परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
पानी अथवा जल राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण संसाधन है। RPSC RAS परीक्षा के मैक्रो इकोनॉमिक्स अवलोकन खंड में जल संसाधन, उनका प्रबंधन और राजस्थान की अर्थव्यवस्था में जल की भूमिका एक महत्वपूर्ण विषय है। राजस्थान भारत का सबसे शुष्क राज्य है, जहां औसत वार्षिक वर्षा लगभग ५७५ मिमी है (पश्चिमी जिलों में यह १००-२५० मिमी तक कम रह जाती है)। इस परिस्थिति में जल प्रबंधन न केवल कृषि के लिए बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए अत्यावश्यक है। परीक्षा में जल संसाधनों के विकास, सिंचाई परियोजनाओं, भूजल दोहन, जल संरक्षण नीतियों और जल से संबंधित सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
मुख्य अवधारणाएं
१. जल संसाधन और उपलब्धता का अर्थशास्त्र
राजस्थान में जल की उपलब्धता अत्यंत सीमित है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र में से लगभग ६० प्रतिशत सूखा प्रवण क्षेत्र है। जल संसाधन प्रबंधन का आर्थिक दृष्टिकोण यह है कि सीमित जल को विभिन्न क्षेत्रों में कुशलतापूर्वक वितरित किया जाए। कृषि क्षेत्र में लगभग ९० प्रतिशत जल का उपयोग होता है, जबकि औद्योगिक और घरेलू उपयोग के लिए मात्र १० प्रतिशत उपलब्ध होता है। राजस्थान की अर्थव्यवस्था में जल की कमी एक संरचनात्मक समस्या है जो दीर्घकालीन विकास को प्रभावित करती है।
२. सिंचाई परियोजनाएं और पूंजीगत निवेश
राजस्थान में बड़ी सिंचाई परियोजनाएं अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP), चंबल घाटी परियोजना, माही बजाज सागर परियोजना और राणा प्रताप सागर परियोजना राज्य की प्रमुख परियोजनाएं हैं। ये परियोजनाएं न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाती हैं बल्कि बिजली उत्पादन, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में भी योगदान देती हैं। इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) राजस्थान के उत्तरी और पश्चिमी भागों में पूर्ण होने पर लगभग १६-१९.६ लाख हेक्टेयर (1.6-1.96 मिलियन हेक्टेयर) भूमि को सिंचित करने की क्षमता रखती है।
| परियोजना | नदी | जिला/क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|---|
| इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) | सतलुज-ब्यास (पंजाब से) | श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर आदि (पश्चिमी राजस्थान) | लंबाई 649 किमी; सिंचाई क्षमता ~16-19.6 लाख हेक्टेयर |
| चंबल घाटी परियोजना | चंबल नदी | कोटा, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान-मध्यप्रदेश संयुक्त) | गांधी सागर, राणा प्रताप सागर व जवाहर सागर बांध शामिल |
| माही बजाज सागर परियोजना | माही नदी | बांसवाड़ा | राजस्थान-गुजरात संयुक्त परियोजना; सिंचाई व जलविद्युत |
| राणा प्रताप सागर परियोजना | चंबल नदी | रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ | जलविद्युत उत्पादन; चंबल घाटी परियोजना का भाग |
३. भूजल दोहन और धारणीयता
राजस्थान में भूजल का अत्यधिक दोहन एक गंभीर समस्या है। राजस्थान में अब ४१ जिले हैं; भूजल का वर्गीकरण ज़िला-स्तर पर नहीं बल्कि ब्लॉक-स्तर पर होता है — केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के अनुसार राज्य के ३०२ ब्लॉकों में से लगभग २१९ ब्लॉक 'अतिदोहित' (over-exploited) श्रेणी में हैं। जयपुर, जोधपुर, नागौर, सीकर, झुंझुनूं, अलवर, भरतपुर और दौसा जैसे जिलों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। अर्थशास्त्र की दृष्टि से, भूजल एक सीमित संसाधन है और इसका अत्यधिक दोहन आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट पैदा कर रहा है। जल संरक्षण और पुनर्भरण परियोजनाएं न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से आवश्यक हैं बल्कि दीर्घकालीन आर्थिक विकास के लिए भी अपरिहार्य हैं।
४. जल मूल्य निर्धारण और आर्थिक नीतियां
जल का मूल्य निर्धारण राजस्थान की आर्थिक नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। सरकार द्वारा कृषकों को सिंचाई जल बहुत कम दरों पर प्रदान किया जाता है, जिससे जल की बर्बादी होती है। राजस्थान जल संसाधन विभाग ने जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई हैं। ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जल के सही मूल्य निर्धारण से कृषि दक्षता बढ़ेगी और जल का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित होगा।
५. जल और जलवायु परिवर्तन
जलवायु परिवर्तन राजस्थान में वर्षा के पैटर्न को प्रभावित कर रहा है। अनियमित वर्षा, बढ़ता तापमान और सूखे की आवृत्ति बढ़ रही है। यह अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। कृषि उत्पादन अनिश्चित हो गया है, जिससे ग्रामीण आय प्रभावित हुई है। जलवायु-लचीली कृषि प्रणालियों के विकास, जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और वैकल्पिक आजीविका विकल्प सूखे से निपटने के आर्थिक उपाय हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
• राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा: लगभग ५७५ मिमी (पश्चिमी जिलों में १००-२५० मिमी; अखिल भारतीय औसत ~११५० मिमी से बहुत कम)
• राज्य का कुल भौगोलिक क्षेत्र: ३,४२,२३९ वर्ग किमी (भारत का १०.४% क्षेत्र)
• सिंचित क्षेत्र: कुल कृषि क्षेत्र का लगभग ३५-४०%
• इंदिरा गांधी नहर परियोजना की कुल लंबाई: ६४९ किमी (मुख्य नहर राजस्थान में ४४५ किमी + पंजाब-हरियाणा-राजस्थान में फीडर नहर २०४ किमी)
• राजस्थान की प्रमुख नदियां: चंबल, बनास, लूणी, माही, घग्घर, काली सिंध, पार्वती
• हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर उत्पादन में राजस्थान का महत्वपूर्ण योगदान
• वर्षा जल संचयन अभियान सरकार की प्रमुख नीति है
राजस्थान विशेष
राजस्थान के विभिन्न भागों में जल की स्थिति भिन्न है। पूर्वी राजस्थान, विशेषकर चंबल घाटी क्षेत्र में जल की अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति है। मध्य राजस्थान में बनास व अन्य नदियों से जल उपलब्ध है। परंतु पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर) में जल की अत्यंत कमी है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने पश्चिमी राजस्थान के विकास में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। यह परियोजना पंजाब से जल लाती है और पूर्ण होने पर पश्चिमी राजस्थान के लगभग 8 जिलों में करीब 1.8 करोड़ लोगों को पेयजल आपूर्ति करने की क्षमता रखती है। कृषि उत्पादन में आई वृद्धि से इस क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि, सतत विकास के लिए जल संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है।
परीक्षा पैटर्न
RPSC RAS परीक्षा में जल से संबंधित प्रश्न निम्नलिखित तरीकों से पूछे जाते हैं:
प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary): वस्तुनिष्ठ प्रश्न जल संसाधनों, सिंचाई परियोजनाओं के नाम, नदियों के बेसिन, भूजल के बारे में पूछे जाते हैं। साधारणतः २-३ प्रश्न होते हैं।
मुख्य परीक्षा (Mains): वर्णनात्मक प्रश्नों में जल प्रबंधन नीति, सूखे से निपटने की रणनीति, जल संरक्षण के उपाय और अर्थव्यवस्था पर जल के प्रभाव के बारे में विस्तृत उत्तर की अपेक्षा की जाती है। आमतौर पर १ पूर्ण प्रश्न होता है।
साक्षात्कार (Interview): जल समस्याओं के समाधान और राजस्थान के विकास में जल की भूमिका पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
स्मरण युक्तियां
१. "सीमा": राजस्थान की जल स्थिति को याद रखने के लिए "सीमा" शब्द का प्रयोग करें - सूखा-प्रवण क्षेत्र (६०%), इंदिरा गांधी नहर परियोजना (मुख्य परियोजना), माही-चंबल (नदियां), आवश्यकता (संरक्षण की)।
२. मुख्य परियोजनाएं "चामरा": चांबल घाटी परियोजना, आईजीएनपी (इंदिरा गांधी नहर परियोजना), माही बजाज सागर परियोजना, राणा प्रताप सागर परियोजना।
३. नदियां याद रखें: राजस्थान की प्रमुख नदियां हैं - चंबल, बनास, लूणी, माही और घग्घर।
४. संख्याएं याद रखें: ५७५ मिमी (औसत वर्षा), ९०% (कृषि में जल उपयोग), ३.४२ लाख वर्ग किमी (क्षेत्र)।
५. जल प्रबंधन के तीन स्तंभ: "संसंर" - संचयन (Harvesting), संरक्षण (Conservation), रिचार्ज (Recharge)।
६. दृष्टांत का प्रयोग: इंदिरा गांधी नहर परियोजना को "हरित क्रांति का संदेशवाहक" कहते हुए याद रखें, जिसने पश्चिमी राजस्थान को संपन्न बनाया।
७. समसामयिक विषय: जल की कमी, सूखा, बाढ़ प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और कृषकों की समस्याओं को एक-दूसरे से जोड़कर याद रखें।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •राजस्थान में बाजरा सर्वाधिक उत्पादित खाद्य फसल है; देश के कुल बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान।
- •राजस्थान सीसा-जस्ता, तांबा, संगमरमर और जिप्सम में देश में प्रथम स्थान पर है।
- •इंदिरा गांधी नहर परियोजना थार मरुस्थल में सिंचाई की सबसे बड़ी परियोजना है; यह व्यास और सतलज नदियों से जल लेती है।
- •राजस्थान भारत के GDP में लगभग 5% योगदान करता है (2023-24)।
- •राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्र ~25-26% योगदान देते हैं।