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REET L1+L2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

पियाजे का संज्ञानात्मक विकास — REET CDP नोट्स

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पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत (Piaget's Cognitive Development) CDP का सबसे अधिक पूछा जाने वाला टॉपिक है, जिसमें चार अवस्थाओं (संवेदी-गामक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक, औपचारिक संक्रियात्मक) और स्कीमा, आत्मसात्करण, समायोजन जैसी अवधारणाओं पर उदाहरण-आधारित प्रश्न बनते हैं। इस पेज में हर अवस्था व अवधारणा को कक्षा के वास्तविक उदाहरणों से समझाया गया है।

  • REET 2024 में 3 प्रश्न
  • सभी स्तर (L1 व L2)
  • 9 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: SimplyPsychology — Piaget's Theory and Stages of Cognitive Development

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के तीनों प्रश्न उदाहरण देकर सही अवस्था/प्रक्रिया पहचानने पर आधारित थे — पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में विकसित होने वाली क्षमता, बच्चे द्वारा सभी पुरुषों को 'पापा' कहने के उदाहरण से आत्मसात्करण (Assimilation) पहचानना, और वस्तु स्थायित्व किस अवस्था में विकसित होता है। यानी परिभाषा रटने से काम नहीं चलेगा — हर अवस्था व अवधारणा को वास्तविक बाल-व्यवहार से जोड़कर समझना जरूरी है।

पियाजे का परिचय

जीन पियाजे (Jean Piaget), एक स्विस मनोवैज्ञानिक, ने प्रस्तावित किया कि बच्चा ज्ञान का निष्क्रिय ग्रहणकर्ता नहीं, बल्कि अपने वातावरण के साथ सक्रिय अंतःक्रिया करके स्वयं ज्ञान की रचना करने वाला 'छोटा वैज्ञानिक' है। यही दृष्टिकोण आगे चलकर संज्ञानात्मक रचनावाद (Cognitive Constructivism) की नींव बना।

पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास एक निश्चित क्रम में, चार अवस्थाओं से होकर गुजरता है, और हर अवस्था में बच्चे की सोचने व समझने की क्षमता गुणात्मक रूप से पिछली अवस्था से भिन्न होती है। कोई भी बच्चा किसी अवस्था को छोड़कर सीधे अगली अवस्था में नहीं पहुँचता — क्रम सबके लिए एक जैसा रहता है, भले ही उम्र में थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।

यह सिद्धांत REET में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर बताता है कि किस उम्र के बच्चे को किस तरह की शिक्षण-सामग्री व गतिविधि दी जानी चाहिए — यही कारण है कि इस टॉपिक से प्रश्न न केवल परिभाषा पर, बल्कि व्यावहारिक कक्षा-स्थितियों पर भी बनते हैं।

ध्यान रहे, पियाजे द्वारा दी गई आयु-सीमाएँ अनुमानित औसत हैं — व्यक्तिगत भिन्नता के कारण कुछ बच्चे किसी अवस्था में थोड़ा पहले या बाद में पहुँच सकते हैं, भले ही अवस्थाओं का क्रम सबके लिए समान रहे। साथ ही, कई शोधकर्ताओं का मानना है कि पियाजे ने बच्चों की क्षमताओं को कुछ हद तक कम करके आँका और सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों को उतना महत्व नहीं दिया, जिन पर आगे वाइगोत्स्की ने विशेष बल दिया।

पियाजे की चार अवस्थाएँ

अवस्थाआयुमुख्य विशेषता
संवेदी-गामक (Sensorimotor)जन्म – 2 वर्षइंद्रियों व गतियों से सीखना; इसी अवस्था में वस्तु स्थायित्व (Object Permanence) विकसित होता है
पूर्व-संक्रियात्मक (Preoperational)2 – 7 वर्षभाषा व खेल के माध्यम से प्रतीकात्मक सोच (Symbolic Thinking) का विकास; अहंकेंद्रिता (Egocentrism); संरक्षण (Conservation) की समझ अभी नहीं
मूर्त संक्रियात्मक (Concrete Operational)7 – 11 वर्षमूर्त वस्तुओं पर तार्किक चिंतन; संरक्षण (Conservation) की समझ विकसित होती है
औपचारिक संक्रियात्मक (Formal Operational)11+ वर्षअमूर्त एवं परिकल्पनात्मक (hypothetical) चिंतन की क्षमता

REET 2024 में पूर्व-संक्रियात्मक (प्रतीकात्मक सोच) व संवेदी-गामक (वस्तु स्थायित्व) — दोनों अवस्थाएँ सीधे पूछी गईं। ध्यान रहे, आयु-सीमाएँ अनुमानित हैं, बच्चों में इसमें व्यक्तिगत भिन्नता हो सकती है।[स्रोत 1]

पियाजे की चार अवस्थाएँ — एक नज़र में

  1. संवेदी-गामक (जन्म – 2 वर्ष)

    इंद्रियों व गतियों से सीखना; वस्तु स्थायित्व (Object Permanence) का विकास

  2. पूर्व-संक्रियात्मक (2 – 7 वर्ष)

    भाषा व खेल से प्रतीकात्मक सोच; अहंकेंद्रिता; संरक्षण की समझ अभी नहीं

  3. मूर्त संक्रियात्मक (7 – 11 वर्ष)

    मूर्त वस्तुओं पर तार्किक चिंतन; संरक्षण (Conservation) की समझ विकसित होती है

  4. औपचारिक संक्रियात्मक (11+ वर्ष)

    अमूर्त एवं परिकल्पनात्मक (hypothetical) चिंतन की क्षमता

ऊपर दी गई चार अवस्थाओं वाली तालिका का दृश्य रूप — क्रम याद रखने में मदद के लिए।

पियाजे की प्रमुख अवधारणाएँ

स्कीमा (Schema)
किसी वस्तु, विचार या क्रिया के बारे में मन में बनी संगठित मानसिक संरचना/खाका
आत्मसात्करण (Assimilation)
नए अनुभव को अपनी मौजूदा स्कीमा में फिट कर लेना — जैसे बच्चा हर उड़ने वाली वस्तु को 'चिड़िया' कहे
समायोजन (Accommodation)
नए अनुभव के अनुसार अपनी पुरानी स्कीमा में बदलाव करना — जैसे बच्चा सीखे कि हवाई जहाज़ चिड़िया से अलग है
साम्यधारण (Equilibration)
आत्मसात्करण व समायोजन के बीच संज्ञानात्मक संतुलन बनाए रखने की सतत प्रक्रिया

वस्तु स्थायित्व और संरक्षण — दो जरूरी उदाहरण

वस्तु स्थायित्व (Object Permanence) यह समझ है कि कोई वस्तु आँखों से ओझल होने पर भी अस्तित्व में बनी रहती है — जैसे खिलौने को कपड़े से ढकने पर भी 6-8 माह का शिशु उसे ढूँढने की कोशिश करता है। यह क्षमता संवेदी-गामक अवस्था में विकसित होती है।

संरक्षण (Conservation) यह समझ है कि किसी वस्तु का आकार बदलने पर भी उसकी मात्रा, संख्या या भार समान रहता है — जैसे एक जैसी मात्रा का पानी लंबे-पतले व छोटे-चौड़े गिलास में डालने पर भी बराबर रहता है। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था के बच्चे यह नहीं समझ पाते और आकार देखकर मात्रा का अनुमान बदल देते हैं; यह समझ मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में विकसित होती है। REET में इन दोनों अवधारणाओं को अक्सर किसी छोटी-सी कहानी या स्थिति देकर पूछा जाता है, इसलिए इन्हें उदाहरण सहित याद रखना सबसे कारगर है, केवल परिभाषा रटना पर्याप्त नहीं।

कक्षा में इसका उपयोग

अवस्था/अवधारणाकक्षा उदाहरण
पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (L1 प्रारंभिक कक्षाएँ)मूर्त वस्तुओं, चित्रों, खिलौनों व खेल के माध्यम से पढ़ाना; लंबे मौखिक व्याख्यान से बचना
मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (L1 उच्च व L2 प्रारंभिक कक्षाएँ)गणित में गिनतारा (abacus), मापन उपकरण जैसी मूर्त सामग्री का उपयोग कर तार्किक चिंतन विकसित करना
आत्मसात्करण/समायोजन को समझनाबच्चे की 'गलत' प्रतिक्रिया को गलती न मानकर यह समझना कि वह अपनी मौजूदा स्कीमा से नई जानकारी जोड़ने की कोशिश कर रहा है
संरक्षण की कमी को समझनाछोटी कक्षा के बच्चे यदि आकार देखकर मात्रा का गलत अनुमान लगाएँ तो इसे विकासात्मक रूप से सामान्य मानना, न कि अज्ञानता
अहंकेंद्रिता को समझनापूर्व-संक्रियात्मक अवस्था के बच्चे का 'सबको मेरी बात पता है' जैसा व्यवहार स्वार्थ नहीं, बल्कि विकासात्मक अवस्था का सामान्य लक्षण है

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

पूरी अवस्था-तालिका को उदाहरण सहित मन में दोहराएँ। चार अवस्थाओं को उम्र के साथ याद रखें — 'सं(0-2) पू(2-7) मू(7-11) औ(11+)'। और याद रखें: 'आत्मसात्करण' में स्कीमा वही रहती है (नई चीज़ पुरानी में फिट होती है), जबकि 'समायोजन' में स्कीमा खुद बदलती है — यही अंतर REET में सबसे ज्यादा टेस्ट होता है। एक और तरकीब: 'वस्तु स्थायित्व' शब्द में 'स' सोचें तो 'सबसे शुरुआती (सेंसरिमोटर)' अवस्था याद आ जाएगी। और 'अहंकेंद्रिता' व 'संरक्षण की कमी' दोनों को हमेशा पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था से जोड़कर याद रखें, क्योंकि REET में इन दोनों को अक्सर एक-दूसरे के विकल्प के रूप में मिलाया जाता है।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 16

पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था के दौरान कौन-सी क्षमता विकसित होती है ?

  1. Aतार्किक तर्क
  2. Bप्रतीकात्मक सोच
  3. Cमूर्त चिन्तन
  4. Dकाल्पनिक सोच

व्याख्या

पियाजे (Piaget) की पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 2–7 वर्ष) में बच्चा भाषा, चित्र और खेल के माध्यम से प्रतीकों का प्रयोग करना सीखता है, अर्थात प्रतीकात्मक सोच (Symbolic thinking) विकसित होती है। मूर्त चिन्तन और तार्किक तर्क मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7–11 वर्ष) में तथा काल्पनिक/परिकल्पनात्मक सोच औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (11+ वर्ष) में विकसित होती है।

प्रश्न 11

एक बच्चे द्वारा समान दिखने वाले सभी पुरुषों को ‘पापा’ कहना किस प्रक्रिया का उदाहरण है ?

  1. Aअनुकूलन
  2. Bविकास
  3. Cअधिगम
  4. Dसहशीकरण

व्याख्या

पियाजे (Piaget) के अनुसार बच्चा नए अनुभव को अपनी पहले से बनी मानसिक योजना/स्कीमा में फिट कर लेता है, जिसे सहशीकरण या आत्मसात्करण (Assimilation) कहते हैं। बच्चे के मन में 'पापा' की स्कीमा बनी है, इसलिए वह समान दिखने वाले सभी पुरुषों को उसी स्कीमा में रखकर 'पापा' कहता है। जब वह भेद करना सीखकर नई स्कीमा बनाएगा तब वह समायोजन (Accommodation) होगा।

प्रश्न 1

पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों के अनुसार, बच्चे किस चरण में वस्तु स्थायित्व विकसित करते है ?

  1. Aप्राक-संक्रियात्मक चरण
  2. Bसंवेदीमोटर चरण
  3. Cमूर्त संक्रियात्मक चरण
  4. Dऔपचारिक संक्रियात्मक चरण

व्याख्या

पियाजे के अनुसार वस्तु स्थायित्व (object permanence) — यह समझ कि कोई वस्तु आँखों से ओझल होने पर भी अस्तित्व में रहती है — संवेदीगामक/संवेदीमोटर चरण (Sensorimotor stage, जन्म से लगभग 2 वर्ष) में विकसित होती है। प्राक-संक्रियात्मक चरण में बच्चा प्रतीकात्मक चिंतन व अहंकेंद्रिता दिखाता है, वस्तु स्थायित्व उससे पहले ही बन चुका होता है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

वस्तु स्थायित्व (Object Permanence) पियाजे की किस अवस्था में विकसित होती है ?

  1. Aपूर्व-संक्रियात्मक
  2. Bसंवेदी-गामक
  3. Cमूर्त संक्रियात्मक
  4. Dऔपचारिक संक्रियात्मक

व्याख्या

वस्तु स्थायित्व — यह समझ कि वस्तु आँखों से ओझल होने पर भी बनी रहती है — संवेदी-गामक अवस्था (जन्म से लगभग 2 वर्ष) में विकसित होती है।

प्रश्न 2

जब कोई बालक नए अनुभव के अनुसार अपनी पुरानी मानसिक स्कीमा में परिवर्तन करता है, तो इसे क्या कहते हैं ?

  1. Aआत्मसात्करण
  2. Bसमायोजन
  3. Cसाम्यधारण
  4. Dवस्तु स्थायित्व

व्याख्या

समायोजन (Accommodation) में स्कीमा नई जानकारी के अनुसार स्वयं बदलती है, जबकि आत्मसात्करण में नई जानकारी पुरानी स्कीमा में फिट कर ली जाती है।

प्रश्न 3

संरक्षण (Conservation) की अवधारणा (जैसे आकार बदलने पर भी मात्रा समान रहना) किस अवस्था में स्पष्ट रूप से विकसित होती है ?

  1. Aसंवेदी-गामक
  2. Bपूर्व-संक्रियात्मक
  3. Cमूर्त संक्रियात्मक
  4. Dऔपचारिक संक्रियात्मक

व्याख्या

मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7-11 वर्ष) में बच्चे संरक्षण को समझने लगते हैं; इससे पहले पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में यह समझ नहीं होती।

प्रश्न 4

अहंकेंद्रिता (Egocentrism) — दूसरों के दृष्टिकोण को न समझ पाना — पियाजे की किस अवस्था की विशेषता है ?

  1. Aसंवेदी-गामक
  2. Bपूर्व-संक्रियात्मक
  3. Cमूर्त संक्रियात्मक
  4. Dऔपचारिक संक्रियात्मक

व्याख्या

पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2-7 वर्ष) में बच्चा अपने दृष्टिकोण को ही सही मानता है और दूसरों का नजरिया समझने में कठिनाई महसूस करता है।

प्रश्न 5

परिकल्पनात्मक एवं अमूर्त चिंतन (Hypothetical-Abstract Thinking) की क्षमता किस अवस्था में विकसित होती है ?

  1. Aसंवेदी-गामक
  2. Bपूर्व-संक्रियात्मक
  3. Cमूर्त संक्रियात्मक
  4. Dऔपचारिक संक्रियात्मक

व्याख्या

औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (11+ वर्ष) में बच्चे अमूर्त व परिकल्पनात्मक ढंग से सोचने में सक्षम हो जाते हैं।

प्रश्न 6

एक बच्चा पहली बार हवाई जहाज़ देखकर उसे भी 'बड़ी चिड़िया' कहता है, क्योंकि उसकी स्कीमा में उड़ने वाली चीज़ 'चिड़िया' है — यह किस प्रक्रिया का उदाहरण है ?

  1. Aसमायोजन
  2. Bसाम्यधारण
  3. Cआत्मसात्करण
  4. Dवस्तु स्थायित्व

व्याख्या

बच्चा नए अनुभव (हवाई जहाज़) को अपनी मौजूदा स्कीमा ('चिड़िया') में फिट कर रहा है, बिना स्कीमा बदले — यह आत्मसात्करण का उदाहरण है।

प्रश्न 7

पूर्व-प्राथमिक कक्षा (पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था) के बच्चों को पढ़ाते समय शिक्षक को किस बात का सर्वाधिक ध्यान रखना चाहिए ?

  1. Aकेवल मौखिक व्याख्यान देना
  2. Bअमूर्त तार्किक तर्क सिखाना
  3. Cमूर्त वस्तुओं, चित्रों व खेल का प्रयोग करना
  4. Dजटिल परिकल्पनाओं पर चर्चा करना

व्याख्या

पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था के बच्चे अभी अमूर्त चिंतन में सक्षम नहीं हैं, इसलिए मूर्त वस्तुओं, चित्रों व खेल-आधारित शिक्षण सबसे प्रभावी है।

प्रश्न 8

यदि कक्षा 2 का बच्चा लंबे-पतले व छोटे-चौड़े गिलास में बराबर पानी होने पर भी लंबे गिलास में 'ज़्यादा पानी' बताए, तो यह दर्शाता है कि बच्चा अभी —

  1. Aऔपचारिक संक्रियात्मक अवस्था में है
  2. Bसंरक्षण (Conservation) की समझ पूरी तरह विकसित नहीं हुई
  3. Cअसामान्य/अयोग्य है
  4. Dवयस्कों जैसा तार्किक चिंतन कर रहा है

व्याख्या

आकार देखकर मात्रा का अनुमान बदल देना यह दर्शाता है कि बच्चे में संरक्षण की समझ अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है, जो कि इस उम्र में विकासात्मक रूप से सामान्य है।

प्रश्न 9

पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास में बच्चे की भूमिका कैसी है ?

  1. Aनिष्क्रिय ग्रहणकर्ता
  2. Bसक्रिय ज्ञान-निर्माता
  3. Cपूर्णतः वातावरण पर निर्भर
  4. Dकोई भूमिका नहीं

व्याख्या

पियाजे के अनुसार बच्चा वातावरण से सक्रिय अंतःक्रिया करके स्वयं ज्ञान की रचना करता है, निष्क्रिय रूप से ग्रहण नहीं करता।

प्रश्न 10

साम्यधारण (Equilibration) का क्या अर्थ है ?

  1. Aकेवल नई जानकारी को अस्वीकार करना
  2. Bआत्मसात्करण और समायोजन के बीच संज्ञानात्मक संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया
  3. Cस्कीमा को पूर्णतः नष्ट करना
  4. Dकेवल वस्तु स्थायित्व प्राप्त करना

व्याख्या

साम्यधारण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बच्चा आत्मसात्करण व समायोजन के बीच संतुलन बनाए रखते हुए ज्ञान की रचना करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में पियाजे के सिद्धांत से कितने प्रश्न आते हैं?+

यह CDP का सबसे लोकप्रिय टॉपिक है और लगभग हर वर्ष 2-4 प्रश्न इससे बनते हैं — REET 2024 में इससे 3 प्रश्न पूछे गए।

पियाजे की चार अवस्थाएँ कौन-सी हैं?+

संवेदी-गामक (0-2 वर्ष), पूर्व-संक्रियात्मक (2-7 वर्ष), मूर्त संक्रियात्मक (7-11 वर्ष) और औपचारिक संक्रियात्मक (11+ वर्ष)।

आत्मसात्करण और समायोजन में क्या फर्क है?+

आत्मसात्करण में नई जानकारी मौजूदा स्कीमा में फिट कर ली जाती है, जबकि समायोजन में नई जानकारी के अनुसार पुरानी स्कीमा में ही बदलाव किया जाता है।

वस्तु स्थायित्व किस अवस्था में विकसित होता है?+

संवेदी-गामक अवस्था (जन्म से लगभग 2 वर्ष) में।

संरक्षण (Conservation) की समझ कब विकसित होती है?+

मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7-11 वर्ष) में; इससे पहले पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था के बच्चे संरक्षण को नहीं समझ पाते।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. SimplyPsychology — Piaget's Theory and Stages of Cognitive Development
  2. NCBI StatPearls — Cognitive Development

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए