सिविल सेवा में तटस्थता, अनामता और आचरण संहिता
अंपायर और रेस्तराँ की मिसाल से तटस्थता, निष्पक्षता और अनामता समझिए, फिर AIS (आचरण) नियम, 1968 और राजस्थान (आचरण) नियम, 1971 की सही नियम-संख्याओं के साथ उत्तर लिखिए।
- तटस्थता
- अनामता
- आचरण नियम
- 6 PYQ हल
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II, लोक प्रशासन: "Personnel administration: recruitment, training, promotion, neutrality and anonymity in civil services, code of conduct." यह पन्ना अंतिम तीन पदों (तटस्थता, अनामता, आचरण संहिता) को पूरा कवर करता है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2013-2024 के पेपरों में देखा गया: इस विषय से जुड़े 6 प्रश्न, सभी 2013, 2016 और 2018 के पेपर III में (2 अंक के तीन, 5 अंक के दो, 10 अंक का एक)। प्रश्न सीधे "सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, सिविल सेवा के मूल्य" पूछते हैं, इसलिए परिभाषा और तत्त्वों की सूची तैयार रखें।
- 2018 के पेपर II (नैतिकता) में "राजनीतिक तटस्थता से बेहतर प्रशासन" पर 5 अंक का प्रश्न भी आया था। यानी यही विचार दो पेपरों में दो रूपों में पूछा जा सकता है: एक बार संस्थागत ढाँचे के रूप में, एक बार मूल्य के रूप में।
- सिलेबस में 'आचरण संहिता' का नाम है। अच्छा उत्तर वही है जिसमें अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 और राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 का एक-एक सही नियम-संख्या वाला उदाहरण हो।
सबसे पहले सरल भाषा में
क्रिकेट मैच की कल्पना कीजिए। टीमें बदलती रहती हैं, कप्तान बदलते रहते हैं, पर अंपायर वही नियम-पुस्तिका लेकर खड़ा रहता है। वह न किसी टीम का समर्थक होता है, न उसका नाम स्कोरबोर्ड पर चमकता है। जीत का श्रेय और हार का इल्ज़ाम कप्तान के हिस्से जाता है। सिविल सेवा से लोकतंत्र की यही अपेक्षा है: सरकार कोई भी बने, अधिकारी नियम-क़ानून के हिसाब से काम करे (तटस्थता), हर नागरिक के साथ बराबर बर्ताव करे (निष्पक्षता), और सार्वजनिक मंच पर नीति का चेहरा मंत्री रहे, अधिकारी नहीं (अनामता)।
अब एक और तसवीर देखिए। रेस्तराँ में खाना ख़राब निकले तो ग्राहक मैनेजर से शिकायत करता है, रसोइये से नहीं। मैनेजर जवाबदेह है, रसोइया पर्दे के पीछे है। सरकार में मंत्री वही मैनेजर है, जो विधायिका के सामने उत्तरदायी है। भारत के संविधान में भी यही सूत्र है: मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है (अनुच्छेद 75(3)) और राज्य में विधानसभा के प्रति (अनुच्छेद 164(2))। अधिकारी का काम है फ़ाइल पर खरी सलाह देना और जो नीति तय हो उसे ईमानदारी से लागू करना।
परीक्षा के लिए सटीक परिभाषाएँ
तटस्थता (Neutrality) का अर्थ है कि सिविल सेवक अपनी निजी राजनीतिक मान्यताओं को काम से अलग रखे और वैध रूप से चुनी गई हर सरकार की नीतियाँ समान निष्ठा से लागू करे। इसमें दलीय राजनीति से दूरी भी शामिल है। भारत में यह अब नियमों की भाषा में दर्ज है: अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 3(1A) में "राजनीतिक तटस्थता" (political neutrality) को अधिकारी का अपेक्षित मूल्य बताया गया है।
निष्पक्षता (Impartiality) का अर्थ है किसी मामले में निर्णय केवल गुण-दोष (merits) के आधार पर लेना, बिना पक्षपात या भेदभाव के। ब्रिटेन की सिविल सेवा संहिता इसे इस तरह रखती है कि अधिकारी मामले के गुण-दोष के अनुसार ही चले और अलग-अलग राजनीतिक विचार की सरकारों की समान रूप से अच्छी सेवा करे।
अनामता (Anonymity) का अर्थ है कि अधिकारी की दी हुई सलाह और उसके किए काम का सार्वजनिक श्रेय या दोष मंत्री का होता है; अधिकारी नाम लेकर सार्वजनिक बहस में नहीं उलझता। यह वेस्टमिंस्टर परंपरा से आया सिद्धांत है, संविधान में सीधे लिखा शब्द नहीं। संवैधानिक आधार सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(3), 164(2)) है। यह निष्कर्ष हमारा विश्लेषण है; परीक्षा में इसे "परंपरा" कहकर लिखें, "अनुच्छेद" कहकर नहीं।
तटस्थता, निष्पक्षता, अनामता: अंतर एक नज़र में
| पहलू | तटस्थता | निष्पक्षता | अनामता |
|---|---|---|---|
