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पेपर III · इकाई III · भाग ख (विधि)

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007, धारा 1 से 8: परिभाषाएँ, दावा, आवेदन और अधिकरण

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 की धारा 1 से 8: नाम और विस्तार, धारा 2 की सभी परिभाषाएँ (बच्चे, नातेदार, माता-पिता, वरिष्ठ नागरिक आदि), भरण-पोषण का दावा, आवेदन, क्षेत्राधिकार और अधिकरण; 2023 और 2021 के दोनों पिछले प्रश्न हल सहित।

  • वरिष्ठ नागरिक
  • बच्चे
  • नातेदार
  • भरण-पोषण अधिकरण
  • धारा 2
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007: Sections 1-25." इस पृष्ठ पर धारा 1 से 8 हैं: संक्षिप्त नाम और विस्तार (धारा 1), परिभाषाएँ (धारा 2), अधिनियम का अधिभावी प्रभाव (धारा 3), भरण-पोषण का दावा (धारा 4), आवेदन (धारा 5), क्षेत्राधिकार और प्रक्रिया (धारा 6), भरण-पोषण अधिकरण (धारा 7) और संक्षिप्त प्रक्रिया (धारा 8)। धारा 9 से 25 अगले पृष्ठ पर हैं। अधिनियम-पाठ का मूल संदर्भ दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) का है; उसकी जगह अब BNSS 2023 है, इसलिए उन संदर्भों के वर्तमान क्रमांक के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है; वास्तविक मामले में अधिकृत विधिक सहायता लें।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • इस अधिनियम से दो प्रश्न पूछे गए हैं और दोनों इसी पृष्ठ की धारा 2 की परिभाषाओं पर हैं: 2023 में 'Children' और 2021 में 'Relative' (दोनों 2 अंक, लगभग 15 शब्द, पेपर III)। दोनों का हल इसी पृष्ठ के अंत में है।
  • धारा 2 में ग्यारह परिभाषाएँ हैं (children, maintenance, minor, parent, prescribed, property, relative, senior citizen, State Government, Tribunal, welfare)। बीते पेपरों में विधि के अधिकांश प्रश्न परिभाषा या धारा के पाठ पर आए, इसलिए बाक़ी परिभाषाएँ भी उसी ढर्रे पर पूछी जा सकती हैं (2013 से 2024 के पेपरों में देखा गया रुझान, परीक्षा का नियम नहीं)।
  • 'children' और 'relative' आपस में जुड़े हैं: माता-पिता और दादा-दादी अपने 'children' से भरण-पोषण माँगते हैं, और निःसंतान वरिष्ठ नागरिक अपने 'relative' से। इनके साथ धारा 4 से 8 की प्रक्रिया पढ़ने से 5 अंक के प्रश्न का ढाँचा भी तैयार हो जाता है।

पहले सरल भाषा में

बच्चे को पालना माता-पिता का काम है, पर बुढ़ापे में माता-पिता को सँभालना बच्चों का काम माना जाता है। जब कोई बेटा या बेटी इस ज़िम्मेदारी से मुँह मोड़ ले, तो बुज़ुर्ग के पास पहले एक ही रास्ता था: अदालत का लंबा मुक़दमा। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007; 2007 का अधिनियम 56) इसी स्थिति के लिए एक आसान और तेज़ रास्ता देता है: उपखंड स्तर का भरण-पोषण अधिकरण (Maintenance Tribunal), जहाँ वकील के बिना और संक्षिप्त प्रक्रिया से मामला निपटता है। यही अधिनियम सरकार को वृद्धाश्रम और चिकित्सा-सुविधाओं जैसे कल्याण के उपाय करने का दायित्व भी सौंपता है।

इस पृष्ठ का क्रम सीधा है। पहले धारा 1 और 2: अधिनियम का नाम, विस्तार और शब्दों के अर्थ। फिर धारा 3: यह अधिनियम किसी और कानून से टकराए तो इसी की चलेगी। फिर धारा 4 से 8: कौन किससे भरण-पोषण माँग सकता है, आवेदन कौन दे सकता है, मामला किस ज़िले में चलेगा, अधिकरण कैसे बनता है और उसकी कार्यवाही कैसी होती है। परिभाषाओं में वही शब्द दोहराए जाते हैं जो आगे की धाराओं में आते हैं, इसलिए उनका सटीक अर्थ पहले पक्का करना ज़रूरी है।

धारा 1 और 3: नाम, विस्तार, प्रारंभ और अधिभावी प्रभाव

धारापाठ का आशयअंग्रेज़ी का मुख्य शब्द
1(1)अधिनियम को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 कहा जाएगा।Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007
1(2)अधिनियम-पाठ के अनुसार यह जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे भारत में लागू है और भारत के बाहर रहने वाले भारतीय नागरिकों पर भी लागू होता है। (वर्तमान प्रादेशिक विस्तार के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ।)extends to the whole of India except the State of Jammu and Kashmir; applies also to citizens of India outside India
1(3)अधिनियम किसी राज्य में उस तिथि से लागू होगा जो राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना से तय करे; यानी हर राज्य में प्रारंभ की तिथि अलग हो सकती है।come into force in a State on such date as the State Government may, by notification in the Official Gazette, appoint
3इस अधिनियम के उपबंध किसी अन्य अधिनियम या उसके बल से प्रभावी किसी लिखत के असंगत उपबंध के होते हुए भी प्रभावी रहेंगे: अधिभावी प्रभाव।shall have effect notwithstanding anything inconsistent therewith contained in any enactment other than this Act

धारा 2: परिभाषाएँ (Definitions)

खंडशब्दवैधानिक पाठ (अंग्रेज़ी)हिंदी आशय
2(a)बच्चे (children)"children" includes son, daughter, grandson and grand-daughter but does not include a minorपुत्र, पुत्री, पौत्र और पौत्री शामिल हैं; अवयस्क (minor) शामिल नहीं।
2(b)भरण-पोषण (maintenance)"maintenance" includes provisions for food, clothing, residence and medical attendance and treatmentभोजन, वस्त्र, निवास और चिकित्सीय देखभाल एवं उपचार का प्रबंध शामिल है।
2(c)अवयस्क (minor)"minor" means a person who, under the provisions of the Indian Majority Act, 1875 (9 of 1875) is deemed not to have attained the age of majorityजो व्यक्ति भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 के उपबंधों के अनुसार वयस्कता की आयु प्राप्त नहीं माना जाता।
2(d)माता-पिता (parent)"parent" means father or mother whether biological, adoptive or step father or step mother, as the case may be, whether or not the father or the mother is a senior citizenपिता या माता, चाहे जैविक, दत्तक या सौतेले हों, चाहे वे वरिष्ठ नागरिक हों या नहीं।
2(e)विहित (prescribed)"prescribed" means prescribed by rules made by the State Government under this Actइस अधिनियम के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा बनाए नियमों से विहित।
2(f)संपत्ति (property)"property" means property of any kind, whether movable or immovable, ancestral or self acquired, tangible or intangible and includes rights or interests in such propertyकिसी भी प्रकार की संपत्ति: चल या अचल, पैतृक या स्वअर्जित, मूर्त या अमूर्त, और ऐसी संपत्ति में अधिकार या हित भी।
2(g)नातेदार (relative)"relative" means any legal heir of the childless senior citizen who is not a minor and is in possession of or would inherit his property after his deathनिःसंतान वरिष्ठ नागरिक का कोई भी वैध उत्तराधिकारी जो अवयस्क न हो और जो उसकी संपत्ति के कब्ज़े में हो या उसकी मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति पाएगा।
2(h)वरिष्ठ नागरिक (senior citizen)"senior citizen" means any person being a citizen of India, who has attained the age of sixty years or aboveभारत का नागरिक जो साठ वर्ष या उससे अधिक की आयु का हो चुका है।
2(i)राज्य सरकार (State Government)"State Government", relation to a Union territory, means the administrator thereof appointed under article 239 of the Constitutionसंघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, संविधान के अनुच्छेद 239 के अंतर्गत नियुक्त उसका प्रशासक।
2(j)अधिकरण (Tribunal)"Tribunal" means the Maintenance Tribunal constituted under section 7धारा 7 के अंतर्गत गठित भरण-पोषण अधिकरण।
2(k)कल्याण (welfare)"welfare" means provision for food, health care, recreation centres and other amenities necessary for the senior citizensवरिष्ठ नागरिकों के लिए आवश्यक भोजन, स्वास्थ्य-सेवा, मनोरंजन केंद्र और अन्य सुविधाओं का प्रबंध।

धारा 2 का पाठ अधिनियम की धारा 2(a) से 2(k) के क्रम में है।

चार शब्द जो प्रश्न बनते हैं: बच्चे, नातेदार, माता-पिता, वरिष्ठ नागरिक

बच्चे (children), धारा 2(a)। यहाँ 'children' का अर्थ घर के छोटे बच्चे नहीं है। इसमें पुत्र, पुत्री, पौत्र और पौत्री आते हैं, यानी अगली दो पीढ़ियाँ, और इसमें अवयस्क शामिल नहीं हैं। 'अवयस्क' की परिभाषा धारा 2(c) से, भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 के अनुसार तय होती है। अवयस्क को बाहर रखने का तर्क स्पष्ट है: जो स्वयं वयस्क नहीं हुआ, उससे भरण-पोषण की अपेक्षा नहीं की जाती। इसीलिए दावा 'children not being a minor' के विरुद्ध ही चलता है (धारा 4(1)(i))।

नातेदार (relative), धारा 2(g)। यह शब्द केवल निःसंतान वरिष्ठ नागरिक के लिए है। तीन शर्तें साथ लगती हैं: व्यक्ति वरिष्ठ नागरिक का वैध उत्तराधिकारी (legal heir) हो, अवयस्क न हो, और या तो उसकी संपत्ति के कब्ज़े में हो या उसकी मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति पाने वाला हो। इसका तर्क सीधा है: जिसे बुज़ुर्ग की संपत्ति मिलनी है, उसी पर उसे सँभालने का दायित्व आता है (धारा 4(4))। यदि एक से अधिक नातेदार संपत्ति के हक़दार हों, तो भरण-पोषण उसी अनुपात में देना होगा जिस अनुपात में वे संपत्ति पाते हैं (धारा 4(4) का परंतुक)।

माता-पिता (parent), धारा 2(d)। पिता या माता, चाहे जैविक, दत्तक या सौतेले हों; और 'whether or not the father or the mother is a senior citizen', यानी माता-पिता का वरिष्ठ नागरिक होना ज़रूरी नहीं। इस कारण पचास वर्ष की माँ भी इस अधिनियम में 'parent' के रूप में अपने बच्चों से भरण-पोषण का दावा कर सकती है (धारा 4(1)), जबकि 'वरिष्ठ नागरिक' के रूप में दावा करने के लिए साठ वर्ष की आयु चाहिए।

वरिष्ठ नागरिक (senior citizen), धारा 2(h)। इसकी दो कसौटियाँ हैं: भारत का नागरिक होना, और साठ वर्ष या उससे अधिक की आयु पूरी कर चुका होना। 'attained the age of sixty years or above' के कारण ठीक साठवें वर्ष की पूर्ति पर व्यक्ति वरिष्ठ नागरिक बन जाता है।

तुलना: बच्चे (children) और नातेदार (relative)

बच्चे (धारा 2(a))

किसके विरुद्ध दावामाता-पिता या दादा-दादी का दावा बच्चों के विरुद्ध (धारा 4(1)(i))

कौन आते हैंपुत्र, पुत्री, पौत्र, पौत्री

अवयस्कशामिल नहीं

संपत्ति की शर्तनहीं

एक से अधिक हों तोबच्चों में से एक या अधिक के विरुद्ध आवेदन (धारा 5(5))

नातेदार (धारा 2(g))

किसके विरुद्ध दावानिःसंतान वरिष्ठ नागरिक का दावा नातेदार के विरुद्ध (धारा 4(1)(ii))

कौन आते हैंनिःसंतान वरिष्ठ नागरिक का कोई भी वैध उत्तराधिकारी

अवयस्कशामिल नहीं (अवयस्क नहीं होना शर्त)

संपत्ति की शर्तहाँ: संपत्ति के कब्ज़े में हो, या मृत्यु के बाद संपत्ति पाए

एक से अधिक हों तोसंपत्ति में हिस्से के अनुपात में भरण-पोषण (धारा 4(4) का परंतुक)

धारा 4: भरण-पोषण का दावा (maintenance of parents and senior citizens)

उप-धारापाठ का आशय
4(1)जो वरिष्ठ नागरिक (माता-पिता सहित) अपनी कमाई या अपनी संपत्ति से अपना भरण-पोषण नहीं कर सकता, वह धारा 5 के अंतर्गत आवेदन का अधिकारी है: (i) माता-पिता या दादा-दादी के रूप में, अपने एक या अधिक बच्चों (जो अवयस्क न हों) के विरुद्ध; (ii) निःसंतान वरिष्ठ नागरिक के रूप में, धारा 2(g) के अपने नातेदार के विरुद्ध।
4(2)बच्चों या नातेदार का दायित्व वरिष्ठ नागरिक की उन ज़रूरतों तक जाता है जिनसे वह सामान्य जीवन जी सके (lead a normal life)।
4(3)बच्चों का दायित्व माता या पिता, या दोनों की उन ज़रूरतों तक जाता है जिनसे वे सामान्य जीवन जी सकें।
4(4)वरिष्ठ नागरिक का वह नातेदार जिसके पास पर्याप्त साधन हों, उसका भरण-पोषण करेगा, बशर्ते वह उसकी संपत्ति के कब्ज़े में हो या उसकी संपत्ति पाने वाला हो। परंतुक: एक से अधिक नातेदार हक़दार हों तो वे संपत्ति के अनुपात में भरण-पोषण देंगे।

धारा 5: भरण-पोषण के लिए आवेदन (application for maintenance)

उप-धारापाठ का आशयमुख्य शब्द
5(1)आवेदन वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता स्वयं दे सकते हैं; या वे अक्षम हों तो उनके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य व्यक्ति या संगठन; या अधिकरण स्वयं संज्ञान ले सकता है। स्पष्टीकरण: 'संगठन' का अर्थ सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 या किसी अन्य लागू कानून में पंजीकृत कोई स्वैच्छिक संघ।by a senior citizen or a parent; if he is incapable, by any other person or organisation authorised by him; the Tribunal may take cognizance suo motu
5(2)कार्यवाही लंबित रहते अधिकरण बच्चों या नातेदार को अंतरिम भरण-पोषण के लिए मासिक भत्ता देने का आदेश दे सकता है।interim maintenance
5(3)आवेदन मिलने पर, बच्चों या नातेदार को सूचना देकर और पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर अधिकरण जाँच कर भरण-पोषण की राशि तय करता है।after giving notice ... hold an inquiry
5(4)उप-धारा (2) के अंतर्गत भत्ते और कार्यवाही के खर्च का आवेदन नोटिस की तामील की तिथि से नब्बे दिन के भीतर निपटाया जाएगा; अधिकरण लिखित कारण देकर अपवादात्मक परिस्थितियों में एक बार अधिकतम तीस दिन बढ़ा सकता है।ninety days; extend once for a maximum period of thirty days
5(5)आवेदन एक या अधिक व्यक्तियों के विरुद्ध हो सकता है; बच्चे या नातेदार भरण-पोषण के लिए उत्तरदायी किसी अन्य व्यक्ति को पक्ष बना सकते हैं।may implead the other person liable to maintain parent
5(6)भरण-पोषण का आदेश एक से अधिक व्यक्तियों के विरुद्ध हो तो उनमें से एक की मृत्यु से बाक़ी का दायित्व समाप्त नहीं होता।death of one of them does not affect the liability of others
5(7)भत्ता आदेश की तिथि से, या यदि ऐसा आदेश दिया जाए तो आवेदन की तिथि से, देय होगा।payable from the date of the order, or, if so ordered, from the date of the application
5(8)आदेश का पालन न करने पर अधिकरण हर चूक के लिए जुर्माने की वसूली की रीति से राशि वसूलने का वारंट जारी कर सकता है और वारंट के बाद भी बची मासिक राशि के लिए एक माह तक या भुगतान तक (जो पहले हो) कारावास दे सकता है। परंतुक: वसूली का वारंट तभी, जब राशि देय होने की तिथि से तीन माह के भीतर अधिकरण से आवेदन हो।imprisonment for a term which may extend to one month or until payment if sooner made whichever is earlier; within a period of three months

धारा 6, 7 और 8: क्षेत्राधिकार, अधिकरण का गठन और संक्षिप्त प्रक्रिया

धारापाठ का आशयमुख्य शब्द
6(1)बच्चों या नातेदार के विरुद्ध कार्यवाही किसी भी ज़िले में हो सकती है जहाँ वह रहता है या अंतिम बार रहता था, या जहाँ बच्चे या नातेदार रहते हैं।where he resides or last resided; where children or relative resides
6(2), (3)अधिकरण बच्चों या नातेदार की उपस्थिति के लिए प्रक्रिया जारी करेगा; उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उसे दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अंतर्गत प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ होंगी।the power of a Judicial Magistrate of first class
6(4)सारा साक्ष्य उन बच्चों या नातेदार की उपस्थिति में लिया जाएगा जिनके विरुद्ध भुगतान का आदेश प्रस्तावित है और समन वाले मामलों की रीति से लिखा जाएगा। परंतुक: यदि वे जानबूझकर तामील से बच रहे हों या उपस्थित होने की उपेक्षा कर रहे हों तो अधिकरण एकपक्षीय सुनवाई और निर्णय कर सकता है।recorded in the manner prescribed for summons cases; ex parte
6(5)बच्चे या नातेदार भारत के बाहर रहते हों तो समन केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र अधिसूचना में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी के माध्यम से तामील होगा।residing out of India
6(6)सुनवाई से पहले अधिकरण आवेदन को सुलह अधिकारी (Conciliation Officer) को भेज सकता है, जो एक माह में निष्कर्ष देगा; आपसी समझौता हो जाए तो अधिकरण उसी के अनुसार आदेश देगा। सुलह अधिकारी में धारा 5(1) के स्पष्टीकरण का संगठन या उसका प्रतिनिधि, धारा 18(1) के अंतर्गत नामित भरण-पोषण अधिकारी या अधिकरण द्वारा नामित कोई अन्य व्यक्ति आ सकता है।refer the same to a Conciliation Officer ... within one month
7(1), (2)राज्य सरकार अधिनियम के प्रारंभ से छह माह के भीतर, राजपत्र अधिसूचना द्वारा, प्रत्येक उप-खंड (sub-division) के लिए एक या अधिक अधिकरण गठित करेगी। अधिकरण की अध्यक्षता राज्य के उपखंड अधिकारी (SDO) से निम्न पद का अधिकारी नहीं करेगा।for each Sub-division one or more Tribunals; presided over by an officer not below the rank of Sub-Divisional Officer
7(3)एक क्षेत्र के लिए दो या अधिक अधिकरण हों तो राज्य सरकार सामान्य या विशेष आदेश से कार्य का वितरण नियंत्रित कर सकती है।regulate the distribution of business
8(1)धारा 5 के अंतर्गत जाँच में अधिकरण राज्य के नियमों के अधीन ऐसी संक्षिप्त प्रक्रिया अपना सकता है जिसे वह उचित समझे।summary procedure as it deems fit
8(2)साक्ष्य शपथ पर लेने, गवाहों की उपस्थिति कराने और दस्तावेज़ और वस्तुएँ पेश कराने जैसे प्रयोजनों के लिए अधिकरण को दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियाँ हैं; और वह धारा 195 तथा दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अध्याय XXVI के प्रयोजन के लिए दीवानी न्यायालय माना जाएगा।all the powers of a Civil Court
8(3)भरण-पोषण के दावे के निर्णय के लिए अधिकरण जाँच में सहायता हेतु विशेष ज्ञान रखने वाले एक या अधिक व्यक्तियों को चुन सकता है।persons possessing special knowledge

प्रक्रिया की सबसे ज़रूरी बातें

अधिकरण को उपस्थिति सुनिश्चित करने की शक्ति प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट जैसी (धारा 6(3)) और साक्ष्य लेने की शक्ति दीवानी न्यायालय जैसी (धारा 8(2)) मिली है, फिर भी उसकी प्रक्रिया 'summary' है। यानी अधिनियम ने तेज़ी और सरलता का रास्ता चुना है: आम मुक़दमे की औपचारिकताएँ नहीं, पर निष्पक्ष सुनवाई का अवसर (धारा 5(3)) और सुलह की गुंजाइश (धारा 6(6)) बनी रहती हैं।

अंतरिम भरण-पोषण (धारा 5(2)) का तर्क यह है कि अंतिम निर्णय तक बुज़ुर्ग बिना सहारे न रहे; इसीलिए उस आवेदन के निपटारे की समय-सीमा नब्बे दिन है और एक बार तीस दिन बढ़ाई जा सकती है। आदेश के पालन में चूक होने पर वसूली का वारंट और एक माह तक कारावास तक की व्यवस्था है, पर इसके लिए तीन माह के भीतर आवेदन की शर्त (परंतुक) है।

क्षेत्राधिकार के दो आधार हैं (धारा 6(1)): ज़िला जहाँ 'he resides or last resided' और ज़िला जहाँ 'children or relative resides'। परीक्षा में इन दोनों आधारों को पाठ के शब्दों के साथ लिखना काफ़ी है।

धारा 4 से 8: दावे की राह

  1. वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता अपना भरण-पोषण नहीं कर पा रहे

    धारा 4(1): बच्चों (अवयस्क नहीं) या निःसंतान की स्थिति में नातेदार के विरुद्ध

  2. आवेदन

    स्वयं, अक्षम हों तो प्राधिकृत व्यक्ति या संगठन, या अधिकरण का संज्ञान (धारा 5(1))

  3. अधिकरण: क्षेत्राधिकार और उपस्थिति

    ज़िला: 'he resides or last resided' या 'children or relative resides' (धारा 6(1)); उपस्थिति के लिए मजिस्ट्रेट जैसी शक्ति (6(3))

  4. सुलह का विकल्प

    सुलह अधिकारी का निष्कर्ष एक माह में (धारा 6(6))

  5. संक्षिप्त जाँच

    धारा 8: दीवानी न्यायालय की शक्तियाँ, संक्षिप्त प्रक्रिया

  6. आदेश (अगले पृष्ठ पर)

    भत्ता आदेश: धारा 9 से 14; अपील: धारा 15 और 16

धारा 2: ग्यारह परिभाषाएँ एक नज़र में

धारा 2: परिभाषाएँ

व्यक्ति

  • children: पुत्र, पुत्री, पौत्र, पौत्री; अवयस्क नहीं (2(a))
  • parent: जैविक, दत्तक या सौतेले; वरिष्ठ नागरिक हों या नहीं (2(d))
  • relative: निःसंतान का वैध उत्तराधिकारी, अवयस्क नहीं (2(g))
  • senior citizen: भारतीय नागरिक, साठ वर्ष या अधिक (2(h))

सहायता

  • maintenance: भोजन, वस्त्र, निवास, चिकित्सा (2(b))
  • welfare: भोजन, स्वास्थ्य-सेवा, मनोरंजन केंद्र, अन्य सुविधाएँ (2(k))

संपत्ति और आयु

  • property: चल-अचल, पैतृक या स्वअर्जित, मूर्त-अमूर्त (2(f))
  • minor: भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 के अनुसार (2(c))

प्राधिकारी

  • prescribed: राज्य के नियम (2(e))
  • State Government: संघ राज्यक्षेत्र में प्रशासक (2(i))
  • Tribunal: धारा 7 का भरण-पोषण अधिकरण (2(j))

मुख्य तथ्य

अधिनियम
The Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 (2007 का अधिनियम 56)
वरिष्ठ नागरिक (धारा 2(h))
भारत का नागरिक जो साठ वर्ष या उससे अधिक की आयु का हो
बच्चे (धारा 2(a))
पुत्र, पुत्री, पौत्र और पौत्री; अवयस्क शामिल नहीं
नातेदार (धारा 2(g))
निःसंतान वरिष्ठ नागरिक का वैध उत्तराधिकारी, अवयस्क नहीं, जो उसकी संपत्ति के कब्ज़े में हो या मृत्यु के बाद संपत्ति पाएगा
अंतरिम आवेदन का निपटारा (धारा 5(4))
नब्बे दिन; एक बार अधिकतम तीस दिन की वृद्धि
वसूली का आवेदन (धारा 5(8) का परंतुक)
देय होने की तिथि से तीन माह के भीतर
अधिकरण (धारा 7)
प्रत्येक उप-खंड के लिए; अध्यक्षता उपखंड अधिकारी (SDO) से निम्न पद का अधिकारी नहीं करेगा
सुलह (धारा 6(6))
सुलह अधिकारी एक माह में निष्कर्ष देगा
प्रारंभ (धारा 1(3))
राज्य में उस तिथि से जो राज्य सरकार अधिसूचित करे
अंतिम जाँच
2 अक्तूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • 'children' में अवयस्क को गिनना। धारा 2(a) में 'does not include a minor' है; और 'children' में पौत्र और पौत्री भी हैं, केवल पुत्र-पुत्री नहीं।
  • 'relative' का अर्थ किसी भी रिश्तेदार से लगाना। धारा 2(g) में केवल निःसंतान वरिष्ठ नागरिक का वैध उत्तराधिकारी, जो अवयस्क न हो और संपत्ति के कब्ज़े में हो या संपत्ति पाने वाला हो।
  • वरिष्ठ नागरिक की आयु 'साठ से अधिक' लिखना। पाठ में 'sixty years or above' है, यानी साठ वर्ष पूरे होने पर।
  • माता-पिता के दावे के लिए साठ वर्ष की शर्त लगाना। धारा 2(d) के अनुसार माता-पिता का वरिष्ठ नागरिक होना ज़रूरी नहीं।
  • अधिकरण की अध्यक्षता का पद गड़बड़ाना। धारा 7(2): उपखंड अधिकारी (SDO) से निम्न पद का अधिकारी नहीं; अपील अधिकरण का पद (ज़िला मजिस्ट्रेट से निम्न नहीं) अगले पृष्ठ पर है।
  • समय-सीमाओं में गड़बड़ी: अंतरिम भत्ते के आवेदन का निपटारा नब्बे दिन में (एक बार अधिकतम तीस दिन की वृद्धि), और वसूली का आवेदन तीन माह के भीतर। अपील की समय-सीमा अगले पृष्ठ पर है और वह अलग है।