शहरीकरण (Urbanisation)
शहरीकरण क्या है, जनगणना शहर किसे मानती है, 2011 में भारत और राजस्थान की तस्वीर, और शहर गाँवों को कैसे बदलते हैं।
- शहरीकरण
- जनगणना 2011
- जनगणना-नगर
- नगरीय जीवन-शैली
- स्मार्ट सिटी
- राजस्थान
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग क (समाजशास्त्र): "Changes in contemporary Indian society and culture: secularisation, urbanisation, modernisation and globalisation." इस पृष्ठ पर शहरीकरण है; लौकिकीकरण और आधुनिकीकरण के अलग पृष्ठ हैं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में 'शहरीकरण' पर कोई सीधा प्रश्न दर्ज नहीं है। यह 2013-2024 के पेपरों में देखा गया रुझान है, आधिकारिक अंक-योजना नहीं। पर सिलेबस की पंक्ति में यह शब्द स्पष्ट लिखा है, इसलिए अगला प्रश्न इसी से आ सकता है।
- इसलिए यह पृष्ठ आँकड़ों और परिभाषाओं पर ज़ोर देता है, जो 2 अंक और 5 अंक के उत्तरों के काम आते हैं: जनगणना 2011 का शहरी हिस्सा, जनगणना-नगर की तीन कसौटियाँ, और राजस्थान का आँकड़ा।
- NCERT की पुस्तक 'शहरीकरण' को केवल जनसंख्या का बदलाव नहीं, 'जीवन-शैली' (Wirth, 1938) भी मानती है। उत्तर में इस दोहरे अर्थ का होना अंक दिलाता है।
शहरीकरण क्या है
शहरीकरण (urbanisation) का सरल अर्थ है: कुल आबादी में शहरी आबादी का हिस्सा बढ़ना, और उसके साथ जीवन-शैली, पेशे और सामाजिक संबंधों का बदलना। इसमें दो चीज़ें मिलती हैं: पहली, गिनती वाली, यानी कितने लोग शहरों में रहते हैं; दूसरी, गुणात्मक, यानी रहन-सहन का तरीक़ा कैसा है। NCERT का अध्याय औद्योगीकरण और शहरीकरण को केवल उत्पादन की व्यवस्था या बस्तियों की घनता का बदलाव नहीं, एक 'जीवन-शैली' भी कहता है, और इसके लिए लुई विर्थ (Louis Wirth) के 1938 के लेख 'Urbanism as a Way of Life' का हवाला देता है।
इस दोहरे अर्थ को परीक्षा में एक वाक्य में लिखिए: 'शहरीकरण केवल शहरों की संख्या या आबादी का बढ़ना नहीं, रहन-सहन और सामाजिक संबंधों में बदलाव भी है।' यही वाक्य दो अंक के उत्तर की पहली पंक्ति भी बन सकता है।
शहरीकरण और नगरीकरण में एक महीन भेद भी कभी-कभी किया जाता है: नगरीकरण शहरों के बनने और बढ़ने की प्रक्रिया है, जबकि शहरीकरण में जीवन-शैली का फैलना भी शामिल माना जाता है। यह भेद सामान्य समझ (विश्लेषण) है, किसी एक पाठ का कथन नहीं, इसलिए उत्तर में इसे केवल तब लिखिए जब प्रश्न स्वयं दोनों शब्दों की माँग करे। सामान्य रूप से परीक्षा में दोनों शब्द एक-दूसरे के स्थान पर चल जाते हैं, और सिलेबस की पंक्ति में भी केवल "urbanisation" है। इसलिए पहले परिभाषा, फिर आँकड़ा, फिर प्रभाव का क्रम सुरक्षित है।
जनगणना शहर किसे कहती है
जनगणना शहर किसे मानती है, यह प्रश्न मुख्य तथ्यों में सबसे उपयोगी है। गृह मंत्रालय के लोक सभा उत्तर के अनुसार शहरी क्षेत्र दो तरह के हैं: वैधानिक नगर (statutory towns), जो नगरपालिका, नगर निगम जैसे निकायों से शासित हैं, और जनगणना-नगर (census towns), जो जनगणना की कसौटी पर शहरी माने जाते हैं। जनगणना-नगर की तीन कसौटियाँ हैं: जनसंख्या कम से कम 5,000, पुरुष मुख्य कामगारों में कम से कम 75 प्रतिशत ग़ैर-कृषि कार्यों में, और जनसंख्या-घनत्व कम से कम 400 प्रति वर्ग किलोमीटर। एक लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाला नगर 'शहर' (city) कहलाता है, और शहरी समूह (urban agglomeration) में किसी शहर के साथ उससे सटे बाहरी विकास-क्षेत्र भी जुड़ते हैं।
जनगणना-नगर की यही तीन कसौटियाँ PubMed Central के एक शोध-लेख में भी दर्ज हैं। एक बारीकी: जनगणना-नगर बढ़ने से शहरी हिस्सा बढ़ सकता है, भले उस जगह कोई नया शहर न बना हो, क्योंकि गाँव की श्रेणी बदलकर नगर में आ गई। इसलिए 'शहरी आबादी बढ़ी' के दो कारण हो सकते हैं: लोगों का शहर में आना, और बस्तियों की श्रेणी बदलना। यह बारीकी विश्लेषण है।
शहरी क्षेत्र की कसौटियाँ (जनगणना 2011)
| श्रेणी | कसौटी | नोट |
|---|---|---|
| वैधानिक नगर | नगरपालिका, नगर निगम आदि द्वारा शासित | क़ानून से घोषित |
| जनगणना-नगर | जनसंख्या कम से कम 5,000; पुरुष मुख्य कामगारों में कम से कम 75% ग़ैर-कृषि; घनत्व कम से कम 400 प्रति वर्ग किमी | तीनों कसौटी साथ-साथ |
| शहर (city) | जनसंख्या एक लाख या अधिक | आकार की श्रेणी |
| शहरी समूह | शहर और उससे सटे विकसित क्षेत्र | जनगणना की इकाई |
पहली दो श्रेणियाँ 'नगर' की परिभाषा हैं; अंतिम दो आकार और विस्तार पर आधारित श्रेणियाँ।
जनगणना 2011: भारत की तस्वीर
2011 की तस्वीर: गृह मंत्रालय के उत्तर में दिए अंतिम आँकड़ों (30.4.2013 को जारी) के अनुसार भारत की जनसंख्या 1,210,569,573 थी, जिसमें से शहरी 377,106,125 यानी 31.2 प्रतिशत थी। NCERT भी यही बताता है: ग्रामीण 68.8 प्रतिशत और शहरी 31.2 प्रतिशत। NCERT के अनुसार भारत में कुल 7,935 नगर थे, और यह संख्या पीआईबी के एक अलग नोट में भी मिलती है। सावधानी: उसी नोट में शहरी प्रतिशत 32.16 और जनसंख्या 377.16 मिलियन लिखी है, जो अंतिम आँकड़े और NCERT दोनों से मेल नहीं खाती, इसलिए इस पृष्ठ में प्रतिशत के लिए अंतिम आँकड़े और NCERT को ही आधार माना गया है।
NCERT का यह भी कथन है (उसके अनुसार 1951 में शहरी हिस्सा 17.29 प्रतिशत और नगर 2,843 थे) कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या की पूर्ण वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक रही, क्योंकि ग्रामीण वृद्धि दर तेज़ी से घटी जबकि शहरी वृद्धि दर लगभग उतनी ही रही। यह एक ही स्रोत का कथन है, इसलिए उत्तर में 'NCERT के अनुसार' लिखकर दीजिए।
शहर का असर गाँवों पर: राव की तीन स्थितियाँ
शहर गाँव को कैसे बदलते हैं? एम.एस.ए. राव (M.S.A. Rao) ने स्वतंत्रता के बाद के दो दशकों के आधार पर तीन स्थितियाँ बताईं, जिन्हें NCERT ने उद्धृत किया है (Rao 1974)। पहली, ऐसे गाँव जिनके बहुत से लोग दूर के शहरों या विदेश में रोज़गार के लिए चले गए और जो परिवार को पैसे भेजते हैं; ये प्रवासी अपने गाँव में घर बनाते हैं, ज़मीन और उद्योग में निवेश करते हैं और स्कूल-ट्रस्ट को दान देते हैं। दूसरी, ऐसे गाँव जो भिलाई जैसे औद्योगिक नगर के पास हैं, जहाँ कुछ गाँव पूरी तरह उजड़ जाते हैं और कुछ की ज़मीन का हिस्सा अधिग्रहित होता है; बचे गाँवों में प्रवासी मज़दूर आते हैं, जिससे घरों और बाज़ार की माँग बढ़ती है और स्थानीय निवासियों तथा आगंतुकों के रिश्तों की नई समस्याएँ पैदा होती हैं। तीसरी, महानगर के विस्तार से घिरे गाँव, जिनमें कुछ पूरे समा जाते हैं और कुछ की केवल ज़मीन शहरी विकास में जाती है।
इन तीनों को याद रखने का सूत्र: 'भेजने वाले गाँव, उद्योग-निकट गाँव, महानगर से घिरे गाँव'। परीक्षा में एक-एक वाक्य से तीनों लिखना पाँच अंक के उत्तर के लिए पर्याप्त है। इन तीनों के उदाहरण NCERT में Rao के उद्धरण में हैं (भिलाई, गुजरात के प्रवासी); अपनी तरफ़ से और उदाहरण जोड़ने की ज़रूरत नहीं।
शहरी जीवन-शैली: Wirth की बात
शहरीकरण के साथ सामाजिक संबंध भी बदलते हैं, और यही Wirth की 'जीवन-शैली' वाली बात है। शहर में आबादी बड़ी, घनी और विविध होती है, इसलिए संबंध अधिक औपचारिक और भूमिका-आधारित हो जाते हैं, और जाति तथा परिवार के परंपरागत बंधन कुछ ढीले पड़ते हैं। यह वर्णन Wirth के सामान्य तर्क का संक्षेप (विश्लेषण) है, और भारत में यह पूरी तरह लागू नहीं होता: NCERT के अनुसार शहरीकरण ने जाति की कुछ कड़ी प्रथाएँ ढीली की हैं, पर विवाह में जाति सबसे मज़बूत रही। इसलिए शहरी जीवन में बदलाव और निरंतरता दोनों हैं।
इसका सीधा संबंध इस श्रृंखला के दूसरे पृष्ठों से है: शहर में पेशा-चयन खुला होने से वर्ग का महत्त्व बढ़ता है (वर्ग का पृष्ठ), जाति के कुछ आयाम बदलते हैं (जाति के बदलते आयाम का पृष्ठ) और आधुनिक संस्थाएँ फैलती हैं (आधुनिकीकरण का पृष्ठ)। तीनों के बीच संबंध की एक-एक पंक्ति दस अंक के उत्तर में विश्लेषण का हिस्सा बन जाती है।
कारण और परिणाम: एक ढाँचा
शहरीकरण के कारणों को तीन समूहों में बाँटिए। पहला, आर्थिक कारण: उद्योग, सेवा क्षेत्र और व्यापार का शहरों में केंद्रित होना, जिससे रोज़गार के अवसर बनते हैं। दूसरा, सामाजिक कारण: शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर सेवाओं की चाह, तथा परंपरागत बंधनों से कुछ राहत। तीसरा, श्रेणी-परिवर्तन: बस्तियों का जनगणना-नगर बन जाना, जिसकी चर्चा ऊपर हुई। ये तीनों विश्लेषण हैं और उत्तर में 'मुख्य कारण' के रूप में एक-एक पंक्ति में लिखे जा सकते हैं।
परिणाम भी दोनों तरफ़ के हैं। सकारात्मक: रोज़गार और आय के अवसर, सेवाओं तक पहुँच, विचारों और संस्कृति का मेल, तथा परंपरागत रोक-टोक का ढीला पड़ना। नकारात्मक: आवास की कमी, भीड़, यातायात और प्रदूषण का दबाव, और शहर में असमानता का दिखना। इस दोतरफ़ा ढाँचे को हर 5 या 10 अंक के उत्तर में एक छोटे-से अनुच्छेद के रूप में रखा जा सकता है।
दस अंक का ढाँचा
दस अंक के प्रश्न का ढाँचा इस तरह बनाइए। पहले अनुच्छेद में अर्थ और दोहरा पक्ष: आबादी और जीवन-शैली। दूसरे में जनगणना 2011 का आँकड़ा और श्रेणियाँ। तीसरे में राव की तीन स्थितियाँ। चौथे में कारण और परिणाम का संतुलन। अंत में स्मार्ट सिटीज़ मिशन जैसी नीति और एक निष्कर्ष-पंक्ति। हर अनुच्छेद दो-तीन वाक्यों का रखिए और हर तथ्य के साथ वर्ष लिखिए। प्रश्न का जो भाग पूछा जाए, उसी पर अधिक शब्द ख़र्च कीजिए: कारण पूछे हों तो कारण, प्रभाव पूछे हों तो प्रभाव।
यदि परीक्षा में राजस्थान का संदर्भ पूछा जाए, तो ऊपर की गणना और राजस्थान का कॉलआउट देखिए: 2011 में शहरी हिस्सा 24.9 प्रतिशत, राष्ट्रीय औसत से कम; और कार्यबल का बड़ा हिस्सा कृषि में। इन दोनों तथ्यों को जोड़कर यह निष्कर्ष लिखा जा सकता है कि राजस्थान में शहरीकरण की गुंजाइश और चुनौतियाँ दोनों हैं; यह निष्कर्ष विश्लेषण है।
स्मार्ट सिटीज़ मिशन और उत्तर-लेखन
नीति के स्तर पर स्मार्ट सिटीज़ मिशन शहरीकरण की प्रमुख पहल है। पीआईबी के नोटों के अनुसार इसे 25 जून 2015 को शुरू किया गया, इसमें 100 शहर शामिल हैं, और इसकी अवधि मार्च 2025 तक बढ़ाई गई थी। NCERT इसे इक्कीसवीं सदी में शहरीकरण की गति से जोड़ता है। उत्तर में इसे उदाहरण की तरह रखिए: तारीख़ और 100 शहर, इसके बाद एक पंक्ति कि नीति का उद्देश्य शहरों में बुनियादी ढाँचे और सेवाओं को बेहतर बनाना है। मिशन के बजट और उपलब्धियों के आँकड़े समय के साथ बदलते हैं, इसलिए उत्तर में केवल तारीख़ और शहरों की संख्या दीजिए।
एक अंतिम सुझाव: शहरीकरण पर पूछे गए प्रश्न में आँकड़ा देना अच्छा रहता है, पर वर्ष और स्रोत के साथ। 'जनगणना 2011 के अनुसार 31.2 प्रतिशत' लिखिए, केवल '31 प्रतिशत से अधिक' नहीं। इससे परीक्षक को तथ्य की जाँच करने की ज़रूरत नहीं रहती और उत्तर प्रमाणिक दिखता है।
शहर और गाँव: राव की तीन स्थितियाँ
शहरी प्रभाव
भेजने वाले गाँव
प्रवासी पैसे भेजते हैं
- दूर के शहर और विदेश
- गाँव में घर, निवेश, दान
उद्योग-निकट गाँव
भिलाई जैसे नगर के पास
- कुछ उजड़ते हैं
- कुछ में प्रवासी मज़दूर आते हैं
महानगर से घिरे गाँव
शहर का विस्तार
- कुछ पूरे समा जाते हैं
- कुछ की केवल ज़मीन जाती है
मुख्य तथ्य
- भारत 2011 (अंतिम)
- कुल 1,210,569,573; शहरी 377,106,125 (31.2 प्रतिशत)
- नगरों की संख्या
- 7,935 (जनगणना 2011)
- राजस्थान 2011
- कुल 68,548,437; ग्रामीण 51,500,352 (75.1 प्रतिशत); शहरी 17,048,085 (24.9 प्रतिशत)
- जनगणना-नगर
- 5,000 जनसंख्या; 75 प्रतिशत ग़ैर-कृषि पुरुष मुख्य कामगार; 400 प्रति वर्ग किमी घनत्व
- Wirth का लेख
- Urbanism as a Way of Life, AJS 44(1): 1-24, जुलाई 1938
- Smart Cities Mission
- 25 जून 2015 को शुरू; 100 शहर; अवधि मार्च 2025 तक बढ़ाई गई
- सिलेबस की पंक्ति
- RPSC सिलेबस, 09-01-2026, पेपर I, इकाई III (क)
राजस्थान का पहलू
गृह मंत्रालय के लोक सभा उत्तर (7 मई 2013) में दिए जनगणना 2011 के अंतिम आँकड़ों के अनुसार राजस्थान की कुल जनसंख्या 68,548,437 थी, जिसमें ग्रामीण 51,500,352 (75.1 प्रतिशत) और शहरी 17,048,085 (24.9 प्रतिशत) थी। NITI Aayog की राजस्थान सारांश-रिपोर्ट (2025) के अनुसार 2023 के जनसंख्या-प्रक्षेपण में राज्य की लगभग 27 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है, और 2022-23 में राज्य के कार्यबल का 54.8 प्रतिशत कृषि, वानिकी और मत्स्य क्षेत्र में है। (दोनों भारत सरकार के स्रोत हैं; पहुँच की तिथि: 2 अक्टूबर 2026। 2011 का आँकड़ा जनगणना है और 2023 का प्रक्षेपण; दोनों की सीधी तुलना को वृद्धि-दर न समझें।)
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- जनगणना 2011 का शहरी हिस्सा 32.16 प्रतिशत लिख देना। अंतिम आँकड़ा (MHA) और NCERT 31.2 प्रतिशत बताते हैं।
- जनगणना-नगर की केवल एक कसौटी लिख देना। तीनों लिखिए: 5,000, 75 प्रतिशत ग़ैर-कृषि पुरुष मुख्य कामगार, 400 प्रति वर्ग किमी।
- शहरीकरण को केवल 'शहरों का बढ़ना' लिख देना। NCERT इसे जीवन-शैली (Wirth, 1938) भी मानता है।
- राजस्थान के 2011 के आँकड़े और 2023 के अनुमान को जोड़कर वृद्धि निकाल देना। दोनों अलग वर्ष और अलग विधि के आँकड़े हैं।
- स्मार्ट सिटीज़ मिशन के आँकड़े बिना तारीख़ के लिखना। शुरुआत 25 जून 2015, 100 शहर, अवधि मार्च 2025 तक बढ़ी: इतना सुरक्षित है।
- राव की तीन स्थितियों में उदाहरण मिला देना। भिलाई दूसरी स्थिति (उद्योग-निकट गाँव) का उदाहरण है, पहली का नहीं।
पिछले वर्षों के प्रश्न
संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में इस विषय पर सीधा प्रश्न दर्ज नहीं है। यह 2013-2024 के पेपरों में देखा गया रुझान है, भविष्य की गारंटी नहीं; सिलेबस की पंक्ति में 'urbanisation' स्पष्ट है, इसलिए नीचे के अभ्यास प्रश्न (हमारे अपने, PYQ नहीं) हल करके देखिए।
केस स्टडी: जब गाँव शहर बन जाता है: जनगणना-नगर
उदाहरण (काल्पनिक)शहरी हिस्सा बढ़ने के दो कारण
यह एक काल्पनिक उदाहरण है, जिसका उद्देश्य केवल जनगणना-नगर की कसौटियाँ समझाना है; यह किसी वास्तविक गाँव पर आधारित नहीं है।
- शुरुआत
- गाँव 'ग' की जनसंख्या 2001 में 4,200 थी और उसे ग्रामीण गिना गया।
- बदलाव
- 2011 तक जनसंख्या 5,800 हो गई, घनत्व 450 प्रति वर्ग किमी हुआ और पुरुष मुख्य कामगारों में 80 प्रतिशत लोग ग़ैर-कृषि कार्य में लग गए।
- नतीजा
- तीनों कसौटियाँ (5,000, 75 प्रतिशत, 400) पूरी हुईं, इसलिए जनगणना में 'ग' जनगणना-नगर बन गया।
सीख
किसी गाँव के जनगणना-नगर बनने पर शहरी आँकड़ा बढ़ता है, भले कोई नया शहर न बसा हो। इसलिए शहरीकरण के आँकड़े में 'वास्तविक प्रवास' और 'श्रेणी-परिवर्तन' दोनों को अलग-अलग देखिए। यह उदाहरण काल्पनिक है, उत्तर में उसे उदाहरण की तरह ही लिखें।
गणना: शहरी हिस्सा निकालना
हल सहित उदाहरणजनगणना 2011 के अंतिम आँकड़ों से शहरी प्रतिशत
दिया है
- भारत की कुल जनसंख्या: 1,210,569,573; शहरी: 377,106,125।
- राजस्थान की कुल जनसंख्या: 68,548,437; शहरी: 17,048,085; ग्रामीण: 51,500,352।
- स्रोत: गृह मंत्रालय, लोक सभा अतारांकित प्रश्न 6458 (7 मई 2013)।
- 1चरण 1: भारत 377,106,125 को 1,210,569,573 से भाग देकर 100 से गुणा: लगभग 31.15 प्रतिशत। उत्तर में 'लगभग 31.2 प्रतिशत' लिखिए, जैसा NCERT और MHA दोनों कहते हैं।
- 2चरण 2: राजस्थान शहरी 17,048,085 / 68,548,437 x 100 = लगभग 24.87 प्रतिशत, यानी 24.9 प्रतिशत।
- 3चरण 3: राजस्थान ग्रामीण 51,500,352 / 68,548,437 x 100 = लगभग 75.13 प्रतिशत; जाँच: 17,048,085 + 51,500,352 = 68,548,437, यानी जोड़ कुल जनसंख्या के बराबर है।
- 4चरण 4: तुलना भारत का शहरी हिस्सा 31.15 और राजस्थान का 24.87 प्रतिशत: अंतर लगभग 6.3 प्रतिशत-बिंदु। राजस्थान का शहरी हिस्सा राष्ट्रीय औसत से कम है (2011 में)।
निष्कर्ष: भारत लगभग 31.2 प्रतिशत शहरी, राजस्थान लगभग 24.9 प्रतिशत, यानी राजस्थान लगभग 6.3 प्रतिशत-बिंदु पीछे। ध्यान रहे कि यह 2011 की तुलना है; बाद के वर्षों के अनुमान अलग आँकड़े देते हैं।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
शहरीकरण से क्या अभिप्राय है?
आदर्श उत्तर
कुल आबादी में शहरी हिस्से का बढ़ना और उसके साथ जीवन-शैली, पेशे और संबंधों का बदलना।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
जनगणना-नगर की परिभाषा लिखिए।
आदर्श उत्तर
जनगणना 2011 में जनगणना-नगर वह बस्ती है जिसकी जनसंख्या कम से कम 5,000 हो, पुरुष मुख्य कामगारों में कम से कम 75 प्रतिशत ग़ैर-कृषि कार्यों में हों, और घनत्व कम से कम 400 प्रति वर्ग किलोमीटर हो। ये तीनों कसौटियाँ साथ पूरी होनी चाहिए। वैधानिक नगर इससे अलग हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
शहरीकरण का ग्रामीण समाज पर प्रभाव, एम.एस.ए. राव की तीन स्थितियों के आधार पर, समझाइए।
आदर्श उत्तर
NCERT में उद्धृत राव (1974) के अनुसार शहरी प्रभाव की तीन स्थितियाँ हैं। पहली, प्रवासी भेजने वाले गाँव, जहाँ से लोग दूर के शहरों या विदेश जाते हैं, पैसे भेजते हैं और गाँव में घर, निवेश और दान करते हैं। दूसरी, भिलाई जैसे औद्योगिक नगर के निकट गाँव, जहाँ कुछ उजड़ते हैं और कुछ में प्रवासी मज़दूर आने से घरों और बाज़ार की माँग बढ़ती है, साथ ही स्थानीय और आगंतुकों के रिश्तों की नई समस्याएँ बनती हैं। तीसरी, महानगर के विस्तार से घिरे गाँव, जिनमें कुछ पूरे समा जाते हैं और कुछ की ज़मीन शहरी विकास में जाती है। इस प्रकार शहर गाँव को अलग-अलग तरह से बदलता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
भारत का शहरी हिस्सा 2011 में कितना था?
आदर्श उत्तर
जनगणना 2011 के अंतिम आँकड़ों के अनुसार शहरी आबादी 377,106,125 थी, यानी लगभग 31.2 प्रतिशत।
उत्तर कैसे लिखें (5 अंक, 50 शब्द)
भूमिका
प्रश्न (संभावित): "भारत में शहरीकरण की प्रवृत्ति पर टिप्पणी कीजिए।" पहले वाक्य में अर्थ, फिर आँकड़ा और दो-तीन बिंदु।
मुख्य भाग
- अर्थ: शहरी हिस्से का बढ़ना और जीवन-शैली का बदलना (Wirth, 1938)
- जनगणना 2011: शहरी 377,106,125, यानी लगभग 31.2 प्रतिशत; 7,935 नगर
- श्रेणी-परिवर्तन: जनगणना-नगर की तीन कसौटियाँ
- गाँव पर असर: राव की तीन स्थितियाँ
- नीति: स्मार्ट सिटीज़ मिशन, 25 जून 2015, 100 शहर
निष्कर्ष
निष्कर्ष: शहरीकरण अवसर और चुनौती, दोनों लाता है; इसे आँकड़ों के साथ और जीवन-शैली के बदलाव के रूप में लिखना उत्तर को पूर्ण बनाता है।
अतिरिक्त मूल्य
- राजस्थान का 2011 का आँकड़ा, 24.9 प्रतिशत, राष्ट्रीय 31.2 से तुलना के साथ
- जनगणना-नगर बनने से शहरी हिस्सा बढ़ने की बारीकी
त्वरित पुनरावृत्ति
- शहरीकरण: शहरी हिस्सा बढ़ना + जीवन-शैली का बदलना (Wirth, 1938)
- भारत 2011: शहरी 377,106,125, लगभग 31.2 प्रतिशत (MHA, NCERT)
- 7,935 नगर (2011)
- जनगणना-नगर: 5,000 / 75 प्रतिशत ग़ैर-कृषि / 400 प्रति वर्ग किमी
- शहर (city): एक लाख या अधिक; शहरी समूह: शहर और सटे क्षेत्र
- राव की तीन स्थितियाँ: भेजने वाले, उद्योग-निकट (भिलाई), महानगर से घिरे
- राजस्थान 2011: शहरी 24.9 प्रतिशत; ग्रामीण 75.1 प्रतिशत
- Smart Cities Mission: 25 जून 2015; 100 शहर
याद रखने योग्य शब्द
- शहरीकरण
- जनगणना-नगर
- वैधानिक नगर
- शहरी समूह
- राव
- Wirth
- जीवन-शैली
- स्मार्ट सिटी