नव लोक प्रबंध (New Public Management)
नव लोक प्रबंध क्या है, कहाँ से आया, हुड और ओसबोर्न-गेबलर क्या कहते हैं, भारत और राजस्थान में उसके रंग क्या हैं और उसकी आलोचना कैसे लिखें, इसकी उत्तर-लेखन केंद्रित तैयारी।
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II: "Public Administration: Theories and Principles... New Public Administration, New Public Management, Good Governance, New Public Service."
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013 के पेपर में 20 अंक (200 शब्द) का प्रश्न आया था: NPM क्या है, इसकी विशेषताएँ, सरकारी प्रशासन में उपयोगिता और उदाहरण। लंबे उत्तर के लिए पूरा ढाँचा इसी पेज पर है।
- 2016 में 2 अंक का प्रश्न NPM की '3-ई' अवधारणा पर था और 2024 में 5 अंक का प्रश्न NPM के विरोधाभासों पर। यानी परिभाषा के साथ आलोचना भी तैयार रखनी है (2013-2024 के पेपरों में देखा गया रुझान)।
- NPM का सीधा संबंध सुशासन, नागरिक घोषणा-पत्र, ई-गवर्नेंस और सेवा-गारंटी क़ानून से है, इसलिए यह पेज इकाई II के कई प्रश्नों की नींव का काम करता है।
सरल भाषा में: NPM क्या है
कल्पना कीजिए एक पुराना सरकारी डाकघर। वहाँ हर काम फ़ाइल, नियम-पुस्तिका और ऊपर के आदेश से चलता है। काउंटर के बाबू से यह नहीं पूछा जाता कि कितने लोगों का काम कितने दिन में हुआ; पूछा जाता है कि प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं। अब उसी डाकघर को एक अच्छी कूरियर कंपनी की तरह चलाने की सोचिए: साफ़ लक्ष्य, हर काउंटर के लिए समय-मानक, बेहतर काम पर पुरस्कार, और ज़रूरत हो तो कुछ काम बाहर की एजेंसी से कराना। यही सोच नव लोक प्रबंध (New Public Management, NPM) की जड़ है।
परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा: NPM सार्वजनिक सेवाओं के संचालन की वह सुधार-दृष्टि है जिसमें निजी क्षेत्र की प्रबंध-तकनीकें, प्रतिस्पर्धा, परिणाम-आधारित मूल्यांकन और नागरिक-केंद्रित सेवा-वितरण अपनाए जाते हैं, ताकि कम लागत में बेहतर सेवा मिले। क्रिस्टोफ़र हुड (Christopher Hood) ने 1991 में इसे एक 'ढीला शब्द' (loose term) कहा और बताया कि इसके पीछे दो धाराओं का मेल है: एक ओर लोक-चयन सिद्धांत (public choice), लेन-देन लागत सिद्धांत (transaction cost) और प्रधान-अभिकर्ता सिद्धांत (principal-agent) जैसे अर्थशास्त्रीय विचार, दूसरी ओर निजी व्यवसाय से आई प्रबंधवादी सोच (managerialism), जो मानती है कि पेशेवर प्रबंध-कौशल हर संगठन में काम आता है।
उत्पत्ति: कहाँ से और कैसे आया
हुड के अनुसार NPM 1970 के दशक के उत्तरार्ध से OECD समूह के कई देशों में उभरा और यह केवल ब्रिटेन तक सीमित विकास नहीं था। उन्होंने ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और डेनमार्क जैसे देशों का उल्लेख किया है। परीक्षा के लिए दो उदाहरण याद रखें।
ब्रिटेन: 1988 की 'Next Steps' रिपोर्ट ने सुझाव दिया कि नीति बनाने का काम मंत्रालय में रहे और सेवा पहुँचाने का काम अपने कर्मचारियों, रणनीति और नेतृत्व वाली कार्यकारी एजेंसियों (executive agencies) को सौंपा जाए। 1990 के दशक के मध्य तक सौ से अधिक एजेंसियाँ बन चुकी थीं। जुलाई 1991 में ब्रिटेन में नागरिक घोषणा-पत्र (Citizen's Charter) का श्वेत-पत्र आया।
न्यूज़ीलैंड: State Sector Act 1988 और Public Finance Act 1989 ने मिलकर नया ढाँचा बनाया। हर विभाग का अपना मुख्य कार्यकारी (chief executive) हुआ, जो विभाग के प्रदर्शन के लिए ज़िम्मेदार था और अलग रोज़गार-अनुबंध पर रखा गया। ध्यान आगत (input) मापने से हटकर निर्गत (output) पर गया। इसका एक अनचाहा नतीजा भी बताया जाता है: विभाग अलग-अलग द्वीपों की तरह काम करने लगे और आपसी सहयोग घटा।
1991 में हुड का लेख 'A Public Management for All Seasons?' (Public Administration, खंड 69, वसंत 1991, पृ. 3-19) छपा। 1992 में डेविड ओसबोर्न (David Osborne) और टेड गेबलर (Ted Gaebler) की पुस्तक Reinventing Government आई, जिसने 'सरकार को उद्यमशील बनाओ' का नारा लोकप्रिय किया।
समय-रेखा: NPM के पड़ाव
1970 के दशक का उत्तरार्ध
OECD देशों में सुधार की लहर (हुड के अनुसार)
1988
ब्रिटेन: Next Steps रिपोर्ट; न्यूज़ीलैंड: State Sector Act
1989
न्यूज़ीलैंड: Public Finance Act
1991
हुड का लेख; ब्रिटेन का Citizen's Charter (जुलाई); भारत की औद्योगिक नीति (24 जुलाई)
1992
Osborne और Gaebler: Reinventing Government
1997
भारत: मुख्यमंत्री सम्मेलन में 'Action Plan on Effective and Responsive Government' (मई)
2000
Denhardt और Denhardt: New Public Service, 'serving rather than steering'
2004
Hood और Peters: 'The Middle Aging of NPM: Into the Age of Paradox?'
2006
भारत: राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) की मंज़ूरी (मई)
हुड के अनुसार NPM के सात सिद्धांत (doctrines)
| हुड का सिद्धांत | सरल अर्थ | भारतीय उदाहरण (विश्लेषण) |
|---|---|---|
| 1. हाथ में काम सँभालने वाला पेशेवर प्रबंध (hands-on professional management) | काम की ज़िम्मेदारी किसी नामित, दिखाई देने वाले प्रबंधक की हो; अधिकार बिखरे न हों | राजस्थान के सेवा-गारंटी क़ानून में हर सेवा के लिए 'नामित अधिकारी' (designated officer) |
| 2. स्पष्ट मानक और प्रदर्शन-माप (explicit standards and measures) | लक्ष्य लिखित हों और सफलता के संख्यात्मक पैमाने तय हों | नागरिक घोषणा-पत्र में सेवा-मानक और समय-सीमा |
| 3. निर्गत पर नियंत्रण (output controls) | बजट और पुरस्कार प्रक्रिया की जगह नतीजे से जुड़ें | सेवा में देरी पर प्रतिदिन ₹250 जुर्माना (राजस्थान अधिनियम 2011) |
| 4. इकाइयों का विघटन (disaggregation) | बड़े एकीकृत विभाग को छोटी, प्रबंधनीय इकाइयों में बाँटना | ब्रिटेन की Next Steps एजेंसियाँ; पासपोर्ट सेवा में अग्र-भाग (front-end) का अलग संचालन |
| 5. अधिक प्रतिस्पर्धा (competition) | अनुबंध और सार्वजनिक निविदा से लागत घटे और स्तर सुधरे | PPP परियोजनाएँ; पासपोर्ट परियोजना का अनुबंध TCS को (2008) |
| 6. निजी क्षेत्र की प्रबंध-शैली (private-sector styles) | निजी क्षेत्र के आज़माए औज़ार सार्वजनिक सेवा में अपनाना | कॉल-सेंटर, ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप से सेवा |
| 7. अनुशासन और मितव्ययिता (discipline and parsimony) | 'कम में अधिक काम'; संसाधनों की माँग पर अंकुश | लागत-प्रति-आवेदन जैसे मापों से बचत की जाँच (नीचे कार्य-उदाहरण) |
सातों सिद्धांत हुड (1991) की तालिका से हैं; भारतीय उदाहरण का स्तंभ हमारा विश्लेषण है, हुड का कथन नहीं।
ओसबोर्न और गेबलर के दस सिद्धांत (Reinventing Government, 1992)
| सिद्धांत | मूल भाव |
|---|---|
| 1. उत्प्रेरक सरकार (catalytic) | चप्पू चलाने की जगह दिशा देना (steering rather than rowing) |
| 2. समुदाय-स्वामित्व वाली सरकार | सेवा देने की जगह समुदाय को सक्षम बनाना |
| 3. प्रतिस्पर्धी सरकार | सेवा-वितरण में प्रतिस्पर्धा लाना |
| 4. मिशन-प्रेरित सरकार | नियम-चालित संगठन को लक्ष्य-चालित बनाना |
| 5. परिणामोन्मुख सरकार | आगत नहीं, नतीजों को धन देना |
| 6. ग्राहक-प्रेरित सरकार | नौकरशाही की नहीं, ग्राहक की ज़रूरत पूरी करना |
| 7. उद्यमशील सरकार | केवल ख़र्च नहीं, कमाई भी करना |
| 8. पूर्वानुमान करने वाली सरकार | इलाज से बेहतर रोकथाम |
| 9. विकेंद्रित सरकार | पदानुक्रम से भागीदारी और टीमवर्क की ओर |
| 10. बाज़ार-उन्मुख सरकार | बाज़ार के माध्यम से बदलाव लाना |
याद रखने की युक्ति: हुड = 7 सिद्धांत (शैक्षिक विश्लेषण, 1991); ओसबोर्न-गेबलर = 10 सिद्धांत (व्यावहारिक नुस्खा, 1992)।
NPM की '3-ई': मितव्ययिता, दक्षता, प्रभावशीलता
मान लीजिए एक ज़िले का दफ़्तर राशन-कार्ड बनाता है। 3-ई इन तीन सवालों में बँटे हैं। मितव्ययिता (Economy): काग़ज़, कर्मचारी और कंप्यूटर कम से कम लागत पर जुटाए गए या नहीं (आगत की लागत घटाना)। दक्षता (Efficiency): इन्हीं आगतों से कितने कार्ड बने, यानी आगत को निर्गत में बदलने की दर। प्रभावशीलता (Effectiveness): जो कार्ड बने, उनसे असली लक्ष्य, यानी पात्र परिवारों तक अनाज पहुँचना, कितना पूरा हुआ।
ब्रिटेन का National Audit Office 'value for money' को संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के रूप में परिभाषित करता है, जिसके तीन घटक यही तीन 'E' हैं। ICAI की परिभाषाएँ भी यही बात कहती हैं: आगत की लागत घटाना, आगत को सर्वश्रेष्ठ दर पर निर्गत बनाना और निवेश के स्तर पर सर्वश्रेष्ठ संभव परिणाम पाना। कुछ संस्थाएँ चौथा 'E' (Equity, समता) भी जोड़ती हैं, ताकि सबसे वंचित तक पहुँचना लागत-बचत के नीचे न दब जाए। यह चौथा E ही NPM की आलोचना का प्रवेश-द्वार भी है।
तुलना: परंपरागत लोक प्रशासन, NPA, NPM और NPS
| बिंदु | परंपरागत लोक प्रशासन | नव लोक प्रशासन (NPA) | नव लोक प्रबंध (NPM) | नव लोक सेवा (NPS) |
|---|---|---|---|---|
| मुख्य ज़ोर | नियम, पदानुक्रम, प्रक्रिया का पालन | सामाजिक समता और समाज से प्रासंगिकता | दक्षता, परिणाम, प्रतिस्पर्धा | साझा जनहित और लोकतांत्रिक नागरिकता |
| नागरिक कौन है | आवेदक या लाभार्थी | वंचित वर्ग, जिसके पक्ष में प्रशासन खड़ा हो | ग्राहक (customer) | नागरिक और साझेदार |
| सरकार की भूमिका | सीधे सेवा देना और नियम लागू करना | समता सुनिश्चित करने वाला सक्रिय पक्ष | निर्देशन (steering), अनुबंध और निगरानी | सेवा करना (serving), संवाद और साझा मूल्य बनाना |
| सफलता का पैमाना | नियमों का पालन | सामाजिक न्याय और समता | 3-ई और प्रदर्शन-संकेतक | जनहित और बहु-स्तरीय जवाबदेही |
| मूल संदर्भ | स्थापित प्रशासनिक परंपरा | Minnowbrook सम्मेलन, 1968 | हुड (1991), ओसबोर्न-गेबलर (1992) | Denhardt और Denhardt (2000) |
NPA और NPS के अलग पेज बाद में आएँगे; यहाँ केवल तुलना के लिए छोटी पंक्तियाँ हैं। परंपरागत लोक प्रशासन वाला स्तंभ सार-रूप में हमारा विश्लेषण है।
एक दिन की मिसाल: पुराना ढर्रा बनाम NPM की सोच (काल्पनिक दृश्य)
एक ज़िले के सेवा-कार्यालय में सुबह दस बजे सौ लोग प्रमाण-पत्र के लिए कतार में हैं। पुराने ढर्रे में कार्यालय-प्रमुख की चिंता यह रहती है कि हर फ़ाइल पर सही हस्ताक्षर, सही मुहर और सही क्रम में टिप्पणी हो। उसे यह नहीं पूछा जाता कि कतार में खड़े व्यक्ति को कितने दिन लगे। फ़ाइल नियम से चले तो काम 'सही' माना जाता है, चाहे नागरिक को चार चक्कर लगाने पड़ें।
NPM की सोच में वही प्रमुख एक नामित प्रबंधक है। उसके सामने लिखित लक्ष्य है (जैसे 15 दिन में प्रमाण-पत्र), हर महीने का निर्गत-आँकड़ा है (कितने निपटे, कितने समय पर), काउंटर का संचालन ज़रूरत हो तो अनुबंध पर बाहर की एजेंसी को दिया जा सकता है, और देरी पर कर्मचारी की जवाबदेही तय है। फ़र्क़ यह है कि जवाबदेही प्रक्रिया से हटकर परिणाम की ओर चली गई। यही तीन शब्द उत्तर में दोहराएँ: लक्ष्य, मापन, जवाबदेही। इस दृश्य के पात्र और संख्या काल्पनिक हैं; इसे केवल समझने के लिए पढ़ें, उदाहरण के रूप में उत्तर में न लिखें।
भारत में NPM के रंग: पाँच उदाहरण
सावधानी: भारत ने कभी 'NPM अपनाने' की घोषणा नहीं की। नीचे के उदाहरण NPM के सिद्धांतों से मेल खाने वाले भारतीय क़दम हैं; यह मेल हमारा विश्लेषण है।
1. उदारीकरण (LPG सुधार, 1991): 24 जुलाई 1991 के औद्योगिक नीति वक्तव्य में चुनी हुई छोटी सूची को छोड़कर औद्योगिक लाइसेंसिंग समाप्त की गई, सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योगों की सूची काफ़ी घटाई गई और चुने उद्योगों में 51 प्रतिशत तक विदेशी इक्विटी की स्वतः अनुमति मिली। यह सरकार की भूमिका सीमित करने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की उसी हवा का हिस्सा था, जिसमें NPM पनपा।
2. नागरिक घोषणा-पत्र (Citizen's Charter): ब्रिटेन के जुलाई 1991 के घोषणा-पत्र से प्रेरित इस विचार पर भारत में केंद्र सरकार का पहला निर्देश दिसंबर 1996 में गया और मई 1997 के मुख्यमंत्री सम्मेलन में 'Action Plan on Effective and Responsive Government' अपनाया गया, जिसमें घोषणा-पत्र लागू करने, शिकायत-निवारण और विकेंद्रीकरण पर सिफ़ारिशें थीं। DARPG/IIPA की समीक्षा में पाया गया कि कई घोषणा-पत्रों में सेवा-मानक और शिकायत-निवारण की समय-सीमा नहीं थी और अधिकांश अंग्रेज़ी में थे। यानी मानक तय करने का सिद्धांत आया, पर अमल कमज़ोर रहा।
3. ई-गवर्नेंस: राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) को मई 2006 में मंज़ूरी मिली। दिसंबर 2010 की PIB विज्ञप्ति के अनुसार 86,000 से अधिक सामान्य सेवा केंद्र (CSC) खुल चुके थे। निजी उद्यमी के हाथ में सेवा-केंद्र देना निजी-शैली और प्रतिस्पर्धा का मेल है।
4. आउटसोर्सिंग और सरकारी-निजी भागीदारी (PPP): वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की 6 जनवरी 2026 की PIB विज्ञप्ति के अनुसार तीन वर्ष की PPP परियोजना पाइपलाइन में 852 परियोजनाएँ हैं, जिनकी कुल लागत ₹17 लाख करोड़ से अधिक है। सेवा-क्षेत्र का सबसे चर्चित उदाहरण पासपोर्ट सेवा है (नीचे केस स्टडी)।
5. राजस्थान: सेवा-गारंटी का क़ानूनी ढाँचा, जो नीचे 'राजस्थान का पहलू' में है।
आलोचना और विरोधाभास (2024 के प्रश्न की तैयारी)
हुड ने ख़ुद 1991 में NPM को 'ढीला शब्द' कहा और पूछा कि क्या यह सब ऋतुओं के लिए, यानी हर देश और हर राजनीतिक संदर्भ के लिए उपयुक्त है। Hood और Peters (2004) ने इसकी 'मध्य-आयु' पर लिखे लेख के शीर्षक में ही 'विरोधाभासों का युग' (age of paradox) का प्रश्न रखा। सुधारों के विश्लेषण पर Brookings की 2012 की पुस्तक की प्रस्तावना में भी यही चिंता मिलती है कि बदलावों ने अपेक्षित नतीजे नहीं दिए, कई बार अनचाहे परिणाम आए जो सरकारी संस्थाओं के बुनियादी मूल्यों को नुकसान पहुँचाते हैं, और निजी क्षेत्र के औज़ार राष्ट्रीय संदर्भ और उनकी सीमाएँ देखे बिना ले लिए गए।
परीक्षा के लिए पाँच विरोधाभास सूत्र-रूप में (विश्लेषण; स्रोतों से मिली चिंताओं का हमारा संयोजन):
(क) स्वायत्तता बनाम नियंत्रण: प्रबंधक को अधिक स्वतंत्रता देने की बात होती है, पर माप, मानक और ऑडिट बढ़ने से नियंत्रण भी बढ़ता है।
(ख) विघटन बनाम तालमेल: इकाइयाँ अलग करने से हर इकाई कुशल होती है, पर साझा समस्याओं पर सहयोग घटता है। न्यूज़ीलैंड में ठीक यही अनुभव बताया गया।
(ग) ग्राहक बनाम नागरिक: ग्राहक पैसा देकर माँग करता है; नागरिक के अधिकार और कर्तव्य, दोनों होते हैं। वंचित व्यक्ति 'लाभदायक ग्राहक' न हो तो उपेक्षित हो सकता है।
(घ) लक्ष्य-पूर्ति बनाम गुणवत्ता: जब पुरस्कार संख्या से जुड़ते हैं तो कर्मचारी संख्या बढ़ाने पर ध्यान देते हैं, गुणवत्ता गिर सकती है। Brookings की प्रस्तावना में निजी क्षेत्र से लाई प्रदर्शन-आधारित वेतन पद्धतियों का प्रभाव सार्वजनिक क्षेत्र में कमज़ोर बताया गया है।
(ङ) दक्षता बनाम जवाबदेही: अनुबंध पर सेवा देने वाली एजेंसी की जवाबदेही मतदाता के प्रति सीधी नहीं होती; शिकायत किसके पास जाए, यह अस्पष्ट हो सकता है।
भारत के संदर्भ में एक और सीमा: विकासशील देश में संस्थागत क्षमता, डिजिटल पहुँच और साक्षरता असमान है, इसलिए निजी-क्षेत्र वाली सीधी नक़ल जोखिम भरी हो सकती है। इसी चिंता से 'नव लोक सेवा' और सुशासन की ओर लौटने की माँग उठी।
एक नज़र में: NPM
नव लोक प्रबंध (NPM)
उत्पत्ति
- 1970 के दशक का उत्तरार्ध, OECD
- ब्रिटेन: Next Steps 1988
- न्यूज़ीलैंड: 1988-89 के क़ानून
सिद्धांत
- हुड के 7
- ओसबोर्न-गेबलर के 10
- 3-ई
भारतीय उदाहरण
- LPG 1991
- नागरिक घोषणा-पत्र 1997
- NeGP 2006
- PPP, पासपोर्ट सेवा
- राजस्थान सेवा-गारंटी 2011
आलोचना
- स्वायत्तता बनाम नियंत्रण
- विघटन बनाम तालमेल
- ग्राहक बनाम नागरिक
- संख्या बनाम गुणवत्ता
- दक्षता बनाम जवाबदेही
तुलना
- परंपरागत PA: नियम
- NPA: समता
- NPS: serving, steering नहीं
मुख्य तथ्य
- हुड का लेख
- Public Administration, खंड 69, पृ. 3-19, वसंत 1991 (सात सिद्धांत)
- ओसबोर्न-गेबलर की पुस्तक
- Reinventing Government, 1992 (दस सिद्धांत)
- Hood और Peters
- JPART खंड 14, अंक 3, पृ. 267-282, 2004
- ब्रिटेन: Next Steps
- 1988 की रिपोर्ट; 1990 के दशक के मध्य तक सौ से अधिक कार्यकारी एजेंसियाँ
- न्यूज़ीलैंड
- State Sector Act 1988 और Public Finance Act 1989
- भारत की औद्योगिक नीति
- 24 जुलाई 1991 (लाइसेंसिंग समाप्त, 51 प्रतिशत तक FDI स्वतः मंज़ूरी)
- नागरिक घोषणा-पत्र: भारत
- केंद्र का पहला निर्देश दिसंबर 1996; मुख्यमंत्री सम्मेलन मई 1997
- राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना
- मई 2006 में मंज़ूरी
- पासपोर्ट परियोजना
- अनुबंध 13 अक्टूबर 2008; 77 PSK का देशव्यापी रोल-आउट जून 2012
- राजस्थान सेवा-गारंटी अधिनियम
- अधिनियम सं. 23 of 2011; राज्यपाल की स्वीकृति 21 सितंबर 2011
- अंतिम जाँच
- 1 अक्टूबर 2026
राजस्थान का पहलू
राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम, 2011 (अधिनियम सं. 23; राज्यपाल की स्वीकृति 21 सितंबर 2011) में अधिसूचित सेवा निर्धारित समय-सीमा में देने की बाध्यता है। India Code में उपलब्ध पाठ के अनुसार नामित अधिकारी को आवेदन की लिखित पावती देनी होती है; अस्वीकृति या समय-सीमा बीतने के 30 दिन के भीतर प्रथम अपील और उसके निर्णय के 60 दिन के भीतर द्वितीय अपील हो सकती है; देरी पर ₹250 प्रतिदिन का जुर्माना है, जो ₹5,000 से अधिक नहीं होगा। 2013 के संशोधन (अधिनियम सं. 36, स्वीकृति 15 सितंबर 2013) ने 'Commission for Guaranteed Delivery of Public Services' के गठन का प्रावधान जोड़ा, जिसमें द्वितीय अपील के निर्णय के 60 दिन के भीतर पुनरीक्षण किया जा सकता है। NPM से जोड़ (विश्लेषण): यह निर्गत-मानक, नामित जवाबदेह अधिकारी और दंड, तीनों का मेल है। जानकारी 1 अक्टूबर 2026 को देखी गई; अधिनियम के लागू होने की तारीख़ यहाँ नहीं दी गई, क्योंकि आधिकारिक स्रोतों में वह अलग-अलग मिलती है।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- 3-ई में Economy, Efficiency, Effectiveness लिखें। Equity या Ethics को तीसरा E न बनाएँ; Equity चौथा E है जो आलोचना के संदर्भ में जोड़ा जाता है।
- NPM को केवल 'निजीकरण' न लिखें। हुड के सात सिद्धांतों में निजी-शैली एक है; बाक़ी लक्ष्य, मापन, विघटन, प्रतिस्पर्धा और मितव्ययिता हैं।
- हुड (1991, सात सिद्धांत) और ओसबोर्न-गेबलर (1992, दस सिद्धांत) को मिलाएँ नहीं। 'steering rather than rowing' ओसबोर्न-गेबलर का पहला सिद्धांत है।
- 'भारत ने NPM अपनाया' जैसा सीधा वाक्य न लिखें। लिखें कि अमुक सुधार NPM के अमुक सिद्धांत से मेल खाता है।
- 20 अंक के उत्तर में सिर्फ़ गुण न गिनाएँ। 'सरकारी प्रशासन में उपयोगिता' माँगी गई है, इसलिए उपयोग और सीमा, दोनों पर उदाहरण दें।
- आलोचना में काल्पनिक आँकड़े न दें; पासपोर्ट सेवा का 99.5 प्रतिशत संतुष्टि-आँकड़ा सरकार की अपनी रिपोर्ट का है, यह बताना न भूलें।
केस स्टडी: पासपोर्ट सेवा परियोजना
केस स्टडीपासपोर्ट सेवा परियोजना (Passport Seva Project): अग्र-भाग निजी साझेदार को, फ़ैसला सरकार के पास
विदेश मंत्रालय के अनुसार पुराने ढाँचे और प्रक्रियाएँ बढ़ती माँग के लिए अपर्याप्त पाई गईं। 13 अक्टूबर 2008 को मंत्रालय ने पासपोर्ट स्वचालन परियोजना TCS को सौंपी, जिसे निर्माण-स्वामित्व-संचालन-हस्तांतरण (BOOT) ढाँचे में सरकारी-निजी भागीदारी (PPP) के रूप में बताया गया। जून 2012 तक देश भर में 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) चालू हो गए।
- मॉडल
- PIB (2014) के अनुसार शुरुआती निवेश निजी साझेदार का था। TCS की विज्ञप्ति (2008) में परियोजना का लक्ष्य बताया गया था कि पुलिस-सत्यापन की ज़रूरत न हो तो पासपोर्ट तीन दिन में भेजा जाए।
- काम का बँटवारा
- आवेदन, बायोमेट्रिक और स्कैनिंग जैसे केंद्र के संचालन में निजी साझेदार के लगभग 2,500 कर्मी लगे और लगभग 2,500 मंत्रालय के; पर "आवेदन और दस्तावेज़ों की जाँच पासपोर्ट कार्यालय के कर्मचारी करते हैं और सेवा देने का निर्णय आवेदक के सामने लिया जाता है"। यानी निर्णय की संप्रभु शक्ति सरकार के पास रही।
- पैमाना
- PIB (2014) के अनुसार 2013 में 85.17 लाख पासपोर्ट सेवाएँ दी गईं, कॉल-सेंटर पर रोज़ लगभग 25,000 कॉल आते थे और PSK पर नागरिक संतुष्टि 99.5 प्रतिशत बताई गई। यह संतुष्टि-आँकड़ा सरकार की अपनी रिपोर्ट का है, स्वतंत्र सर्वेक्षण का नहीं।
- NPM से मेल (विश्लेषण)
- अनुबंध से सेवा-वितरण (प्रतिस्पर्धा), कॉल-सेंटर और पोर्टल (निजी शैली), निर्गत के मापदंड (प्रति दिन सेवाएँ, संतुष्टि) और नीति-निर्णय सरकार के पास (steering): चार NPM-लक्षण एक ही परियोजना में दिखते हैं।
- सीमाएँ (विश्लेषण)
- ऑनलाइन-आधारित व्यवस्था में डिजिटल रूप से कमज़ोर नागरिक पीछे रह सकते हैं और किसी एक निजी साझेदार पर निर्भरता का जोखिम रहता है; ये आलोचना के बिंदु हैं, परियोजना के प्रमाणित दोष नहीं।
सीख
NPM का सार यहाँ दिखता है: सरकार 'चप्पू चलाने' (counter चलाने) से हटकर 'दिशा देने' और निगरानी तक आती है, पर निर्णय का केंद्र, यानी पासपोर्ट देने का फ़ैसला, अपने पास रखती है। उत्तर में उदाहरण देते समय कथन के साथ यह भेद बताना अंक दिलाता है।
कार्य-उदाहरण: 3-ई से सुधार को नापना
हल सहित उदाहरणकाल्पनिक ज़िला कार्यालय: लाइसेंस आवेदन की सेवा (अंक केवल समझाने के लिए गढ़े गए हैं)
दिया है
- सुधार से पहले: वार्षिक बजट ₹12,00,000; निपटाए गए आवेदन 6,000; 15 दिन के लक्ष्य में निपटे आवेदन 2,400।
- सुधार के बाद (अग्र-भाग अनुबंध पर, ट्रैकिंग और समय-मानक लागू): बजट वही ₹12,00,000; निपटाए गए आवेदन 8,000; 15 दिन के लक्ष्य में निपटे आवेदन 6,400।
- 1दक्षता (लागत प्रति आवेदन) पहले ₹12,00,000 ÷ 6,000 = ₹200 प्रति आवेदन। बाद में ₹12,00,000 ÷ 8,000 = ₹150 प्रति आवेदन। लागत ₹50 घटी, यानी 25 प्रतिशत।
- 2प्रभावशीलता (समय-सीमा का लक्ष्य) पहले 2,400 ÷ 6,000 = 40 प्रतिशत आवेदन लक्ष्य-समय में। बाद में 6,400 ÷ 8,000 = 80 प्रतिशत। लक्ष्य-पूर्ति दुगुनी हुई।
- 3मितव्ययिता की जाँच यह तभी माना जाएगा जब अग्र-भाग का अनुबंध बाज़ार-भाव या प्रतिस्पर्धी निविदा से तय हुआ हो। केवल बजट वही रहने से मितव्ययिता सिद्ध नहीं होती।
- 4चौथा E (समता) का सवाल जिन आवेदकों के पास इंटरनेट नहीं था, क्या वे उन 8,000 में शामिल हैं? अगर नहीं, तो औसत बेहतर दिखते हुए भी असमान पहुँच बनी रह सकती है। यहीं NPM की आलोचना शुरू होती है।
निष्कर्ष: समान बजट में लागत प्रति आवेदन ₹200 से ₹150 और समय पर निपटान 40 से 80 प्रतिशत हुआ: दक्षता और प्रभावशीलता दोनों सुधरीं, पर समता की पुष्टि अलग से करनी होगी।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2013RAS मुख्य परीक्षापेपर III20 अंक
What do you understand by New Public Management? Explain its features and examine its utility in Government Administration. Give examples. / 'नवीन लोक प्रबन्धन' से आप क्या समझते हैं? इसकी विशेषताओं की विवेचना करें तथा सरकारी प्रशासन में इसकी उपयोगिता समझाएँ। उदाहरण दीजिए।
आदर्श उत्तर
नव लोक प्रबंध (NPM) सार्वजनिक सेवाओं में निजी क्षेत्र की प्रबंध-तकनीकें, प्रतिस्पर्धा और परिणाम-आधारित मूल्यांकन अपनाने की सुधार-दृष्टि है। यह 1970 के दशक के उत्तरार्ध से ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड जैसे OECD देशों में उभरी।
विशेषताएँ (हुड, 1991): (1) नामित पेशेवर प्रबंधक की स्पष्ट ज़िम्मेदारी; (2) स्पष्ट मानक व प्रदर्शन-माप; (3) निर्गत पर नियंत्रण; (4) बड़ी इकाइयों का विघटन; (5) अनुबंध व प्रतिस्पर्धा; (6) निजी-शैली का प्रबंध; (7) अनुशासन और मितव्ययिता। केंद्र में मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता (3-ई) हैं।
उपयोगिता: लागत घटती है और जवाबदेही साफ़ होती है। उदाहरण: पासपोर्ट सेवा में अग्र-भाग का अनुबंध, कॉल-सेंटर और पोर्टल से 2013 में 85.17 लाख सेवाएँ दी गईं (PIB); राजस्थान के सेवा-गारंटी क़ानून में समय-सीमा और प्रतिदिन ₹250 जुर्माना; नागरिक घोषणा-पत्र (1997) में सेवा-मानक।
सीमाएँ: ग्राहक की भाषा में नागरिक के अधिकार, समता और गुणवत्ता पीछे छूट सकते हैं; अनुबंधित एजेंसियों की जवाबदेही अस्पष्ट रह सकती है; भारत में घोषणा-पत्र अक्सर औपचारिक रहे।
निष्कर्ष: NPM उपयोगी औज़ार है, पर समता और जनहित के साथ संतुलन में। इसी संतुलन के लिए नव लोक सेवा और सुशासन की बात उठी।
2016RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
Explain in brief the concept of '3-Es' of New Public Management. / नव लोक प्रबन्ध की '3-ई' की अवधारणा को संक्षेप में समझाइये।
आदर्श उत्तर
3-ई: मितव्ययिता (आगत की कम लागत), दक्षता (आगत से अधिकतम निर्गत), प्रभावशीलता (इच्छित परिणाम की प्राप्ति)।
2024RAS मुख्य परीक्षापेपर III5 अंक
Paradoxes in the New Public Management approach.
आदर्श उत्तर
NPM में कई विरोधाभास माने जाते हैं। प्रबंधक को स्वायत्तता मिलती है, पर मानक और ऑडिट से नियंत्रण बढ़ता है। इकाइयाँ अलग होने से दक्षता बढ़ती है, पर तालमेल घटता है। नागरिक 'ग्राहक' बनता है, पर समता पीछे छूट सकती है। लक्ष्य-पूर्ति बढ़ती दिखे, पर गुणवत्ता घट सकती है।
अभ्यास प्रश्न (हमारे अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
NPM में 'steering rather than rowing' का क्या अर्थ है?
आदर्श उत्तर
सरकार स्वयं सेवा पहुँचाने की जगह दिशा, लक्ष्य और निगरानी तय करे; सेवा-वितरण दूसरों से कराए।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
परंपरागत लोक प्रशासन और NPM में अंतर स्पष्ट कीजिए।
आदर्श उत्तर
परंपरागत लोक प्रशासन नियम, पदानुक्रम और प्रक्रिया पर टिका है; सफलता नियम-पालन से नापी जाती है। NPM परिणाम, दक्षता और प्रतिस्पर्धा पर ज़ोर देता है; नागरिक को ग्राहक मानता है; सरकार दिशा देती है और सेवा-वितरण अनुबंध या एजेंसी से कराती है। सफलता 3-ई से नापी जाती है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
पासपोर्ट सेवा परियोजना को NPM का उदाहरण क्यों माना जा सकता है?
आदर्श उत्तर
परियोजना में अग्र-भाग का संचालन निजी साझेदार (TCS) को BOOT/PPP ढाँचे में सौंपा गया, कॉल-सेंटर और पोर्टल जैसी निजी-शैली अपनाई गई और सेवाओं की संख्या व संतुष्टि मापी गई। पर आवेदन की जाँच और निर्णय सरकारी पासपोर्ट कार्यालय के पास रहा, यानी सरकार ने दिशा और निर्णय बनाए रखे।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
भारत में NPM-प्रेरित सुधारों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
आदर्श उत्तर
भारत में NPM से मेल खाने वाले क़दम हैं: 1991 की औद्योगिक नीति में लाइसेंसिंग की समाप्ति, 1997 के नागरिक घोषणा-पत्र, 2006 की राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना, PPP और पासपोर्ट सेवा। इनसे पहुँच और सेवा-गति सुधरी। राजस्थान के सेवा-गारंटी क़ानून में समय-सीमा और जुर्माने की व्यवस्था है।
सीमाएँ भी हैं। DARPG/IIPA की समीक्षा में कई घोषणा-पत्रों में मानक और शिकायत-समय-सीमा नहीं मिली। डिजिटल खाई से वंचित वर्ग पीछे रह सकता है, और अनुबंधित एजेंसियों की जवाबदेही स्पष्ट रखना कठिन है।
निष्कर्षतः NPM के औज़ार तभी सफल होंगे जब समता और नागरिक-अधिकार के साथ जोड़े जाएँ, जैसा सुशासन और नव लोक सेवा की दृष्टि सुझाती है।
उत्तर कैसे लिखें: 10 अंक / 100 शब्द
भूमिका
प्रश्न का ढाँचा: 'NPM क्या है? विशेषताएँ और भारत में उपयोगिता बताइए।' पहली दो पंक्तियों में परिभाषा, फिर चार-पाँच बिंदु, फिर भारतीय उदाहरण और अंत में सीमा।
मुख्य भाग
- परिभाषा (15-20 शब्द): NPM सार्वजनिक सेवाओं में निजी क्षेत्र की प्रबंध-तकनीक, प्रतिस्पर्धा और परिणाम-आधारित मूल्यांकन अपनाने की दृष्टि है (हुड, 1991)।
- विशेषताएँ (30 शब्द): स्पष्ट मानक, निर्गत-नियंत्रण, इकाइयों का विघटन, अनुबंध-प्रतिस्पर्धा, निजी-शैली, मितव्ययिता; मूल में 3-ई।
- भारतीय उदाहरण (30 शब्द): 1991 की औद्योगिक नीति, नागरिक घोषणा-पत्र, पासपोर्ट सेवा (PPP), राजस्थान का सेवा-गारंटी क़ानून।
- सीमा (15 शब्द): समता और जवाबदेही पर जोखिम; ग्राहक बनाम नागरिक का द्वंद्व।
निष्कर्ष
निष्कर्ष (10 शब्द): NPM उपयोगी औज़ार है, पर समता और जनहित के संतुलन में।
अतिरिक्त मूल्य
- एक 'विश्लेषण' लेबल वाला वाक्य: उदाहरण NPM से 'मेल खाता है', ऐसा लिखें
- तुलना की एक पंक्ति: NPA समता, NPS 'serving', NPM 'steering'
त्वरित पुनरावृत्ति
- NPM = निजी-शैली की प्रबंध-तकनीक, प्रतिस्पर्धा और परिणाम पर ज़ोर; 'ढीला शब्द' (हुड, 1991)।
- हुड के लेख का नाम: A Public Management for All Seasons? (Public Administration, 1991)।
- हुड के 7 सिद्धांत: पेशेवर प्रबंध, मानक, निर्गत-नियंत्रण, विघटन, प्रतिस्पर्धा, निजी-शैली, मितव्ययिता।
- ओसबोर्न-गेबलर (1992): 10 सिद्धांत; पहला 'steering rather than rowing'।
- 3-ई = Economy, Efficiency, Effectiveness; चौथा E = Equity (कुछ संस्थाओं में)।
- उत्पत्ति: 1970 के दशक का उत्तरार्ध; ब्रिटेन की Next Steps (1988); न्यूज़ीलैंड के 1988-89 के क़ानून।
- भारत: LPG 1991; नागरिक घोषणा-पत्र (दिसंबर 1996 का निर्देश, मई 1997 का सम्मेलन); NeGP (मई 2006)।
- केस स्टडी: पासपोर्ट सेवा, अनुबंध अक्टूबर 2008, 77 PSK जून 2012; निर्णय सरकार के पास।
- राजस्थान: सेवा-गारंटी अधिनियम 2011 (सं. 23), ₹250 प्रतिदिन, अधिकतम ₹5,000; 2013 का संशोधन (सं. 36)।
- विरोधाभास: स्वायत्तता-नियंत्रण, विघटन-तालमेल, ग्राहक-नागरिक, संख्या-गुणवत्ता, दक्षता-जवाबदेही।
- तुलना: परंपरागत = नियम; NPA = समता; NPM = steering; NPS = serving।
याद रखने योग्य शब्द
- NPM
- Hood 1991
- 7 doctrines
- Reinventing Government
- 3-E
- steering vs rowing
- Next Steps
- Citizen's Charter
- Passport Seva
- PPP
- paradox