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समाजशास्त्र · पेपर I · इकाई III (क)

कमज़ोर वर्ग: महिलाएँ (Women), राजस्थान के विशेष संदर्भ में

महिलाओं के लिए संवैधानिक प्रावधान, क़ानून, मिशन शक्ति और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, और राजस्थान का सात सूत्री कार्यक्रम, उत्तर-लेखन की दृष्टि से।

  • सात सूत्री कार्यक्रम
  • मिशन शक्ति
  • BBBP
  • अनुच्छेद 243D
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग क (समाजशास्त्र): "Problems related to weaker sections of Indian society (with special reference to Rajasthan): women, marginalised groups, Dalits, SC and ST and their welfare schemes." इस पृष्ठ पर महिलाएँ (women) हैं; हाशिये के समूह, दलित और SC-ST के अलग पृष्ठ हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में महिलाओं से जुड़े चार प्रश्न मिले: 2021 पेपर I (10 अंक) में मुख्यमंत्री का सात सूत्री कार्यक्रम, 2016 पेपर I (5 अंक) में लैंगिक असमानता के परिणाम, 2013 पेपर I (5 अंक) में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और 2013 पेपर III (5 अंक) में राजस्थान के महिला-कल्याण कार्यक्रम।
  • चारों प्रश्न इकाई-सीमा पर थे (अर्थव्यवस्था या दूसरी इकाई में छपे), इसलिए सिलेबस की इस पंक्ति के लिए सबसे सुरक्षित तैयारी है: राजस्थान की योजनाएँ, केंद्र की योजनाएँ और संवैधानिक-क़ानूनी आधार (विश्लेषण)।
  • हर उत्तर में तीन परतें रखें: संविधान और क़ानून (अधिकार), योजनाएँ (साधन) और आँकड़े (प्रमाण)। राजस्थान का आँकड़ा या कार्यक्रम जोड़ने से उत्तर विशेष रूप से राजस्थान के लिए लिखा दिखता है।

पहले सरल भाषा में: महिलाओं को "कमज़ोर वर्ग" क्यों कहा जाता है

महिलाएँ संख्या में कम नहीं हैं, लगभग आधी आबादी हैं। उन्हें कमज़ोर वर्ग इसलिए कहा जाता है कि समाज की संरचना में उनके पास संसाधन, निर्णय-शक्ति और सुरक्षा कम रही है। इसे ऐसे समझें: एक परिवार में बेटे की पढ़ाई पर पैसा लगता है और बेटी की जल्दी शादी हो जाती है। आगे चलकर बेटी की कमाई, संपत्ति और आवाज़, तीनों कम रह जाती हैं। यह व्यक्तिगत कमी नहीं, सामाजिक ढाँचे की उपज है।

इसी कारण राज्य ने दो तरीक़ों से हस्तक्षेप किया है। पहला, अधिकार देकर: संविधान, क़ानून और आरक्षण। दूसरा, साधन देकर: स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और रोज़गार की योजनाएँ। इस पृष्ठ का ढाँचा भी यही है: पहले संविधान और आँकड़े, फिर क़ानून, फिर केंद्र की और राजस्थान की योजनाएँ, और अंत में चुनौतियाँ।

संविधान में महिलाओं के लिए प्रावधान

भारतीय संविधान का पाठ (विधि एवं न्याय मंत्रालय) महिलाओं के लिए सामान्य और विशेष, दोनों तरह के प्रावधान देता है। अनुच्छेद 14 सभी को विधि के समक्ष समता देता है और अनुच्छेद 15(3) कहता है कि राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान करने से यह अनुच्छेद नहीं रोकेगा। यही प्रावधान आरक्षण और महिला-विशेष योजनाओं को संवैधानिक आधार देता है।

राज्य के नीति-निदेशक तत्वों में अनुच्छेद 39(a) कहता है कि पुरुष और महिला नागरिकों को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार हो, और 39(d) में पुरुषों और महिलाओं के लिए समान काम का समान वेतन है। अनुच्छेद 42 राज्य से काम की न्यायसंगत और मानवीय दशाओं तथा प्रसूति-सहायता (maternity relief) की व्यवस्था करने को कहता है। मूल कर्तव्यों में अनुच्छेद 51A(e) हर नागरिक से महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध प्रथाओं को त्यागने की अपेक्षा रखता है।

स्थानीय निकायों में अनुच्छेद 243D(3) के अनुसार पंचायतों में प्रत्यक्ष चुनाव से भरी जाने वाली कुल सीटों में से कम से कम एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, और अनुच्छेद 243T(3) में यही नगरपालिकाओं के लिए है। राजस्थान जैसे राज्य में यह ग्राम-स्तर पर नेतृत्व का रास्ता खोलता है।

संविधान: महिलाओं से जुड़े अनुच्छेद, एक नज़र में

अनुच्छेदक्या कहता हैउत्तर में कैसे जोड़ें
14 और 15(3)विधि के समक्ष समता; महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान की छूटआरक्षण और महिला-योजनाओं का आधार
39(a), 39(d)समान रूप से जीविका के साधन; समान काम का समान वेतनआर्थिक सशक्तिकरण वाले प्रश्नों में
42काम की मानवीय दशाएँ और प्रसूति-सहायतास्वास्थ्य, मातृत्व और कामकाजी महिलाएँ
51A(e)महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग (मूल कर्तव्य)दहेज, भेदभाव, हिंसा पर प्रश्न
243D(3), 243T(3)पंचायत और नगरपालिका की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिएस्थानीय शासन में भागीदारी
330A, 332A, 334A (106वाँ संशोधन)लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें; प्रभावी होने के लिए परिसीमन की शर्तराजनीतिक आरक्षण का नया चरण

राजनीतिक भागीदारी: नारी शक्ति वंदन अधिनियम

संविधान (106वाँ संशोधन) अधिनियम, 2023 को नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है। संविधान के पाठ (2024) में जुड़े अनुच्छेद 330A और 332A के अनुसार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में, जहाँ तक संभव हो, एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। अनुच्छेद 334A(1) कहता है कि यह आरक्षण संशोधन के प्रारंभ के बाद की पहली जनगणना के आँकड़े प्रकाशित होने पर परिसीमन (delimitation) के बाद ही प्रभावी होगा और संशोधन के प्रारंभ से पंद्रह वर्ष की अवधि बीतने पर समाप्त हो जाएगा।

संविधान के 2024 के पाठ की टिप्पणियों में इन धाराओं की तिथि "अभी अधिसूचित होनी है" लिखी थी। प्रेस-रिपोर्टों (Telangana Today, LawBeat, अप्रैल 2026) के अनुसार केंद्र ने 16 अप्रैल 2026 को अधिनियम के लागू होने की तिथि अधिसूचित की, पर आरक्षण का वास्तविक अमल अब भी जनगणना के बाद के परिसीमन पर टिका बताया गया है। इस शर्त को बदलने के लिए 2026 में लाए गए संशोधन-प्रस्तावों (Down To Earth, 16 अप्रैल 2026) का अंतिम परिणाम इस पृष्ठ पर सत्यापित नहीं है, इसलिए उत्तर में "जनगणना के बाद परिसीमन" की मूल शर्त लिखें और ताज़ा स्थिति सरकारी अधिसूचना या संसद के रिकॉर्ड से देखें।

महिलाओं की स्थिति: मुख्य आँकड़े

लिंगानुपात (sex ratio) का अर्थ है प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या। MoSPI की "Women and Men in India 2016" के अनुसार 2011 में भारत का लिंगानुपात 943 था। उसी तालिका 1.3 में राजस्थान का आँकड़ा 928 है, और राजस्थान फ़ाउंडेशन (राज्य सरकार) की सारणी भी राजस्थान के लिए 928 और भारत के लिए 943 देती है। यानी राजस्थान राष्ट्रीय औसत से 15 अंक पीछे है।

0 से 6 वर्ष के बच्चों में राजस्थान का बाल लिंगानुपात (child sex ratio) 2011 में 888 है (Women and Men in India 2016, तालिका 1.4, और राजस्थान फ़ाउंडेशन)। यह कुल लिंगानुपात 928 से भी कम है, जो जन्म के समय लड़कियों के साथ भेदभाव का संकेत है (विश्लेषण)।

सुरक्षा के पक्ष पर NCRB की "Crime in India 2022" के अनुसार 2022 में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के 4,45,256 मामले दर्ज हुए, जो 2021 (4,28,278) से 4.0% अधिक हैं। प्रति लाख महिला जनसंख्या दर 66.4 रही। IPC के अंतर्गत इनमें सबसे अधिक मामले "पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता" (31.4%), फिर "महिलाओं का अपहरण" (19.2%), "लज्जा भंग करने के इरादे से हमला" (18.7%) और बलात्कार (7.1%) के थे। दर्ज मामलों में वृद्धि का अर्थ अपराध बढ़ना और रिपोर्टिंग बढ़ना, दोनों हो सकता है (विश्लेषण)।

लिंगानुपात और अपराध: चुनिंदा आँकड़े

सूचकभारतराजस्थानस्रोत-वर्ष
लिंगानुपात (प्रति 1000 पुरुष)943928जनगणना 2011
बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष)राष्ट्रीय आँकड़ा इस पृष्ठ पर नहीं दिया गया888जनगणना 2011
महिलाओं के विरुद्ध अपराध, कुल दर्ज मामले4,45,256राज्य का आँकड़ा इस पृष्ठ पर नहीं दिया गयाNCRB 2022
अपराध-दर (प्रति लाख महिला)66.4राज्य का आँकड़ा इस पृष्ठ पर नहीं दिया गयाNCRB 2022

क़ानूनी संरक्षण

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के लिए अलग प्रावधान हैं। गृह मंत्रालय के पाठ में धारा 63 बलात्कार (rape) को परिभाषित करती है और धारा 64 उसका दंड बताती है। धारा 74 महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमले या बल-प्रयोग, धारा 75 यौन उत्पीड़न (sexual harassment), धारा 77 दृश्यरतिकता (voyeurism) और धारा 78 पीछा करने (stalking) से जुड़ी है। दहेज-मृत्यु धारा 80 में है, और पति या पति के रिश्तेदार द्वारा क्रूरता धारा 85 में, जिसका अर्थ धारा 86 में दिया है। मानव-तस्करी की धाराएँ वेश्यावृत्ति वाले पृष्ठ पर दी गई हैं।

विशेष क़ानूनों में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 और महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के नाम RPSC के पुराने प्रश्नों में सीधे आए हैं (2018, 2016 और 2021 के पेपर)। इनकी धारा-स्तर की तैयारी क़ानून वाले अनुभाग में होगी; समाजशास्त्र के उत्तर में केवल नाम, वर्ष और उद्देश्य लिखना पर्याप्त है।

केंद्र की योजनाएँ: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और मिशन शक्ति

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP) योजना 22 जनवरी 2015 को पानीपत (हरियाणा) से शुरू हुई। PIB के अनुसार इसका लक्ष्य घटते बाल लिंगानुपात को रोकना, लिंग-आधारित चयनात्मक भ्रूण-विलोपन रोकना और बालिका के जीवित रहने, संरक्षण तथा शिक्षा को सुनिश्चित करना है। उसी स्रोत के अनुसार जन्म के समय का राष्ट्रीय लिंगानुपात (SRB) 2014-15 के 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 (अनंतिम) हुआ और माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) 75.51% से बढ़कर 78% हुआ।

मिशन शक्ति महिला-सुरक्षा और सशक्तिकरण की समेकित (umbrella) योजना है, जो 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-22 से 2025-26) के लिए बनी। इसके दो उप-भाग हैं: संबल (Sambal, सुरक्षा) और सामर्थ्य (Samarthya, सशक्तिकरण)। संबल में वन स्टॉप सेंटर (OSC), महिला हेल्पलाइन 181, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और नारी अदालत हैं। सामर्थ्य में शक्ति सदन (संकटग्रस्त महिलाओं के लिए राहत और पुनर्वास गृह), सखी निवास (कामकाजी महिलाओं का आवास) और पालना (शिशु-गृह या क्रेच) आते हैं। BBBP अब मिशन शक्ति में समाहित है।

नारी अदालत ग्राम पंचायत स्तर पर छोटे विवादों में बातचीत और मध्यस्थता से सस्ता और सुलभ न्याय देने का वैकल्पिक तंत्र है। इस योजना-अवधि के बाद की स्थिति इस पृष्ठ पर सत्यापित नहीं है, इसलिए उत्तर में "15वें वित्त आयोग की अवधि" लिखना सुरक्षित है।

राजस्थान: मुख्यमंत्री का सात सूत्री कार्यक्रम और राज्य की योजनाएँ

राजस्थान राज्य महिला आयोग की वेबसाइट के अनुसार राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण का यह कार्यक्रम 2009 में शुरू किया। इसके सात बिंदु हैं: सुरक्षित मातृत्व, शिशु मृत्यु दर में कमी, जनसंख्या स्थिरीकरण, बाल विवाह की रोकथाम, बालिकाओं को कम से कम कक्षा 10 तक स्कूल में बनाए रखना, महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से स्वरोज़गार द्वारा आर्थिक सशक्तिकरण। यह कार्यक्रम स्त्री के जीवन-चक्र (गर्भ, शिशु-काल, किशोरावस्था, वयस्कता) पर आधारित है (विश्लेषण)।

क्रियान्वयन और निगरानी के लिए राज्य-स्तरीय निगरानी समिति बनी, जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं और सदस्यों में स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और गृह मंत्री, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष और मुख्य सचिव हैं। यह समिति समयबद्ध लक्ष्य तय करती है, नीतिगत निर्णय लेती है और साल में दो बार बैठती है। इसके अलावा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य-स्तरीय समन्वय समिति है, जो हर दो माह में बैठकर रिपोर्ट निगरानी समिति को भेजती है।

राजस्थान का सात सूत्री कार्यक्रम (2009)

क्रमबिंदुजीवन-चक्र का चरण (विश्लेषण)
1सुरक्षित मातृत्वगर्भावस्था और प्रसव
2शिशु मृत्यु दर में कमीशैशव
3जनसंख्या स्थिरीकरणप्रजनन और परिवार नियोजन
4बाल विवाह की रोकथामकिशोरावस्था
5बालिकाओं को कम से कम कक्षा 10 तक स्कूल में बनाए रखनाबाल्यावस्था और किशोरावस्था
6महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरणसभी आयु
7SHG से स्वरोज़गार द्वारा आर्थिक सशक्तिकरणवयस्कता

चुनौतियाँ और लैंगिक असमानता के परिणाम (विश्लेषण)

2016 का प्रश्न लैंगिक असमानता (gender inequality) के परिणाम पूछता है। इन्हें चार समूहों में याद रखें। जनसांख्यिकीय: घटता बाल लिंगानुपात और कन्या-भ्रूण का चयन। शैक्षिक और स्वास्थ्य: बालिकाओं की कम शिक्षा, कम उम्र में विवाह और मातृत्व-स्वास्थ्य का जोखिम। आर्थिक: कार्यबल में कम भागीदारी, संपत्ति और निर्णय पर कम अधिकार। सामाजिक-राजनीतिक: हिंसा, दहेज, राजनीति में कम प्रतिनिधित्व।

सुधार के उपाय भी इन्हीं समूहों से जोड़ें: मानसिकता बदलने के लिए BBBP जैसे जन-अभियान, शिक्षा और कौशल, सुरक्षा के लिए पुलिस-और-न्याय सुधार तथा OSC और हेल्पलाइन, भागीदारी के लिए पंचायतों और विधायिका में आरक्षण। केवल क़ानून या केवल योजना अपर्याप्त है; दोनों का तालमेल चाहिए, और सामाजिक सोच बदले बिना आँकड़े पूरे नहीं सुधरते।

महिलाएँ: अधिकार से सशक्तिकरण तक

महिलाएँ और कमज़ोर वर्ग

संविधान

अधिकार का आधार

  • अनुच्छेद 15(3), 39, 42, 51A(e)
  • 243D(3), 243T(3): एक-तिहाई
  • 330A, 332A, 334A: 106वाँ संशोधन

क़ानून

सुरक्षा

  • BNS: धारा 63, 74, 75, 78
  • धारा 80 (दहेज-मृत्यु), 85-86 (क्रूरता)
  • DV Act 2005, POSH Act 2013

केंद्र की योजनाएँ

मिशन शक्ति

  • संबल: OSC, 181, BBBP, नारी अदालत
  • सामर्थ्य: शक्ति सदन, सखी निवास, पालना

राजस्थान

सात सूत्री कार्यक्रम 2009

  • स्वास्थ्य: सुरक्षित मातृत्व, IMR
  • शिक्षा और बाल विवाह रोक
  • सुरक्षा और SHG से रोज़गार
चार खानों में उत्तर बाँटने से 5 और 10 अंक के उत्तर में क्रम बना रहता है (विश्लेषण)।

मुख्य तथ्य

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
22 जनवरी 2015, पानीपत; SRB 918 (2014-15) से 930 (2023-24, अनंतिम); बालिका GER (माध्यमिक) 75.51% से 78%
मिशन शक्ति
15वें वित्त आयोग की अवधि 2021-22 से 2025-26 के लिए; दो भाग: संबल और सामर्थ्य
लिंगानुपात 2011
भारत 943; राजस्थान 928; राजस्थान का बाल लिंगानुपात 888
राजस्थान का सात सूत्री कार्यक्रम
2009 में शुरू; सात बिंदु; मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में निगरानी समिति (साल में दो बैठकें) और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समन्वय समिति (हर दो माह में)
पंचायत और नगरपालिका में आरक्षण
कम से कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए (अनुच्छेद 243D(3), 243T(3))
106वाँ संशोधन
लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें; अनुच्छेद 334A: जनगणना के बाद परिसीमन से प्रभावी, संशोधन के प्रारंभ से 15 वर्ष तक; संविधान-पाठ (2024) में तिथि अधिसूचित होनी बाक़ी थी, प्रेस-रिपोर्टों के अनुसार प्रवर्तन-तिथि 16 अप्रैल 2026 अधिसूचित (अमल परिसीमन के बाद)
BNS में प्रमुख धाराएँ
63 बलात्कार; 74 लज्जा भंग; 75 यौन उत्पीड़न; 78 पीछा करना; 80 दहेज-मृत्यु; 85-86 क्रूरता
NCRB 2022
महिलाओं के विरुद्ध अपराध: 4,45,256 मामले; दर 66.4 प्रति लाख महिला
अंतिम जाँच
PIB, MoSPI, NCRB, राज्य महिला आयोग, संविधान और BNS के पाठ से मिलान: 2 अक्टूबर 2026; सात सूत्री कार्यक्रम के सात बिंदु केवल राज्य महिला आयोग के पृष्ठ पर मिले; 106वें संशोधन की ताज़ा स्थिति प्रेस-रिपोर्टों पर आधारित

राजस्थान का पहलू

राजस्थान का लिंगानुपात 928 और बाल लिंगानुपात 888 (जनगणना 2011; MoSPI की Women and Men in India 2016 और राजस्थान फ़ाउंडेशन)। राजस्थान राज्य महिला आयोग के कार्यक्रम-पृष्ठ (देखा गया 2 अक्टूबर 2026) के अनुसार सात सूत्री कार्यक्रम 2009 में शुरू हुआ और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली निगरानी समिति इसे देखती है। राज्य की अन्य योजनाओं की पात्रता और राशि इस पृष्ठ पर सत्यापित नहीं की गई है, इसलिए उत्तर में उनके नाम तभी लिखें जब पक्का हो।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • सात सूत्री कार्यक्रम के बिंदु स्मृति से लिखना: बाल विवाह की रोकथाम, कक्षा 10 तक शिक्षा और SHG जैसे बिंदु अक्सर छूट जाते हैं। "राज्य महिला आयोग के अनुसार" लिखकर सात गिनाएँ।
  • BBBP को राजस्थान की योजना बताना: यह केंद्र की योजना है (पानीपत, 22 जनवरी 2015)। राजस्थान का अपना कार्यक्रम सात सूत्री है।
  • 106वें संशोधन के आरक्षण को लागू मान लेना: अधिनियम की प्रवर्तन-तिथि अधिसूचित होने (प्रेस-रिपोर्ट, 16 अप्रैल 2026) के बाद भी आरक्षण अनुच्छेद 334A के अनुसार परिसीमन पर निर्भर है; ताज़ा स्थिति अधिसूचना से देखें।
  • बाल लिंगानुपात और लिंगानुपात को एक ही मान लेना: पहला 0 से 6 वर्ष का है (राजस्थान 888), दूसरा सभी आयु का (राजस्थान 928)।
  • बढ़े हुए अपराध-आँकड़ों को केवल "अपराध बढ़ा" लिखना: दर्ज मामलों में जागरूकता और रिपोर्टिंग बढ़ना भी शामिल है (विश्लेषण)।