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पेपर III · इकाई II

सामाजिक अंकेक्षण: MKSS की जन सुनवाई, SAU और VB-G RAM G अधिनियम

सामाजिक अंकेक्षण का अर्थ, राजस्थान की जन सुनवाई की जड़ें, MGNREGA धारा 17 से VB-G RAM G अधिनियम तक का क़ानूनी ढाँचा, SAU, राज्यों के मॉडल और उत्तर-लेखन की दृष्टि से सीमाएँ।

  • MKSS
  • जन सुनवाई
  • SAU
  • MGNREGA धारा 17
  • VB-G RAM G
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II, लोक प्रशासन: "Issues: Union-State relations, Minister-civil servant relations, generalists-specialists, administrative reforms, social audit." इस पृष्ठ पर सामाजिक अंकेक्षण का प्रशासनिक पक्ष है: अर्थ, क़ानूनी आधार, संस्थाएँ, राज्यों के मॉडल, राजस्थान की जन सुनवाई की परंपरा। पेपर I (इकाई III, भाग C) में "social, performance and efficiency audit" का लेखा-परीक्षा वाला पक्ष अलग पृष्ठ पर है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में सामाजिक अंकेक्षण पर 2016 का 5 अंक का और 2018 का 2 अंक का प्रश्न आया है; दोनों लेखा-परीक्षा खंड में हल हैं। लोक प्रशासन के खंड में इस पर सीधा प्रश्न इन पेपरों में नहीं मिला। यह 2013-2024 के पेपरों का देखा गया रुझान है, परीक्षा की भविष्यवाणी नहीं।
  • सिलेबस की "Issues" पंक्ति में नाम होने से यह विषय कभी भी 10 अंक के विश्लेषणात्मक प्रश्न के रूप में आ सकता है: "सामाजिक अंकेक्षण जवाबदेही का साधन कैसे है?" इसके लिए क़ानूनी आधार, संस्थाएँ और सीमाएँ, तीनों चाहिए।
  • राजस्थान की भूमिका इस विषय का सबसे मज़बूत जोड़ है: देवडूंगरी और कोट किरना से जन सुनवाई निकली और बाद में राष्ट्रीय क़ानूनों तक पहुँची। साथ ही यह ध्यान रखें कि MGNREGA की जगह अब VB-G RAM G अधिनियम, 2025 है (1 जुलाई 2026 से)।

पहले सरल भाषा में: गाँव की चौपाल में हिसाब

सोचिए गाँव में तालाब की खुदाई का काम हुआ। काग़ज़ पर दर्ज है कि 60 मज़दूरों ने 10 दिन काम किया और सबकी मज़दूरी बँट गई। अब एक दिन चौपाल पर वही काग़ज़ पढ़कर सुनाए जाएँ और जिन मज़दूरों के नाम लिखे हैं, उनसे पूछा जाए: "क्या तुमने काम किया? क्या पैसे मिले?" फिर सब मिलकर तालाब पर जाकर देखें कि जितनी खुदाई काग़ज़ पर है, उतनी ज़मीन पर है या नहीं। यही सामाजिक अंकेक्षण (social audit) है: जिनके नाम पर पैसा ख़र्च हुआ, वे ख़ुद खर्च की जाँच करते हैं।

परीक्षा के लिए परिभाषा: ग्रामीण विकास मंत्रालय के 2016 के लेखा-परीक्षा मानकों के अनुसार सामाजिक अंकेक्षण वह अंकेक्षण है जो जनता करती है, ख़ासकर वे लोग जो किसी कार्यक्रम से प्रभावित हों या उसके लाभार्थी हों। इसमें सरकारी अभिलेखों की तुलना ज़मीनी तथ्यों से की जाती है, लाभार्थियों की भागीदारी से, और सत्यापन के निष्कर्ष सार्वजनिक मंच पर ज़ोर से पढ़े जाते हैं। मौखिक गवाही भी ली जाती है और अभिलेखों से मिलाई जाती है।

मंत्रालय के 2013 के परिचालन दिशानिर्देशों में एक वाक्य याद रखने लायक़ है: सामाजिक अंकेक्षण दोष ढूँढने की नहीं, तथ्य ढूँढने की प्रक्रिया है; अंकेक्षक को स्वयं को "अभियोजक" नहीं मानना चाहिए। तर्क यह है कि जिस एजेंसी को योजना चलानी है, वह अपना अंकेक्षण ख़ुद नहीं कर सकती, इसलिए लोगों की भागीदारी और एक स्वतंत्र सहायक संस्था ज़रूरी है।

सामाजिक अंकेक्षण और सरकारी (CAG) अंकेक्षण: एक तुलना

सामाजिक अंकेक्षण

कौन करता हैग्राम सभा और लाभार्थी, सामाजिक अंकेक्षण इकाई (SAU) की सहायता से

सबूतअभिलेख के साथ मौखिक गवाही और कार्यस्थल का सत्यापन (2016 के मानकों के अनुसार मुख्य अंतर)

मंचखुली ग्राम सभा; निष्कर्ष सबके सामने पढ़े जाते हैं

परिणामशिकायतों और आपराधिक जाँच-योग्य निष्कर्षों की अलग-अलग सूची; कार्रवाई-रिपोर्ट अगली ग्राम सभा में पढ़ी जाती है

क़ानूनी आधारMGNREGA धारा 17, अब VB-G RAM G अधिनियम की धारा 20

CAG का सरकारी अंकेक्षण

कौन करता हैभारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का कार्यालय, संवैधानिक संस्था के रूप में

सबूतमुख्यतः अभिलेख और लेखा-बहियाँ

मंचरिपोर्ट विधायिका में रखी जाती है

परिणामरिपोर्ट संसद या विधान-मंडल में रखी जाती है; CAG की रिपोर्ट सं. 8 of 2016 संसद में 29 अप्रैल 2016 को रखी गई

क़ानूनी आधारनियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का संवैधानिक पद; इस पृष्ठ का विषय नहीं

तालिका की "कौन करता है" और "मंच" पंक्तियों का CAG वाला कॉलम परीक्षा की सहूलियत के लिए दी गई तुलना है (विश्लेषण)।

राजस्थान से निकला विचार: MKSS और जन सुनवाई

सामाजिक अंकेक्षण की जड़ें राजस्थान की हैं। The Better India के अनुसार 1987 में अरुणा रॉय, शंकर सिंह और निखिल डे देवडूंगरी गाँव में बसे और पूछने लगे कि जब सार्वजनिक पैसा जनता का है, तो उसके खर्च का हिसाब देखने का हक़ जनता को क्यों न हो। मज़दूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) की स्थापना 1990 में देवडूंगरी में हुई; संगठन के अपने परिचय के अनुसार उसने जन सुनवाई (public hearing) का तरीक़ा बनाया, जिसमें सरकारी दस्तावेज़ हासिल करके ज़ोर से पढ़े और सत्यापित किए जाते हैं।

Accountability Research Centre के लेख के अनुसार 1990 के दशक की शुरुआत में इस अभियान ने "ऑडिट" शब्द को नया अर्थ दिया: गाँव-स्तर की जन सुनवाइयाँ, जिनमें गाँव के लोग और मज़दूर सरकार से जवाब माँगते थे। केस-अध्ययन के अनुसार पहली जन सुनवाई दिसंबर 1994 से अप्रैल 1995 के बीच के दौर में राजस्थान में हुई, शुरुआत कोट किरना गाँव से। 1996 में ब्यावर में सूचना के अधिकार की माँग पर 40 दिन का धरना चला। आगे चलकर 2000 में राजस्थान ने अपना सूचना क़ानून बनाया (The Better India), और 2005 में केंद्र का RTI अधिनियम आया (MKSS)।

विश्लेषण: इस इतिहास का परीक्षा-उपयोग यह है कि सामाजिक अंकेक्षण पहले आंदोलन के रूप में आया, फिर सूचना के अधिकार के सहारे ठोस बना और 2005 के बाद MGNREGA के क़ानून में उतरा। यानी RTI से अभिलेख मिलते हैं और जन सुनवाई उन अभिलेखों को ज़मीनी सच से मिलाती है।

समय-रेखा: जन सुनवाई से सामाजिक अंकेक्षण के क़ानून तक

  1. 1990

    देवडूंगरी (राजस्थान) में MKSS की स्थापना

  2. 1994

    पहली जन सुनवाई कोट किरना गाँव में; दौर दिसंबर 1994 से अप्रैल 1995

  3. 1996

    ब्यावर में सूचना के अधिकार के लिए 40 दिन का धरना

  4. 2000

    राजस्थान का सूचना क़ानून

  5. 2005

    केंद्रीय RTI अधिनियम और MGNREGA (धारा 17: सामाजिक अंकेक्षण)

  6. फ़रवरी 2006

    आंध्र प्रदेश में मनरेगा के सामाजिक अंकेक्षण का प्रायोगिक चरण

  7. 2011

    MGNREGA Audit of Schemes Rules अधिसूचित (CAG से परामर्श में)

  8. 19 दिसंबर 2016

    ग्रामीण विकास मंत्रालय का सामाजिक अंकेक्षण-मानकों वाला कार्यालय ज्ञापन

  9. 2017

    मेघालय का सामाजिक अंकेक्षण अधिनियम: पहला राज्य-क़ानून

  10. 1 जुलाई 2026

    VB-G RAM G अधिनियम लागू; MGNREGA निरस्त

क़ानूनी ढाँचा: अनुच्छेद 243A से MGNREGA धारा 17 तक

संवैधानिक जड़: अनुच्छेद 243A के अनुसार ग्राम सभा वे शक्तियाँ और कार्य करेगी जो राज्य की विधायिका क़ानून बनाकर दे। यानी ग्राम सभा की ताक़त अपने आप में असीम नहीं, क़ानून से तय होती है; MGNREGA ने उसे अंकेक्षण का काम सौंपा।

MGNREGA की धारा 17 (अब इतिहास, पर परीक्षा में पढ़ाई जाती है) के तीन उपबंध थे: (1) ग्राम सभा ग्राम पंचायत में किए जा रहे कार्यों की निगरानी करेगी; (2) ग्राम सभा योजना के तहत ग्राम पंचायत में लिए गए सभी कार्यों का नियमित सामाजिक अंकेक्षण करेगी; (3) ग्राम पंचायत मस्टर रोल, बिल, वाउचर, माप-पुस्तिकाएँ, स्वीकृति-आदेशों की प्रतियाँ और अन्य बही-खाते ग्राम सभा को उपलब्ध कराएगी। तीसरा उपबंध महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि सूचना के बिना सामाजिक अंकेक्षण नहीं हो सकता।

इसके बाद MGNREGA Audit of Schemes Rules, 2011 आए, जो ग्रामीण विकास मंत्रालय ने CAG से परामर्श करके अधिनियम की धारा 24(1) के अंतर्गत 2011 में अधिसूचित किए। CAG की रिपोर्ट के अनुसार नियम 3(1) में हर ग्राम पंचायत में कम से कम छह माह में एक सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य है, और परिचालन दिशानिर्देश 2013 के अनुसार नियम 4 हर राज्य से स्वतंत्र संगठन, यानी सामाजिक अंकेक्षण इकाई (Social Audit Unit, SAU) बनाने या चुनने को कहता है। यह इकाई सोसायटी या निदेशालय हो सकती है और क्रियान्वयन करने वाले विभागों से स्वतंत्र रहनी चाहिए।

SAU में चार स्तर के संसाधन-व्यक्ति होते हैं: राज्य (SRP), ज़िला (DRP), ब्लॉक (BRP) और गाँव (VRP)। ये ग्राम सभा को अंकेक्षण कराने में सहायता देते हैं; अंकेक्षण का दायित्व ग्राम सभा का ही है। 2016 के मानकों में यह भेद साफ़ है: अंकेक्षण करना ग्राम सभा का काम है और अंकेक्षण में सहूलियत देना SAU का।

सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया: चरण-दर-चरण (परिचालन दिशानिर्देश 2013)

चरणक्या होता हैध्यान देने की बात
1. कैलेंडरSAU वर्ष की शुरुआत में हर ग्राम पंचायत में कम से कम एक अंकेक्षण का वार्षिक कैलेंडर बनाती है और ज़िला कार्यक्रम समन्वयकों को भेजती हैछह माह में एक अंकेक्षण; राज्य में चरणबद्ध ढंग से
2. सूचनाकार्यक्रम अधिकारी (PO) ग्राम सभा की तारीख़ से कम से कम 15 दिन पहले सारे अभिलेख SAU को देता हैजॉब कार्ड रजिस्टर, मस्टर रोल, बिल-वाउचर, माप-पुस्तिका, संपत्ति रजिस्टर, पिछली कार्रवाई-रिपोर्ट, शिकायत रजिस्टर
3. सत्यापनसंसाधन-व्यक्ति और प्राथमिक हितधारक मस्टर रोल में दर्ज मज़दूरों से मिलते हैं, कार्यस्थल पर माप देखते हैं, संपत्ति की गुणवत्ता और ख़रीद के बिल जाँचते हैंअभिलेख की ज़मीनी जाँच ही सामाजिक अंकेक्षण को अलग बनाती है
4. ग्राम सभातटस्थ सार्वजनिक स्थान पर, पंचायत प्रमुख के गाँव या टोले में नहीं; अध्यक्षता पंचायत या कार्यान्वयन एजेंसी से बाहर के बुज़ुर्ग ग्रामीण की; निर्णय मतदान से, असहमति कार्यवृत्त मेंसभी ज़िम्मेदार अधिकारी उपस्थित रहकर प्रश्नों का उत्तर दें; पिछली कार्रवाई-रिपोर्ट सबसे पहले पढ़ी जाए
5. रिकॉर्डिंगपूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग, संपादन के बिना वेबसाइट पर और ज़िला कार्यक्रम समन्वयक के पासपारदर्शिता का प्रमाण
6. रिपोर्टस्थानीय भाषा में, ग्राम सभा के अध्यक्ष के हस्ताक्षर से; कम से कम सात दिन पंचायत की सूचना-पट्टिका परशिकायतों की सूची और आपराधिक जाँच-योग्य निष्कर्षों की अलग सूची; FIR संबंधित प्राधिकारी दर्ज कराएँ
7. कार्रवाईकार्रवाई-रिपोर्ट SAU और शिकायतकर्ता को दी जाती है, अगली ग्राम सभा के आरंभ में पढ़ी जाती हैअनुवर्ती कार्रवाई सबसे कमज़ोर कड़ी है (नीचे केस स्टडी)

"CAG का सामाजिक अंकेक्षण मानक": क्या सही है और क्या नहीं

परीक्षा में अक्सर "CAG के सामाजिक अंकेक्षण मानक" लिख दिया जाता है। यहाँ सावधानी चाहिए। 19 दिसंबर 2016 के कार्यालय ज्ञापन (F. No. L-11033/40/2016-RE-VII) में जो "Auditing Standards for Social Audit" हैं, वे ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन के अनुलग्नक हैं। ज्ञापन के अनुसार मंत्रालय ने CAG से परामर्श में 22 जून 2015 को संयुक्त कार्यबल बनाया, जिसके चार कार्य-समूहों की सिफ़ारिशें स्वीकार करके मानक और राज्यों तथा मंत्रालय के लिए कार्य-बिंदु जारी किए गए। यानी मानक CAG के परामर्श से बने, पर जारी मंत्रालय ने किए।

इन मानकों में उद्देश्य बताए गए हैं: योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना, लोगों को क़ानून के तहत उनके अधिकार बताना, ग्राम सभा को शिकायतें रखने का साझा मंच देना, सभी चरणों में जन-भागीदारी बढ़ाना और ग्राम सभा को सहभागी संस्था के रूप में मज़बूत करना। मानकों में "जानकारी" (अधिकारों और पात्रताओं की समझ, खुली और समान पहुँच, सूचना का प्रदर्शन) जैसे न्यूनतम सिद्धांत भी हैं। कहा गया है कि भविष्य में अन्य योजनाओं के लिए अलग प्रक्रिया क्रियान्वयन एजेंसी इसी तरह के परामर्श से बनाए।

यह मानक, MGNREGA के लिए बने थे। इन्हें CAG की अपनी लेखा-परीक्षा मानक-पुस्तिका का हिस्सा मानना ग़लत होगा। उत्तर में लिखें: "ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा CAG के परामर्श से बने सामाजिक अंकेक्षण के मानक (2016)"।

आज का क़ानून: MGNREGA की जगह VB-G RAM G अधिनियम, 2025

विकसित भारत: रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण), यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025 (अधिनियम सं. 36 of 2025) को 20 दिसंबर 2025 को स्वीकृति मिली। India Code के पाठ की पाद-टिप्पणी के अनुसार यह 1 जुलाई 2026 से अधिसूचना S.O. 2382(E) दिनांक 11 मई 2026 द्वारा लागू हुआ; ETV Bharat और The Wire ने भी 11 मई 2026 को इसी तारीख़ की घोषणा दी। धारा 37 के अनुसार नियत तिथि से MGNREGA, 2005 निरस्त हो जाता है, पर निरस्ती से पहले किए गए कार्य और चल रही कार्यवाहियाँ बनी रहती हैं।

नए अधिनियम में सामाजिक अंकेक्षण की जगह: धारा 20 के अनुसार ग्राम सभा योजना के सभी कार्यों की निगरानी और समीक्षा करेगी और केंद्र सरकार के निर्धारित तरीक़े से नियमित सामाजिक अंकेक्षण करेगी। ग्राम पंचायत मस्टर रोल, बिल, वाउचर, माप-पुस्तिका, स्वीकृति-आदेश, डिजिटल अभिलेख और जियो-टैग फ़ोटो भी ग्राम सभा को उपलब्ध कराएगी। धारा 24(e) में सामाजिक अंकेक्षण तंत्र को मज़बूत करने का उल्लेख है। अनुसूची I के पैरा 25(3) के अनुसार योजना के सभी कार्य, व्यय और गारंटियाँ कम से कम हर छह माह में सामाजिक अंकेक्षण के अधीन होंगी, और जब तक नए नियम अधिसूचित न हों, 2011 के Audit of Schemes Rules यथोचित परिवर्तन सहित लागू रहेंगे।

एक नई बात भी है: अनुसूची I के पैरा 28(f) में कहा गया है कि प्रारंभिक जाँच या सामाजिक अंकेक्षण की रिपोर्ट के निष्कर्षों से वित्तीय अनियमितता के प्रथमदृष्टया प्रमाण मिलने पर ज़िला कार्यक्रम समन्वयक विधिक सलाह लेकर FIR दर्ज कराना सुनिश्चित करेगा। (पैरा 28(a) से (h) शिकायत-निवारण तंत्र का हिस्सा हैं।) विश्लेषण: पहले के ढाँचे में अनुवर्ती कार्रवाई की कमी बताई जाती थी; यह प्रावधान उसी कमी को कसता है, पर इसका असर वास्तविक क्रियान्वयन से ही जाँचा जा सकता है।

तीन मॉडल एक नज़र में: राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मेघालय

मॉडलशुरुआतसंस्था और आधारख़ासियत
राजस्थान (MKSS की जन सुनवाई)1994 की कोट किरना सुनवाई; संगठन 1990 सेनागरिक संगठन का आंदोलन; शुरू में क़ानूनी आधार नहींसरकारी अभिलेख सार्वजनिक रूप से पढ़कर लोगों से सत्यापन; आगे चलकर RTI और MGNREGA की भाषा बनी
आंध्र प्रदेशफ़रवरी 2006 में प्रायोगिक चरण; SSAAT 2009 मेंग्रामीण विकास विभाग के अधीन पर स्वतंत्र पंजीकृत सोसायटी (SSAAT); सरकारी आदेशों से अभिलेखों तक पहुँचग्रामीण युवा गाँव के सोशल ऑडिटर के रूप में घर-घर जाकर मस्टर रोल सत्यापित करते हैं; ग्राम सभा के बाद मंडल-स्तर की सार्वजनिक सुनवाई
मेघालय2017मेघालय सामुदायिक सहभागिता और लोक सेवा सामाजिक अंकेक्षण अधिनियम, 2017; क्रियान्वयन MSSAT (सोसायटी)योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं, दोनों की भागीदारी-आधारित समीक्षा (EPW); राज्य-स्तर का पहला क़ानून

प्रवाह: सामाजिक अंकेक्षण का चक्र

  1. वार्षिक कैलेंडर

    SAU हर ग्राम पंचायत में छह माह में एक अंकेक्षण तय करती है

  2. अभिलेख

    PO ग्राम सभा से 15 दिन पहले अभिलेख देता है

  3. ज़मीनी सत्यापन

    मज़दूरों से बात और कार्यस्थल पर माप

  4. ग्राम सभा

    तटस्थ स्थान, बाहरी बुज़ुर्ग अध्यक्ष, वीडियो रिकॉर्डिंग

  5. रिपोर्ट

    स्थानीय भाषा में; सात दिन सूचना-पट्टिका पर; शिकायत और आपराधिक निष्कर्ष अलग

  6. कार्रवाई

    कार्रवाई-रिपोर्ट अगली ग्राम सभा के आरंभ में पढ़ी जाती है

एक नज़र में: सामाजिक अंकेक्षण

सामाजिक अंकेक्षण

अर्थ

  • जनता द्वारा अंकेक्षण
  • अभिलेख बनाम ज़मीनी तथ्य
  • सार्वजनिक मंच पर निष्कर्ष
  • दोष नहीं, तथ्य ढूँढना

जड़ें

  • MKSS 1990 देवडूंगरी
  • कोट किरना 1994
  • ब्यावर 1996
  • RTI 2000 और 2005

क़ानून

  • अनुच्छेद 243A
  • MGNREGA धारा 17
  • Audit of Schemes Rules 2011
  • VB-G RAM G धारा 20

संस्थाएँ

  • ग्राम सभा
  • SAU (स्वतंत्र)
  • SRP, DRP, BRP, VRP
  • PO और DPC

मॉडल

  • आंध्र: SSAAT
  • मेघालय: 2017 अधिनियम
  • राजस्थान: जन सुनवाई

चुनौतियाँ

  • अनुवर्ती कार्रवाई
  • धन और स्वतंत्रता
  • अनुपालन में कमी

मुख्य तथ्य

ग्राम सभा
अनुच्छेद 243A: राज्य विधायिका जो शक्तियाँ दे
MGNREGA धारा 17
ग्राम सभा द्वारा कार्यों की निगरानी और नियमित सामाजिक अंकेक्षण; अभिलेख उपलब्ध कराने का दायित्व पंचायत पर (2005)
अंकेक्षण की आवृत्ति
हर ग्राम पंचायत में कम से कम छह माह में एक (2011 के नियम; VB-G RAM G अनुसूची I पैरा 25(3), 2025)
Audit of Schemes Rules
2011; CAG से परामर्श में; नियम 4: स्वतंत्र SAU (2011)
मानक (Auditing Standards)
ग्रामीण विकास मंत्रालय का कार्यालय ज्ञापन, 19 दिसंबर 2016, CAG से परामर्श में बने
ग्राम सभा की बैठक
अभिलेख 15 दिन पहले; रिपोर्ट सात दिन सूचना-पट्टिका पर; वीडियो रिकॉर्डिंग (2013)
VB-G RAM G अधिनियम
अधिनियम 36/2025, स्वीकृति 20 दिसंबर 2025; प्रवर्तन 1 जुलाई 2026; MGNREGA निरस्त (धारा 37)
नई धारा
धारा 20 (ग्राम सभा का सामाजिक अंकेक्षण); अनुसूची I पैरा 28(f): अनियमितता पर FIR (2025)
MKSS
स्थापना 1990, देवडूंगरी; पहली जन सुनवाई कोट किरना 1994 (1990-94)
आंध्र प्रदेश
प्रायोगिक चरण फ़रवरी 2006; SSAAT 2009 (2006/2009)
मेघालय
सामाजिक अंकेक्षण अधिनियम, 2017: राज्य-स्तर का पहला (2017)
CAG रिपोर्ट सं. 8 of 2016
संसद में 29 अप्रैल 2016; MGNREGA सामाजिक अंकेक्षण (2016)
राजस्थान सामाजिक जवाबदेही विधेयक
2018 के घोषणा-पत्र में वादा; 2019 का मसौदा; 2022 तक लंबित; पारित अधिनियम का आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध नहीं (2018-2022)
अंतिम जाँच
1 अक्टूबर 2026 (MGNREGA निरस्ती और VB-G RAM G के नियमों की स्थिति आगे बदल सकती है)

राजस्थान का पहलू

राजस्थान सरकार के सामाजिक अंकेक्षण पोर्टल (socialaudit.rajasthan.gov.in, देखा गया 1 अक्टूबर 2026) पर राज्य की सामाजिक अंकेक्षण इकाई SSAAT के नाम से दर्ज है और मनरेगा, मिड डे मील, PMAY (ग्रामीण और शहरी), स्वच्छ भारत मिशन और 15वें वित्त आयोग की योजनाओं के अंकेक्षण की सामग्री है। पोर्टल पर 2019-20 से 2024-25 तक की वार्षिक अंकेक्षण, लेखा और प्रशासनिक रिपोर्टें सूचीबद्ध हैं। राजस्थान सामाजिक जवाबदेही अधिनियम, 2025 आधिकारिक अधिसूचना में प्रकाशित नहीं है (1 अक्टूबर 2026 तक जाँचा गया); इसलिए उसका कोई प्रावधान यहाँ नहीं लिखा गया है। जो प्रलेखित है वह विधेयक की माँग है: 2018 के चुनाव घोषणा-पत्र में सामाजिक जवाबदेही क़ानून का वादा, 2019 में नागरिक संगठनों का तैयार मसौदा, और 2022 के आलेखों के अनुसार कोई प्रगति नहीं (Outlook, Accountability India)। इस बाद की स्थिति की पुष्टि राज्य सरकार के आधिकारिक स्रोत से नहीं हुई है।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • "MGNREGA की धारा 17 आज भी लागू है" लिखना: 1 जुलाई 2026 से MGNREGA निरस्त है और ग्राम सभा का सामाजिक अंकेक्षण अब VB-G RAM G अधिनियम की धारा 20 में है। धारा 17 को ऐतिहासिक या पूर्ववर्ती प्रावधान लिखें।
  • VB-G RAM G के पैरा "25(3)" को अधिनियम की धारा 25 बता देना: यह अनुसूची I का पैरा 25(3) है। धारा 20 और अनुसूची I का पैरा, दोनों अलग लिखें।
  • "CAG ने सामाजिक अंकेक्षण के मानक जारी किए" लिखना: 2016 के मानक ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन के साथ जारी हुए, CAG से परामर्श के बाद।
  • सामाजिक अंकेक्षण को वित्तीय अंकेक्षण का पर्याय बताना: इसकी पहचान मौखिक गवाही, ज़मीनी सत्यापन और सार्वजनिक सुनवाई है।
  • "राजस्थान सामाजिक जवाबदेही अधिनियम, 2025" को पारित क़ानून की तरह लिखना: आधिकारिक प्रकाशन नहीं मिलता, और उपलब्ध स्रोत केवल विधेयक की माँग और लंबित स्थिति बताते हैं।
  • ग्राम सभा और SAU की भूमिकाएँ उलट देना: अंकेक्षण ग्राम सभा करती है, SAU केवल सहायता देती है (2016 के मानकों में यह भेद साफ़ है)।
  • आंध्र की SSAAT की स्थापना का वर्ष 2006 लिख देना: अंकेक्षण 2006 में प्रायोगिक रूप में शुरू हुए, सोसायटी 2009 में बनी (दो स्रोत)। परीक्षा में दोनों वर्ष जोड़कर लिखें।