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REET Level 1 व 2 · गणित

गणित शिक्षण की विधियाँ: आगमन, निगमन, विश्लेषण से सूक्ष्म-शिक्षण तक

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इस पेज पर गणित शिक्षण की सभी प्रमुख विधियाँ, उनका क्रम, उपयुक्त स्तर, पाठ योजना के सोपान और सूक्ष्म-शिक्षण उदाहरण सहित दिए गए हैं। REET 2024 में इस टॉपिक से 8 प्रश्न आए, और ये सीधे पहचान वाले प्रश्न होने से पक्के अंक देते हैं।

  • REET 2024 में 8 प्रश्न
  • शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
  • 9 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: NCERT — Position Paper: National Focus Group on Teaching of Mathematics (NCF 2005)

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में गणित शिक्षणशास्त्र से इस टॉपिक के 8 प्रश्न आए (Level 1 पाली 1 में 3, Level 2 पाली 2 व 3 में 5)। प्रश्न सीधे और पहचान-आधारित थे: किस विधि में 'करके सीखना' है, सूत्र स्थापना के लिए कौन-सी विधि, छोटी कक्षाओं की नीरसता दूर करने की विधि, मौखिक गणित की परिभाषा, सूक्ष्म-शिक्षण के जनक, पाठ योजना में 'प्रस्तावना' और शाब्दिक समस्या का उद्देश्य। ध्यान दें: 'करके सीखना' वाले प्रश्न में BSER ने प्रयोगशाला और ह्यूरिस्टिक दोनों विधियों को सही माना।

गणित शिक्षण की प्रमुख विधियाँ — एक नज़र में

विधिक्रम / मूल भावकब उपयुक्तयाद रखने का बिंदु
आगमन (Inductive)उदाहरण → नियम; विशिष्ट से सामान्य; ज्ञात से अज्ञातप्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर पर सूत्र/नियम की स्थापनाबाल-केंद्रित, समझ स्थायी; समय अधिक
निगमन (Deductive)नियम → उदाहरण; सामान्य से विशिष्टउच्च कक्षाएँ, सूत्र का प्रयोग व अभ्यासतेज़, पर रटने की प्रवृत्ति; आगमन की पूरक
विश्लेषण (Analytic)अज्ञात → ज्ञात; निष्कर्ष से आरंभ कर दिए तथ्यों तकज्यामिति के प्रमेय/साध्य, बीजगणित की समस्याएँखोज की विधि; 'कैसे' सोचना सिखाती है
संश्लेषण (Synthetic)ज्ञात → अज्ञात; दिए तथ्यों से निष्कर्ष तकहल को क्रमबद्ध लिखना/प्रस्तुत करनाविश्लेषण से खोजें, संश्लेषण से लिखें
प्रयोगशाला (Laboratory)करके सीखना; माप, प्रयोग, मॉडलक्षेत्रफल, आयतन, π का मान, कोणों का योगमूर्त अनुभव से सामान्यीकरण
ह्यूरिस्टिक / अन्वेषण (Heuristic)विद्यार्थी स्वयं खोजकर सीखता है; शिक्षक प्रश्नों से मार्गदर्शन करता हैउच्च प्राथमिक, जिज्ञासु व सक्षम विद्यार्थीएच. ई. आर्मस्ट्रांग से जुड़ी; 'heuristic' यूनानी शब्द 'खोजना'
प्रोजेक्ट (Project)वास्तविक जीवन की समस्या/कार्य को समूह में पूरा करनाबजट, सर्वे, दुकान, आँकड़ा संग्रहविलियम एच. किलपैट्रिक से जुड़ी
समस्या-समाधान (Problem solving)समस्या पहचानना → जानकारी → हल की योजना → हल → जाँचशाब्दिक प्रश्न, तर्क विकासचिंतन व तर्क शक्ति बढ़ाती है
खेल एवं मनोरंजन (Play-way)खेल, पहेली, गीत, कहानी से सीखनाछोटी कक्षाएँ; गणित की नीरसता दूर करनारुचि और सक्रियता
प्रदर्शन (Demonstration)शिक्षक करके दिखाता है, विद्यार्थी देखते हैंकोण बनाना, रचनाएँ, उपकरण प्रयोगमुख्य रूप से शिक्षक सक्रिय
व्याख्यान (Lecture)शिक्षक बोलता है, विद्यार्थी सुनते हैंइतिहास/परिचय, बड़ी कक्षाएँसबसे कम बाल-केंद्रित

आगमन–निगमन और विश्लेषण–संश्लेषण जोड़ियों में पूछे जाते हैं; दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं।[स्रोत 2]

आगमन बनाम निगमन और विश्लेषण बनाम संश्लेषण — उदाहरण से

आगमन विधि का उदाहरण: शिक्षक कई त्रिभुज बनवाकर विद्यार्थियों से तीनों कोण नपवाता है (60°+70°+50°, 90°+45°+45° …)। हर बार योग 180° आता है, तो विद्यार्थी स्वयं नियम निकालते हैं: 'त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।' यही कारण है कि उच्च प्राथमिक स्तर तक सूत्र स्थापना के लिए आगमन विधि उपयुक्त मानी जाती है (REET 2024 प्रश्न)।

निगमन विधि में वही नियम पहले बता दिया जाता है और फिर प्रश्न हल कराए जाते हैं: 'दो कोण 50° और 60° हैं, तीसरा कोण ज्ञात करो।' आगमन से नियम खोजा जाता है, निगमन से उसका प्रयोग और अभ्यास — अच्छा शिक्षक दोनों को क्रम से जोड़ता है।

विश्लेषण में विद्यार्थी पूछता है — 'मुझे क्या सिद्ध करना है? उसके लिए क्या चाहिए? वह कहाँ से मिलेगा?' — और निष्कर्ष से दिए हुए तथ्यों की ओर लौटता है। संश्लेषण में वही हल दिए हुए तथ्यों से शुरू करके क्रमबद्ध चरणों में लिखा जाता है। इसलिए कहा जाता है कि विश्लेषण खोज की विधि है और संश्लेषण प्रस्तुतीकरण की।

मौखिक गणित, बाल-केंद्रित पाठ्यक्रम और शाब्दिक समस्याएँ

मौखिक गणित (Oral / mental maths): जब विद्यार्थी साधारण गणितीय क्रियाएँ बिना कागज़-पेंसिल के मन में करता है, उसे मौखिक गणित कहते हैं। इससे गणना की गति, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है; दुकान पर हिसाब जैसे दैनिक जीवन के कार्यों में यह सबसे अधिक काम आता है। कक्षा में इसे पाठ की शुरुआत में 5 मिनट के अभ्यास के रूप में रखा जा सकता है।

आधुनिक शिक्षा बाल-केंद्रित है, इसलिए पाठ्यक्रम बालक को केंद्र मानकर उसकी आयु, रुचि, आवश्यकता और क्षमता के अनुसार बनाया जाना चाहिए। NCF 2005 का गणित आधार-पत्र भी गणित को बच्चे के अनुभव से जोड़ने और यह मानने पर बल देता है कि हर बच्चा गणित सीख सकता है।

शाब्दिक समस्याएँ (word problems): कक्षा 2 में '3 सदस्य, हर एक को 4 रोटी' जैसे प्रश्न से गुणा शुरू करने का मुख्य उद्देश्य वास्तविक परिस्थितियों को गणितीय समस्या से जोड़ने की क्षमता विकसित करना है। बच्चा पहले संदर्भ समझता है, फिर 4 + 4 + 4 = 12 को 3 × 4 = 12 के रूप में देखता है।

पाठ योजना के चरण और सूक्ष्म-शिक्षण

बिंदुमुख्य बात
पाठ योजना के सोपान (हरबर्ट परंपरा)तैयारी/प्रस्तावना → प्रस्तुतीकरण → तुलना व संबंध → सामान्यीकरण → प्रयोग/अनुप्रयोग; अंत में पुनरावृत्ति और गृहकार्य
प्रस्तावना (Introduction)नए प्रकरण की ओर ध्यान खींचने के लिए प्रश्न, उदाहरण या परिस्थिति — पूर्व ज्ञान से जोड़ते हुए
उद्देश्य कथनप्रस्तावना के बाद पाठ का लक्ष्य स्पष्ट शब्दों में बताना
सूक्ष्म-शिक्षण (Micro-teaching)ड्वाइट डब्ल्यू. एलन और साथियों ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय (अमेरिका) में विकसित किया; पहली बार 1963 की ग्रीष्म में शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रयोग
सूक्ष्म-शिक्षण का स्वरूपछोटा समूह (मूल स्टैनफोर्ड मॉडल में लगभग 5 विद्यार्थी; भारतीय अनुकूलन में प्रायः 5–10), कम समय (लगभग 5–10 मिनट), एक समय में एक शिक्षण कौशल
सूक्ष्म-शिक्षण चक्रयोजना → शिक्षण → प्रतिपुष्टि (feedback) → पुनः योजना → पुनः शिक्षण → पुनः प्रतिपुष्टि

[स्रोत 5]

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि (कक्षा 6–7, आगमन)

हर विद्यार्थी कागज़ पर एक त्रिभुज काटे, तीनों कोने फाड़कर एक सीधी रेखा पर सटाए। सब देखेंगे कि कोने मिलकर सीधी रेखा (180°) बनाते हैं — नियम बच्चे स्वयं कहें, शिक्षक बाद में लिखे।

खेल विधि (कक्षा 1–3)

'बस स्टॉप' खेल: 10 बच्चे बस में, स्टॉप पर 3 उतरे, 2 चढ़े — कक्षा में अभिनय करके जोड़-घटाव कराएँ। इससे नीरसता दूर होती है और संख्या-क्रिया का अर्थ बनता है।

प्रोजेक्ट / सामुदायिक जुड़ाव

कक्षा 6–8 के विद्यार्थी घर का एक सप्ताह का दूध-सब्ज़ी खर्च लिखें, कुल और औसत निकालें और सारणी व दंड-आलेख बनाएँ।

आम भ्रांति (शिक्षक की)

'निगमन तेज़ है, इसलिए हमेशा सूत्र बताकर अभ्यास कराओ।' इससे बच्चा सूत्र भूलते ही अटक जाता है। पहले आगमन से समझ, फिर निगमन से अभ्यास।

आकलन विचार

केवल उत्तर नहीं, 'तुमने यह कैसे सोचा?' पूछें। मौखिक गणित का 5 मिनट का क्विज़ और प्रोजेक्ट की प्रस्तुति — दोनों निरंतर आकलन का हिस्सा बन सकते हैं।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

'आ-उ-नि' और 'वि-अ-सं': आगमन = उदाहरण से नियम, निगमन = नियम से उदाहरण; विश्लेषण = अज्ञात से ज्ञात, संश्लेषण = ज्ञात से अज्ञात। प्रश्न में 'सूत्र स्थापना', 'खोज', 'छोटी कक्षा' लिखा हो तो उत्तर प्रायः क्रमशः आगमन, विश्लेषण/ह्यूरिस्टिक और खेल विधि होता है; 'अभ्यास' या 'प्रयोग करना' लिखा हो तो निगमन।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 109एक से अधिक उत्तर मान्य

निम्न में से किस गणित शिक्षण विधि में ‘करके सीखने के सिद्धान्त’ को महत्व दिया गया ?

