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REET L1+L2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

पिछड़े एवं मंद अधिगमकर्ता (Backward & Slow Learners)

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पिछड़े बालक (backward child) और मंद गति से सीखने वाले बालक (slow learner) कक्षा में सामान्य के निकट बुद्धि रखते हुए भी अपनी उम्र के अनुरूप उपलब्धि हासिल नहीं कर पाते। REET में इनकी पहचान, विशेषताओं और उपचारात्मक शिक्षण-रणनीतियों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • REET 2024 में 2 प्रश्न
  • शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
  • 6 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में इस टॉपिक से 2 प्रश्न आए — एक पिछड़े बालक की विशेषता पहचानने पर, दूसरा औसत से कम बुद्धि वाले विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त शिक्षण-रणनीति पर। यानी परिभाषा के साथ-साथ 'सही रणनीति क्या है' वाले व्यावहारिक प्रश्न भी पूछे जाते हैं।

पिछड़ा बालक किसे कहते हैं

पिछड़ा बालक (Backward child) वह है जिसकी शैक्षिक उपलब्धि और मानसिक आयु अपने समवयस्क वर्ग (peer group) के औसत से निम्न होती है — यानी वह अपनी कक्षा-स्तर के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाता।

पिछड़ापन प्रायः किसी एक या कुछ विषयों में सीमित हो सकता है, जबकि मंद गति से सीखने वाला बालक (Slow learner) लगभग सभी विषयों में औसत से धीमी गति से सीखता है।

पिछड़ेपन के कारण बहुआयामी हो सकते हैं — घरेलू वातावरण में अस्थिरता, बार-बार विद्यालय बदलना, लंबी बीमारी के कारण पढ़ाई में अंतराल, संवेगात्मक असुरक्षा, या शुरुआती कक्षाओं में किसी अवधारणा की नींव कमज़ोर रह जाना। इसलिए हर पिछड़े बच्चे का कारण अलग हो सकता है, और उपचार भी उसी के अनुसार व्यक्तिगत (individualised) होना चाहिए।

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि पिछड़ापन स्थायी अवस्था नहीं है — सही समय पर पहचान व उचित सहयोग मिलने पर अधिकांश पिछड़े बच्चे अपने समवयस्क वर्ग के स्तर तक पहुँच सकते हैं, जबकि मानसिक मंदता एक अधिक स्थायी व गहरी सीमा है।

पिछड़ा बालक, मंद गति से सीखने वाला और मानसिक मंदता — अंतर

पक्षपिछड़ा बालक (Backward)मंद गति से सीखने वाला (Slow learner)मानसिक मंदता (Intellectual disability)
सामान्य बुद्धि-स्तरप्रायः सामान्य के निकट, पर उपलब्धि कमलगभग IQ 70-85 (सामान्य से थोड़ा कम)IQ लगभग 70 से नीचे
समस्या का दायराएक/कुछ विशेष विषयों तक सीमित हो सकता हैलगभग सभी विषयों में धीमी गतिसामान्य जीवन के अनेक क्षेत्रों में सीमा
मुख्य कारणभावनात्मक, सामाजिक या शिक्षण-संबंधी बाधाएँ अधिकजन्मजात मानसिक क्षमता थोड़ी कमन्यूरोलॉजिकल/जन्मजात सीमा अधिक गंभीर
उपचारनिदानात्मक परीक्षण के बाद लक्षित उपचारात्मक शिक्षण से सुधार संभवअतिरिक्त समय, सरल चरणों व अभ्यास से सुधार संभवविशेष शिक्षा (special education) की आवश्यकता

ध्यान रखें — तीनों अलग-अलग समूह हैं; REET में इन्हें आपस में मिलाकर गलत विकल्प बनाए जाते हैं।

