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RTI अधिनियम 2005: धारा 3 से 5, नागरिक का अधिकार, लोक प्राधिकारी के दायित्व और PIO

3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Right to Information Act, 2005: Sections 1-20." इस पृष्ठ पर धारा 3 (सूचना का अधिकार), धारा 4 (लोक प्राधिकारियों के दायित्व) और धारा 5 (लोक सूचना अधिकारियों का अभिधान) हैं। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • इन धाराओं से एक प्रश्न आया है: 2018 में "सूचना के अधिकार का क्षेत्र" (5 अंक, 50 शब्द)। इसका उत्तर धारा 3 के साथ धारा 2(j) और धारा 4 को जोड़कर बनता है।
  • धारा 4 की सूची लंबी है (17 शीर्ष), पर परीक्षा में पूरी सूची नहीं माँगी जाती। चार-पाँच प्रमुख शीर्ष और स्वतः प्रकटीकरण का उद्देश्य (4(2)) याद रखना काफ़ी है।
  • धारा 5 से "PIO कौन है, APIO क्या करता है, और APIO को दिए आवेदन पर 5 दिन अतिरिक्त" जैसे छोटे प्रश्न बन सकते हैं। इन संख्याओं को ठीक-ठीक लिखें।

पहले सरल भाषा में

सोचिए एक सरकारी दफ़्तर एक दुकान है। धारा 3 कहती है कि दुकान का दरवाज़ा हर नागरिक के लिए खुला है। धारा 4 कहती है कि दुकान अपनी सामग्री की सूची, भाव-पत्र और नियम दीवार पर पहले से टाँगे, ताकि ग्राहक को हर बात पूछनी ही न पड़े। धारा 5 कहती है कि दुकान में पूछताछ का काउंटर और उस काउंटर पर बैठने वाला कर्मचारी तय हो, और गाँव-क़स्बे की शाखाओं में भी एक सहायक काउंटर हो ताकि लोग दूर तक न दौड़ें।

यानी तीनों धाराएँ तीन सवालों का उत्तर हैं: किसे अधिकार है (नागरिक को), दफ़्तर को पहले से क्या करना है (अपनी सूचना ख़ुद छापना), और नागरिक किससे बात करेगा (लोक सूचना अधिकारी से)।

धारा 3: सूचना का अधिकार (Right to information)

धारा 3 केवल एक वाक्य की है: "Subject to the provisions of this Act, all citizens shall have the right to information." हिंदी में: इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार होगा। इस वाक्य में तीन खंड याद रखने योग्य हैं।

पहला, "subject to the provisions of this Act": अधिकार असीमित नहीं है। उसकी सीमाएँ अधिनियम में ही हैं, जैसे धारा 8 की छूटें और धारा 9 का कॉपीराइट वाला आधार (अगले पृष्ठ पर)। दूसरा, "all citizens": धारा 3 का शब्द "नागरिक" है। (विश्लेषण: अगली धारा 6(1) में आवेदन करने वाले के लिए "a person" शब्द है; परीक्षा के उत्तर में धारा 3 का शब्द "नागरिक" ही लिखें।) तीसरा, "right to information": यह शब्द-समूह धारा 2(j) में परिभाषित है, यानी चार तरह की पहुँच जो पिछले पृष्ठ पर तालिका में दी है।

धारा 3 को "छोटी, पर जड़" कहा जा सकता है। इसी से आगे की हर धारा बनती है: धारा 6 में आवेदन, धारा 7 में उसका निपटारा, धारा 19 में अपील। (उन धाराओं का विवरण आगे के पृष्ठों पर।)

सूचना के अधिकार का क्षेत्र (scope): 2018 के प्रश्न की तैयारी

क्षेत्र का मतलब है अधिकार की चौहद्दी: किसे, किससे, क्या और कैसे। इस अधिनियम के पाठ से पाँच बातें निकलती हैं। (1) कौन: धारा 3 के अनुसार सभी नागरिक। (2) किससे: धारा 2(h) के लोक प्राधिकारी से। (3) क्या: धारा 2(f) की "सूचना", जो उस प्राधिकारी के पास या नियंत्रण में हो। (4) कैसे: धारा 2(j) के चार तरीक़े, यानी निरीक्षण, नोट और प्रमाणित प्रतियाँ, प्रमाणित नमूने और इलेक्ट्रॉनिक रूप या प्रिंटआउट। (5) बिना माँगे भी: धारा 4 के अधीन लोक प्राधिकारी को स्वयं कई तरह की सूचना प्रकाशित करनी है।