| किससे संबंध | सत्ताधारी दल/सरकार से | नागरिकों और पक्षकारों से | जनता और मीडिया के सामने भूमिका से |
| मुख्य प्रश्न | क्या अधिकारी किसी दल का पक्षधर है? | क्या निर्णय गुण-दोष पर है? | क्या अधिकारी नाम से सार्वजनिक बहस में है? |
| उदाहरण | सरकार बदलने पर भी योजना वही निष्ठा से लागू | ज़मीन के दो दावेदारों की सुनवाई बराबर | नीति पर प्रेस-वार्ता मंत्री करता है, सचिव नहीं |
| नियम में आधार | अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968: नियम 3(1A), नियम 5 | नियम 3(1A) में निष्पक्षता का उल्लेख | नियम 7 (सरकार की आलोचना पर रोक), नियम 6 (प्रेस-रेडियो) |
| बिगड़ने पर | 'प्रतिबद्ध नौकरशाही', दलगत झुकाव | भाई-भतीजावाद, पक्षपात | अधिकारी सुर्ख़ियों में, मंत्री बचाव में |
नियम-संख्याएँ अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के मूल पाठ से हैं।
उत्पत्ति: वेस्टमिंस्टर मॉडल और नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट (1854)
आधुनिक स्थायी, गुणाधारित सिविल सेवा की जड़ ब्रिटेन की नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट में मिलती है। यह रिपोर्ट फ़रवरी 1854 में प्रकाशित हुई। इसे सर स्टैफ़र्ड नॉर्थकोट और चार्ल्स ट्रेवेलियन ने तैयार किया था। उसकी मुख्य सिफ़ारिशें थीं: परीक्षा के ज़रिए प्रवेश, खुली प्रतियोगिता, और योग्यता पर पदोन्नति। इसे ब्रिटिश सिविल सेवा का संस्थापक दस्तावेज़ माना जाता है।
ब्रिटेन की संसद की लोक प्रशासन समिति इसी व्यवस्था को "राजनीतिक रूप से निरपेक्ष और स्थायी सिविल सेवा" कहती है, जिसके मूल मूल्य सत्यनिष्ठा, औचित्य, वस्तुनिष्ठता और योग्यता पर नियुक्ति हैं। समिति के अनुसार यही व्यवस्था 150 से अधिक वर्षों से चली आ रही है। सावधानी: रिपोर्ट के नाम पर 'तटस्थता' और 'अनामता' दोनों शब्द थोपना ठीक नहीं। रिपोर्ट ने स्थायित्व और योग्यता का आधार रखा; तटस्थता और अनामता उसी ढाँचे के साथ बाद में परंपरा बनीं। यह हमारी व्याख्या है।
वेस्टमिंस्टर मॉडल का सार: चुनी हुई सरकार नीति तय करती है, स्थायी अधिकारी सलाह देकर उसे लागू करते हैं, और सरकार बदलने पर वही अधिकारी नई सरकार को उतनी ही निष्ठा से सेवा देते हैं। ब्रिटेन की आज की सिविल सेवा संहिता के चार मूल्य सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, वस्तुनिष्ठता और निष्पक्षता हैं, और 2010 के क़ानून (Constitutional Reform and Governance Act) के तहत संहिता में इन्हें रखना वैधानिक है। यह संहिता अधिकारी के रोज़गार-अनुबंध का हिस्सा है। 1995 में नोलन समिति (Committee on Standards in Public Life) ने सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत दिए: निःस्वार्थता, सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता, जवाबदेही, खुलापन, ईमानदारी और नेतृत्व।
समय-रेखा: तटस्थता और आचरण के पड़ाव
फ़रवरी 1854
नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट: परीक्षा से प्रवेश, खुली प्रतियोगिता, योग्यता पर पदोन्नति
22 फ़रवरी 1962
कामेश्वर प्रसाद बनाम बिहार राज्य: सरकारी कर्मचारी के मौलिक अधिकार बने रहते हैं
1968
अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968; अधिसूचना 18 दिसंबर 1968, राजपत्र में 4 जनवरी 1969
1971
राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971
1995
नोलन समिति के सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत (ब्रिटेन)
जनवरी 2007
द्वितीय ARC की चौथी रिपोर्ट 'Ethics in Governance'
31 अक्टूबर 2013
टी.एस.आर. सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ: सिविल सेवा बोर्ड, न्यूनतम कार्यकाल, लिखित निर्देश
2014
AIS आचरण नियमों में उप-नियम 3(1A) और 3(2B) जुड़े
भारतीय ढाँचा: संविधान, सुरक्षा और सीमा
भारत में सिविल सेवक को दो तरफ़ से रखा गया है। एक तरफ़ सुरक्षा: अनुच्छेद 311 के अनुसार किसी सिविल सेवक को उसकी नियुक्ति करने वाले अधिकारी से निचले अधिकारी द्वारा बर्ख़ास्त या हटाया नहीं जा सकता, और बर्ख़ास्तगी, हटाने या पदावनति से पहले आरोप बताकर जाँच में सुनवाई का मौक़ा देना ज़रूरी है। यह सुरक्षा इसीलिए है कि अधिकारी राजनीतिक नाराज़गी के डर से झुके नहीं। दूसरी तरफ़ सीमा: आचरण नियम, जो अधिकारी की राजनीति, बयानबाज़ी और निजी आचरण को बाँधते हैं।
सीमा कितनी हो सकती है, यह सर्वोच्च न्यायालय ने कामेश्वर प्रसाद बनाम बिहार राज्य (22 फ़रवरी 1962, AIR 1962 SC 1166) में तय किया। बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 के नियम 4-A में सेवा-शर्तों से जुड़े किसी भी प्रदर्शन या हड़ताल में भाग लेने पर रोक थी। न्यायालय ने कहा कि सरकारी कर्मचारी भी अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत वाक्-स्वातंत्र्य और शांतिपूर्ण सम्मेलन के अधिकार रखते हैं, और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पूर्ण रोक अनुचित है, इसलिए नियम रद्द हुआ। मतलब साफ़ है: आचरण नियम 'उचित प्रतिबंध' के भीतर ही रह सकते हैं।
आचरण संहिता: AIS (आचरण) नियम, 1968
अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों पर लागू नियम का पूरा नाम 'अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968' है। इसकी अधिसूचना सं. 8/91/62-AIS(III) दिनांक 18-12-1968 है और यह G.S.R. 3 में 4-1-1969 को प्रकाशित हुई। नियम 1 के अनुसार ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख़ से लागू हुए।
नियम 3(1): हर सदस्य हर समय पूर्ण सत्यनिष्ठा और कर्तव्यनिष्ठा बनाए रखे और ऐसा कुछ न करे जो सेवा-सदस्य को शोभा न दे। नियम 3(1A) (2014 में जोड़ा गया): उच्च नैतिक मानक, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी; राजनीतिक तटस्थता; योग्यता, न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों का संवर्धन; जवाबदेही और पारदर्शिता; जनता, विशेषकर कमज़ोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता; और जनता से शिष्ट व्यवहार। नियम 3(2): अपने नियंत्रण के अधीन कर्मचारियों की सत्यनिष्ठा और कर्तव्यनिष्ठा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव क़दम उठाना। उसी संशोधन से उप-नियम 3(2B) भी आया, जिसमें 13 ज़िम्मेदारियाँ गिनाई गई हैं (संविधान की सर्वोच्चता, जनहित में निर्णय, हितों के टकराव का प्रकटीकरण, योग्यता के आधार पर चयन, गोपनीयता आदि)।
नियम 3(3): अधिकारी अपने सर्वोत्तम विवेक से काम करे, पर वरिष्ठ का निर्देश हो तो उसके अनुसार। वरिष्ठ के निर्देश सामान्यतः लिखित होने चाहिए; मौखिक निर्देश अपरिहार्य हों तो वरिष्ठ उन्हें तुरंत लिखित में पुष्ट करे, और मौखिक निर्देश पाने वाला अधिकारी भी जल्द से जल्द लिखित पुष्टि माँगे। यही नियम आगे सुब्रमण्यम मामले में ज़रूरी बना।
नियम 5 राजनीति और चुनाव से जुड़ा है। नियम 5(1): कोई सदस्य किसी राजनीतिक दल या राजनीति में भाग लेने वाले संगठन का सदस्य या उससे अन्यथा संबद्ध नहीं होगा, और किसी राजनीतिक आंदोलन या गतिविधि में भाग नहीं लेगा, चंदा नहीं देगा, न किसी और ढंग से सहायता करेगा। नियम 5(4): किसी विधायिका या स्थानीय निकाय के चुनाव में प्रचार या हस्तक्षेप नहीं; गोपनीय रूप से मतदान और क़ानूनी ड्यूटी के तहत चुनाव का संचालन अपवाद है।
अन्य नियम: नियम 6 (प्रेस या रेडियो से संबंध), नियम 7 (सरकार की आलोचना), नियम 9 (सूचना का अनधिकृत संप्रेषण), नियम 16 (चल, अचल और बहुमूल्य संपत्ति), नियम 17 (सेवा-सदस्य के कार्यों और चरित्र का प्रतिवाद)। नियम 7 के अनुसार केंद्र या राज्य सरकार की किसी वर्तमान या हाल की नीति/कार्रवाई की प्रतिकूल आलोचना करने वाला तथ्य या मत किसी सार्वजनिक माध्यम से, अपने नाम से या गुमनाम/छद्म नाम से, कहना मना है। यही प्रावधान अनामता को व्यवहार में बाँधता है। नियम 17 के अनुसार किसी सरकारी कार्य पर हुई मानहानिकारक आलोचना के प्रतिवाद के लिए अदालत या प्रेस का सहारा सरकार की पूर्व अनुमति से ही लिया जा सकता है।
राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971
राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 बने हैं। राजस्थान सरकार के गृह विभाग की वेबसाइट पर रखे नियमों के पाठ में बाद के संशोधनों से जुड़े नियम 4-A, 4-B, 4-C, 25-A, 25-AA, 25-C और 25-D भी दिखते हैं। परीक्षा-उपयोगी नियम-संख्याएँ नीचे की तालिका में हैं।
RAS अधिकारी राज्य सेवा का सदस्य है, इसलिए उस पर यही 1971 के नियम लागू होने की अपेक्षा है; नियम 1 के अनुसार ये नियम राज्य की सेवाओं और पदों के सरकारी सेवकों पर लागू होते हैं, पर अखिल भारतीय सेवाओं के वे सदस्य इनसे बाहर हैं जो AIS (आचरण) नियम, 1968 के अधीन हैं। राज्य सेवा के अधिकारी पर 1971 के नियम लागू होने की बात इसी आधार पर लिखें। (विश्लेषण)
तुलना: AIS (आचरण) नियम, 1968 बनाम राजस्थान (आचरण) नियम, 1971
AIS (आचरण) नियम, 1968
सामान्य: सत्यनिष्ठा और कर्तव्यनिष्ठानियम 3
राजनीति और चुनावनियम 5
प्रेस या रेडियो से संबंधनियम 6
सरकार की आलोचनानियम 7
सूचना का अनधिकृत संप्रेषणनियम 9
राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971
सामान्य: सत्यनिष्ठा और कर्तव्यनिष्ठानियम 3: हर समय पूर्ण सत्यनिष्ठा, कर्तव्यनिष्ठा और पद की गरिमा
राजनीति और चुनावनियम 7 (राजनीति और चुनावों में भाग लेना): राजनीतिक दल या राजनीति में भाग लेने वाले संगठन का सदस्य/संबद्ध नहीं
प्रेस या रेडियो से संबंधनियम 10
सरकार की आलोचनानियम 11: रेडियो, अपने नाम/गुमनाम/छद्म नाम के लेख, प्रेस को संदेश या सार्वजनिक भाषण में भी लागू
सूचना का अनधिकृत संप्रेषणनियम 13: सामान्य/विशेष सरकारी आदेश या सद्भावपूर्वक ड्यूटी के अलावा सरकारी दस्तावेज़/सूचना किसी अनधिकृत व्यक्ति को नहीं
राजस्थान के नियम-क्रमांक और शीर्षक राज्य सरकार की वेबसाइट के पाठ और एक विधि-डेटाबेस की सूची, दोनों से मेल खाते हैं (देखा गया 1 अक्टूबर 2026)।
क्षरण और चुनौतियाँ
प्रतिबद्ध नौकरशाही: 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के दौर में "प्रतिबद्ध नौकरशाही" की बात चली। सरकार का स्पष्टीकरण था कि नौकरशाही को सत्ताधारी सरकार के उद्देश्यों को पाने और उसकी नीतियों को लागू करने के लिए समर्पित होना चाहिए। यहीं टकराव है: संविधान और नीति के प्रति प्रतिबद्धता ठीक है, पर किसी दल या नेता के प्रति प्रतिबद्धता तटस्थता को खा जाती है। (स्रोत: न्यूज़लॉन्ड्री का 2023 का विश्लेषण)
तबादले और मौखिक आदेश: सुब्रमण्यम मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने नोट किया कि अधिकारियों को अक्सर ऐसे मौखिक निर्देश मिलते हैं जो दर्ज नहीं होते, और तबादले-पदस्थापनाएँ कार्यपालिका के मुखिया की मर्ज़ी और राजनीतिक विचारों से बार-बार होती हैं। बार-बार तबादले का डर अधिकारी की खरी सलाह देने की हिम्मत घटाता है।
राजनीतिक कार्यक्रमों में अधिकारी: 2023 में केंद्र सरकार की विकसित भारत संकल्प यात्रा के लिए सरकारी अधिकारियों को 'रथ प्रभारी' बनाने के निर्देश पर विवाद हुआ। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया कि चुनाव वाले पाँच राज्यों में, जहाँ आदर्श आचार संहिता लागू थी, 5 दिसंबर 2023 तक यह यात्रा न हो, और सरकार ने नाम से 'रथ' शब्द हटाने की घोषणा की। (स्रोत: न्यूज़लॉन्ड्री, 31 अक्टूबर 2023; आउटलुक, 26 अक्टूबर 2023)। यहाँ सरकारी योजना का प्रचार और राजनीतिक प्रचार की रेखा धुँधली होती है।
मीडिया, RTI और सोशल मीडिया (विश्लेषण): RTI के बाद फ़ाइल-नोटिंग का पारदर्शी होना अनामता के पुराने रूप को बदलता है, क्योंकि अधिकारी की लिखित राय अब माँगी जा सकती है। चौबीस घंटे का मीडिया और सोशल मीडिया अधिकारी को सार्वजनिक चर्चा में खींचते हैं; ब्रिटेन की संसदीय समिति भी लिखती है कि 24x7 मीडिया की जाँच-पड़ताल और सूचना-स्वातंत्र्य की माँगें इस व्यवस्था पर दबाव डाल रही हैं। भारत में AIS नियम 7 की भाषा 'किसी भी सार्वजनिक माध्यम' तक जाती है, इसलिए ऑनलाइन पोस्ट भी उसके दायरे में आ सकती है; कोई विशिष्ट पोस्ट इसके अंतर्गत आती है या नहीं, यह सक्षम प्राधिकारी तय करता है।
दुरुपयोग का दूसरा सिरा: नियम 3(2) के अनुसार अधिकारी अपने अधीनस्थों की सत्यनिष्ठा का भी ज़िम्मेदार है। साथ ही अपनी ग़लती छिपाने के लिए 'अनामता' की आड़ लेना भी ग़लत है, क्योंकि अनामता जवाबदेही का विकल्प नहीं है: अधिकारी विभागीय जाँच, न्यायालय और लोकपाल/लोकायुक्त जैसी संस्थाओं के प्रति जवाबदेह रहता है।
एक नज़र में: तटस्थता और अनामता पर दबाव
तटस्थता + अनामता
ढाँचा
- अनुच्छेद 311 की सुरक्षा
- अनुच्छेद 75(3)/164(2) सामूहिक उत्तरदायित्व
- AIS नियम 3(1A), 5, 7
दबाव के स्रोत
- प्रतिबद्ध नौकरशाही
- बार-बार तबादले
- मौखिक आदेश
- राजनीतिक कार्यक्रमों में तैनाती
नई चुनौतियाँ (विश्लेषण)
- 24x7 मीडिया
- RTI से खुली नोटिंग
- सोशल मीडिया पर अधिकारी
उपाय
- सिविल सेवा बोर्ड
- न्यूनतम कार्यकाल
- लिखित निर्देश (नियम 3(3))
- आचरण नियमों का पालन
प्रशासन में सत्यनिष्ठा बढ़ाने के उपाय (2018 के प्रश्न की तैयारी)
भारत में सत्यनिष्ठा बढ़ाने के उपाय तीन स्तर पर देखे जा सकते हैं। नियम और आचरण: AIS नियम 3(1) और 3(1A), संपत्ति-संबंधी नियम 16, और सेवा-नियमों में अनुशासनात्मक कार्रवाई। क़ानून और संस्थाएँ: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, जिसे 2018 में संशोधित कर रिश्वत देने को भी सीधा अपराध बनाया गया (राज्यसभा से 19 जुलाई 2018 और लोकसभा से 24 जुलाई 2018 को पारित, PRS के अनुसार), लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013, केंद्रीय सतर्कता आयोग। पारदर्शिता: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, ई-गवर्नेंस और नागरिक अधिकार-पत्र।
ध्यान रखें कि 2018 का यह प्रश्न इस विषय के लिए 'सीमारेखा' का है; इसलिए पूरा उत्तर सत्यनिष्ठा पर केंद्रित रखें और शब्द-सीमा में उपाय गिनाएँ।
मुख्य तथ्य
- नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट
- फ़रवरी 1854 (ब्रिटेन)
- ब्रिटेन: सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत
- 1995, नोलन समिति; 7 सिद्धांत
- ब्रिटेन की सिविल सेवा संहिता के मूल्य
- 4: सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, वस्तुनिष्ठता, निष्पक्षता
- AIS (आचरण) नियम
- 1968; अधिसूचना 18-12-1968; G.S.R. 3, 4-1-1969
- AIS नियम 3(1A) और 3(2B)
- 2014 के संशोधन से जुड़े
- AIS नियम: राजनीति / प्रेस / आलोचना / सूचना
- नियम 5 / 6 / 7 / 9
- राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम
- 1971; सामान्य नियम 3, राजनीति 7, प्रेस 10, आलोचना 11, सूचना 13
- कामेश्वर प्रसाद बनाम बिहार राज्य
- 22 फ़रवरी 1962, AIR 1962 SC 1166
- टी.एस.आर. सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ
- 31 अक्टूबर 2013, (2013) 15 SCC 732
- द्वितीय ARC की चौथी रिपोर्ट (Ethics in Governance)
- जनवरी 2007
- सामूहिक उत्तरदायित्व
- अनुच्छेद 75(3) (लोकसभा), 164(2) (विधानसभा)
- सिविल सेवक की सुरक्षा
- अनुच्छेद 311(1) और (2)
राजस्थान का पहलू
राजस्थान सरकार के गृह विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध 'The Rajasthan Civil Services (Conduct) Rules, 1971' (देखा गया 1 अक्टूबर 2026) में नियम 3 हर सरकारी सेवक से हर समय पूर्ण सत्यनिष्ठा और कर्तव्यनिष्ठा तथा पद की गरिमा बनाए रखने को कहता है। नियम 7 राजनीतिक दल या राजनीति में भाग लेने वाले संगठन की सदस्यता या संबद्धता से रोकता है। नियम 10 प्रेस/रेडियो से संबंध, नियम 11 सरकार की आलोचना और नियम 13 सूचना के अनधिकृत संप्रेषण से जुड़े हैं। नियम 11 में गुमनाम या छद्म नाम से किया बयान भी शामिल है, इसलिए राजस्थान में भी अनामता केवल परंपरा नहीं, नियम-बद्ध है।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- तटस्थता और निष्पक्षता को एक ही बताना। तटस्थता सरकार/दल से जुड़ी है, निष्पक्षता नागरिकों के साथ व्यवहार से। तालिका याद रखें।
- अनामता को संविधान का अनुच्छेद बताना। यह वेस्टमिंस्टर परंपरा है; संवैधानिक आधार सामूहिक उत्तरदायित्व (75(3), 164(2)) है।
- तटस्थता को 'बिना सोचे आज्ञा मानना' लिखना। नियम 3(3) ख़ुद लिखित निर्देश और विवेक की बात करता है।
- AIS नियम और राजस्थान नियम की संख्याएँ मिला देना: राजनीति AIS में नियम 5 है, राजस्थान में नियम 7; आलोचना AIS में नियम 7, राजस्थान में नियम 11।
- नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट को 'तटस्थता का सिद्धांत देने वाली रिपोर्ट' लिखना। उसने मेरिट, परीक्षा और स्थायित्व का आधार दिया।
- बिना स्रोत के 'सर्वोच्च न्यायालय ने तटस्थता पर कहा' लिख देना। सही उदाहरण टी.एस.आर. सुब्रमण्यम (2013) और कामेश्वर प्रसाद (1962) हैं।
वास्तविक मामला
केस स्टडीटी.एस.आर. सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ (31 अक्टूबर 2013)
पूर्व मंत्रिमंडल सचिव टी.एस.आर. सुब्रमण्यम और कुछ अन्य सेवानिवृत्त वरिष्ठ सिविल सेवकों ने सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की। उनका कहना था कि राजनीतिक दबाव में तबादले और मौखिक निर्देश सिविल सेवा की स्वतंत्रता को खोखला करते हैं। निर्णय न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन और पिनाकी चंद्र घोष की पीठ का है; रिपोर्ट: (2013) 15 SCC 732।
- सिविल सेवा बोर्ड
- न्यायालय ने केंद्र, राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों को निर्देश दिया कि वरिष्ठ सेवारत अधिकारियों वाले ऐसे बोर्ड तीन महीने में बनाएँ।
- न्यूनतम कार्यकाल
- सरकारें सिविल सेवकों को न्यूनतम कार्यकाल सुनिश्चित करने के लिए उचित निर्देश तीन महीने में जारी करें। निर्णय के पाठ में वर्षों की कोई संख्या नहीं दी गई।
- निर्देशों का रिकॉर्ड
- राज्य और संघ राज्यक्षेत्र AIS आचरण नियम के नियम 3(3) जैसे निर्देश जारी करें, ताकि मौखिक निर्देश लिखित में दर्ज हों।
सीख
तटस्थता केवल अधिकारी के अपने संकल्प से नहीं बचती; उसे संस्थागत सहारा चाहिए: निष्पक्ष बोर्ड से तबादले, सुरक्षित कार्यकाल और लिखित निर्देश। उत्तर में निष्कर्ष यह लिखें कि नियम के साथ व्यवस्था का सुधार भी ज़रूरी है।
कार्यस्थल का काल्पनिक परिदृश्य
उदाहरण (काल्पनिक)ठेके की फ़ाइल पर फ़ोन
काल्पनिक उदाहरण: एक ज़िले के उप-निदेशक को राज्य के एक मंत्री के निजी सहायक का फ़ोन आता है कि सड़क-मरम्मत का ठेका एक ख़ास फ़र्म को दे दिया जाए। फ़र्म की दरें सबसे ऊँची हैं और निविदा-नियमों में उसकी पात्रता संदिग्ध है।
- ग़लत रास्ता
- फ़ोन पर 'जी' कह देना और फ़ाइल में कारण-रहित मंज़ूरी लिख देना। इससे अधिकारी निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा, दोनों खोता है।
- सही रास्ता
- फ़ाइल पर निविदा-नियमों के अनुसार खरी राय लिखना, मौखिक निर्देश की लिखित पुष्टि माँगना (नियम 3(3) की भावना), और कारण सहित अपना मत दर्ज करना।
- मंत्री की भूमिका
- मंत्री नीति का निर्णय करने और लिखित आदेश देने का अधिकारी है। अधिकारी बहस सार्वजनिक नहीं करता (अनामता), पर अवैध आदेश पर चुप भी नहीं रहता, उसे ऊपर भेजता है।
सीख
तटस्थता का मतलब आज्ञाकारिता नहीं है। अधिकारी सरकार की वैध नीति माने, पर नियम-विरुद्ध मौखिक दबाव को लिखित प्रक्रिया में बदले। यह परिदृश्य केवल समझाने के लिए गढ़ा गया है; इसमें कोई वास्तविक व्यक्ति या विभाग नहीं है।
प्रक्रिया: सोशल मीडिया पोस्ट से पहले की जाँच
हल सहित उदाहरणएक अधिकारी सरकारी नीति पर टिप्पणी करना चाहता है
दिया है
- काल्पनिक स्थिति: एक RAS अधिकारी राज्य सरकार की एक चालू नीति पर फ़ेसबुक पर अपनी राय लिखना चाहता है।
- लागू नियम: राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 का नियम 11 (सरकार की आलोचना) और नियम 10 (प्रेस/रेडियो)।
- 1चरण 1 पूछिए: क्या पोस्ट किसी वर्तमान या हाल की सरकारी नीति की प्रतिकूल आलोचना है? नियम 11 अपने नाम, गुमनाम या छद्म नाम, तीनों से लिखे बयान पर लागू होता है।
- 2चरण 2 देखिए: क्या यह राय अधिकारी अपनी आधिकारिक हैसियत में या ड्यूटी निभाते हुए दे रहा है? नियम 11 का परंतुक ऐसे बयानों पर लागू नहीं होता।
- 3चरण 3 अगर नहीं, तो राय को सार्वजनिक मंच के बजाय विभागीय माध्यम से, फ़ाइल पर या वरिष्ठ को, भेजिए। इससे अनामता और रचनात्मक असहमति दोनों बची रहती हैं।
- 4चरण 4 किसी भी सरकारी दस्तावेज़ या अप्रकाशित सूचना का उल्लेख न करें, नियम 13 के अनुसार।
निष्कर्ष: निष्कर्ष: निजी मंच पर चालू सरकारी नीति की आलोचना से बचें; असहमति आंतरिक माध्यम से दर्ज करें। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी का होता है, यह पाठ कोई क़ानूनी राय नहीं है।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2018RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
What are the main values of the Civil Services? / सिविल सेवा के मुख्य मूल्य क्या हैं?
आदर्श उत्तर
सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, राजनीतिक तटस्थता, जवाबदेही, पारदर्शिता, योग्यता-आधारित निर्णय और कमज़ोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता।
2013RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
Define impartiality. What are its basic ingredients? / 'निष्पक्षता' को परिभाषित करें। इसके आधारभूत तत्त्व क्या हैं?
आदर्श उत्तर
निष्पक्षता यानी निर्णय केवल गुण-दोष पर लेना। तत्त्व: पूर्वाग्रह-मुक्ति, समान व्यवहार, नियमाधारित निर्णय, दबाव से स्वतंत्रता।
2013RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
In your view, what should be the key moral values in public administration? / आपके मत में, लोक प्रशासन में मुख्य नैतिक मूल्य क्या होने चाहिए?
आदर्श उत्तर
सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, उत्तरदायित्व, पारदर्शिता, जनहित-भाव, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा। ये जनविश्वास बनाते हैं (अपना मत)।
2016RAS मुख्य परीक्षापेपर III5 अंक
What do you understand by Integrity in Civil Service? / सिविल सेवा में सत्यनिष्ठा से आप क्या समझते हैं?
आदर्श उत्तर
सत्यनिष्ठा का अर्थ है निजी लाभ, दबाव या पक्षपात से ऊपर उठकर पद का ईमानदार प्रयोग; यानी विचार, वचन और कर्म में एकरूपता। आचरण नियमों में "पूर्ण सत्यनिष्ठा" अनिवार्य है (AIS नियम 3(1), राजस्थान नियम 3)। इसमें आर्थिक शुचिता, निष्पक्ष निर्णय, हितों के टकराव से दूरी और सच्चाई शामिल हैं। यही जनविश्वास की नींव है।
2013RAS मुख्य परीक्षापेपर III5 अंक
Give three suggestions to make civil servants more compassionate towards the weaker sections of society. / समाज में निर्बल वर्गों के प्रति लोक सेवकों को अधिक करुणामय बनाने हेतु तीन सुझाव दें।
आदर्श उत्तर
पहला, प्रशिक्षण में संवेदनशीलता और फ़ील्ड-अनुभव जोड़ना, ताकि अधिकारी वंचितों की स्थिति ख़ुद देखें। दूसरा, कार्य-मूल्यांकन में कमज़ोर वर्गों को सेवा-वितरण की गुणवत्ता को वज़न देना। तीसरा, नागरिक अधिकार-पत्र, सुनवाई और शिकायत-निवारण को सुलभ बनाना। AIS नियम 3(1A) पहले ही कमज़ोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता माँगता है (सुझाव हमारे)।
2018RAS मुख्य परीक्षापेपर III10 अंक
Explain the measures taken to enhance the integrity in administration in India. / भारत में प्रशासन में सच्चरित्रता बढ़ाने के लिये अपनाये गये उपायों को समझाइये।
आदर्श उत्तर
भारत में उपाय तीन स्तर के हैं। आचरण: AIS नियम 3(1) में पूर्ण सत्यनिष्ठा, नियम 3(1A) में नैतिक मानक व राजनीतिक तटस्थता, नियम 16 में संपत्ति का विवरण। क़ानून और संस्थाएँ: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित, रिश्वत देना भी अपराध), लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013, तथा केंद्रीय सतर्कता आयोग। पारदर्शिता: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, ई-गवर्नेंस और नागरिक अधिकार-पत्र। फिर भी तबादलों का राजनीतिक दबाव चुनौती है; सुब्रमण्यम निर्णय (2013) ने सिविल सेवा बोर्ड और लिखित निर्देश का रास्ता दिखाया। जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ ये उपाय जनविश्वास बढ़ाते हैं।
अभ्यास प्रश्न (हमारे अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
प्रशासनिक अनामता से क्या तात्पर्य है?
आदर्श उत्तर
मंत्री नीति का श्रेय-दोष लेता है; अधिकारी सार्वजनिक बहस में नाम से नहीं उलझता।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
तटस्थता और निष्पक्षता में अंतर स्पष्ट कीजिए।
आदर्श उत्तर
तटस्थता सरकार या दल से जुड़ी है: अधिकारी अपनी राजनीतिक मान्यताएँ अलग रखकर हर वैध सरकार की नीति समान निष्ठा से लागू करे। निष्पक्षता नागरिकों से जुड़ी है: हर मामले में गुण-दोष पर निर्णय, बिना भेदभाव। AIS नियम 3(1A) में दोनों मूल्य दर्ज हैं और नियम 5 राजनीतिक दल की सदस्यता से रोकता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 में राजनीति और सरकार की आलोचना पर कौन-से प्रतिबंध हैं?