पिछड़ेपन के सामान्य लक्षण

कक्षा में पिछड़े या मंद गति से सीखने वाले बच्चे में सामान्यतः ये लक्षण दिख सकते हैं — निर्देश समझने में अधिक समय लगना, बार-बार दोहराने पर भी अवधारणा स्पष्ट न होना, गृहकार्य समय पर पूरा न कर पाना, कक्षा-गतिविधियों में कम भाग लेना, और असफलता के डर से नई चीज़ आज़माने से बचना।

ऐसे लक्षण दिखने पर शिक्षक को तुरंत बच्चे को 'कमज़ोर' का लेबल देने की बजाय पहले निदानात्मक परीक्षण से यह पता लगाना चाहिए कि कठिनाई का वास्तविक कारण क्या है — कहीं यह दृष्टि/श्रवण संबंधी समस्या, घरेलू परिस्थिति या किसी विशेष अवधारणा की कमज़ोर नींव तो नहीं।

निदान और उपचारात्मक शिक्षण

निदानात्मक परीक्षण (Diagnostic test) से किसी विषय-विशेष में बच्चे की विशिष्ट अधिगम-कठिनाई का पता चलता है — यह केवल यह नहीं बताता कि बच्चे ने कितना सीखा (जैसे उपलब्धि परीक्षण करता है) बल्कि यह बताता है कि कहाँ और क्यों कठिनाई हो रही है।

इसके बाद दी जाने वाली उपचारात्मक शिक्षण (Remedial teaching) प्रक्रिया तब तक जारी रहनी चाहिए जब तक बच्चे की पहचानी गई कमी दूर न हो जाए — यह समय-सीमा या शिक्षक की सुविधा पर निर्भर नहीं करती।

उपलब्धि परीक्षण (achievement test) और निदानात्मक परीक्षण में मुख्य अंतर यह है कि उपलब्धि परीक्षण केवल यह बताता है कि बच्चे ने 'कितना' सीखा, जबकि निदानात्मक परीक्षण यह बताता है कि 'कहाँ' और 'क्यों' कठिनाई है — इसलिए उपचारात्मक शिक्षण की योजना हमेशा निदानात्मक परीक्षण के परिणामों पर आधारित होनी चाहिए, केवल अनुमान पर नहीं।

कक्षा में इसका उपयोग

रणनीतिविवरण
सामग्री को छोटे चरणों में देनाविषयवस्तु को तार्किक क्रम में छोटे-छोटे, सुपाच्य भागों में प्रस्तुत करना
आगे बैठाना व व्यक्तिगत ध्यानकमज़ोर बच्चों को आगे की सीट पर बैठाकर नज़दीकी निगरानी व सहायता देना (पीछे बैठाना उपेक्षा है)
पर्याप्त अभ्यास व पुनरावृत्तिएक अवधारणा को अलग-अलग उदाहरणों से बार-बार अभ्यास करवाना
व्यक्तिगत परामर्शबच्चे व अभिभावक दोनों से संवाद कर भावनात्मक सहयोग देना

REET 2024 में स्पष्ट रूप से पूछा गया था कि कमज़ोर बच्चों को 'पीछे बैठाना' गलत रणनीति है।

अभिभावकों व विद्यालय की भूमिका

पिछड़े व मंद गति से सीखने वाले बच्चों की सहायता में केवल कक्षा-शिक्षक ही नहीं, अभिभावकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है — घर पर सहयोगात्मक व दबाव-रहित माहौल, नियमित दिनचर्या और बच्चे की छोटी उपलब्धियों की सराहना उसे आत्म-विश्वास बनाए रखने में मदद करती है।

विद्यालय स्तर पर, बड़ी कक्षाओं में शिक्षक अकेले हर बच्चे को पर्याप्त समय नहीं दे पाता, इसलिए समय-समय पर अतिरिक्त कक्षाएँ (remedial classes), साथी-शिक्षण (peer tutoring) व संसाधन-कक्ष (resource room) जैसी व्यवस्थाएँ सहायक होती हैं। बच्चे को कभी भी 'कमज़ोर' या 'नालायक' जैसे लेबल से संबोधित नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे उसका आत्म-सम्मान और गिर सकता है।

याद रखने की ट्रिक

याद रखें: पिछड़ा बालक = 'कुछ विषयों में पिछड़ा', मंद गति से सीखने वाला = 'सब विषयों में धीमा', मानसिक मंदता = 'बुद्धि IQ 70 से नीचे, विशेष शिक्षा ज़रूरी'। और उपचारात्मक शिक्षण का सुनहरा नियम: कमज़ोर बच्चे को हमेशा आगे बैठाएँ, पीछे नहीं, और कभी अपमानजनक लेबल न दें।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 10

निम्नलिखित में से कौन-सी एक पिछड़े बालकों की विशेषता है ?

  1. Aऔसत से ऊपर की शैक्षिक उपलब्धि
  2. Bसमवयस्क वर्ग से उच्च बौद्धिक क्षमताएँ
  3. Cऔसत मानसिक और शैक्षिक आयु समवयस्क वर्ग से निम्न
  4. Dभाषा कौशल की निपुणता

व्याख्या

पिछड़ा बालक (Backward child) वह है जिसकी शैक्षिक उपलब्धि और मानसिक आयु अपनी कक्षा/समवयस्क वर्ग के औसत से कम होती है। इसलिए विकल्प (C) सही है। औसत से ऊपर की उपलब्धि या उच्च बौद्धिक क्षमता प्रतिभाशाली बालक की विशेषताएँ हैं।

प्रश्न 13

औसत से कम बुद्धिमता वाले छात्रों के लिए कौन-सी शिक्षण रणनीति की सिफारिश की जाती है ?

  1. Aबुनियादी चरणों को छोड देना
  2. Bबिना व्याख्या के प्रदत्त कार्य
  3. Cसामाग्री को छोटे और तार्किक चरणों में प्रस्तुत करना
  4. Dअभ्यासकारी अभ्यासों से बचना

व्याख्या

औसत से कम बुद्धि वाले (मंद गति से सीखने वाले) छात्रों के लिए विषयवस्तु को छोटे-छोटे, तार्किक क्रम वाले चरणों में, पर्याप्त अभ्यास और पुनरावृत्ति के साथ प्रस्तुत करना चाहिए। बुनियादी चरण छोड़ना, बिना व्याख्या कार्य देना या अभ्यास से बचना उनके सीखने को और कठिन बनाता है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

पिछड़ा बालक (Backward child) किसे कहा जाता है?

  1. Aजिसकी शैक्षिक उपलब्धि व मानसिक आयु समवयस्क वर्ग के औसत से निम्न हो
  2. Bजिसकी बुद्धि समवयस्क वर्ग से अधिक हो
  3. Cजो सभी विषयों में सर्वश्रेष्ठ हो
  4. Dजिसकी आयु सबसे अधिक हो

व्याख्या

पिछड़ा बालक वह है जिसकी शैक्षिक उपलब्धि और मानसिक आयु अपने समवयस्क वर्ग के औसत से कम होती है।

प्रश्न 2

मंद गति से सीखने वाला बालक (Slow learner) प्रायः किस IQ-सीमा में आता है?

  1. A70 से नीचे
  2. Bलगभग 70-85
  3. C130 से ऊपर
  4. Dठीक 100

व्याख्या

मंद गति से सीखने वाले बालक की बुद्धि-लब्धि (IQ) सामान्यतः लगभग 70-85 के बीच होती है — सामान्य से थोड़ी कम, पर मानसिक मंदता (70 से नीचे) जितनी कम नहीं।

प्रश्न 3

पिछड़े बालक और मंद गति से सीखने वाले बालक में मुख्य अंतर क्या है?

  1. Aदोनों बिल्कुल समान हैं
  2. Bपिछड़ापन प्रायः कुछ विषयों तक सीमित होता है, जबकि धीमी गति सभी विषयों में होती है
  3. Cपिछड़ा बालक हमेशा मानसिक रूप से मंद होता है
  4. Dधीमी गति से सीखने वाला बालक सामान्य से अधिक बुद्धिमान होता है

व्याख्या

पिछड़ापन आमतौर पर एक/कुछ विशेष विषयों तक सीमित हो सकता है, जबकि मंद गति से सीखने वाला बालक लगभग सभी विषयों में औसत से धीमी गति से सीखता है।

प्रश्न 4

किसी विषय में विद्यार्थी की विशिष्ट अधिगम-कठिनाई का पता लगाने के लिए कौन-सा परीक्षण उपयुक्त है?

  1. Aउपलब्धि परीक्षण
  2. Bनिदानात्मक परीक्षण
  3. Cव्यक्तित्व परीक्षण
  4. Dरुचि परीक्षण

व्याख्या

निदानात्मक परीक्षण (diagnostic test) विशेष रूप से यह पता लगाने के लिए बनाया जाता है कि किसी विषय में विद्यार्थी को कहाँ व क्यों कठिनाई हो रही है।

प्रश्न 5

निदानात्मक परीक्षण के बाद पिछड़े/मंद बालकों के लिए क्या दिया जाना चाहिए?

  1. Aसामान्य शिक्षण
  2. Bउपचारात्मक शिक्षण
  3. Cकोई विशेष सहायता नहीं
  4. Dकक्षा से निष्कासन

व्याख्या

निदान के बाद पहचानी गई कमियों को दूर करने के लिए उपचारात्मक शिक्षण (remedial teaching) दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 6

औसत से कम बुद्धि वाले विद्यार्थियों के लिए सामग्री कैसे प्रस्तुत करनी चाहिए?

  1. Aबहुत तेज़ी से एक साथ
  2. Bछोटे व तार्किक चरणों में
  3. Cबिना किसी उदाहरण के
  4. Dकेवल लिखित रूप में

व्याख्या

औसत से कम बुद्धि वाले विद्यार्थियों के लिए विषयवस्तु को छोटे, तार्किक क्रम वाले चरणों में, पर्याप्त अभ्यास के साथ प्रस्तुत करना उचित है।

प्रश्न 7

कक्षा में कमज़ोर/पिछड़े विद्यार्थियों को बैठाने के लिए उपयुक्त रणनीति क्या है?

  1. Aपीछे की सीट पर बैठाना
  2. Bआगे की सीट पर बैठाकर नज़दीकी ध्यान देना
  3. Cकक्षा के बाहर बैठाना
  4. Dअलग कमरे में बैठाना

व्याख्या

कमज़ोर विद्यार्थियों को आगे बैठाकर शिक्षक उन पर बेहतर नज़र रख सकता है और अतिरिक्त सहायता दे सकता है; पीछे बैठाना उनकी उपेक्षा मानी जाती है।

प्रश्न 8

उपचारात्मक शिक्षण की प्रक्रिया कब तक जारी रहनी चाहिए?

  1. Aजब तक शिक्षक की सुविधा हो
  2. Bजब तक विद्यार्थी की पहचानी गई कमी दूर न हो जाए
  3. Cकेवल एक सप्ताह तक
  4. Dजब तक विद्यार्थी रुचि खो न दे

व्याख्या

उपचारात्मक शिक्षण का उद्देश्य पहचानी गई कमी को दूर करना है, इसलिए यह तब तक जारी रहनी चाहिए जब तक वह कमी वास्तव में दूर न हो जाए।

प्रश्न 9

मानसिक मंदता (Intellectual disability) वाले बच्चों के लिए किस प्रकार की शिक्षा की सामान्यतः आवश्यकता होती है?

  1. Aसामान्य कक्षा-शिक्षण ही पर्याप्त है
  2. Bविशेष शिक्षा (special education) व व्यक्तिगत योजना
  3. Cकिसी शिक्षा की आवश्यकता नहीं
  4. Dकेवल उच्च कक्षा में प्रवेश

व्याख्या

मानसिक मंदता (IQ लगभग 70 से नीचे) वाले बच्चों को सामान्यतः विशेष शिक्षा व व्यक्तिगत शिक्षण-योजना (individualized education plan) की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 10

पिछड़े बालकों की सहायता के लिए निम्न में से कौन-सी रणनीति उपयुक्त नहीं है?

  1. Aव्यक्तिगत परामर्श देना
  2. Bशिक्षण सहायक सामग्री का प्रयोग करना
  3. Cकमियों के निराकरण में देरी करना
  4. Dपर्याप्त अभ्यास कराना

व्याख्या

पिछड़े बालकों की कमियों का निराकरण जितनी जल्दी हो सके करना चाहिए; देरी करना उपयुक्त रणनीति नहीं है, बल्कि विद्यार्थी को और पीछे धकेल सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिछड़ा बालक और मंद गति से सीखने वाला बालक में क्या अंतर है?+

पिछड़ापन प्रायः कुछ विशेष विषयों तक सीमित होता है, जबकि मंद गति से सीखने वाला बालक लगभग सभी विषयों में औसत से धीमी गति से सीखता है।

उपचारात्मक शिक्षण क्या है?+

निदानात्मक परीक्षण से पहचानी गई अधिगम-कमियों को दूर करने के लिए दिया जाने वाला विशेष, लक्षित शिक्षण उपचारात्मक शिक्षण कहलाता है।

कमज़ोर विद्यार्थियों को कक्षा में कहाँ बैठाना चाहिए?+

उन्हें आगे की सीट पर बैठाना चाहिए ताकि शिक्षक उन पर नज़दीकी ध्यान दे सके व समय पर सहायता कर सके; पीछे बैठाना उपेक्षा मानी जाती है।

उपचारात्मक शिक्षण कब तक चलनी चाहिए?+

यह तब तक जारी रहनी चाहिए जब तक विद्यार्थी की पहचानी गई कमी वास्तव में दूर न हो जाए, समय-सीमा या सुविधा के आधार पर नहीं।

पिछड़े बच्चे की पहचान के लिए शिक्षक को सबसे पहले क्या करना चाहिए?+

शिक्षक को पहले बच्चे को लेबल देने के बजाय निदानात्मक परीक्षण व अवलोकन से यह पता लगाना चाहिए कि कठिनाई का वास्तविक कारण क्या है, फिर उसी आधार पर उपचारात्मक योजना बनानी चाहिए।

उपचारात्मक शिक्षण में अभिभावकों की क्या भूमिका है?+

घर पर सहयोगात्मक व दबाव-रहित माहौल देना, नियमित दिनचर्या बनाए रखना और बच्चे की छोटी उपलब्धियों की सराहना करना — ये सब उपचारात्मक शिक्षण को कक्षा के बाहर भी सफल बनाने में अभिभावकों की भूमिका है।

क्या पिछड़े बच्चे स्थायी रूप से पीछे रह जाते हैं?+

नहीं, सही समय पर पहचान व उचित सहयोग मिलने पर अधिकांश पिछड़े बच्चे अपने समवयस्क वर्ग के स्तर तक पहुँच सकते हैं; यह मानसिक मंदता जितनी स्थायी सीमा नहीं है।

REET में पिछड़े व मंद अधिगमकर्ता से जुड़े प्रश्न किस रूप में आते हैं?+

अक्सर विशेषता पहचानने या सही/गलत शिक्षण-रणनीति चुनने के रूप में आते हैं — जैसे 'आगे बैठाना सही है या पीछे', इसलिए परिभाषा के साथ व्यावहारिक रणनीतियाँ भी याद रखें।

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए