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📚 आर्थिक अवधारणाएं एवं भारतीय अर्थव्यवस्था

डिजिटल अर्थव्यवस्था — डिजिटल इंडिया, UPI, DPI एवं फिनटेक — RAS 2026 नोट्स

Digital Economy — Digital India, UPI, DPI and Fintech — RAS 2026 Notes

12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: अगस्त 2026· Economic Concepts and Indian Economy

परिचय

RAS प्रारंभिक परीक्षा के आर्थिक भाग में डिजिटल अर्थव्यवस्था एक तेज़ी से बढ़ता हुआ महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि यह "करेंट अफेयर्स" (UPI लेन-देन के मासिक आँकड़े, नई डिजिटल नीतियाँ, फिनटेक निवेश) और "स्थायी सैद्धांतिक ढाँचे" (JAM ट्रिनिटी, इंडिया स्टैक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की अवधारणा, DPDP अधिनियम के प्रावधान) — दोनों को एक साथ जोड़ता है। डिजिटल अर्थव्यवस्था से आशय ऐसी आर्थिक गतिविधियों से है जो डिजिटल तकनीकों — इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल भुगतान प्रणाली एवं डेटा-आधारित सेवाओं — पर आधारित होती हैं या उनसे संचालित होती हैं। भारत ने बीते एक दशक में "इंडिया स्टैक" के माध्यम से एक अनूठा मॉडल विकसित किया है, जिसमें आधार (पहचान), UPI (भुगतान) और डिजीलॉकर/अकाउंट एग्रीगेटर (डेटा) जैसी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) परतें मिलकर वित्तीय समावेशन, शासन-सुधार एवं नवाचार को एक साथ गति देती हैं — जिसे वैश्विक स्तर पर "मॉडल" के रूप में देखा जाता है।

मुख्य अवधारणाएँ

1. डिजिटल इंडिया कार्यक्रम — लक्ष्य एवं स्तंभ

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत 1 जुलाई 2015 को हुई, जिसका उद्देश्य भारत को एक "डिजिटल रूप से सशक्त समाज एवं ज्ञान अर्थव्यवस्था" में बदलना है। यह कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित होता है और तीन व्यापक दृष्टि-क्षेत्रों (Vision Areas) पर आधारित है — प्रत्येक नागरिक के लिए डिजिटल अवसंरचना उपयोगिता (जैसे उच्च-गति इंटरनेट, डिजिटल पहचान, साझा सेवा केंद्र), मांग पर शासन एवं सेवाएँ (सेवाओं का वास्तविक समय में, ऑनलाइन एवं मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म पर सुलभ होना, कागज़ी कार्यवाही में कमी, वित्तीय लेन-देन का डिजिटलीकरण), और नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण (सार्वभौमिक डिजिटल साक्षरता, सभी दस्तावेज़ों/प्रमाणपत्रों की क्लाउड पर उपलब्धता, भारतीय भाषाओं में डिजिटल संसाधन)। इसके प्रमुख स्तंभों में ब्रॉडबैंड हाइवे, सार्वभौमिक मोबाइल कनेक्टिविटी, पब्लिक इंटरनेट एक्सेस प्रोग्राम (कॉमन सर्विस सेंटर व डाकघर), ई-गवर्नेंस, ई-क्रांति (सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी), सूचना सबके लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (मेक इन इंडिया के साथ अभिसरण) तथा IT फ़ॉर जॉब्स एवं अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम शामिल हैं।

2. JAM ट्रिनिटी एवं वित्तीय समावेशन का आधार

JAM का अर्थ है जन धन-आधार-मोबाइल — यह तीन स्तंभों वाला वह ढाँचा है जिसने भारत में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer - DBT) की क्रांति को संभव बनाया। प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY, अगस्त 2014) के अंतर्गत हर परिवार के लिए ज़ीरो-बैलेंस बैंक खाता खोलने का अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप 55 करोड़ से अधिक बैंक खाते खुले, जिनमें एक बड़ा हिस्सा महिलाओं व ग्रामीण क्षेत्रों का है। आधार — भारत की विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी 12-अंकीय बायोमेट्रिक पहचान संख्या — दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है, जिसने डुप्लिकेट व फ़र्ज़ी लाभार्थियों को हटाकर सब्सिडी लीकेज में भारी कमी की है। तीसरा स्तंभ मोबाइल कनेक्टिविटी है, जिसने बैंकिंग व शासन-सेवाओं को नागरिक की जेब तक पहुँचाया। इन तीनों के संयोजन ने DBT को संभव बनाया — अब LPG सब्सिडी, MGNREGA मज़दूरी, छात्रवृत्ति व पेंशन जैसी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में स्थानांतरित होती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है।

3. UPI एवं डिजिटल भुगतान क्रांति

यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने 2016 में लॉन्च किया था। यह एक ऐसा रीयल-टाइम भुगतान तंत्र है जो एक ही मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से कई बैंक खातों को जोड़ता है और तत्काल, 24×7 अंतर-बैंक धन-अंतरण संभव बनाता है — बिना कार्ड नंबर, IFSC कोड या खाता विवरण साझा किए, केवल एक वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) के ज़रिए। UPI आज भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की रीढ़ बन चुका है और मासिक आधार पर अरबों लेन-देन संसाधित करता है, जिससे भारत मूल्य के आधार पर विश्व के सबसे बड़े रीयल-टाइम भुगतान बाज़ारों में अग्रणी है। UPI की सफलता के आधार पर NPCI ने UPI 123Pay (फ़ीचर फ़ोन उपयोगकर्ताओं के लिए), UPI Lite (छोटे मूल्य के ऑफ़लाइन लेन-देन हेतु) तथा क्रेडिट लाइन ऑन UPI जैसे विस्तार भी शुरू किए हैं। इसके अतिरिक्त सरकार ने UPI का अंतरराष्ट्रीयकरण भी शुरू किया है — सिंगापुर, UAE, फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस व अन्य देशों में UPI स्वीकृति व लिंकेज के समझौते हुए हैं, जिससे यह भारतीय डिजिटल कूटनीति का एक प्रमुख साधन बन गया है। अन्य प्रमुख डिजिटल भुगतान माध्यमों में भारत इंटरफ़ेस फ़ॉर मनी (BHIM), आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS), नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टूलकिट/FASTag तथा e-RUPI (डिजिटल वाउचर आधारित प्रीपेड भुगतान तंत्र, जिसका उद्देश्य लक्षित कल्याण वितरण है) शामिल हैं।

4. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) एवं इंडिया स्टैक

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) उन साझा, अंतर-परिचालनीय (Interoperable) डिजिटल प्रणालियों को कहते हैं जो सोसाइटी-स्तर की क्षमताएँ प्रदान करती हैं — पहचान, भुगतान व डेटा-प्रबंधन — और जिन्हें पब्लिक व प्राइवेट दोनों क्षेत्र मिलकर उपयोग करते हैं। इसे प्रायः तीन परतों में समझा जाता है — पहचान परत (आधार), भुगतान परत (UPI) तथा डेटा प्रबंधन परत (डिजीलॉकर व अकाउंट एग्रीगेटर ढाँचा, जो सहमति-आधारित डेटा साझाकरण संभव बनाता है)। इन तीनों परतों के समूह को सामूहिक रूप से "इंडिया स्टैक" कहा जाता है। भारत ने G20 अध्यक्षता (2023) के दौरान DPI को वैश्विक एजेंडे में प्रमुखता से रखा और "वन फ्यूचर एलायंस" जैसी पहलों के ज़रिए अन्य विकासशील देशों को DPI मॉडल अपनाने में सहायता का प्रस्ताव रखा। DPI का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह निजी नवाचार के लिए एक खुला मंच (Open API) प्रदान करता है, जिस पर हज़ारों फिनटेक व स्टार्टअप कंपनियाँ नई सेवाएँ बना सकती हैं — इसे "डिजिटल पब्लिक गुड्स" दृष्टिकोण कहा जाता है, जो एकाधिकारवादी बंद प्लेटफ़ॉर्म मॉडल से भिन्न है।

5. फिनटेक क्षेत्र का विस्तार

भारत आज विश्व के सबसे बड़े व सबसे तेज़ी से बढ़ते फिनटेक बाज़ारों में से एक है। फिनटेक क्षेत्र की वृद्धि को UPI की सफलता, अनुकूल नियामकीय वातावरण (RBI का रेगुलेटरी सैंडबॉक्स, अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क), स्मार्टफ़ोन एवं सस्ते डेटा की व्यापक उपलब्धता तथा बड़ी युवा जनसंख्या ने गति दी है। प्रमुख उप-क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान (पेमेंट गेटवे, वॉलेट), डिजिटल ऋण (Digital Lending/Buy-Now-Pay-Later), इंश्योरटेक (InsurTech), वेल्थटेक (म्यूचुअल फंड व निवेश प्लेटफ़ॉर्म) तथा नियोबैंकिंग शामिल हैं। RBI ने डिजिटल ऋण से जुड़े उपभोक्ता संरक्षण हेतु डिजिटल लेंडिंग दिशानिर्देश (2022) जारी किए हैं, जो ऋणदाता संस्थाओं व लोन सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच स्पष्ट उत्तरदायित्व तय करते हैं। साथ ही RBI ने यूनिफ़ाइड लेंडिंग इंटरफ़ेस (ULI) जैसी नई DPI पहल भी शुरू की है, जिसका उद्देश्य ऋण-वितरण प्रक्रिया को UPI की तरह सहज व त्वरित बनाना है, विशेषकर कृषि व MSME क्षेत्र के लिए। इसके अतिरिक्त RBI ने डिजिटल रुपया (e₹, Central Bank Digital Currency - CBDC) का पायलट भी शुरू किया है, जिसके दो रूप हैं — थोक (Wholesale, अंतर-बैंक निपटान हेतु) व खुदरा (Retail, आम उपभोक्ताओं हेतु)।

6. ई-कॉमर्स एवं ONDC

भारत का ई-कॉमर्स बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसमें B2C तथा B2B दोनों खंड शामिल हैं। परंतु परंपरागत ई-कॉमर्स मॉडल कुछ बड़े निजी प्लेटफ़ॉर्मों (Amazon, Flipkart आदि) के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा है, जिससे छोटे विक्रेताओं व स्थानीय व्यापारियों की पहुँच सीमित रही है। इस चुनौती के समाधान हेतु सरकार ने ओपन नेटवर्क फ़ॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) की शुरुआत की, जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत DPIIT द्वारा प्रवर्तित एक गैर-लाभकारी पहल है। ONDC का उद्देश्य ई-कॉमर्स को "प्लेटफ़ॉर्म-केंद्रित" मॉडल से "नेटवर्क-केंद्रित" मॉडल में बदलना है — जैसे UPI ने भुगतान को अंतर-परिचालनीय बनाया, वैसे ही ONDC खरीदार-एप्लिकेशन व विक्रेता-एप्लिकेशन को एक खुले प्रोटोकॉल के माध्यम से जोड़ता है, जिससे कोई भी छोटा दुकानदार बिना किसी बड़े प्लेटफ़ॉर्म की मध्यस्थता के अपने उत्पाद ऑनलाइन बेच सकता है। इससे बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, विक्रेता कमीशन घटता है तथा उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं।

7. डेटा संरक्षण ढाँचा — DPDP अधिनियम, 2023

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act), 2023 भारत का पहला व्यापक डेटा संरक्षण कानून है, जो पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निजता को मौलिक अधिकार घोषित किए जाने के बाद पारित हुआ। यह अधिनियम "डेटा प्रिंसिपल" (जिसका डेटा है, यानी नागरिक) व "डेटा फिड्युशियरी" (जो डेटा एकत्र व संसाधित करता है, यानी कंपनी/संस्था) की अवधारणाओं पर आधारित है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं — प्रोसेसिंग हेतु सहमति (Consent) अनिवार्यता, डेटा प्रिंसिपल के अधिकार (जानकारी तक पहुँच, सुधार, मिटाने का अधिकार व शिकायत निवारण), बच्चों के डेटा के लिए अभिभावक की सहमति की अनिवार्यता, डेटा उल्लंघन (Data Breach) की सूचना देने का दायित्व, तथा एक स्वतंत्र डेटा संरक्षण बोर्ड (Data Protection Board) की स्थापना, जो शिकायतों का निवारण करेगा व उल्लंघन पर आर्थिक दंड लगा सकेगा (अधिकतम ₹250 करोड़ तक)। यह अधिनियम "क्रॉस-बॉर्डर डेटा फ्लो" को सामान्यतः अनुमति देता है, सिवाय उन देशों के जिन्हें सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए — यह GDPR (यूरोपीय संघ) जैसे कड़े डेटा-लोकलाइज़ेशन मॉडल से भिन्न, अपेक्षाकृत उदार दृष्टिकोण है।

8. IT/ITeS क्षेत्र एवं GDP योगदान

भारत का सूचना प्रौद्योगिकी एवं IT-सक्षम सेवाएँ (IT/ITeS) क्षेत्र देश की सेवा-निर्यात अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह क्षेत्र सॉफ्टवेयर सेवाओं, बिज़नेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM), इंजीनियरिंग रिसर्च व डेवलपमेंट (ER&D) तथा हार्डवेयर उत्पादन को समाहित करता है। यह क्षेत्र लाखों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित करता है और भारत को वैश्विक सेवा-निर्यात में शीर्ष स्थान दिलाता है — सूचना एवं संचार सेवाओं को भारत में सर्वाधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त होता है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग व डेटा सेंटर उद्योग की तीव्र वृद्धि देखी गई है — भारत वैश्विक डेटा सृजन में लगभग पाँचवें हिस्से का योगदान करता है, यद्यपि वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में इसकी हिस्सेदारी अभी अपेक्षाकृत कम है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावना बनी हुई है।

9. ई-गवर्नेंस पहलें

डिजिटल इंडिया के अंतर्गत अनेक ई-गवर्नेंस प्लेटफ़ॉर्म विकसित किए गए हैं, जो नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को सुगम बनाते हैं। डिजीलॉकर नागरिकों को अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज़ (शैक्षणिक प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण आदि) डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की सुविधा देता है। माईगव (MyGov) नागरिक-भागीदारी का मंच है। उमंग (UMANG) एक ही एप्लिकेशन में केंद्र व राज्य सरकारों की सैकड़ों सेवाओं को एकीकृत करता है। e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाज़ार) किसानों को ऑनलाइन कृषि-उपज मंडी से जोड़ता है। GeM (गवर्नमेंट e-मार्केटप्लेस) सरकारी खरीद को पारदर्शी व डिजिटल बनाता है। इसके अतिरिक्त कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम-मील डिजिटल सेवा वितरण सुनिश्चित करता है। राजस्थान के संदर्भ में ई-मित्र केंद्र राज्य सरकार की प्रमुख नागरिक-सेवा वितरण प्रणाली है, जो केंद्र सरकार के CSC मॉडल के समानांतर कार्य करती है।

