परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
सहकारिता (Cooperatives) राजस्थान की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। RPSC RAS परीक्षा में राजस्थान की अर्थव्यवस्था के अंतर्गत सहकारिता एक प्रमुख टॉपिक है। यह विषय प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के अर्थव्यवस्था खंड से जुड़ा है। सहकारिता न केवल आर्थिक विकास का माध्यम है, बल्कि सामाजिक संरचना को भी प्रभावित करती है। राजस्थान में कृषि ऋण, दुग्ध उत्पादन, उपज के विपणन और कई अन्य क्षेत्रों में सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। परीक्षार्थियों को सहकारिता की परिभाषा, संरचना, कार्य, लाभ और राजस्थान में इसके विकास के बारे में विस्तृत ज्ञान रखना अत्यावश्यक है।
मुख्य अवधारणाएं
1. सहकारिता की परिभाषा और मूल सिद्धांत
सहकारिता एक स्वैच्छिक, स्वायत्त संगठन है जो सदस्यों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक हितों को पूरा करने के लिए बनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता संघ के अनुसार, सहकारिता एक स्वतंत्र संगठन है जिसमें सदस्यों की समान भागीदारी होती है। सहकारिता के मूल सिद्धांतों में स्वैच्छिक सदस्यता, लोकतांत्रिक नियंत्रण, सदस्य आर्थिक भागीदारी, स्वायत्तता और स्वतंत्रता, शिक्षा, प्रशिक्षण और सूचना, समुदाय के प्रति चिंता और सहकारी समितियों के बीच सहयोग शामिल है। भारत में सहकारिता सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय है। 97वें संविधान संशोधन (2011) द्वारा सहकारी समिति बनाने को अनुच्छेद 19(1)(c) के अंतर्गत मौलिक अधिकार बनाया गया, राज्य के नीति निदेशक तत्वों में अनुच्छेद 43-ख जोड़ा गया और संविधान में भाग IX-ख (अनुच्छेद 243ZH से 243ZT) जोड़ा गया।
2. भारत में सहकारिता का विकास और ढांचा
भारत में सहकारिता का इतिहास ब्रिटिश काल से शुरू होता है। 1904 में भारत में पहला सहकारी कानून (Cooperative Credit Societies Act, 1904) पारित हुआ और 1912 में Cooperative Societies Act बना। 6 जुलाई 2021 को केंद्र सरकार ने अलग सहकारिता मंत्रालय बनाया। अल्पकालिक सहकारी ऋण की संरचना तीन स्तरीय है - प्राथमिक (Primary), जिला स्तरीय (District) और राज्य स्तरीय (State)। भारतीय सहकारिता को मुख्य रूप से कृषि सहकारिता, उपभोक्ता सहकारिता, औद्योगिक सहकारिता, आवास सहकारिता और कार्य सहकारिता में विभाजित किया जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक सहकारी बैंकों का विनियमन करता है और नाबार्ड उनका पुनर्वित्त करता है। सहकारी समितियों का पंजीकरण राज्य सरकारों के तहत होता है।
- 1904पहला सहकारी कानून (Cooperative Credit Societies Act)
- 1912Cooperative Societies Act
- 2001राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम
- 201197वां संविधान संशोधन
- 2021केंद्र में सहकारिता मंत्रालय
- 2025राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025
3. राजस्थान में सहकारी समितियों की संरचना और प्रकार
राजस्थान में सहकारी समितियों का तीन-स्तरीय ढांचा है - अल्पकालिक ऋण के लिए गांव स्तर पर प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS), जिला स्तर पर केंद्रीय सहकारी बैंक और राज्य स्तर पर राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (शीर्ष बैंक)। राजस्थान में कृषि सहकारिता सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान एक कृषि प्रधान राज्य है। दुग्ध सहकारिता (RCDF और जिला दुग्ध संघ, ब्रांड सरस), विपणन सहकारिता (RAJFED) और ऋण सहकारिता राजस्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उपभोक्ता सहकारिता के माध्यम से राज्य में राशन दुकानें संचालित की जाती हैं। आवास सहकारिता कर्मचारियों और सामान्य जनता को आवास प्रदान करती है। पशुपालन सहकारिता राजस्थान में पशु उत्पादों को बढ़ावा देती है।
- राजस्थान राज्य सहकारी बैंकराज्य स्तर (शीर्ष)
- केंद्रीय सहकारी बैंकजिला स्तर
- PACSगांव स्तर, किसानों तक ऋण
4. सहकारिता के आर्थिक और सामाजिक लाभ
सहकारिता के आर्थिक लाभों में किसानों को न्यायसंगत मूल्य प्राप्त करना, कृषि उत्पादों का सीधा विपणन, ऋण की सुविधा, सस्ते इनपुट (बीज, खाद, कीटनाशक) की आपूर्ति और आय में वृद्धि शामिल है। सामाजिक लाभों में सामुदायिक विकास, महिलाओं का सशक्तिकरण, स्थानीय नेतृत्व का विकास, सामूहिक निर्णय लेने की संस्कृति और सामाजिक एकता शामिल है। सहकारिता बेरोजगारी को कम करने में सहायक है और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है। यह क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में भी भूमिका निभाती है। सहकारिता के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिलती है।
5. समकालीन चुनौतियां और सुधार
राजस्थान में सहकारिता के समक्ष मुख्य चुनौतियों में राजनीतिक हस्तक्षेप, प्रबंधन में भ्रष्टाचार, पुरानी तकनीकें, संसाधनों की कमी, सदस्य भागीदारी में कमी और वैश्विक बाजार से प्रतिस्पर्धा शामिल है। डिजिटलीकरण की कमी भी एक समस्या है। सुधार के लिए पारदर्शिता में वृद्धि, पेशेवर प्रबंधन की नियुक्ति, तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल रूपांतरण और सदस्यों के बीच जागरूकता आवश्यक है। नई नीतियों के माध्यम से सहकारिता को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।
महत्वपूर्ण तथ्य
• राजस्थान सहकारिता अधिनियम: राजस्थान में सहकारी समितियां राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम, 2001 के तहत संचालित होती हैं (इससे पहले 1965 का अधिनियम लागू था)।
• दुग्ध सहकारिता: राजस्थान में दुग्ध उत्पादन में सहकारिता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) इसका शीर्ष संगठन है, जिसका ब्रांड "सरस" है।
• विपणन सहकारिता: राजस्थान राज्य सहकारी विपणन संघ (RAJFED) किसानों की उपज के विपणन और खरीद में सहायता करता है।
• राजस्थान राज्य सहकारी बैंक: यह राज्य में सहकारी ऋण संरचना का शीर्ष बैंक है और केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से PACS तक ऋण पहुंचाता है।
• राष्ट्रीय सहकारिता नीति: भारत सरकार ने 2002 में राष्ट्रीय सहकारिता नीति घोषित की थी; 24 जुलाई 2025 को नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 जारी की गई।
राजस्थान विशेष
राजस्थान में सहकारिता का विशेष महत्व है क्योंकि यह एक कृषि प्रधान और अर्ध-शुष्क क्षेत्र है। राजस्थान में बड़ी संख्या में सहकारी समितियां पंजीकृत हैं जो कृषि ऋण, दुग्ध, विपणन, उपभोक्ता और आवास जैसे क्षेत्रों में कार्य करती हैं। दुग्ध क्षेत्र में RCDF और जिला दुग्ध संघ "सरस" ब्रांड से दूध व दुग्ध उत्पाद बेचते हैं। कृषि सहकारिता के माध्यम से किसानों को सिंचाई, बीज, खाद और उन्नत कृषि तकनीकें प्रदान की जाती हैं। जयपुर, जोधपुर और बीकानेर जैसे शहरों में उपभोक्ता सहकारी समितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
परीक्षा पैटर्न
• RPSC RAS परीक्षा में सहकारिता: यह टॉपिक राजस्थान की अर्थव्यवस्था के अंतर्गत प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाओं की दृष्टि से उपयोगी है; मुख्य परीक्षा में इससे वर्णनात्मक प्रश्न भी बन सकते हैं।
• परीक्षा के मुख्य विषय: सहकारिता की परिभाषा और उद्देश्य, राजस्थान में सहकारी संरचना, कृषि सहकारिता, दुग्ध सहकारिता, उपभोक्ता सहकारिता, सहकारिता के लाभ, चुनौतियां और सुधार।
• उत्तर देने की रणनीति: उत्तरों में संक्षिप्ति, तथ्यात्मकता और राजस्थान से संबंधित उदाहरण दें। आंकड़ों और सांख्यिकी का उपयोग करें।
• साक्षात्कार में: आप सहकारिता से जुड़े व्यावहारिक अनुभव, स्थानीय उदाहरण और नई नीतियों के बारे में प्रश्न की अपेक्षा कर सकते हैं।
स्मरण युक्तियां
• तीन स्तरीय संरचना को याद रखें: प्राथमिक (गांव), जिला/केंद्रीय और राज्य स्तर। इसे "Primary-District-State" या "पी-डी-एस" के रूप में याद रखें।
• सहकारिता के सिद्धांत: ICA के 7 सिद्धांत (1995) याद रखें। सहकारिता स्वैच्छिकता, लोकतंत्र और आपसी सहायता पर आधारित है।
• राजस्थान की महत्वपूर्ण सहकारी संस्थाएं: राज्य सहकारी बैंक, PACS, RCDF (सरस), RAJFED और उपभोक्ता सहकारी भंडार।
• तुलनात्मक विश्लेषण: भारत के अन्य राज्यों (गुजरात में अमूल, उत्तर प्रदेश) के साथ राजस्थान की सहकारिता की तुलना करें।
• आंकड़े और वर्ष: 1904 और 1912 के अधिनियम, 2001 का राजस्थान अधिनियम, 2011 का 97वां संशोधन, 2021 में सहकारिता मंत्रालय और 2025 की राष्ट्रीय सहकारिता नीति को याद रखें।
• मामले का अध्ययन: राजस्थान की किसी एक सफल सहकारी समिति का विस्तृत अध्ययन करें और परीक्षा में उदाहरण दें।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •राजस्थान में बाजरा सर्वाधिक उत्पादित खाद्य फसल है; देश के कुल बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान।
- •राजस्थान सीसा-जस्ता, तांबा, संगमरमर और जिप्सम में देश में प्रथम स्थान पर है।
- •इंदिरा गांधी नहर परियोजना थार मरुस्थल में सिंचाई की सबसे बड़ी परियोजना है; यह व्यास और सतलज नदियों से जल लेती है।
- •राजस्थान भारत के GDP में लगभग 5% योगदान करता है (2023-24)।
- •राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्र ~25-26% योगदान देते हैं।