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समाजशास्त्र · पेपर I · इकाई III (क)

परिवार (Family): प्रकार, कार्य और बदलता स्वरूप

परिवार के प्रकार और कार्य, संयुक्त बनाम एकल परिवार की बहस, NFHS-5 के भारत और राजस्थान के आँकड़े, बेटियों का अधिकार और 2021 का नैतिक विकास वाला प्रश्न हल सहित।

  • परिवार
  • एकल और संयुक्त
  • NFHS-5
  • महिला-मुखिया
  • सहदायिक
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग क (समाजशास्त्र): "Issues related to family and marriage, elderly people and disabled in present Indian society." इस पृष्ठ पर परिवार है; विवाह, तलाक़, बुज़ुर्ग और दहेज के अलग पृष्ठ हैं। पेपर II की नीतिशास्त्र इकाई में भी "मूल्यों के विकास में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका" है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में परिवार से जुड़ा एक ही प्रश्न मिला: 2021 के पेपर II (नीतिशास्त्र इकाई) में 5 अंक का "परिवार मनुष्य के नैतिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है"। इसे नीचे हल किया गया है, क्योंकि विषय की दृष्टि से यह इसी पृष्ठ से जुड़ता है। इस वर्गीकरण को सीमावर्ती माना गया है (2013-2024 के पेपरों में देखा गया)।
  • पेपर I के समाजशास्त्र खंड में परिवार पर अलग से सीधा प्रश्न नहीं मिला, पर सिलेबस की पंक्ति में "परिवार और विवाह" के मुद्दे हैं। इसलिए संयुक्त बनाम एकल परिवार, बदलता स्वरूप और राजस्थान के आँकड़े तैयार रखिए।
  • ऐसे प्रश्न में आँकड़ा और विश्लेषण दोनों माँगे जाते हैं। इस पृष्ठ में NFHS-5 के भारत और राजस्थान के आँकड़े हैं और यह भी कि "एकल परिवार" बढ़ने का अर्थ रिश्तों का टूटना नहीं है।

पहले सरल भाषा में: घर का आँगन

सुबह आँगन में दादी तुलसी को जल देती हैं, माँ चूल्हे पर रोटियाँ सेंकती हैं, पापा खेत या दफ़्तर के लिए निकलते हैं, और बच्चे स्कूल का बस्ता सँभालते हैं। एक ही आँगन में कई भूमिकाएँ चल रही हैं: देखभाल, कमाई, पालन-पोषण, शिक्षा। समाजशास्त्र इस पूरे ढाँचे को परिवार (Family) कहता है, और इसे समाज की सबसे बुनियादी संस्था मानता है।

NCERT की भाषा में परिवार, विवाह और नातेदारी (kinship) सब समाजों में महत्वपूर्ण हैं, पर उनका स्वरूप समाज-समाज में अलग है। साथ ही परिवार निजी दुनिया (private sphere) है, पर वह आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों से जुड़ा है। यानी आँगन की चारदीवारी के भीतर जो होता है, उसका संबंध बाहर के बाज़ार, क़ानून और स्कूल से भी है।

परीक्षा के लिए एक पंक्ति: परिवार रक्त, विवाह या गोद लेने के संबंध से जुड़े लोगों का वह समूह है जिसमें लोग साथ रहकर या साझा ज़िम्मेदारी निभाकर बच्चों का पालन-पोषण, देखभाल और समाजीकरण करते हैं। यह परिभाषा सामान्य समाजशास्त्रीय समझ पर आधारित हमारा संक्षिप्त रूप है, किसी एक लेखक का उद्धरण नहीं।

परिवार और गृहस्थी (Household): अंतर समझिए

आँकड़ों की भाषा में एक नया शब्द आता है: household यानी गृहस्थी या परिवार-इकाई। NFHS-5 में एकल गृहस्थी (nuclear household) वह है जिसमें विवाहित जोड़ा, या अकेला पुरुष या महिला, अविवाहित बच्चों (अपने, गोद लिए या पालित) के साथ या उनके बिना, और कभी असंबद्ध व्यक्तियों के साथ रहते हैं। बाक़ी सब गृहस्थियाँ अ-एकल (non-nuclear) हैं।

इसका महत्व यह है कि सर्वेक्षण "एक चूल्हे पर रहने वालों" को गिनता है, जबकि समाजशास्त्र "नातेदारी के रिश्तों" को भी देखता है। दो भाई अलग रसोई चलाएँ, फिर भी खेती, त्योहार और संकट में साझा रहें, तो आँकड़े में वे दो एकल गृहस्थियाँ दिखेंगी, पर समाजशास्त्री उसे विस्तारित नातेदारी की तरह पढ़ेगा (विश्लेषण)। उत्तर में आँकड़े देते समय "गृहस्थी" शब्द का ही प्रयोग कीजिए।

परिवार के प्रकार: आकार, निवास और सत्ता के आधार पर

NCERT के अनुसार विभिन्न समाजों में परिवार के रूप अलग हैं। संरचना के आधार पर सबसे जाना-पहचाना भेद एकल (nuclear) और विस्तारित या संयुक्त (extended, joint) परिवार का है। एकल परिवार में पति-पत्नी और अविवाहित बच्चे होते हैं। संयुक्त परिवार में कई पीढ़ियाँ और भाई-बहनों के परिवार साथ रहते हैं और आमतौर पर साझा संपत्ति और साझा रसोई होती है।

निवास के नियम के आधार पर NCERT दो रूप बताता है: मातृस्थानीय (matrilocal), जिसमें नवविवाहित जोड़ा स्त्री के माता-पिता के साथ रहता है, और पितृस्थानीय (patrilocal), जिसमें जोड़ा पुरुष के माता-पिता के साथ रहता है। सत्ता के आधार पर पितृसत्तात्मक (patriarchal) परिवार वह है जिसमें पुरुष अधिकार और प्रभुत्व रखते हैं, और मातृसत्तात्मक (matriarchal) वह जिसमें निर्णय में स्त्रियों की प्रमुख भूमिका हो। NCERT यह भी जोड़ता है कि मातृवंशीय (matrilineal) समाज मिलते हैं, पर मातृसत्तात्मक समाज के बारे में वैसा दावा नहीं किया जा सकता। यह वाक्य परीक्षा में "matrilineal और matriarchal एक नहीं" के भेद के काम आता है।

तीसरा रूप महिला-मुखिया परिवार (female headed household) है। NCERT के अनुसार जब पुरुष शहरों की ओर प्रवास करते हैं, तो खेत और घर की ज़िम्मेदारी महिलाओं पर आती है और वे अक्सर परिवार की एकमात्र कमाने वाली बन जाती हैं। विधवा होना या पति के दोबारा विवाह कर लेने पर धन भेजना बंद करना भी ऐसी स्थिति बनाता है। NCERT के उदाहरण में महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कोलम आदिवासी समुदाय में महिला-मुखिया परिवार स्वीकृत सामान्य रूप है।

परिवार के प्रकार एक नज़र में

आधारप्रकारमुख्य लक्षणउदाहरण या टिप्पणी
संरचनाएकल (nuclear)पति-पत्नी और अविवाहित बच्चेऔद्योगिक समाजों में प्रमुख माना गया (कार्यात्मक मत)
संरचनाविस्तारित या संयुक्तकई पीढ़ियाँ और कई भाई-बहनों के परिवारभारत में NCERT ने इसके लुप्त होने की धारणा को सावधानी से परखने को कहा
निवासमातृस्थानीयजोड़ा स्त्री के माता-पिता के साथमातृवंशीय समाजों में
निवासपितृस्थानीयजोड़ा पुरुष के माता-पिता के साथभारत में सामान्य रूप
सत्तापितृसत्तात्मकपुरुषों का अधिकार और प्रभुत्वअधिकतर समाजों में
सत्तामातृसत्तात्मकनिर्णय में स्त्रियों की प्रमुख भूमिकाNCERT: ऐसे समाज का दावा नहीं किया जा सकता
मुखियामहिला-मुखियामहिला मुख्य कमाने वाली, प्रवास या विधवापन सेकोलम समुदाय में स्वीकृत सामान्य रूप (NCERT)

संरचना, निवास और सत्ता का आधार NCERT कक्षा 11 अध्याय 3 से; "टिप्पणी" के कुछ स्तंभों में हमारा सार है।

परिवार के कार्य: दो दृष्टियाँ

NCERT दो प्रमुख दृष्टिकोण रखता है। कार्यात्मक दृष्टि (functionalist) के अनुसार परिवार समाज की बुनियादी ज़रूरतें पूरी करता है और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखता है। इसी दृष्टि में एकल परिवार को औद्योगिक समाज की माँगों से निपटने वाली सबसे उपयुक्त इकाई माना गया, जिसमें पति "साधनात्मक" (instrumental) भूमिका में कमाने वाला और पत्नी "भावात्मक" (affective) भूमिका में घर सँभालने वाली मानी गई। NCERT इस चित्र को लैंगिक रूप से अन्यायपूर्ण और अनुभवजन्य रूप से भी अपुष्ट बताता है, क्योंकि गारमेंट निर्यात जैसे उद्योगों में महिलाएँ श्रम-बल का बड़ा हिस्सा हैं।

दूसरी, संघर्ष दृष्टि (conflict view) कहती है कि सभी लोग समाज में बराबर नहीं हैं। पारिवारिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक, कानूनी और शैक्षणिक सभी संस्थाएँ समाज के प्रभुत्वशाली वर्गों के हित में चलती हैं, चाहे वह वर्ग, जाति, जनजाति या जेंडर के आधार पर हों। परिवार पर लगाएँ तो प्रश्न बनता है कि परिवार पुरुषों और महिलाओं को किन अवसरों और किन बंधनों में रखता है।

इन दोनों के बीच एक व्यावहारिक सूची भी याद रखिए, जो समाजशास्त्रीय समझ से बनी है (विश्लेषण): बच्चों का समाजीकरण और मूल्यों का हस्तांतरण, भावनात्मक सुरक्षा, आर्थिक देखभाल और बुज़ुर्गों का सहारा, स्थिति और विरासत का हस्तांतरण, तथा नातेदारी के सहारे सामाजिक सुरक्षा। इन्हीं कार्यों में से पहला 2021 के प्रश्न का आधार है।

बदलता परिवार: क्या संयुक्त परिवार ख़त्म हो रहा है?

आम धारणा है कि आधुनिकता और शहरीकरण के साथ संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और एकल परिवार बढ़ रहे हैं। NCERT इस "सामान्य बुद्धि की धारणा" पर प्रश्न उठाता है और कहता है कि भारत में अध्ययन बताते हैं कि औद्योगिक अर्थव्यवस्था में भी परिवारों का एकल हो जाना ज़रूरी नहीं। समाजशास्त्री ए.एम. शाह के मत को NCERT उद्धृत करता है कि स्वतंत्र भारत में संयुक्त परिवार की संख्या लगातार बढ़ी है, और वह इसका एक कारण बढ़ती जीवन-प्रत्याशा बताते हैं, जिसके कारण वृद्धों का अनुपात बढ़ा और अधिकतर वृद्ध संयुक्त गृहस्थी में रहते हैं। NCERT इसे भी "व्यापक सामान्यीकरण" कहकर सावधानी रखने को कहता है।

यानी सही निष्कर्ष यह नहीं कि संयुक्त परिवार ख़त्म हो गया या फल-फूल रहा है, बल्कि यह कि प्रवृत्ति सब जगह एक-सी नहीं है और अनुभवजन्य अध्ययन ज़रूरी हैं। परिवर्तन और निरंतरता साथ चलते हैं: NCERT के शब्दों में परिवर्तन का अर्थ पुराने मानदंडों का पूरी तरह मिट जाना नहीं है।

इस बहस में आँकड़ा काम आता है। नीचे की तालिका में NFHS-5 (2019-21) के भारत और राजस्थान के अनुमान हैं। ध्यान रहे कि यह सर्वेक्षण-आधारित अनुमान है और "एकल" की परिभाषा ऊपर दी गई है।

NFHS-5 (2019-21): गृहस्थी की बनावट, भारत और राजस्थान

संकेतकभारतराजस्थान
एकल गृहस्थी (% गृहस्थियाँ)58.248.8
अ-एकल गृहस्थी (% गृहस्थियाँ)41.851.2
औसत गृहस्थी का आकार (व्यक्ति)4.45.1
एकल गृहस्थी, शहरी / ग्रामीण (%)61.3 / 56.751.8 / 47.8
जनसंख्या का हिस्सा: एकल / अ-एकल (%)तालिका में उपलब्ध नहीं37.3 / 62.7

पहुँच की तिथि: 2 अक्टूबर 2026।

राजस्थान का पहलू

NFHS-5 (2019-21, राजस्थान रिपोर्ट, अक्टूबर 2021) के अनुसार राजस्थान की 48.8% गृहस्थियाँ एकल हैं, जबकि भारत में 58.2%। राजस्थान में औसत गृहस्थी 5.1 व्यक्तियों की है (भारत: 4.4), और 62.7% जनसंख्या अ-एकल गृहस्थियों में रहती है। राज्य की 12.7% गृहस्थियों की मुखिया महिलाएँ हैं। यह भारत सरकार (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय) का सर्वेक्षण है, राज्य सरकार की गणना नहीं; पहुँच की तिथि 2 अक्टूबर 2026। (विश्लेषण: ये आँकड़े राजस्थान में बड़ी और अपेक्षाकृत अ-एकल गृहस्थियों की ओर संकेत करते हैं, पर कारण सर्वेक्षण से नहीं बताए जा सकते।)

परिवार और नैतिक विकास: 2021 का प्रश्न

प्रश्न है: "परिवार मनुष्य के नैतिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है।" इसे समझने के लिए यह देखिए कि बच्चा पहली बार "सच बोलना" कहाँ सीखता है। माँ-बाप की बातों से कम, उनके व्यवहार से अधिक। बड़ों का आदर, बाँटकर खाना, बहन-भाई के बीच न्याय, यह सब अनुकरण और स्नेह से सीखा जाता है। इसलिए समाजीकरण की पहली संस्था के रूप में परिवार नैतिक विकास की नींव है।

फिर भी "सबसे" शब्द पर सोचना चाहिए। विद्यालय, मित्र-मंडली, धार्मिक संस्थाएँ, मीडिया और कानून भी मूल्य गढ़ते हैं, और परिवार कभी-कभी जातिगत, लैंगिक या सांप्रदायिक पूर्वाग्रह भी सिखा सकता है। इसलिए संतुलित उत्तर कहेगा: परिवार प्रारंभिक और सबसे प्रभावी संस्था है, पर अकेली नहीं (विश्लेषण)। सिलेबस की पेपर II की पंक्ति में भी परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका साथ-साथ गिनाई गई है।

यहाँ संविधान भी जुड़ता है। अनुच्छेद 51A(k) के अनुसार छह से चौदह वर्ष के बच्चे के माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य है कि उसे शिक्षा के अवसर दे। यह खंड 86वें संशोधन (2002) से जुड़ा और 1 अप्रैल 2010 से लागू माना गया। यानी राज्य परिवार से अपेक्षा करता है कि वह बच्चे की शिक्षा का पहला उत्तरदायी बने।

परिवार, लिंग और अधिकार

NCERT पूछता है कि परिवार कितना लैंगिक (gendered) है। एक सामान्य विश्वास है कि बेटा बुढ़ापे में माता-पिता का सहारा बनेगा और बेटी विवाह के बाद चली जाएगी, इसलिए परिवार बेटे पर अधिक निवेश करते हैं। NCERT के अनुसार इसी सोच से परिवार बेटे पर अधिक निवेश करते हैं, और निम्न आयु वर्ग में बालिकाओं की शिशु मृत्यु दर बालकों से अधिक है।

क़ानून ने इस असमानता को संपत्ति के क्षेत्र में चुनौती दी। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 6 में 2005 के संशोधन के बाद बेटियाँ भी बेटों की तरह जन्म से सहदायिक (coparcener) मानी गईं। सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त 2020 को Vineeta Sharma बनाम Rakesh Sharma में स्पष्ट किया कि यह अधिकार जन्म से है, इसलिए यह आवश्यक नहीं कि पिता 9 सितंबर 2005 को जीवित रहे हों। इसे नीचे केस स्टडी में खोला गया है।

परीक्षा के लिए निष्कर्ष यह है कि परिवार बदल रहा है, और क़ानून इस बदलाव को तेज़ और संतुलित करने का साधन बनता है। परिवार को केवल भावनात्मक संस्था मानना अधूरा है; वह संपत्ति, अधिकार और सत्ता का भी क्षेत्र है।

आज परिवार के सामने चुनौतियाँ (विश्लेषण)

पहली चुनौती प्रवास और रोज़गार की है। जब कमाने वाले सदस्य दूर शहर में रहते हैं, तो गाँव के घर में बुज़ुर्गों की देखभाल और बच्चों की निगरानी कमज़ोर पड़ती है, और महिलाओं पर दोहरा बोझ आता है। NCERT का महिला-मुखिया परिवार का बॉक्स इसी स्थिति को दिखाता है। यह चुनौती बुज़ुर्गों के पृष्ठ से भी जुड़ती है।

दूसरी चुनौती भूमिकाओं के बदलने की है। जब पति और पत्नी दोनों कमाते हैं, तो घर के काम, बच्चों की देखभाल और निर्णय की पुरानी बँटवारे वाली व्यवस्था पर सवाल उठता है। NCERT ने ख़ुद कहा है कि साधनात्मक और भावात्मक भूमिकाओं का कठोर बँटवारा लैंगिक अन्याय है। इसलिए नई समझ में परिवार को साझेदारी की इकाई की तरह देखा जाने लगा है।

तीसरी चुनौती पीढ़ियों के बीच संवाद की है। तकनीक और शिक्षा के कारण बच्चे नई भाषा और नई अपेक्षाओं के साथ बड़े होते हैं, जबकि बुज़ुर्ग पुराने मूल्यों पर टिके रहते हैं। यहाँ नीति का काम परिवार को तोड़ना या ज्यों का त्यों बचाना नहीं, बल्कि उसे अधिकार, गरिमा और देखभाल की इकाई के रूप में सहारा देना है। परीक्षा में "चुनौतियाँ" के बाद "सुझाव" का हिस्सा जोड़ना न भूलिए: बुज़ुर्गों के लिए पेंशन और देखभाल सेवाएँ, महिलाओं के लिए समान अधिकार और बच्चों के लिए शिक्षा।

परिवार का नक्शा

परिवार

प्रकार

NCERT कक्षा 11

  • एकल और संयुक्त
  • मातृस्थानीय, पितृस्थानीय
  • पितृसत्तात्मक; महिला-मुखिया

कार्य

दो दृष्टियाँ

  • कार्यात्मक: सामाजिक व्यवस्था
  • संघर्ष: प्रभुत्वशाली वर्गों के हित
  • समाजीकरण और नैतिक विकास (2021)

बदलाव

निरंतरता और परिवर्तन

  • ए.एम. शाह: संयुक्त परिवार बढ़ा
  • NFHS-5: एकल 58.2% (भारत), 48.8% (राजस्थान)
  • प्रवास और महिला-मुखिया परिवार

क़ानून

अधिकार और कर्तव्य

  • हिंदू उत्तराधिकार, धारा 6 (2005)
  • Vineeta Sharma (2020)
  • अनुच्छेद 51A(k)

समय-रेखा: परिवार से जुड़े क़ानूनी मोड़

  1. 9 सितंबर 2005

    हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) के लागू होने की तिथि; बेटियाँ जन्म से सहदायिक

  2. 1 अप्रैल 2010

    अनुच्छेद 51A(k) लागू: 6 से 14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा का अभिभावक-कर्तव्य (86वाँ संशोधन 2002)

  3. 11 अगस्त 2020

    Vineeta Sharma बनाम Rakesh Sharma: बेटियों के अधिकार को सर्वोच्च न्यायालय की पुष्टि

तारीख़ें स्रोत-निर्णय और संविधान की पाद-टिप्पणियों से हैं।

मुख्य तथ्य

NFHS-5, भारत
58.2% गृहस्थियाँ एकल; औसत आकार 4.4 (2019-21)
NFHS-5, राजस्थान
48.8% एकल; औसत आकार 5.1; 62.7% जनसंख्या अ-एकल में; 12.7% महिला-मुखिया (2019-21)
Vineeta Sharma बनाम Rakesh Sharma
11 अगस्त 2020; बेटियाँ जन्म से सहदायिक; पिता का 9-9-2005 को जीवित होना आवश्यक नहीं
अनुच्छेद 51A(k)
6 से 14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा का अभिभावक-कर्तव्य; 86वाँ संशोधन 2002; 1-4-2010 से लागू
NCERT
परिवार के रूप: एकल, संयुक्त, मातृस्थानीय, पितृस्थानीय, महिला-मुखिया; ए.एम. शाह का मत
सिलेबस की पंक्ति
RPSC सिलेबस, 09-01-2026, पेपर I, इकाई III (क)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • संयुक्त परिवार के पतन को सिद्ध तथ्य की तरह लिख देना। NCERT इसे "सामान्य बुद्धि की धारणा" कहकर परखने की सलाह देता है; ए.एम. शाह का मत उलटा है।
  • NFHS-5 के "एकल गृहस्थी" को "परिवार टूटना" समझ लेना। एकल गृहस्थी में भी नातेदारी के रिश्ते चल सकते हैं (विश्लेषण)।
  • matrilineal और matriarchal को एक समझना। NCERT: मातृवंशीय समाज मिलते हैं, मातृसत्तात्मक के बारे में वैसा दावा नहीं।
  • 2021 के नैतिक विकास वाले प्रश्न में केवल परिवार की प्रशंसा लिखना। स्कूल, समाज और क़ानून की भूमिका तथा परिवार की सीमा भी लिखिए।
  • राजस्थान के आँकड़े को राज्य सरकार की गणना बताना। यह NFHS-5 का सर्वेक्षण-अनुमान है।
  • Vineeta Sharma में तारीख़ या बेंच गलत लिख देना। 11 अगस्त 2020, तीन न्यायाधीश; पक्का न हो तो केवल "सर्वोच्च न्यायालय, 2020" लिखिए।