परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
रोज़गार किसी भी राष्ट्र की समृद्धि और विकास का मूल आधार होता है। राजस्थान की अर्थव्यवस्था को समझने के लिए रोज़गार की समझ अत्यंत आवश्यक है। RPSC RAS परीक्षा में राजस्थान की अर्थव्यवस्था एक महत्वपूर्ण विषय है जहां रोज़गार से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। राजस्थान की अर्थव्यवस्था के आकार, संरचना और विकास को समझने के लिए रोज़गार की स्थिति, रोज़गार के क्षेत्र और बेरोज़गारी की समस्या को जानना आवश्यक है। इस विषय से परीक्षा में सीधे तौर पर 2-4 प्रश्न आते हैं तथा यह अन्य कई प्रश्नों का आधार भी बनता है।
मुख्य अवधारणाएं
१. रोज़गार की परिभाषा और प्रकार
रोज़गार से तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा आय अर्जन के लिए किए जाने वाले कार्य से है। रोज़गार को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जा सकता है - संगठित क्षेत्र का रोज़गार और असंगठित क्षेत्र का रोज़गार। संगठित क्षेत्र में सरकारी नौकरी, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा आदि क्षेत्र आते हैं जहां कर्मचारियों को नियमित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। असंगठित क्षेत्र में खेती, व्यापार, छोटे-मोटे उद्योग और दैनिक मजदूरी वाले कार्य शामिल हैं। राजस्थान की अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र का प्रभाव अधिक है।
२. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र
अर्थव्यवस्था को तीन क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है। प्राथमिक क्षेत्र में कृषि, पशुपालन, वनोपज और खनन कार्य शामिल हैं। द्वितीयक क्षेत्र में विनिर्माण, निर्माण और उद्योग कार्य आते हैं। तृतीयक क्षेत्र में सेवा क्षेत्र जैसे व्यापार, परिवहन, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं आती हैं। राजस्थान की कार्यबल का अधिकांश हिस्सा अभी भी प्राथमिक क्षेत्र में कार्यरत है, परंतु तृतीयक क्षेत्र में लगातार वृद्धि हो रही है।
३. बेरोज़गारी और इसके प्रकार
बेरोज़गारी का आशय ऐसी स्थिति से है जब काम करने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर काम नहीं पा सकता। बेरोज़गारी के मुख्य प्रकार हैं - संरचनात्मक बेरोज़गारी (जब अर्थव्यवस्था की संरचना में परिवर्तन होता है), चक्रीय बेरोज़गारी (आर्थिक मंदी के समय), घर्षणात्मक बेरोज़गारी (नौकरी बदलते समय), मौसमी बेरोज़गारी (खेती जैसे कार्यों में वर्ष के कुछ महीने ही काम मिलना) और प्रच्छन्न/छिपी बेरोज़गारी (ज़रूरत से अधिक लोगों का एक ही काम में लगे रहना)। राजस्थान में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी और प्रच्छन्न बेरोज़गारी की समस्या अधिक गंभीर है।
| वर्ग | ग्रामीण | शहरी |
|---|---|---|
| पुरुष | ३.५% | ६.५% |
| महिला | २.७% | १०.९% |
| कुल | ३.२% | ७.७% |
राजस्थान में बेरोज़गारी दर, PLFS 2023-24 (सामान्य स्थिति, समायोजित)
- संरचनात्मक
- अर्थव्यवस्था की संरचना में बदलाव
- चक्रीय
- आर्थिक मंदी के समय
- घर्षणात्मक
- नौकरी बदलते समय अस्थायी
- मौसमी
- खेती जैसे मौसमी कार्यों में
- राजस्थान में गंभीर समस्या
- प्रच्छन्न/छिपी
- ज़रूरत से अधिक लोग एक काम में लगे
४. श्रम बल और कार्यबल भागीदारी
श्रम बल (लेबर फोर्स) से तात्पर्य उन सभी व्यक्तियों से है जो काम कर रहे हैं या काम करने के लिए तैयार हैं। इसमें बेरोज़गार लोग भी शामिल होते हैं। कार्यबल भागीदारी दर को प्रतिशत में दर्शाया जाता है जो कुल जनसंख्या में से श्रम बल का अनुपात होता है। महिलाओं की कार्यबल भागीदारी दर भारत और विशेषकर राजस्थान में पुरुषों की तुलना में कम है, जो एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। सरकार इस दर को बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है।
५. रोज़गार सृजन और नीतियां
रोज़गार सृजन का आशय नई नौकरियों के अवसर पैदा करने से है। राजस्थान सरकार रोज़गार सृजन के लिए विभिन्न नीतियां और योजनाएं लागू कर रही है जैसे - इंदिरा गांधी शहरी रोज़गार गारंटी योजना, ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (महात्मा गांधी नरेगा की जगह 1 जुलाई 2026 से लागू 'विकसित भारत - रोज़गार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)' अधिनियम यानी VB-G RAM G), कौशल विकास कार्यक्रम और स्टार्टअप नीति। इन योजनाओं के माध्यम से युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और स्वरोज़गार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
- राजस्थान की कुल जनसंख्या लगभग ६.८ करोड़ है और इसमें से लगभग २.९ करोड़ श्रम बल का हिस्सा हैं।
- राजस्थान के कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा (आधे से अधिक) अभी भी कृषि पर निर्भर है, जबकि राज्य के सकल मूल्य वर्धन (GSVA) में कृषि का हिस्सा केवल लगभग २६% है - उद्योग का हिस्सा लगभग २६-२७% और सेवाओं का हिस्सा लगभग ४८% है (राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26)।
- PLFS 2023-24 के अनुसार राजस्थान में ग्रामीण बेरोज़गारी दर लगभग ३.२% और शहरी बेरोज़गारी दर लगभग ७.७% है - शहरी क्षेत्रों में बेरोज़गारी ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक है।
- राजस्थान में महिला कार्यबल भागीदारी दर (Female LFPR) लगभग ४२% है (राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26); यह "श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी" से अलग आँकड़ा है, दोनों को एक न समझें।
- राजस्थान में संगठित क्षेत्र में केवल ८-१०% कार्यबल कार्यरत है, बाकी असंगठित क्षेत्र में है।
- पर्यटन क्षेत्र राजस्थान में लगभग १.५ लाख प्रत्यक्ष और ३ लाख अप्रत्यक्ष रोज़गार प्रदान करता है।
- खनन क्षेत्र में राजस्थान लगभग २.५ लाख लोगों को रोज़गार प्रदान करता है।
राजस्थान विशेष
राजस्थान की अर्थव्यवस्था में रोज़गार की स्थिति अनूठी है। राजस्थान मुख्यतः कृषि प्रधान राज्य है, लेकिन हाल के वर्षों में औद्योगीकरण और सेवा क्षेत्र में तेज़ी से विकास हो रहा है। जयपुर, अलवर और कोटा जैसे शहर औद्योगिक विकास के केंद्र बन गए हैं जहां हज़ारों लोगों को रोज़गार मिला है। राजस्थान की खनिज संपदा जैसे संगमरमर, फेल्सपार, और तांबा आदि भी रोज़गार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पर्यटन उद्योग राजस्थान के लिए एक प्रमुख रोज़गार स्रोत बन गया है। हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाएं भी लाखों लोगों को रोज़गार प्रदान करती हैं। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका विकास और कौशल उन्नयन पर विशेष ध्यान दे रही है।
परीक्षा पैटर्न
RPSC RAS परीक्षा में रोज़गार से संबंधित प्रश्न विभिन्न प्रारूपों में पूछे जाते हैं:
- तथ्य आधारित प्रश्न: राजस्थान में रोज़गार की दर, बेरोज़गारी की दर, विभिन्न क्षेत्रों में कार्यबल का वितरण आदि से संबंधित प्रश्न।
- विश्लेषणात्मक प्रश्न: रोज़गार नीति, सरकारी योजनाओं का प्रभाव और राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव से संबंधित।
- तुलनात्मक प्रश्न: अन्य राज्यों के साथ राजस्थान की रोज़गार स्थिति की तुलना।
- समसामयिक प्रश्न: हाल के बजट, नई नीतियों और कार्यक्रमों से संबंधित।
स्मरण युक्तियां
- तीन क्षेत्र याद रखें: प्राथमिक (कृषि) → द्वितीयक (उद्योग) → तृतीयक (सेवाएं) के क्रम में विकास होता है।
- PMEGP याद रखें: प्रधानमंत्री एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन प्रोग्राम (PMEGP) स्वरोज़गार हेतु एक महत्वपूर्ण योजना है।
- राजस्थान विशिष्ट संख्याएं: कुल जनसंख्या ६.८ करोड़, श्रम बल २.९ करोड़ - ये संख्याएं सवाल में आ सकती हैं।
- GSVA में सेक्टर का योगदान: कृषि ~२६%, उद्योग ~२६-२७%, सेवाएं ~४८% (कार्यबल में हिस्सेदारी इससे अलग है - कृषि में आधे से अधिक कार्यबल लगा है)।
- महिला भागीदारी (LFPR): राजस्थान में महिला कार्यबल भागीदारी दर लगभग ४२% है (राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26)।
- ग्रामीण रोज़गार योजना: महात्मा गांधी नरेगा की जगह 1 जुलाई 2026 से VB-G RAM G अधिनियम लागू हो गया है - परीक्षा के लिए यह बदलाव याद रखें।
- मौसमी बेरोज़गारी: राजस्थान में यह विशेषकर कृषि क्षेत्र में गंभीर समस्या है।
- संगठित vs असंगठित: राजस्थान में असंगठित क्षेत्र में ९०% से अधिक लोग कार्यरत हैं।
- मुख्य शहर: जयपुर, अलवर, कोटा औद्योगिक हब हैं - परीक्षा में ये शहर सवाल में आ सकते हैं।
- पर्यटन संख्या: पर्यटन क्षेत्र से लगभग १.५ लाख प्रत्यक्ष रोज़गार - यह महत्वपूर्ण तथ्य है।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •राजस्थान में बाजरा सर्वाधिक उत्पादित खाद्य फसल है; देश के कुल बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान।
- •राजस्थान सीसा-जस्ता, तांबा, संगमरमर और जिप्सम में देश में प्रथम स्थान पर है।
- •इंदिरा गांधी नहर परियोजना थार मरुस्थल में सिंचाई की सबसे बड़ी परियोजना है; यह व्यास और सतलज नदियों से जल लेती है।
- •राजस्थान भारत के GDP में लगभग 5% योगदान करता है (2023-24)।
- •राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्र ~25-26% योगदान देते हैं।