  1. Aप्रदर्शन विधि
  2. Bव्याख्यान विधि
  3. Cप्रयोगशाला विधि
  4. Dह्यूरिस्टिक विधि

व्याख्या

BSER की अंतिम कुंजी ने (C) और (D) दोनों को सही माना है। प्रयोगशाला विधि (Laboratory method) 'करके सीखो' (learning by doing) के सिद्धांत पर ही आधारित है, जिसमें विद्यार्थी स्वयं प्रयोग व माप करके निष्कर्ष निकालते हैं। ह्यूरिस्टिक (अन्वेषण) विधि में भी विद्यार्थी स्वयं खोज करके, स्वयं क्रियाशील रहकर सीखता है, इसलिए इसे भी स्वीकार किया गया। प्रदर्शन और व्याख्यान विधियों में मुख्य रूप से शिक्षक सक्रिय रहता है।

प्रश्न 114

निम्न में से किसको शिक्षा का केन्द्र मानते हुए पाठ्यक्रम निर्माण करना चाहिए ?

  1. Aविद्यालय
  2. Bशिक्षक
  3. Cअभिभावक
  4. Dबालक

व्याख्या

आधुनिक शिक्षा बाल-केन्द्रित (child-centred) है, अतः पाठ्यक्रम निर्माण बालक को शिक्षा का केन्द्र मानकर, उसकी रुचि, आवश्यकता, आयु और क्षमता के अनुसार किया जाना चाहिए। विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक सहायक हैं, केन्द्र नहीं।

प्रश्न 117

निम्न में से किसने सूक्ष्म-शिक्षण का विकास किया ?

  1. Aबर्टन
  2. Bक्रो व क्रो
  3. Cड्वाइट डब्ल्यू. एलन
  4. Dहेनरी मोरे

व्याख्या

सूक्ष्म-शिक्षण (Micro-teaching) का विकास अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में ड्वाइट डब्ल्यू. एलन (Dwight W. Allen) और उनके सहयोगियों ने किया। इसमें शिक्षक कम समय में, छोटी कक्षा के सामने एक-एक शिक्षण कौशल का अभ्यास करता है।

प्रश्न 98

नए प्रकरण के प्रति विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अध्यापक द्वारा कक्षा कक्ष में प्रस्तुत की जाने वाली परिस्थितियों को कहते हैं :

  1. Aपूर्व ज्ञान
  2. Bगृहकार्य
  3. Cउद्देश्य कथन
  4. Dप्रस्तावना

व्याख्या

पाठ योजना में नए प्रकरण की शुरुआत में अध्यापक प्रश्नों, उदाहरणों या परिस्थितियों के माध्यम से विद्यार्थियों की रुचि जगाता है और उनका ध्यान नए विषय की ओर आकर्षित करता है; इसे प्रस्तावना (Introduction) कहते हैं। पूर्व ज्ञान वह है जो छात्र पहले से जानते हैं, और उद्देश्य कथन प्रस्तावना के बाद पाठ का लक्ष्य बताना है।

प्रश्न 105

छात्र गणित की साधारण क्रियाओं को बिना कागज और पेन्सिल की सहायता से करता है, कहलाता है :

  1. Aलिखित गणित
  2. Bमौखिक गणित
  3. Cरेखा गणित
  4. Dउदाहरण

व्याख्या

जब छात्र जोड़, घटाव, गुणा जैसी साधारण गणितीय क्रियाएँ कागज-पेन्सिल के बिना मन में करके उत्तर बताता है, तो इसे मौखिक गणित (Oral / Mental Maths) कहते हैं। इससे गणना की गति, एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है। लिखित गणित में कागज-पेन्सिल का प्रयोग होता है।

प्रश्न 112

गणित शिक्षण में उच्च प्राथमिक स्तर तक सूत्र स्थापना के लिये उपयुक्त विधि है :

  1. Aप्रदर्शन विधि
  2. Bनिगमन विधि
  3. Cआगमन विधि
  4. Dव्याख्यान विधि

व्याख्या

आगमन विधि (Inductive method) में अनेक विशिष्ट उदाहरणों का निरीक्षण कराकर छात्र स्वयं सामान्य नियम या सूत्र तक पहुँचते हैं। उच्च प्राथमिक स्तर तक के बच्चे मूर्त उदाहरणों से बेहतर सीखते हैं, इसलिए सूत्र स्थापना के लिए यह विधि उपयुक्त है। निगमन विधि में सूत्र पहले दे दिया जाता है, जो इस स्तर पर रटने को बढ़ावा देती है।

प्रश्न 104

छोटी कक्षाओं में गणित की नीरसता को दूर करने के लिए उपयुक्त शिक्षण विधि है

  1. Aआगमन विधि
  2. Bसंश्लेषण विधि
  3. Cखेल एवं मनोरंजन विधि
  4. Dविश्लेषण विधि

व्याख्या

छोटी कक्षाओं के बच्चे खेल और गतिविधियों में अधिक रुचि लेते हैं, इसलिए गणित की नीरसता दूर करने के लिए खेल एवं मनोरंजन विधि सबसे उपयुक्त है। आगमन, संश्लेषण और विश्लेषण विधियाँ तर्क पर आधारित हैं और उच्च कक्षाओं के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं।

प्रश्न 113

गुणन की अवधारणा का परिचय देते हुए कक्षा II का एक अध्यापक एक शाब्दिक समस्या से आरम्भ करता है कि “एक परिवार में 3 सदस्य है और प्रत्येक सदस्य को दोपहर भोजन में 4 रोटी की आवश्यकता है, तो कुल कितनी रोटियों की आवश्यकता होगी ? ” अवधारणा के परिचय के लिए इस प्रकार की शाब्दिक समस्याओं का क्या मुख्य उद्देश्य है ?

  1. Aबच्चों के संचारण कौशल में वृद्धि करना
  2. Bवास्तविक परिस्थितियों का गणितीय समस्याओं से संयोजन करने की सामर्थ्य को विकसित करना
  3. Cगणित और भाषा की कक्षाओं का समाकलन करना
  4. Dछात्रों में केवल गणितीय भाषा को विकसित करने पर ध्यान केन्द्रित करना

व्याख्या

परिवार और रोटियों जैसी दैनिक जीवन की शाब्दिक समस्या से गुणन की शुरुआत करने का मुख्य उद्देश्य बच्चों में वास्तविक परिस्थितियों को गणितीय समस्याओं से जोड़ने की क्षमता विकसित करना है (NCF 2005 भी गणित को बच्चों के जीवन से जोड़ने पर बल देता है)। संचार कौशल या भाषा से समाकलन इसके गौण लाभ हो सकते हैं, मुख्य उद्देश्य नहीं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'उदाहरण से नियम की ओर' किस शिक्षण विधि का क्रम है?

  1. Aनिगमन विधि
  2. Bआगमन विधि
  3. Cसंश्लेषण विधि
  4. Dव्याख्यान विधि

व्याख्या

आगमन विधि में कई उदाहरणों का अवलोकन कर सामान्य नियम निकाला जाता है। निगमन में इसका उल्टा — नियम से उदाहरण — क्रम होता है।

प्रश्न 2

ज्यामिति में किसी प्रमेय को सिद्ध करते समय 'सिद्ध करना है' से आरंभ करके 'दिए गए तथ्यों' तक पहुँचना किस विधि की विशेषता है?

  1. Aविश्लेषण विधि
  2. Bसंश्लेषण विधि
  3. Cप्रदर्शन विधि
  4. Dप्रोजेक्ट विधि

व्याख्या

विश्लेषण विधि अज्ञात (निष्कर्ष) से ज्ञात (दिए तथ्यों) की ओर चलती है। संश्लेषण विधि ज्ञात से अज्ञात की ओर चलती है।

प्रश्न 3

प्रोजेक्ट विधि का संबंध मुख्य रूप से किस शिक्षाशास्त्री से है?

  1. Aएच. ई. आर्मस्ट्रांग
  2. Bड्वाइट डब्ल्यू. एलन
  3. Cविलियम एच. किलपैट्रिक
  4. Dहरबर्ट

व्याख्या

प्रोजेक्ट विधि विलियम एच. किलपैट्रिक से जुड़ी है। आर्मस्ट्रांग ह्यूरिस्टिक विधि से, एलन सूक्ष्म-शिक्षण से और हरबर्ट पाठ योजना के सोपानों से जुड़े हैं।

प्रश्न 4

सूक्ष्म-शिक्षण के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?

  1. Aइसमें एक साथ सभी शिक्षण कौशलों का अभ्यास होता है
  2. Bइसमें प्रतिपुष्टि (feedback) का कोई स्थान नहीं है
  3. Cइसमें कम समय और छोटे समूह में एक कौशल का अभ्यास होता है
  4. Dयह केवल बड़ी कक्षाओं के शिक्षण की विधि है

व्याख्या

सूक्ष्म-शिक्षण में शिक्षक-प्रशिक्षु कम समय में, छोटे समूह के सामने एक समय में एक कौशल का अभ्यास करता है और प्रतिपुष्टि लेकर पुनः शिक्षण करता है।

प्रश्न 5

सूक्ष्म-शिक्षण चक्र का सही क्रम कौन-सा है?

  1. Aशिक्षण → योजना → प्रतिपुष्टि → पुनः शिक्षण
  2. Bयोजना → पुनः योजना → शिक्षण → प्रतिपुष्टि
  3. Cप्रतिपुष्टि → योजना → शिक्षण → मूल्यांकन
  4. Dयोजना → शिक्षण → प्रतिपुष्टि → पुनः योजना → पुनः शिक्षण → पुनः प्रतिपुष्टि

व्याख्या

सूक्ष्म-शिक्षण चक्र योजना से शुरू होता है, फिर शिक्षण और प्रतिपुष्टि होती है; उसके आधार पर पुनः योजना, पुनः शिक्षण और पुनः प्रतिपुष्टि होती है।

प्रश्न 6

विद्यार्थियों को विभिन्न आकार के बेलनाकार बर्तनों में पानी भरकर आयतन मापने और निष्कर्ष निकालने को कहा गया। यह किस विधि का उदाहरण है?

  1. Aव्याख्यान विधि
  2. Bनिगमन विधि
  3. Cप्रयोगशाला विधि
  4. Dप्रदर्शन विधि

व्याख्या

विद्यार्थी स्वयं मापन और प्रयोग करके निष्कर्ष निकाल रहे हैं, जो प्रयोगशाला विधि ('करके सीखना') है। प्रदर्शन विधि में केवल शिक्षक करके दिखाता है।

प्रश्न 7

निगमन विधि की एक सीमा क्या है?

  1. Aइसमें समय बहुत अधिक लगता है
  2. Bयह रटने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकती है
  3. Cयह अभ्यास कार्य के लिए अनुपयुक्त है
  4. Dइसमें नियम कभी नहीं बताया जाता

व्याख्या

निगमन विधि में नियम सीधे दिया जाता है, इसलिए बच्चा बिना समझे सूत्र रट सकता है। यह तेज़ है और अभ्यास के लिए उपयुक्त है, अतः अन्य विकल्प गलत हैं।

प्रश्न 8

पाठ योजना में 'सामान्यीकरण' सोपान का उद्देश्य क्या है?

  1. Aविद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित करना
  2. Bविद्यार्थियों का पूर्व ज्ञान जाँचना
  3. Cगृहकार्य देना
  4. Dउदाहरणों के आधार पर नियम या निष्कर्ष तक पहुँचना

व्याख्या

प्रस्तुतीकरण और तुलना के बाद सामान्यीकरण में विद्यार्थी उदाहरणों से सामान्य नियम निकालते हैं। ध्यान आकर्षित करना और पूर्व ज्ञान जाँचना प्रस्तावना के कार्य हैं, तथा गृहकार्य पाठ के अंत में दिया जाता है।

प्रश्न 9

कक्षा 4 की एक शिक्षिका भाग की अवधारणा के लिए '24 लड्डू 6 बच्चों में बराबर बाँटने' की स्थिति से शुरुआत करती है। इसका मुख्य लाभ क्या है?

  1. Aबच्चे भाग की संक्रिया को वास्तविक जीवन की स्थिति से जोड़ पाते हैं
  2. Bबच्चे भाग का पहाड़ा जल्दी रट लेते हैं
  3. Cइससे लिखित कार्य कम हो जाता है
  4. Dइससे परीक्षा में अधिक अंक मिलते हैं

व्याख्या

परिचित संदर्भ से शुरुआत करने पर बच्चा 'बराबर बाँटना' का अर्थ समझता है और संक्रिया को वास्तविक जीवन से जोड़ता है। रटना या अंक पाना इसका उद्देश्य नहीं है।

प्रश्न 10

कक्षा 8 में शिक्षक विद्यार्थियों से प्रश्न पूछ-पूछकर उन्हें स्वयं यह खोजने देता है कि समांतर चतुर्भुज के सम्मुख कोण बराबर होते हैं; शिक्षक स्वयं उत्तर नहीं बताता। यह किस विधि के सबसे निकट है?

  1. Aह्यूरिस्टिक (अन्वेषण) विधि
  2. Bव्याख्यान विधि
  3. Cनिगमन विधि
  4. Dप्रदर्शन विधि

व्याख्या

ह्यूरिस्टिक विधि में विद्यार्थी स्वयं खोज करता है और शिक्षक केवल प्रश्नों से मार्गदर्शन करता है। व्याख्यान, निगमन और प्रदर्शन में शिक्षक नियम या प्रक्रिया स्वयं प्रस्तुत करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में गणित शिक्षण विधियों से कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से कुल 8 प्रश्न आए। गणित खंड के शिक्षणशास्त्र वाले भाग में विधियाँ, पाठ योजना और सूक्ष्म-शिक्षण लगभग हर पाली में पूछे जाते हैं।

आगमन और निगमन विधि में क्या अंतर है?+

आगमन में उदाहरणों से नियम निकाला जाता है (विशिष्ट से सामान्य), जबकि निगमन में पहले नियम बताकर उसके उदाहरण हल कराए जाते हैं (सामान्य से विशिष्ट)। प्राथमिक स्तर पर आगमन अधिक उपयुक्त है।

ह्यूरिस्टिक विधि के प्रवर्तक कौन हैं?+

ह्यूरिस्टिक (अन्वेषण) विधि का संबंध एच. ई. आर्मस्ट्रांग से है, जिन्होंने इसे विज्ञान शिक्षण के लिए प्रस्तुत किया; गणित में भी यह खोज द्वारा सीखने की विधि के रूप में पढ़ाई जाती है।

सूक्ष्म-शिक्षण का विकास किसने और कहाँ किया?+

सूक्ष्म-शिक्षण का विकास ड्वाइट डब्ल्यू. एलन और उनके साथियों ने अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में किया; इसका पहला प्रयोग 1963 में हुआ।

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आधिकारिक स्रोत

  1. NCERT — Position Paper: National Focus Group on Teaching of Mathematics (NCF 2005)
  2. NCERT (DESM) — गणित शिक्षण में आगमन-निगमन व विश्लेषण-संश्लेषण विधियों पर शिक्षक-प्रस्तुति
  3. Armstrong, H. E. (1902) — The Heuristic Method of Teaching, School Science and Mathematics
  4. Kilpatrick, W. H. (1918) — The Project Method, Teachers College Record
  5. ERIC — Micro-Teaching, A Description (Stanford)

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए