वैश्वीकरण: वैश्विक गाँव, सांस्कृतिक प्रवाह और भारतीय समाज
वैश्वीकरण का अर्थ, भारत में 1991 का मोड़, मैकलुहान का वैश्विक गाँव और अप्पादुरै के पाँच सांस्कृतिक प्रवाह; तीनों पूछे गए प्रश्न हल सहित।
- वैश्वीकरण
- वैश्विक गाँव
- अप्पादुरै
- नृजातीयता
- ग्लोकलीकरण
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग क (समाजशास्त्र): "Changes in contemporary Indian society and culture: secularisation, urbanisation, modernisation and globalisation." इस पृष्ठ पर वैश्वीकरण है; धर्मनिरपेक्षीकरण, नगरीकरण और आधुनिकीकरण के अलग पृष्ठ हैं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- संकलित छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में वैश्वीकरण पर तीन प्रश्न मिले, तीनों 2 अंक (15 शब्द) के: 2021 में वैश्विक गाँव, 2023 में अप्पादुरै के सांस्कृतिक प्रवाह, 2024 में नृजातीयता का वैश्वीकरण (2013-2024 के पेपरों में देखा गया)।
- तीनों प्रश्न विचारकों की शब्दावली से हैं, यानी "वैश्वीकरण के लाभ और हानि" से आगे जाकर अवधारणा की परिभाषा पूछी गई। हर शब्द के लिए एक पंक्ति की परिभाषा और एक उदाहरण तैयार रखें।
- 2023 और 2024 के दोनों प्रश्न अप्पादुरै के एक ही लेख की शब्दावली से जुड़ते हैं (विश्लेषण)। इसलिए इस पृष्ठ में उस लेख के पाँचों प्रवाह और नृजातीयता वाला तर्क अलग-अलग दिए गए हैं।
पहले सरल भाषा में: एक मोबाइल की दुकान
कल्पना कीजिए, जोधपुर के किसी बाज़ार में मोबाइल की एक दुकान। फ़ोन किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी का है, उसके पुर्ज़े अलग-अलग देशों में बने हैं, ग्राहक यूट्यूब पर समीक्षा देखकर मॉडल तय करता है और भुगतान एक ऐप से होता है, जिसमें पैसा पल भर में बैंकों के बीच घूम जाता है। दुकानदार का बेटा विदेश में नौकरी करता है और रोज़ वीडियो कॉल पर घर से जुड़ा रहता है। एक ही दुकान में दुनिया भर के कई धागे जुड़ते दिखते हैं। यही वैश्वीकरण (Globalisation) की रोज़मर्रा की तस्वीर है।
NCERT की भाषा में वैश्वीकरण का अर्थ है दुनिया के अलग-अलग लोगों, क्षेत्रों और देशों के बीच बढ़ती परस्पर निर्भरता, जिसमें सामाजिक और आर्थिक संबंध पूरी दुनिया में फैलते चले जाते हैं। आर्थिक ताक़तें इसे आगे बढ़ाती हैं, पर वही अकेली कारण नहीं हैं। सबसे बड़ी भूमिका सूचना और संचार तकनीक की रही है, जिसने लोगों के बीच संपर्क की गति और दायरा, दोनों बढ़ा दिए।
परीक्षा के लिए एक पंक्ति में याद रखिए: वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें व्यापार, पूँजी, तकनीक, सूचना और संस्कृति के प्रवाह से अलग-अलग देशों और समाजों के बीच जुड़ाव और परस्पर निर्भरता बढ़ती है (यह NCERT की परिभाषा पर आधारित हमारा सार है)।
समाजशास्त्र इस बड़ी प्रक्रिया को व्यक्ति और समाज, छोटे और बड़े, स्थानीय और वैश्विक के रिश्ते की नज़र से देखता है। सवाल इस तरह के बनते हैं: दूर के किसी गाँव का किसान वैश्विक बदलावों से कैसे जुड़ा है, मोहल्ले के किराना दुकानदार का क्या होगा अगर खुदरा क्षेत्र बड़ी विदेशी कंपनियों के लिए खुले, और युवा अपना खाली समय कैसे बिताते हैं। NCERT इन्हीं सवालों से अध्याय शुरू करता है।
वैश्वीकरण के तीन आयाम
NCERT समझाने की सुविधा के लिए वैश्वीकरण को आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक आयामों में बाँटता है, पर साथ ही चेताता है कि ये आपस में गहराई से गुँथे हैं। आर्थिक आयाम में बहुराष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय निगम (Transnational Corporations) आते हैं, यानी वे कंपनियाँ जो एक से अधिक देशों में उत्पादन करती या सेवाएँ बेचती हैं। इसी में "इलेक्ट्रॉनिक अर्थव्यवस्था" भी है, जहाँ बैंक, कंपनियाँ और निवेशक माउस के एक क्लिक से धन एक देश से दूसरे देश भेज देते हैं। NCERT यह भी याद दिलाता है कि इस तेज़ी में जोखिम है, जैसे विदेशी निवेशकों के शेयर बेचकर निकल जाने से बाज़ार का अचानक गिरना।
राजनीतिक आयाम में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का बढ़ता दखल और सरकारों की बदलती भूमिका आती है। NCERT के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी संस्थाओं से ऋण कुछ शर्तों पर मिलता है, जिनमें अक्सर सामाजिक क्षेत्र पर सरकारी ख़र्च में कटौती जैसे "संरचनात्मक समायोजन" शामिल होते हैं, और विश्व व्यापार संगठन (WTO) की बात का वज़न बढ़ता है। सांस्कृतिक आयाम में खान-पान, पहनावा, फ़िल्म, संगीत, भाषा और उपभोग की आदतें आती हैं।
तीन आयाम एक नज़र में
| आयाम | क्या बदलता है | NCERT से उदाहरण | सावधानी |
|---|---|---|---|
| आर्थिक | व्यापार, पूँजी का प्रवाह, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, इलेक्ट्रॉनिक धन | स्थानीय फल-दुकान में विदेशी सेब और संतरे का रस; शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशकों की ख़रीद-बिक्री | एक ही नीति शहरी उपभोक्ता को अधिक विकल्प और किसान को आजीविका का संकट दे सकती है |
| राजनीतिक | अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (IMF, WTO) का दखल, सरकार की बदलती भूमिका | WTO के नियमों का खेती और किसान पर असर; ऋण की शर्तों से सामाजिक क्षेत्र में कटौती | राज्य की नीति-स्वायत्तता घट सकती है (विश्लेषण) |
| सांस्कृतिक | पहनावा, भोजन, संगीत, फ़िल्म, भाषा, उपभोग की संस्कृति | विदेशी चैनलों का भारतीय भाषाओं में प्रसारण; भांगड़ा-पॉप और फ़्यूज़न संगीत | न पूरी समरूपता होती है, न स्थानीयता बची रहती है; मिश्रण बनता है (ग्लोकलीकरण) |
आयाम NCERT कक्षा 12 अध्याय 6 पर आधारित; 'सावधानी' का स्तंभ हमारा विश्लेषण है।
भारत में वैश्वीकरण: 1991 का मोड़
भारत में वैश्वीकरण की चर्चा अक्सर उदारीकरण (Liberalisation) के साथ होती है। NCERT के अनुसार उदारीकरण उन नीतिगत फ़ैसलों का समूह है जो भारतीय राज्य ने 1991 से भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व बाज़ार के लिए खोलने को लिए। यह उस पुरानी नीति से अलग था जिसमें देश के बाज़ार और देशी उद्योग को बाहरी प्रतिस्पर्धा से बचाया जाता था। पुस्तक के अनुसार जुलाई 1991 से कृषि, उद्योग, व्यापार, विदेशी निवेश और तकनीक, सार्वजनिक क्षेत्र और वित्तीय संस्थाओं जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में सुधारों की एक शृंखला चली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग विभाग (DPIIT) के अभिलेख में "Statement on Industrial Policy" की तारीख़ 24 जुलाई 1991 दर्ज है, जो इसी दौर का दस्तावेज़ है।
यहाँ एक भेद साफ़ रखना ज़रूरी है। उदारीकरण राज्य की नीति है; वैश्वीकरण उससे बड़ी प्रक्रिया है, जिसे नीति के साथ तकनीक, बाज़ार और राजनीति ने मिलकर चलाया। भारत में उदारीकरण ने वैश्वीकरण को तेज़ किया, पर वैश्वीकरण का दायरा केवल भारतीय नीति तक सीमित नहीं है। WTO के अपने पृष्ठ के अनुसार भारत 1 जनवरी 1995 से WTO का सदस्य है और 8 जुलाई 1948 से GATT का सदस्य रहा है, यानी बहुपक्षीय व्यापार-व्यवस्था से भारत का जुड़ाव 1991 से पुराना है।
उदारीकरण और वैश्वीकरण: अंतर
| बिंदु | उदारीकरण (Liberalisation) | वैश्वीकरण (Globalisation) |
|---|---|---|
| स्वभाव | राज्य की नीति और नियमों में ढील | समाजों के जुड़ाव की व्यापक प्रक्रिया |
| कर्ता | सरकार; भारत के संदर्भ में 1991 से | तकनीक, बाज़ार, संस्थाएँ, राजनीति और संस्कृति, सब मिलकर |
| दायरा | मुख्यतः आर्थिक नियम (उद्योग, व्यापार, निवेश, वित्त) | आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक, तीनों |
| संबंध | वैश्वीकरण को आगे बढ़ाने वाला कारक | उदारीकरण से तेज़ होता है, पर उस तक सीमित नहीं |
NCERT दोनों शब्दों को संबंधित पर अलग बताता है; तालिका का ढाँचा हमारा है।
वैश्विक गाँव (Global Village): 2021 का प्रश्न
गाँव की चौपाल पर कोई ख़बर पहुँचती है तो मिनटों में हर घर तक फैल जाती है, और सबको सबकी ख़बर रहती है। "वैश्विक गाँव" का विचार यही कहता है कि संचार के नए साधनों ने पूरी दुनिया को ऐसे ही जोड़ दिया है, जैसे एक गाँव के लोग आपस में जुड़े होते हैं। यह शब्द कनाडा के मीडिया-सिद्धांतकार मार्शल मैकलुहान (Marshall McLuhan) से जुड़ा है। इलिनॉय विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के अभिलेख के अनुसार उन्होंने 1960 के दशक की शुरुआत में रेडियो और टेलीविज़न जैसी तकनीकों के संदर्भ में इसे गढ़ा, और उनकी पुस्तक द गुटेनबर्ग गैलेक्सी (1962) का वाक्य है कि नई विद्युतीय परस्पर-निर्भरता दुनिया को "वैश्विक गाँव" की छवि में ढाल देती है।
आज यह विचार इंटरनेट पर और अधिक सटीक लगता है, जहाँ दूर बैठे लोग तुरंत संवाद कर सकते हैं और हर घटना की जानकारी सेकंडों में मिलती है। पर उसी अभिलेख में यह भी दर्ज है कि मैकलुहान स्वयं निश्चित नहीं थे कि इसके परिणाम समाज के लिए अच्छे होंगे या बुरे। परीक्षा के उत्तर में यह संतुलन दिखाइए: एक ओर सूचना और सहयोग की सुगमता, दूसरी ओर अफ़वाहों का तेज़ फैलना और बड़ी संस्कृतियों का दबाव। साथ ही यह टिप्पणी जोड़ सकते हैं कि "गाँव" में सबकी पहुँच बराबर नहीं है, इंटरनेट और उपकरण सबके पास समान नहीं (विश्लेषण)।
अप्पादुरै के पाँच सांस्कृतिक प्रवाह: 2023 का प्रश्न
मानवशास्त्री अर्जुन अप्पादुरै (Arjun Appadurai) ने 1990 के अपने लेख "Disjuncture and Difference in the Global Cultural Economy" में कहा कि वैश्विक संस्कृति एक सीधी-सपाट प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने पाँच प्रवाहों को "स्केप" (scape, यानी भू-दृश्य) कहा, ताकि उनके बहते, अनियमित और हर देखने वाले के लिए अलग दिखने वाले स्वरूप को पकड़ा जा सके। पाँच प्रवाह हैं: एथ्नोस्केप (ethnoscape), टेक्नोस्केप (technoscape), फ़ाइनेंसस्केप (finanscape, जो लेख में इसी वर्तनी में है), मीडियास्केप (mediascape) और आइडियोस्केप (ideoscape)।
इन पाँचों का सबसे अहम पहलू यह है कि वे एक साथ, एक ही रफ़्तार से, एक ही दिशा में नहीं बहते। अप्पादुरै के अनुसार इनके आपसी रिश्ते गहराई से विसंगत (disjunctive) और अप्रत्याशित हैं, क्योंकि हर प्रवाह के अपने प्रोत्साहन और अपनी बाधाएँ हैं। इसलिए तकनीक आ जाए तो ज़रूरी नहीं कि पूँजी या विचार भी उसी रफ़्तार से आएँ। इसी विसंगति (disjuncture) से वैश्विक संस्कृति की जटिलता बनती है, जो किसी "पश्चिमीकरण" या "अमेरिकीकरण" के एक सूत्र में नहीं समाती।
पाँच स्केप: परिभाषा और उदाहरण
| प्रवाह (स्केप) | अप्पादुरै के अनुसार किसका प्रवाह | समझने के लिए हमारा उदाहरण |
|---|---|---|
| एथ्नोस्केप (ethnoscape) | लोगों का भू-दृश्य: पर्यटक, आप्रवासी, शरणार्थी, निर्वासित, अतिथि-श्रमिक और अन्य घूमते समूह | पढ़ाई या नौकरी के लिए विदेश जाने वाले भारतीय; भारत आने वाले पर्यटक |
| टेक्नोस्केप (technoscape) | तकनीक का वैश्विक ढाँचा, ऊँची और निचली, यांत्रिक और सूचनात्मक, जो पहले की अभेद्य सीमाएँ तेज़ी से लाँघती है | सॉफ़्टवेयर और मोबाइल तकनीक का एक देश से दूसरे देश जाना |
| फ़ाइनेंसस्केप (finanscape) | वैश्विक पूँजी का प्रवाह: मुद्रा-बाज़ार, शेयर बाज़ार और पूँजी का तेज़, रहस्यमय आवागमन | विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाज़ार में पैसा लगाना और निकालना |
| मीडियास्केप (mediascape) | सूचना बनाने-फैलाने की इलेक्ट्रॉनिक क्षमता और उससे बनी छवियाँ: समाचार, फ़िल्म, टीवी, कथाएँ | अंतरराष्ट्रीय फ़िल्में, ओटीटी और वीडियो-मंच जो दूसरे देशों की ज़िंदगी दिखाते हैं |
| आइडियोस्केप (ideoscape) | छवियों की वह शृंखला जो प्रायः सीधे राजनीतिक है: राज्यों की विचारधाराएँ और सत्ता पाने वाले आंदोलनों की प्रति-विचारधाराएँ; इनमें स्वतंत्रता, कल्याण, अधिकार, संप्रभुता, प्रतिनिधित्व और लोकतंत्र जैसे शब्द | अधिकार, पर्यावरण या लोकतंत्र के नाम पर चलने वाले अंतरराष्ट्रीय आंदोलन |
दूसरे स्तंभ की परिभाषाएँ अप्पादुरै के लेख से (अपने शब्दों में); तीसरे स्तंभ के उदाहरण हमारे हैं, लेख के नहीं।
नृजातीयता का वैश्वीकरण (Globalisation of Ethnicity): 2024 का प्रश्न
नृजातीयता (ethnicity) का अर्थ है किसी समूह की साझा भाषा, रंग-रूप, नातेदारी, इलाक़े या परंपरा पर टिकी पहचान। अप्पादुरै अपने लेख के अंत में इसी विषय पर एक विरोधाभास रखते हैं। उनका कहना है कि आज की नृजातीय राजनीति का केंद्रीय विरोधाभास यह है कि भाषा, रंग, पड़ोस या नातेदारी जैसे "आदिम" (primordial) लगाव वैश्वीकृत हो गए हैं। ये भावनाएँ पहले अपने इलाक़े की निकटता में ताक़त पाती थीं, पर अब लोगों के घूमने के बावजूद वे मीडिया की उन्नत क्षमताओं के सहारे एक-दूसरे से जुड़े रहकर विशाल और अनियमित दूरियों पर फैल गई हैं।
अप्पादुरै यह भी जोड़ते हैं कि ऐसे आदिम लगाव अक्सर गढ़ी हुई परंपराओं या बाद में जोड़ी गई निष्ठाओं का परिणाम होते हैं, पर महत्त्वपूर्ण यह है कि वाणिज्य, मीडिया, राष्ट्रीय नीतियों और उपभोक्ता कल्पनाओं की विसंगत टकराहट में नृजातीयता, जो कभी किसी स्थान की बोतल में बंद जिन्न थी, अब राज्यों और सीमाओं की दरारों से निकलती वैश्विक शक्ति बन गई है। इसे सरल उदाहरण से समझिए: विदेश में बसा कोई प्रवासी समुदाय अपनी भाषा, त्योहार और पहचान को वहाँ भी निभाता है और टीवी, वीडियो तथा सोशल मीडिया से अपने मूल क्षेत्र से जुड़ा रहता है (यह उदाहरण हमारा है)।
निष्कर्ष यह कि वैश्वीकरण पहचानों को मिटाता नहीं, कई बार उन्हें नए ढंग से संगठित और तीखा भी करता है। इसलिए "वैश्वीकरण यानी सब कुछ एक जैसा" वाली सोच अधूरी है।
समरूपता बनाम ग्लोकलीकरण
वैश्वीकरण पर संस्कृति के स्तर की सबसे पुरानी बहस यह है कि क्या सारी संस्कृतियाँ एक जैसी हो जाएँगी (समरूपीकरण, homogenisation) या वैश्विक और स्थानीय मिलकर कुछ नया बनाएँगी। NCERT ग्लोकलीकरण (Glocalisation) को वैश्विक और स्थानीय के मिश्रण के रूप में बताता है और जोड़ता है कि यह पूरी तरह स्वतःस्फूर्त नहीं होता, न व्यावसायिक हितों से अलग होता है। विदेशी कंपनियाँ स्थानीय परंपराओं के साथ तालमेल बिठाकर अपनी बिक्री बढ़ाने की रणनीति के रूप में इसे अपनाती हैं।
NCERT के ही उदाहरण परीक्षा में काम आते हैं: स्टार, एमटीवी, चैनल वी और कार्टून नेटवर्क जैसे विदेशी चैनल भारतीय भाषाओं का प्रयोग करते हैं; मैकडॉनल्ड्स भारत में केवल शाकाहारी और चिकन उत्पाद बेचता है, गोमांस नहीं, और नवरात्रि के दौरान शाकाहारी हो जाता है; संगीत में भांगड़ा-पॉप, इंडी-पॉप, फ़्यूज़न और रीमिक्स लोकप्रिय हुए। किताब का निष्कर्ष है कि संस्कृति कोई जमी हुई चीज़ नहीं, और वैश्वीकरण से केवल नई स्थानीय परंपराएँ ही नहीं, नई वैश्विक परंपराएँ भी बन सकती हैं।
एक बात और। प्रवाह केवल बाहर से भारत की ओर नहीं आता। भारत से निकलकर दुनिया में फैलने वाली चीज़ों में योग एक उदाहरण है, जिस पर नीचे के केस-अध्ययन में बात है।
वैश्वीकरण के प्रभाव: असमान असर
NCERT की बुनियादी बात यह है कि वैश्वीकरण का असर सब पर एक जैसा नहीं पड़ता। किसी के लिए नए अवसर खुलते हैं और किसी की आजीविका छिन जाती है। पुस्तक के ठोस उदाहरण दर्ज करने लायक़ हैं: बिहार की महिला रेशम-कातने वालों का काम तब घटा जब चीन और कोरिया का सस्ता, चमकदार रेशमी धागा बाज़ार में आया; बड़े विदेशी मछली-पकड़ने वाले जहाज़ों के भारतीय जल में आने से मछली छाँटने, सुखाने और बेचने वाली महिलाओं की आजीविका प्रभावित हुई; गुजरात में बबूल से गोंद इकट्ठा करने वाली महिलाओं का काम सूडान से सस्ता गोंद आने से गया; और कई शहरों में कबाड़ चुनने वालों का काम विकसित देशों से कागज़ का कचरा आयात होने से घटा।
इसलिए उत्तर लिखते समय बहस के दोनों पक्ष रखिए। समर्थक मानते हैं कि इससे बेहतर दुनिया बनेगी। आलोचक कहते हैं कि विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों को लाभ होता है और पहले से वंचित बड़े हिस्से की हालत बिगड़ती है। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि वैश्वीकरण कोई नई चीज़ ही नहीं है। ऐसे मिले-जुले मूल्यांकन के साथ उत्तर पूरा लगता है।
वैश्वीकरण का नक्शा
वैश्वीकरण
आयाम
आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक
- निगम और इलेक्ट्रॉनिक धन
- IMF और WTO
- भोजन, फ़िल्म, संगीत
भारत
जुलाई 1991 से सुधार
- औद्योगिक नीति वक्तव्य, 24-7-1991
- WTO सदस्य, 1-1-1995
- उदारीकरण से अंतर
वैश्विक गाँव
मैकलुहान, 1962
- रेडियो, टीवी, इंटरनेट
- सूचना बनाम अफ़वाह
- डिजिटल असमानता (विश्लेषण)
अप्पादुरै के पाँच स्केप
1990 का लेख
- एथ्नो, टेक्नो, फ़ाइनेंस
- मीडिया, आइडियो
- आपसी विसंगति
संस्कृति
समरूपता या ग्लोकलीकरण
- नृजातीयता का वैश्वीकरण
- भारतीय चैनलों का स्थानीयकरण
- योग दिवस
समय-रेखा: जिन तारीख़ों से प्रश्न बनते हैं
8 जुलाई 1948
भारत GATT का सदस्य (WTO का पृष्ठ)
1962
मैकलुहान की पुस्तक द गुटेनबर्ग गैलेक्सी; "वैश्विक गाँव" की छवि
1990
अप्पादुरै का लेख: पाँच स्केप और नृजातीयता का तर्क
24 जुलाई 1991
औद्योगिक नीति वक्तव्य; सुधारों की शृंखला जुलाई 1991 से
1 जनवरी 1995
भारत WTO का सदस्य
11 दिसंबर 2014
संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 69/131: 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
मुख्य तथ्य
- "वैश्विक गाँव" शब्द
- कनाडाई मीडिया-सिद्धांतकार मैकलुहान; 1960 के दशक की शुरुआत; The Gutenberg Galaxy (1962) में उद्धरण
- अप्पादुरै का लेख
- Theory, Culture & Society, खंड 7(2), 1990, पृ. 295 से; पाँच स्केप: एथ्नो, टेक्नो, फ़ाइनेंस, मीडिया, आइडियो
- नृजातीयता का तर्क
- आदिम लगाव (भाषा, रंग, पड़ोस, नातेदारी) वैश्वीकृत; पृ. 306, अप्पादुरै 1990
- उदारीकरण की शुरुआत
- औद्योगिक नीति वक्तव्य 24 जुलाई 1991; NCERT: जुलाई 1991 से सुधारों की शृंखला
- भारत और WTO
- WTO सदस्य 1 जनवरी 1995 से; GATT सदस्य 8 जुलाई 1948 से
- ग्लोकलीकरण के उदाहरण
- विदेशी चैनल भारतीय भाषाओं में; नवरात्रि में शाकाहारी मैकडॉनल्ड्स (NCERT, पुनर्मुद्रण 2026-27)
- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
- 21 जून; संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 69/131, 11 दिसंबर 2014
- सिलेबस की पंक्ति
- RPSC सिलेबस, 09-01-2026, पेपर I, इकाई III (क)
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- उदारीकरण और वैश्वीकरण को एक ही बता देना: उदारीकरण राज्य की नीति है, वैश्वीकरण उससे बड़ी प्रक्रिया। दोनों जुड़े हैं, पर अलग हैं।
- मैकलुहान को "वैश्वीकरण" का जनक लिख देना: उनसे जुड़ा शब्द "वैश्विक गाँव" है।
- अप्पादुरै के पाँच प्रवाहों में फ़ाइनेंसस्केप या आइडियोस्केप छोड़ देना, या आइडियोस्केप को केवल "विचार" लिख देना। उसमें राज्यों और आंदोलनों की राजनीतिक विचारधाराएँ आती हैं।
- वैश्वीकरण को केवल पश्चिमीकरण या सांस्कृतिक समरूपता लिखना: ग्लोकलीकरण और भारत से बाहर जाते प्रवाह (योग) भी उत्तर में आने चाहिए।
- नृजातीयता के वैश्वीकरण को "नस्लवाद" या "धार्मिक पहचान" तक सीमित कर देना: प्रश्न भाषा, नातेदारी, इलाक़े जैसे साझा लगावों के सीमा-पार फैलने की बात करता है।
- 2 अंक के उत्तर में अनावश्यक विस्तार: प्रश्न-पत्र पर छपी शब्द-सीमा के भीतर परिभाषा और एक उदाहरण पर्याप्त है।
केस स्टडी: योग दिवस, जब संस्कृति का प्रवाह भारत से बाहर गया
केस स्टडीसंयुक्त राष्ट्र और 21 जून
वैश्वीकरण पर चर्चा अक्सर विदेशी ब्रांडों और पश्चिमी संस्कृति के भारत आने तक सीमित रह जाती है। योग का उदाहरण उल्टी दिशा दिखाता है। तथ्य संयुक्त राष्ट्र के दो पृष्ठों से हैं।
- घटना
- संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 11 दिसंबर 2014 को महासभा ने प्रस्ताव 69/131 से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया, यह मानते हुए कि योग का आकर्षण सार्वभौमिक है।
- संयुक्त राष्ट्र का कथन
- UN DESA के पृष्ठ के अनुसार योग एक प्राचीन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है जिसकी शुरुआत भारत में हुई, और प्रस्ताव इसे स्वास्थ्य और कल्याण के समग्र दृष्टिकोण के रूप में पहचानता है।
- अप्पादुरै की दृष्टि से
- इस प्रवाह में एथ्नोस्केप (योग सिखाने और सीखने वाले लोग), मीडियास्केप (वीडियो और प्रसारण) और आइडियोस्केप (स्वास्थ्य और कल्याण का विचार) साथ चलते हैं (यह विश्लेषण हमारा है)।
सीख
उत्तर में लिखिए कि वैश्वीकरण दोतरफ़ा है: भारत विदेशी प्रभाव लेता भी है और अपनी सांस्कृतिक चीज़ें देता भी है। यह समरूपता की एकतरफ़ा कहानी को संतुलित करता है।
कार्य-उदाहरण: एक घटना को पाँच स्केप में बाँटकर पढ़ना (कल्पित)
हल सहित उदाहरणजयपुर की एक सॉफ़्टवेयर इंजीनियर का साल
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; पात्र और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं।
- जयपुर की रिया सॉफ़्टवेयर इंजीनियर है। वह एक विदेशी कंपनी के प्रोजेक्ट पर घर से काम करती है, जिसका निवेश अलग-अलग देशों के निवेशकों का है।
- वह छुट्टी में प्रवासी भारतीयों के एक सम्मेलन में जाती है, ऑनलाइन फ़िल्में देखती है और एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण अभियान से जुड़ती है।
- 1चरण 1: प्रवाह पहचानिए कंपनी की तकनीक और सॉफ़्टवेयर टेक्नोस्केप हैं; निवेशकों का पैसा फ़ाइनेंसस्केप; सम्मेलन में आने वाले प्रवासी एथ्नोस्केप; ऑनलाइन फ़िल्में मीडियास्केप; पर्यावरण अभियान का राजनीतिक विचार आइडियोस्केप।
- 2चरण 2: विसंगति ढूँढ़िए देखिए कि सब प्रवाह एक साथ नहीं पहुँचते। रिया तक तकनीक और मीडिया आसानी से पहुँचे, पर उसके पड़ोस की दुकान पर काम करने वाले युवा के पास न वह कौशल है न वह कंपनी। यही असमान पहुँच विसंगति (disjuncture) का उदाहरण है।
- 3चरण 3: नृजातीयता का कोण प्रवासी सम्मेलन में भाषा और परंपरा से जुड़ाव दिखता है। यह अप्पादुरै के तर्क जैसा है कि स्थानीय लगाव अब मीडिया और आवागमन के सहारे दूर तक फैल जाते हैं।
- 4चरण 4: 15 शब्द में उत्तर बनाइए परिभाषा का एक वाक्य, फिर एक पहचान-वाक्य। प्रश्न "अप्पादुरै के अनुसार सांस्कृतिक प्रवाह के रूप" पूछे तो पाँचों नाम क्रम से लिखिए।
निष्कर्ष: निष्कर्ष: एक ही घटना में पाँचों प्रवाह मिलते हैं, पर समान गति से नहीं। उत्तर में नामों के साथ "विसंगति" शब्द जोड़ने से अप्पादुरै का मूल तर्क दिख जाता है।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2024RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
'Globalisation of Ethnicity'
आदर्श उत्तर
भाषा, नातेदारी जैसे जातीय बंधन प्रवासियों और मीडिया के सहारे सीमाएँ लाँघकर वैश्विक शक्ति बन गए।
2023RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
Forms of Cultural Flow per Arjun Appadurai
आदर्श उत्तर
अप्पादुरै के पाँच प्रवाह: एथ्नोस्केप, टेक्नोस्केप, फ़ाइनेंसस्केप, मीडियास्केप और आइडियोस्केप; इनमें आपसी विसंगति रहती है।
2021RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
वैश्विक गाँव क्या है?
आदर्श उत्तर
मैकलुहान की अवधारणा: संचार-माध्यमों से पूरी दुनिया एक गाँव की तरह आपस में जुड़ गई है।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
उदारीकरण और वैश्वीकरण में एक अंतर लिखिए।
आदर्श उत्तर
उदारीकरण नीतिगत ढील है; वैश्वीकरण समाजों के आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक जुड़ाव की व्यापक प्रक्रिया है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
ग्लोकलीकरण क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
आदर्श उत्तर
ग्लोकलीकरण वैश्विक और स्थानीय के मेल को कहते हैं। विदेशी कंपनियाँ स्थानीय परंपराओं के अनुसार अपने उत्पाद ढालती हैं ताकि बिक्री बढ़े। NCERT के उदाहरण हैं: विदेशी चैनलों का भारतीय भाषाओं में प्रसारण और मैकडॉनल्ड्स का नवरात्रि में शाकाहारी हो जाना। यह दिखाता है कि वैश्वीकरण से हर जगह एक-सी संस्कृति नहीं बनती।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
वैश्वीकरण के सामाजिक प्रभावों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
आदर्श उत्तर
वैश्वीकरण ने संचार, उपभोक्ता-विकल्प और रोज़गार के नए अवसर खोले हैं। भारत में जुलाई 1991 के सुधारों के बाद विदेशी वस्तुएँ, चैनल और कंपनियाँ आम जीवन का हिस्सा बने। पर असर समान नहीं रहा: NCERT के अनुसार चीन और कोरिया का सस्ता रेशमी धागा आने से बिहार की महिला कातने वालों का काम घटा, और सूडान से सस्ता गोंद आने से गुजरात की महिला गोंद-संग्रहकर्ताओं की आजीविका गई। संस्कृति में समरूपता का डर है, पर ग्लोकलीकरण और भारत से योग जैसे प्रवाह दिखाते हैं कि मिश्रण भी बनता है। अतः वैश्वीकरण अवसर भी है और असमानता का स्रोत भी; नीति को वंचितों की सुरक्षा के साथ चलना चाहिए।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न: "वैश्वीकरण का भारतीय समाज और संस्कृति पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।" पहले दो वाक्यों में परिभाषा दीजिए: दुनिया के समाजों के बीच बढ़ती परस्पर निर्भरता, जिसे तकनीक, बाज़ार और नीति ने बढ़ाया।
मुख्य भाग
- भारत का संदर्भ: जुलाई 1991 से सुधार, WTO सदस्यता (1995), उदारीकरण से अंतर की एक पंक्ति
- सांस्कृतिक प्रभाव: विदेशी चैनल, भोजन, संगीत; समरूपीकरण का भय बनाम ग्लोकलीकरण (NCERT के उदाहरण)
- सैद्धांतिक औज़ार: मैकलुहान का वैश्विक गाँव; अप्पादुरै के पाँच स्केप और नृजातीयता का तर्क
- असमान असर: बिहार की रेशम-कातने वाली महिलाओं या गुजरात की गोंद-संग्रहकर्ताओं का NCERT उदाहरण
- दोतरफ़ा प्रवाह: योग दिवस (संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 69/131, 2014)
निष्कर्ष
निष्कर्ष: वैश्वीकरण अवसर और असमानता, दोनों लाता है; भारतीय समाज उसे स्थानीय ढाँचे में ढालता है, इसलिए संतुलित नीति और वंचितों की सुरक्षा ज़रूरी है।
अतिरिक्त मूल्य
- मैकलुहान के वैश्विक गाँव की एक पंक्ति के साथ "पहुँच की असमानता" की टिप्पणी (विश्लेषण)
- अप्पादुरै के शब्द "विसंगति" (disjuncture) का प्रयोग: प्रवाह एक साथ, एक गति से नहीं आते
त्वरित पुनरावृत्ति
- वैश्वीकरण = समाजों के बीच बढ़ती परस्पर निर्भरता; तकनीक सबसे बड़ा वाहक (NCERT)
- तीन आयाम: आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक
- उदारीकरण = राज्य की नीति (भारत में जुलाई 1991 से); वैश्वीकरण उससे व्यापक
- औद्योगिक नीति वक्तव्य 24 जुलाई 1991; WTO सदस्य 1 जनवरी 1995; GATT 8 जुलाई 1948
- वैश्विक गाँव: मैकलुहान, 1960 के दशक की शुरुआत; The Gutenberg Galaxy (1962)
- अप्पादुरै (1990): पाँच स्केप = एथ्नो, टेक्नो, फ़ाइनेंस, मीडिया, आइडियो
- स्केपों के बीच विसंगति (disjuncture) अप्पादुरै का मूल तर्क
- नृजातीयता का वैश्वीकरण: भाषा, नातेदारी जैसे आदिम लगाव मीडिया और प्रवासन से सीमा-पार फैले
- ग्लोकलीकरण: वैश्विक + स्थानीय; विदेशी चैनल भारतीय भाषाओं में; नवरात्रि में शाकाहारी मैकडॉनल्ड्स
- असमान असर: बिहार की रेशम-कातने वाली महिलाएँ, गुजरात की गोंद-संग्रहकर्ता, कबाड़ चुनने वाले (NCERT)
- दोतरफ़ा प्रवाह: योग दिवस, 21 जून; UNGA प्रस्ताव 69/131 (11 दिसंबर 2014)
याद रखने योग्य शब्द
- वैश्वीकरण
- उदारीकरण
- वैश्विक गाँव
- मैकलुहान
- अप्पादुरै
- एथ्नोस्केप
- विसंगति
- ग्लोकलीकरण
- नृजातीयता