मंत्री और सिविल सेवक के संबंध
मंत्री और सिविल सेवक का रिश्ता: संवैधानिक ढाँचा, वेस्टमिंस्टर तुलना, तटस्थता बनाम प्रतिबद्धता, ARC4 की सिफ़ारिशें और T.S.R. Subramanian निर्णय, उत्तर-लेखन की दृष्टि से।
- अनुच्छेद 75/164
- ARC4
- तटस्थता
- T.S.R. Subramanian
- वेस्टमिंस्टर
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II: "Relations between ministers and civil servants." इस पृष्ठ में संवैधानिक ढाँचा, ब्रिटिश (वेस्टमिंस्टर) तुलना, तटस्थता बनाम प्रतिबद्धता, द्वितीय ARC के विचार और भारतीय मामले एक साथ दिए गए हैं। आचरण-संहिता और बाहरी नियंत्रण के लिए अलग पृष्ठ देखें।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में इस शीर्षक पर सीधा प्रश्न दर्ज नहीं है, इसलिए यह पृष्ठ अभ्यास-प्रश्नों पर टिका है। निकटवर्ती प्रश्न राजनीतिक तटस्थता (2018, नीतिशास्त्र पेपर) के रूप में पूछा गया है; वह उसी विषय के पृष्ठ पर हल है।
- इस शीर्षक से जुड़े सवाल 10 अंक के उत्तर में अक्सर बनते हैं: संवैधानिक स्थिति, तनाव के क्षेत्र (तबादले, मौखिक निर्देश), सुधार (न्यूनतम कार्यकाल, सिविल सेवा बोर्ड) और ब्रिटेन से तुलना। 2013-2024 के पेपरों में देखा गया रुझान है कि लोक प्रशासन के प्रश्न संस्थागत सुधारों और भारतीय उदाहरणों की माँग करते हैं।
- T.S.R. Subramanian निर्णय (2013) और द्वितीय ARC की चौथी रिपोर्ट (2007) के ठोस निर्देश उत्तर को सामान्य कथनों से ऊपर उठाते हैं; इन्हें नाम और वर्ष के साथ लिखें।
पहले सरल भाषा में: कलेक्टर, मंत्री और एक फ़ाइल
सोचिए, किसी ज़िले में मंत्री जी चाहते हैं कि एक योजना का लाभार्थी-चयन अपने क्षेत्र के लोगों के पक्ष में हो। कलेक्टर नियम पढ़ता है और देखता है कि इससे नियम टूटता है। अब सवाल यह है कि कलेक्टर क्या करे: मंत्री की बात माने, क्योंकि जनता ने उन्हें चुना है, या नियम पर टिके, क्योंकि शपथ संविधान की ली है? मंत्री और सिविल सेवक के रिश्ते का पूरा विषय इसी दुविधा के आसपास घूमता है।
इसे एक मकान के मालिक और उसके इंजीनियर की तरह समझा जा सकता है। मकान की बनावट कैसी हो, यह मालिक तय करता है, पर इंजीनियर बताता है कि कौन-सा नक्शा गिर सकता है। अच्छा मालिक इंजीनियर की चेतावनी सुनता है, और अच्छा इंजीनियर मालिक की पसंद का सम्मान करता है। फ़र्क़ यह है कि मकान में केवल दो लोग हैं, जबकि सरकार में मालिक जनता है और मंत्री उसका प्रतिनिधि।
परीक्षा के लिए परिभाषा इस तरह लिखें। मंत्री-सिविल सेवक संबंध वह कामकाजी रिश्ता है जिसमें निर्वाचित राजनीतिक कार्यपालिका नीति तय करती है और स्थायी सिविल सेवा उसे वैधता, निष्पक्षता और विशेषज्ञता के साथ लागू करती है। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) के शब्दों में कार्यपालिका के दो भाग हैं: राजनीतिक और स्थायी सिविल सेवा।
संवैधानिक ढाँचा: आदेश किसका और जवाबदेही किसकी
संविधान के अनुच्छेद 53(1) और 154(1) के अनुसार संघ और राज्य की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति और राज्यपाल में निहित है, जिसे वे स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से प्रयोग करते हैं। अनुच्छेद 74(1) और 163(1) के अनुसार मंत्रिपरिषद उन्हें सहायता और सलाह देती है। यानी अधिकारी तकनीकी रूप से राष्ट्रपति या राज्यपाल के अधीनस्थ हैं, पर व्यवहार में मंत्रिपरिषद की सलाह पर चलते हैं।
अनुच्छेद 75 और 164 मंत्रियों की स्थिति तय करते हैं। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति या राज्यपाल करते हैं और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति उनकी सलाह पर होती है। मंत्री राष्ट्रपति या राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, और मंत्रिपरिषद लोकसभा या विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है। यही संसदीय जवाबदेही मंत्री का सबसे बड़ा औज़ार और सबसे बड़ा बंधन है।
अनुच्छेद 77(3) और 166(3) के अनुसार कार्य-संचालन के नियम बनते हैं और मंत्रियों के बीच कार्य बँटता है। द्वितीय ARC (चौथी रिपोर्ट, पैरा 9.2) के अनुसार इन्हीं नियमों में सचिव को मंत्री के प्रस्तावित कदम पर सलाह देना और ऐसा नोट लिखना शामिल है जिसमें आदेश की वैधता और औचित्य बताया जाए, और ज़रूरत हो तो आदेश न देने या बदलने का सुझाव हो।
सिविल सेवकों के लिए अनुच्छेद 311 सुरक्षा-कवच है: नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी से निचले स्तर का अधिकारी उन्हें पदच्युत नहीं कर सकता और कार्रवाई से पहले सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देना पड़ता है। यह प्रावधान इसलिए अहम है कि मंत्री के असहमत होने पर भी सिविल सेवक को रातोंरात बाहर न किया जा सके।
ARC की नज़र में 'organic' रिश्ता
ARC चौथी रिपोर्ट के पैरा 9.2 में कहती है कि सचिव और मंत्री का रिश्ता organic (जैविक) है। मंत्री के पास शासन करने का जनादेश है, और सचिव के पास सलाह देने का समतुल्य संवैधानिक दायित्व। सलाह पर समुचित विचार के बाद, जब तक मंत्री अवैध आदेश न दे, सचिव उसे लागू करने को बाध्य है। इसके बदले मंत्री का कर्तव्य है कि जो सचिव उसका आदेश लागू कर रहा है, उसका साथ दे।
आयोग यह भी जोड़ता है कि एक बार क़ानून या नियम बन जाएँ तो वे राजनीतिक कार्यपालिका और स्थायी सिविल सेवा, दोनों पर समान रूप से लागू होते हैं। सिविल सेवक को आदेश बिना पक्षपात, ईमानदारी से और बिना भय या पक्षपात के लागू करने हैं। आयोग मानता है कि मतभेद ठीक इसी बिंदु पर उभरता है।
पैरा 9.3 के अनुसार तनाव इसलिए बनता है कि जवाबदेही निर्धारित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। आयोग का सुझाव है कि संबंध को आउटपुट-आउटकम ढाँचे में रखा जाए। आउटपुट वे ठोस सेवाएँ या मुख्य परिणाम हैं जो सिविल सेवक देते हैं, और उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन उसी पर हो। आउटकम सामाजिक लक्ष्यों की सफलता है; कौन-से आउटपुट चुने जाएँ, यह राजनीतिक कार्यपालिका तय करती है और वही विधायिका और मतदाता के प्रति आउटकम के लिए जवाबदेह होती है।
विश्लेषण: उदाहरण के लिए, सरकार तय करती है कि ग्रामीण स्कूलों में बच्चों के सीखने का स्तर सुधरना चाहिए (आउटकम)। स्कूल-भवन बनाना, शिक्षक तैनात करना और किताबें समय पर पहुँचाना आउटपुट हैं; इन पर अफ़सर की जवाबदेही बनती है। अगर आउटपुट पूरे हों पर सीखना न सुधरे, तो सवाल नीति पर उठता है, यानी मंत्री पर। यह उदाहरण समझाने के लिए है और ARC के पाठ में नहीं है।
वेस्टमिंस्टर परंपरा: ब्रिटेन में रिश्ता कैसा है
भारत की संसदीय व्यवस्था ब्रिटिश मॉडल से प्रभावित है, इसलिए तुलना स्वाभाविक है। ब्रिटेन की Civil Service Code कहती है कि सिविल सेवक मंत्रियों के प्रति जवाबदेह हैं, जो स्वयं संसद के प्रति जवाबदेह हैं। संहिता के मूल मूल्य ईमानदारी (integrity), सच्चाई (honesty), वस्तुनिष्ठता (objectivity) और निष्पक्षता (impartiality) हैं, और संहिता को सांविधिक आधार Constitutional Reform and Governance Act 2010 के भाग 1 से मिलता है।
राजनीतिक निष्पक्षता की संहिता-परिभाषा यह है कि सिविल सेवक अपनी राजनीतिक मान्यता जो भी हो, किसी भी रंग की सरकार की पूरी क्षमता से सेवा करे। वहीं Cabinet Manual (अक्टूबर 2011) का पैरा 7.2 मंत्रियों पर भी दायित्व डालता है: वे सिविल सेवा की राजनीतिक निष्पक्षता बनाए रखें और सिविल सेवकों से ऐसा कुछ न कराएँ जो संहिता के विरुद्ध हो, तथा सूचित और निष्पक्ष सलाह को उचित महत्त्व दें। पैरा 3.45 के अनुसार मंत्री अपनी शक्तियों के तहत लिए निर्णयों के लिए संसद के प्रति जवाबदेह रहते हैं।
ब्रिटेन में दिलचस्प व्यवस्था विशेष सलाहकारों (special advisers) की है। Cabinet Manual के पैरा 7.11-7.12 के अनुसार वे अस्थायी सिविल सेवक के रूप में नियुक्त होते हैं, मंत्री को वहाँ सहायता देते हैं जहाँ सरकार और पार्टी का काम मिलता है, और स्थायी सिविल सेवा की तुलना में अधिक राजनीतिक रूप से प्रतिबद्ध होते हैं। इस प्रबंध का तर्क यह दिया गया है कि राजनीतिक सलाह का अलग स्रोत होने से स्थायी सिविल सेवा की निष्पक्षता और मज़बूत होती है। भारत में ऐसी औपचारिक श्रेणी नहीं है; मंत्री निजी स्टाफ़ और प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों से काम चलाते हैं (विश्लेषण: ARC4 में इसका उल्लेख नहीं है)।
वेस्टमिंस्टर बनाम भारत: मंत्री-सिविल सेवक संबंध
ब्रिटेन (वेस्टमिंस्टर)
जवाबदेही की शृंखलासिविल सेवक, मंत्री और मंत्री संसद के प्रति (Civil Service Code)
सेवा का आधारConstitutional Reform and Governance Act 2010 के भाग 1 में सांविधिक आधार; संहिता सांविधिक
निष्पक्षताकिसी भी रंग की सरकार की सेवा; मंत्री भी इसे बनाए रखने को बाध्य (Cabinet Manual 7.2)
राजनीतिक सलाहविशेष सलाहकार: अस्थायी सिविल सेवक, राजनीतिक रूप से प्रतिबद्ध (7.11-7.12)
लिखित आदेशसंहिता का ज़ोर निष्पक्षता और ईमानदारी पर; नियम 3(3) जैसे लिखित-निर्देश नियम का उल्लेख यहाँ प्रयुक्त स्रोतों में नहीं है
भारत
जवाबदेही की शृंखलामंत्रिपरिषद विधायिका के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी (अनुच्छेद 75(3), 164(2)); अधिकारी राष्ट्रपति/राज्यपाल के अधीनस्थ (अनुच्छेद 53, 154)
सेवा का आधारअनुच्छेद 311 में सुरक्षा; बाक़ी सेवा-शर्तें नियमों से। सिविल सेवा-क़ानून का विचार: NCRWC ने अनुच्छेद 309 के तहत वैधानिक बोर्ड सुझाए और ARC ने Draft Public Services Bill, 2006 का उल्लेख किया (पैरा 9.13-9.14)
निष्पक्षतानिष्पक्षता मूल्य के रूप में; मंत्रियों के लिए बाध्यकारी कोड ARC ने सुझाया (पैरा 2.4.5(e))
राजनीतिक सलाहARC4 में ऐसी औपचारिक श्रेणी का उल्लेख नहीं
लिखित आदेशअखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 का नियम 3(3): आदेश सामान्यतः लिखित, मौखिक हो तो तुरंत लिखित पुष्टि (T.S.R. Subramanian, पैरा 32)
ब्रिटेन वाले स्तंभ के कथन Civil Service Code और Cabinet Manual से हैं। भारत वाले स्तंभ संविधान, ARC4 और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से। तुलना की पंक्तियाँ लिखने का ढाँचा हमारा है।
तटस्थता बनाम प्रतिबद्धता: बहस क्या है
तटस्थता (neutrality) का आशय है कि सिविल सेवक सत्ता बदलने पर भी नई सरकार की नीति उतनी ही निष्ठा से लागू करे जितनी पुरानी की, और अपने राजनीतिक विचार दफ़्तर के कामकाज में न लाए। प्रतिबद्धता (commitment) का सही आशय यह है कि चुनी हुई सरकार के घोषित उद्देश्य और नीतियों के प्रति सेवक समर्पित रहे। दिक़्क़त तब आती है जब प्रतिबद्धता का अर्थ पार्टी-निष्ठा या मंत्री-निष्ठा बना दिया जाए।
इस पर भारतीय इतिहास में एक चर्चित प्रसंग है। Newslaundry (31 अक्टूबर 2023) के अनुसार 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी की सरकार ने 'प्रतिबद्ध नौकरशाही' (committed bureaucracy) का विचार उछाला। सरकार को स्पष्ट करना पड़ा कि इसका अर्थ राजनीतिक तटस्थता का त्याग नहीं, बल्कि वर्तमान सरकार के उद्देश्यों और नीतियों के प्रति समर्पण है; विचार को बाद में औपचारिक रूप से नहीं अपनाया गया। एक शोध-लेख (Conscientia Beam) के अनुसार इस दौर में 'हाँ मंत्री जी' जैसी प्रवृत्ति का आरंभ माना जाता है। ये दोनों स्रोत सरकारी दस्तावेज़ नहीं हैं, इसलिए इसे इतिहास की व्याख्या के रूप में पढ़ें।
ARC भी इस रेखा पर लिखती है: अधिकारी का दायित्व है कि क़ानून और नियम के भीतर आदेश बिना भय या पक्षपात के लागू करे; अवैध आदेश अपवाद है। ARC चौथी रिपोर्ट के पैरा 2.4 में मंत्रियों की आचार-संहिता में क़ानून का पालन एक व्यापक कर्तव्य के रूप में सुझाया गया है और पैरा 2.4.5(e) में कहा गया कि संहिता में मंत्री-सिविल सेवक संबंध के सिद्धांत भी हों।
तटस्थता बनाम प्रतिबद्धता (विश्लेषण)
| आधार | तटस्थता | प्रतिबद्धता (स्वस्थ रूप) | प्रतिबद्धता (विकृत रूप) |
|---|---|---|---|
| किसके प्रति | संविधान और क़ानून | चुनी सरकार के घोषित उद्देश्य और नीति | पार्टी या व्यक्ति-विशेष मंत्री |
| सत्ता बदलने पर | नई सरकार की नीति उतनी ही निष्ठा से | नई नीति के प्रति समर्पण | पुराने लोगों से दूरी, नए के प्रति चाटुकारिता |
| सलाह देने में | खुली, तथ्य-आधारित राय | राय देकर फिर आदेश का पालन | मंत्री को वही बताना जो वह सुनना चाहे |
| ख़तरा | जड़ता, 'फ़ाइल घुमाओ' | कम | राजनीतिकरण; ARC के अनुसार तबादले का हथियार |
यह तालिका लिखने के लिए हमारा विश्लेषण है, किसी स्रोत का उद्धरण नहीं। पहली दो पंक्तियों की अवधारणाएँ ARC4 और Newslaundry से ली गई हैं।
तनाव के क्षेत्र: तबादला, मौखिक निर्देश, दख़ल
सबसे पुराना और बड़ा विवाद तबादलों का है। ARC4 के पैरा 9.4 में रॉबर्ट वेड का आंध्र प्रदेश का अध्ययन उद्धृत है, जिसके अनुसार तबादला राजनेताओं का नौकरशाही पर नियंत्रण का मूल हथियार है। पैरा 9.5 में इसे 'transfer industry' कहा गया और इलाहाबाद उच्च न्यायालय (मोहसीना बेगम मामला) की टिप्पणी उद्धृत है कि नई सरकार आने पर तबादलों की लहर आती है, जो 'total demoralisation' तक ले जाती है। पाँचवें वेतन आयोग ने भी माना कि तबादले को सरकारी कर्मचारियों को दबाने और दंडित करने का साधन बनाया जाता है (पैरा 9.7)।
दूसरा क्षेत्र मौखिक या अनौपचारिक निर्देश है। ARC4 पैरा 9.15 के अनुसार मंत्री औपचारिक या अनौपचारिक निर्देश देकर अधीनस्थ नौकरशाही के निर्णय प्रभावित करते देखे गए हैं, और अधिकारी भी अपने निर्णय लेने के बजाय मंत्री से अनौपचारिक संकेत की प्रतीक्षा करते हैं। कई राज्यों में बने 'ज़िला प्रभारी मंत्री' ने कई बार अपने दायरे से बाहर जाकर ऐसे विषयों पर निर्देश दिए जो अधिकारी के क्षेत्राधिकार में आते हैं। आयोग इसे अस्वस्थ मानता है, क्योंकि इससे अधिकारी की पहल दबती है और कर्त्तव्यनिष्ठ सिविल सेवक हतोत्साहित होता है।
तीसरा क्षेत्र जवाबदेही का धुँधलापन है: जब निर्णय मंत्री के कहने पर हो और फ़ाइल पर दर्ज न हो, तो ग़लती होने पर दोष किसका? इसी का उत्तर सर्वोच्च न्यायालय ने 2013 में खोजा।
सुधार: न्यूनतम कार्यकाल, बोर्ड और सिविल सेवा क़ानून
ARC4 पैरा 9.9 के अनुसार प्रत्येक पदस्थापन का न्यूनतम कार्यकाल पहले से तय हो, सामान्यतः तीन से पाँच वर्ष, और संवेदनशील पदों पर जहाँ निहित स्वार्थ पनप सकते हैं, दो से तीन वर्ष। पैरा 9.10 के अनुसार समय से पहले तबादले का कारण आदेश में दर्ज हो और अधिकारी को अपील का अधिकार हो। पैरा 9.11 के अनुसार तबादला दंड के रूप में प्रयोग न हो।
पैरा 9.13 में राष्ट्रीय संविधान समीक्षा आयोग (NCRWC) की सिफ़ारिश का उल्लेख है कि अनुच्छेद 309 के अंतर्गत क़ानून से सिविल सेवा बोर्ड बनें। पैरा 9.14 में ARC ने Draft Public Services Bill, 2006 का उल्लेख किया है, जिसमें एक Central Public Services Authority बनाने का विचार है; पर ऐसे मामलों में उसकी सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं, केवल सलाहकारी होंगी। सर्वोच्च न्यायालय ने 2013 में बोर्ड बनाने का निर्देश दिया, पर उसके बाद संसद ने कोई सिविल सेवा क़ानून पारित किया या नहीं, यह इस पृष्ठ के स्रोतों में सत्यापित नहीं है।
विश्लेषण: इन उपायों का सार तीन शब्दों में है: कार्यकाल की सुरक्षा (ताकि अधिकारी निर्भय हो), लिखित रिकॉर्ड (ताकि दबाव का निशान रहे) और स्वतंत्र बोर्ड (ताकि तबादला किसी एक मंत्री की मर्ज़ी न रहे)। साथ ही आउटपुट-आउटकम ढाँचा जवाबदेही का बँटवारा साफ़ करता है। परीक्षा में इन चारों को एक वाक्य में जोड़ें।
मंत्री और सिविल सेवक: निर्णय की यात्रा
मंत्री का जनादेश
नीति और लक्ष्य तय (आउटकम के लिए जवाबदेह)
सचिव की सलाह
वैधता और औचित्य पर लिखित नोट
मंत्री का निर्णय
सलाह पर विचार करके आदेश
क्रियान्वयन
अवैध न हो तो सचिव लागू करे (आउटपुट के लिए जवाबदेह)
रिकॉर्ड और समीक्षा
निर्देश फ़ाइल में दर्ज; विधायिका के प्रति जवाबदेही
समय-रेखा
10 अक्टूबर 1949
संविधान सभा: पटेल सेवाओं को खुलकर राय देने की छूट पर
1970 के दशक का आरंभ
'प्रतिबद्ध नौकरशाही' का विचार; सरकार का स्पष्टीकरण कि यह तटस्थता का खंडन नहीं (Newslaundry)
जनवरी 2007
द्वितीय ARC की चौथी रिपोर्ट: संबंध, तबादले, न्यूनतम कार्यकाल
2010
UK में Constitutional Reform and Governance Act: Civil Service Code को सांविधिक आधार
अक्टूबर 2011
UK Cabinet Manual का पहला संस्करण
31 अक्टूबर 2013
T.S.R. Subramanian निर्णय: बोर्ड, कार्यकाल, लिखित निर्देश
एक नज़र में: मंत्री-सिविल सेवक संबंध
मंत्री और सिविल सेवक
संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 53, 154: अधीनस्थ अधिकारी
- अनुच्छेद 74/163: सहायता और सलाह
- अनुच्छेद 75/164: सामूहिक उत्तरदायित्व
- अनुच्छेद 311: सुरक्षा
ARC4 (2007)
- organic संबंध
- सचिव की सलाह; अवैध आदेश अपवाद
- आउटपुट बनाम आउटकम
- न्यूनतम कार्यकाल 3-5 वर्ष
तटस्थता बनाम प्रतिबद्धता
- नीति के प्रति समर्पण वैध
- पार्टी-निष्ठा विकृति
- 1970 का दशक: बहस
वेस्टमिंस्टर
- सिविल सेवक, मंत्री और संसद
- विशेष सलाहकार
- संहिता का सांविधिक आधार (2010)
सुधार
- सिविल सेवा बोर्ड (TSR 2013)
- निर्देश लिखित
- तबादले के कारण दर्ज
मुख्य तथ्य
- कार्यपालिका शक्ति (अनुच्छेद 53(1), 154(1))
- राष्ट्रपति/राज्यपाल में निहित; स्वयं या अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से (संविधान, 2024 प्रति)
- मंत्रिपरिषद की भूमिका (अनुच्छेद 74(1), 163(1))
- राष्ट्रपति/राज्यपाल को सहायता और सलाह
- सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(3), 164(2))
- मंत्रिपरिषद लोकसभा/विधानसभा के प्रति
- सिविल सेवकों की पदच्युति (अनुच्छेद 311)
- अधीनस्थ प्राधिकारी द्वारा नहीं; सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर
- सचिव-मंत्री संबंध (ARC4 पैरा 9.2)
- organic; अवैध आदेश को छोड़कर सचिव लागू करे; मंत्री सचिव का साथ दे (जनवरी 2007)
- जवाबदेही का ढाँचा (ARC4 पैरा 9.3)
- सिविल सेवक आउटपुट के लिए, राजनीतिक कार्यपालिका आउटकम के लिए
- न्यूनतम कार्यकाल (ARC4 पैरा 9.9)
- सामान्यतः 3-5 वर्ष; संवेदनशील पदों पर 2-3 वर्ष
- सर्वोच्च न्यायालय, T.S.R. Subramanian
- 31 अक्टूबर 2013; बोर्ड, न्यूनतम कार्यकाल और लिखित निर्देश पर 3 माह में निर्देश
- UK Civil Service Code
- सिविल सेवक मंत्रियों के प्रति जवाबदेह, मंत्री संसद के प्रति; सांविधिक आधार 2010 का Act
- UK Cabinet Manual
- पहला संस्करण अक्टूबर 2011; पैरा 7.11-7.12 विशेष सलाहकार
- पटेल का भाषण
- 10 अक्टूबर 1949, संविधान सभा
- 'प्रतिबद्ध नौकरशाही' की बहस
- 1970 के दशक का आरंभ; विचार औपचारिक रूप से नहीं अपनाया गया (Newslaundry, 2023)
- अंतिम जाँच
- 1 अक्टूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- "सिविल सेवक मंत्री का नौकर है" लिखना: ARC के अनुसार सचिव का सलाह देने का समतुल्य संवैधानिक दायित्व है और वह अवैध आदेश लागू करने को बाध्य नहीं।
- "सिविल सेवक मंत्री की हर बात मानने को बाध्य है" लिखना: सलाह पर विचार के बाद वैध आदेश लागू होता है; अवैध आदेश अपवाद है।
- तटस्थता को निष्क्रियता या अरुचि समझना: तटस्थता का अर्थ किसी भी सरकार की उतनी ही निष्ठा से सेवा है, और प्रतिबद्धता का सही अर्थ सरकार की नीति के प्रति समर्पण है, पार्टी के प्रति नहीं।
- ब्रिटेन की तुलना में 'वहाँ कोई समस्या नहीं' लिखना: Cabinet Manual स्वयं मंत्रियों पर निष्पक्षता बनाए रखने का दायित्व डालता है, यानी समस्या वहाँ भी मानी गई है।
- T.S.R. Subramanian का वर्ष या निर्देश गड़बड़ करना: निर्णय 31 अक्टूबर 2013 का है; तीन निर्देश: बोर्ड, कार्यकाल, लिखित निर्देश।
- ARC4 और 2013 के निर्णय को एक ही मान लेना: ARC की रिपोर्ट सिफ़ारिश है (2007), निर्णय न्यायालय का निर्देश (2013)।
- अनुच्छेद 75 और 164 को मिलाना: 75 केंद्र के लिए, 164 राज्यों के लिए है।
केस स्टडी: T.S.R. Subramanian बनाम भारत संघ (31 अक्टूबर 2013)
केस स्टडीसेवानिवृत्त सिविल सेवकों की याचिका और पाँच निर्देश
कुछ प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त सिविल सेवकों ने अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में याचिका (रिट याचिका सिविल 82/2011) दायर की। उनकी माँग थी कि सिविल सेवकों की ईमानदारी, निर्भीकता और स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सुधार हों। न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन की पीठ ने 31 अक्टूबर 2013 को निर्णय दिया।
- सिविल सेवा बोर्ड
- पैरा 29: केंद्र, राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को निर्देश कि संसद के क़ानून बनाने तक तीन माह में उच्च श्रेणी के सेवारत विशेषज्ञ अधिकारियों वाले बोर्ड गठित हों।
- न्यूनतम कार्यकाल
- पैरा 30-31: न्यायालय ने कहा कि मनमाने बार-बार तबादले सुशासन के लिए हानिकारक हैं; सरकारों को तीन माह में न्यूनतम कार्यकाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। न्यायालय के अनुसार लगभग 13 राज्य इसकी ज़रूरत स्वीकार कर चुके थे।
- निर्देश लिखित हों
- पैरा 32-33: सिविल सेवक मौखिक निर्देशों पर काम नहीं कर सकते और उन्हें प्रशासनिक वरिष्ठों, राजनीतिक कार्यपालिका और निहित स्वार्थों के ग़लत और मनमाने दबाव से बचाया जाना चाहिए। मौखिक निर्देश पर चलना हो तो उसे फ़ाइल में दर्ज करें। रिकॉर्ड जवाबदेही तय करने के लिए ज़रूरी है।
- राज्यों को निर्देश
- पैरा 35: सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के नियम 3(3) जैसे निर्देश तीन माह में जारी करने के लिए कहा गया।
सीख
उत्तर में लिखें: "T.S.R. Subramanian बनाम भारत संघ (2013) में सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल सेवा बोर्ड, न्यूनतम कार्यकाल और निर्देशों को लिखित दर्ज करने के निर्देश दिए।" इससे उत्तर में न्यायिक आधार जुड़ता है। निर्णय का अनुपालन राज्यों में कितना हुआ, यह इस पृष्ठ में सत्यापित नहीं किया गया है।
केस स्टडी: संविधान सभा में पटेल (10 अक्टूबर 1949)
केस स्टडी"सेवाओं को खुलकर राय देने दें"
अखिल भारतीय सेवाओं पर बहस के दौरान सरदार पटेल ने मंत्री और सिविल सेवक के रिश्ते पर यह बात रखी। कथन संविधान सभा की बहस (भाग II) में दर्ज है।
- क्या कहा
- कुशल अखिल भारतीय सेवा चाहिए तो सेवाओं को बिना भय या पक्षपात के अपनी राय खुलकर देने की छूट दें। यदि आप प्रीमियर (मुख्यमंत्री) हैं, तो आपका कर्तव्य है कि अपने सचिव और मुख्य सचिव को ऐसा करने दें।
- शर्त
- पटेल ने कहा कि संयुक्त भारत तभी रहेगा जब ऐसी अच्छी अखिल भारतीय सेवा हो जिसमें अपने मन की बात कहने की स्वतंत्रता और सुरक्षा का बोध हो।
सीख
यह ARC4 के 'सचिव सलाह देता है, मंत्री निर्णय करता है' वाले सूत्र का संवैधानिक पूर्वरूप है। शब्द अलग हैं, भाव मिलता-जुलता है (विश्लेषण)।
केस स्टडी: ज़िला प्रभारी मंत्री का निर्देश (कल्पित, ARC4 पैरा 9.15 पर आधारित)
उदाहरण (काल्पनिक)टेंडर पर ज़िला प्रभारी मंत्री की सलाह
यह मामला समझाने के लिए गढ़ा गया है; पात्र, ज़िला और घटना वास्तविक नहीं हैं। एक ज़िले के प्रभारी मंत्री विकास-कार्यों की समीक्षा बैठक में ज़िला कलेक्टर से कहते हैं कि सड़क का ठेका किसी विशेष ठेकेदार को दिया जाए, जबकि यह निर्णय ज़िला स्तर की समिति के अधिकार में आता है।
- समस्या
- निर्देश मौखिक है, और अधिकारी के क्षेत्राधिकार में दख़ल है। ARC4 पैरा 9.15 ऐसे मामलों को अस्वस्थ मानता है।
- कलेक्टर के विकल्प
- (1) आदेश चुपचाप मान लेना: जवाबदेही उसी पर रहेगी, और 2013 के निर्णय के अनुसार वह जोखिम लेता है। (2) बैठक में ही नियम समझाकर विनम्रता से इनकार, और बैठक के कार्यवृत्त में बात दर्ज कराना। (3) लिखित निर्देश माँगना, और विभागीय सचिव को सूचना देना।
- सर्वश्रेष्ठ रास्ता
- नियम का पालन, लेकिन टकराव के बिना: कलेक्टर मंत्री की जायज़ चिंता (क्षेत्र का विकास) सुने, पर निर्णय समिति की प्रक्रिया से हो। मंत्री को भी सिविल सेवक का साथ देना है (ARC4 पैरा 9.2)।
सीख
उत्तर में व्यावहारिक सुझाव के रूप में: लिखित निर्देश, फ़ाइल में दर्ज रिकॉर्ड, सचिव को सूचना और विनम्र दृढ़ता।
अभ्यास प्रश्न (हमारे अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
प्रतिबद्ध नौकरशाही (committed bureaucracy) से क्या आशय है?
आदर्श उत्तर
सरकार के घोषित उद्देश्यों के प्रति समर्पित नौकरशाही; दुरुपयोग होने पर यह पार्टी-निष्ठा बन जाती है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
द्वितीय ARC के अनुसार सचिव और मंत्री का संबंध कैसा होना चाहिए?
आदर्श उत्तर
ARC (चौथी रिपोर्ट, 2007) इसे organic संबंध कहती है। मंत्री के पास जनादेश है और सचिव के पास सलाह का संवैधानिक दायित्व। वैधता और औचित्य पर सलाह के बाद, अवैध आदेश को छोड़कर, सचिव आदेश लागू करे। मंत्री भी लागू करने वाले सचिव का साथ दे।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
T.S.R. Subramanian निर्णय (2013) के मुख्य निर्देश लिखिए।
आदर्श उत्तर
सर्वोच्च न्यायालय ने 31 अक्टूबर 2013 को तीन माह में सिविल सेवा बोर्ड बनाने, न्यूनतम कार्यकाल सुनिश्चित करने और निर्देश लिखित दर्ज करने के निर्देश दिए। मौखिक निर्देश पर चलने की स्थिति में उसे फ़ाइल में दर्ज करें, ताकि जवाबदेही तय हो सके।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
मंत्री और सिविल सेवक के संबंध में तनाव के क्षेत्र बताते हुए सुधार सुझाइए।
आदर्श उत्तर
अनुच्छेद 75 और 164 मंत्रियों को विधायिका के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं, जबकि सिविल सेवक अनुच्छेद 53 और 154 के अनुसार अधीनस्थ अधिकारी हैं और अनुच्छेद 311 से सुरक्षित हैं। इस दोहरे ढाँचे में तनाव बनता है।
ARC4 (2007) ने मुख्य क्षेत्र बताए: मनमाने तबादले (तबादला उद्योग), मंत्रियों के औपचारिक या अनौपचारिक निर्देश, और ज़िला प्रभारी मंत्री का दायरे से बाहर निर्देश देना।
सुधार: न्यूनतम कार्यकाल (3-5 वर्ष), सिविल सेवा बोर्ड, तबादले के कारण दर्ज करना, और आउटपुट-आउटकम ढाँचा। T.S.R. Subramanian (2013) ने बोर्ड, कार्यकाल और लिखित निर्देशों के निर्देश दिए।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
ब्रिटेन और भारत में मंत्री-सिविल सेवक संबंध की एक समानता और एक भिन्नता बताइए।
आदर्श उत्तर
समानता: दोनों में जवाबदेही की शृंखला संसद या विधायिका तक जाती है। भिन्नता: ब्रिटेन में सिविल सेवा संहिता को Constitutional Reform and Governance Act 2010 का सांविधिक आधार है और विशेष सलाहकार होते हैं; भारत में सिविल सेवा-क़ानून का विचार (Draft Public Services Bill, 2006) ARC के पाठ में मिलता है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न: "मंत्री और सिविल सेवक के संबंधों में तटस्थता और प्रतिबद्धता की बहस की चर्चा कीजिए।" पहली पंक्ति में दोनों शब्दों की परिभाषा दें।
मुख्य भाग
- संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 53/154, 74/163, 75/164, 311
- ARC4 (2007): organic संबंध; सलाह के बाद वैध आदेश लागू; आउटपुट-आउटकम
- तटस्थता बनाम प्रतिबद्धता: 1970 का दशक; नीति के प्रति समर्पण बनाम पार्टी-निष्ठा
- तनाव: तबादले, मौखिक निर्देश, ज़िला प्रभारी मंत्री
- सुधार: न्यूनतम कार्यकाल, सिविल सेवा बोर्ड, T.S.R. Subramanian (2013)
निष्कर्ष
निष्कर्ष: स्वस्थ संबंध वह है जिसमें सिविल सेवक निर्भय होकर सलाह दे, मंत्री सलाह सुनकर निर्णय ले, और निर्णय की जवाबदेही रिकॉर्ड पर साफ़ रहे।
अतिरिक्त मूल्य
- वेस्टमिंस्टर तुलना: मंत्रियों पर भी निष्पक्षता बनाए रखने का दायित्व (Cabinet Manual 7.2)
- पटेल 1949: सेवाओं को खुलकर राय देने दें
- आउटपुट-आउटकम ढाँचे का एक छोटा उदाहरण
त्वरित पुनरावृत्ति
- कार्यपालिका के दो भाग: राजनीतिक और स्थायी सिविल सेवा (ARC4 पैरा 9.1)
- अनुच्छेद 53/154: अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से; 74/163: सहायता और सलाह
- अनुच्छेद 75(3)/164(2): सामूहिक उत्तरदायित्व; 311: पदच्युति में सुरक्षा
- सचिव-मंत्री संबंध organic; सलाह के बाद वैध आदेश लागू (ARC4 9.2)
- आउटपुट के लिए सिविल सेवक, आउटकम के लिए राजनीतिक कार्यपालिका (ARC4 9.3)
- तबादला उद्योग; न्यूनतम कार्यकाल 3-5 वर्ष, संवेदनशील पदों पर 2-3 (ARC4 9.9)
- ज़िला प्रभारी मंत्री का दायरे से बाहर निर्देश (ARC4 9.15)
- T.S.R. Subramanian, 31-10-2013: बोर्ड, कार्यकाल, लिखित निर्देश
- UK: सिविल सेवक मंत्री के प्रति, मंत्री संसद के प्रति; Act 2010; विशेष सलाहकार
- 1970 का दशक: 'प्रतिबद्ध नौकरशाही' बहस; पटेल 10-10-1949
याद रखने योग्य शब्द
- minister civil servant relations
- neutrality
- commitment
- Westminster
- Art 75
- Art 164
- Art 311
- ARC4
- T.S.R. Subramanian
- output outcome