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समाजशास्त्र · पेपर I · इकाई III (क)

बेरोज़गारी (Unemployment): अर्थ, माप, प्रकार, कारण और उपाय

बेरोज़गारी का PLFS-आधारित अर्थ और माप, 2025 का ताज़ा चित्र, अनियत रोज़गार की परिभाषा, प्रकार, कारण और VB-G RAM G जैसे उपाय, उत्तर-लेखन की दृष्टि से।

  • PLFS 2025
  • अनियत रोज़गार
  • VB-G RAM G
  • UR, LFPR, WPR
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग क (समाजशास्त्र): "Challenges and issues before Indian society: dowry, divorce, corruption, poverty, prostitution, unemployment and drug addiction." इस पृष्ठ पर बेरोज़गारी (unemployment) है; दहेज, तलाक़, भ्रष्टाचार, ग़रीबी, वेश्यावृत्ति और नशे के अलग पृष्ठ हैं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2023 के पेपर I (प्रश्न 30, 2 अंक) में "Casual Employment" (अनियत रोज़गार) पूछा गया था। यह बेरोज़गारी का सीधा प्रश्न नहीं, बल्कि रोज़गार के प्रकार की परिभाषा का प्रश्न था, यानी इस विषय में शब्दावली पर पकड़ ज़रूरी है (2013-2024 के पेपरों में देखा गया)।
  • बाक़ी पाँच संकलित पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2024) में इस विषय पर सीधा प्रश्न नहीं मिला। इसलिए 2 अंक की परिभाषा, 5 अंक का "कारण और उपाय" और 10 अंक का "नीति का मूल्यांकन", तीनों रूपों के लिए तैयारी रखें।
  • सबसे मज़बूत उत्तर वह है जो परिभाषा (PLFS की) और ताज़ा आँकड़े (2025) साथ रखे, और बेरोज़गारी के प्रकार, कारण और नीति-उपाय (जैसे ग्रामीण रोज़गार-गारंटी का नया क़ानून) तीनों जोड़ दे।

पहले सरल भाषा में: खेत में पाँच भाई, काम दो का

एक छोटे खेत पर पाँच भाई रोज़ जाते हैं, जबकि पूरा काम दो भाई आराम से निपटा सकते हैं। बाक़ी तीन भाई खेत पर दिखते हैं, पर उनकी मेहनत का कोई ख़ास असर नहीं पड़ता। वे "काम में" गिने जाते हैं, फिर भी असल में बेकार हैं। दूसरी ओर शहर में एक स्नातक रोज़ नौकरी खोजता है, पर उसे उसकी योग्यता के लायक़ काम नहीं मिलता। तीसरा व्यक्ति दिहाड़ी पर कभी काम पाता है, कभी नहीं।

ये तीनों बेरोज़गारी के अलग चेहरे हैं। इसीलिए परीक्षा के लिए पहले यह तय करना ज़रूरी है कि "बेरोज़गार" किसे गिना जाए। सरकार इसे सर्वेक्षण से मापती है, और माप की परिभाषा बदलते ही आँकड़ा बदल जाता है। इस पृष्ठ का पहला काम यह परिभाषा साफ़ करना है।

बेरोज़गार, श्रम-बल और रोज़गार की स्थितियाँ: PLFS की परिभाषाएँ

भारत में रोज़गार और बेरोज़गारी का सरकारी माप आवधिक श्रम-बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey, PLFS) से होता है, जो सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) का है। PLFS की वार्षिक रिपोर्ट 2022-23 के परिशिष्ट C में शब्दों की परिभाषाएँ दी गई हैं। उनका सार नीचे है।

श्रमिक (employed) वे हैं जो किसी आर्थिक गतिविधि में लगे थे, या जुड़े रहते हुए बीमारी, मौसम, त्योहार जैसे कारण से अस्थायी रूप से अनुपस्थित थे। घरेलू उद्यम में बिना वेतन मदद करने वाले सदस्य भी श्रमिक माने जाते हैं। "काम खोजने वाले या उपलब्ध" (seeking or available for work), यानी बेरोज़गार (unemployed), वे हैं जिन्होंने काम की कमी के कारण काम नहीं किया, पर काम खोजा, या मौजूदा शर्तों पर काम करने की इच्छा या उपलब्धता जताई। श्रम-बल (labour force) में श्रमिक और बेरोज़गार दोनों आते हैं। जो इनमें से कुछ नहीं हैं (जैसे विद्यार्थी, घरेलू कामकाज में लगे, पेंशनभोगी), वे श्रम-बल से बाहर हैं।

"सामान्य स्थिति" (usual status) में पिछले 365 दिनों के आधार पर गतिविधि तय होती है, और ps+ss का मतलब मुख्य (principal) तथा सहायक (subsidiary) गतिविधि को साथ लेना है। "चालू साप्ताहिक स्थिति" (current weekly status, CWS) में पिछले 7 दिन देखे जाते हैं। इसीलिए एक ही सर्वेक्षण में दोनों तरह के आँकड़े अलग मिलते हैं।

PLFS के अनुसार रोज़गार की स्थितियाँ

स्थितिपरिभाषा (सार)उदाहरण
स्व-रोज़गार (self-employed)अपना खेत या उद्यम चलाने या अपने बल पर पेशा करने वाले; स्वायत्तता और आर्थिक स्वतंत्रता; आय में श्रम और मुनाफ़ा मिले रहते हैंअपनी किराना दुकान, अपनी खेती, सिलाई की दुकान
नियमित वेतनभोगी (regular wage/salary)दूसरों के उद्यम में काम करके नियमित वेतन या मज़दूरी पाने वाले, दैनिक या आवधिक अनुबंध के नवीनीकरण पर आश्रित नहींसरकारी या निजी दफ़्तर का कर्मचारी
अनियत श्रम (casual labour)दूसरों के खेत या ग़ैर-खेत उद्यम में दैनिक या आवधिक काम के अनुबंध के हिसाब से मज़दूरी पाने वालेनिर्माण-स्थल पर दिहाड़ी मज़दूर, सार्वजनिक निर्माण कार्य में लगे मज़दूर

बेरोज़गारी का माप: तीन अनुपात, जो हर उत्तर में काम आते हैं

श्रम-बल भागीदारी दर (LFPR) बताती है कि 15 वर्ष और ऊपर की जनसंख्या में कितने प्रतिशत लोग काम कर रहे हैं या काम खोज रहे हैं। श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (WPR) बताता है कि जनसंख्या में कितने प्रतिशत वास्तव में काम में लगे हैं। बेरोज़गारी दर (UR) श्रम-बल में से बेरोज़गारों का प्रतिशत है। सूत्र के रूप में UR = बेरोज़गार ÷ श्रम-बल × 100।

ध्यान दें कि UR का आधार जनसंख्या नहीं, श्रम-बल है। जो व्यक्ति काम खोजना ही छोड़ दे, वह श्रम-बल से बाहर हो जाता है और UR में नहीं गिना जाता। इसलिए UR कम दिखने का मतलब हमेशा अच्छा रोज़गार नहीं होता (विश्लेषण)। इसी कारण नीति-चर्चा में UR के साथ LFPR, WPR और रोज़गार की गुणवत्ता भी देखी जाती है।

ताज़ा तस्वीर: PLFS वार्षिक रिपोर्ट 2025 (जनवरी-दिसंबर 2025, 15 वर्ष और ऊपर; सामान्य स्थिति ps+ss)

सूचक2025 का आँकड़ातुलना और टिप्पणी
श्रम-बल भागीदारी दर (LFPR)59.3%2024 के लगभग बराबर; पुरुष 79.1%, महिला 40.0%
श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (WPR)57.4%लगभग 2024 जितना; पुरुष 76.6%, महिला 38.8%
बेरोज़गारी दर (UR)3.1% (पुरुष और महिला दोनों)पुरुष 3.3% (2024) से घटकर 3.1%; महिला 3.1% पर अपरिवर्तित
ग्रामीण और शहरी URग्रामीण 2.4%, शहरी 4.8%शहरी महिला UR 6.4% (2024 में 6.7%)
युवा (15-29 वर्ष) UR9.9%2024 में 10.3%; ग्रामीण युवा 8.3%, शहरी युवा 13.6%
शिक्षित (माध्यमिक और ऊपर) UR6.5%2024 में 7.0%
रोज़गार की स्थिति के हिस्सेस्व-रोज़गार 56.2%, नियमित वेतनभोगी 23.6%, अनियत श्रम 20.2%2024 में स्व-रोज़गार 57.5%, नियमित 22.4%, अनियत 20.0%
रोज़गार, शिक्षा या प्रशिक्षण में नहीं (NEET)15-24 वर्ष में 21.0%; 15-29 वर्ष में 25.0%सामान्य स्थिति के अनुसार
कुल रोज़गार का अनुमानलगभग 61.6 करोड़पुरुष 41.6 करोड़, महिला 20.0 करोड़ (MoHFW के अनुमानित जनसंख्या आँकड़ों से)

इन आँकड़ों को कैसे पढ़ें (विश्लेषण)

कुल बेरोज़गारी दर नीची है, पर तस्वीर बराबर नहीं है। युवाओं में दर (9.9%) कुल दर से तीन गुना से भी ज़्यादा है, शहरी युवाओं में 13.6% और शिक्षितों में 6.5%। यानी समस्या पढ़े-लिखे नौजवानों और शहरों में ज़्यादा तीखी है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में काम तो है, पर वह अक्सर स्व-रोज़गार या अनियत श्रम के रूप में है, जिसमें आय और सुरक्षा कम रहती है।

महिलाओं की LFPR 40.0% है, जबकि पुरुषों की 79.1%। इसका अर्थ है कि बहुत-सी महिलाएँ काम खोज ही नहीं रहीं, इसलिए उनकी बेरोज़गारी दर कम दिखती है। यह छिपी हुई चुनौती है, जिसे सिर्फ़ UR से नहीं पकड़ा जा सकता। अनियत श्रम का हिस्सा लगभग पाँचवाँ भाग (20.2%) बना हुआ है, जो असुरक्षित रोज़गार की ओर इशारा करता है। उत्साहवर्धक बात यह है कि नियमित वेतनभोगी रोज़गार का हिस्सा 22.4% से बढ़कर 23.6% हुआ।

बेरोज़गारी के प्रकार (सैद्धांतिक वर्गीकरण)

प्रकारअर्थभारतीय संदर्भ में उदाहरण
खुली (open)काम करने की इच्छा और क्षमता, पर कोई काम नहींनौकरी की तलाश में बैठा स्नातक
प्रच्छन्न (disguised)काम में लगे दिखते हैं, पर उनके हटने से उत्पादन नहीं घटताछोटे खेत पर ज़रूरत से ज़्यादा परिवारजन
मौसमी (seasonal)साल के कुछ महीनों में ही कामबुवाई-कटाई के बीच खेतिहर मज़दूर
शिक्षित बेरोज़गारीयोग्यता है, पर मेल खाता काम नहींनौकरियों से ज़्यादा आवेदक
संरचनात्मक (structural)अर्थव्यवस्था की बनावट और कौशल की माँग-पूर्ति में अंतरकौशल बदलने पर पुराने कौशल वाले बेकार
घर्षणात्मक (frictional)एक नौकरी छोड़ने और दूसरी पाने के बीच का अंतरालनौकरी बदलते समय खाली अवधि
अल्प-रोज़गार (underemployment)काम तो है, पर घंटे या योग्यता से कमदिन में कुछ घंटे ही दिहाड़ी मिलना

कारण (विश्लेषण)

पहला कारण जनसंख्या और कार्यबल की वृद्धि है। हर साल बहुत से नौजवान श्रम-बाज़ार में आते हैं, जबकि औपचारिक नौकरियाँ उसी रफ़्तार से नहीं बढ़तीं। दूसरा कारण कृषि पर निर्भरता है। 2025 की PLFS बताती है कि कृषि में काम करने वालों का हिस्सा घट रहा है और विनिर्माण का बढ़ रहा है, यानी बदलाव चल रहा है, पर अभी बहुत लोग कम उत्पादकता वाले काम में फँसे हैं।

तीसरा कारण शिक्षा और कौशल का बेमेल है। डिग्री और बाज़ार की माँग के बीच अंतर रहता है, इसलिए शिक्षित बेरोज़गारी बनी रहती है। चौथा कारण अनौपचारिक रोज़गार है, जिसमें अनियत श्रम और स्व-रोज़गार का बड़ा हिस्सा है और आय अनिश्चित रहती है। पाँचवाँ कारण लैंगिक बाधाएँ हैं, जैसे सुरक्षा, घरेलू ज़िम्मेदारी और अवसरों की कमी, जिनसे महिलाओं की भागीदारी कम रहती है। छठा कारण तकनीकी बदलाव और माँग में उतार-चढ़ाव है, जो कुछ कामों को ख़त्म और कुछ नए खोलता है।

परिणाम (विश्लेषण)

बेरोज़गारी का पहला परिणाम ग़रीबी और आर्थिक असुरक्षा है, और ये दोनों आगे बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर असर डालती हैं। दूसरा परिणाम मानसिक तनाव, निराशा और कई बार नशे या अपराध की ओर झुकाव है। तीसरा परिणाम प्रवास है, जिससे परिवार टूटते हैं और शहरों में बस्तियाँ बढ़ती हैं। चौथा परिणाम सामाजिक अस्थिरता और राजनीतिक असंतोष है। पाँचवाँ परिणाम मानव-संसाधन की बर्बादी है, यानी जनसांख्यिकीय लाभांश (demographic dividend) हाथ से निकल जाना।

संवैधानिक आधार और नीति-उपाय

संविधान का अनुच्छेद 41 (राज्य के नीति-निदेशक तत्व) कहता है कि राज्य अपनी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमा में काम के अधिकार, शिक्षा के अधिकार और बेरोज़गारी, वृद्धावस्था, बीमारी, अपंगता तथा अन्य अयोग्य अभाव में सार्वजनिक सहायता की प्रभावी व्यवस्था करेगा। यह प्रवर्तनीय अधिकार नहीं, पर नीति की दिशा तय करता है।

ग्रामीण क्षेत्र का मुख्य क़ानूनी उपाय अब विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB-G RAM G) है। यह दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 की जगह लेता है। इसकी बारीकियाँ नीचे की केस स्टडी में हैं। कौशल-विकास, स्व-रोज़गार और ऋण-सहायता जैसे उपाय भी साथ चलते हैं, पर उनके आँकड़े इस पृष्ठ पर जानबूझकर नहीं दिए गए, क्योंकि वे अलग-अलग योजनाओं और वर्षों के हैं (उत्तर में योजना का नाम और उद्देश्य लिखना काफ़ी है)।

बेरोज़गारी: कारण, परिणाम और उपाय का चक्र

बेरोज़गारी

माप

PLFS (MoSPI): UR, LFPR, WPR

  • सामान्य स्थिति (365 दिन)
  • चालू साप्ताहिक (7 दिन)
  • स्व-रोज़गार, नियमित, अनियत

प्रकार

सैद्धांतिक वर्गीकरण

  • खुली, प्रच्छन्न, मौसमी
  • शिक्षित, संरचनात्मक
  • घर्षणात्मक, अल्प-रोज़गार

कारण

माँग, कौशल और संरचना

  • कृषि पर निर्भरता
  • कौशल-बेमेल
  • अनौपचारिकता, लैंगिक बाधाएँ

उपाय

गारंटी, कौशल, उद्यम

  • VB-G RAM G: 125 दिन
  • कौशल और स्व-रोज़गार
  • अनुच्छेद 41 की दिशा
UR के साथ भागीदारी और रोज़गार की गुणवत्ता देखने से ही बेरोज़गारी की सही तस्वीर बनती है (विश्लेषण)।

मुख्य तथ्य

बेरोज़गारी दर (UR), 15+ , सामान्य स्थिति
3.1% पुरुष और महिला दोनों के लिए, वर्ष 2025
युवा (15-29) UR
9.9% (2025), 2024 में 10.3%; शहरी युवा 13.6%, ग्रामीण 8.3%
LFPR और WPR (15+)
LFPR 59.3% और WPR 57.4% (2025); महिला LFPR 40.0%, पुरुष 79.1%
रोज़गार की स्थितियाँ
2025: स्व-रोज़गार 56.2%, नियमित वेतनभोगी 23.6%, अनियत श्रम 20.2%
अनियत श्रम की परिभाषा
दूसरों के उद्यम में दैनिक या आवधिक अनुबंध के अनुसार मज़दूरी पाने वाला (PLFS 2022-23, परिशिष्ट C)
VB-G RAM G अधिनियम, 2025
125 दिन की गारंटी; राष्ट्रपति की स्वीकृति 21 दिसंबर 2025; 1 जुलाई 2026 से लागू और उसी तारीख़ से MGNREGA निरस्त
राज्य के नीति-निदेशक तत्व
अनुच्छेद 41: काम का अधिकार आदि, आर्थिक क्षमता की सीमा में
अंतिम जाँच
PLFS के आँकड़ों का MoSPI और PIB से मिलान: 2 अक्टूबर 2026; PLFS की रिपोर्ट पर आधारित ये आँकड़े हर वर्ष बदलते हैं, इसलिए उत्तर में "PLFS 2025" साथ लिखें

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • UR को जनसंख्या का प्रतिशत लिख देना: UR का आधार श्रम-बल है, कुल जनसंख्या नहीं।
  • "अनियत रोज़गार" को केवल "बेरोज़गार" या "अस्थायी नौकरी" लिख देना: PLFS में यह दैनिक या आवधिक अनुबंध पर दूसरों के उद्यम में मज़दूरी वाला रोज़गार है।
  • आँकड़े का वर्ष और स्रोत न लिखना: "PLFS 2025" साथ लिखें; वही आँकड़ा पुराने वर्षों में अलग है।
  • पुराने ग्रामीण रोज़गार क़ानून को आज भी लागू बताना: MGNREGA 1 जुलाई 2026 से निरस्त है और अब VB-G RAM G अधिनियम, 2025 लागू है।
  • कम UR को अच्छी बात मान लेना: महिला LFPR और रोज़गार की गुणवत्ता (अनियत और अनौपचारिक काम) भी जोड़ें।