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पाइथागोरस प्रमेय (Pythagoras Theorem) — REET गणित नोट्स

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यह पेज REET गणित के 'पाइथागोरस प्रमेय' (Pythagoras Theorem) टॉपिक को सिलेबस के अनुसार कवर करता है — प्रमेय का कथन, प्रचलित पाइथागोरियन त्रिक, विलोम प्रमेय और सीढ़ी-खंभे जैसे व्यावहारिक उदाहरण स्वयं जाँची गई गणनाओं सहित समझाए गए हैं। REET Level 1 व Level 2 दोनों की गणित परीक्षा में ज्यामिति खंड में यह टॉपिक शामिल है, इसलिए त्रिक याद रखना व सही कर्ण पहचानना ज़रूरी है।

  • REET 2024 में 0 प्रश्न (सिलेबस-आधारित नोट्स)
  • कक्षा 7–8 स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के प्रश्नपत्रों के रिकॉर्ड में 'पाइथागोरस प्रमेय' (Pythagoras Theorem) से कोई सीधा प्रश्न दर्ज नहीं मिला, फिर भी यह BSER के आधिकारिक गणित सिलेबस के ज्यामिति खंड (कक्षा 7-8 स्तर) का मुख्य हिस्सा है। समकोण त्रिभुज की भुजाएँ, पाइथागोरियन त्रिक (triplets) और सीढ़ी/खंभे जैसे व्यावहारिक प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्य हैं। नीचे के नोट्स पूरी तरह सिलेबस की वर्डिंग और स्वयं जाँचे गए गणनाओं पर आधारित हैं — कोई काल्पनिक 'पिछला प्रश्न' नहीं लिया गया है।

प्रमेय का कथन और इतिहास

पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार, किसी समकोण त्रिभुज (right-angled triangle) में कर्ण (hypotenuse, समकोण के सामने वाली भुजा) का वर्ग शेष दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है — अर्थात् यदि भुजाएँ a, b तथा कर्ण c हों, तो a² + b² = c²। यह त्रिभुज की भुजाओं के बीच का संबंध है, कोणों का नहीं, इसलिए यह केवल समकोण त्रिभुज में ही सत्य है।

यह संबंध यूनानी गणितज्ञ पाइथागोरस (लगभग 570-495 ईसा पूर्व) के नाम से प्रसिद्ध है, परंतु भारत में प्राचीन 'बौधायन शुल्ब सूत्र' (लगभग 800 ईसा पूर्व) में भी यही संबंध वेदी-निर्माण की ज्यामिति में वर्णित मिलता है — यानी यह भारत में पाइथागोरस से पहले से ज्ञात था, इसीलिए NCERT की पाठ्यपुस्तकों में इसे 'बौधायन प्रमेय' (Baudhayana theorem) के वैकल्पिक नाम से भी बताया जाता है।

काम आने वाले सूत्र

मूल सूत्र
a² + b² = c² (c = कर्ण, a,b = शेष दो भुजाएँ)
कर्ण ज्ञात करना
c = √(a² + b²)
एक भुजा ज्ञात करना
a = √(c² − b²)
प्रमेय का विलोम (converse)
यदि a²+b² = c² हो तो त्रिभुज समकोण होगा, कोण c के सामने
आयत का विकर्ण
विकर्ण = √(लंबाई² + चौड़ाई²)

प्रचलित पाइथागोरियन त्रिक (triplets)

त्रिक (a, b, c)जाँच (a²+b²=c²)
3, 4, 59 + 16 = 25 = 5²
5, 12, 1325 + 144 = 169 = 13²
6, 8, 1036 + 64 = 100 = 10²
8, 15, 1764 + 225 = 289 = 17²
7, 24, 2549 + 576 = 625 = 25²
9, 12, 1581 + 144 = 225 = 15²
20, 21, 29400 + 441 = 841 = 29²

हर त्रिक स्वयं वर्ग करके सत्यापित है — परीक्षा में इन्हें सीधे पहचानने से समय बचता है।

हल किए व्यावहारिक उदाहरण

उदाहरण 1: एक 13m लंबी सीढ़ी दीवार से टिकाई गई है, जिसका पैर दीवार से 5m दूर है। सीढ़ी दीवार पर कितनी ऊँचाई तक पहुँचेगी? हल: ऊँचाई = √(13² − 5²) = √(169−25) = √144 = 12m।

उदाहरण 2: 6m लंबे व 8m चौड़े आयताकार मैदान का विकर्ण ज्ञात करें। हल: विकर्ण = √(6²+8²) = √(36+64) = √100 = 10m।

उदाहरण 3: एक 24m ऊँचे खंभे को ज़मीन में एक तार से बाँधा गया है, तार का दूसरा सिरा खंभे के आधार से 7m दूर ज़मीन पर बंधा है। तार की लंबाई ज्ञात करें। हल: तार की लंबाई = √(24²+7²) = √(576+49) = √625 = 25m।

विलोम प्रमेय (Converse) के उदाहरण

त्रिभुज की भुजाएँक्या यह समकोण त्रिभुज है?
10cm, 24cm, 26cmहाँ — 10²+24² = 100+576 = 676 = 26² (कर्ण 26cm)
5cm, 6cm, 7cmनहीं — 5²+6² = 25+36 = 61 ≠ 49 (7²)
9cm, 40cm, 41cmहाँ — 9²+40² = 81+1600 = 1681 = 41² (कर्ण 41cm)

विलोम प्रमेय से बिना कोण मापे यह जाँचा जा सकता है कि त्रिभुज समकोण है या नहीं — केवल तीनों भुजाओं के वर्गों की जाँच काफी है।

दिशा-दूरी वाले प्रश्नों में उपयोग

पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग केवल सीढ़ी-खंभे जैसे प्रश्नों तक सीमित नहीं है; जब कोई व्यक्ति या वस्तु दो परस्पर लंबवत दिशाओं (जैसे पहले उत्तर, फिर पूर्व) में गति करे, तब भी शुरुआती व अंतिम बिंदु के बीच की सीधी (हवाई) दूरी निकालने के लिए यही प्रमेय लगाया जाता है, क्योंकि दो लंबवत दिशाएँ मिलकर एक समकोण त्रिभुज बनाती हैं।

उदाहरण: एक व्यक्ति अपने घर से 15 km उत्तर की ओर चलता है, फिर वहाँ से 20 km पूर्व की ओर चलता है। घर से उसकी सीधी दूरी ज्ञात करें। हल: उत्तर व पूर्व दिशाएँ परस्पर लंबवत हैं, इसलिए सीधी दूरी = √(15²+20²) = √(225+400) = √625 = 25 km (यह त्रिक 15-20-25, जो 3-4-5 त्रिक का 5 गुना है)।

REET के प्रश्नपत्रों में इस टॉपिक से प्रायः तीन तरह के प्रश्न बनते हैं — सीधे कर्ण/भुजा निकालना, विलोम प्रमेय से समकोण त्रिभुज पहचानना, और ऊपर जैसे व्यावहारिक (सीढ़ी, खंभा, दिशा) प्रश्न। तीनों प्रकार की नींव एक ही सूत्र a²+b²=c² है, इसलिए इसे भली-भाँति याद रखना और प्रचलित त्रिकों को पहचानना ही सबसे तेज़ हल की कुंजी है।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि

ग्राफ़ पेपर पर एक समकोण त्रिभुज बनाकर उसकी तीनों भुजाओं पर वर्ग बनवाएँ, फिर हर वर्ग के अंदर के वर्ग-खानों (unit squares) को गिनवाकर दिखाएँ कि दो छोटे वर्गों के खानों का योग बड़े वर्ग के खानों के बराबर है — यह 'काटकर-गिनकर' सिद्ध करने वाली सबसे प्रभावी कक्षा-गतिविधि है।

शिक्षण सहायक सामग्री

रंगीन कागज़ से 3-4-5 त्रिक के अनुपात में काटे गए वर्ग टुकड़े देकर विद्यार्थियों को स्वयं व्यवस्थित करवाना (cut-and-rearrange proof) प्रमेय को मूर्त रूप देता है।

सामान्य भ्रांति

विद्यार्थी अक्सर प्रमेय को किसी भी त्रिभुज पर लागू कर देते हैं, जबकि यह केवल समकोण त्रिभुज के लिए सत्य है; साथ ही कर्ण की पहचान में भी भ्रम होता है — कर्ण हमेशा समकोण के ठीक सामने वाली (सबसे लंबी) भुजा होती है।

आकलन विचार

विद्यार्थियों को तीन भुजाओं वाला कोई भी त्रिभुज देकर पूछें 'क्या यह समकोण त्रिभुज है?' और विलोम प्रमेय का उपयोग कर तर्क सहित उत्तर लिखवाएँ।

याद रखने की ट्रिक

सबसे पहले तीनों भुजाओं में सबसे लंबी भुजा को कर्ण (c) मान लें, फिर a²+b²=c² लगाएँ। प्रचलित त्रिक (3-4-5, 5-12-13, 8-15-17, 7-24-25) और उनके गुणज (जैसे 6-8-10, 9-12-15) याद रखने से गणना में समय काफी बचता है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

एक समकोण त्रिभुज की दोनों भुजाएँ 9cm व 12cm हैं। कर्ण ज्ञात करें।

  1. A13cm
  2. B18cm
  3. C21cm
  4. D15cm

व्याख्या

कर्ण = √(9²+12²) = √(81+144) = √225 = 15cm (यह 3-4-5 त्रिक का 3 गुना, यानी 9-12-15 है)।

प्रश्न 2

एक समकोण त्रिभुज का कर्ण 17cm है और एक भुजा 8cm है। दूसरी भुजा ज्ञात करें।

  1. A9cm
  2. B12cm
  3. C15cm
  4. D13cm

व्याख्या

दूसरी भुजा = √(17²−8²) = √(289−64) = √225 = 15cm (यह प्रचलित त्रिक 8-15-17 है)।

प्रश्न 3

एक 25m लंबी सीढ़ी दीवार से टिकाई गई है, जिसका पैर दीवार से 7m दूर है। सीढ़ी दीवार पर कितनी ऊँचाई तक पहुँचेगी?

  1. A18m
  2. B24m
  3. C20m
  4. D22m

व्याख्या

ऊँचाई = √(25²−7²) = √(625−49) = √576 = 24m (त्रिक 7-24-25)।

प्रश्न 4

एक आयत की भुजाएँ 5cm व 12cm हैं। उसका विकर्ण ज्ञात करें।

  1. A13cm
  2. B17cm
  3. C10cm
  4. D15cm

व्याख्या

विकर्ण = √(5²+12²) = √(25+144) = √169 = 13cm।

प्रश्न 5

निम्नलिखित में कौन-सा एक वैध पाइथागोरियन त्रिक है?

  1. A2, 3, 4
  2. B9, 10, 11
  3. C6, 8, 10
  4. D5, 6, 7

व्याख्या

6²+8² = 36+64 = 100 = 10², इसलिए यह वैध त्रिक है (3-4-5 त्रिक का 2 गुना)। शेष विकल्पों में a²+b² ≠ c²।

प्रश्न 6

पाइथागोरस प्रमेय जैसा संबंध पाइथागोरस से पहले किस प्राचीन भारतीय ग्रंथ में वर्णित मिलता है?

  1. Aलीलावती
  2. Bबौधायन शुल्ब सूत्र
  3. Cगणित सार संग्रह
  4. Dआर्यभटीय

व्याख्या

बौधायन शुल्ब सूत्र (लगभग 800 ईसा पूर्व) पाइथागोरस (लगभग 570-495 ईसा पूर्व) से पहले का है और इसमें यही संबंध वेदी-निर्माण की ज्यामिति में वर्णित है; आर्यभटीय (5वीं सदी ई.), लीलावती व गणित सार संग्रह इससे बहुत बाद के हैं।

प्रश्न 7

एक त्रिभुज की भुजाएँ 10cm, 24cm व 26cm हैं। क्या यह समकोण त्रिभुज है, और यदि हाँ तो कर्ण कौन-सी भुजा है?

  1. Aहाँ, कर्ण 10cm है
  2. Bनहीं, यह समकोण त्रिभुज नहीं है
  3. Cहाँ, कर्ण 24cm है
  4. Dहाँ, कर्ण 26cm है

व्याख्या

10²+24² = 100+576 = 676 = 26², इसलिए यह समकोण त्रिभुज है और सबसे लंबी भुजा 26cm ही कर्ण है (विलोम प्रमेय)।

प्रश्न 8

एक 10m ऊँचे खंभे के आधार से ज़मीन पर 24m दूर एक बिंदु तक खंभे के शीर्ष से एक तार बाँधी गई है। तार की लंबाई ज्ञात करें।

  1. A26m
  2. B28m
  3. C25m
  4. D22m

व्याख्या

तार की लंबाई = √(10²+24²) = √(100+576) = √676 = 26m (त्रिक 10-24-26, जो 5-12-13 का 2 गुना है)।

प्रश्न 9

कक्षा 7 में पाइथागोरस प्रमेय को व्यावहारिक रूप से समझाने के लिए सबसे उपयुक्त गतिविधि कौन-सी है?

  1. Aकेवल प्रमेय का कथन बोर्ड पर लिखकर रटवाना
  2. Bग्राफ़ पेपर पर समकोण त्रिभुज की भुजाओं पर वर्ग बनाकर खाने गिनवाना और संबंध स्वयं निकलवाना
  3. Cव्यावहारिक प्रदर्शन को अनावश्यक मानकर छोड़ देना
  4. Dबिना किसी उदाहरण के सूत्र से सीधे प्रश्न हल करवाना

व्याख्या

ग्राफ़ पेपर पर वर्ग बनाकर खाने गिनने की गतिविधि विद्यार्थियों को प्रमेय को स्वयं खोजकर (discovery-based learning) समझने का अवसर देती है, जो केवल रटने से कहीं अधिक प्रभावी और स्थायी सीख देती है।

प्रश्न 10

पाइथागोरस प्रमेय का विलोम (converse) किस काम आता है?

  1. Aत्रिभुज का परिमाप ज्ञात करने के लिए
  2. Bत्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए
  3. Cयह जाँचने के लिए कि दी गई भुजाओं वाला त्रिभुज समकोण है या नहीं
  4. Dत्रिभुज के कोणों का योग ज्ञात करने के लिए

व्याख्या

विलोम प्रमेय कहता है कि यदि किसी त्रिभुज की भुजाओं में a²+b²=c² सत्य हो, तो वह त्रिभुज समकोण होगा — इससे बिना कोण मापे यह जाँचा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET परीक्षा में 'पाइथागोरस प्रमेय' से कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से कोई सीधा प्रश्न रिकॉर्ड में नहीं मिला, लेकिन यह BSER के आधिकारिक गणित सिलेबस के ज्यामिति खंड में शामिल है, इसलिए इसकी तैयारी ज़रूरी है।

पाइथागोरस प्रमेय किन त्रिभुजों पर लागू होता है?+

यह केवल समकोण त्रिभुज (right-angled triangle) पर लागू होता है — किसी भी त्रिभुज पर नहीं।

पाइथागोरियन त्रिक (triplet) क्या होता है?+

तीन प्राकृत संख्याएँ जो a²+b²=c² को संतुष्ट करती हैं, जैसे 3,4,5 या 5,12,13; इनसे समकोण त्रिभुज की भुजाएँ बनती हैं और इन्हें याद रखने से गणना तेज़ होती है।

पाइथागोरस प्रमेय भारत में किस नाम से भी जाना जाता है?+

बौधायन शुल्ब सूत्र (लगभग 800 ईसा पूर्व) में यही संबंध पहले से वर्णित मिलता है, इसलिए इसे कई पाठ्यपुस्तकों में 'बौधायन प्रमेय' भी कहा जाता है।

क्या पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग दिशा-दूरी वाले प्रश्नों में भी होता है?+

हाँ, यदि गति की दो दिशाएँ परस्पर लंबवत हों (जैसे उत्तर व पूर्व), तो शुरुआती व अंतिम बिंदु के बीच की सीधी दूरी ज्ञात करने के लिए पाइथागोरस प्रमेय का ही उपयोग किया जाता है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. BSER — REET आधिकारिक सिलेबस व 2024 प्रश्न-पत्र (मूल PDF; बोर्ड पोर्टल पर अब उपलब्ध नहीं)
  2. NCERT कक्षा 7 गणित — अध्याय 6: त्रिभुज और उसके गुण (समकोण त्रिभुज तथा पाइथागोरस गुण)

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए