कमज़ोर वर्ग: हाशिये के समूह और दलित (Marginalised Groups and Dalits)
दलितों और हाशिये के समूहों की समस्याएँ, संवैधानिक और क़ानूनी सुरक्षा, बंधुआ मज़दूरी और सागड़ी, और "निर्बल वर्ग" के दुष्चक्र को तोड़ने के उपाय।
- अनुच्छेद 17
- PoA अधिनियम
- बंधुआ मज़दूरी
- दुष्चक्र
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग क (समाजशास्त्र): "Problems related to weaker sections of Indian society (with special reference to Rajasthan): women, marginalised groups, Dalits, SC and ST and their welfare schemes." इस पृष्ठ पर हाशिये के समूह (marginalised groups) और दलित (Dalits) हैं; महिलाओं और SC-ST कल्याण के अलग पृष्ठ हैं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में इस विषय से चार प्रश्न मिले: 2018 में सागड़ी प्रथा निषेध अधिनियम (2 अंक), 2016 में राजस्थान का सागड़ी निषेध अधिनियम कब और क्यों (2 अंक), 2013 पेपर III में राजस्थान की अल्पसंख्यक कल्याण नीति (2 अंक) और "निर्बल वर्ग इसलिए निर्बल हैं क्योंकि वे निर्बल हैं" (20 अंक, 200 शब्द)।
- चारों इकाई-सीमा पर हैं और अल्पसंख्यक तथा सागड़ी वाले प्रश्न सिलेबस के "marginalised groups" पर बैठाए गए हैं (विश्लेषण)। इसलिए यह पृष्ठ दलितों के साथ बंधुआ श्रम, अल्पसंख्यक और अन्य हाशिये के समूहों को भी समेटता है।
- 20 अंक वाला प्रश्न सबसे बड़ा है: इसमें "दुष्चक्र" (vicious circle) समझाकर शिक्षा, रोज़गार, क़ानूनी सुरक्षा और भागीदारी के उपाय देने होते हैं।
पहले सरल भाषा में: हाशिये का मतलब और दुष्चक्र
हाशिये के समूह (marginalised groups) वे समुदाय हैं जो समाज और अर्थव्यवस्था के केंद्र से दूर रखे गए: जाति, जनजाति, लिंग, धर्म, पेशे या अक्षमता के कारण। संविधान में दलितों के लिए क़ानूनी शब्द "अनुसूचित जाति" (Scheduled Castes) है, जिन्हें अनुच्छेद 341 के अंतर्गत राष्ट्रपति के आदेश से सूचीबद्ध किया जाता है।
दुष्चक्र ऐसे चलता है: ग़रीबी के कारण शिक्षा नहीं मिलती, शिक्षा के बिना अच्छा रोज़गार नहीं मिलता, कम आय से ग़रीबी बनी रहती है और ग़रीब को उधार के लिए ज़मींदार या साहूकार पर निर्भर रहना पड़ता है। उधार न चुका पाने पर बंधुआ मज़दूरी जैसी स्थिति बनती है। जब तक यह चक्र एक जगह से नहीं टूटता, हर पीढ़ी वहीं लौट आती है (विश्लेषण)।
समस्याएँ: अस्पृश्यता, अत्याचार और शोषण
दलितों की समस्याएँ कई स्तर की हैं। सामाजिक स्तर पर अस्पृश्यता और भेदभाव, आर्थिक स्तर पर भूमिहीनता, ऋण और बंधुआ मज़दूरी, शैक्षिक स्तर पर बीच में पढ़ाई छूटना और राजनीतिक स्तर पर कमज़ोर आवाज़। सबसे गंभीर रूप हिंसा और अत्याचार का है।
NCRB की "Crime in India 2022" के अनुसार 2022 में अनुसूचित जातियों के विरुद्ध अपराधों के 57,582 मामले दर्ज हुए, जो 2021 (50,900) से 13.1% अधिक हैं और अपराध-दर 25.3 से बढ़कर 28.6 हुई। इनमें सबसे अधिक मामले साधारण चोट (32.0%, 18,428), फिर आपराधिक धमकी (9.2%) और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत (8.2%, 4,703) थे। अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध 10,064 मामले (2021 से 14.3% अधिक) और दर 9.6 रही। रिपोर्ट के आँकड़े दर्ज मामलों के हैं, वास्तविक घटनाओं के नहीं (विश्लेषण)।
संवैधानिक ढाँचा
संविधान का पाठ (विधि एवं न्याय मंत्रालय) चार स्तर पर सुरक्षा देता है। पहला, समता: अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 15(1) (धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव निषेध) और अनुच्छेद 15(2) (दुकानों, कुओं, तालाबों, सड़कों तक पहुँच में कोई बाधा नहीं)। अनुच्छेद 15(4) राज्य को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों तथा अनुसूचित जातियों-जनजातियों के लिए विशेष प्रावधान की छूट देता है।
दूसरा, अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता समाप्त की गई है और किसी भी रूप में उसका आचरण निषिद्ध है; अस्पृश्यता से उपजी किसी निर्योग्यता को लागू करना क़ानून के अनुसार दंडनीय अपराध है। अनुच्छेद 23 मानव-व्यापार और बेगार तथा बलात् श्रम के अन्य रूपों को निषिद्ध करता है, जो बंधुआ श्रम पर लागू होता है। अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति के संरक्षण और शैक्षिक संस्थाएँ चलाने का अधिकार देते हैं।
तीसरा, अवसर और प्रतिनिधित्व: अनुच्छेद 16(2) सार्वजनिक नौकरी में भेदभाव रोकता है, 16(4) पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की छूट देता है और 16(4A) अनुसूचित जातियों-जनजातियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण की। अनुच्छेद 335 सेवाओं में SC-ST के दावों को प्रशासन की दक्षता के साथ संगत रूप से देखने को कहता है। अनुच्छेद 330 और 332 लोकसभा और विधानसभाओं में, तथा 243D पंचायतों में आरक्षण का आधार हैं।
चौथा, संस्थाएँ और निदेशक तत्व: अनुच्छेद 46 कहता है कि राज्य कमज़ोर वर्गों, विशेषकर SC-ST के शैक्षिक और आर्थिक हितों को विशेष ध्यान से बढ़ाएगा और उन्हें सामाजिक अन्याय और सब प्रकार के शोषण से बचाएगा। अनुच्छेद 338 राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का प्रावधान करता है, जो इन सुरक्षा-उपायों की जाँच और निगरानी करता है।
संविधान: मुख्य अनुच्छेद एक नज़र में
| अनुच्छेद | विषय | उत्तर में उपयोग |
|---|---|---|
| 15(2), 15(4) | भेदभाव-निषेध; पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान | समता और सकारात्मक कार्रवाई की बात |
| 16(2), 16(4), 16(4A) | नौकरी में समता; आरक्षण; पदोन्नति में आरक्षण | सेवाओं में प्रतिनिधित्व |
| 17 | अस्पृश्यता का उन्मूलन; निर्योग्यता दंडनीय | PCR और PoA अधिनियम का आधार |
| 23 | मानव-व्यापार और बेगार निषिद्ध | बंधुआ मज़दूरी, सागड़ी |
| 29, 30 | अल्पसंख्यकों की भाषा-संस्कृति और शैक्षिक संस्थाएँ | अल्पसंख्यक प्रश्न |
| 46 | कमज़ोर वर्गों के शैक्षिक-आर्थिक हित; शोषण से संरक्षण | योजनाओं का नीतिगत आधार |
| 330, 332, 243D | लोकसभा, विधानसभा और पंचायत में आरक्षण | राजनीतिक भागीदारी |
| 335, 338, 341 | सेवाओं में दावे; राष्ट्रीय SC आयोग; अनुसूचित जातियों की सूची | संस्थाएँ और परिभाषा |
क़ानून: अत्याचार निवारण और बंधुआ मज़दूरी
अस्पृश्यता और अत्याचार रोकने के लिए दो केंद्रीय क़ानून हैं: नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 (Protection of Civil Rights Act) और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (PoA Act)। PIB की वर्ष-अंत समीक्षा 2025 के अनुसार केंद्र दोनों के क्रियान्वयन के लिए राज्यों को सहायता देता है, जो विशेष थाने, न्यायिक तंत्र, पीड़ितों का राहत-पुनर्वास और अंतर्जातीय विवाह के प्रोत्साहन जैसे मदों पर होती है।
संशोधन अधिनियम, 2015 (2016 का अधिनियम 1) को राष्ट्रपति की स्वीकृति 31 दिसंबर 2015 को मिली और राजपत्र में 1 जनवरी 2016 को प्रकाशित हुआ। PIB के अनुसार यह 26 जनवरी 2016 से लागू हुआ। इसके मुख्य प्रावधान: सिर मुंडवाना, जूतों की माला पहनाना, सिंचाई या वन-अधिकार से वंचित करना, हाथ से मैला ढोना कराना, देवदासी बनाना, सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार जैसे नए अत्याचार; विशेष न्यायालय और विशेष लोक अभियोजक; पीड़ितों और गवाहों के अधिकारों का अध्याय; और लोक सेवकों की "जानबूझकर की गई उपेक्षा" की स्पष्ट परिभाषा।
2018 में सर्वोच्च न्यायालय के 20 मार्च 2018 के सुभाष काशीनाथ महाजन फ़ैसले के बाद संसद ने संशोधन किया। PIB के अनुसार लोकसभा ने 6 अगस्त 2018 को और राज्य सभा ने 9 अगस्त 2018 को विधेयक पारित किया। नई धारा 18A के अनुसार FIR दर्ज करने के लिए प्रारंभिक जाँच या गिरफ़्तारी के लिए अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है और अग्रिम ज़मानत की धारा (धारा 438, दंड प्रक्रिया संहिता; नई संहिता BNSS में यह धारा 482 है) इन मामलों में लागू नहीं होती।
बंधुआ मज़दूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 अधिनियम-पाठ के अनुसार 25 अक्टूबर 1975 से प्रभावी माना गया। धारा 4 के अनुसार प्रारंभ पर बंधुआ मज़दूरी प्रणाली समाप्त हो गई और हर बंधुआ मज़दूर मुक्त हो गया। धारा 5 के अनुसार ऐसी प्रथा या करार शून्य है और धारा 6 के अनुसार बंधुआ ऋण चुकाने का दायित्व समाप्त माना गया। धारा 2 की व्याख्या में बलात् श्रम के जिन स्थानीय रूपों को सूचीबद्ध किया गया है, उनमें "सागड़ी (Sagri)" भी है।
सागड़ी प्रथा और राजस्थान
सागड़ी बंधुआ श्रम का रूप है, जिसमें मज़दूर ऋण के बदले मालिक के यहाँ काम करता है। 1976 के केंद्रीय अधिनियम की धारा 2(b) के स्पष्टीकरण में इसका नाम "Sagri" दर्ज है, इसलिए राजस्थान में भी यह प्रथा ग़ैरक़ानूनी है। CEC के कार्य-पत्र (2007) के अनुसार 1976 का अधिनियम इंदिरा गांधी के 1975 के बीस-सूत्री कार्यक्रम के बाद आया, पर उसके क्रियान्वयन में कमज़ोरी रही। उसी कार्य-पत्र के अनुसार चित्तौड़गढ़ जैसे इलाक़ों में आदिवासी और निचली जातियाँ इस प्रथा की सबसे बड़ी आपूर्तिकर्ता थीं।
राजस्थान का अपना क़ानून भी था: CEC के कार्य-पत्र (2007) के अनुसार राजस्थान सागड़ी प्रथा उन्मूलन अधिनियम 1961 में पारित हुआ, पर उसकी जानकारी और अमल बहुत कमज़ोर रहा और 1975 के बाद केंद्र का अध्यादेश और 1976 का अधिनियम आ गए। इस राज्य-अधिनियम का आधिकारिक पाठ इस पृष्ठ के लिए नहीं खुल सका, इसलिए उसकी धाराएँ याद के भरोसे न लिखें। "कब और क्यों" वाले प्रश्न में क्यों (शोषण, ऋण-बंधन, अनुच्छेद 23) और कब (राजस्थान का अधिनियम 1961 "CEC के अनुसार"; केंद्र का अधिनियम 1976, 25 अक्टूबर 1975 से प्रभावी) दोनों लिखें।
हाशिये के अन्य समूह और योजनाएँ
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की PIB वर्ष-अंत समीक्षा 2025 के अनुसार अनुसूचित जातियों के लिए पूर्व-मैट्रिक और पश्च-मैट्रिक छात्रवृत्तियाँ चलती हैं। PM-AJAY (प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना) को 2021-22 में आदर्श ग्राम, अनुसूचित जाति उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता और बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना को मिलाकर शुरू किया गया (PIB, 7 अगस्त 2024)। इसके तीन घटक हैं: आदर्श ग्राम, ज़िला या राज्य-स्तरीय परियोजनाओं के लिए अनुदान और उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रावास।
SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना 12 फ़रवरी 2022 को शुरू हुई और उसके दो उप-भाग हैं: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण का और भीख माँगने में लगे व्यक्तियों के पुनर्वास का। NAMASTE योजना सीवर और सेप्टिक टैंक की सफ़ाई करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और गरिमा के लिए है, जो सामाजिक न्याय और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने मिलकर शुरू की; PIB (7 मार्च 2024) के अनुसार वह 2023-24 से 2025-26 तक तीन वर्ष के लिए है।
अल्पसंख्यकों के लिए संवैधानिक आधार अनुच्छेद 29 और 30 हैं। राजस्थान सरकार के अल्पसंख्यक मामलात एवं वक़्फ़ विभाग की वेबसाइट (देखा गया 2 अक्टूबर 2026) के अनुसार विभाग के अंतर्गत मदरसा बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग, हज कमेटी, वक़्फ़ बोर्ड और अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम (RMFDCC) हैं; विभाग अल्पसंख्यक छात्रावास, राजकीय अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय, छात्रवृत्ति (राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल से जुड़ी) और RMFDCC के ऋण जैसे कार्यक्रम चलाता है। "अल्पसंख्यक कल्याण नीति" के विशिष्ट प्रावधान किसी आधिकारिक नीति-दस्तावेज़ में नहीं मिले, इसलिए उत्तर में विभाग की संरचना, कार्यक्रम और संवैधानिक आधार ही लिखें।
दुष्चक्र कैसे टूटे: चार मोर्चे (विश्लेषण)
2013 के 20 अंक वाले प्रश्न में "निर्बल वर्ग इसलिए निर्बल हैं क्योंकि वे निर्बल हैं" का अर्थ है कि कमज़ोरी ख़ुद अपना कारण बन जाती है। इसे तोड़ने के लिए चार मोर्चों पर एक साथ काम चाहिए, क्योंकि एक जगह की मदद अगली कड़ी पर टूट जाती है।
पहला मोर्चा शिक्षा है: छात्रवृत्ति, छात्रावास और आवासीय विद्यालय। दूसरा आजीविका: उधार, कौशल और भूमि या ब्याज-सहायता जैसी योजनाएँ। तीसरा सुरक्षा: अत्याचार निवारण और बंधुआ मज़दूरी क़ानून का सख़्त अमल और पीड़ितों का पुनर्वास। चौथा भागीदारी: आरक्षण, पंचायत में नेतृत्व और अपनी आवाज़ उठाने वाले संगठन। इन चारों पर निगरानी रखने के लिए आयोग और सामाजिक अंकेक्षण भी चाहिए।
दुष्चक्र और उसे तोड़ने वाले चार मोर्चे
हाशिये के समूह और दलित
समस्या
दुष्चक्र
- ग़रीबी से कम शिक्षा
- कम आय और ऋण
- अस्पृश्यता, अत्याचार, बंधुआ श्रम
संविधान
अधिकार
- अनुच्छेद 15, 16, 17
- अनुच्छेद 23, 29, 30
- अनुच्छेद 46, 330, 335, 338, 341
क़ानून
सुरक्षा
- PCR अधिनियम 1955
- PoA अधिनियम 1989; संशोधन 2015, 2018 (धारा 18A)
- बंधुआ मज़दूरी (उन्मूलन) अधिनियम 1976
योजनाएँ
साधन
- छात्रवृत्ति, PM-AJAY
- SMILE, NAMASTE
- राजस्थान: पालनहार, अल्पसंख्यक छात्रावास और छात्रवृत्ति
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 17
- अस्पृश्यता समाप्त; निर्योग्यता लागू करना दंडनीय
- संशोधन अधिनियम 2015 (PoA)
- स्वीकृति 31 दिसंबर 2015; राजपत्र 1 जनवरी 2016; लागू 26 जनवरी 2016
- संशोधन 2018 (PoA)
- लोकसभा 6 अगस्त, राज्य सभा 9 अगस्त 2018; धारा 18A: प्रारंभिक जाँच और अनुमोदन नहीं; धारा 438 लागू नहीं
- बंधुआ मज़दूरी (उन्मूलन) अधिनियम, 1976
- 25 अक्टूबर 1975 से प्रभावी माना गया; धारा 4, 5, 6; सागड़ी का नाम धारा 2 की व्याख्या में
- NCRB 2022: SC के विरुद्ध अपराध
- 57,582 मामले (+13.1%); दर 28.6
- NCRB 2022: ST के विरुद्ध अपराध
- 10,064 मामले (+14.3%); दर 9.6
- PM-AJAY
- 2021-22 में तीन योजनाओं को मिलाकर शुरू; तीन घटक
- SMILE
- 12 फ़रवरी 2022; दो उप-योजनाएँ: ट्रांसजेंडर कल्याण और भीख माँगने वालों का पुनर्वास
- NAMASTE
- 2023-24 से 2025-26 तक तीन वर्ष; सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों के लिए
- अंतिम जाँच
- राजपत्र, PIB, NCRB और राज्य विभागों की वेबसाइटों से मिलान: 2 अक्टूबर 2026; राजस्थान के सागड़ी अधिनियम का वर्ष (1961) केवल CEC के कार्य-पत्र से है, आधिकारिक पाठ नहीं खुला; अल्पसंख्यक नीति के विशिष्ट प्रावधान सत्यापित नहीं हुए
राजस्थान का पहलू (आधिकारिक वेबसाइटों से, देखा गया 2 अक्टूबर 2026)
राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की वेबसाइट पर पालनहार योजना का अलग पृष्ठ और पोर्टल है। अल्पसंख्यक मामलात एवं वक़्फ़ विभाग की वेबसाइट के अनुसार उसके अंतर्गत मदरसा बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग, हज कमेटी, वक़्फ़ बोर्ड और RMFDCC हैं, और विभाग अल्पसंख्यक छात्रावास, आवासीय विद्यालय और छात्रवृत्ति के कार्यक्रम चलाता है। इन योजनाओं की राशि और पात्रता की शर्तें सत्यापित नहीं हुईं, इसलिए उत्तर में केवल नाम और उद्देश्य लिखें। (दोनों वेबसाइटें देखी गईं: 2 अक्टूबर 2026।)
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- राजस्थान के सागड़ी अधिनियम की तारीख़ या धाराएँ याद के भरोसे लिखना: पक्का न हो तो केंद्रीय 1976 के अधिनियम और अनुच्छेद 23 पर लिखें, जिसमें सागड़ी का नाम स्पष्ट दर्ज है।
- अनुच्छेद 17 और PCR/PoA अधिनियम को एक ही मान लेना: अनुच्छेद 17 संवैधानिक घोषणा है, जबकि PCR (1955) और PoA (1989) उसे और अत्याचार को दंडनीय बनाने वाले क़ानून हैं।
- PoA की 2018 की धारा 18A को सज़ा बढ़ाने वाला प्रावधान बताना: यह प्रक्रिया से जुड़ी है (प्रारंभिक जाँच, अनुमोदन और अग्रिम ज़मानत)।
- 20 अंक के उत्तर में केवल सूची लिख देना: "दुष्चक्र" समझाए बिना सुझाव देने पर प्रश्न का आधा हिस्सा छूट जाता है।
- अल्पसंख्यकों के लिए योजना-नाम अंदाज़े से लिखना: जो सत्यापित है (अनुच्छेद 29, 30, विभाग की संरचना) वही लिखें।
केस स्टडी: 2018 का महाजन फ़ैसला और संशोधन
केस स्टडीअदालत, संसद और अत्याचार निवारण अधिनियम
यह एक वास्तविक घटना है, जिसमें अत्याचार निवारण अधिनियम की प्रक्रिया पर सर्वोच्च न्यायालय और संसद के बीच टकराव दिखा। दोनों पक्ष ग़लत उपयोग रोकने और पीड़ितों को तुरंत न्याय देने के बीच संतुलन खोज रहे थे।
- 20 मार्च 2018: फ़ैसला
- PIB के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने डॉ. सुभाष काशीनाथ महाजन बनाम महाराष्ट्र राज्य में प्रारंभिक जाँच और वरिष्ठ अधिकारी के अनुमोदन के बाद ही गिरफ़्तारी जैसे निर्देश दिए।
- सरकार का तर्क
- PIB के अनुसार ये निर्देश FIR दर्ज होने में देरी करते और अधिनियम का कड़ा क्रियान्वयन कमज़ोर करते, क्योंकि सात दिन में जाँच के लिए पर्याप्त उप-पुलिस अधीक्षक हर जगह नहीं होते।
- 6 और 9 अगस्त 2018: संशोधन
- लोकसभा (6 अगस्त) और राज्य सभा (9 अगस्त) ने संशोधन विधेयक पारित किया और धारा 18A जोड़ी गई।
- धारा 18A का प्रभाव
- प्रारंभिक जाँच और अनुमोदन की आवश्यकता नहीं; धारा 438 (अग्रिम ज़मानत) लागू नहीं।
सीख
उत्तर में दोनों पक्ष रखें: पीड़ित को तुरंत संरक्षण और ग़लत मुक़दमे का ख़तरा। यह "संतुलन" वाली दृष्टि अच्छे अंक दिलाती है। इस विवाद के बाद के न्यायिक निर्णय इस पृष्ठ पर सत्यापित नहीं हैं (विश्लेषण)।
कार्य-उदाहरण: दुष्चक्र को चार मोर्चों पर तोड़ना (कल्पित परिवार)
हल सहित उदाहरणएक कल्पित भूमिहीन परिवार
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; परिवार और स्थान वास्तविक नहीं हैं।
- एक भूमिहीन दलित परिवार का मुखिया मौसमी मज़दूरी करता है और ज़मींदार से उधार लेकर क़र्ज़ में बँधा है। बच्चे की पढ़ाई छूटने वाली है।
- 1चरण 1: शिक्षा बच्चे को छात्रवृत्ति और छात्रावास से जोड़ा जाता है, ताकि पढ़ाई जारी रहे।
- 2चरण 2: आजीविका परिवार को कौशल और ब्याज-सहायता वाले ऋण से जोड़ा जाता है ताकि साहूकार पर निर्भरता घटे।
- 3चरण 3: सुरक्षा यदि बंधुआ श्रम की स्थिति है तो 1976 के अधिनियम के अनुसार ऋण समाप्त माना जाता है और मुक्त मज़दूर का पुनर्वास होता है। उत्पीड़न हो तो PoA अधिनियम में शिकायत।
- 4चरण 4: भागीदारी परिवार की महिला को पंचायत की बैठकों और स्वयं सहायता समूह से जोड़ा जाता है, ताकि निर्णय में आवाज़ बने (विश्लेषण)।
निष्कर्ष: निष्कर्ष: किसी एक योजना से चक्र नहीं टूटता; शिक्षा, आजीविका, सुरक्षा और भागीदारी साथ मिलकर अगली पीढ़ी को चक्र से बाहर निकालती हैं।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2018RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
What is 'Sagari Custom' Prohibition Act?
आदर्श उत्तर
सागड़ी ऋण-बंधन की प्रथा है; बंधुआ मज़दूरी (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 ने इसे समाप्त किया।
2016RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
When and why 'Saagri Prohibition Act' was passed in Rajasthan?
आदर्श उत्तर
ऋण-बंधन का शोषण रोकने को 1961 में पारित (CEC के अनुसार); 1976 का केंद्रीय अधिनियम बाद में।
2013RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
What are the features of the Minority Welfare Policy in Rajasthan?
आदर्श उत्तर
विभाग अल्पसंख्यक छात्रावास, आवासीय विद्यालय, छात्रवृत्ति और RMFDCC ऋण देता है; मदरसा व वक़्फ़ बोर्ड संबद्ध।
2013RAS मुख्य परीक्षापेपर III20 अंक
"Weak sections of society are weak because they are weak." How to break this vicious circle? Give suggestions to ameliorate the socio-economic condition of these groups.
आदर्श उत्तर
कमज़ोर वर्ग इसलिए कमज़ोर रहते हैं कि ग़रीबी, अशिक्षा और कम आय एक-दूसरे को पुष्ट करते हैं; ऋण से बंधुआ मज़दूरी जैसा शोषण पनपता है। इसे चार मोर्चों पर तोड़ा जा सकता है (विश्लेषण)।
शिक्षा: छात्रवृत्ति, छात्रावास और आवासीय विद्यालय।
आजीविका: कौशल, सस्ता ऋण और PM-AJAY जैसी योजनाएँ, जो गाँव-स्तर पर आय के साधन बनाती हैं।
सुरक्षा: अनुच्छेद 17 और 23, अत्याचार निवारण अधिनियम (संशोधन 2015, 2018) और बंधुआ मज़दूरी अधिनियम 1976 का सख़्त अमल, पीड़ितों का पुनर्वास।
भागीदारी: अनुच्छेद 330, 332 और 243D के आरक्षण, पंचायत में नेतृत्व और स्वयं सहायता समूह।
शिक्षा सबसे निर्णायक कड़ी है, क्योंकि वह आय, सम्मान और जागरूकता बढ़ाकर अगली पीढ़ी को बंधुआ श्रम जैसी निर्भरता से बाहर निकालती है। अल्पसंख्यकों के लिए अनुच्छेद 29-30 और अन्य हाशिये के समूहों के लिए SMILE जैसी योजनाएँ भी जुड़ती हैं।
राजस्थान में सामाजिक न्याय विभाग की पालनहार और अल्पसंख्यक विभाग की छात्रावास-छात्रवृत्ति योजनाएँ इसी दिशा में हैं। असली कसौटी अमल और सामाजिक सोच का बदलाव है, इसलिए राष्ट्रीय आयोग, राज्य के विभाग और सामाजिक अंकेक्षण से निगरानी चाहिए, ताकि लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुँचे और शिकायतें निपटें। केवल सहायता नहीं, आत्म-सम्मान और अवसर देने की दृष्टि चाहिए। शिक्षा, आजीविका, सुरक्षा और भागीदारी साथ चलें, तभी चक्र टूटेगा।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
अनुच्छेद 17 क्या कहता है?
आदर्श उत्तर
अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता समाप्त करता है; उसका आचरण निषिद्ध और उससे उपजी निर्योग्यता लागू करना दंडनीय है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2015 की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
आदर्श उत्तर
संशोधन अधिनियम, 2015 26 जनवरी 2016 से लागू हुआ। इसमें सिर मुंडवाना, जूतों की माला, हाथ से मैला ढोना कराना और सामाजिक बहिष्कार जैसे नए अत्याचार जुड़े, विशेष न्यायालय और विशेष लोक अभियोजक बने, पीड़ितों और गवाहों के अधिकारों का अध्याय आया और लोक सेवकों की उपेक्षा परिभाषित हुई।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
बंधुआ मज़दूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के प्रमुख प्रावधान बताइए।
आदर्श उत्तर
अधिनियम 25 अक्टूबर 1975 से प्रभावी माना गया। धारा 4 के अनुसार बंधुआ मज़दूरी प्रणाली समाप्त हुई और मज़दूर मुक्त हुए, धारा 5 के अनुसार ऐसे करार शून्य हैं और धारा 6 के अनुसार बंधुआ ऋण का दायित्व समाप्त माना गया। सागड़ी जैसे रूप धारा 2 की व्याख्या में सूचीबद्ध हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
दलितों की समस्याओं और उनके समाधान के संवैधानिक-क़ानूनी उपायों पर टिप्पणी कीजिए।
आदर्श उत्तर
दलितों की समस्याओं में अस्पृश्यता, भूमिहीनता, ऋण और बंधुआ मज़दूरी, कम शिक्षा और हिंसा हैं। NCRB 2022 के अनुसार अनुसूचित जातियों के विरुद्ध 57,582 मामले दर्ज हुए। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता समाप्त करता है, अनुच्छेद 23 बंधुआ श्रम रोकता है और अनुच्छेद 46 उनके शैक्षिक-आर्थिक हितों के संवर्धन की बात करता है।
PCR अधिनियम 1955, PoA अधिनियम 1989 (संशोधन 2015, 2018) और बंधुआ मज़दूरी अधिनियम 1976 सुरक्षा देते हैं। छात्रवृत्ति और PM-AJAY जैसी योजनाएँ साधन देती हैं, जबकि आरक्षण राजनीतिक भागीदारी बढ़ाता है। अमल और सामाजिक सोच बदले बिना समाधान अधूरा रहेगा (विश्लेषण)।
उत्तर कैसे लिखें (20 अंक, 200 शब्द)
भूमिका
प्रश्न: "कमज़ोर वर्ग इसलिए कमज़ोर हैं क्योंकि वे कमज़ोर हैं। इस दुष्चक्र को कैसे तोड़ा जाए?" पहले चार-पाँच वाक्यों में दुष्चक्र की कड़ियाँ गिनाएँ: ग़रीबी, अशिक्षा, कम आय, ऋण।
मुख्य भाग
- आधार: अनुच्छेद 15, 16, 17, 23, 46 और आयोग (338)
- शिक्षा: छात्रवृत्ति, छात्रावास, आवासीय विद्यालय
- आजीविका: कौशल, ऋण, PM-AJAY, ग्राम-स्तर की योजनाएँ
- सुरक्षा: PoA (2015 और 2018), बंधुआ मज़दूरी अधिनियम 1976, पुनर्वास
- भागीदारी: अनुच्छेद 330, 332, 243D का आरक्षण; पंचायत और SHG
- राजस्थान: सामाजिक न्याय विभाग की पालनहार, अल्पसंख्यक विभाग की छात्रावास-छात्रवृत्ति योजनाएँ (नाम से)
निष्कर्ष
निष्कर्ष: दुष्चक्र एक कड़ी के उपचार से नहीं, चारों मोर्चों के साथ-साथ अमल और सामाजिक सोच के बदलाव से टूटेगा।
अतिरिक्त मूल्य
- संतुलन: पीड़ित का तुरंत संरक्षण और ग़लत उपयोग की चिंता (महाजन फ़ैसले का उदाहरण)
- NCRB 2022 का एक आँकड़ा (57,582 मामले)
त्वरित पुनरावृत्ति
- अनुसूचित जातियाँ अनुच्छेद 341 से सूचीबद्ध; आयोग अनुच्छेद 338; अनुच्छेद 46 कमज़ोर वर्गों के हित
- अनुच्छेद 15(2), 15(4); 16(2), 16(4), 16(4A); 17 अस्पृश्यता उन्मूलन; 23 बेगार निषेध; 29-30 अल्पसंख्यक
- PCR अधिनियम 1955; PoA अधिनियम 1989
- PoA संशोधन 2015: स्वीकृति 31-12-2015; लागू 26-01-2016; नए अत्याचार, विशेष न्यायालय
- PoA संशोधन 2018: लोकसभा 6 अगस्त, राज्य सभा 9 अगस्त; धारा 18A (प्रारंभिक जाँच नहीं; धारा 438 लागू नहीं)
- बंधुआ मज़दूरी (उन्मूलन) अधिनियम 1976: 25 अक्टूबर 1975 से प्रभावी; धारा 4, 5, 6; सागड़ी का नाम
- NCRB 2022: SC के विरुद्ध 57,582; ST के विरुद्ध 10,064
- PM-AJAY (2021-22); SMILE (12-02-2022); NAMASTE (2023-24 से 2025-26)
- राजस्थान: पालनहार; अल्पसंख्यक विभाग (मदरसा बोर्ड, वक़्फ़ बोर्ड, RMFDCC, छात्रावास-छात्रवृत्ति); राजस्थान सागड़ी अधिनियम 1961 (CEC के अनुसार)
- PYQ: 2018 सागड़ी; 2016 राजस्थान सागड़ी; 2013 अल्पसंख्यक नीति; 2013 निर्बल वर्ग (20 अंक)
याद रखने योग्य शब्द
- दलित
- अनुच्छेद 17
- अत्याचार निवारण अधिनियम
- बंधुआ मज़दूरी
- सागड़ी
- दुष्चक्र
- PM-AJAY
- अल्पसंख्यक