लिखना। दोनों के लाभ-हानि हैं और चुनाव कार्य, स्थान और अधीनस्थों की क्षमता पर निर्भर है।