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REET L1+L2 · गणित (शिक्षणशास्त्र)

उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching in Maths)

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REET गणित शिक्षणशास्त्र में उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) से जुड़े प्रश्न निदानात्मक परीक्षण (Diagnostic Test), उसके चरणों और सही उपचारात्मक रणनीतियों पर आधारित होते हैं। यहाँ निदान से उपचार तक की पूरी प्रक्रिया और REET में बार-बार पूछे जाने वाले बिंदु दिए गए हैं।

  • REET 2024 में 4 प्रश्न
  • शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
  • 9 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के चारों प्रश्न निदानात्मक परीक्षण के उद्देश्य, उसके बाद कमज़ोर/मंद बुद्धि विद्यार्थियों के लिए ज़रूरी कदम, उपचारात्मक शिक्षण की समयावधि, और सही बनाम गलत उपचारात्मक उपाय पहचानने पर केंद्रित थे। एक प्रश्न में तो सीधे यह पूछा गया कि कौन-सा कथन उपचारात्मक शिक्षण के उपाय के रूप में सही नहीं है — यानी REET में उल्टा (negative) प्रश्न पूछने का चलन भी है, इसलिए सही और गलत उपाय दोनों स्पष्ट रूप से याद रखें। ध्यान रहे कि REET में सही और सहानुभूतिपूर्ण उपाय (जैसे व्यक्तिगत परामर्श, आगे बैठाना) को हमेशा गलत या उपेक्षापूर्ण विकल्पों (जैसे पीछे बैठाना, दंड देना) से अलग पहचानना होता है।

निदानात्मक परीक्षण (Diagnostic Test) क्या है?

निदानात्मक परीक्षण का उद्देश्य किसी विषय-विशेष (जैसे गणित) में विद्यार्थी की विशिष्ट अधिगम कठिनाइयों और कमजोरियों का पता लगाना है — यह केवल यह मापने के लिए नहीं होता कि विद्यार्थी ने कितना सीखा (जो उपलब्धि परीक्षण का काम है), बल्कि यह बताने के लिए होता है कि कहाँ और क्यों सीखने में कमी रह गई।

यह परीक्षण आमतौर पर तब लिया जाता है जब शिक्षक किसी इकाई के शिक्षण के दौरान या तुरंत बाद बार-बार होने वाली एक जैसी गलतियाँ देखता है। एक अच्छा निदानात्मक परीक्षण किसी कौशल के सभी उप-भागों को अलग-अलग जाँचता है (जैसे जोड़-घटाव में स्थानीय मान, चिह्न और गणना — तीनों को अलग-अलग प्रश्नों से जाँचना), ताकि यह ठीक-ठीक पता चल सके कि गलती कहाँ हो रही है, न कि केवल यह कि अंतिम उत्तर सही है या गलत।

निदानात्मक परीक्षण बनाम उपलब्धि परीक्षण

निदानात्मक परीक्षण

उद्देश्यविशिष्ट कठिनाइयों व त्रुटियों का पता लगाना

समयशिक्षण के दौरान या तुरंत बाद, जब त्रुटि दिखे

आगे की प्रक्रियाउपचारात्मक शिक्षण की ओर ले जाता है

उपलब्धि परीक्षण

उद्देश्यकुल सीखने की मात्रा मापना

समयइकाई/सत्र के अंत में

आगे की प्रक्रियाग्रेडिंग/रिपोर्टिंग की ओर ले जाता है

उपचारात्मक शिक्षण की प्रक्रिया (चरण)

उपचारात्मक शिक्षण एक चक्रीय प्रक्रिया है: पहले निदान द्वारा त्रुटि की पहचान की जाती है, फिर उस त्रुटि के कारण का विश्लेषण किया जाता है (जैसे अवधारणात्मक भ्रम, पूर्व-ज्ञान की कमी या प्रक्रियात्मक गलती), इसके बाद व्यक्तिगत या छोटे समूह में उपचारात्मक योजना बनाकर पुनः-शिक्षण किया जाता है, और अंत में पुनर्मूल्यांकन द्वारा देखा जाता है कि कमी दूर हुई या नहीं।

यह प्रक्रिया एक बार में समाप्त नहीं होती — यह तब तक जारी रहनी चाहिए जब तक विद्यार्थी की पहचानी गई कमी पूरी तरह दूर न हो जाए।

गणित में सामान्य त्रुटियाँ और सही उपचारात्मक उपाय

गणित में विद्यार्थी अक्सर स्थानीय मान (place value) में भ्रम, ऋणात्मक-धनात्मक चिह्नों की गलती, घटाव में उधार लेने (borrowing) की प्रक्रिया में त्रुटि, और भिन्नों (fractions) से जुड़ी गलतफ़हमियाँ (जैसे बड़ा हर = बड़ी भिन्न मान लेना) करते हैं।

सही उपचारात्मक उपाय हैं: कमियों का शीघ्र निराकरण, विद्यार्थियों को व्यक्तिगत परामर्श देना, मूर्त शिक्षण सहायक सामग्री (जैसे गिनतारा, भिन्न पट्टियाँ) से अवधारणा फिर से स्पष्ट करना, और कमजोर विद्यार्थी को शिक्षक के निकट आगे बैठाना ताकि उस पर विशेष ध्यान दिया जा सके — उसे पीछे बैठाना या उपेक्षित करना कभी सही उपाय नहीं है।

अधिगम कठिनाई के कारण और उपचारात्मक शिक्षण की प्रमुख रणनीतियाँ

किसी विद्यार्थी की गणित में अधिगम कठिनाई के कारण कई प्रकार के हो सकते हैं — शारीरिक (जैसे दृष्टि या श्रवण संबंधी समस्या), संवेगात्मक (गणित के प्रति भय या चिंता), वातावरणीय (घर में पढ़ाई का उचित माहौल न होना), और शिक्षण-संबंधी (शिक्षण विधि विद्यार्थी की गति से मेल न खाना)। उपचारात्मक शिक्षण से पहले इन कारणों को समझना भी आवश्यक है, क्योंकि उपचार की रणनीति कारण के अनुसार बदलती है।

प्रमुख उपचारात्मक रणनीतियों में शामिल हैं — सहपाठी शिक्षण (Peer tutoring), जिसमें तेज़ विद्यार्थी कमजोर विद्यार्थी की सहायता करता है; लघु-कदम शिक्षण (Small-step teaching), जिसमें जटिल अवधारणा को छोटे-छोटे आसान चरणों में तोड़ा जाता है; तत्काल पुनर्बलन (Immediate feedback), जिसमें गलती होते ही तुरंत सुधार बताया जाता है; और बहु-संवेदी उपागम (Multi-sensory approach), जिसमें देखना, सुनना और स्वयं करना — तीनों को साथ जोड़ा जाता है।

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कक्षा गतिविधि

हर परीक्षण के बाद कॉपियाँ जाँचकर एक जैसी गलती करने वाले विद्यार्थियों का छोटा समूह बनाएँ और उसी विशिष्ट कठिनाई पर केंद्रित 10 मिनट का पुनः-शिक्षण सत्र चलाएँ। इसी समूह में तेज़ विद्यार्थियों को सहपाठी-शिक्षक (peer tutor) की भूमिका भी दी जा सकती है।

शिक्षण सहायक सामग्री

मूर्त सामग्री जैसे गिनतारा (abacus), भिन्न पट्टियाँ (fraction strips) और संख्या रेखा का प्रयोग करें ताकि कमजोर विद्यार्थियों के लिए अवधारणा फिर से मूर्त रूप में स्पष्ट हो सके। रंगीन कार्ड और खेल-आधारित अभ्यास से भी सीखने का भय कम होता है।

सामान्य भ्रांति

कई शिक्षक उपचारात्मक शिक्षण को केवल 'अतिरिक्त कक्षा' या दंड-स्वरूप गतिविधि समझ लेते हैं, जबकि यह लक्षित, व्यक्तिगत और सहानुभूतिपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया है, न कि सज़ा। कुछ शिक्षक यह भी मान लेते हैं कि एक बार पढ़ाने से ही कमी दूर हो जाएगी, जबकि यह चक्रीय प्रक्रिया है।

मूल्यांकन विचार

उपचार के बाद वही या समतुल्य निदानात्मक परीक्षण दोबारा लेकर पूर्व और पश्चात (pre-test/post-test) की तुलना करें ताकि सुधार मापा जा सके, और आवश्यकता होने पर उपचारात्मक चक्र दोबारा चलाएँ।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

क्रम याद रखें: निदान (त्रुटि पहचानना) → कारण विश्लेषण → उपचारात्मक शिक्षण → पुनर्मूल्यांकन। REET में अक्सर 'सबसे पहला कदम कौन-सा है' या 'निदान के बाद क्या किया जाता है' पूछा जाता है, इसलिए यह क्रम कभी न भूलें। यह भी याद रखें कि उपचारात्मक शिक्षण दंड नहीं बल्कि सहयोग की प्रक्रिया है, इसलिए विद्यार्थी को इससे कभी शर्मिंदा महसूस नहीं कराना चाहिए।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 115

निम्न में से किस परीक्षण से विद्यार्थियों की विशिष्ट विषय विशेष की अधिगम कठिनाइयों तथा कमजोरियों का पता लगाया जा सकता है ?

  1. Aनिदानात्मक परीक्षण
  2. Bउपलब्धि परीक्षण
  3. Cमानसिक क्षमता परीक्षण
  4. Dबुद्धि लब्धि परीक्षण

व्याख्या

निदानात्मक परीक्षण (Diagnostic test) का उद्देश्य किसी विषय विशेष में विद्यार्थी की विशिष्ट अधिगम कठिनाइयों और कमजोरियों का पता लगाना है, जिसके बाद उपचारात्मक शिक्षण (remedial teaching) दिया जाता है। उपलब्धि परीक्षण केवल यह मापता है कि विद्यार्थी ने कितना सीखा।

प्रश्न 108

निदानात्मक परीक्षण के बाद, मन्द बुद्धि विद्यार्थियों हेतु आवश्यक है :

  1. Aसामान्य शिक्षण
  2. Bप्रश्नवार शिक्षण
  3. Cअनुदेशनात्मक शिक्षण
  4. Dउपचारात्मक शिक्षण

व्याख्या

निदानात्मक परीक्षण (diagnostic test) से विद्यार्थियों की सीखने की कठिनाइयों और कमजोरियों की पहचान होती है। इसके बाद उन कठिनाइयों को दूर करने के लिए उपचारात्मक शिक्षण (Remedial teaching) दिया जाता है। निदान और उपचार साथ-साथ चलने वाली प्रक्रियाएँ हैं।

प्रश्न 92

उपचारात्मक शिक्षण की प्रक्रिया कब तक चलती रहनी चाहिए ?

  1. Aजब तक छात्र रुचि ना लें
  2. Bजब तक विद्यालय में समय मिले
  3. Cजब तक अन्य अध्यापक कक्षा में नहीं आए
  4. Dजब तक छात्रों की कमी दूर ना हो

व्याख्या

उपचारात्मक शिक्षण (remedial teaching) का उद्देश्य निदान द्वारा पहचानी गई छात्रों की अधिगम कमियों को दूर करना है। इसलिए यह प्रक्रिया तब तक चलनी चाहिए जब तक छात्रों की कमी दूर न हो जाए। रुचि, समय की उपलब्धता या अन्य अध्यापक का आना इसकी समाप्ति का आधार नहीं हो सकता।

प्रश्न 95

गणित में उपचारात्मक शिक्षण उपायों के लिए कौन-सा कथन सही नहीं है ?

  1. Aकमियों का निराकरण शीघ्र किया जाए
  2. Bकमजोर विद्यार्थियों को पीछे की सीट पर बैठने के लिए कहना चाहिए
  3. Cछात्रों को व्यक्तिगत परामर्श दिया जाना चाहिए
  4. Dशिक्षण सहायक सामग्री का उपयोग करके अवधारणाओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए

व्याख्या

उपचारात्मक शिक्षण में कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देना होता है, इसलिए उन्हें आगे बैठाना चाहिए ताकि शिक्षक उनकी कठिनाइयों पर नज़र रख सके। उन्हें पीछे की सीट पर बैठाना उनकी उपेक्षा है, अतः कथन (B) सही नहीं है। कमियों का शीघ्र निराकरण, व्यक्तिगत परामर्श और शिक्षण सहायक सामग्री का प्रयोग — ये सभी सही उपाय हैं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

निदानात्मक परीक्षण का मुख्य उद्देश्य है:

  1. Aग्रेड देना
  2. Bविशिष्ट अधिगम कठिनाइयों की पहचान करना
  3. Cविद्यार्थियों की आपस में तुलना करना
  4. Dपाठ्यक्रम पूरा कराना

व्याख्या

निदानात्मक परीक्षण का उद्देश्य किसी विषय में विद्यार्थी की विशिष्ट अधिगम कठिनाइयों और कमजोरियों की पहचान करना है, ताकि उचित उपचारात्मक शिक्षण दिया जा सके।

प्रश्न 2

उपचारात्मक शिक्षण सामान्यतः किसके बाद दिया जाता है?

  1. Aप्रवेश परीक्षा
  2. Bनिदानात्मक परीक्षण
  3. Cवार्षिक परीक्षा
  4. Dमौखिक परीक्षा

व्याख्या

निदानात्मक परीक्षण से पहचानी गई कठिनाइयों को दूर करने के लिए उपचारात्मक शिक्षण दिया जाता है।

प्रश्न 3

उपचारात्मक शिक्षण की प्रक्रिया में सबसे पहला चरण है:

  1. Aपुनर्मूल्यांकन
  2. Bत्रुटि/कठिनाई की पहचान (निदान)
  3. Cपुरस्कार देना
  4. Dकक्षा बदलना

व्याख्या

उपचारात्मक शिक्षण सदैव निदान यानी त्रुटि या कठिनाई की पहचान से शुरू होता है, उसके बाद ही कारण-विश्लेषण व उपचार आता है।

प्रश्न 4

गणित में उपचारात्मक शिक्षण के लिए सबसे उपयुक्त उपागम है:

  1. Aकेवल रटाना
  2. Bमूर्त से अमूर्त (concrete to abstract) की ओर बढ़ना
  3. Cसीधे कठिन प्रश्न देकर अभ्यास कराना
  4. Dबिना दोहराए अगली इकाई पढ़ाना

व्याख्या

कमजोर विद्यार्थियों के लिए अवधारणा को मूर्त सामग्री (जैसे गिनतारा, ब्लॉक) से शुरू कर धीरे-धीरे अमूर्त (सूत्र/प्रतीक) की ओर ले जाना सबसे प्रभावी उपागम है।

प्रश्न 5

उपचारात्मक शिक्षण में शिक्षक को कमजोर विद्यार्थी को कक्षा में कहाँ बैठाना चाहिए?

  1. Aपीछे की सीट पर
  2. Bआगे की सीट पर, शिक्षक के निकट
  3. Cकक्षा के बाहर
  4. Dकोई फर्क नहीं पड़ता

व्याख्या

कमजोर विद्यार्थी को शिक्षक के निकट आगे बैठाना चाहिए ताकि उस पर विशेष ध्यान दिया जा सके; पीछे बैठाना उसकी उपेक्षा करना है।

प्रश्न 6

यदि कई विद्यार्थी भिन्न (fraction) की तुलना में एक जैसी गलती (जैसे बड़ा हर = बड़ी भिन्न समझना) बार-बार कर रहे हों, तो शिक्षक को सबसे पहले करना चाहिए:

  1. Aसभी को दंडित करना
  2. Bउस विशिष्ट भ्रांति पर केंद्रित छोटे समूह में पुनः-शिक्षण करना
  3. Cअगली इकाई पर बढ़ जाना
  4. Dअभिभावकों को बुलाना

व्याख्या

एक सामान्य भ्रांति को पहचानकर उसी पर केंद्रित छोटे समूह में तुरंत पुनः-शिक्षण करना सबसे प्रभावी उपचारात्मक कदम है।

प्रश्न 7

उपचारात्मक शिक्षण की प्रक्रिया कब तक जारी रहनी चाहिए?

  1. Aएक सप्ताह तक
  2. Bजब तक विद्यार्थी की पहचानी गई कमी दूर न हो जाए
  3. Cजब तक समय मिले
  4. Dसत्र में केवल एक बार

व्याख्या

उपचारात्मक शिक्षण का लक्ष्य पहचानी गई विशिष्ट कमी को पूरी तरह दूर करना है, इसलिए यह तब तक चलनी चाहिए जब तक वह कमी दूर न हो जाए।

प्रश्न 8

निदानात्मक परीक्षण, उपलब्धि परीक्षण से किस प्रकार भिन्न है?

  1. Aयह विशिष्ट कठिनाइयों पर केंद्रित होता है, कुल उपलब्धि पर नहीं
  2. Bयह हमेशा अधिक कठिन होता है
  3. Cयह हमेशा वर्ष के अंत में लिया जाता है
  4. Dइसमें कोई प्रश्न नहीं होता

व्याख्या

निदानात्मक परीक्षण विशिष्ट अधिगम कठिनाइयों की पहचान पर केंद्रित होता है, जबकि उपलब्धि परीक्षण कुल सीखने की मात्रा मापता है।

प्रश्न 9

एक शिक्षक ने पाया कि कक्षा 6 के कई विद्यार्थी दो अंकों की संख्याओं को घटाने में 'उधार लेना' (borrowing) की प्रक्रिया में गलती करते हैं। उपचारात्मक शिक्षण के लिए सबसे उपयुक्त कदम है:

  1. Aमौखिक रूप से केवल नियम दोहराना
  2. Bस्थानीय मान (place value) ब्लॉक/गिनतारे से क्रिया करके प्रक्रिया फिर से स्पष्ट करना
  3. Cअधिक कठिन घटाव प्रश्न देना
  4. Dविद्यार्थियों को अगली कक्षा में भेज देना

व्याख्या

उधार लेने की प्रक्रिया एक स्थानीय मान की अवधारणा है, जिसे मूर्त सामग्री (गिनतारा/ब्लॉक) से क्रिया द्वारा दोबारा स्पष्ट करना सबसे प्रभावी उपचारात्मक उपाय है।

प्रश्न 10

उपचारात्मक शिक्षण की सफलता किससे मापी जाती है?

  1. Aविद्यार्थी की उपस्थिति से
  2. Bपुनः निदानात्मक/समतुल्य परीक्षण में सुधार से
  3. Cकक्षा के आकार से
  4. Dपाठ्यपुस्तक की मोटाई से

व्याख्या

उपचार के बाद दोबारा या समतुल्य निदानात्मक परीक्षण लेकर पूर्व और पश्चात प्रदर्शन की तुलना करने से उपचारात्मक शिक्षण की सफलता मापी जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में उपचारात्मक शिक्षण से कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से 4 प्रश्न पूछे गए थे, जो गणित शिक्षणशास्त्र खंड का नियमित हिस्सा है और अक्सर 'सही/गलत उपाय पहचानें' के रूप में पूछा जाता है।

निदानात्मक परीक्षण और उपचारात्मक शिक्षण में क्या संबंध है?+

निदानात्मक परीक्षण से विद्यार्थी की विशिष्ट कठिनाइयाँ पहचानी जाती हैं, और उसी के आधार पर उपचारात्मक शिक्षण देकर उन कठिनाइयों को दूर किया जाता है — दोनों साथ-साथ चलने वाली, एक-दूसरे पर निर्भर प्रक्रियाएँ हैं।

उपचारात्मक शिक्षण कब समाप्त होना चाहिए?+

उपचारात्मक शिक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक विद्यार्थी की पहचानी गई कमी पूरी तरह दूर न हो जाए, न कि किसी निश्चित समय सीमा, रुचि या शिक्षक की सुविधा के आधार पर।

क्या उपचारात्मक शिक्षण सिर्फ कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए है?+

मुख्य रूप से हाँ — यह उन विद्यार्थियों के लिए है जिनमें निदानात्मक परीक्षण से विशिष्ट अधिगम कठिनाइयाँ पहचानी गई हों, ताकि उन्हें व्यक्तिगत ध्यान देकर सामान्य स्तर तक लाया जा सके, न कि पूरी कक्षा के लिए एक जैसा उपचार दिया जाए।

क्या उपचारात्मक शिक्षण व्यक्तिगत रूप से ही दिया जाना चाहिए?+

ज़रूरी नहीं। यदि कई विद्यार्थियों में एक जैसी कठिनाई पाई जाए, तो उन्हें छोटे समूह में एक साथ उपचारात्मक शिक्षण दिया जा सकता है; पूर्णतः व्यक्तिगत ध्यान केवल तभी आवश्यक होता है जब कठिनाई किसी एक विद्यार्थी के लिए बिल्कुल विशिष्ट हो। शिक्षक की भूमिका इसमें मार्गदर्शक और सहयोगी की होती है, परीक्षक की नहीं। REET की तैयारी करते समय यह पूरा क्रम एक कहानी की तरह याद रखें: पहले पहचानो, फिर समझो, फिर सुधारो, फिर जाँचो।

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए