त्रिभुज एवं सर्वांगसमता (Triangles and Congruence)
यह पेज REET परीक्षा के लिए त्रिभुज के कोण-गुण, बहिष्कोण प्रमेय और सर्वांगसमता के चार प्रतिमानों (SSS, SAS, ASA, RHS) को उदाहरण सहित समझाता है। ज्यामिति खंड में यह REET का नियमित रूप से पूछा जाने वाला उपखंड है।
- REET 2024 में 1 प्रश्न
- कक्षा 6–7 स्तर
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में इस टॉपिक से त्रिभुज के बहिष्कोण गुण (exterior angle property) पर आधारित प्रश्न पूछा गया, जिसमें दो समीकरणों को हल करना था। सर्वांगसमता के प्रतिमानों (SSS, SAS, ASA, RHS) की सीधी पहचान वाले प्रश्न भी इस भाग से नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
त्रिभुज से जुड़े अन्य उपयोगी तथ्य
- समकोण/अधिककोण की संख्या
- किसी भी त्रिभुज में अधिकतम एक ही कोण समकोण (90°) या अधिककोण (90° से अधिक) हो सकता है, क्योंकि तीनों कोणों का योग सदैव 180° है
- समकोण त्रिभुज के शेष कोण
- समकोण त्रिभुज में शेष दोनों कोण न्यूनकोण होते हैं और उनका योग सदैव 90° होता है
- समबाहु व समद्विबाहु का संबंध
- हर समबाहु त्रिभुज एक विशेष समद्विबाहु त्रिभुज भी है, क्योंकि उसकी तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं
त्रिभुज के मूल कोण-गुण
किसी भी त्रिभुज के तीनों अंतःकोणों का योग सदैव 180° होता है — इसे त्रिभुज का कोण योग गुण कहते हैं।
बहिष्कोण गुण (Exterior Angle Property): जब त्रिभुज की किसी भुजा को बढ़ाया जाता है, तो बना बहिष्कोण उसके दोनों सम्मुख (दूरस्थ/remote) अंतःकोणों के योग के बराबर होता है।
त्रिभुज असमिका (Triangle Inequality): त्रिभुज की किन्हीं भी दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से सदैव बड़ा होता है। इसका एक उपयोगी परिणाम यह भी है कि त्रिभुज की किन्हीं भी दो भुजाओं का अंतर तीसरी भुजा से सदैव छोटा होता है — दोनों शर्तें मिलकर यह तय करती हैं कि तीन दी गई लंबाइयों से त्रिभुज बन सकता है या नहीं।
सर्वांगसमता के चार प्रतिमान (Congruence Criteria)
| प्रतिमान | शर्त |
|---|---|
| SSS (भुजा-भुजा-भुजा) | एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ दूसरे त्रिभुज की तीनों भुजाओं के क्रमशः बराबर हों |
| SAS (भुजा-कोण-भुजा) | दो भुजाएँ और उनके बीच का अंतर्विष्ट कोण (included angle) दोनों त्रिभुजों में बराबर हों |
| ASA (कोण-भुजा-कोण) | दो कोण और उनके बीच की अंतर्विष्ट भुजा (included side) दोनों त्रिभुजों में बराबर हों |
| RHS (कर्ण-भुजा) — केवल समकोण त्रिभुज के लिए | एक त्रिभुज का कर्ण व एक भुजा दूसरे समकोण त्रिभुज के कर्ण व संगत भुजा के बराबर हों |
सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग (corresponding parts) हमेशा बराबर होते हैं — इसे CPCT कहते हैं।
त्रिभुजों के प्रकार
| आधार | प्रकार | विशेषता |
|---|---|---|
| भुजाओं के आधार पर | समबाहु त्रिभुज (Equilateral) | तीनों भुजाएँ बराबर, प्रत्येक कोण 60° |
| भुजाओं के आधार पर | समद्विबाहु त्रिभुज (Isosceles) | दो भुजाएँ बराबर, उनके सम्मुख कोण भी बराबर |
| भुजाओं के आधार पर | विषमबाहु त्रिभुज (Scalene) | तीनों भुजाएँ व कोण असमान |
| कोणों के आधार पर | न्यूनकोण त्रिभुज (Acute) | तीनों कोण 90° से कम |
| कोणों के आधार पर | समकोण त्रिभुज (Right) | एक कोण ठीक 90° |
| कोणों के आधार पर | अधिककोण त्रिभुज (Obtuse) | एक कोण 90° से अधिक |
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: एक त्रिभुज के कोण 2:3:4 के अनुपात में हैं। कोण ज्ञात करें। हल: कुल भाग = 9, कोण योग = 180° ⇒ एक भाग = 20°। कोण = 40°, 60°, 80°।
उदाहरण 2 (बहिष्कोण गुण): एक त्रिभुज के दो सम्मुख अंतःकोण 50° और 70° हैं। संगत बहिष्कोण क्या होगा? हल: बहिष्कोण = 50°+70° = 120°।
उदाहरण 3 (सर्वांगसमता): त्रिभुज PQR और XYZ में PQ=XY, QR=YZ और ∠Q=∠Y है। यहाँ ∠Q, PQ और QR के बीच का अंतर्विष्ट कोण है, अतः यह SAS प्रतिमान से सर्वांगसम हैं।
उदाहरण 4 (संगति क्रम): यदि △ABC ≅ △DEF लिखा गया है, तो इसका अर्थ है A↔D, B↔E, C↔F संगत हैं, अतः AB=DE, BC=EF, CA=FD और ∠A=∠D, ∠B=∠E, ∠C=∠F। सर्वांगसमता का कथन लिखते समय शीर्षों का यही सही क्रम बनाए रखना जरूरी है, अन्यथा गलत संगत भाग मान लिए जाएँगे।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा गतिविधि
कागज से दो समान त्रिभुज काटकर एक-दूसरे पर पूर्णतः अध्यारोपित (superimpose) कराएँ, ताकि सर्वांगसमता का भौतिक अनुभव मिले। स्ट्रॉ/तीलियों से अलग-अलग भुजा-कोण मापों के त्रिभुज बनवाकर देखें कि कब त्रिभुज अनोखा (unique) बनता है।
शिक्षण सामग्री
ज्यामिति बॉक्स (परकार, चांदा), जियोबोर्ड और तीलियाँ/स्ट्रॉ किट उपयोगी हैं। रंगीन कागज से काटे गए त्रिभुजों का संग्रह भी बच्चों को विभिन्न प्रकार के त्रिभुज पहचानने और वर्गीकृत करने में मदद करता है।
सामान्य भ्रांति
विद्यार्थी अक्सर वर्टेक्स संगति (vertex correspondence) को नज़रअंदाज़ कर देते हैं — यानी केवल भुजाओं-कोणों के बराबर होने को सर्वांगसमता मान लेते हैं, बिना यह देखे कि कौन सा भाग किससे संगत है। 'सर्वांगसम' और 'समरूप' (similar) में अंतर भी अक्सर भ्रमित करता है।
आकलन विचार
दो त्रिभुज देकर बराबर चिह्नित भागों के आधार पर सही प्रतिमान चुनवाएँ और सही संगति क्रम में सर्वांगसमता का कथन लिखवाएँ (जैसे △ABC ≅ △DEF)। यह भी जाँचें कि विद्यार्थी संगति क्रम बदलने पर संगत भाग सही ढंग से बदल पा रहे हैं या नहीं।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
SSA (side-side-angle) कोई मान्य सर्वांगसमता प्रतिमान नहीं है — इस जाल में न फँसें। बहिष्कोण से जुड़े प्रश्नों में हमेशा सीधे 'बहिष्कोण = दोनों सम्मुख अंतःकोणों का योग' लगाएँ, त्रिभुज का तीसरा कोण पहले निकालने की जरूरत नहीं।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 119
दी गयी आकृति में यदि ∠x − ∠y = 10° हो, तो ∠x का मान होगा :
चित्र: Triangle PQR with interior angle x at P and interior angle y at Q. Side QR is extended beyond R, forming an exterior angle of 120 degrees at R. Diagram added and verified: the exterior angle theorem gives x+y=120, and with x-y=10, x=65 degrees, matching the stored answer.
- A55°
- B65°
- C70°
- D100°
व्याख्या
त्रिभुज का बहिष्कोण (exterior angle) दोनों अंतराभिमुख कोणों के योग के बराबर होता है, अतः ∠x + ∠y = 120°। साथ में ∠x − ∠y = 10°। दोनों को जोड़ने पर 2∠x = 130°, अतः ∠x = 65° (और ∠y = 55°)।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
एक त्रिभुज के दो कोण 50° और 60° हैं। तीसरा कोण क्या होगा?
- A70°
- B80°
- C60°
- D65°
व्याख्या
त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है। तीसरा कोण = 180°−50°−60° = 70°।
प्रश्न 2
त्रिभुज के एक बहिष्कोण का मान 100° है, और उसका एक सम्मुख अंतःकोण 40° है। दूसरा सम्मुख अंतःकोण क्या होगा?
- A60°
- B40°
- C100°
- D140°
व्याख्या
बहिष्कोण = दोनों सम्मुख अंतःकोणों का योग ⇒ 100° = 40° + दूसरा कोण ⇒ दूसरा कोण = 60°।
प्रश्न 3
एक त्रिभुज के कोण 2:3:5 के अनुपात में हैं। सबसे बड़ा कोण क्या है?
- A90°
- B100°
- C72°
- D108°
व्याख्या
कुल भाग = 10, एक भाग = 180/10 = 18°। सबसे बड़ा कोण = 5×18° = 90°।
प्रश्न 4
त्रिभुज PQR और XYZ में PQ=XY, QR=YZ और ∠Q=∠Y है। कौन-सा सर्वांगसमता प्रतिमान लागू होता है?
- ASAS
- BSSS
- CASA
- DRHS
व्याख्या
∠Q, भुजा PQ और QR के बीच का अंतर्विष्ट कोण है, अतः यह SAS (भुजा-कोण-भुजा) प्रतिमान है।
प्रश्न 5
दो समकोण त्रिभुजों का कर्ण बराबर है और एक-एक संगत भुजा भी बराबर है। वे किस प्रतिमान से सर्वांगसम हैं?
- ARHS
- BSAS
- CAAS
- DSSS
व्याख्या
समकोण त्रिभुजों में कर्ण व एक भुजा बराबर होने पर RHS (कर्ण-भुजा) प्रतिमान लागू होता है।
प्रश्न 6
त्रिभुज ABC और DEF में ∠A=∠D, ∠B=∠E और AB=DE है। यह किस प्रतिमान का उदाहरण है?
- AASA
- BSAS
- CSSS
- DRHS
व्याख्या
AB, कोण A और कोण B के बीच की अंतर्विष्ट भुजा है, अतः यह ASA (कोण-भुजा-कोण) प्रतिमान है।
प्रश्न 7
एक त्रिभुज की दो भुजाएँ 4 सेमी और 5 सेमी हैं। तीसरी भुजा x सेमी के लिए निम्न में से कौन-सा मान संभव नहीं है?
- A1 सेमी
- B3 सेमी
- C6 सेमी
- D8 सेमी
व्याख्या
त्रिभुज असमिका के अनुसार तीसरी भुजा भुजाओं के अंतर से बड़ी और योग से छोटी होनी चाहिए: 1 < x < 9। x=1 इस शर्त को पूरा नहीं करता (1 से बड़ा होना चाहिए, बराबर नहीं)।
प्रश्न 8
त्रिभुज ABC में शीर्ष C पर बना बहिष्कोण 130° है। यदि ∠A − ∠B = 20° है, तो ∠A ज्ञात करें।
- A75°
- B65°
- C55°
- D70°
व्याख्या
बहिष्कोण = ∠A+∠B = 130°। साथ में ∠A−∠B=20°। दोनों जोड़ने पर 2∠A=150° ⇒ ∠A=75°।
प्रश्न 9
दो त्रिभुजों की सर्वांगसमता सिद्ध करते समय 'CPCT' का पूरा अर्थ है:
- Aसर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं
- Bत्रिभुज की परिधि समान होती है
- Cत्रिभुज के कोण बराबर होते हैं
- Dत्रिभुज समरूप होते हैं
व्याख्या
CPCT = 'Corresponding Parts of Congruent Triangles' — एक बार सर्वांगसमता सिद्ध हो जाने पर सभी संगत भाग (भुजाएँ व कोण) बराबर मान लिए जाते हैं।
प्रश्न 10
कक्षा में सर्वांगसमता की अवधारणा स्पष्ट कराने के लिए सबसे उपयुक्त गतिविधि है:
- Aदो त्रिभुजों को काटकर एक-दूसरे पर पूर्णतः अध्यारोपित (superimpose) कराना
- Bकेवल परिभाषा याद कराना
- Cसूत्र रटवाना
- Dसीधे परीक्षा प्रश्न हल कराना
व्याख्या
अध्यारोपण (superimposition) की गतिविधि से बच्चे सर्वांगसमता का प्रत्यक्ष व मूर्त अनुभव पाते हैं, जो केवल परिभाषा याद करने से नहीं मिलता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में त्रिभुज-सर्वांगसमता से कितने प्रश्न आते हैं?+
आमतौर पर 1 प्रश्न इस टॉपिक से पूछा जाता है — बहिष्कोण गुण या सर्वांगसमता प्रतिमान पर; REET 2024 में भी 1 प्रश्न आया था।
सर्वांगसम (congruent) और समरूप (similar) त्रिभुजों में क्या अंतर है?+
सर्वांगसम त्रिभुजों का आकार और माप दोनों बिल्कुल समान होते हैं, जबकि समरूप त्रिभुजों का आकार समान होता है पर माप (साइज़) भिन्न हो सकता है।
CPCT का क्या अर्थ है?+
CPCT का अर्थ है 'Corresponding Parts of Congruent Triangles are equal' — सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं।
त्रिभुज की सर्वांगसमता के कौन-कौन से प्रतिमान हैं?+
SSS, SAS, ASA और RHS (केवल समकोण त्रिभुज के लिए) — ये चार मुख्य प्रतिमान हैं।
त्रिभुज असमिका (triangle inequality) क्या कहती है?+
त्रिभुज की किन्हीं भी दो भुजाओं का योग सदैव तीसरी भुजा से बड़ा होना चाहिए, अन्यथा त्रिभुज नहीं बन सकता।
समद्विबाहु त्रिभुज (isosceles) की क्या विशेषता है?+
समद्विबाहु त्रिभुज में दो भुजाएँ बराबर होती हैं, और इन बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण भी आपस में बराबर होते हैं।
क्या किसी त्रिभुज में दो कोण समकोण या अधिककोण हो सकते हैं?+
नहीं, क्योंकि तीनों कोणों का योग सदैव 180° होता है, इसलिए अधिकतम एक ही कोण 90° या उससे अधिक हो सकता है, शेष दोनों कोण अनिवार्यतः न्यून होंगे।
त्रिभुज की सर्वांगसमता सिद्ध करने के लिए कितनी जानकारी पर्याप्त है?+
सामान्यतः तीन उपयुक्त संगत माप (जैसे तीनों भुजाएँ, या दो भुजा-एक कोण, या दो कोण-एक भुजा, या समकोण त्रिभुज में कर्ण-एक भुजा) पर्याप्त होते हैं, बशर्ते वे SSS, SAS, ASA या RHS में से किसी एक प्रतिमान से मेल खाते हों।
क्या केवल तीनों कोण बराबर होने से दो त्रिभुज सर्वांगसम सिद्ध हो जाते हैं?+
नहीं, केवल तीनों कोण बराबर होने से त्रिभुज समरूप (similar) तो सिद्ध होते हैं, पर सर्वांगसम नहीं — सर्वांगसमता के लिए कम से कम एक भुजा की माप भी समान होनी जरूरी है।
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बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए