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पेपर I · इकाई III (A)

वृद्धजन: समस्याएँ, क़ानून और योजनाएँ

वृद्धजनों की संख्या, सामाजिक-सांस्कृतिक वृद्धावस्था, समस्याएँ, भरण-पोषण अधिनियम 2007, पेंशन और स्वास्थ्य योजनाएँ, उत्तर-लेखन की दृष्टि से।

  • वृद्धजन
  • भरण-पोषण अधिनियम 2007
  • IGNOAPS
  • आयुष्मान वय वंदना
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग A: "Issues related to family and marriage, elderly people and disabled in present Indian society; impact of cyber crime and social media on Indian society." इस पृष्ठ पर बुज़ुर्ग हैं; दिव्यांग, साइबर अपराध और सोशल मीडिया के अलग पृष्ठ हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2021 में "राजस्थान में वृद्धावस्था पेंशन की पात्रता" और 2024 में "Socio-Cultural Ageing" पूछा गया (दोनों 2 अंक); यानी 2013-2024 के पेपरों में देखा गया रुझान एक योजना-आधारित और एक अवधारणा-आधारित प्रश्न का है।
  • भरण-पोषण अधिनियम 2007 की चार बातें (60 वर्ष, 10,000 रुपये, 60 दिन, धारा 24) किसी भी उत्तर को ठोस बनाती हैं।
  • पेंशन जैसे योजना-आधारित प्रश्न में संख्या से अधिक अंक इस बात पर मिलते हैं कि आप स्रोत (अधिसूचना) और आधार (BPL, आयु) स्पष्ट लिखें।

पहले सरल भाषा में: घर की बैठक और अकेली कुर्सी

एक पुराने मोहल्ले की कल्पना कीजिए। दादाजी की कुर्सी बैठक में रखी है, जहाँ घर के सब लोग आते-जाते उनसे बात करते हैं। फिर बेटा नौकरी के लिए दूसरे शहर चला गया, बहू और पोते साथ चले गए, और वही कुर्सी अब दिन भर अकेली पड़ी रहती है। दादाजी की पेंशन से रोटी चल जाती है, पर बात करने वाला कोई नहीं। यही बुज़ुर्गों की समस्या का सबसे गहरा पहलू है: आर्थिक से पहले सामाजिक अकेलापन। (यह समझाने के लिए गढ़ा गया दृश्य है, किसी वास्तविक परिवार का वर्णन नहीं।)

सिलेबस की पंक्ति "elderly people ... in present Indian society" है। पिछले प्रश्नों में 2021 में राजस्थान की वृद्धावस्था पेंशन की पात्रता और 2024 में "Socio-Cultural Ageing" पूछे गए, यानी एक योजना-आधारित और एक अवधारणा-आधारित प्रश्न। इसलिए दोनों तरह की तैयारी चाहिए।

तैयारी का क्रम सरल रखें: पहले अवधारणा और संख्या, फिर समस्याएँ, फिर क़ानून और योजनाएँ, और अंत में सुझाव। इस क्रम में कोई भी प्रश्न, चाहे 2 अंक का हो या 10 का, आसानी से बँध जाता है।

वृद्धजन कौन हैं और कितने हैं

भारत में सामान्यतः 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्ति को वरिष्ठ नागरिक माना जाता है; माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 की परिभाषा भी यही है (धारा 2(h))। जनगणना 2011 के अनुसार देश में 60 वर्ष और अधिक आयु के लगभग 10.38 करोड़ व्यक्ति थे।

देश की कुल आबादी लगभग 121 करोड़ थी, इसलिए इसका अनुपात 8.6 प्रतिशत के आसपास बैठता है (गणना: 10.38 / 121)। यह जनगणना-आधारित अनुमान है; उत्तर में "जनगणना 2011 के अनुसार" लिखना ज़रूरी है, क्योंकि यह अनुपात समय के साथ बदलता रहता है। PIB के अक्टूबर 2025 के दस्तावेज़ में भी 2011 में लगभग 10 करोड़ वरिष्ठ नागरिक बताए गए हैं।

सामाजिक-सांस्कृतिक वृद्धावस्था (Socio-Cultural Ageing): 2024 का प्रश्न

बुढ़ापा केवल उम्र का जैविक सवाल नहीं है; हर समाज यह तय करता है कि बूढ़े व्यक्ति से क्या अपेक्षा की जाए, उसे कैसा सम्मान मिले और उसकी भूमिका क्या हो। यही सामाजिक-सांस्कृतिक वृद्धावस्था है। इस अवधारणा को परीक्षा के लिए तीन बिंदुओं में लिखा जा सकता है: भूमिका का बदलना (नौकरी या घर की मुखिया की भूमिका से सेवानिवृत्ति और निर्भरता की ओर), संबंधों का बदलना (साथी, मित्र और परिवार के सदस्य कम होते जाना) और सांस्कृतिक अर्थ का बदलना (किसी संस्कृति में बुज़ुर्ग "अनुभव का भंडार", किसी में "बोझ")।

भारतीय संदर्भ में परंपरा बुज़ुर्गों के सम्मान की रही है, पर औद्योगीकरण, पलायन और छोटे होते परिवारों ने इस ढाँचे पर दबाव डाला है। संयुक्त परिवार के कमज़ोर होने से जहाँ पहले कई पीढ़ियाँ साथ रहकर देखभाल बाँट लेती थीं, वहाँ अब अकेले रहने वाले बुज़ुर्गों की संख्या बढ़ रही है। यह निष्कर्ष विश्लेषण है, किसी एक आधिकारिक कथन का उद्धरण नहीं।

बुज़ुर्गों की समस्याएँ (विश्लेषण)

समस्याओं को चार भागों में लिखें। यह वर्गीकरण उत्तर-लेखन की सुविधा के लिए है।

सामाजिक: अकेलापन और सामाजिक अलगाव, उपेक्षा और दुर्व्यवहार। आर्थिक: आय का स्रोत घटना, पेंशन या बचत पर निर्भरता और असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए पेंशन का अभाव। स्वास्थ्य: दीर्घकालिक बीमारियाँ, इलाज का ख़र्च और देखभाल की कमी। तकनीकी: डिजिटल विभाजन (digital divide), यानी सेवाओं के ऑनलाइन होने पर बुज़ुर्गों का पीछे रह जाना, जिसे PIB के दस्तावेज़ में भी चुनौती के रूप में गिना गया है।

स्त्री-बुज़ुर्गों की स्थिति और कठिन हो सकती है, क्योंकि उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और संपत्ति पर नियंत्रण प्रायः कम रहता है, और विधवा होने पर सामाजिक सुरक्षा का सवाल गंभीर हो जाता है (विश्लेषण)।

ग्रामीण और शहरी बुज़ुर्गों की समस्याएँ भी अलग रूप लेती हैं। गाँव में स्वास्थ्य-सुविधाओं तक दूरी, खेती पर निर्भरता और बच्चों के शहर चले जाने से अकेलापन प्रमुख है; शहर में छोटे घर, महँगा इलाज और सामुदायिक जुड़ाव की कमी। इसलिए उत्तर में "एक ही समाधान" के बजाय संदर्भ के अनुसार उपाय लिखना अधिक परिपक्व दिखता है। यह तुलना विश्लेषण है, किसी सर्वेक्षण के आँकड़ों का कथन नहीं।

बुज़ुर्गों की समस्याओं का वर्गीकरण (विश्लेषण)

श्रेणीउदाहरण
सामाजिकअकेलापन, उपेक्षा, दुर्व्यवहार
आर्थिकआय का अभाव, असंगठित क्षेत्र में पेंशन की कमी
स्वास्थ्यदीर्घकालिक रोग, इलाज का ख़र्च
तकनीकीडिजिटल विभाजन

यह तालिका उत्तर-लेखन की सुविधा के लिए है; यह किसी आधिकारिक वर्गीकरण का उद्धरण नहीं।

क़ानूनी ढाँचा: माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007

यह अधिनियम बुज़ुर्गों के भरण-पोषण को क़ानूनी अधिकार बनाता है। "संतान" में पुत्र, पुत्री, पौत्र और पौत्री शामिल हैं, पर नाबालिग नहीं। यदि संतान या रिश्तेदार अपनी ज़िम्मेदारी से मुकरें, तो वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिकरण (Maintenance Tribunal) में आवेदन कर सकता है। अधिकरण मासिक भत्ते का आदेश दे सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा राज्य सरकार तय करती है और जो 10,000 रुपये प्रति माह से अधिक नहीं हो सकती (धारा 9)। अधिकरण के आदेश के विरुद्ध 60 दिन के भीतर अपील हो सकती है।

धारा 23 के अनुसार यदि वरिष्ठ नागरिक ने इस शर्त पर संपत्ति हस्तांतरित की थी कि पाने वाला उसकी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करेगा और वह नहीं करता, तो अधिकरण हस्तांतरण को शून्य घोषित कर सकता है। धारा 24 में वरिष्ठ नागरिक को पूरी तरह छोड़ देने की नीयत से किसी जगह छोड़ आने पर 3 माह तक का कारावास या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हैं। अधिनियम के सभी अपराध संज्ञेय और ज़मानती हैं।

भरण-पोषण अधिनियम 2007 की प्रमुख धाराएँ

धाराविषयमुख्य प्रावधान
2(h)वरिष्ठ नागरिक60 वर्ष या अधिक आयु का भारतीय नागरिक
9भरण-पोषण का आदेशअधिकरण द्वारा; अधिकतम 10,000 रुपये प्रति माह (राज्य द्वारा निर्धारित सीमा)
अपीलअधिकरण के आदेश पर60 दिन के भीतर
23संपत्ति का हस्तांतरणशर्त न मानने पर शून्य घोषित हो सकता है
24परित्याग3 माह तक कारावास या 5,000 रुपये तक जुर्माना या दोनों

सरकारी योजनाएँ

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) 15 अगस्त 1995 से चल रहा है। इसकी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS) में BPL परिवार के 60 वर्ष और अधिक आयु के व्यक्तियों को 60 से 79 वर्ष पर 200 रुपये और 80 वर्ष या अधिक पर 500 रुपये प्रति माह केंद्र की ओर से मिलते हैं; राज्य इसमें अपनी ओर से राशि जोड़ सकते हैं।

स्वास्थ्य के स्तर पर आयुष्मान वय वंदना के अंतर्गत केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 70 वर्ष और अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, आय के भेद के बिना, आयुष्मान भारत PM-JAY का स्वास्थ्य कवर दिया है, जिसमें प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का कवर परिवार के आधार पर मिलता है। PIB के दस्तावेज़ में वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय वयोश्री योजना, अटल वय अभ्युदय योजना और हेल्पलाइन एल्डरलाइन का भी उल्लेख है, जिनका नाम उत्तर में उदाहरण के रूप में जोड़ा जा सकता है।

राजस्थान की वृद्धावस्था पेंशन की पात्रता: 2021 का प्रश्न

2021 में "राजस्थान में वृद्धावस्था पेंशन की पात्रता" पूछा गया था। राज्य की पेंशन-योजनाओं की पात्रता (आयु, आय या परिवार की स्थिति के मानदंड) राज्य सरकार की अधिसूचनाओं से तय होती है और समय-समय पर संशोधित होती रहती है। इसलिए परीक्षा के ठीक पहले राज्य सरकार की वर्तमान अधिसूचना से इन शर्तों का मिलान ज़रूर कर लें।

उत्तर में सुरक्षित तरीक़ा यह है कि पहले यह बताएँ कि पात्रता राज्य की अधिसूचना से तय होती है, और फिर केंद्रीय IGNOAPS की पुष्ट शर्त लिखें: आयु 60 वर्ष या अधिक और BPL होना। इससे उत्तर में कोई ऐसी संख्या नहीं जाती जो बदल चुकी हो।

दुर्व्यवहार के रूप और उनकी पहचान (विश्लेषण)

बुज़ुर्गों के साथ दुर्व्यवहार हमेशा मार-पीट के रूप में नहीं आता। यह भावनात्मक (अपमान, उपेक्षा, अकेला छोड़ देना), आर्थिक (पेंशन या संपत्ति पर क़ब्ज़ा, ज़बरदस्ती दस्तख़त करवाना) और शारीरिक (मारना, इलाज या भोजन रोकना) हो सकता है। अधिकतर मामले घर की चारदीवारी में होते हैं और शिकायत इसलिए नहीं होती कि पीड़ित अपने ही बच्चों के विरुद्ध कार्रवाई करने से हिचकता है। इसीलिए 2007 का अधिनियम अदालती मुक़दमे की जगह सरल अधिकरण-प्रक्रिया देता है।

समाज के स्तर पर दुर्व्यवहार की जड़ें अक्सर आर्थिक दबाव, छोटे घर और देखभाल करने वाले पर बढ़ते बोझ में मिलती हैं। इसलिए केवल सज़ा नहीं, देखभाल करने वाले परिवारों को सहायता, दिन-देखभाल केंद्र और जागरूकता भी समाधान का हिस्सा हैं (विश्लेषण)।

परिवार, पीढ़ियाँ और बदलती सोच (विश्लेषण)

सिलेबस में बुज़ुर्गों का विषय परिवार और विवाह के मुद्दों के बाद आता है, और दोनों जुड़े हैं। संयुक्त परिवार में बुज़ुर्ग निर्णय के केंद्र में होते थे; एकल परिवार में निर्णय पति-पत्नी और बच्चों के बीच सिमट जाते हैं, और बुज़ुर्ग कई बार "मेहमान" जैसी स्थिति में आ जाते हैं। पीढ़ियों के बीच मूल्यों का अंतर, जैसे करियर, विवाह और पैसे को लेकर नज़रिया, टकराव बढ़ाता है।

पर तस्वीर केवल अँधेरी नहीं है। कई परिवारों में दादा-दादी बच्चों की देखभाल और संस्कार का आधार हैं, और बुज़ुर्गों का अनुभव परिवार की स्थिरता में काम आता है। उत्तर में दोनों पक्ष लिखने से, यानी चुनौती और अवसर, एकतरफ़ा लगने की संभावना घटती है।

देखभाल की सामाजिक व्यवस्था: परिवार, बाज़ार और राज्य (विश्लेषण)

वृद्धजनों की देखभाल तीन जगहों से हो सकती है: परिवार, बाज़ार (निजी देखभाल-सेवाएँ, वृद्धाश्रम) और राज्य (पेंशन, स्वास्थ्य कवर, क़ानून)। भारत में परंपरागत रूप से परिवार मुख्य देखभालकर्ता रहा है, और इसी कारण नीति का एक सिद्धांत यह है कि बुज़ुर्गों को यथासंभव अपने घर और समुदाय में ही रहने दिया जाए (ageing in place), जबकि संस्थागत देखभाल अंतिम विकल्प हो।

पर जब परिवार की क्षमता घटती है, तब राज्य और समुदाय की भूमिका बढ़ जाती है। इसीलिए उत्तर में केवल "परिवार की ज़िम्मेदारी" लिखने के बजाय परिवार, समुदाय और राज्य की साझेदारी की बात लिखना बेहतर माना जाएगा।

आगे की राह (विश्लेषण)

उपायों को चार स्तरों में रखें: परिवार (सम्मानजनक संवाद, देखभाल की साझा ज़िम्मेदारी), समुदाय (वृद्धजन क्लब, दिन-देखभाल केंद्र), राज्य (पेंशन की पर्याप्तता, स्वास्थ्य-सेवा, अधिनियम का प्रभावी पालन और जागरूकता) और तकनीक (डिजिटल साक्षरता, सरल सेवाएँ)। अंत में यह जोड़ें कि बुज़ुर्ग केवल देखभाल के पात्र नहीं, अनुभव और कौशल का संसाधन भी हैं, इसलिए उन्हें उपयोगी भूमिकाओं में बनाए रखना सक्रिय वृद्धावस्था (active ageing) की दिशा है।

भरण-पोषण अधिनियम 2007 की प्रक्रिया

  1. संतान या रिश्तेदार की उपेक्षा

    वरिष्ठ नागरिक असहाय है

  2. अधिकरण में आवेदन

    भरण-पोषण अधिकरण (धारा 7 के अंतर्गत गठित)

  3. भत्ते का आदेश

    अधिकतम 10,000 रुपये प्रति माह (धारा 9)

  4. अपील

    60 दिन के भीतर

  5. परित्याग पर दंड

    धारा 24: 3 माह या 5,000 रुपये या दोनों

प्रक्रिया का सारांश; विवरण के लिए अधिनियम का पाठ देखें (विश्लेषण)।

मुख्य तथ्य

जनगणना 2011
60+ आयु के लगभग 10.38 करोड़ व्यक्ति
वरिष्ठ नागरिक की परिभाषा
60 वर्ष या अधिक आयु का भारतीय नागरिक (धारा 2(h))
भरण-पोषण भत्ता
अधिकतम 10,000 रुपये प्रति माह (राज्य द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर)
अपील की अवधि
60 दिन
धारा 24
3 माह तक कारावास या 5,000 रुपये तक जुर्माना या दोनों; अपराध संज्ञेय और ज़मानती
IGNOAPS
BPL, 60+; 200 रुपये (60-79 वर्ष), 500 रुपये (80+) प्रति माह; NSAP 15 अगस्त 1995 से
आयुष्मान वय वंदना
70+ सभी वरिष्ठ नागरिक; 5 लाख रुपये प्रति वर्ष (परिवार के आधार पर)
राजस्थान न्यूनतम गारंटीड आय अधिनियम, 2023
पेंशन की आधार दर 1,000 रुपये प्रति माह; सालाना 15 प्रतिशत वृद्धि; पात्रता नियमों से तय (2023)

राजस्थान का पहलू

राजस्थान की वृद्धावस्था पेंशन की पात्रता-शर्तें (आयु, आय, परिवार की स्थिति) राज्य सरकार की अधिसूचनाओं से तय होती हैं और समय-समय पर संशोधित होती हैं। इस पृष्ठ में किसी पुरानी शर्त को तथ्य की तरह नहीं दिया गया है; परीक्षा से पहले राज्य सरकार की वर्तमान अधिसूचना से मिलान कर लें। केंद्रीय IGNOAPS की पुष्ट शर्त: 60+ आयु और BPL (PIB, नवंबर 2025; देखा गया: 2 अक्टूबर 2026)। राजस्थान न्यूनतम गारंटीड आय अधिनियम, 2023 (2023 का अधिनियम 30) में वृद्धावस्था, विशेष योग्यजन, विधवा और एकल महिला के लिए पेंशन का प्रावधान है; आधार दर 1,000 रुपये प्रति माह है, उस पर सालाना 15 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान है और पात्रता की शर्तें नियमों से तय होंगी (अधिनियम का पाठ, PRS; देखा गया: 2 अक्टूबर 2026)।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • राज्य पेंशन की पात्रता में बिना स्रोत के आयु या आय की संख्या लिख देना; शर्तें बदलती हैं, इसलिए अधिसूचना का उल्लेख करें।
  • IGNOAPS की राशि को राज्य की राशि मान लेना; केंद्र की ओर से 200 और 500 रुपये हैं, राज्य अपनी ओर से जोड़ सकते हैं।
  • भरण-पोषण की सीमा को 10,000 रुपये "तय" राशि बताना; यह अधिकतम सीमा है, आदेश अधिकरण के विवेक पर होता है।
  • वरिष्ठ नागरिक की उम्र को 65 या 58 लिख देना; अधिनियम में 60 वर्ष है।
  • वृद्धावस्था को केवल आर्थिक समस्या बताना; सामाजिक अलगाव और डिजिटल विभाजन भी लिखें।