10. डिजिटल विभाजन (Digital Divide) एवं चुनौतियाँ

डिजिटल अर्थव्यवस्था की प्रगति के बावजूद भारत में डिजिटल विभाजन एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके प्रमुख आयाम हैं — शहरी-ग्रामीण असमानता (टेलीफोन व इंटरनेट कनेक्टिविटी शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफ़ी अधिक है), लैंगिक असमानता (महिलाओं की तुलना में पुरुषों की डिजिटल उपकरण व इंटरनेट तक पहुँच अधिक है), आय-आधारित असमानता (स्मार्टफ़ोन व डेटा की लागत निम्न-आय वर्ग के लिए बाधा), डिजिटल साक्षरता की कमी (विशेषकर वृद्ध व अशिक्षित जनसंख्या में), तथा भाषा-बाधा (अधिकांश डिजिटल सेवाएँ अंग्रेज़ी-केंद्रित)। इसके समाधान हेतु सरकार भारतनेट परियोजना (ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ना), डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA), भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री (भाषिणी परियोजना) तथा सस्ती डेटा दरें सुनिश्चित करने पर कार्य कर रही है। साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता के दुरुपयोग, डिजिटल धोखाधड़ी (फिशिंग, OTP फ्रॉड) तथा एल्गोरिद्मिक पूर्वाग्रह भी इस क्षेत्र की उभरती चुनौतियाँ हैं, जिनके समाधान हेतु CERT-In जैसी एजेंसियाँ व साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क सक्रिय हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का शुभारंभ 1 जुलाई 2015 को हुआ; नोडल मंत्रालय — इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
  • JAM ट्रिनिटी = जन धन (2014) + आधार (UIDAI, 12-अंकीय बायोमेट्रिक पहचान) + मोबाइल; इसने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को संभव बनाया।
  • UPI का शुभारंभ NPCI द्वारा 2016 में हुआ; यह भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की रीढ़ है और मासिक अरबों लेन-देन संसाधित करता है।
  • इंडिया स्टैक की तीन परतें: पहचान (आधार), भुगतान (UPI), डेटा प्रबंधन (डिजीलॉकर/अकाउंट एग्रीगेटर)।
  • ONDC — DPIIT द्वारा प्रवर्तित, ई-कॉमर्स को "प्लेटफ़ॉर्म" से "नेटवर्क" मॉडल में बदलने वाली खुली प्रोटोकॉल पहल।
  • DPDP अधिनियम, 2023 — भारत का पहला व्यापक डेटा संरक्षण कानून; डेटा संरक्षण बोर्ड की स्थापना; अधिकतम दंड ₹250 करोड़ तक।
  • e₹ (Digital Rupee/CBDC) — RBI द्वारा जारी, थोक व खुदरा दो रूपों में पायलट।
  • IT क्षेत्र का कुल राजस्व (हार्डवेयर सहित) FY2025 में लगभग USD 283 बिलियन; सूचना व संचार सेवाओं को भारत में सर्वाधिक FDI प्राप्त (लगभग 25.8%)।
  • टेली-घनत्व (2025) लगभग 86.76%; 5G सेवाएँ देश के 99.9% जिलों में उपलब्ध; भारतनेट के अंतर्गत 2.5 लाख ग्राम पंचायतें ऑप्टिकल फाइबर से जुड़ीं।

परीक्षा टिप्स

  • JAM ट्रिनिटी के तीन घटकों के शुभारंभ वर्ष व उद्देश्य याद रखें — यह अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में पूछा जाता है।
  • UPI, ONDC व DPI को एक-दूसरे से जोड़कर समझें — तीनों "इंटरऑपरेबल ओपन प्रोटोकॉल" के सिद्धांत पर आधारित हैं, इसलिए तुलनात्मक प्रश्न बन सकते हैं।
  • DPDP अधिनियम की धाराओं के सटीक नंबर से अधिक महत्वपूर्ण है — डेटा प्रिंसिपल बनाम डेटा फिड्युशियरी का अंतर तथा डेटा संरक्षण बोर्ड की भूमिका समझना।
🧠 स्मरण ट्रिक — इंडिया स्टैक की तीन परतें

"पहचान से भुगतान, भुगतान से डेटा" — आधार (पहचान) → UPI (भुगतान) → डिजीलॉकर/अकाउंट एग्रीगेटर (डेटा)। तीनों को "PID" के रूप में याद करें: P = Payment (UPI), I = Identity (आधार), D = Data (डिजीलॉकर)।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — डिजिटल इंडिया बनाम JAM ट्रिनिटी बनाम DPI

इन तीनों को अक्सर मिला दिया जाता है। डिजिटल इंडिया एक व्यापक "कार्यक्रम/मिशन" है (2015 में शुरू), जिसके अंतर्गत ई-गवर्नेंस, ब्रॉडबैंड, डिजिटल साक्षरता जैसी अनेक पहलें शामिल हैं। JAM ट्रिनिटी डिजिटल इंडिया का एक विशिष्ट उप-घटक है, जो केवल वित्तीय समावेशन व DBT से संबंधित है (जन धन + आधार + मोबाइल)। DPI (इंडिया स्टैक) वह तकनीकी अवसंरचना है जिस पर JAM व डिजिटल इंडिया दोनों निर्भर करते हैं — यह पहचान, भुगतान व डेटा की तीन परतों वाला ढाँचा है। संक्षेप में: डिजिटल इंडिया = छाता कार्यक्रम; JAM = वित्तीय समावेशन उप-रणनीति; DPI = तकनीकी नींव।

📝 अभ्यास प्रश्न
Q1. JAM ट्रिनिटी के तीन घटक कौन-से हैं, और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?

✅ जन धन योजना + आधार + मोबाइल; मुख्य उद्देश्य प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के ज़रिए वित्तीय समावेशन व सब्सिडी लीकेज में कमी।

Q2. UPI का शुभारंभ किस संस्था ने किस वर्ष किया?

✅ भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने 2016 में।

Q3. ONDC का पूरा नाम एवं उद्देश्य बताइए।

✅ ओपन नेटवर्क फ़ॉर डिजिटल कॉमर्स — ई-कॉमर्स को प्लेटफ़ॉर्म-केंद्रित मॉडल से खुले, अंतर-परिचालनीय नेटवर्क मॉडल में बदलना, ताकि छोटे विक्रेता भी बिना बड़े प्लेटफ़ॉर्म पर निर्भर हुए ऑनलाइन व्यापार कर सकें।

Q4. DPDP अधिनियम, 2023 के अंतर्गत डेटा उल्लंघन पर अधिकतम कितना दंड लगाया जा सकता है, और शिकायत निवारण कौन-सा निकाय करता है?

✅ अधिकतम ₹250 करोड़ तक; शिकायत निवारण डेटा संरक्षण बोर्ड (Data Protection Board) करता है।

Q5. इंडिया स्टैक की तीन परतें कौन-सी हैं?

✅ पहचान परत (आधार), भुगतान परत (UPI), और डेटा प्रबंधन परत (डिजीलॉकर/अकाउंट एग्रीगेटर)।

सारांश

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था "इंडिया स्टैक" के तीन-स्तरीय ढाँचे — पहचान (आधार), भुगतान (UPI) व डेटा (डिजीलॉकर/अकाउंट एग्रीगेटर) — पर टिकी है, जिसे JAM ट्रिनिटी ने वित्तीय समावेशन से जोड़ा और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम (2015) ने एक व्यापक नीतिगत छाता प्रदान किया। UPI ने भुगतान क्रांति ला दी, ONDC ने ई-कॉमर्स को खुला व प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया, फिनटेक क्षेत्र तेज़ी से फल-फूल रहा है, और DPDP अधिनियम, 2023 ने पहली बार डेटा संरक्षण का व्यापक कानूनी ढाँचा दिया। साथ ही IT/ITeS क्षेत्र भारत की सेवा-निर्यात अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए इन सभी घटकों के आपसी संबंध, शुभारंभ वर्ष व नोडल एजेंसियाँ, तथा डिजिटल विभाजन जैसी चुनौतियाँ समझना सर्वाधिक फलदायी है।

त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
  • भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
  • भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
  • GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।
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