आदर्श उत्तर
नियम 7 के अनुसार सरकारी सेवक किसी राजनीतिक दल या राजनीति में भाग लेने वाले संगठन का सदस्य या उससे संबद्ध नहीं हो सकता। नियम 11 में रेडियो, प्रेस, सार्वजनिक भाषण या लेख (अपने नाम, गुमनाम या छद्म नाम से) द्वारा चालू नीति की प्रतिकूल आलोचना मना है; ड्यूटी में कही बात अपवाद है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
'प्रतिबद्ध नौकरशाही' की अवधारणा क्या है? लोकतंत्र में सिविल सेवा की तटस्थता के सामने मुख्य चुनौतियाँ बताइए।
आदर्श उत्तर
'प्रतिबद्ध नौकरशाही' की बात 1970 के दशक की शुरुआत में उठी; सरकार का आशय था कि नौकरशाही सत्ताधारी सरकार के उद्देश्यों और नीतियों के प्रति समर्पित रहे। संविधान और नीति के प्रति प्रतिबद्धता उचित है, पर दल या नेता के प्रति प्रतिबद्धता तटस्थता को कमज़ोर करती है।
चुनौतियाँ: बार-बार तबादले, जिन्हें सुब्रमण्यम मामले (2013) में न्यायालय ने रेखांकित किया; दर्ज न होने वाले मौखिक निर्देश; राजनीतिक कार्यक्रमों में अधिकारियों की तैनाती; और मीडिया व सोशल मीडिया का दबाव। समाधान: सिविल सेवा बोर्ड, न्यूनतम कार्यकाल, लिखित निर्देश (नियम 3(3)) और आचरण नियमों का पालन।
10 अंक (100 शब्द) का उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
1-2 वाक्य में तटस्थता, निष्पक्षता और अनामता की परिभाषा देकर कहें कि ये लोकतंत्र में स्थायी सिविल सेवा की नींव हैं।
मुख्य भाग
- उत्पत्ति या ढाँचा: नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट (1854), वेस्टमिंस्टर मॉडल; भारत में अनुच्छेद 311 की सुरक्षा और 75(3)/164(2) का सामूहिक उत्तरदायित्व
- आचरण संहिता: AIS नियम 3(1), 3(1A), 5, 7; राजस्थान नियम 3, 7, 11 (केवल सही नियम-संख्या)
- चुनौतियाँ: प्रतिबद्ध नौकरशाही, तबादले और मौखिक आदेश, मीडिया व सोशल मीडिया
- न्यायिक और संस्थागत उपाय: सुब्रमण्यम (2013): सिविल सेवा बोर्ड, न्यूनतम कार्यकाल, लिखित निर्देश
निष्कर्ष
निष्कर्ष: तटस्थता आज्ञाकारिता नहीं, संविधान के प्रति निष्ठा है; नियम, संस्थागत सुरक्षा और अधिकारी का आत्म-अनुशासन तीनों मिलकर इसे बचाते हैं।
अतिरिक्त मूल्य
- सुब्रमण्यम (31-10-2013) और कामेश्वर प्रसाद (1962) का एक-एक उल्लेख
- AIS नियम 3(1A) के 2014 में जुड़ने का ज़िक्र
- एक छोटा उदाहरण: मौखिक निर्देश की लिखित पुष्टि माँगना
त्वरित पुनरावृत्ति
- तटस्थता = सरकार/दल से दूरी; निष्पक्षता = गुण-दोष पर निर्णय; अनामता = श्रेय या दोष मंत्री का
- नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट: फ़रवरी 1854; परीक्षा, खुली प्रतियोगिता, योग्यता पर पदोन्नति
- ब्रिटेन: सिविल सेवा संहिता के 4 मूल्य (सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, वस्तुनिष्ठता, निष्पक्षता); नोलन 1995 के 7 सिद्धांत
- अनुच्छेद 75(3), 164(2): सामूहिक उत्तरदायित्व; अनुच्छेद 311: सिविल सेवक की सुरक्षा
- AIS (आचरण) नियम, 1968: 3 सामान्य, 3(1A) मूल्य (2014), 3(3) मौखिक निर्देश, 5 राजनीति, 6 प्रेस, 7 आलोचना, 9 सूचना, 16 संपत्ति, 17 प्रतिवाद
- राजस्थान (आचरण) नियम, 1971: 3 सामान्य, 7 राजनीति, 10 प्रेस, 11 आलोचना, 13 सूचना
- कामेश्वर प्रसाद (22-2-1962): सरकारी सेवक के मौलिक अधिकार; शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पूर्ण रोक अवैध
- सुब्रमण्यम (31-10-2013): सिविल सेवा बोर्ड, न्यूनतम कार्यकाल, मौखिक निर्देश का रिकॉर्ड
- प्रतिबद्ध नौकरशाही: 1970 के दशक की शुरुआत की बहस; दल के प्रति प्रतिबद्धता = तटस्थता का क्षरण
- द्वितीय ARC चौथी रिपोर्ट: जनवरी 2007, Ethics in Governance
याद रखने योग्य शब्द
- तटस्थता
- निष्पक्षता
- अनामता
- वेस्टमिंस्टर मॉडल
- नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन
- AIS आचरण नियम 1968
- राजस्थान आचरण नियम 1971
- प्रतिबद्ध नौकरशाही
- सुब्रमण्यम 2013
- अनुच्छेद 311