नवीन लोक प्रशासन (New Public Administration)
मिनोब्रुक 1968 से निकला वह आंदोलन, जिसने कहा कि प्रशासन केवल कुशल नहीं, न्यायपूर्ण भी होना चाहिए। वाल्डो, फ़्रेडरिक्सन, सामाजिक समता, मूल्य, आलोचना और भारतीय प्रासंगिकता।
- मिनोब्रुक 1968
- वाल्डो
- फ़्रेडरिक्सन
- सामाजिक समता
- प्रासंगिकता
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II: "Public Administration: Theories and Principles. Meaning, nature, scope and significance; evolution as a discipline; role in developing and developed societies; New Public Administration, New Public Management, Good Governance, New Public Service." इस पृष्ठ पर केवल नवीन लोक प्रशासन (NPA) है; NPM, सुशासन और नवीन लोक सेवा के अलग पृष्ठ हैं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- सिलेबस में NPA नाम से दर्ज है। संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में इस पर सीधा प्रश्न नहीं मिला; यह पृष्ठ केवल अभ्यास-प्रश्नों के साथ है। (2013-2024 के पेपरों में देखा गया तथ्य; आगे का रुझान अनुमान है।)
- पास के विषयों में प्रश्न आए हैं: 2024 में NPM के विरोधाभास (5 अंक), 2016 में NPM की '3-E' (2 अंक), 2013 में NPM पर 20 अंक। NPA को NPM से तुलना करके लिखने पर दोनों तरह के प्रश्नों में काम आता है।
- इस पृष्ठ पर लिखा हर तथ्य उत्तर में 'मिनोब्रुक 1968 + वाल्डो + फ़्रेडरिक्सन + सामाजिक समता + भारत का एक उदाहरण' की कड़ी में बाँधा गया है। सटीक नाम-तारीख़ और भारतीय संवैधानिक उदाहरण अंक बढ़ाते हैं।
पहले सरल भाषा में: ‘समय पर खुली दुकान’ और ‘छूट गई बस्ती’
मान लीजिए किसी ज़िले में राशन-वितरण की व्यवस्था काग़ज़ पर बेहद कुशल है: दुकानें समय पर खुलती हैं, रजिस्टर पूरे हैं, लागत कम है, ऑडिट में कोई आपत्ति नहीं। फिर भी शहर के किनारे की एक बस्ती, जहाँ के लोगों के पास कार्ड बनवाने के काग़ज़ ही नहीं हैं, महीनों से राशन नहीं पा रही। पुरानी सोच कहेगी कि व्यवस्था सफल है, क्योंकि लागत और समय के पैमाने पर वह खरी उतरती है। नवीन लोक प्रशासन का सवाल अलग है: यह कुशलता किसके लिए है? जिन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, वही बाहर रह गए तो प्रशासन अपना असली काम नहीं कर रहा। (यह समझाने के लिए गढ़ा गया उदाहरण है, किसी वास्तविक ज़िले का वर्णन नहीं।)
परीक्षा के लिए सटीक परिभाषा यह है। नवीन लोक प्रशासन (New Public Administration, NPA) 1968 के मिनोब्रुक सम्मेलन से उभरा वह चिंतन-आंदोलन है, जिसने लोक प्रशासन में केवल कार्यकुशलता और मितव्ययिता के बजाय प्रासंगिकता (relevance), मूल्य और नैतिकता, सामाजिक समता (social equity), परिवर्तन के प्रबंधन और नागरिक-अभिमुखता पर ज़ोर दिया। INFLIBNET (UGC की ई-पीजी पाठशाला) की सामग्री के अनुसार इसने मूल्य-तटस्थता को अस्वीकार किया और कहा कि प्रशासक सामाजिक समता प्राप्त करने का एक उपकरण बन सकते हैं।
पृष्ठभूमि: मिनोब्रुक सम्मेलन 1968
NPA किसी एक पुस्तक से नहीं, एक सम्मेलन से पैदा हुआ। Maxwell School की सामग्री के अनुसार ड्वाइट वाल्डो (Dwight Waldo) ने सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय के एडिरोंडैक पहाड़ियों में स्थित सम्मेलन-केंद्र 'मिनोब्रुक' में 1968 में एक जमावड़ा आयोजित किया। इसमें केवल 35 वर्ष से कम आयु के विद्वान और व्यवहारकर्ता बुलाए गए, क्योंकि वाल्डो की नज़र भविष्य के नेतृत्व पर थी। उद्देश्य था उस दौर की सामाजिक उथल-पुथल के संदर्भ में क्षेत्र के लिए नई दिशाएँ तय करना।
INFLIBNET की सामग्री के अनुसार वाल्डो के साथ एच. जॉर्ज फ़्रेडरिक्सन (H. George Frederickson) और अन्य सहकर्मी आयोजन में जुड़े थे; फ़्रेडरिक्सन की स्मृति-श्रद्धांजलि भी उन्हें मिनोब्रुक के आयोजकों में गिनती है। सम्मेलन में युवा विद्वानों ने तत्कालीन लोक प्रशासन की दिशा पर सवाल उठाए। इसकी चर्चाएँ फ़्रैंक मारिनी (Frank Marini) द्वारा संपादित पुस्तक 'Toward a New Public Administration: The Minnowbrook Perspective' (Chandler, Scranton, 1971) में संकलित हुईं, और यही पुस्तक आंदोलन का मूल दस्तावेज़ मानी जाती है।
बाद में 1988 में दूसरा मिनोब्रुक सम्मेलन हुआ। Maxwell School के लेख में फ़्रेडरिक्सन का यह कथन दर्ज है कि मिनोब्रुक की मूल बातें, यानी सामाजिक समता, लोकतांत्रिक प्रशासन और संवेदनशील लोक सेवा, आज लोक प्रशासन की 'मानक सामग्री' बन चुकी हैं।
1988 के दूसरे सम्मेलन को Maxwell School की सामग्री के अनुसार फ़्रेडरिक्सन ने आयोजित किया, जिसका केंद्र सक्रियता और सामाजिक समता था; वाल्डो ने दोनों का स्वर यूँ पकड़ा कि मिनोब्रुक I में 'विद्रोह और पुनर्निर्माण' था और मिनोब्रुक II में 'महत्वाकांक्षा और खोज'। तीसरा सम्मेलन 2008 में रोज़मेरी ओ'लिअरी ने आयोजित किया, जिसका ज़ोर लोक प्रशासन के भविष्य पर था। इसी सूत्र में याद रखें कि वाल्डो की मूल चुनौती यह थी कि लोक प्रशासन को तटस्थ और वस्तुनिष्ठ राज्य-प्रबंधन मान लेना ठीक नहीं; राजनीति और प्रशासन को पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता (फ़्रेडरिक्सन का कथन, Maxwell School लेख में)। एक और सावधानी: 1969 के अमेरिकन पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन सम्मेलन के लेख वाल्डो के एक निबंध के साथ 'Public Administration in a Time of Turbulence' (1971) के रूप में छपे; यह मारिनी की मिनोब्रुक-पुस्तक से अलग ग्रंथ है।
मिनोब्रुक I (1968) एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| वर्ष | 1968 |
| आयोजक | ड्वाइट वाल्डो (फ़्रेडरिक्सन सहित सहकर्मियों के साथ) |
| स्थान | सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय (Maxwell School) का एडिरोंडैक सम्मेलन-केंद्र 'मिनोब्रुक' |
| भागीदार | 35 वर्ष से कम आयु के युवा विद्वान और व्यवहारकर्ता |
| केंद्रीय माँग | सक्रिय, प्रासंगिक, मूल्य-सचेत प्रशासन जो समाज की ज़रूरतों से जुड़े |
| परिणाम-ग्रंथ | मारिनी (सं.), Toward a New Public Administration: The Minnowbrook Perspective, 1971 |
| अगली कड़ी | मिनोब्रुक II, 1988 |
NPA की पाँच प्रवृत्तियाँ
INFLIBNET की सामग्री NPA को पाँच प्रवृत्तियों में समेटती है। पहली, प्रासंगिकता: लोक प्रशासन की पढ़ाई और व्यवहार समाज की वास्तविक समस्याओं से जुड़ें, केवल प्रबंधन की तकनीकों से नहीं। दूसरी, मूल्य और नैतिकता: प्रशासन मूल्य-तटस्थ नहीं हो सकता; ईमानदारी और उत्तरदायित्व शब्दावली में लौटे। तीसरी, सामाजिक समता: प्रशासक वंचितों के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाएँ, यहाँ तक कि सकारात्मक विभेद (positive discrimination) का सहारा लें। चौथी, परिवर्तन: केवल वृद्धि नहीं, परिवर्तन का प्रबंधन प्रभावशीलता की कसौटी है। पाँचवीं, नागरिक-अभिमुखता और भागीदारी: प्रशासन जनता की आवाज़ सुने।
इन पाँचों को याद रखने का आसान तरीक़ा: ‘प्र-मू-स-प-ना’ यानी प्रासंगिकता, मूल्य, समता, परिवर्तन, नागरिक। उत्तर में हर बिंदु के साथ एक पंक्ति का उदाहरण जोड़ना चाहिए।
NPA की पाँच प्रवृत्तियाँ: अर्थ और उदाहरण
| प्रवृत्ति | अर्थ | समझने के लिए उदाहरण (विश्लेषण) |
|---|---|---|
| प्रासंगिकता (Relevance) | प्रशासन समाज की ज्वलंत समस्याओं से जुड़े | ज़िला प्रशासन का फ़ोकस काग़ज़ी रिपोर्ट के बजाय सूखा-राहत या स्कूल से बाहर बच्चों जैसे असली मुद्दों पर |
| मूल्य (Values/Ethics) | मूल्य-तटस्थता अस्वीकार; ईमानदारी और उत्तरदायित्व | अधिकारी केवल आदेश पालक नहीं, परिणाम के नैतिक असर के लिए भी ज़िम्मेदार |
| सामाजिक समता (Social Equity) | वंचितों के लिए सक्रिय, न्यायसंगत व्यवहार | छात्रवृत्ति-शिविर पहले उन छात्रावासों में जहाँ आवेदन सबसे कम आए |
| परिवर्तन (Change) | वृद्धि नहीं, परिवर्तन का प्रबंधन प्रभावशीलता का पैमाना | नई योजना के बाद ज़मीनी हालात बदले या नहीं, इसका आकलन |
| नागरिक-अभिमुखता (Client orientation) | भागीदारी और जनता की आवाज़ | ग्राम सभा या जन-सुनवाई में लाभार्थियों की राय |
पहले दो स्तंभ INFLIBNET (UGC ई-पीजी पाठशाला) की सामग्री पर आधारित; तीसरा स्तंभ विश्लेषण है, स्रोत-आधारित तथ्य नहीं।
एक अधिकारी की रोज़ की भाषा में NPA: पाँच जाँच-प्रश्न
विश्लेषण: सिद्धांत तभी याद रहता है जब वह दफ़्तर की रोज़मर्रा की भाषा में उतर जाए। मान लीजिए आप किसी ब्लॉक के विकास अधिकारी हैं और एक नई योजना लागू करनी है। NPA की दृष्टि से आप पाँच प्रश्न पूछेंगे। पहला, प्रासंगिकता का प्रश्न: क्या यह योजना इस इलाक़े की सबसे बड़ी समस्या से जुड़ी है, या केवल ऊपर से आए लक्ष्य पूरे करने के लिए है? दूसरा, मूल्य का प्रश्न: क्या इसे लागू करने का मेरा तरीक़ा ईमानदार और जवाबदेह है, और क्या मैं हर निर्णय का नैतिक असर समझता हूँ?
तीसरा, समता का प्रश्न: योजना का लाभ किन तक पहुँच रहा है और कौन छूट रहे हैं? अगर छूटने वाले वही हैं जो पहले से हाशिये पर थे, तो औसत आँकड़े भले अच्छे दिखें, काम अधूरा है। चौथा, परिवर्तन का प्रश्न: साल भर बाद गाँव की हालत में क्या बदलेगा, और क्या मैं उसे मापूँगा? पाँचवाँ, भागीदारी का प्रश्न: क्या मैंने लाभार्थियों की बात सुनी, जैसे ग्राम सभा की बैठक में? इन पाँच प्रश्नों को उत्तर में ‘अधिकारी के लिए सीख’ के रूप में एक पंक्ति में लिखने से उत्तर सिद्धांत से व्यवहार तक पहुँच जाता है।
एक बात और। NPA का अर्थ यह नहीं कि अधिकारी क़ानून या नियमों से ऊपर होकर मनमानी करे। उसका आग्रह यह है कि नियमों के भीतर रहकर भी अधिकारी यह देखे कि नियमों का परिणाम न्यायपूर्ण है या नहीं। इसी कारण ‘सक्रिय’ और ‘मनमाना’ के बीच की रेखा उत्तर में साफ़ लिखनी चाहिए।
सामाजिक समता क्या है, और फ़्रेडरिक्सन का योगदान
समता (equity) और समानता (equality) एक नहीं हैं। मान लीजिए छात्रवृत्ति के लिए हर छात्र को एक-सी राशि दे दी जाए: यह समानता है। पर जिस छात्र के घर से स्कूल 20 किलोमीटर दूर है, उसे आने-जाने का अतिरिक्त ख़र्च भी है; उसे ज़्यादा सहायता देना समता है। विश्लेषण: NPA में सामाजिक समता का यही मर्म है कि बराबर के साथ बराबर और असमान के साथ ज़रूरत के अनुसार व्यवहार हो।
फ़्रेडरिक्सन की भूमिका के बारे में NCSU-होस्टेड Guy आदि के लेख का कहना है कि 1968 का मिनोब्रुक सम्मेलन सामाजिक समता की अवधारणा को लोकप्रिय करने का 'watershed' था और फ़्रेडरिक्सन (1971) के आग्रहों ने सामाजिक समता को लोक प्रशासन के सिद्धांत-कोश में जोड़ा, यानी दक्षता जैसे पारंपरिक मूल्यों के साथ इसे भी एक मूल्य माना जाने लगा। उसी लेख में दार्शनिक आधार के रूप में जॉन रॉल्स (John Rawls) की 'A Theory of Justice' (1971) का नाम है, जिस पर सामाजिक समता पर लिखने वाले लगभग सभी विद्वान टिके हैं।
ध्यान रखें: स्रोतों में पारंपरिक मूल्यों के नाम थोड़े अलग मिलते हैं (दक्षता के साथ मितव्ययिता या प्रभावशीलता)। उत्तर में सुरक्षित वाक्य यह है: 'फ़्रेडरिक्सन ने सामाजिक समता को दक्षता जैसे पारंपरिक मूल्यों के बराबर का स्थान दिलाया।'
पारंपरिक लोक प्रशासन बनाम नवीन लोक प्रशासन (विश्लेषण)
पारंपरिक/शास्त्रीय दृष्टि
मुख्य प्रश्नकाम कितनी कुशलता और कम लागत से हुआ?
मूल्यों के प्रति रवैयामूल्य-तटस्थता, नियमों का पालन
प्रशासक की भूमिकानिष्पक्ष क्रियान्वयनकर्ता
सफलता का पैमानावृद्धि, लागत, गति
जनता से रिश्तासेवा का निष्क्रिय ग्राहक
NPA की दृष्टि
मुख्य प्रश्नकाम किसके लिए हुआ और उससे किसका भला हुआ?
मूल्यों के प्रति रवैयामूल्य-सचेत, नैतिकता और उत्तरदायित्व पर ज़ोर
प्रशासक की भूमिकासमता का सक्रिय उपकरण
सफलता का पैमानापरिवर्तन और वंचितों तक पहुँच
जनता से रिश्ताभागीदार और आवाज़ वाला नागरिक
यह तुलना INFLIBNET की सामग्री के आधार पर बनी हमारी विश्लेषणात्मक तालिका है। परीक्षा-उत्तर में 'विश्लेषण' शब्द लिखने की ज़रूरत नहीं, पर ‘पारंपरिक’ का मतलब केवल यही सरलीकरण है।
समय-रेखा: मिनोब्रुक से आज तक
1968
पहला मिनोब्रुक: वाल्डो द्वारा आयोजित, 35 से कम आयु के विद्वान
1971
मारिनी (सं.) की पुस्तक 'Toward a New Public Administration'; रॉल्स की 'A Theory of Justice'; फ़्रेडरिक्सन के आग्रह
1988
दूसरा मिनोब्रुक सम्मेलन
2008
तीसरा मिनोब्रुक सम्मेलन (रोज़मेरी ओ'लिअरी द्वारा आयोजित); 2018 में पहले सम्मेलन की 50वीं वर्षगाँठ
भारत के लिए प्रासंगिकता
भारतीय संविधान स्वयं NPA की भाषा बोलता है। प्रस्तावना सभी नागरिकों के लिए 'न्याय: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक' और 'स्थिति और अवसर की समता' सुनिश्चित करने की बात करती है। अनुच्छेद 38(2) राज्य को आय की असमानताएँ घटाने और स्थिति, सुविधाओं तथा अवसरों की असमानताएँ मिटाने का प्रयास करने को कहता है; अनुच्छेद 15(4) पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान की छूट देता है; अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता समाप्त करता है; और अनुच्छेद 46 राज्य को कमज़ोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति तथा सामाजिक अन्याय से उनकी रक्षा का निर्देश देता है। अनुच्छेद 21A छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करता है, और 2009 के अधिनियम (RTE) से यह ज़मीन पर उतरा।
इसलिए भारतीय प्रशासक के लिए NPA कोई विदेशी विचार नहीं, संविधान का प्रशासनिक पाठ है। विश्लेषण: अनुच्छेद 15(4) का आरक्षण-आधारित सकारात्मक विभेद NPA के ‘समता का उपकरण’ विचार से मेल खाता है; पर NPA भारत की किसी नीति का स्रोत नहीं था, दोनों की बनावट अलग है। इसलिए ‘भारत की नीति NPA से निकली’ लिखना ग़लत होगा; ‘NPA की भावना भारतीय संविधान की भावना से मेल खाती है’ सही रहेगा।
आज की चुनौती भी वही है जो मिनोब्रुक ने उठाई थी: नीति बन जाती है, पर सबसे वंचित तक पहुँचने के लिए दस्तावेज़, दूरी और जानकारी की बाधाएँ पार करनी पड़ती हैं। NPA के हिसाब से अधिकारी की सफलता केवल योजना के लक्ष्य पूरे करने में नहीं, उन बाधाओं को घटाने में भी है।
NPA के मूल्य बनाम भारतीय संवैधानिक प्रावधान
संविधान का संबंधित प्रावधान
सामाजिक समताप्रस्तावना; अनुच्छेद 38(2)
वंचितों के लिए सक्रिय कदमअनुच्छेद 15(4), 46
सामाजिक भेदभाव का अंतअनुच्छेद 17
अवसर की समता (शिक्षा)अनुच्छेद 21A; RTE अधिनियम, 2009
भागीदारी/नागरिक-अभिमुखताअनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतें स्वशासन की इकाइयाँ)
प्रशासनिक अर्थ (विश्लेषण)
सामाजिक समतायोजना की सफलता वंचित समूह तक पहुँच से नापें
वंचितों के लिए सक्रिय कदमलक्षित योजनाएँ, विशेष शिविर
सामाजिक भेदभाव का अंतक़ानून का सख़्त और संवेदनशील क्रियान्वयन
अवसर की समता (शिक्षा)सब बच्चे पढ़ाई तक पहुँचें, यह सुनिश्चित करना
भागीदारी/नागरिक-अभिमुखतास्थानीय निकायों के ज़रिये जनता की आवाज़
अनुच्छेदों का पाठ संविधान (विधायी विभाग) से मिलाया गया; RTE की आयु-सीमा PIB के अनुसार 6 से 14 वर्ष। तीसरा स्तंभ विश्लेषण है।
एक नज़र में: नवीन लोक प्रशासन
नवीन लोक प्रशासन (NPA)
जन्म
- मिनोब्रुक 1968
- आयोजक: वाल्डो
- 35 से कम आयु के विद्वान
- मारिनी (सं.) 1971
प्रमुख नाम
- ड्वाइट वाल्डो
- एच. जॉर्ज फ़्रेडरिक्सन
- फ़्रैंक मारिनी (संपादक)
पाँच प्रवृत्तियाँ
- प्रासंगिकता
- मूल्य/नैतिकता
- सामाजिक समता
- परिवर्तन
- नागरिक-अभिमुखता
आलोचना
- सिद्धांत-विरोधी
- प्रत्यक्षवाद-विरोधी
- प्रबंधन-विरोधी
- मापन कठिन (विश्लेषण)
भारत
- प्रस्तावना: न्याय, समता
- अनुच्छेद 38(2), 15(4), 46
- अनुच्छेद 21A, RTE
आलोचना और सीमाएँ
INFLIBNET की सामग्री के अनुसार NPA पर आरोप लगे कि वह सिद्धांत-विरोधी (anti-theoretic), प्रत्यक्षवाद-विरोधी (anti-positivist) और प्रबंधन-विरोधी (anti-management) है। यानी आलोचकों को लगा कि वह नियम-आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण और प्रबंधन-तकनीकों को ठुकरा देता है, और बदले में स्पष्ट कार्यप्रणाली नहीं देता।
विश्लेषण (स्रोत-आधारित तथ्य नहीं): पहली सीमा, ‘समता’ को नापना कठिन है; कौन-सा समूह कितनी प्राथमिकता पाए, यह राजनीतिक विवाद का विषय बन सकता है। दूसरी, प्रशासक को ‘सक्रिय’ बनने को कहने से निर्वाचित नेतृत्व और अफ़सर के बीच रेखा धुँधली हो सकती है। तीसरी, बजट की सीमा में समता और दक्षता में कभी-कभी टकराव होता है। चौथी, मिनोब्रुक के प्रतिभागी एक ख़ास देश और काल के थे; भारत जैसे विविध देश में उसी रूप में लागू करना ज़रूरी नहीं।
संतुलित निष्कर्ष: NPA ने कुशलता को ख़ारिज नहीं किया, उसके साथ समता को बराबर का मूल्य बनाया। इसी वजह से बाद की धाराएँ, चाहे NPM हो या नवीन लोक सेवा, अपनी बात NPA से तुलना करके कहती हैं।
NPA, NPM और नवीन लोक सेवा: तीन पड़ाव कैसे जुड़ते हैं
विश्लेषण: परीक्षा में अक्सर तीन धाराओं को आमने-सामने रखने को कहा जाता है, इसलिए रिश्ता समझ लेना चाहिए। NPA की चिंता है ‘किसके लिए?’, यानी समता और मूल्य। NPM की चिंता है ‘कितने कारगर ढंग से?’, यानी बाज़ार-शैली के प्रबंधन से परिणाम और लागत (इसके अलग पृष्ठ पर देखें)। नवीन लोक सेवा (New Public Service) का ज़ोर है ‘किस रिश्ते में?’, यानी सरकार और नागरिक के बीच ग्राहक-दुकानदार नहीं, साझा लोकतांत्रिक रिश्ता, जिसे रॉबर्ट और जेनेट डेनहार्ट ने 2000 में प्रस्तावित किया (इसके लिए अलग पृष्ठ है)।
इन्हें एक पंक्ति में याद रखना हो तो: NPA मूल्य और समता, NPM परिणाम और बाज़ार-औज़ार, नवीन लोक सेवा नागरिकता और संवाद। ध्यान रहे, ये एक-दूसरे को पूरी तरह मिटाती नहीं; बाद की धाराएँ पहले की कुछ बातें लेकर आगे बढ़ती हैं। उत्तर में तुलना की तालिका बनाते समय यही संतुलन दिखाइए।
मुख्य तथ्य
- पहला मिनोब्रुक सम्मेलन
- 1968, आयोजक ड्वाइट वाल्डो; सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय का एडिरोंडैक सम्मेलन-केंद्र
- भागीदारों की आयु
- 35 वर्ष से कम (1968)
- सम्मेलन-ग्रंथ
- फ़्रैंक मारिनी (सं.), Toward a New Public Administration: The Minnowbrook Perspective, 1971
- दूसरा मिनोब्रुक
- 1988
- तीसरा मिनोब्रुक
- 2008 (मिनोब्रुक II: 1988, फ़्रेडरिक्सन द्वारा आयोजित)
- सामाजिक समता का दार्शनिक आधार
- जॉन रॉल्स, A Theory of Justice (1971)
- NPA की पाँच प्रवृत्तियाँ
- प्रासंगिकता, मूल्य, सामाजिक समता, परिवर्तन, नागरिक-अभिमुखता
- संवैधानिक संदर्भ
- प्रस्तावना; अनुच्छेद 15(4), 17, 21A, 38(2), 46
- अंतिम जाँच
- 1 अक्टूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- NPA को NPM के साथ गड्ड-मड्ड कर देना: NPA (1968, समता और मूल्य) और NPM (बाज़ार-शैली प्रबंधन) अलग विचार हैं।
- मिनोब्रुक को 1971 का सम्मेलन लिखना: सम्मेलन 1968 में हुआ; 1971 उसकी चर्चाओं की पुस्तक का वर्ष है।
- मारिनी की पुस्तक (1971) और 'Public Administration in a Time of Turbulence' (1971) को एक समझ लेना: पहली मिनोब्रुक I की चर्चाओं का संकलन है।
- वाल्डो की जगह फ़्रेडरिक्सन को एकमात्र आयोजक बता देना: आयोजक वाल्डो थे, फ़्रेडरिक्सन उनके सहयोगी और NPA के प्रमुख सिद्धांतकार।
- समता को समानता लिख देना: समता का अर्थ ज़रूरत के अनुसार भिन्न व्यवहार है।
- NPA को कुशलता-विरोधी बताना: वह कुशलता के साथ समता को बराबर का मूल्य बनाता है।
- ‘भारत की नीतियाँ NPA से निकलीं’ लिख देना: NPA अमेरिकी बहस से निकला; भारत के संविधान की भावना उससे मेल खाती है।
- आलोचना लिखना भूल जाना: 10 अंक के उत्तर में कम से कम दो आलोचनाएँ जोड़ें।
केस स्टडी: मिनोब्रुक, एक सम्मेलन जिसने क्षेत्र की भाषा बदली
केस स्टडी1968 की बहस से 1988 के पुनर्मूल्यांकन तक
1960 के दशक के अंत में समाज में उथल-पुथल थी और युवा विद्वानों को लगा कि लोक प्रशासन की पढ़ाई और व्यवहार उन सवालों से कटे हैं जो समाज पूछ रहा है। वाल्डो ने उन्हें एक मंच दिया।
- 1968: मंच
- Maxwell School की सामग्री के अनुसार वाल्डो ने सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय के एडिरोंडैक सम्मेलन-केंद्र में 35 वर्ष से कम आयु के विद्वानों और व्यवहारकर्ताओं को बुलाया। उद्देश्य था सामाजिक उथल-पुथल के संदर्भ में क्षेत्र की नई दिशाएँ तय करना।
- माँग: सक्रिय, समता-प्रधान प्रशासन
- प्रतिभागियों ने एक नए, सक्रिय लोक प्रशासन की माँग की, जो सामाजिक समता और उन लोगों को प्राथमिकता दे जिनकी वह सेवा करता है (Maxwell School के लेख का सार)।
- 1971: दस्तावेज़
- फ़्रैंक मारिनी के संपादन में 'Toward a New Public Administration: The Minnowbrook Perspective' छपी और आंदोलन को पहचान मिली।
- 1988: समीक्षा
- 1988 में दूसरा मिनोब्रुक सम्मेलन हुआ, यानी मूल बहस दो दशक बाद फिर परखी गई।
- विरासत
- फ़्रेडरिक्सन के अनुसार सामाजिक समता, लोकतांत्रिक प्रशासन और संवेदनशील लोक सेवा जैसी मिनोब्रुक की थीम आज लोक प्रशासन की मानक सामग्री हैं।
सीख
NPA का मूल योगदान कोई नया ढाँचा नहीं, नया प्रश्न था: ‘किसके लिए?’ उत्तर में यह बताइए कि NPA ने प्रशासन के मूल्यों में समता को जोड़ा, और उदाहरण में मिनोब्रुक 1968 को तारीख़ सहित लिखिए।
केस स्टडी (काल्पनिक): छात्रवृत्ति-वितरण को NPA की नज़र से देखना
उदाहरण (काल्पनिक)‘औसत’ सफलता और छूट गए छात्र
यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; विभाग, ज़िला और आँकड़े वास्तविक नहीं हैं। एक ज़िले का समाज-कल्याण कार्यालय छात्रवृत्तियों का समय पर वितरण कर रहा है।
- पुरानी कसौटी
- 95 प्रतिशत आवेदन 30 दिन में निपटे, लागत घटी: कार्यकुशलता के हिसाब से व्यवस्था सफल।
- NPA का सवाल
- शेष 5 प्रतिशत कौन हैं? पड़ताल में निकला कि वे दूर के छात्रावासों के वे छात्र हैं जिनके पास बैंक-खाता या दस्तावेज़ ही नहीं थे: यानी जिन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।
- समता-आधारित कदम
- अधिकारी दस्तावेज़-शिविर पहले उन्हीं छात्रावासों में लगवाता है, और अगली बार सफलता की गिनती इस बात से करता है कि वंचित समूह में कितनों तक लाभ पहुँचा।
सीख
NPA में सफलता का पैमाना ‘कितनी तेज़ी से’ से बढ़कर ‘किसे मिला’ हो जाता है।
अभ्यास प्रश्न (हमारे अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
नवीन लोक प्रशासन की शुरुआत किस सम्मेलन से मानी जाती है?
आदर्श उत्तर
1968 के मिनोब्रुक सम्मेलन से, जिसे ड्वाइट वाल्डो ने सिरैक्यूज़ में युवा विद्वानों के लिए आयोजित किया।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
नवीन लोक प्रशासन में ‘सामाजिक समता’ से क्या अभिप्राय है? उदाहरण सहित बताइए।
आदर्श उत्तर
सामाजिक समता का अर्थ है कि प्रशासन सबके साथ एक-सा नहीं, ज़रूरत के अनुसार न्यायसंगत व्यवहार करे। फ़्रेडरिक्सन ने इसे दक्षता जैसे पारंपरिक मूल्यों के बराबर रखा। जैसे दूर के छात्रावास के वंचित छात्रों के लिए पहले दस्तावेज़-शिविर लगाना। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 38(2) की भावना से मेल खाता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
नवीन लोक प्रशासन की किन्हीं तीन विशेषताओं और दो आलोचनाओं का उल्लेख कीजिए।
आदर्श उत्तर
विशेषताएँ: प्रासंगिकता, मूल्य व नैतिकता तथा सामाजिक समता, जिनके साथ परिवर्तन और नागरिक-अभिमुखता पर भी ज़ोर है। आलोचनाएँ: इसे सिद्धांत-विरोधी और प्रबंधन-विरोधी कहा गया, और समता को नापना कठिन है। फिर भी इसने कुशलता के साथ समता को बराबर का मूल्य बनाया। इस प्रकार यह आंदोलन प्रशासन को समाज के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने का प्रयास था।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
नवीन लोक प्रशासन की उत्पत्ति, मुख्य मूल्यों और भारतीय संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।
आदर्श उत्तर
नवीन लोक प्रशासन 1968 के मिनोब्रुक सम्मेलन से निकला, जिसे ड्वाइट वाल्डो ने सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय में 35 से कम आयु के विद्वानों के लिए आयोजित किया।
इसके मुख्य मूल्य प्रासंगिकता, नैतिकता, सामाजिक समता, परिवर्तन और नागरिक-अभिमुखता हैं। फ़्रेडरिक्सन ने सामाजिक समता को दक्षता जैसे मूल्यों के साथ स्थापित किया।
भारत में संविधान की प्रस्तावना सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय तथा अवसर की समता की बात करती है। अनुच्छेद 38(2), 15(4) और 46 वंचितों के पक्ष में सक्रिय राज्य की कल्पना करते हैं, और अनुच्छेद 21A शिक्षा का अवसर देता है। आलोचना यह है कि समता को नापना कठिन है। फिर भी भारतीय अधिकारी के लिए यह दृष्टि प्रासंगिक है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न: "नवीन लोक प्रशासन की उत्पत्ति, मुख्य विशेषताएँ और भारत में उसकी प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।" शुरुआत में एक वाक्य में परिभाषा: NPA मिनोब्रुक 1968 से निकला वह आंदोलन है जिसने प्रशासन में समता और मूल्य को केंद्र में रखा।
मुख्य भाग
- उत्पत्ति: 1968, वाल्डो, 35 से कम आयु के विद्वान, मारिनी (सं.) 1971
- पाँच प्रवृत्तियाँ: प्रासंगिकता, मूल्य, सामाजिक समता, परिवर्तन, नागरिक-अभिमुखता
- फ़्रेडरिक्सन: समता को दक्षता के साथ मूल्य के रूप में जोड़ा
- भारत: प्रस्तावना, अनुच्छेद 38(2), 15(4), 46, 21A
- एक या दो आलोचनाएँ: समता मापना कठिन, सिद्धांत-विरोधी होने का आरोप
निष्कर्ष
निष्कर्ष: NPA ने ‘कितना कुशल?’ के साथ ‘किसके लिए?’ का प्रश्न जोड़ा; संविधान की समता की भावना वाले भारत में यह प्रश्न विशेष रूप से प्रासंगिक है।
अतिरिक्त मूल्य
- ग्राम/ज़िला स्तर का एक छोटा उदाहरण (जैसे दस्तावेज़-शिविर वंचित बस्तियों में पहले)
- NPM और नवीन लोक सेवा से एक पंक्ति की तुलना
- मिनोब्रुक II (1988) का उल्लेख
त्वरित पुनरावृत्ति
- NPA = मिनोब्रुक 1968 से निकला आंदोलन; केंद्र में सामाजिक समता, मूल्य, प्रासंगिकता
- आयोजक: ड्वाइट वाल्डो (सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय, Maxwell School); भागीदार 35 से कम आयु के
- फ़्रैंक मारिनी (सं.), Toward a New Public Administration: The Minnowbrook Perspective, 1971
- एच. जॉर्ज फ़्रेडरिक्सन: प्रमुख सिद्धांतकार; सामाजिक समता को मूल्य-ढाँचे में जोड़ा
- पाँच प्रवृत्तियाँ: प्रासंगिकता, मूल्य, समता, परिवर्तन, नागरिक-अभिमुखता
- समता ≠ समानता; ज़रूरत के अनुसार भिन्न व्यवहार
- रॉल्स, A Theory of Justice (1971): दार्शनिक आधार
- आलोचना: सिद्धांत-विरोधी, प्रत्यक्षवाद-विरोधी, प्रबंधन-विरोधी; समता मापना कठिन
- भारत: प्रस्तावना; अनुच्छेद 38(2), 15(4), 17, 21A, 46
- NPM/नवीन लोक सेवा से तुलना: NPA की धुरी समता और मूल्य
याद रखने योग्य शब्द
- Minnowbrook 1968
- Dwight Waldo
- H. George Frederickson
- social equity
- relevance
- Marini 1971
- Rawls
- अनुच्छेद 38(2)