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पेपर III · इकाई II

सुशासन (Good Governance)

सुशासन क्या है, कहाँ से आया, उसकी आठ कसौटियाँ क्या हैं और भारत व राजस्थान में उसे कैसे लागू किया गया, इसकी उत्तर-लेखन केंद्रित तैयारी।

3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई II — "Public Administration: Theories and Principles... New Public Administration, New Public Management, Good Governance, New Public Service."

सुशासन का अर्थ

सरकार चलाने का काम सिर्फ़ क़ानून बनाना नहीं है; असली सवाल यह है कि फ़ैसले कैसे लिए जाते हैं और उन पर अमल कैसे होता है। इसी पूरी प्रक्रिया को 'गवर्नेंस' कहते हैं। 'गवर्नमेंट' संस्था है, जबकि 'गवर्नेंस' उस संस्था, बाज़ार और समाज के बीच चलने वाली प्रक्रिया है। जब यह प्रक्रिया नियम-आधारित, खुली, जवाबदेह और जनता की ज़रूरतों के अनुरूप हो, तब उसे सुशासन (Good Governance) कहा जाता है।

UNDP (1997) के अनुसार शासन उन तंत्रों, प्रक्रियाओं और संस्थाओं का समूह है जिनके ज़रिये नागरिक और समूह अपने हित रखते हैं, अपने अधिकारों का प्रयोग करते हैं, अपने दायित्व निभाते हैं और आपसी मतभेद सुलझाते हैं। इसका मतलब है कि सुशासन में केवल सरकारी अफ़सर नहीं, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज भी भागीदार हैं।

उत्पत्ति: विश्व बैंक से UNDP तक

'गवर्नेंस' शब्द विकास की चर्चा में 1980 के दशक के अंत में आया। विश्व बैंक की 1989 की रिपोर्ट 'Sub-Saharan Africa: From Crisis to Sustainable Growth' में कहा गया कि अफ़्रीका की विकास-समस्याओं के पीछे 'शासन का संकट' है। बैंक ने आगे 1992 में 'Governance and Development' नामक दस्तावेज़ प्रकाशित किया, जिसमें शासन को किसी देश के आर्थिक और सामाजिक संसाधनों के विकास-हेतु प्रबंधन में सत्ता के प्रयोग का तरीक़ा बताया गया।

1990 के दशक में संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं ने इसे व्यापक बनाया। UNDP ने 1997 में 'Governance for Sustainable Human Development' नीति-पत्र दिया, जिसमें शासन को मानव-विकास से जोड़ा गया। आज परीक्षा में सबसे अधिक पूछी जाने वाली आठ विशेषताओं की सूची UN ESCAP के दस्तावेज़ में दी गई है।

सुशासन की 8 विशेषताएँ

विशेषतासरल अर्थउदाहरण (भारत)
सहभागिता (Participation)फ़ैसलों में महिलाओं-पुरुषों, सभी समूहों की आवाज़ग्राम सभा, सामाजिक अंकेक्षण
सर्वसम्मति-उन्मुख (Consensus-oriented)अलग-अलग हितों के बीच समाज के व्यापक हित पर सहमतिनीति-निर्माण से पहले हितधारकों से परामर्श
जवाबदेही (Accountability)सरकार ही नहीं, निजी क्षेत्र और संगठन भी जनता के प्रति उत्तरदायीसार्वजनिक सुनवाई, लोकपाल जैसी संस्थाएँ
पारदर्शिता (Transparency)फ़ैसले और उनका क्रियान्वयन नियमों के अनुसार और सूचना खुलीसूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
संवेदनशीलता (Responsiveness)सभी हितधारकों को उचित समय में सेवाशिकायत निवारण पोर्टल, सेवा-गारंटी क़ानून
प्रभावशीलता व कुशलता (Effective & Efficient)संसाधनों का श्रेष्ठ उपयोग करके ज़रूरतें पूरी करनाई-गवर्नेंस से कागज़ी प्रक्रिया में कमी
न्यायसंगतता व समावेशन (Equitable & Inclusive)सबसे कमज़ोर वर्ग को भी आगे बढ़ने का अवसरवंचित वर्गों के लिए लक्षित योजनाएँ
विधि का शासन (Rule of Law)निष्पक्ष क़ानून, समान रूप से लागू और मानवाधिकार सुरक्षितस्वतंत्र न्यायपालिका

भारत में सुशासन के उपकरण

नागरिक घोषणा-पत्र (Citizen's Charter): यह विचार ब्रिटेन में 1991 में आया। भारत में मई 1997 के मुख्यमंत्री सम्मेलन में 'प्रभावी और संवेदनशील शासन' की कार्य-योजना के तहत विभागों को अपने घोषणा-पत्र बनाने की दिशा मिली। इसमें विभाग बताता है कि कौन-सी सेवा कितने समय में और किस मानक पर मिलेगी।

सूचना का अधिकार (RTI), 2005: इसे जून 2005 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली और यह 12 अक्टूबर 2005 से पूरी तरह लागू हुआ। सामान्यतः 30 दिन में जानकारी देनी होती है, और जीवन या स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में 48 घंटे में। यह पारदर्शिता और जवाबदेही का सबसे सीधा क़ानूनी औज़ार है।

ई-गवर्नेंस: सेवाओं को ऑनलाइन करने से बिचौलिए घटते हैं, समय बचता है और रिकॉर्ड पारदर्शी रहता है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना और डिजिटल इंडिया इसी दिशा के कार्यक्रम हैं, पर डिजिटल खाई इसकी बड़ी चुनौती है।

सेवा-गारंटी क़ानून: मध्य प्रदेश 2010 में ऐसा क़ानून बनाने वाला पहला राज्य बना और उसके बाद कई राज्यों ने अपने अधिनियम बनाए। इनमें तय समय-सीमा में सेवा न मिलने पर अधिकारी की जवाबदेही तय होती है।

सुशासन दिवस: हर साल 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर मनाया जाता है; इसकी शुरुआत 2014 में मानी जाती है। इसका उद्देश्य जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन के प्रति जागरूकता है।

सुशासन सूचकांक (GGI) — DARPG

संस्करणतिथिमुख्य बातें
GGI 201925 दिसंबर 2019पहला संस्करण; बड़े राज्यों में तमिलनाडु शीर्ष
GGI 2021 (PIB में 'GGI 2020-21')25 दिसंबर 2021 (विज्ञान भवन, गृह मंत्री अमित शाह)10 क्षेत्र, 58 संकेतक; राज्य व केंद्रशासित प्रदेश चार श्रेणियों में; अन्य राज्य समूह-A में गुजरात, समूह-B में मध्य प्रदेश, पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों में हिमाचल प्रदेश, केंद्रशासित प्रदेशों में दिल्ली शीर्ष
GGI 2023—जारी नहीं हुआ; आँकड़े जुटाने में दिक़्क़त और डेटा पुराना पड़ने की चिंता बताई गई

1 अक्टूबर 2026 तक आधिकारिक स्रोतों (PIB/DARPG) में GGI का इससे नया संस्करण प्रकाशित नहीं मिला; दिसंबर 2025 की PIB सामग्री में भी 2020-21 का सूचकांक ही उद्धृत है। परीक्षा से पहले darpg.gov.in देख लें।

आलोचना और चुनौतियाँ

सुशासन को परखने का आसान तरीक़ा यह है कि देखें कि सेवा लेते समय नागरिक को तीन बातें दिखती हैं: प्रक्रिया साफ़ है, अधिकारी जवाबदेह है और शिकायत सुनी जाती है। यदि हाँ, तो आठों विशेषताओं में से अधिकांश व्यवहार में मौजूद हैं। इसलिए परीक्षा में केवल सूची लिखने के बजाय हर विशेषता को किसी संस्था या क़ानून से जोड़ना अधिक अंक दिलाता है।

पहली आलोचना यह है कि सुशासन की धारणा दाता संस्थाओं की शर्तों से निकली, इसलिए कुछ विद्वान इसे विकासशील देशों पर थोपा गया एजेंडा मानते हैं। दूसरी, आठों विशेषताएँ एक साथ पाना कठिन है; जैसे तेज़ निर्णय (कुशलता) और व्यापक परामर्श (सहभागिता) में टकराव हो सकता है। तीसरी, इसे नापना मुश्किल है, क्योंकि सूचकांक कुछ ही संकेतक चुनते हैं और राज्यों के आँकड़े समय पर नहीं आते, जैसा 2023 के संस्करण में दिखा।

भारतीय संदर्भ की चुनौतियाँ: नागरिक घोषणा-पत्रों का औपचारिक रह जाना, RTI आवेदकों पर दबाव और लंबित अपीलें, भ्रष्टाचार, धीमी न्याय-प्रक्रिया, तथा डिजिटल साक्षरता की कमी। समाधान के लिए केवल क़ानून नहीं, प्रशिक्षित कर्मचारी, स्वतंत्र निगरानी संस्थाएँ और जागरूक नागरिक भी चाहिए।

सिलेबस के अन्य विषयों से संबंध

नया लोक प्रबंधन (NPM) प्रशासन में बाज़ार-जैसी कुशलता और परिणाम पर ज़ोर देता है, जबकि नई लोक सेवा (New Public Service) नागरिक को ग्राहक नहीं, साझेदार मानती है। सुशासन इन दोनों के बीच पुल का काम करता है: उसमें कुशलता भी है और सहभागिता व जवाबदेही भी। उत्तर लिखते समय इस तुलना से गहराई दिखती है।

मुख्य तथ्य

विश्व बैंक रिपोर्ट (अफ़्रीका, 'शासन का संकट')
1989
विश्व बैंक 'Governance and Development'
1992
UNDP नीति-पत्र 'Governance for Sustainable Human Development'
1997
सुशासन की विशेषताएँ
8, UN ESCAP सूची
GGI पहला / दूसरा संस्करण
25 दिसंबर 2019 / 25 दिसंबर 2021
GGI 2021 का ढाँचा
10 क्षेत्र, 58 संकेतक
सुशासन दिवस
25 दिसंबर, अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती
सुशासन दिवस की शुरुआत
2014
RTI अधिनियम
अधिनियम सं. 22, वर्ष 2005; अधिकांश प्रावधान 12 अक्टूबर 2005 से लागू
नागरिक घोषणा-पत्र (भारत)
मई 1997 का मुख्यमंत्री सम्मेलन
पहला सेवा-गारंटी क़ानून
मध्य प्रदेश, 18 अगस्त 2010

राजस्थान का पहलू

राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम, 2011 (अधिनियम सं. 23; राज्यपाल की स्वीकृति 21 सितंबर 2011) राज्य का सेवा-गारंटी क़ानून है; लागू होने की सटीक तिथि स्रोतों में अलग-अलग मिलती है, इसलिए यहाँ केवल वर्ष 2011 दिया गया है। 2013 के संशोधन (अधिनियम सं. 36) से अपीलीय स्तरों के अलावा आयोग के पास पुनरीक्षण की व्यवस्था जुड़ी। जन सूचना पोर्टल 13 सितंबर 2019 को शुरू हुआ; यह RTI के तहत स्वतः सूचना-प्रकटीकरण का मंच है। जन सूचना पोर्टल का विवरण राजस्थान सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर भी देख लें।

एक नज़र में: सुशासन

सुशासन

उत्पत्ति

  • विश्व बैंक 1989: शासन का संकट
  • विश्व बैंक 1992 रिपोर्ट
  • UNDP 1997

8 विशेषताएँ

  • सहभागी
  • सर्वसम्मति-उन्मुख
  • जवाबदेह
  • पारदर्शी
  • संवेदनशील
  • कुशल व प्रभावी
  • न्यायसंगत व समावेशी
  • विधि का शासन

भारत के उपकरण

  • नागरिक घोषणा-पत्र 1997
  • RTI 2005
  • ई-गवर्नेंस
  • सेवा-गारंटी क़ानून
  • GGI 2019, 2021
  • सुशासन दिवस 25 दिसंबर

राजस्थान

  • सेवा-गारंटी अधिनियम 2011
  • जन सूचना पोर्टल 2019

आलोचना/चुनौती

  • थोपा हुआ एजेंडा
  • मापन की कठिनाई
  • घोषणा-पत्र औपचारिक
  • डिजिटल खाई
परीक्षा-कक्ष में यही पाँच शाखाएँ उत्तर की रूपरेखा बन सकती हैं।