केस 9.4: यात्रा-भत्ते का बिल
- काल्पनिक केस
- कठिनाई
- सरल
- पाठ्यक्रम बिंदु
- 3: सत्यनिष्ठा
- परखे जाने वाले मूल्य और कानून
- सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, साथियों का दबाव, छोटी चीज़ों में नैतिकता; आचरण नियम 3(1); नोलन की "ईमानदारी"
उदाहरण (काल्पनिक)यात्रा-भत्ते का बिल
राजस्थान के एक जिले में रितु नई-नई अधिकारी बनी हैं। निरीक्षण के लिए वे 60 किलोमीटर दूर बस से गईं और असली किराया 340 रुपये लगा। लेखा-लिपिक कहता है, "मैडम, सब लोग टैक्सी का बिल लगाते हैं, 1,200 का बनाकर दे देता हूँ। वैसे भी वेतन में गुज़ारा कहाँ होता है। यह हमारा अलिखित भत्ता है।" वरिष्ठ सहकर्मी हँसकर कहते हैं, "ज़्यादा सीधा बनोगी तो अलग-थलग पड़ जाओगी। जो साथ नहीं चलता, उसे कोई निरीक्षण में नहीं बुलाता।" रितु जानती हैं कि बिल पास हो जाएगा और कोई पूछेगा भी नहीं। राशि छोटी है, पर वे इसे लेकर बेचैन हैं। लिपिक ने फ़ॉर्म पहले ही भर दिया है और केवल रितु के हस्ताक्षर बाकी हैं। उन्हें अपने पिता की सीख याद आती है, जो शिक्षक थे: छोटी बेईमानी से ही बड़ी बेईमानी शुरू होती है।
- हितधारक
- रितु, लेखा-लिपिक, वरिष्ठ सहकर्मी, सरकारी कोष (यानी करदाता), कार्यालय की साख, भविष्य के नए अधिकारी।
- मुद्दा
- सत्यनिष्ठा बनाम साथियों के साथ चलने का दबाव और "कम वेतन" का तर्क।
- विकल्प
- क. बढ़ा हुआ बिल लगाना (दबाव से बचाव; पर झूठ, आदत की शुरुआत)। ख. सही बिल लगाना और चुप रहना (अपनी सत्यनिष्ठा बची; पर कार्यालय की आदत जस की तस)। ग. सही बिल लगाना, लिपिक को विनम्रता से लिखित में सही दर बताना, और वरिष्ठ को नियमों की स्पष्ट व्यवस्था माँगने का सुझाव देना।
- सर्वश्रेष्ठ
- ग। आचरण नियम 3(1): पूर्ण सत्यनिष्ठा; नोलन की "ईमानदारी" (सच बोलना और सच लिखना); गांधी: साधन की शुद्धता।
सीख
कार्रवाई: अल्प: सही बिल, अपने आचरण से उदाहरण। दीर्घ: मार्ग और किराये की सार्वजनिक सूची, वास्तविक बिल की रसीद अनिवार्य, कम वेतन की चिंता के लिए वैध भत्ते की माँग ऊपर रखना।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
(10 अंक, 100 शब्द) रितु को क्या करना चाहिए? पाँच चरणों से हल कीजिए।
आदर्श उत्तर
हितधारक हैं मैं, लेखा-लिपिक, सहकर्मी, सरकारी कोष और कार्यालय की साख। मुद्दा सत्यनिष्ठा बनाम साथियों के दबाव और कम वेतन के तर्क का है। विकल्प: बढ़ा बिल लगाना, सही बिल लगाकर चुप रहना, या सही बिल के साथ विनम्र लिखित सुझाव देना। पहला झूठ है; दूसरा कार्यालय की आदत नहीं बदलता। मैं तीसरा चुनूँगी, क्योंकि आचरण नियम 3(1) सदैव पूर्ण सत्यनिष्ठा माँगता है और नोलन की "ईमानदारी" भी सच लिखने को कहती है। तत्काल सही बिल लगाऊँगी और लिपिक को सही दर लिखित में बताऊँगी। दीर्घकाल में किराये की सार्वजनिक सूची, रसीद की अनिवार्यता और वैध भत्ते की माँग ऊपर रखवाऊँगी।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) "छोटी बेईमानी" को सत्यनिष्ठा की दृष्टि से कैसे देखें?
आदर्श उत्तर
छोटी बेईमानी बड़ी की आदत बनाती है; सत्यनिष्ठा मूल्य-वाणी-कर्म का मेल है, जिसमें "राशि" नहीं गिनी जाती।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
(5 अंक, 50 शब्द) दफ़्तर में ऐसी आदत बदलने के लिए एक वरिष्ठ क्या कर सकता है?
आदर्श उत्तर
स्वयं उदाहरण बनना, स्पष्ट नियम और सूची, पारदर्शी भुगतान, वैध माँगों के लिए खुला मंच।