कमज़ोर वर्ग: अनुसूचित जाति-जनजाति और उनके कल्याण की योजनाएँ (जनजाति केंद्रित)
राजस्थान की जनजातियाँ, उनका संवैधानिक संरक्षण (अनुच्छेद 342, पाँचवीं अनुसूची, PESA, वन अधिकार), कल्याण की योजनाएँ और समस्याएँ, गरासिया का उदाहरण।
- अनुच्छेद 342
- पाँचवीं अनुसूची
- PESA
- PM JANMAN
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग क (समाजशास्त्र): "Problems related to weaker sections of Indian society (with special reference to Rajasthan): women, marginalised groups, Dalits, SC and ST and their welfare schemes." इस पृष्ठ पर अनुसूचित जनजाति (ST) और उनके कल्याण की योजनाएँ हैं; महिलाओं और दलितों के अलग पृष्ठ हैं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में इस विषय से पाँच प्रश्न मिले, यानी हर पेपर-वर्ष में लगभग एक: 2016 में तीन-चार ज़िले जहाँ जनजाति केंद्रित है (2 अंक), 2018 में जनजातियों की समस्याओं के संवैधानिक प्रयास (5 अंक), 2021 में राजस्थान की जनजातियों की पाँच समस्याएँ (5 अंक), 2023 में गरासिया जनजाति की सामाजिक-आर्थिक रूपरेखा (5 अंक) और 2024 में भारत सरकार की जनजातीय कल्याण पहलें (5 अंक)।
- 2013-2024 के पेपरों में देखा गया: प्रश्न अक्सर राजस्थान की जनजातियों से पूछे गए, इसलिए हर उत्तर में एक राजस्थान का उदाहरण (भील, मीणा, गरासिया, सहरिया, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर) रखना अच्छा रहता है (विश्लेषण)।
- तैयारी के तीन हिस्से बनाइए: (क) कौन और कहाँ (अनुच्छेद 342, ST आदेश, ज़िले), (ख) संविधान और क़ानून (पाँचवीं अनुसूची, PESA, वन अधिकार अधिनियम), (ग) योजनाएँ और समस्याएँ।
पहले सरल भाषा में: अनुसूचित जनजाति कौन है
अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) वह समुदाय है जिसे संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत राष्ट्रपति की अधिसूचना से सूचीबद्ध किया गया हो। अनुच्छेद 342(1) के अनुसार राष्ट्रपति राज्य के राज्यपाल से परामर्श के बाद सार्वजनिक अधिसूचना से जनजातियाँ या उनके हिस्से तय करते हैं, और 342(2) के अनुसार इस सूची में जोड़ने या हटाने का अधिकार केवल संसद के क़ानून को है। यानी कोई सरकार या अदालत अपनी ओर से किसी समुदाय को ST नहीं बना सकती।
राजस्थान के लिए सूची संविधान (अनुसूचित जनजातियाँ) आदेश, 1950 के भाग XIII में है, जिसमें 12 प्रविष्टियाँ हैं: भील (भील गरासिया, डूँगरी भील आदि सहित), भील मीणा, डामोर, ढांका, गरासिया (राजपूत गरासिया को छोड़कर), कथोड़ी, कोकणा, कोली ढोर, मीणा, नायकड़ा, पटेलिया और सेहरिया (सहरिया)। इस पर परीक्षा की नज़र इसलिए रहती है कि "गरासिया" की प्रविष्टि में राजपूत गरासिया शामिल नहीं हैं।
राजस्थान की जनजातीय जनसंख्या और केंद्रित ज़िले
जनगणना 2011 पर आधारित दिल्ली सरकार के योजना विभाग और NHSRC, दोनों की तालिकाओं के अनुसार राजस्थान की अनुसूचित जनजाति जनसंख्या 92.38 लाख (9,238,534) है, जो राज्य की जनसंख्या का 13.5 प्रतिशत है। इसी तालिका में भारत की ST जनसंख्या 1,042.81 लाख (8.6 प्रतिशत) दी है, जबकि PIB की PM-JANMAN विज्ञप्ति और प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट इसे "10.45 करोड़" लिखती है, यानी स्रोतों में पूर्णांक का अंतर है। परीक्षा में "लगभग 10.4 करोड़" लिखना सुरक्षित है।
जनजाति दक्षिणी राजस्थान में सबसे अधिक केंद्रित है। NHSRC के आँकड़ों (जनगणना 2011) में ST का हिस्सा बाँसवाड़ा में लगभग 76.4 प्रतिशत, डूँगरपुर में 70.8 प्रतिशत, प्रतापगढ़ में 63.4 प्रतिशत और उदयपुर में लगभग 50 प्रतिशत है। इसी क्षेत्र की पुष्टि PIB की 2018 की मंत्रिमंडल-विज्ञप्ति से होती है, जिसमें अनुसूचित क्षेत्र में बाँसवाड़ा, डूँगरपुर और प्रतापगढ़ पूरे ज़िले के रूप में और उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, पाली और सिरोही आंशिक रूप में आते हैं। इसलिए 2016 के "चार ज़िले" वाले प्रश्न में बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर लिखे जा सकते हैं।
2001 की जनगणना पर आधारित राज्य सरकार की RRLP रिपोर्ट के अनुसार राज्य की ST जनसंख्या में मीणा 53.5 प्रतिशत और भील को मिलाकर लगभग 93 प्रतिशत हैं; गरासिया, डामोर, ढांका और सहरिया मिलाकर 6.6 प्रतिशत। बाक़ी जनजातियाँ बहुत छोटी हैं।
संवैधानिक ढाँचा: समता, प्रतिनिधित्व और विशेष प्रशासन
संविधान जनजातियों को तीन तरह से सुरक्षा देता है। पहला, विशेष प्रावधान की छूट और अवसर: अनुच्छेद 15(4) (पिछड़े वर्गों और SC-ST के लिए विशेष प्रावधान), अनुच्छेद 16(4) और 16(4A) (सेवाओं और पदोन्नति में आरक्षण), अनुच्छेद 46 (कमज़ोर वर्गों, विशेषकर SC-ST के शैक्षिक-आर्थिक हितों का संवर्धन और शोषण से संरक्षण)। अनुच्छेद 330 और 332 लोकसभा और विधानसभा में तथा 243D पंचायतों में सीटों के आरक्षण का आधार हैं, और अनुच्छेद 335 सेवाओं में उनके दावों पर दक्षता को ध्यान में रखकर विचार करने को कहता है।
दूसरा, संस्था: अनुच्छेद 338A राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) का प्रावधान करता है, जो ST के लिए सुरक्षा-उपायों की जाँच और निगरानी करता है, विशिष्ट शिकायतों की जाँच करता है, उनके सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना-प्रक्रिया में सलाह देता है और राष्ट्रपति को वार्षिक रिपोर्ट देता है। अनुच्छेद 164(1) के परंतुक में जनजातीय कल्याण के लिए अलग मंत्री का प्रावधान छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा के लिए है, राजस्थान के लिए नहीं। यह एक आम भ्रम है।
तीसरा, विशेष प्रशासन: अनुच्छेद 244(1) के अनुसार पाँचवीं अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम को छोड़कर शेष राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातियों के प्रशासन पर लागू होती है; राजस्थान इसी श्रेणी में है। अनुच्छेद 275(1) के परंतुक में संघ राज्यों को जनजातीय कल्याण की योजनाओं और अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन को बाक़ी राज्य के स्तर तक लाने के लिए संचित निधि से अनुदान देता है।
संविधान: मुख्य अनुच्छेद एक नज़र में
| अनुच्छेद | विषय | उत्तर में उपयोग |
|---|---|---|
| 15(4), 16(4), 16(4A) | विशेष प्रावधान; सेवाओं और पदोन्नति में आरक्षण | अवसर और प्रतिनिधित्व |
| 46 | SC-ST के शैक्षिक-आर्थिक हित; शोषण से संरक्षण | नीति का आधार |
| 243D, 330, 332, 335 | पंचायत, लोकसभा, विधानसभा में आरक्षण; सेवाओं में दावे | राजनीतिक भागीदारी |
| 244(1) और पाँचवीं अनुसूची | अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन | राजस्थान के भील-क्षेत्र |
| 243M | पंचायत भाग अनुसूचित क्षेत्रों पर सीधे लागू नहीं; संसद अपवादों सहित विस्तार कर सकती है | PESA का संवैधानिक आधार |
| 275(1) परंतुक | जनजातीय कल्याण के लिए संघ का अनुदान | योजनाओं की निधि |
| 338A, 342 | राष्ट्रीय ST आयोग; ST की सूची | संस्था और परिभाषा |
पाँचवीं अनुसूची: अनुसूचित क्षेत्र का प्रशासन
पाँचवीं अनुसूची का मूल विचार है कि जनजातीय क्षेत्रों में सामान्य राज्य-क़ानून आँख मूँदकर लागू न हों। पैरा 3 के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र वाले राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति को वार्षिक रिपोर्ट देता है और संघ की कार्यपालिका राज्य को निर्देश दे सकती है। पैरा 4 के अनुसार हर ऐसे राज्य में अधिकतम 20 सदस्यों की जनजाति सलाहकार परिषद (Tribes Advisory Council) बनती है, जिसमें लगभग तीन-चौथाई सदस्य विधानसभा के ST प्रतिनिधि होते हैं।
पैरा 5 राज्यपाल को अधिसूचना से यह तय करने की शक्ति देता है कि संसद या राज्य का कोई क़ानून अनुसूचित क्षेत्र में लागू नहीं होगा या संशोधनों के साथ लागू होगा। राज्यपाल शांति और सुशासन के लिए विनियम भी बना सकता है, जिनसे जनजाति की ज़मीन का हस्तांतरण रोका या सीमित किया जा सकता है, ज़मीन का आवंटन नियंत्रित हो सकता है और जनजातियों को ऋण देने वाले साहूकारों के कारोबार का नियमन हो सकता है। यही तीन बातें (ज़मीन, आवंटन, साहूकारी) जनजातीय समस्याओं की जड़ से जुड़ती हैं।
राजस्थान में अनुसूचित क्षेत्र 12 फ़रवरी 1981 के राष्ट्रपति आदेश (C.O. 114) से घोषित थे। PIB (25 अप्रैल 2018) के अनुसार मंत्रिमंडल ने उस आदेश को रद्द कर नया आदेश बनाने को स्वीकृति दी, क्योंकि ज़िलों के पुनर्गठन और 2011 की जनगणना में ST जनसंख्या बदलने के बाद राज्य सरकार ने विस्तार माँगा था।
PESA अधिनियम 1996 और वन अधिकार अधिनियम 2006
अनुच्छेद 243M(1) के कारण पंचायती राज का भाग IX अनुसूचित क्षेत्रों पर अपने आप लागू नहीं होता; 243M(4)(b) संसद को अपवादों और संशोधनों के साथ उसे बढ़ाने की शक्ति देता है। इसी शक्ति से पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) बना। PIB (22 दिसंबर 2025) के अनुसार यह अधिनियम पंचायती राज को जनजातीय-प्रधान पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों तक ले जाता है, ग्राम सभा की बढ़ी हुई शक्तियाँ इसका केंद्र हैं और राज्य के विधानमंडल इसकी इन विशेषताओं के विरुद्ध पंचायत-क़ानून नहीं बना सकते। उसी विज्ञप्ति के अनुसार दस राज्यों में पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्र हैं, जिनमें राजस्थान शामिल है, और राजस्थान उन राज्यों में है जिन्होंने PESA नियम बना लिए हैं।
वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act, FRA) पर 29 दिसंबर 2006 की तिथि दर्ज है (2007 का अधिनियम 2)। अधिनियम-पाठ के अनुसार यह वन में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के उन वन-अधिकारों को मान्यता देता है, जो पीढ़ियों से थे पर दर्ज नहीं हुए। धारा 4(3) के अनुसार शर्त यह है कि 13 दिसंबर 2005 से पहले उन्होंने वन-भूमि पर क़ब्ज़ा किया हो; धारा 4(4) के अनुसार अधिकार वंशानुगत हैं पर बेचे या हस्तांतरित नहीं किए जा सकते और विवाहितों के नाम संयुक्त रूप से दर्ज होंगे।
PIB (7 अगस्त 2014) के अनुसार इस अधिनियम में रहने और खेती के लिए भूमि का अधिकार, लघु वन उपज (MFP) पर स्वामित्व, उपयोग और निपटान का अधिकार, निस्तार जैसे सामुदायिक अधिकार, आदिम जनजातीय समूहों के आवास के अधिकार और सामुदायिक वन-संसाधन के संरक्षण-प्रबंधन का अधिकार शामिल हैं। निर्णय की प्रक्रिया ग्राम सभा, उपखंड-स्तरीय समिति और ज़िला-स्तरीय समिति से गुज़रती है। राजस्थान में दावों के निपटान की संख्या इस पृष्ठ पर सत्यापित नहीं है, इसलिए उत्तर में संख्या न लिखें।
कल्याण की योजनाएँ: PVTG, PM JANMAN और धरती आबा अभियान
जनजातियों में भी कुछ समूह अत्यंत पिछड़े हैं, जिन्हें विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) कहते हैं। PIB (4 जुलाई 2019) के अनुसार इनके मानदंड हैं: कृषि-पूर्व स्तर की तकनीक, कम साक्षरता, आर्थिक पिछड़ापन और घटती या स्थिर जनसंख्या। 75 PVTG समुदाय 18 राज्यों और अंडमान-निकोबार में हैं; राजस्थान की PVTG सूची में सहरिया (Saharia) है। राज्य सरकार की RRLP रिपोर्ट भी सहरिया को बाराँ ज़िले के शाहबाद और किशनगंज क्षेत्र का एकमात्र "आदिम" समूह बताती है।
PM JANMAN (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) को मंत्रिमंडल ने 29 नवंबर 2023 को ₹24,104 करोड़ (केंद्र ₹15,336 करोड़, राज्य ₹8,768 करोड़) के साथ स्वीकृति दी। इसमें नौ मंत्रालयों के ज़रिए 11 हस्तक्षेप हैं: पक्के मकान, सड़कें, पेयजल, मोबाइल मेडिकल यूनिट, छात्रावास, आँगनवाड़ी, बहुउद्देशीय केंद्र, विद्युतीकरण और सौर प्रकाश जैसे। इसका शुभारंभ 15 नवंबर 2023 को जनजातीय गौरव दिवस पर हुआ।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान को मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2024 को ₹79,156 करोड़ (केंद्र ₹56,333 करोड़, राज्य ₹22,823 करोड़) के साथ स्वीकृति दी और 2 अक्टूबर 2024 को शुरू किया गया। PIB और प्रधानमंत्री कार्यालय, दोनों के अनुसार इसमें 17 मंत्रालयों के 25 हस्तक्षेप हैं, लगभग 63,000 जनजाति-बहुल गाँव, 5 करोड़ से अधिक लोग और 549 ज़िले। ब्लॉकों की संख्या दोनों स्रोतों में अलग है (2,911 और 2,740), इसलिए इसे नहीं लिखें। यह अभियान PM JANMAN के अनुभव पर बना है और स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और गाँव के बुनियादी ढाँचे की कमियाँ भरने पर ज़ोर देता है।
राजस्थान की जनजातियों की पाँच प्रमुख समस्याएँ
राज्य सरकार की RRLP रिपोर्ट (2001 की जनगणना पर आधारित) और NHSRC की 2011 की तालिकाओं से समस्याएँ इस प्रकार निकलती हैं। पहली, शिक्षा: 2001 में लगभग 20 लाख जनजातीय बच्चों (5 से 14 वर्ष) में से लगभग 9.2 लाख (46 प्रतिशत) स्कूल नहीं जाते थे, और डामोर, भील, सहरिया और गरासिया की साक्षरता राज्य और राष्ट्रीय औसत से कम थी। 2011 में भी बाँसवाड़ा में कुल साक्षरता 47 प्रतिशत के सामने ST साक्षरता 40 प्रतिशत थी और डूँगरपुर में 50 के सामने 43।
दूसरी, आजीविका और ग़रीबी: रिपोर्ट के अनुसार जनजातियाँ मुख्यतः छोटी जोतों वाली, कम सिंचाई वाली खेती पर टिकी हैं; ST कार्यबल का 83.1 प्रतिशत खेती पर निर्भर है, जबकि सामान्य वर्ग में यह 65.9 प्रतिशत है। क्षेत्र में उपजाऊ भूमि, सिंचाई, उद्योग और कौशल के अवसर कम हैं। तीसरी, ऋण और पलायन: परियोजना-सर्वेक्षण के अनुसार परंपरागत साहूकार ST परिवारों के 55 प्रतिशत के ऋण का स्रोत है और 17 प्रतिशत ST परिवारों में कोई सदस्य रोज़गार के लिए प्रवास करता है, अधिकतर राजस्थान के बाहर।
चौथी, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचा: NIRD की तालिका के अनुसार 31 मार्च 2017 को राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों में उप-केंद्र 2,897 चाहिए थे और 1,658 थे (कमी 1,239), PHC 434 की जगह 209 और CHC 108 की जगह 65 थे। पाँचवीं, ज़मीन और कर्ज़ से जुड़ा शोषण तथा सामाजिक-भौगोलिक अलगाव: इसी कारण पाँचवीं अनुसूची के पैरा 5 की शक्तियाँ महत्त्वपूर्ण हैं। राज्य की RRLP रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 में जनजाति की ज़मीन ग़ैर-जनजाति को बेचने या दान करने पर रोक है। इस रिपोर्ट के आँकड़े पुराने हैं (2001), इसलिए इन्हें "2001 के अनुसार" लिखें।
गरासिया जनजाति: संक्षिप्त रूपरेखा (2023 का प्रश्न)
गरासिया राजस्थान की अनुसूचित जनजाति है; ST आदेश के भाग XIII में प्रविष्टि "गरासिया (राजपूत गरासिया को छोड़कर)" है, और भील के अंतर्गत "भील गरासिया" तथा "डूँगरी गरासिया" भी हैं। RRLP रिपोर्ट के अनुसार गरासिया सिरोही ज़िले के आबू रोड क्षेत्र के 24 गाँवों ("भाखर पट्टा") में रहते हैं। PIB (2018) के अनुसार सिरोही का कुछ भाग अनुसूचित क्षेत्र में शामिल है।
2001 के आँकड़ों में उनकी कार्य-भागीदारी दर 49.4 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक बताई गई है, महिलाओं की दर 47.1 प्रतिशत थी, अधिकांश कामगार काश्तकार थे और साक्षरता तथा स्कूल-उपस्थिति राज्य औसत से कम थी। 2011 की जनगणना में गरासिया की अलग जनसंख्या, साक्षरता और व्यवसाय के आँकड़े इस पृष्ठ के स्रोतों में उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए वे आँकड़े "आधिकारिक अधिसूचना में प्रकाशित नहीं" की श्रेणी में हैं और उत्तर में नहीं लिखने चाहिए।
जनजातीय समस्याएँ, संविधान, क़ानून और योजनाएँ
अनुसूचित जनजाति और कल्याण
समस्याएँ
राजस्थान
- कम साक्षरता और स्कूल से बाहर बच्चे
- छोटी जोत, कम सिंचाई, ऋण, पलायन
- स्वास्थ्य संरचना की कमी, ज़मीन का शोषण
संविधान
सुरक्षा
- अनुच्छेद 15(4), 16(4), 46
- अनुच्छेद 243D, 330, 332, 335, 338A, 342
- 244(1) और पाँचवीं अनुसूची (पैरा 3, 4, 5)
क़ानून
अधिकार
- PESA 1996 (ग्राम सभा)
- वन अधिकार अधिनियम 2006
- राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955
योजनाएँ
साधन
- PVTG विकास योजना; सहरिया
- PM JANMAN (₹24,104 करोड़)
- धरती आबा अभियान (₹79,156 करोड़)
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 342
- राष्ट्रपति की अधिसूचना से ST सूची; जोड़ने-हटाने का अधिकार केवल संसद के क़ानून को
- राजस्थान की ST सूची
- संविधान (ST) आदेश 1950, भाग XIII में 12 प्रविष्टियाँ; गरासिया (राजपूत गरासिया को छोड़कर)
- राजस्थान की ST जनसंख्या (2011)
- 92.38 लाख; राज्य का 13.5 प्रतिशत
- केंद्रित ज़िले (2011)
- बाँसवाड़ा लगभग 76.4, डूँगरपुर 70.8, प्रतापगढ़ 63.4 और उदयपुर लगभग 50 प्रतिशत
- अनुसूचित क्षेत्र, राजस्थान (2018)
- मंत्रिमंडल की स्वीकृति 25 अप्रैल 2018; 3 पूरे ज़िले, 9 तहसीलें, 1 ब्लॉक, 46 ग्राम पंचायतें, 227 गाँव; पुराना आदेश C.O. 114 (12-02-1981)
- पाँचवीं अनुसूची
- पैरा 3: राज्यपाल की वार्षिक रिपोर्ट; पैरा 4: जनजाति सलाहकार परिषद (अधिकतम 20 सदस्य); पैरा 5: क़ानूनों की प्रयोज्यता और विनियम
- PESA अधिनियम
- 1996; पाँचवीं अनुसूची के 10 राज्य; राजस्थान ने PESA नियम बनाए
- वन अधिकार अधिनियम
- 29 दिसंबर 2006 (2007 का अधिनियम 2); शर्त: 13 दिसंबर 2005 से पहले क़ब्ज़ा; अधिकार वंशानुगत, अहस्तांतरणीय
- PVTG
- 75 समुदाय, 18 राज्य और अंडमान-निकोबार; राजस्थान: सहरिया
- PM JANMAN
- 29 नवंबर 2023; ₹24,104 करोड़ (केंद्र 15,336; राज्य 8,768); 11 हस्तक्षेप, 9 मंत्रालय
- धरती आबा अभियान
- 18 सितंबर 2024 की स्वीकृति; शुभारंभ 2 अक्टूबर 2024; ₹79,156 करोड़; 25 हस्तक्षेप, 17 मंत्रालय; 549 ज़िले
राजस्थान का पहलू
इस पृष्ठ की राजस्थान-संबंधी बातें केंद्र और राज्य के आधिकारिक दस्तावेज़ों से हैं: संविधान (ST) आदेश 1950 का भाग XIII, 2011 की जनगणना पर आधारित तालिकाएँ और PIB की 25 अप्रैल 2018 की विज्ञप्ति। राज्य के जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग की योजनाओं के नाम, राशि और पात्रता की शर्तें इस पृष्ठ पर सत्यापित नहीं हुईं, इसलिए उत्तर में राज्य योजनाओं के लिए केवल "राज्य सरकार की योजनाएँ" लिखें और नाम तभी दें जब निश्चित हो।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- ST और SC को एक ही अनुच्छेद से जोड़ना: अनुसूचित जातियों की सूची अनुच्छेद 341 से और अनुसूचित जनजातियों की सूची अनुच्छेद 342 से बनती है; ST आयोग अनुच्छेद 338A का है।
- राजस्थान को अनुच्छेद 164(1) के जनजातीय कल्याण मंत्री वाले परंतुक में गिनना: वह परंतुक छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा के लिए है।
- छठी और पाँचवीं अनुसूची को मिलाना: राजस्थान पाँचवीं अनुसूची में है; छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों के लिए है।
- PM JANMAN और धरती आबा अभियान की राशि और संख्या उलट देना: ₹24,104 करोड़ PM JANMAN (PVTG) की है और ₹79,156 करोड़ धरती आबा अभियान की।
- पुराने आँकड़े (2001) को हाल का बताना: जो आँकड़ा 2001 की जनगणना का है उसके साथ वर्ष लिखें।
केस स्टडी: 2018 में राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार
केस स्टडीनया राष्ट्रपति आदेश और 1981 का आदेश रद्द
यह एक वास्तविक घटना है। राजस्थान सरकार के अनुरोध पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 अप्रैल 2018 को राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों की नई घोषणा को स्वीकृति दी। यह दिखाता है कि अनुसूचित क्षेत्र की सीमा स्थायी नहीं रहती।
- पुराना आदेश
- 12 फ़रवरी 1981 का C.O. 114 रद्द किया जाना था और नया संविधान आदेश जारी होना था (PIB)।
- कारण
- ज़िलों का पुनर्गठन और 2011 की जनगणना में ST जनसंख्या में बदलाव; राज्य सरकार ने विस्तार का अनुरोध किया था (PIB)।
- नया क्षेत्र
- बाँसवाड़ा, डूँगरपुर और प्रतापगढ़ तीन पूरे ज़िले; उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, पाली और सिरोही में 9 पूरी तहसीलें, 1 पूरा ब्लॉक और 46 ग्राम पंचायतें (227 गाँव)।
- लाभ
- इन क्षेत्रों की ST को पाँचवीं अनुसूची के संरक्षणकारी उपाय मिलेंगे, यानी राज्यपाल के पैरा 5 के विनियम और जनजाति सलाहकार परिषद की भूमिका।
सीख
उत्तर में बताइए कि संवैधानिक संरक्षण सीमाओं पर निर्भर करता है और सीमाएँ जनसंख्या के साथ बदलती हैं; यही "संवैधानिक प्रयास" वाले प्रश्न में गतिशील उदाहरण है। 2018 के बाद की किसी अधिसूचना-संख्या या तिथि को इस पृष्ठ पर सत्यापित नहीं किया गया है (विश्लेषण)।
कार्य-उदाहरण: PM JANMAN की लागत-मानक से बस्ती का हिसाब (कल्पित बस्ती)
हल सहित उदाहरणएक कल्पित PVTG बस्ती
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; बस्ती और संख्या वास्तविक नहीं हैं।
- एक बस्ती में 40 परिवार कच्चे घरों में रहते हैं और गाँव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए 3 किमी सड़क चाहिए।
- PIB (29 नवंबर 2023) के लागत-मानक: पक्का मकान ₹2.39 लाख प्रति मकान; जोड़ने वाली सड़क ₹1.00 करोड़ प्रति किमी।
- 1चरण 1: मकान 40 मकान × ₹2.39 लाख = ₹95.6 लाख।
- 2चरण 2: सड़क 3 किमी × ₹1.00 करोड़ = ₹3.00 करोड़ = ₹300 लाख।
- 3चरण 3: कुल ₹95.6 लाख + ₹300 लाख = ₹395.6 लाख, यानी लगभग ₹3.96 करोड़ (केवल इन दो मदों का)।
- 4चरण 4: बाक़ी हस्तक्षेप पेयजल, आँगनवाड़ी, मोबाइल मेडिकल यूनिट और बिजली जैसी मदें अलग लागत-मानक से जुड़ेंगी (विश्लेषण)।
निष्कर्ष: निष्कर्ष: ऐसे हिसाब से दिखता है कि PM JANMAN बस्ती की मूलभूत कमियों को मदवार भरता है। परीक्षा में केवल राशि नहीं, "सभी मंत्रालयों का समन्वय" भी लिखिए।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2024RAS मुख्य परीक्षापेपर I5 अंक
Tribal welfare initiatives of Government of India
आदर्श उत्तर
भारत सरकार ने PVTG के लिए PM JANMAN (₹24,104 करोड़) और जनजाति-बहुल गाँवों के लिए धरती आबा अभियान (₹79,156 करोड़, 25 हस्तक्षेप) चलाए हैं। अनुच्छेद 275(1) के अनुदान, अनुच्छेद 338A का आयोग, PESA और वन अधिकार अधिनियम भी अधिकार और निधि देते हैं।
2023RAS मुख्य परीक्षापेपर I5 अंक
Socio-economic profile of the Garasia tribe
आदर्श उत्तर
गरासिया राजस्थान की ST हैं (राजपूत गरासिया को छोड़कर), जो मुख्यतः सिरोही के आबू रोड क्षेत्र में रहते हैं। 2001 के आँकड़ों में कार्य-भागीदारी 49.4 प्रतिशत थी, अधिकांश काश्तकार थे और साक्षरता राज्य-औसत से कम थी। 2011 के अलग ब्योरे इन स्रोतों में प्रकाशित नहीं हैं, इसलिए नहीं दिए।
2021RAS मुख्य परीक्षापेपर I5 अंक
Write five major problems of tribal community of Rajasthan.
आदर्श उत्तर
1. कम साक्षरता और स्कूल से बाहर बच्चे। 2. छोटी जोत, कम सिंचाई, ग़रीबी। 3. साहूकारी ऋण और पलायन। 4. स्वास्थ्य संरचना की कमी। 5. ज़मीन का शोषण और अलगाव। सहरिया जैसे PVTG और भी पिछड़े हैं। ये बातें मुख्यतः 2001 के आँकड़ों पर आधारित हैं।
2018RAS मुख्य परीक्षापेपर I5 अंक
What are the Constitutional efforts to solve the problems of tribes in Rajasthan?
आदर्श उत्तर
अनुच्छेद 342 सूची बनाता है; 15(4), 16(4), 46 विशेष प्रावधान देते हैं; 330, 332, 243D आरक्षण देते हैं; 338A आयोग बनाता है। पाँचवीं अनुसूची में राज्यपाल ज़मीन-हस्तांतरण और साहूकारी नियंत्रित करता है; PESA ग्राम सभा को शक्ति देता है। 2018 में अनुसूचित क्षेत्र भी बढ़ाए गए।
2016RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
Name four districts of Rajasthan where tribal population is concentrated.
आदर्श उत्तर
बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर, जहाँ ST जनसंख्या सबसे अधिक केंद्रित है (जनगणना 2011)।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
अनुच्छेद 342 के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति कैसे घोषित होती है?
आदर्श उत्तर
राष्ट्रपति राज्यपाल से परामर्श कर अधिसूचित करते हैं; सूची में बदलाव केवल संसद के क़ानून से।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
पाँचवीं अनुसूची के पैरा 3, 4 और 5 की प्रमुख बातें बताइए।
आदर्श उत्तर
पैरा 3 में राज्यपाल राष्ट्रपति को अनुसूचित क्षेत्रों की वार्षिक रिपोर्ट देता है। पैरा 4 जनजाति सलाहकार परिषद बनाता है, जिसमें अधिकतम 20 सदस्य होते हैं। पैरा 5 राज्यपाल को क़ानूनों की प्रयोज्यता तय करने और ज़मीन-हस्तांतरण तथा साहूकारी पर विनियम बनाने की शक्ति देता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रमुख प्रावधान बताइए।
आदर्श उत्तर
यह अधिनियम वन में रहने वाली ST और अन्य परंपरागत वनवासियों के अधिकार मान्य करता है: निवास-खेती की भूमि, लघु वन उपज और निस्तार जैसे सामुदायिक अधिकार। शर्त 13 दिसंबर 2005 से पहले का क़ब्ज़ा है। अधिकार वंशानुगत हैं, बेचे नहीं जा सकते और निर्णय ग्राम सभा से शुरू होता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
PM JANMAN और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की तुलना कीजिए।
आदर्श उत्तर
PM JANMAN नवंबर 2023 में ₹24,104 करोड़ से 75 PVTG समुदायों के लिए शुरू हुआ। इसके 11 हस्तक्षेप नौ मंत्रालयों से जुड़े हैं: पक्के मकान, सड़क, पेयजल, मोबाइल मेडिकल यूनिट और छात्रावास। राजस्थान में इसका लक्ष्य-समूह सहरिया है।
धरती आबा अभियान (अक्टूबर 2024) ₹79,156 करोड़ का है और लगभग 63,000 जनजाति-बहुल गाँवों तथा 5 करोड़ से अधिक लोगों के लिए है। इसमें 17 मंत्रालयों के 25 हस्तक्षेप हैं। दोनों समन्वय पर टिके हैं; पहला विशिष्ट समूहों पर, दूसरा पूरे गाँवों पर केंद्रित है। दोनों की सफलता राज्य स्तर पर अमल, ग्राम सभा की भागीदारी और निरंतर निगरानी पर निर्भर करेगी (विश्लेषण)।
उत्तर कैसे लिखें (5 अंक, 50 शब्द; 10 अंक में दोगुना)
भूमिका
प्रश्न: "राजस्थान की जनजातियों की समस्याओं के संवैधानिक प्रयास।" पहली पंक्ति में अनुच्छेद 342 और राजस्थान की 12 जनजातियाँ।
मुख्य भाग
- अवसर: अनुच्छेद 15(4), 16(4), 46; आरक्षण 330, 332, 243D
- संस्था: अनुच्छेद 338A (राष्ट्रीय ST आयोग)
- विशेष प्रशासन: पाँचवीं अनुसूची के पैरा 3, 4, 5; ज़मीन और साहूकारी पर विनियम
- स्वशासन और संसाधन: PESA 1996 और वन अधिकार अधिनियम 2006
- राजस्थान का उदाहरण: 2018 में अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार (3 पूरे ज़िले)
निष्कर्ष
निष्कर्ष: संवैधानिक ढाँचा अधिकार देता है, पर साक्षरता, स्वास्थ्य और आजीविका की कमियाँ अमल और योजनाओं के समन्वय से ही भरेंगी।
अतिरिक्त मूल्य
- सहरिया (PVTG) का उदाहरण
- PM JANMAN या धरती आबा की एक पंक्ति
- 2001 के आँकड़ों के साथ वर्ष लिखना
त्वरित पुनरावृत्ति
- ST की सूची अनुच्छेद 342; आयोग 338A; SC की सूची 341
- राजस्थान में 12 ST (ST आदेश 1950 भाग XIII); गरासिया (राजपूत गरासिया छोड़कर); सहरिया PVTG
- ST जनसंख्या (2011): 92.38 लाख, 13.5 प्रतिशत
- केंद्रित ज़िले: बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर
- पाँचवीं अनुसूची: पैरा 3 (रिपोर्ट), 4 (परिषद, 20 सदस्य), 5 (क़ानून, ज़मीन, साहूकार); अनुच्छेद 244(1), 243M
- अनुसूचित क्षेत्र: 1981 (C.O. 114); 25 अप्रैल 2018 का नया आदेश (3 पूरे ज़िले, 227 गाँव आदि)
- PESA 1996 (ग्राम सभा); FRA: 29-12-2006, कटऑफ़ 13-12-2005
- PM JANMAN ₹24,104 करोड़ (29-11-2023); धरती आबा ₹79,156 करोड़ (18-09-2024; शुभारंभ 02-10-2024)
- PYQ: 2024 जनजातीय पहलें; 2023 गरासिया; 2021 पाँच समस्याएँ; 2018 संवैधानिक प्रयास; 2016 चार ज़िले
याद रखने योग्य शब्द
- अनुच्छेद 342
- पाँचवीं अनुसूची
- PESA
- वन अधिकार अधिनियम
- PVTG
- सहरिया
- गरासिया
- PM JANMAN