सीमा की ओर से: अधिकार "इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन" है, इसलिए धारा 8 की छूटें, धारा 9 का कॉपीराइट वाला आधार और धारा 10 की पृथक्करण-व्यवस्था उत्तर में आनी चाहिए। इन्हें अगले पृष्ठ पर देखें। 5 अंक के उत्तर में पाँचों बातें एक-एक पंक्ति में और सीमा की बात एक पंक्ति में लिखना पर्याप्त है।

सूचना के अधिकार का क्षेत्र

सूचना का अधिकार, धारा 3

किसे

सभी नागरिक

  • धारा 3

किससे

लोक प्राधिकारी

  • धारा 2(h)
  • धारा 4(1) के अधीन स्वतः प्रकटीकरण

क्या

पास या नियंत्रण में सूचना

  • धारा 2(f)
  • अभिलेख, ई-मेल, राय, संविदा, नमूने

कैसे

चार तरह की पहुँच

  • निरीक्षण
  • नोट और प्रमाणित प्रतियाँ
  • प्रमाणित नमूने
  • इलेक्ट्रॉनिक रूप या प्रिंटआउट

सीमा

अधिनियम के उपबंधों के अधीन

  • धारा 8 की छूटें
  • धारा 9 कॉपीराइट
  • धारा 10 पृथक्करण

धारा 4: लोक प्राधिकारियों के दायित्व (Obligations of public authorities)

धारा 4 अधिनियम का "स्वयं-प्रेरित" (suo motu) हिस्सा है। यहाँ लोक प्राधिकारी पर चार मुख्य दायित्व डाले गए हैं (उप-धारा (1) के खंड (a) से (d)), और फिर उप-धारा (2) से (4) में बताया गया है कि सूचना किस तरह फैलानी है।

खंड (a): अपने सभी अभिलेख सूचीबद्ध और अनुक्रमित (catalogued and indexed) रखे जिससे सूचना का अधिकार सुगम हो; और जिन अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण उपयुक्त हो, उन्हें उचित समय में और संसाधनों की उपलब्धता के अधीन कंप्यूटरीकृत करे तथा देश भर में विभिन्न प्रणालियों पर नेटवर्क से जोड़े। खंड (b): अधिनियमन के 120 दिन के भीतर सत्रह शीर्षों की सूचना प्रकाशित करे और उसके बाद हर वर्ष उसे अद्यतन करे। खंड (c): महत्त्वपूर्ण नीतियाँ बनाते या जनता को प्रभावित करने वाले निर्णय घोषित करते समय सभी प्रासंगिक तथ्य प्रकाशित करे। खंड (d): प्रशासनिक या अर्ध-न्यायिक निर्णयों के कारण प्रभावित व्यक्तियों को बताए।

खंड (d) अक्सर सबसे कम पढ़ा जाता है, पर यह दैनिक प्रशासन से सबसे ज़्यादा जुड़ता है। मान लीजिए किसी का पेंशन-दावा ख़ारिज होता है। तब लोक प्राधिकारी को उसे ख़ारिज करने के कारण बताने होंगे। कारण-रहित आदेश इस धारा के भाव के विपरीत है।

धारा 4(1)(b) के सत्रह शीर्ष

क्रमप्रकाशित की जाने वाली सूचनासार
(i)particulars of its organisation, functions and dutiesसंगठन, कार्य और कर्तव्यों का ब्योरा
(ii)powers and duties of its officers and employeesअधिकारियों और कर्मचारियों के अधिकार और कर्तव्य
(iii)procedure followed in the decision making processनिर्णय-प्रक्रिया, पर्यवेक्षण और जवाबदेही के रास्ते
(iv)norms set for the discharge of its functionsकार्य-निर्वहन के मानक
(v)rules, regulations, instructions, manuals and recordsनियम, विनियम, निर्देश, नियमावलियाँ और अभिलेख
(vi)categories of documents heldरखे गए दस्तावेज़ों की श्रेणियों का विवरण
(vii)arrangement for consultation with the publicनीति बनाने में जनता से परामर्श या प्रतिनिधित्व की व्यवस्था
(viii)boards, councils, committees and bodiesबोर्ड, परिषदें, समितियाँ; बैठकें जनता के लिए खुली हैं या नहीं; कार्यवृत्त सुलभ हैं या नहीं
(ix)directory of its officers and employeesअधिकारियों और कर्मचारियों की निर्देशिका
(x)monthly remuneration of each officer and employeeप्रत्येक की मासिक पारिश्रमिक, क्षतिपूर्ति-प्रणाली सहित
(xi)budget allocated to each agencyप्रत्येक अभिकरण का बजट, योजनाओं, प्रस्तावित व्यय और वितरण की रिपोर्ट सहित
(xii)manner of execution of subsidy programmesसब्सिडी कार्यक्रमों का निष्पादन, आवंटित राशि और लाभार्थियों का ब्योरा
(xiii)particulars of recipients of concessions, permits or authorisationsरियायत, परमिट या प्राधिकार पाने वालों का ब्योरा
(xiv)information held in electronic formइलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध सूचना का ब्योरा
(xv)facilities available to citizens for obtaining informationसूचना पाने की सुविधाएँ, पुस्तकालय या वाचनालय का समय
(xvi)names and particulars of Public Information Officersलोक सूचना अधिकारियों के नाम, पदनाम और विवरण
(xvii)such other information as may be prescribedविहित की गई अन्य सूचना

धारा 4(2) से 4(4): सूचना कैसे फैलाएँ

उप-धारा (2) लोक प्राधिकारी की "constant endeavour" यानी निरंतर कोशिश की बात करती है: खंड (b) की अपेक्षाओं के अनुसार जनता को नियमित अंतरालों पर विभिन्न संचार साधनों से, इंटरनेट सहित, अधिकाधिक सूचना स्वतः देना। उद्देश्य साफ़ लिखा है: ताकि जनता को सूचना पाने के लिए इस अधिनियम का सहारा कम से कम लेना पड़े। यानी आदर्श स्थिति में नागरिक को आवेदन करना ही नहीं पड़ना चाहिए।

उप-धारा (3) कहती है कि हर सूचना व्यापक रूप से और ऐसे रूप तथा ढंग से फैलाई जाए जो जनता के लिए आसानी से सुलभ हो। उप-धारा (4) में तीन कसौटियाँ हैं: लागत-प्रभावशीलता, स्थानीय भाषा और उस क्षेत्र में सबसे प्रभावी संचार-पद्धति। जहाँ तक संभव हो सूचना इलेक्ट्रॉनिक रूप में सुलभ हो और लोक सूचना अधिकारी के पास निःशुल्क या माध्यम की लागत अथवा छपाई की लागत जैसे विहित मूल्य पर उपलब्ध रहे।

स्पष्टीकरण (Explanation) में "disseminated" का अर्थ बताया गया है: सूचना को जनता तक सूचना-पट्ट, समाचार-पत्र, सार्वजनिक घोषणा, मीडिया-प्रसारण, इंटरनेट या अन्य किसी साधन से पहुँचाना, जिसमें किसी लोक प्राधिकारी के कार्यालयों का निरीक्षण भी शामिल है।

धारा 5: लोक सूचना अधिकारियों का अभिधान (Designation of Public Information Officers)

धारा 5 के पाँच उप-धाराओं को क्रम से पढ़ें। उप-धारा (1): हर लोक प्राधिकारी अधिनियमन के 100 दिन के भीतर अपने अधीन सभी प्रशासनिक इकाइयों या कार्यालयों में उतने अधिकारियों को केंद्रीय या राज्य लोक सूचना अधिकारी (Public Information Officer, PIO) अभिहित करे जितने सूचना माँगने वालों को सूचना देने के लिए आवश्यक हों।

उप-धारा (2): पहली उप-धारा पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, हर लोक प्राधिकारी 100 दिन के भीतर प्रत्येक उप-मंडल या अन्य उप-ज़िला स्तर पर एक अधिकारी को केंद्रीय या राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी (Assistant Public Information Officer, APIO) अभिहित करे। उसका काम सूचना के आवेदन या अपीलें प्राप्त करना और उन्हें तुरंत लोक सूचना अधिकारी, धारा 19(1) में बताए वरिष्ठ अधिकारी, या केंद्रीय या राज्य सूचना आयोग को भेज देना है। परंतुक: यदि आवेदन या अपील APIO को दी गई है तो धारा 7(1) में बताई अवधि के हिसाब में पाँच दिन और जोड़े जाएँगे।

उप-धारा (3): PIO सूचना माँगने वालों के अनुरोध निपटाएगा और उन्हें उचित सहायता (reasonable assistance) देगा। उप-धारा (4): PIO अपने कर्तव्य निभाने के लिए किसी अन्य अधिकारी की सहायता माँग सकता है। उप-धारा (5): जिस अधिकारी से सहायता माँगी गई है, वह पूरी सहायता देगा, और इस अधिनियम के किसी उल्लंघन के प्रयोजन से वह अन्य अधिकारी भी PIO माना जाएगा।

उप-धारा (5) का व्यावहारिक असर बड़ा है: PIO फ़ाइल रखने वाली शाखा से सूचना माँगता है। यदि वह शाखा-अधिकारी सहयोग नहीं करता, तो उल्लंघन के लिए उस पर भी वही दायित्व आ सकता है जो PIO पर आता है। इसलिए "फ़ाइल दूसरी शाखा में है" कोई बचाव नहीं है। (दंड का ढाँचा धारा 20 में, पाँचवें पृष्ठ पर।)

तुलना: PIO और APIO

PIO [धारा 5(1), 5(3) से (5)]

स्तरप्रशासनिक इकाइयाँ और कार्यालय, जहाँ आवश्यक

अभिधान की समय-सीमाअधिनियमन के 100 दिन के भीतर

मुख्य कामअनुरोध निपटाना, उचित सहायता देना, सूचना देना या अस्वीकार करना

सूचना का निर्णयलेता है (धारा 7)

समय पर असरसामान्य 30 दिन [धारा 7(1)]

अन्य अधिकारी से सहायतामाँग सकता है; वह अधिकारी भी PIO माना जाएगा

APIO [धारा 5(2)]

स्तरप्रत्येक उप-मंडल या उप-ज़िला स्तर

अभिधान की समय-सीमाअधिनियमन के 100 दिन के भीतर

मुख्य कामआवेदन या अपील प्राप्त करना और तुरंत आगे भेजना

सूचना का निर्णयनहीं लेता; केवल डाकिये जैसा माध्यम

समय पर असरAPIO को दिए आवेदन पर 5 दिन जुड़ते हैं (धारा 5(2) का परंतुक)

अन्य अधिकारी से सहायतासहायता का प्रावधान इस उप-धारा में नहीं

मुख्य तथ्य

धारा 3
"all citizens shall have the right to information", अधिनियम के उपबंधों के अधीन
धारा 4(1)(b)
अधिनियमन के 120 दिन के भीतर 17 शीर्षों की सूचना प्रकाशित; उसके बाद हर वर्ष अद्यतन
धारा 4(1)(a), (c), (d)
अभिलेख सूचीबद्ध और अनुक्रमित, कंप्यूटरीकृत; नीति और निर्णय के तथ्य प्रकाशित; निर्णयों के कारण बताना
धारा 5(1) और (2)
100 दिन के भीतर PIO और उप-मंडल या उप-ज़िला स्तर पर APIO का अभिधान
धारा 5(2) का परंतुक
APIO को दिए आवेदन या अपील पर धारा 7(1) की अवधि में 5 दिन अतिरिक्त
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026 (CIC का 18 नवंबर 2025 तक का संशोधित पाठ)

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • धारा 3 में "नागरिक" की जगह "व्यक्ति" लिख देना। धारा 3 का शब्द citizens है।
  • धारा 4(1)(b) के 120 दिन और धारा 5 के 100 दिन आपस में बदल देना। प्रकाशन के लिए 120 दिन, अभिधान के लिए 100 दिन।
  • APIO को निर्णय लेने वाला अधिकारी लिख देना। APIO केवल आवेदन या अपील लेकर तुरंत आगे भेजता है; निर्णय PIO करता है।
  • APIO को दिए आवेदन पर "5 दिन" छोड़ देना। परंतुक के अनुसार 30 दिन की अवधि में 5 दिन जुड़ते हैं, यानी कुल 35 दिन।
  • सूचना के अधिकार का क्षेत्र लिखते समय सीमा (धारा 8 और 9) न जोड़ना। अधिकार "इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन" है।