संख्या पद्धति (Number System) — REET गणित नोट्स
संख्या पद्धति REET गणित की नींव है — प्राकृत, पूर्ण, पूर्णांक, परिमेय संख्याओं का वर्गीकरण और भारतीय संख्यांकन पद्धति हर कक्षा में काम आती है। यह पेज REET 2024 के हल प्रश्नों के साथ सभी ज़रूरी नियम और गणनाएँ स्पष्ट करता है।
- REET 2024 में 2 प्रश्न
- कक्षा 3–8 स्तर
- 6 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में संख्या पद्धति से सीधे संख्यात्मक गणना वाले प्रश्न पूछे गए — एक प्रश्न में दिए गए दायरे (60 से 80) की सभी अभाज्य संख्याएँ पहचानकर उनका योग निकालना था, और दूसरे में शब्दों में लिखी बड़ी संख्या (करोड़-लाख) को अंकों में बदलना था। यानी यहाँ परिभाषा याद रखने से ज़्यादा गणना की सटीकता और गति परखी जाती है, क्योंकि यही आधार कक्षा 1 से 8 तक गणित पढ़ाने के लिए ज़रूरी है।
संख्याओं के प्रकार
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्राकृत संख्याएँ (N) | गिनती में प्रयुक्त संख्याएँ, 1 से शुरू | 1, 2, 3, 4, ... |
| पूर्ण संख्याएँ (W) | प्राकृत संख्याएँ + शून्य (0) | 0, 1, 2, 3, ... |
| पूर्णांक (Z) | पूर्ण संख्याएँ + ऋणात्मक संख्याएँ | ..., −2, −1, 0, 1, 2, ... |
| परिमेय संख्याएँ (Q) | p/q के रूप में लिखी जा सकने वाली संख्याएँ (q ≠ 0) | 1/2, −3/4, 5 (=5/1) |
| अपरिमेय संख्याएँ | p/q के रूप में न लिखी जा सकने वाली संख्याएँ | √2, √3, π |
| वास्तविक संख्याएँ (R) | परिमेय + अपरिमेय संख्याओं का समूह | −2, 0, 1/2, √2, π |
0 प्राकृत संख्या नहीं है, पर पूर्ण संख्या है — REET में यह भेद अक्सर पूछा जाता है।[स्रोत 1]
अभाज्य और भाज्य संख्याएँ
जिस संख्या के केवल दो गुणनखंड हों — 1 और स्वयं वह संख्या — उसे अभाज्य (prime) संख्या कहते हैं; जैसे 2, 3, 5, 7, 11। 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है, शेष सभी अभाज्य संख्याएँ विषम होती हैं। जिस संख्या के दो से अधिक गुणनखंड हों, उसे भाज्य (composite) संख्या कहते हैं, जैसे 4, 6, 8, 9। संख्या 1 न तो अभाज्य है और न भाज्य — यह एक अपवाद है जिसे परीक्षा में अक्सर गलत समझा जाता है।
REET 2024 के प्रश्न में 60 से 80 के बीच अभाज्य संख्याएँ पहचाननी थीं। इस दायरे में 61, 67, 71, 73 और 79 अभाज्य हैं, जबकि 63 (=7×9), 65 (=5×13), 69 (=3×23), 75 (=3×25) और 77 (=7×11) भाज्य हैं। इनका योग 61+67+71+73+79 = 351 है, जो कि सही उत्तर है।
भाज्यता के नियम (Divisibility Rules)
| भाज्य से | नियम |
|---|---|
| 2 | इकाई अंक 0, 2, 4, 6 या 8 हो |
| 3 | अंकों का योग 3 से विभाज्य हो |
| 4 | अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से विभाज्य हो |
| 5 | इकाई अंक 0 या 5 हो |
| 6 | संख्या 2 और 3 दोनों से विभाज्य हो |
| 8 | अंतिम तीन अंकों से बनी संख्या 8 से विभाज्य हो |
| 9 | अंकों का योग 9 से विभाज्य हो |
| 11 | विषम स्थान के अंकों का योग और सम स्थान के अंकों का योग — दोनों के अंतर 0 या 11 का गुणज हो |
उदाहरण: 6534 में विषम-स्थान अंकों (4, 5) का योग 9, सम-स्थान अंकों (3, 6) का योग 9; अंतर 0 है, अतः 6534, 11 से विभाज्य है।
भारतीय संख्यांकन पद्धति (Indian Place Value System)
भारतीय पद्धति में दायें से बायें स्थान इस क्रम में आते हैं — इकाई, दहाई, सैकड़ा, हज़ार, दस हज़ार, लाख, दस लाख, करोड़। ध्यान दें कि हज़ार के बाद सीधे लाख आता है, बीच में 'दस हज़ार' का स्थान भी होता है। संख्या लिखते समय दायें से पहले तीन अंकों के बाद, फिर हर दो अंकों के बाद अल्पविराम (कॉमा) लगाया जाता है — जैसे 5,52,21,305।
REET 2024 के प्रश्न में 'पाँच करोड़ बावन लाख इक्कीस हजार तीन सौ पाँच' को अंकों में बदलना था। पाँच करोड़ = 5,00,00,000; बावन लाख = 52,00,000; इक्कीस हजार = 21,000; तीन सौ पाँच = 305। इन्हें जोड़ने पर 5,52,21,305 अर्थात् 55221305 प्राप्त होता है। किसी अंक का स्थानीय मान (place value) उसके स्थान और मान दोनों पर निर्भर करता है, जबकि उसका अंकिक मान (face value) सदा वही अंक रहता है।
भारतीय बनाम अंतरराष्ट्रीय (International) संख्यांकन पद्धति
अंतरराष्ट्रीय पद्धति
हज़ारथाउज़ेंड (Thousand)
दस हज़ारटेन थाउज़ेंड (Ten Thousand)
लाखहंड्रेड थाउज़ेंड (Hundred Thousand)
दस लाखमिलियन (Million)
करोड़टेन मिलियन (Ten Million)
मान
हज़ार1,000
दस हज़ार10,000
लाख1,00,000
दस लाख10,00,000
करोड़1,00,00,000
REET स्तर पर दोनों पद्धतियों में रूपांतरण (जैसे लाख को मिलियन में बदलना) पूछा जा सकता है — 1 मिलियन = 10 लाख।
क्रमागत, सम-विषम संख्याएँ और उत्तरवर्ती-पूर्ववर्ती
क्रमागत संख्याएँ (consecutive numbers) वे होती हैं जो एक के बाद एक क्रम में आती हैं, जैसे 7, 8, 9। किसी संख्या का उत्तरवर्ती (successor) उसमें 1 जोड़कर मिलता है, और पूर्ववर्ती (predecessor) उसमें से 1 घटाकर मिलता है — जैसे 20 का उत्तरवर्ती 21 और पूर्ववर्ती 19 है।
जो संख्याएँ 2 से पूर्णतः विभाजित हो जाती हैं उन्हें सम (even) कहते हैं (जैसे 2, 4, 6), और जो नहीं होतीं उन्हें विषम (odd) कहते हैं (जैसे 1, 3, 5)। दो क्रमागत सम या दो क्रमागत विषम संख्याओं के बीच सदैव 2 का अंतर होता है — REET में इसी नियम से 'x, x+2' मानकर समीकरण बनाई जाती है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा गतिविधि
कक्षा 1–3 में स्थानीय मान समझाने के लिए दस-दस की गड्डियों में बंधी आइसक्रीम स्टिक या माचिस की तीलियाँ इस्तेमाल करें — एक गड्डी = दहाई, दस गड्डी = सैकड़ा। इससे बच्चे 'दहाई' और 'सैकड़ा' को गिनकर समझते हैं, केवल रटते नहीं।
शिक्षण सहायक सामग्री
स्थानीय मान चार्ट (place value chart) बनाकर बोर्ड पर टाँगें, जिसमें इकाई, दहाई, सैकड़ा, हज़ार आदि खाने हों — बच्चे हर संख्या को इन खानों में लिखकर पढ़ना सीखें।
सामान्य भ्रांति
बच्चे अक्सर सोचते हैं 0 भी प्राकृत संख्या है, या 1 अभाज्य संख्या है। दोनों भ्रांतियाँ बार-बार उदाहरण देकर दूर करें — 1 का केवल एक ही गुणनखंड (स्वयं) है, इसलिए वह न अभाज्य है न भाज्य।
आकलन विचार
बच्चों को बाज़ार की पर्ची या अखबार से बड़ी संख्याएँ (जैसे जनसंख्या के आँकड़े) दिखाकर उन्हें शब्दों में पढ़ने और अंकों में लिखने का अभ्यास कराएँ — यह वास्तविक जीवन से जोड़ता है।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
बड़ी संख्या में अल्पविराम लगाने के लिए दायें से गिनना शुरू करें: पहले 3 अंकों के बाद एक कॉमा, फिर हर 2 अंकों के बाद एक कॉमा — जैसे 705042311 को 70,50,42,311 लिखें। यह पैटर्न (3-2-2-2...) याद रहे तो शब्दों से अंक बनाने वाले प्रश्न कभी गलत नहीं होंगे।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 95
60 से 80 के बीच सभी अभाज्य संख्याओं का योग है
- A291
- B351
- C434
- D373
व्याख्या
60 और 80 के बीच अभाज्य संख्याएँ हैं: 61, 67, 71, 73, 79। इनका योग = 61 + 67 + 71 + 73 + 79 = 351। ध्यान दें कि 63, 69, 77 आदि अभाज्य नहीं हैं (क्रमशः 3, 3, 7 से विभाज्य)।
प्रश्न 99
पाँच करोड़ बावन लाख इक्कीस हजार तीन सौ पाँच का अंकीय रूप है
- A52521305
- B55221305
- C53052125
- D52152305
व्याख्या
पाँच करोड़ = 5,00,00,000; बावन लाख = 52,00,000; इक्कीस हजार = 21,000; तीन सौ पाँच = 305। इन्हें जोड़ने पर भारतीय पद्धति में 5,52,21,305 अर्थात् 55221305 प्राप्त होता है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या प्राकृत संख्या नहीं है?
- A1
- B0
- C5
- D100
व्याख्या
प्राकृत संख्याएँ 1 से शुरू होती हैं। 0 प्राकृत संख्या नहीं, बल्कि पूर्ण संख्या (whole number) है।
प्रश्न 2
सबसे छोटी भाज्य (composite) संख्या कौन-सी है?
- A1
- B2
- C4
- D9
व्याख्या
1 न अभाज्य है न भाज्य, 2 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है। 4 के तीन गुणनखंड (1,2,4) हैं, इसलिए यह सबसे छोटी भाज्य संख्या है।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या 11 से पूर्णतः विभाज्य है?
- A6431
- B6534
- C6635
- D6745
व्याख्या
6534 में सम व विषम स्थान के अंकों के योग का अंतर शून्य है (4+5=9, 3+6=9), अतः यह 11 से विभाज्य है (6534 ÷ 11 = 594)। शेष तीनों संख्याओं में यह अंतर 0 या 11 का गुणज नहीं है।
प्रश्न 4
दो अंकों की सबसे बड़ी अभाज्य संख्या कौन-सी है?
- A91
- B93
- C97
- D99
व्याख्या
91=7×13, 93=3×31, 99=9×11 — तीनों भाज्य हैं। 97 को 2,3,5,7 में से कोई भी विभाजित नहीं करता, अतः यह अभाज्य है और दो अंकों की सबसे बड़ी अभाज्य संख्या है।
प्रश्न 5
भारतीय संख्यांकन पद्धति में 'लाख' का स्थान ठीक किसके बाद आता है?
- Aदस हज़ार
- Bकरोड़
- Cदस लाख
- Dहज़ार
व्याख्या
भारतीय पद्धति का क्रम है: इकाई, दहाई, सैकड़ा, हज़ार, दस हज़ार, लाख, दस लाख, करोड़। अतः लाख का स्थान 'दस हज़ार' के ठीक बाद आता है।
प्रश्न 6
संख्या 7,05,04,231 में अंक '5' का स्थानीय मान (place value) क्या है?
- A5,000
- B50,000
- C5,00,000
- D50,00,000
व्याख्या
संख्या में '5' लाख के स्थान पर है (7 करोड़, 0 दस-लाख, 5 लाख...), अतः इसका स्थानीय मान 5 × 1,00,000 = 5,00,000 है।
प्रश्न 7
1 से 20 तक की धनात्मक पूर्ण संख्याओं में कुल कितनी अभाज्य संख्याएँ हैं?
- A6
- B7
- C8
- D9
व्याख्या
1 से 20 के बीच अभाज्य संख्याएँ हैं: 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19 — कुल 8 संख्याएँ।
प्रश्न 8
दो क्रमागत विषम संख्याओं का योग 44 है। इनमें छोटी संख्या कौन-सी है?
- A19
- B21
- C23
- D25
व्याख्या
मान लीजिए संख्याएँ x और x+2 हैं, तो 2x+2=44 ⇒ x=21। अतः छोटी संख्या 21 है और बड़ी संख्या 23 है।
प्रश्न 9
किसी संख्या को 7 से भाग देने पर भागफल 15 और शेषफल 4 प्राप्त होता है। वह संख्या क्या है?
- A105
- B109
- C111
- D115
व्याख्या
संख्या = भाजक × भागफल + शेषफल = 7 × 15 + 4 = 105 + 4 = 109।
प्रश्न 10
कक्षा 3 के विद्यार्थियों को स्थानीय मान (place value) की अवधारणा समझाने के लिए शिक्षक के लिए सबसे उपयुक्त शिक्षण सहायक सामग्री कौन-सी है?
- Aदस-दस की गड्डियों (बंडल) और स्थानीय मान चार्ट का प्रयोग
- Bकेवल श्यामपट्ट पर संख्याएँ लिखना
- Cपरीक्षा के पुराने प्रश्नपत्र हल कराना
- Dकेवल मौखिक व्याख्यान देना
व्याख्या
प्राथमिक कक्षाओं में स्थानीय मान जैसी अमूर्त अवधारणा को मूर्त सामग्री (दस की गड्डियाँ, चार्ट) से समझाना सबसे प्रभावी होता है, क्योंकि बच्चे गिनकर और देखकर सीखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में संख्या पद्धति से कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में इस टॉपिक से गणित खंड में 1–2 प्रश्न पूछे गए, जो सीधे गणना (अभाज्य संख्याएँ, बड़ी संख्याओं का रूपांतरण) पर आधारित थे।
क्या 0 प्राकृत संख्या है?+
नहीं, 0 प्राकृत संख्या नहीं है। यह पूर्ण संख्या (whole number) की श्रेणी में आता है, क्योंकि पूर्ण संख्याएँ = प्राकृत संख्याएँ + 0।
क्या 1 अभाज्य संख्या है?+
नहीं। 1 का केवल एक गुणनखंड (स्वयं) होता है, इसलिए यह न अभाज्य है न भाज्य — यह एक विशेष संख्या है।
सबसे छोटी भाज्य संख्या कौन-सी है?+
4 सबसे छोटी भाज्य संख्या है, क्योंकि इसके तीन गुणनखंड हैं — 1, 2 और 4।
पूर्णांक और परिमेय संख्या में क्या अंतर है?+
पूर्णांक (जैसे −2, 0, 5) में दशमलव या भिन्न भाग नहीं होता, जबकि परिमेय संख्या p/q रूप की कोई भी संख्या हो सकती है, जिसमें भिन्न (जैसे 1/2) भी शामिल हैं — हर पूर्णांक परिमेय संख्या है, पर हर परिमेय संख्या पूर्णांक नहीं।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए