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📚 भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन

भारत के प्रधानमंत्री: अनुच्छेद 75, शक्तियां, कार्यकाल | RAS

Prime Minister - Indian Constitution Study Guide for RPSC RAS

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

प्रधान मंत्री भारतीय संविधान के अनुसार केंद्र सरकार की कार्यपालिका का प्रमुख होता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित RAS परीक्षा में भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था और शासन से संबंधित प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण हैं। प्रधान मंत्री की भूमिका, शक्तियाँ और कार्य परीक्षा के मुख्य विषय हैं। इस विषय से प्रायः 4-6 अंकों के प्रश्न प्रश्नपत्र में आते हैं। RAS परीक्षा की तैयारी करते समय संविधान के भाग V (कार्यपालिका) को विशेष ध्यान देना आवश्यक है, जिसमें प्रधान मंत्री से संबंधित सभी महत्वपूर्ण प्रावधान दिए गए हैं।

मुख्य अवधारणाएं

प्रधान मंत्री की परिभाषा और नियुक्ति

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 में प्रधान मंत्री से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। प्रधान मंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। संविधान में कहा गया है कि प्रधान मंत्री संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य हो सकता है; बिना सदस्यता के भी नियुक्ति संभव है, लेकिन नियुक्ति के छः महीने के भीतर उसे संसद के किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है। सामान्यतः जो दल लोक सभा में बहुमत प्राप्त करता है, उसका नेता प्रधान मंत्री बनता है। यह संवैधानिक रीति-रिवाज है, संविधान में स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है।

प्रधान मंत्री की योग्यताएं

संविधान में प्रधान मंत्री के लिए अलग से कोई आयु-सीमा नहीं दी गई है; उसे संसद के सदस्य के रूप में सामान्य योग्यताएं ही पूरी करनी होती हैं: (1) भारत का नागरिक होना चाहिए, (2) संसद सदस्य के रूप में निर्वाचन योग्य होना चाहिए (लोकसभा सदस्य के लिए न्यूनतम 25 वर्ष, राज्यसभा सदस्य के लिए न्यूनतम 30 वर्ष), (3) संसद के किसी सदन का सदस्य होना चाहिए या सदस्य बन सकने योग्य होना चाहिए, (4) केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कोई लाभ का पद धारण नहीं करना चाहिए, (5) विकृत मन का घोषित व्यक्ति न हो। ये योग्यताएं विभिन्न परीक्षाओं में प्रायः पूछी जाती हैं।

प्रधान मंत्री की शक्तियाँ और कार्य

प्रधान मंत्री केंद्रीय कार्यपालिका का प्रमुख है। उसे व्यापक शक्तियाँ दी गई हैं जिनमें मंत्रिमंडल का गठन करना, महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेना, राष्ट्रपति को परामर्श देना, और सरकार के सभी मामलों का समन्वय करना शामिल है। वह पार्टी के नेता के रूप में भी कार्य करता है। प्रधान मंत्री सरकार के नीतियों का प्रधान प्रवक्ता है और संसद में सरकार की जवाबदेही का प्रमुख व्यक्ति है। मंत्रियों की नियुक्ति, विभागों का आवंटन, और मंत्रियों को हटाने की शक्ति भी प्रधान मंत्री के पास होती है।

प्रधान मंत्री का कार्यकाल और हटाए जाने की प्रक्रिया

प्रधान मंत्री का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता; वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, लेकिन व्यवहार में तब तक पद पर रहता है जब तक उसे लोकसभा का विश्वास प्राप्त है। वह अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी समय त्यागपत्र दे सकता है। प्रधान मंत्री को हटाने के लिए लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होना चाहिए। आमतौर पर जब कोई राजनीतिक दल लोक सभा में बहुमत खो देता है, तो प्रधान मंत्री त्यागपत्र दे देता है। संविधान में प्रधान मंत्री को हटाने की कोई विशेष प्रक्रिया नहीं दी गई है। प्रधान मंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है (अनुच्छेद 75(3))।

प्रधान मंत्री के आवास और सुरक्षा

भारत के प्रधान मंत्री का सरकारी आवास नई दिल्ली में 7, लोक कल्याण मार्ग (पूर्व में रेस कोर्स रोड, नाम 2016 में बदला गया) पर स्थित है। प्रधान मंत्री कार्यालय (PMO) इससे अलग एक संस्था है, जो साउथ ब्लॉक में स्थित है। विशेष सुरक्षा समूह (SPG) प्रधान मंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है। प्रधान मंत्री को राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश के समान राज्य समारोह में सम्मान दिया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

• भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे (1947-1964)

• सबसे लंबे समय तक प्रधान मंत्री रहने वाले व्यक्ति भी पंडित नेहरू हैं (17 वर्ष)

• भारतीय इतिहास में केवल एक महिला प्रधान मंत्री रहीं - इंदिरा गांधी (1966-77, 1980-84)

• प्रधान मंत्री को संविधान के अनुच्छेद 74 और 75 के अंतर्गत शक्तियाँ दी गई हैं

• राष्ट्रपति के सभी कार्यकारी कार्य प्रधान मंत्री की सलाह पर किए जाते हैं

• 91वें संविधान संशोधन (2003) के अनुसार मंत्रिपरिषद की कुल सदस्य संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती (अनुच्छेद 75(1क))

• मंत्रिपरिषद् का प्रमुख प्रधान मंत्री ही होता है

नामकार्यकालदल
जवाहरलाल नेहरू15 अगस्त 1947 – 27 मई 1964भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
गुलज़ारीलाल नंदा (कार्यवाहक)27 मई 1964 – 9 जून 1964कांग्रेस
लाल बहादुर शास्त्री9 जून 1964 – 11 जनवरी 1966कांग्रेस
गुलज़ारीलाल नंदा (कार्यवाहक)11 जनवरी 1966 – 24 जनवरी 1966कांग्रेस
इंदिरा गांधी24 जनवरी 1966 – 24 मार्च 1977कांग्रेस
मोरारजी देसाई24 मार्च 1977 – 28 जुलाई 1979जनता पार्टी
चरण सिंह28 जुलाई 1979 – 14 जनवरी 1980जनता पार्टी (सेक्युलर)
इंदिरा गांधी (द्वितीय बार)14 जनवरी 1980 – 31 अक्टूबर 1984कांग्रेस
राजीव गांधी31 अक्टूबर 1984 – 2 दिसंबर 1989कांग्रेस
वी.पी. सिंह2 दिसंबर 1989 – 10 नवंबर 1990जनता दल
चंद्रशेखर10 नवंबर 1990 – 21 जून 1991समाजवादी जनता पार्टी
पी.वी. नरसिंह राव21 जून 1991 – 16 मई 1996कांग्रेस
अटल बिहारी वाजपेयी16 मई 1996 – 1 जून 1996 (13 दिन)भाजपा
एच.डी. देवेगौड़ा1 जून 1996 – 21 अप्रैल 1997जनता दल
आई.के. गुजराल21 अप्रैल 1997 – 19 मार्च 1998जनता दल
अटल बिहारी वाजपेयी (द्वितीय/तृतीय बार)19 मार्च 1998 – 22 मई 2004भाजपा
मनमोहन सिंह22 मई 2004 – 26 मई 2014कांग्रेस
नरेंद्र मोदी26 मई 2014 – वर्तमानभाजपा

राजस्थान विशेष

राजस्थान से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी RAS परीक्षा के लिए प्रासंगिक है। राजस्थान के राज्यपाल भारत के राष्ट्रपति की ओर से राज्य में कार्यकारी प्राधिकार का प्रयोग करते हैं। राजस्थान का एकीकरण 1948-56 के दौरान सात चरणों में हुआ (वृहत राजस्थान का गठन 30 मार्च 1949 को हुआ)। राजस्थान में वर्तमान में 41 जिले और 7 संभाग हैं (दिसंबर 2024 में 9 जिले व 3 संभाग समाप्त किए जाने के बाद)। केंद्रीय स्तर पर प्रधान मंत्री की शक्तियाँ राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री के पास होती हैं। भारतीय संघ में शक्तियों का विभाजन संविधान के अनुसूचियों में दिया गया है। राजस्थान में शासन की व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुसार की जाती है।

बिंदुराष्ट्रपतिप्रधानमंत्रीमुख्यमंत्री
अनुच्छेद52-6274-75163-164
नियुक्तिअप्रत्यक्ष निर्वाचन (निर्वाचक मंडल)राष्ट्रपति द्वारा (बहुमत दल के नेता को)राज्यपाल द्वारा (विधानसभा बहुमत दल के नेता को)
आयु-सीमान्यूनतम 35 वर्षअलग आयु-सीमा नहींअलग आयु-सीमा नहीं
कार्यकालनिश्चित, 5 वर्षनिश्चित नहीं (लोकसभा विश्वास तक)निश्चित नहीं (विधानसभा विश्वास तक)
उत्तरदायित्वकिसी सदन के प्रति उत्तरदायी नहीं (नाममात्र प्रधान)मंत्रिपरिषद सहित लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायीमंत्रिपरिषद सहित विधानसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायी

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाती है: (1) प्रारंभिक परीक्षा - इसमें 150 प्रश्न, 200 अंक, 3 घंटे की समय अवधि होती है। (2) मुख्य परीक्षा - इसमें 4 प्रश्नपत्र होते हैं (प्रत्येक 200 अंक), कुल 800 अंक। (3) साक्षात्कार - इसमें 100 अंक होते हैं। प्रधान मंत्री से संबंधित प्रश्न प्रारंभिक परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न के रूप में पूछे जाते हैं। मुख्य परीक्षा में भारतीय राजनीति और शासन प्रणाली से संबंधित लंबे उत्तरीय प्रश्न आते हैं। प्रायः "प्रधान मंत्री की शक्तियाँ", "मंत्रिमंडल का गठन", "संवैधानिक स्थिति" जैसे विषय परीक्षा में पूछे जाते हैं।

स्मरण युक्तियां

प्रधान मंत्री से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद रखने के लिए निम्नलिखित तरीकों का उपयोग करें:

• "PM-75" - प्रधान मंत्री के लिए संविधान के अनुच्छेद 75 को याद करें

• "संसद सदस्य" - प्रधान मंत्री संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य हो सकता है; कोई अलग आयु-सीमा नहीं

• "कोई निश्चित कार्यकाल नहीं" - प्रधान मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, व्यवहार में लोकसभा के विश्वास तक

• "मंत्रिपरिषद् का नेता" - मंत्रिपरिषद् (कार्यकारी परिषद्) का नेता प्रधान मंत्री है

• "सबसे पहला और सबसे लंबा कार्यकाल" - भारत के पहले और सबसे लंबे समय (17 वर्ष) तक सेवा करने वाले प्रधान मंत्री नेहरू थे

• "संसदीय प्रणाली का प्रमुख कार्यकारी" - प्रधान मंत्री संसदीय प्रणाली में मुख्य कार्यकारी है

• "बहुमत आवश्यक" - प्रधान मंत्री को लोक सभा में बहुमत की आवश्यकता होती है

अंत में, प्रधान मंत्री की संवैधानिक स्थिति, शक्तियाँ और कार्य को समझना RAS परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। संविधान के मूल प्रावधानों को अच्छी तरह से पढ़ें और विभिन्न प्रधान मंत्रियों के कार्यकाल को भी याद रखें।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
  • •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
  • •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
  • •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
  • •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।
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