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📚 आर्थिक अवधारणाएं एवं भारतीय अर्थव्यवस्था

आधारभूत संरचना — सड़क, रेलवे, बंदरगाह, गतिशक्ति एवं आवास

Infrastructure Development — Roads, Railways, Ports, Gati Shakti and Housing

12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: अगस्त 2026· Economic Concepts and Indian Economy

परिचय

अवसंरचना (Infrastructure) किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है — सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, बिजली, दूरसंचार, आवास व जल-आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाएँ ही उत्पादन, व्यापार और जीवन-स्तर को गति देती हैं। RAS प्रारंभिक परीक्षा के आर्थिक भाग में यह विषय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें हर वर्ष अद्यतन होने वाले आँकड़े (राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क, रेलवे विद्युतीकरण, बंदरगाह क्षमता आदि), प्रमुख योजनाओं के शुभारंभ-वर्ष व उद्देश्य (भारतमाला, सागरमाला, उड़ान, स्मार्ट सिटी मिशन), तथा वित्तपोषण-तंत्र (NIP, NIIF, InvITs) एक साथ पूछे जाते हैं। भारत सरकार ने विगत दशक में अवसंरचना-निवेश को अर्थव्यवस्था के 5 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य से सीधे जोड़ते हुए पूंजीगत व्यय को कई गुना बढ़ाया है — वित्त वर्ष 2022 के ₹5.93 लाख करोड़ के वास्तविक पूंजीगत व्यय की तुलना में वित्त वर्ष 2026 का बजटीय अनुमान ₹11.21 लाख करोड़ है, यानी लगभग 89% की वृद्धि।

मुख्य अवधारणाएँ

1. समग्र अवसंरचना नियोजन — NIP, गति शक्ति एवं NMP

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (National Infrastructure Pipeline - NIP) अगस्त 2019 में वित्त मंत्रालय (आर्थिक कार्य विभाग) द्वारा शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य 2020-25 की अवधि में लगभग ₹111 लाख करोड़ के निवेश से अवसंरचना विकास को गति देना और भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को समर्थन देना है। इसमें केंद्र (~39%), राज्य (~40%) व निजी क्षेत्र (~21%) की सहभागिता है, तथा सड़क (24%), ऊर्जा (8%), शहरी विकास (18%) व रेलवे (16%) जैसे क्षेत्र प्रमुख हिस्सेदार हैं।

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti) 13 अक्टूबर 2021 को भारत सरकार (DPIIT — वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय) द्वारा शुरू किया गया एक GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) आधारित एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो 44 केंद्रीय मंत्रालयों व 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के अवसंरचना डेटा को एक साथ लाता है ताकि सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे व अन्य परियोजनाओं की योजना बहु-माध्यमीय (Multimodal) रूप से बने, जिससे दोहराव कम हो व लॉजिस्टिक्स लागत घटे। अक्टूबर 2024 तक इस प्लेटफॉर्म में 1,614 डेटा लेयर एकीकृत की जा चुकी हैं। इन सामूहिक प्रयासों का परिणाम है कि विश्व बैंक के Logistics Performance Index (LPI) में भारत की रैंकिंग 2018 के 44वें स्थान से सुधरकर 2023 में 38वें स्थान पर पहुँच गई।

राष्ट्रीय परिसंपत्ति मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline - NMP) 23 अगस्त 2021 को नीति आयोग द्वारा शुरू की गई, जिसका उद्देश्य मौजूद सार्वजनिक परिसंपत्तियों (जैसे सड़क, रेलवे स्टेशन, बिजली ट्रांसमिशन लाइनें) का मुद्रीकरण (Asset Recycling — पट्टे/रियायत मॉडल से निजी निवेश आकर्षित करना, स्वामित्व बेचे बिना) कर नई अवसंरचना हेतु संसाधन जुटाना है। चरण-1 (2022-25) का लक्ष्य ₹6 लाख करोड़ था, जिसमें से मार्च 2025 तक ₹3.7 लाख करोड़ का मुद्रीकरण हो चुका है; चरण-2 (2025-30) में ₹10 लाख करोड़ से अधिक मुद्रीकरण का प्रस्ताव है।

2. सड़क एवं राजमार्ग — NHAI एवं भारतमाला परियोजना

भारत के पास 6.62 मिलियन किमी से अधिक का सड़क नेटवर्क है, जो विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India - NHAI) की स्थापना 1988 में राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के अंतर्गत हुई थी और यह सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, रखरखाव व प्रबंधन हेतु उत्तरदायी नोडल एजेंसी है। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क वित्त वर्ष 2014 के 91,287 किमी से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 1,46,572 किमी हो गया है।

भारतमाला परियोजना 2017 में शुरू की गई एक छत्र (Umbrella) कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य आर्थिक गलियारों, अंतर-गलियारों, फीडर मार्गों, राष्ट्रीय गलियारों की दक्षता में सुधार, सीमा व अंतरराष्ट्रीय संपर्क सड़कों, तटीय व बंदरगाह संपर्क सड़कों तथा हरित-क्षेत्र (Greenfield) एक्सप्रेसवे के माध्यम से माल व यात्री आवागमन की दक्षता बढ़ाना है। इसके चरण-1 के अंतर्गत लगभग 34,800 किमी सड़कों के विकास का लक्ष्य रखा गया था। परिचालित उच्च गति गलियारे (High-Speed Corridors) पहले के 550 किमी से बढ़कर अब लगभग 5,364 किमी (लगभग 10 गुना वृद्धि) हो चुके हैं, तथा 2047 तक लगभग 26,000 किमी का लक्ष्य है। ग्रामीण सड़क संपर्क हेतु प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 31 दिसंबर 2025 तक 99.7% से अधिक पात्र बस्तियाँ सड़क संपर्क से जुड़ चुकी हैं, जबकि अति संवेदनशील जनजातीय क्षेत्रों के लिए पीएम-जनमन एवं पीएमजीएसवाई-IV जैसी विशेष उप-योजनाएँ चलाई जा रही हैं।

3. रेलवे — विद्युतीकरण, समर्पित माल गलियारे एवं आर्थिक कॉरिडोर

भारतीय रेलवे एकल प्रबंधन के अंतर्गत विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है, जिसकी लंबाई मार्च 2025 तक 69,439 रूट किमी है, तथा अक्टूबर 2025 तक लगभग 99% नेटवर्क का विद्युतीकरण हो चुका है (78% से अधिक रेलवे ट्रैक को 110 किमी/घंटा या उससे अधिक की सेक्शनल गति के लिए उन्नत किया गया है)। पीएम गतिशक्ति के अंतर्गत तीन प्रमुख प्रकार के आर्थिक रेलवे कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं — ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट कॉरिडोर; बंदरगाह संपर्क (Port Connectivity) कॉरिडोर; तथा उच्च यातायात घनत्व (High Traffic Density) कॉरिडोर।

समर्पित माल गलियारे (Dedicated Freight Corridors - DFC) यात्री व माल यातायात को पृथक कर लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने हेतु विकसित उच्च गति व उच्च क्षमता वाले रेलवे कॉरिडोर हैं। पश्चिमी DFC (1,506 किमी, दादरी–जेएनपीटी मुंबई, वित्तपोषण JICA द्वारा, अक्टूबर 2025 तक पूर्णतः संचालित) कोयला, इस्पात व औद्योगिक वस्तुओं के परिवहन हेतु उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात व महाराष्ट्र को जोड़ता है, जबकि पूर्वी DFC (1,337 किमी, लुधियाना पंजाब–डांकुनी प. बंगाल, वित्तपोषण विश्व बैंक द्वारा, अक्टूबर 2025 तक 1,404 किमी पूर्ण) कोयला व कृषि उत्पादों हेतु पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल को जोड़ता है। यात्री सुविधा सुधार हेतु अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत 1,337 स्टेशन चिन्हित किए गए हैं जिनका आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

4. बंदरगाह एवं नौवहन — सागरमाला परियोजना

सागरमाला परियोजना 2015 में जहाजरानी मंत्रालय (अब पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय) द्वारा शुरू की गई, जिसका उद्देश्य बंदरगाह-आधारित विकास (Port-Led Development) के माध्यम से बंदरगाह आधुनिकीकरण, बंदरगाह संपर्क, बंदरगाह-नज़दीकी औद्योगीकरण एवं तटीय सामुदायिक विकास को बढ़ावा देना है, ताकि लॉजिस्टिक्स लागत घटे व निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े। विगत दशक में बंदरगाह क्षमता में लगभग 87% की वृद्धि हुई है (वित्त वर्ष 2025 में 2,777 मिलियन टन प्रति वर्ष), कार्गो हैंडलिंग में लगभग 52% की वृद्धि हुई है (वित्त वर्ष 2025 में 1,603 मिलियन टन), तथा कंटेनर पोत टर्नअराउंड समय में उल्लेखनीय कमी आई है (अब 30.08 घंटे)। विश्व बैंक के Container Port Performance Index (CPPI, 2024) में 2 भारतीय बंदरगाह विश्व के शीर्ष 30 में तथा 7 भारतीय बंदरगाह शीर्ष 100 में शामिल हैं। अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) की परिचालित लंबाई नवंबर 2025 तक 5,455 किमी है, जिनमें से 23 जलमार्गों पर यात्री सेवाएँ उपलब्ध हैं; 2047 तक 500 मिलियन टन कार्गो लक्ष्य रखा गया है। जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने हेतु सरकार राष्ट्रीय जहाज निर्माण मिशन जैसी पहलों पर कार्य कर रही है।

5. नागरिक उड्डयन — उड़ान योजना एवं ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नीति

भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है — वित्त वर्ष 2025 में हवाई यात्री यातायात लगभग 187.8 मिलियन रहा, जिसके 2031 तक बढ़कर लगभग 665 मिलियन होने का अनुमान है। क्षेत्रीय संपर्क योजना — उड़ान (UDAN - Ude Desh ka Aam Nagrik) 2016 में शुरू की गई, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय व अल्प-सेवित हवाई अड्डों को जोड़कर आम नागरिक के लिए हवाई यात्रा को किफायती व सुलभ बनाना है; अब तक इस योजना के अंतर्गत 93 हवाई अड्डे जुड़ चुके हैं, और संशोधित उड़ान योजना का अगले 10 वर्षों का लक्ष्य 120 नए गंतव्यों को जोड़ना व 4 करोड़ अतिरिक्त यात्रियों को सेवा देना है। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नीति के अंतर्गत निजी विकासकर्ताओं को PPP मोड में राज्य सरकार के सहयोग से नए (ग्रीनफील्ड) हवाई अड्डे विकसित करने की अनुमति दी जाती है, जिससे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) व नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं के माध्यम से देश में हवाई अड्डा अवसंरचना का तीव्र विस्तार हो रहा है।

6. शहरी अवसंरचना — स्मार्ट सिटी मिशन एवं आवास

स्मार्ट सिटी मिशन जून 2015 में शहरी विकास मंत्रालय (अब आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय) द्वारा शुरू किया गया, जिसके अंतर्गत चयन प्रक्रिया द्वारा चुने गए 100 शहरों में क्षेत्र-आधारित विकास (Area-Based Development) व पैन-सिटी पहलों के माध्यम से टिकाऊ व नागरिक-हितैषी शहरी अवसंरचना (जल-आपूर्ति, बिजली, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, IT कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस, स्मार्ट सोल्यूशन) विकसित की जा रही है, जिसे विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle - SPV) मॉडल के ज़रिए क्रियान्वित किया जाता है। शहरी आवास की माँग पूरी करने हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जून 2015 में "2022 तक सबके लिए आवास" लक्ष्य के साथ शुरू की गई — शहरी घटक (PMAY-U) में क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (CLSS), भागीदारी में किफायती आवास (AHP), लाभार्थी-नेतृत्व निर्माण (BLC) व निजी भागीदारी में इन-सीटू पुनर्विकास (ISSR) जैसे चार घटक हैं, जबकि ग्रामीण घटक (PMAY-G) ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकान उपलब्ध कराता है; PMAY-U 2.0 (2024) के अंतर्गत अगले 5 वर्षों में 1 करोड़ अतिरिक्त शहरी घरों के निर्माण का लक्ष्य है।

7. जल अवसंरचना — जल जीवन मिशन एवं अटल भूजल योजना

जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) 15 अगस्त 2019 को जल शक्ति मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य 2024 तक (अब विस्तारित) प्रत्येक ग्रामीण घर को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (Functional Household Tap Connection - FHTC) के माध्यम से पर्याप्त, सुरक्षित व नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है; यह "हर घर जल" के नारे के साथ केंद्र व राज्यों की साझेदारी में क्रियान्वित हो रहा है। इसके साथ ही अटल भूजल योजना भूजल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देती है, तथा नमामि गंगे कार्यक्रम गंगा नदी के संरक्षण, प्रदूषण-नियंत्रण व कायाकल्प हेतु समर्पित मिशन है।

8. अवसंरचना वित्तपोषण — NIIF एवं InvITs

अवसंरचना परियोजनाओं की दीर्घकालिक व पूँजी-गहन प्रकृति के कारण पारंपरिक बैंक-वित्तपोषण अपर्याप्त सिद्ध होता है, इसलिए विशेष वित्तपोषण-तंत्र विकसित किए गए हैं। राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (National Investment and Infrastructure Fund - NIIF) 2015 में भारत सरकार द्वारा स्थापित एक कोष-प्रबंधन मंच है, जो घरेलू व अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेशकों की पूँजी को भारत की वाणिज्यिक रूप से व्यावहारिक अवसंरचना व संबद्ध क्षेत्रों की परियोजनाओं में लगाता है; इसके अंतर्गत मास्टर फंड, फंड ऑफ फंड्स व स्ट्रेटेजिक अपॉर्च्युनिटीज़ फंड जैसे उप-कोष कार्यरत हैं। अवसंरचना निवेश न्यास (Infrastructure Investment Trusts - InvITs) एक म्यूचुअल फंड-सदृश निवेश साधन हैं जो सड़क, बिजली ट्रांसमिशन लाइन जैसी आय-अर्जक अवसंरचना परिसंपत्तियों में निवेशकों (संस्थागत व खुदरा दोनों) से पूँजी जुटाकर निवेश करते हैं और नियमित आय (लाभांश जैसी) वितरित करते हैं — इससे डेवलपर्स अपनी पूँजी को परिचालित परिसंपत्तियों से मुक्त कर नई परियोजनाओं में लगा पाते हैं। इसी तरह रियल एस्टेट निवेश न्यास (REITs) रियल एस्टेट परिसंपत्तियों के लिए समान तंत्र प्रदान करते हैं। NMP के अंतर्गत परिसंपत्ति-मुद्रीकरण भी InvIT जैसे साधनों का ही व्यापक उपयोग करता है।

9. दूरसंचार व डिजिटल अवसंरचना

भौतिक अवसंरचना के साथ-साथ डिजिटल अवसंरचना भी आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। भारत में कुल टेलीफोन कनेक्शन 1,123.38 मिलियन (शहरी 689.6 मिलियन, ग्रामीण 477 मिलियन) हैं, तथा टेली-घनत्व (2025) 86.76% है। देश के 99.9% जिलों में 5G सेवाएँ उपलब्ध हो चुकी हैं। ग्रामीण ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी हेतु भारतनेट परियोजना के अंतर्गत अब तक 2.5 लाख ग्राम पंचायतें जोड़ी जा चुकी हैं। दूरसंचार उपकरण विनिर्माण को बढ़ावा देने व आयात-निर्भरता घटाने हेतु 2021 में ₹12,195 करोड़ की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना शुरू की गई।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • NIP शुभारंभ अगस्त 2019, नोडल निकाय वित्त मंत्रालय (आर्थिक कार्य विभाग), लक्ष्य ₹111 लाख करोड़ (2020-25)।
  • पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान — 13 अक्टूबर 2021, नोडल निकाय DPIIT; 44 केंद्रीय मंत्रालय व 36 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश एकीकृत; अक्टूबर 2024 तक 1,614 डेटा लेयर।
  • NMP — 23 अगस्त 2021, नीति आयोग द्वारा; चरण-1 लक्ष्य ₹6 लाख करोड़ (2022-25), मार्च 2025 तक ₹3.7 लाख करोड़ मुद्रीकृत।
  • NHAI स्थापना 1988, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के अंतर्गत; राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क FY14 के 91,287 किमी से दिसंबर 2025 तक 1,46,572 किमी।
  • भारतमाला परियोजना — 2017 में शुरू; चरण-1 में ~34,800 किमी सड़क विकास लक्ष्य; उच्च गति गलियारे 550 किमी से बढ़कर ~5,364 किमी (2047 तक ~26,000 किमी लक्ष्य)।
  • पश्चिमी DFC 1,506 किमी (JICA वित्तपोषित, दादरी-जेएनपीटी); पूर्वी DFC 1,337 किमी (विश्व बैंक वित्तपोषित, लुधियाना-डांकुनी)।
  • सागरमाला परियोजना — 2015, जहाजरानी मंत्रालय; बंदरगाह क्षमता वृद्धि ~87% (FY25: 2,777 MT प्रति वर्ष), CPPI 2024 में 2 बंदरगाह शीर्ष 30 में।
  • उड़ान योजना — 2016 शुरू; अब तक 93 हवाई अड्डे जुड़े; संशोधित लक्ष्य अगले 10 वर्षों में 120 नए गंतव्य।
  • स्मार्ट सिटी मिशन — जून 2015, 100 शहर चयनित, SPV मॉडल से क्रियान्वयन।
  • जल जीवन मिशन — 15 अगस्त 2019, जल शक्ति मंत्रालय, "हर घर जल", लक्ष्य हर ग्रामीण घर को FHTC।
  • PMAY — जून 2015 शुरू; PMAY-U 2.0 (2024) का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 1 करोड़ अतिरिक्त शहरी घर।
  • NIIF स्थापना 2015 (भारत सरकार द्वारा); InvITs व REITs अवसंरचना/रियल्टी परिसंपत्तियों से नियमित आय वितरित करने वाले निवेश साधन हैं।

परीक्षा टिप्स

  • हर योजना का शुभारंभ-वर्ष, नोडल मंत्रालय/निकाय व मुख्य लक्ष्य-आँकड़ा एक तालिका बनाकर याद करें — NIP, गतिशक्ति व NMP को तीनों की तारीख व नोडल निकाय अलग-अलग होने के कारण अक्सर मिलाया जाता है।
  • भारतमाला (सड़क) बनाम सागरमाला (बंदरगाह) — नाम मिलते-जुलते हैं लेकिन क्षेत्र अलग हैं; यह भेद परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
  • पश्चिमी DFC (JICA, दादरी-जेएनपीटी) बनाम पूर्वी DFC (विश्व बैंक, लुधियाना-डांकुनी) — वित्तपोषण एजेंसी व मार्ग दोनों याद रखें।
  • InvITs व REITs का अंतर याद रखें — दोनों निवेश-न्यास हैं, पर InvITs अवसंरचना परिसंपत्तियों के लिए तथा REITs रियल एस्टेट परिसंपत्तियों के लिए हैं।
🧠 स्मरण ट्रिक — योजनाओं का "माला" व अन्य नाम

"भा-सा-उ-स्मा-ज": भारतमाला (सड़क), सागरमाला (बंदरगाह), ड़ान (हवाई अड्डा), स्मार्ट सिटी (शहर), ल जीवन मिशन (जल) — पाँचों "माला" जैसी कड़ी में एक-एक क्षेत्र को जोड़ती हैं: सड़क → बंदरगाह → हवाई → शहर → जल।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — NIP बनाम NMP बनाम पीएम गतिशक्ति

तीनों नाम एक जैसे लगते हैं इसलिए भ्रम होता है। NIP (राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन) नई अवसंरचना बनाने की ₹111 लाख करोड़ की निवेश-योजना है (वित्त मंत्रालय, 2019)। NMP (राष्ट्रीय परिसंपत्ति मुद्रीकरण पाइपलाइन) मौजूदा सार्वजनिक परिसंपत्तियों को पट्टे पर देकर पैसा जुटाने की योजना है (नीति आयोग, 2021) — कोई नई परिसंपत्ति नहीं बनाता, केवल मौजूदा का मुद्रीकरण करता है। पीएम गतिशक्ति कोई वित्तपोषण-योजना नहीं बल्कि एक डिजिटल नियोजन-प्लेटफॉर्म है (DPIIT, 2021) जो विभिन्न मंत्रालयों की परियोजनाओं को एक मानचित्र पर लाकर समन्वय व दक्षता बढ़ाता है।

📝 अभ्यास प्रश्न
Q1. पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान किस मंत्रालय/विभाग की नोडल एजेंसी के अंतर्गत तथा कब शुरू किया गया?

✅ DPIIT (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय) के अंतर्गत, 13 अक्टूबर 2021 को शुरू किया गया।

Q2. सागरमाला परियोजना किस क्षेत्र से संबंधित है और इसे किस वर्ष शुरू किया गया?

✅ बंदरगाह-आधारित विकास (Port-Led Development) से संबंधित; 2015 में जहाजरानी मंत्रालय द्वारा शुरू।

Q3. पश्चिमी व पूर्वी समर्पित माल गलियारों (DFC) को क्रमशः किस एजेंसी ने वित्तपोषित किया?

✅ पश्चिमी DFC को JICA (जापान) ने; पूर्वी DFC को विश्व बैंक ने वित्तपोषित किया।

Q4. उड़ान योजना का पूरा नाम व मुख्य उद्देश्य क्या है?

✅ "उड़े देश का आम नागरिक"; क्षेत्रीय व अल्प-सेवित हवाई अड्डों को जोड़कर आम नागरिक के लिए हवाई यात्रा किफायती बनाना (2016 में शुरू)।

Q5. InvITs (अवसंरचना निवेश न्यास) क्या हैं और ये अवसंरचना वित्तपोषण में किस प्रकार सहायक हैं?

✅ ये म्यूचुअल फंड-सदृश निवेश साधन हैं जो आय-अर्जक अवसंरचना परिसंपत्तियों (सड़क, ट्रांसमिशन लाइन आदि) में पूँजी जुटाकर निवेशकों को नियमित आय वितरित करते हैं, जिससे डेवलपर्स पूँजी मुक्त कर नई परियोजनाओं में लगा पाते हैं।

सारांश

भारत की अवसंरचना-नीति पिछले दशक में खंडित योजनाओं से आगे बढ़कर एकीकृत नियोजन (पीएम गतिशक्ति), बड़े पैमाने के निवेश-लक्ष्य (NIP) व नवोन्मेषी वित्तपोषण (NMP, NIIF, InvITs) की ओर अग्रसर हुई है। सड़क क्षेत्र में NHAI व भारतमाला, रेलवे में विद्युतीकरण व DFC, बंदरगाहों में सागरमाला, विमानन में उड़ान, शहरी क्षेत्र में स्मार्ट सिटी व PMAY, तथा जल क्षेत्र में जल जीवन मिशन — ये सभी क्षेत्रवार पहलें मिलकर लॉजिस्टिक्स लागत घटाने, निर्यात-प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने व जीवन-स्तर सुधारने का काम कर रही हैं, जिसका प्रमाण विश्व बैंक के LPI में भारत की सुधरती रैंकिंग है। RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए हर योजना का शुभारंभ-वर्ष, नोडल मंत्रालय/निकाय, मुख्य लक्ष्य-आँकड़ा तथा हाल के अद्यतन आँकड़े (राजमार्ग नेटवर्क, रेलवे विद्युतीकरण, बंदरगाह क्षमता आदि) सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • GDP = C + I + G + (X−M); यह एक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
  • भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में 'हैरोड-डोमर' मॉडल पर आधारित थी।
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण; मुख्यालय मुंबई।
  • भारत में GST 1 जुलाई 2017 से लागू; 101वें संशोधन (2016)।
  • GDP = देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं/सेवाओं का बाजार मूल्य।
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