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पेपर III · इकाई II

पदानुक्रम (Hierarchy)

पदानुक्रम क्या है, फ़ेयोल की स्केलर चेन और गैंगप्लैंक, गुलिक-उर्विक और साइमन के नज़रिए, लाभ-सीमाएँ, तथा केंद्रीय सचिवालय और राजस्थान के राजस्व-ढाँचे के उदाहरण।

  • पदानुक्रम
  • स्केलर चेन
  • गैंगप्लैंक
  • CSMOP
  • भू-राजस्व अधिनियम
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II: "Principles of organisation: hierarchy, unity of command, span of control, delegation, centralisation and decentralisation, coordination, authority and responsibility, accountability." इस पृष्ठ पर पदानुक्रम (hierarchy) है। आदेश की एकता, नियंत्रण-क्षेत्र, प्रत्यायोजन, समन्वय, अधिकार, उत्तरदायित्व और जवाबदेही के अलग पृष्ठ हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में पदानुक्रम का नाम लेकर सीधा प्रश्न एक ही बार आया: 2024 में 10 अंक का "शास्त्रीय सिद्धांत कहावतें और मिथक हैं: पदानुक्रम बनाम नियंत्रण-क्षेत्र"। उसका हल नियंत्रण-क्षेत्र वाले पृष्ठ पर है; यहाँ उसकी जड़ यानी पदानुक्रम की अवधारणा तैयार होती है।
  • 2013-2024 के पेपरों में देखा गया रुझान: इसी परिवार के सिद्धांत (नियंत्रण-क्षेत्र, प्रत्यायोजन, आदेश की एकता, केंद्रीकरण) लगभग हर पेपर में 2 से 10 अंक तक आए हैं। पदानुक्रम समझे बिना इनमें से किसी का उत्तर गहरा नहीं बनता।
  • पदानुक्रम का राजस्थान वाला उदाहरण परीक्षक को तुरंत ठोस लगता है: भू-राजस्व अधिनियम 1956 में कलेक्टर, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार का अधीनता-क्रम सीधे लिखा है।

पहले सरल भाषा में: सीढ़ी और फ़ाइल का सफ़र

सोचिए एक पटवारी ने किसी गाँव में फ़सल-ख़राबे की रिपोर्ट बनाई। रिपोर्ट सीधे ज़िला कलेक्टर की मेज़ पर नहीं पहुँचती। वह पहले तहसीलदार के पास जाती है, फिर उपखंड अधिकारी के पास, फिर कलेक्टर के पास। हर पड़ाव पर एक अधिकारी जाँचता है, कुछ जोड़ता है और ऊपर बढ़ाता है। उलटी दिशा में कलेक्टर का आदेश भी इसी सीढ़ी से उतरकर पटवारी तक पहुँचता है। हर आदमी जानता है कि उसे किसे जवाब देना है और किसके आदेश मानने हैं। यह सीढ़ी जैसी बनावट ही पदानुक्रम (hierarchy) है। (समझाने के लिए गढ़ी गई तस्वीर है; आगे राजस्थान की असली अधीनता-शृंखला धारा-सहित दी गई है।)

परीक्षा के लिए सटीक परिभाषा यह है। पदानुक्रम संगठन की वह रचना है जिसमें पद ऊपर से नीचे श्रेणीबद्ध स्तरों में सजे होते हैं, हर निचली इकाई अपने से ऊपर की इकाई के नियंत्रण और पर्यवेक्षण में होती है, सबसे ऊपर सर्वाधिक औपचारिक अधिकार होता है (OpenStax, प्रबंधन-पदानुक्रम की परिभाषा); व्यवहार में आदेश ऊपर से नीचे और रिपोर्ट नीचे से ऊपर चलती है। फ़ेयोल (Henri Fayol) इसे स्केलर चेन (scalar chain) कहते हैं: "सर्वोच्च अधिकारी से निचले स्तर तक अधिकारियों की श्रृंखला", और इसी श्रृंखला के हर कड़ी से गुज़रने वाले संदेशों के मार्ग को वे अधिकार-रेखा (line of authority) कहते हैं।

पदानुक्रम के मूल तत्त्व

पदानुक्रम के पाँच तत्त्व याद रखें। पहला, स्तरों में विभाजन: गुलिक-उर्विक के संग्रह (1937) में काम को खड़ी रेखाओं से अलग-अलग कार्यों में और आड़ी रेखाओं से अधिकार और उत्तरदायित्व के अलग-अलग स्तरों में बाँटा गया बताया गया है। दूसरा, आदेश-श्रृंखला (chain of command): यह रेखा बताती है कि कौन किसे रिपोर्ट करेगा। तीसरा, अधिकार का क्रमिक प्रवाह: जितना ऊपर जाइए, औपचारिक अधिकार का दायरा उतना बड़ा होता है। चौथा, संचार का तय रास्ता: संदेश आम तौर पर हर कड़ी से होकर ही जाते हैं। पाँचवाँ, आदेश की एकता: हर कर्मचारी का एक ही वरिष्ठ हो, जिससे आदेशों में टकराव न हो।

यह रचना क्यों ज़रूरी है, इसे गुलिक के शब्दों में समझिए। काम का जितना बँटवारा होता है, उतनी ही समन्वय की ज़रूरत बढ़ती है। संगठन के रास्ते समन्वय का मतलब है काम को ऐसे लोगों में बाँटना जो अधिकार की एक संरचना में रखे हों, ताकि ऊपर से नीचे तक वरिष्ठों के आदेश से काम जुड़ा रहे। इस संरचना में केंद्र के कार्यकारी और परिधि की इकाइयों के बीच संचार और नियंत्रण का प्रभावी जाल बुनना पड़ता है। पदानुक्रम उसी जाल की रीढ़ है। उर्विक ने भी लिखा कि हर उपक्रम में 'स्केलर सिद्धांत' का पालन न हो तो अधिकार टूट जाता है।

पदानुक्रम के तत्त्व: एक नज़र में

तत्त्वअर्थसरकारी उदाहरण
स्तर (levels)ऊपर से नीचे श्रेणीबद्ध पद; ऊपर कम, नीचे अधिक लोग (पिरामिड)सचिव, विंग, डिवीज़न, ब्रांच, सेक्शन (CSMOP पैरा 5)
आदेश-श्रृंखलाकौन किसे रिपोर्ट करेगा, यह तय रेखातहसीलदार के अधीन नायब तहसीलदार (भू-राजस्व अधिनियम धारा 24)
अधिकार-रेखाअधिकार ऊपर से नीचे बहता है और संदेश कड़ी-दर-कड़ी चलते हैंराष्ट्रपति/राज्यपाल की शक्ति 'अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से' (अनुच्छेद 53(1), 154(1))
आदेश की एकताहर अधीनस्थ का एक ही वरिष्ठआदेश की एकता का अलग पृष्ठ देखें
नियंत्रण-क्षेत्रहर वरिष्ठ के सीधे अधीन कितने लोगनियंत्रण-क्षेत्र का अलग पृष्ठ देखें

स्तरों का वर्णन OpenStax और CSMOP से; अनुच्छेद संविधान के पाठ से।

फ़ेयोल की स्केलर चेन और गैंगप्लैंक (Gang Plank)

फ़ेयोल की पुस्तक (अंग्रेज़ी अनुवाद 1949, फ़्रेंच मूल 1916) में स्केलर चेन 14 सिद्धांतों में नौवाँ है। वे साफ़ मानते हैं कि यह मार्ग आदेश की एकता से निकलता है, पर हमेशा सबसे तेज़ नहीं होता। बड़े संगठनों में, ख़ासकर सरकारी संगठनों में, यह कभी-कभी "विनाशकारी रूप से लंबा" हो जाता है। इसलिए अधिकार-रेखा का सम्मान और तेज़ कार्रवाई की ज़रूरत, दोनों में तालमेल बैठाना पड़ता है।

फ़ेयोल का उदाहरण सीधा है। मान लीजिए दो अलग शाखाओं के अनुभाग F और P को आपस में बात करनी है। रेखा के नियम से F की बात अपने अधिकारियों से होकर शीर्ष तक चढ़ेगी, फिर नीचे उतरकर P तक पहुँचेगी, और जवाब उसी तरह लौटेगा। बीच में बीस पड़ाव, ढेरों काग़ज़ और हफ़्तों-महीनों की देरी हो सकती है। इसकी जगह वे गैंगप्लैंक (gang plank), यानी दो सीढ़ियों के बीच का सीधा पुल, सुझाते हैं: F और P सीधे मिलकर बात कर लें, बशर्ते उनके अपने वरिष्ठों ने इसकी अनुमति दी हो और वे तुरंत अपने वरिष्ठों को बता दें कि क्या तय हुआ। जब तक दोनों सहमत रहें और वरिष्ठ मंज़ूर करें, सीधा संपर्क चले; जैसे ही सहमति टूटे या वरिष्ठ न मानें, श्रृंखला फिर लागू हो जाती है।

एक चेतावनी भी फ़ेयोल देते हैं: सरकारी उपक्रम में 'सामान्य हित' इतना बड़ा और दूर होता है कि कर्मचारी को उसका ठीक अंदाज़ा नहीं रहता, इसलिए हर अनुभाग ख़ुद को ही लक्ष्य मान बैठता है और केवल अपनी अधिकार-रेखा के प्रति सजग रह जाता है। यानी पदानुक्रम की सबसे बड़ी बीमारी 'डिब्बाबंद' काम है, जिसकी दवा सीधे संपर्क, बैठकें और ऊपर से बार-बार साझा उद्देश्य की याद है (समन्वय का पृष्ठ देखें)।

गुलिक-उर्विक और साइमन: पदानुक्रम पर दो नज़रिए

गुलिक और उर्विक (1937) पदानुक्रम को संगठन का स्वाभाविक ढाँचा मानते हैं। उर्विक के अनुसार जहाँ बड़ी संख्या में लोग हों, वहाँ काम को आड़ी रेखाओं से अधिकार और उत्तरदायित्व के स्तरों में बाँटना ही पड़ता है, और इन स्तरों के अधिकारों व ज़िम्मेदारियों का आपसी मेल बिठाना नेतृत्व का मुख्य काम है। उन्होंने मूनी और रेली की 'स्केलर प्रक्रिया' (scalar process) का भी हवाला दिया: सर्वोच्च समन्वयकारी अधिकार कहीं न कहीं टिका होना चाहिए और उसके संचालन के लिए ऊपर से पूरे ढाँचे में फैली एक औपचारिक प्रक्रिया होनी चाहिए।

हर्बर्ट साइमन (Herbert Simon) ने 1946 के लेख में इसी ढाँचे की कमज़ोरी दिखाई। उनके अनुसार अधीनस्थ 'अधिकार स्वीकार' तब करता है जब वह अपने निर्णय की परवाह किए बिना किसी और के निर्णय से अपना व्यवहार चलने देता है। संगठन में अधिकार का एक बड़ा उपयोग यह है कि हर निर्णय उस जगह हो जहाँ उसे सबसे अच्छी तरह लिया जा सकता है, यानी विशेषज्ञता। साइमन कहते हैं कि सख़्ती से लागू आदेश की एकता का सिद्धांत इस विशेषज्ञता के सिद्धांत से मेल नहीं खाता। इसी वजह से वे शास्त्रीय सिद्धांतों को 'कहावतें' कहते हैं। 2024 के उस प्रश्न का पूरा हल नियंत्रण-क्षेत्र के पृष्ठ पर है।

पदानुक्रम के लाभ और सीमाएँ

पक्षबातआधार
लाभहर पद की स्थिति और रिपोर्टिंग साफ़ रहती है, इसलिए कोई नहीं पूछता कि 'किससे पूछूँ'OpenStax: chain of command कौन किसे रिपोर्ट करता है, साफ़ करती है
लाभआदेश की एकता से भ्रम, अकुशलता और ग़ैरज़िम्मेदारी घटती हैगुलिक (1937)
लाभसमन्वय का सबसे सीधा साधन: ऊपर के वरिष्ठ के आदेश से अलग-अलग इकाइयाँ जुड़ती हैंगुलिक (1937)
सीमासंदेश का मार्ग लंबा और धीमा; सरकारी संगठनों में विशेष रूप सेफ़ेयोल (1949 अनुवाद)
सीमा'सैन्य कठोरता और लालफ़ीताशाही'; गुलिक के अनुसार इसीलिए अंतर-विभागीय समितियाँ, समन्वयक आदि अतिरिक्त साधन अपनाए जाते हैंगुलिक (1937), पृ. 35-36
सीमाअनुभाग अपने ही दायरे में सिमट जाते हैंफ़ेयोल (1949 अनुवाद)
सीमाआदेश की एकता की कठोरता विशेषज्ञता से टकराती हैसाइमन (1946)
विश्लेषणस्तर जितने अधिक, जानकारी के बदलने-बिगड़ने के मौक़े उतने अधिक; इसलिए कई सरकारें स्तर घटाती हैं (CSMOP 2022)विश्लेषण; स्रोत के निष्कर्ष से निकला

अंतिम पंक्ति हमारा विश्लेषण है, स्रोत का सीधा कथन नहीं।

ऊँचा या चपटा पदानुक्रम: स्तर और नियंत्रण-क्षेत्र का रिश्ता

पदानुक्रम की ऊँचाई नियंत्रण-क्षेत्र से जुड़ी है। OpenStax के अनुसार संकरे नियंत्रण-क्षेत्र में नियंत्रण कड़ा रहता है, पर प्रबंधन के स्तर ज़्यादा होते हैं, ख़र्च बढ़ता है, निर्णय धीमे होते हैं और शीर्ष प्रबंधन अलग-थलग पड़ सकता है। चौड़े क्षेत्र में स्तर कम, निर्णय तेज़ और अधीनस्थों की स्वायत्तता ज़्यादा होती है, पर नियंत्रण ढीला पड़ सकता है और समन्वय की कमी आ सकती है। यानी स्तर घटाइए तो नियंत्रण-क्षेत्र फैलता है; क्षेत्र संकरा रखिए तो स्तर बढ़ते हैं। यह साइमन की वही दुविधा है जिस पर 2024 का 10 अंक का प्रश्न टिका था।

पदानुक्रम, अधिकार और जवाबदेही का रिश्ता

पदानुक्रम सिर्फ़ पदों का नक़्शा नहीं, अधिकार और ज़िम्मेदारी के बहाव का नक़्शा भी है। OpenStax के अनुसार आम तौर पर अधिकार और उत्तरदायित्व संगठन में नीचे की ओर सौंपे जाते हैं, जबकि जवाबदेही (accountability) ऊपर की ओर चलती है: हर ऊँचे स्तर के प्रबंधक को अपने अधीनस्थों के कामों के लिए जवाबदेह ठहराया जाता है। NCERT भी कहती है कि प्रत्यायोजन ही यह तय करता है कि कौन किसे रिपोर्ट करेगा, यानी प्रबंधन-पदानुक्रम का आधार वही है। इसीलिए पदानुक्रम का हर प्रश्न आगे जाकर प्रत्यायोजन, अधिकार, उत्तरदायित्व और जवाबदेही के प्रश्नों में बदल जाता है। इन चारों के अलग पृष्ठ हैं और उन्हें इसी क्रम से पढ़ना सबसे आसान है।

एक व्यावहारिक कसौटी रखिए। किसी संस्था के पदानुक्रम को परखना हो तो तीन सवाल पूछिए: क्या हर पद की रिपोर्टिंग-रेखा साफ़ है, क्या हर स्तर पर उतना अधिकार दिया गया है जितनी ज़िम्मेदारी है, और क्या ज़रूरी मामलों में बीच के स्तर लाँघने का वैध रास्ता मौजूद है। तीनों के जवाब 'हाँ' हों तो पदानुक्रम सहायक है; कोई 'नहीं' हो तो वही उसकी कमज़ोर कड़ी है (यह हमारा विश्लेषण है)।

भारत में पदानुक्रम: संविधान से सचिवालय तक

भारत में पदानुक्रम की जड़ संविधान में ही है। अनुच्छेद 53(1) कहता है कि संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और वे इसका प्रयोग स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करेंगे। अनुच्छेद 154(1) राज्य में यही बात राज्यपाल के लिए कहता है। यानी शासन की शक्ति ऊपर से नीचे अधीनस्थ अधिकारियों की श्रृंखला के ज़रिये बहती है।

केंद्र सरकार के विभाग का आंतरिक ढाँचा DARPG की केंद्रीय सचिवालय कार्यालय प्रक्रिया नियम-पुस्तिका (CSMOP) में लिखा है। 13वें संस्करण (2010) के पैरा 5 के अनुसार विभाग विंग, डिवीज़न, ब्रांच और सेक्शन में बँटता है। विभाग का प्रमुख सचिव होता है, जिसकी ज़िम्मेदारी "पूर्ण और अविभाजित" बताई गई है। विंग विशेष सचिव, अपर सचिव या संयुक्त सचिव के प्रभार में, डिवीज़न निदेशक, संयुक्त निदेशक या उप सचिव के प्रभार में, ब्रांच अवर सचिव के प्रभार में और सेक्शन अनुभाग अधिकारी की देखरेख में होता है; सेक्शन सबसे निचली संगठनात्मक इकाई है, जहाँ सहायक आदि 'डीलिंग हैंड' के रूप में नोटिंग और ड्राफ़्टिंग करते हैं। यही ढाँचा 12वें संस्करण (2003) में भी है।

केंद्र सरकार के विभाग का ढाँचा (CSMOP, 13वाँ संस्करण)

  1. सचिव

    विभाग का प्रशासनिक प्रमुख; ज़िम्मेदारी पूर्ण और अविभाजित

  2. विंग

    विशेष सचिव / अपर सचिव / संयुक्त सचिव

  3. डिवीज़न

    निदेशक / संयुक्त निदेशक / उप सचिव

  4. ब्रांच

    अवर सचिव

  5. सेक्शन

    अनुभाग अधिकारी; सहायक आदि 'डीलिंग हैंड'

CSMOP 13वें संस्करण के पैरा 5 के अनुसार; ऊपर से नीचे अधिकार, नीचे से ऊपर रिपोर्ट।

एक नज़र में: पदानुक्रम

पदानुक्रम (Hierarchy)

अर्थ

  • श्रेणीबद्ध स्तर
  • हर इकाई ऊपर वाली के अधीन
  • ऊपर से आदेश, नीचे से रिपोर्ट

फ़ेयोल

  • स्केलर चेन (सिद्धांत 9)
  • लाइन ऑफ़ अथॉरिटी
  • गैंगप्लैंक: सीधा संपर्क, वरिष्ठ को सूचना

गुलिक-उर्विक

  • स्तरों में अधिकार और उत्तरदायित्व
  • स्केलर प्रक्रिया (मूनी-रेली)
  • सख़्त पदानुक्रम में लालफ़ीताशाही

साइमन 1946

  • आदेश की एकता बनाम विशेषज्ञता
  • सिद्धांत कहावत जैसे

भारत

  • अनुच्छेद 53(1), 154(1)
  • CSMOP: सचिव से सेक्शन तक
  • भू-राजस्व अधिनियम धारा 24

क्रम से: पदानुक्रम का चिंतन

  1. 1916

    फ़ेयोल की पुस्तक का फ़्रेंच मूल (अंग्रेज़ी अनुवाद 1949); स्केलर चेन और गैंगप्लैंक

  2. 1937

    गुलिक और उर्विक का संग्रह: स्तरों का सिद्धांत, मूनी-रेली की स्केलर प्रक्रिया का हवाला

  3. 1946

    साइमन का 'प्रशासन की कहावतें', Public Administration Review

  4. 2010

    CSMOP का 13वाँ संस्करण: विभाग का ढाँचा और स्तरों की सीमा

  5. 2022

    CSMOP का 16वाँ संस्करण: प्रस्तुति-चैनल चार तक, डीलेयरिंग, स्तर-छलाँग की शर्त

मुख्य तथ्य

फ़ेयोल की पुस्तक
फ़्रेंच मूल 1916; अंग्रेज़ी अनुवाद 1949; स्केलर चेन = सिद्धांत 9
गुलिक और उर्विक का संग्रह
Papers on the Science of Administration, 1937
साइमन का लेख
Public Administration Review, खंड 6, अंक 1, शीतकाल 1946, पृ. 53-67
संविधान
अनुच्छेद 53(1) और 154(1): शक्ति का प्रयोग अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से
CSMOP 13वाँ संस्करण
सितंबर 2010; विंग-डिवीज़न-ब्रांच-सेक्शन; फ़ाइल-स्तर तीन से अधिक नहीं (पैरा 27(3))
CSMOP 2022 (16वाँ)
प्रस्तुति-चैनल चार से अधिक नहीं; समीक्षा कम से कम हर तीन वर्ष में
डीलेयरिंग की समीक्षा (PIB)
95 प्रतिशत मंत्रालयों/विभागों में
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956
धारा 17, 20, 24: आयुक्त, कलेक्टर, तहसीलदार आदि और उनका अधीनता-क्रम
अंतिम जाँच
01-10-2026

राजस्थान का पहलू

राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (राजस्व विभाग, राजस्थान सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रति; 01-10-2026 को देखी) में राजस्व-पदानुक्रम सीधे लिखा है। धारा 17: राज्य सरकार हर संभाग में एक आयुक्त नियुक्त करेगी। धारा 20: हर ज़िले में एक कलेक्टर, जो ज़िले का भू-अभिलेख अधिकारी भी होता है, और हर तहसील में एक तहसीलदार; सरकार सहायक कलेक्टर और नायब तहसीलदार भी नियुक्त कर सकती है, और उपखंडों का प्रभार सहायक कलेक्टर को तथा उप-तहसीलों का प्रभार तहसीलदार या नायब तहसीलदार को दिया जाता है। धारा 24: ज़िले के अपर कलेक्टर, उपखंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर, तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार कलेक्टर के अधीन हैं; उपखंड के तहसीलदार आदि उपखंड अधिकारी के अधीन; और तहसील के अतिरिक्त तहसीलदार व नायब तहसीलदार तहसीलदार के अधीन। विश्लेषण: यह कलेक्टर से नायब तहसीलदार तक की सीढ़ी का क़ानूनी रूप है, जो बताता है कि पदानुक्रम केवल प्रबंधन-सिद्धांत नहीं, राजस्थान के क़ानून में लिखा ढाँचा है।

इस विषय का PYQ

2024, पेपर III, 10 अंक: "शास्त्रीय सिद्धांत कहावतें और मिथक हैं: पदानुक्रम बनाम नियंत्रण-क्षेत्र" ("Classical principles are proverbs and myths": hierarchy vs span of control)। इसका पूरा हल नियंत्रण-क्षेत्र (span of control) वाले पृष्ठ पर दिया है; यहाँ दोबारा नहीं लिखा गया, ताकि दो जगह दो अलग-अलग उत्तर न बनें। उत्तर लिखते समय इस पृष्ठ से तीन बिंदु जोड़ें: स्केलर चेन की परिभाषा, गैंगप्लैंक, और साइमन की 'विशेषज्ञता बनाम आदेश की एकता' वाली आपत्ति।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • पदानुक्रम और नियंत्रण-क्षेत्र को एक ही बताना: पदानुक्रम स्तरों की बनावट है; नियंत्रण-क्षेत्र एक वरिष्ठ के सीधे अधीन संख्या है। दोनों जुड़े हैं, पर अलग सिद्धांत हैं।
  • यह लिखना कि फ़ेयोल गैंगप्लैंक से स्केलर चेन तोड़ने को कहते हैं: ग़लत। वे चेन बनाए रखते हुए, वरिष्ठों की अनुमति और सूचना की शर्त पर सीधा संपर्क सुझाते हैं।
  • फ़ेयोल की तारीख़ गड़बड़ाना: फ़्रेंच मूल 1916, अंग्रेज़ी अनुवाद 1949।
  • 'पदानुक्रम हर हाल में अच्छा' या 'हर हाल में बुरा' जैसा एकतरफ़ा उत्तर: लाभ और सीमा दोनों लिखें और संतुलन के साधन (गैंगप्लैंक, प्रत्यायोजन, डीलेयरिंग) जोड़ें।
  • CSMOP के आँकड़ों में संस्करण छिपाना: 'तीन स्तर' 13वें संस्करण (2010) की बात है और 'चार चैनल' 16वें (2022) की; दोनों को एक ही नियम न बताएँ।