RTI अधिनियम 2005: धारा 1 से 2, नाम, विस्तार, प्रारंभ और परिभाषाएँ
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RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Right to Information Act, 2005: Sections 1-20." इस पृष्ठ पर धारा 1 (संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ) और धारा 2 (परिभाषाएँ) हैं। धारा 3 से 5 अगले पृष्ठ पर, धारा 6 से 11 तीसरे, धारा 12 से 17 चौथे और धारा 18 से 20 पाँचवें पृष्ठ पर हैं। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- इसी पृष्ठ की धारा 2 से दो प्रश्न आए हैं: 2021 में "सूचना का अधिकार" की परिभाषा (2 अंक, खंड (j)) और 2018 में "तृतीय पक्षकार" (2 अंक, खंड (n))। उपलब्ध छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में RTI से प्रश्न 2018, 2021, 2023 और 2024 में आए हैं।
- विधि खंड के ये प्रश्न परिभाषा-प्रधान हैं और 15 शब्दों में पूरे उत्तर की माँग करते हैं। इसलिए खंड का अक्षर, अंग्रेज़ी का सटीक शब्द और परिभाषा के मुख्य पद याद रखना ही अंक दिलाता है।
- धारा 2 के शब्द आगे की हर धारा में लौटते हैं: "लोक प्राधिकारी" धारा 3 से 5 में, "तृतीय पक्षकार" धारा 11 और 19 में, "सक्षम प्राधिकारी" धारा 8 में। यहाँ की पकड़ पूरे अधिनियम के उत्तर आसान कर देती है।
पहले सरल भाषा में
मान लीजिए किसी तहसील कार्यालय की अलमारी में आपके गाँव की ज़मीन, राशन और पेंशन की फ़ाइलें रखी हैं। पहले उस अलमारी की चाबी केवल बाबू के पास रहती थी। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005) ने उस दीवार में एक खिड़की बना दी: नागरिक लिखकर पूछ सकता है और अधिकारी को तय समय में जवाब देना पड़ता है।
खिड़की खोलने से पहले दो काम ज़रूरी थे। पहला, यह तय करना कि क़ानून कहाँ और कब से चलेगा। यह काम धारा 1 करती है। दूसरा, यह तय करना कि "सूचना", "लोक प्राधिकारी" और "तृतीय पक्षकार" जैसे शब्दों का अर्थ क्या है। यह काम धारा 2 करती है। खेल शुरू होने से पहले नियम-पुस्तिका का शब्दकोश पढ़ना पड़ता है, वरना यही तय नहीं होगा कि किस दफ़्तर से और किस चीज़ के बारे में पूछा जा सकता है।
धारा 1: संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ (Short title, extent and commencement)
धारा 1(1) अधिनियम का नाम बताती है: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005)। यह संसद का अधिनियम है, 2005 का अधिनियम संख्या 22, जिसकी स्वीकृति-तिथि अधिनियम के पाठ में 15 जून 2005 छपी है। केंद्रीय सूचना आयोग की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति 15 जून 2005 को मिली।
धारा 1(2) विस्तार तय करती है: अधिनियम "संपूर्ण भारत" (the whole of India) पर लागू होता है। मूल पाठ में आगे लिखा था कि जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर। ये शब्द जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का अधिनियम 34) की धारा 95 और पाँचवीं अनुसूची से 31 अक्टूबर 2019 से हटा दिए गए। इसलिए आज धारा 1(2) में केवल इतना पढ़ा जाता है कि यह संपूर्ण भारत पर विस्तृत है। पुराने पाठ वाली किताबें पढ़ते समय इस बदलाव का ध्यान रखें।
धारा 1(3) प्रारंभ तय करती है, और यहाँ एक रोचक योजना है। कुछ उपबंध अधिनियम बनते ही लागू हो गए: धारा 4 की उप-धारा (1), धारा 5 की उप-धारा (1) और (2), तथा धाराएँ 12, 13, 15, 16, 24, 27 और 28। शेष सभी उपबंध अधिनियमन के 120वें दिन लागू हुए। CIC की रिपोर्ट के अनुसार यह तिथि 12 अक्टूबर 2005 थी।
इस योजना का तर्क सीधा है। खिड़की खुलने से पहले उसके पीछे बैठने वाले लोग चाहिए: लोक सूचना अधिकारी (धारा 5), आयोग (धाराएँ 12 और 15) और फ़ाइलों का सूचीकरण (धारा 4(1))। इसलिए ये तुरंत लागू हुए और नागरिक के आवेदन का अधिकार 120 दिन बाद शुरू हुआ। बैंक की नई शाखा भी पहले कर्मचारी और काउंटर लगाती है, फिर ग्राहकों के लिए दरवाज़ा खोलती है।
धारा 1 एक नज़र में
| उप-धारा | विषय | परीक्षा के लिए बिंदु |
|---|---|---|
| 1(1) | संक्षिप्त नाम | Right to Information Act, 2005; 2005 का अधिनियम 22 |
| 1(2) | विस्तार | संपूर्ण भारत; "except the State of Jammu and Kashmir" शब्द 31-10-2019 से हटे |
| 1(3) | प्रारंभ | धारा 4(1), 5(1) और 5(2), 12, 13, 15, 16, 24, 27, 28 तुरंत; शेष 120वें दिन (12 अक्टूबर 2005) |
धारा 1 का समय-क्रम
15 जून 2005
अधिनियम की स्वीकृति (2005 का अधिनियम 22)
15 जून 2005 से तुरंत
धारा 4(1), 5(1), 5(2), 12, 13, 15, 16, 24, 27, 28 लागू
12 अक्टूबर 2005
120वाँ दिन: शेष सभी उपबंध लागू
31 अक्टूबर 2019
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 से धारा 1(2) में जम्मू-कश्मीर का अपवर्जन समाप्त
धारा 2: परिभाषाएँ (Definitions) की बनावट
धारा 2 की शुरुआत इन शब्दों से होती है: "In this Act, unless the context otherwise requires". यानी परिभाषाएँ तभी तक मान्य हैं जब तक संदर्भ कुछ और न माँगे। इसमें खंड (a) से (n) तक चौदह परिभाषाएँ हैं। इनमें से परीक्षा की दृष्टि से सबसे भारी चार हैं: (f) सूचना, (h) लोक प्राधिकारी, (j) सूचना का अधिकार और (n) तृतीय पक्षकार। बाक़ी खंड मुख्यतः पदनाम पहचानने के काम आते हैं।
धारा 2 के सभी चौदह खंड
| खंड | अंग्रेज़ी शब्द | हिंदी और सार |
|---|---|---|
| (a) | appropriate Government | उपयुक्त सरकार: जो लोक प्राधिकारी केंद्र सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के धन से स्थापित, गठित, स्वामित्व या नियंत्रण वाला अथवा सारभूत रूप से वित्तपोषित है, उसके लिए केंद्र सरकार; राज्य सरकार के धन से हो तो राज्य सरकार |
| (b) | Central Information Commission | केंद्रीय सूचना आयोग: धारा 12(1) के अधीन गठित |
| (c) | Central Public Information Officer | केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी: धारा 5(1) के अधीन अभिहित; इसमें धारा 5(2) का केंद्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी भी शामिल |
| (d) | Chief Information Commissioner and Information Commissioner | मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त: धारा 12(3) के अधीन नियुक्त |
| (e) | competent authority | सक्षम प्राधिकारी: सदनों के अध्यक्ष और सभापति, मुख्य न्यायमूर्ति, राष्ट्रपति या राज्यपाल, प्रशासक (नीचे तालिका) |
| (f) | information | सूचना: किसी भी रूप में कोई सामग्री, अभिलेख, दस्तावेज़, ई-मेल, राय, सलाह, संविदा, नमूने, इलेक्ट्रॉनिक डेटा आदि |
| (g) | prescribed | विहित: इस अधिनियम के नियमों द्वारा उपयुक्त सरकार या सक्षम प्राधिकारी द्वारा विहित |
| (h) | public authority | लोक प्राधिकारी: संविधान, संसद या राज्य विधान-मंडल के क़ानून या सरकारी अधिसूचना-आदेश से बनी संस्था, और सरकार-नियंत्रित या सारभूत वित्तपोषित निकाय व NGO |
| (i) | record | अभिलेख: दस्तावेज़, पांडुलिपि, फ़ाइल, माइक्रोफ़िल्म, माइक्रोफ़िश, फ़ैक्स प्रति, उनसे बने चित्र और कंप्यूटर या किसी उपकरण से बनी अन्य सामग्री |
| (j) | right to information | सूचना का अधिकार: लोक प्राधिकारी के पास या नियंत्रण में सुलभ सूचना का अधिकार, जिसमें निरीक्षण, नोट-प्रतियाँ, नमूने और इलेक्ट्रॉनिक रूप में सूचना शामिल |
| (k) | State Information Commission | राज्य सूचना आयोग: धारा 15(1) के अधीन गठित |
| (l) | State Chief Information Commissioner and State Information Commissioner | राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त: धारा 15(3) के अधीन नियुक्त |
| (m) | State Public Information Officer | राज्य लोक सूचना अधिकारी: धारा 5(1) के अधीन अभिहित; इसमें धारा 5(2) का राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी भी शामिल |
| (n) | third party | तृतीय पक्षकार: सूचना माँगने वाले नागरिक से भिन्न व्यक्ति; इसमें लोक प्राधिकारी भी शामिल |
सूचना (information) [धारा 2(f)]
खंड (f) कहता है कि "information" का अर्थ है किसी भी रूप की कोई भी सामग्री (any material in any form)। फिर उदाहरण गिनाए गए हैं: अभिलेख (records), दस्तावेज़ (documents), ज्ञापन (memos), ई-मेल, राय (opinions), सलाह (advices), प्रेस विज्ञप्तियाँ, परिपत्र (circulars), आदेश (orders), लॉगबुक, संविदाएँ (contracts), रिपोर्ट, पत्र-पत्रक (papers), नमूने (samples), मॉडल, और किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी डेटा-सामग्री। यानी काग़ज़ की फ़ाइल हो या सर्वर पर पड़ा डेटा, दोनों सूचना हैं।
पाठ का एक अंतिम हिस्सा अक्सर छूट जाता है: सूचना में "किसी निजी निकाय से संबंधित वह सूचना भी आती है जो किसी लोक प्राधिकारी को अन्य क़ानून के अधीन प्राप्त हो सकती है" (information relating to any private body which can be accessed by a public authority under any other law for the time being in force)। उदाहरण (विश्लेषण): किसी निजी कंपनी से कोई नियामक संस्था क़ानून के अधीन जो रिकॉर्ड मँगा सकती है, वह रिकॉर्ड नियामक के पास होने पर माँगा जा सकता है। निजी कंपनी से सीधे आवेदन इसलिए नहीं होता कि वह स्वयं लोक प्राधिकारी नहीं है, जब तक खंड (h) की शर्तें पूरी न हों।
यह भी देखें कि "राय" और "सलाह" सूची में हैं। फ़ाइल-नोटिंग में लिखी अधिकारी की राय भी इसी शब्दावली के भीतर आती है, पर कुछ राय-सलाह पर धारा 8 की छूट लग सकती है। इसलिए पहले परिभाषा, फिर छूट: यही क्रम उत्तर में रखें। (विश्लेषण)
सूचना का अधिकार (right to information) [धारा 2(j)]
परीक्षा-योग्य परिभाषा: "सूचना का अधिकार" वह अधिकार है जो इस अधिनियम के अधीन सुलभ (accessible) है और जो किसी लोक प्राधिकारी के पास या उसके नियंत्रण में (held by or under the control of any public authority) रखी सूचना से संबंधित है। इस अधिकार में चार तरह की पहुँच शामिल है।
दो शब्द-समूह ध्यान से याद रखें। पहला, "accessible under this Act": यानी वही सूचना जिस तक अधिनियम पहुँच देता है, धारा 8 और 9 की छूटों के बाद। दूसरा, "held by or under the control of": (विश्लेषण) सूचना केवल लोक प्राधिकारी की अलमारी में हो, ऐसा ज़रूरी नहीं। यदि वह किसी और के पास रखी है पर नियंत्रण लोक प्राधिकारी का है, तब भी वह दायरे में है।
सूचना के अधिकार में शामिल चार प्रकार की पहुँच [धारा 2(j)(i) से (iv)]
| उप-खंड | अंग्रेज़ी पाठ का सार | व्यवहार का उदाहरण |
|---|---|---|
| (i) | inspection of work, documents, records | सड़क के काम का मौक़े पर निरीक्षण, या मस्टर-रोल की फ़ाइल देखना |
| (ii) | taking notes, extracts or certified copies of documents or records | फ़ाइल के पन्नों के नोट लेना, उद्धरण निकालना, प्रमाणित प्रति लेना |
| (iii) | taking certified samples of material | निर्माण-सामग्री का प्रमाणित नमूना लेना (विश्लेषण: जाँच के लिए) |
| (iv) | obtaining information in the form of diskettes, floppies, tapes, video cassettes or in any other electronic mode or through printouts | कंप्यूटर में रखे रिकॉर्ड की सीडी या प्रिंटआउट में प्रति |
लोक प्राधिकारी (public authority) [धारा 2(h)]
लोक प्राधिकारी वह है जो कोई प्राधिकार, निकाय या स्वशासन की संस्था (any authority or body or institution of self-government) हो और जिसे चार में से किसी एक तरीक़े से बनाया गया हो: (a) संविधान द्वारा या उसके अधीन; (b) संसद के बनाए किसी अन्य क़ानून से; (c) राज्य विधान-मंडल के बनाए किसी अन्य क़ानून से; (d) उपयुक्त सरकार की अधिसूचना या आदेश से।
इसके बाद शब्द "और इसमें शामिल है" आते हैं और दो श्रेणियाँ जुड़ती हैं: (i) कोई निकाय जो उपयुक्त सरकार के स्वामित्व में हो, उसके नियंत्रण में हो या उससे सारभूत रूप से वित्तपोषित हो (body owned, controlled or substantially financed); (ii) कोई ग़ैर-सरकारी संगठन जो उपयुक्त सरकार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दिए धन से सारभूत रूप से वित्तपोषित हो (non-Government organisation substantially financed)। अधिनियम "substantially" शब्द की कोई संख्या या प्रतिशत तय नहीं करता, इसलिए कितना वित्तपोषण "सारभूत" है, यह प्रश्न धारा 2(h) के पाठ से अपने-आप तय नहीं होता।
लोक प्राधिकारी बनने के रास्ते [धारा 2(h)]
| रास्ता | पाठ में स्थान | उदाहरण (विश्लेषण, सामान्य श्रेणियाँ) |
|---|---|---|
| संविधान द्वारा या उसके अधीन | (a) | संविधान के अनुच्छेद 315 के अधीन लोक सेवा आयोग |
| संसद के क़ानून से | (b) | संसद के अधिनियम से बना विश्वविद्यालय या निगम |
| राज्य विधान-मंडल के क़ानून से | (c) | राज्य के अधिनियम से बना बोर्ड या विश्वविद्यालय |
| उपयुक्त सरकार की अधिसूचना या आदेश से | (d) | सरकारी आदेश से गठित समिति, प्राधिकरण या सोसायटी |
| सरकार के स्वामित्व, नियंत्रण या सारभूत वित्तपोषण वाला निकाय | "includes" (i) | सरकारी कंपनी या सरकार-वित्तपोषित संस्थान |
| सरकार से सारभूत वित्तपोषित NGO | "includes" (ii) | सरकारी अनुदान पर मुख्यतः चलने वाली संस्था |
तृतीय पक्षकार (third party) [धारा 2(n)]
परीक्षा-योग्य परिभाषा: "तृतीय पक्षकार" (third party) का अर्थ है आवेदन करने वाले नागरिक से भिन्न कोई व्यक्ति, और इसमें लोक प्राधिकारी भी शामिल है (a person other than the citizen making a request for information and includes a public authority)।
दो बातें अंक बढ़ाती हैं। पहली, तृतीय पक्षकार सूचना का स्रोत हो सकता है: जैसे कोई ठेकेदार कंपनी, जिसके दिए दस्तावेज़ सरकारी फ़ाइल में लगे हैं। दूसरी, परिभाषा में लोक प्राधिकारी को भी जोड़ा गया है। यानी यदि एक सरकारी विभाग किसी दूसरे विभाग से जुड़ी सूचना माँगे और जिस विभाग की सूचना है वह तीसरा पक्ष हो जाए, तो वह भी तृतीय पक्षकार कहलाएगा।
इस शब्द का कार्य आगे दिखता है: धारा 11 में सूचना देने से पहले ऐसे पक्ष को नोटिस, धारा 19(2) में उसकी अपील और धारा 19(4) में आयोग में उसकी सुनवाई (अगले पृष्ठों पर विस्तार)।
सक्षम प्राधिकारी (competent authority) कौन [धारा 2(e)]
| क्रम | निकाय | सक्षम प्राधिकारी |
|---|---|---|
| (i) | लोक सभा, राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा | अध्यक्ष (Speaker) |
| (i) | राज्य सभा, राज्य की विधान परिषद | सभापति (Chairman) |
| (ii) | उच्चतम न्यायालय | भारत का मुख्य न्यायमूर्ति |
| (iii) | उच्च न्यायालय | उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति |
| (iv) | संविधान द्वारा या उसके अधीन स्थापित अन्य प्राधिकरण | राष्ट्रपति या राज्यपाल, जैसा लागू हो |
| (v) | अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त प्रशासक | प्रशासक (administrator) |
सक्षम प्राधिकारी और उपयुक्त सरकार का उपयोग
ये दो परिभाषाएँ याद करने भर के लिए नहीं हैं, ये आगे काम करती हैं। "सक्षम प्राधिकारी" धारा 8(1)(d) और (e) में दिखता है: वहाँ व्यावसायिक गोपनीयता या प्रत्ययी (fiduciary) संबंध वाली सूचना रोकी जा सकती है, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि बड़ा लोकहित प्रकटीकरण माँगता है। इसी तरह "विहित" (prescribed) शब्द बताता है कि शुल्क जैसी बातें नियमों से तय होती हैं, और ये नियम उपयुक्त सरकार या सक्षम प्राधिकारी बनाते हैं।
"उपयुक्त सरकार" यह तय करती है कि किसी लोक प्राधिकारी पर कौन-सी सरकार का नियम और अधिकार चलेगा। केंद्र के पैसे से चलने वाली संस्था के लिए केंद्र सरकार, राज्य के पैसे से चलने वाली के लिए राज्य सरकार। संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के धन से चलने वाली संस्था के लिए भी केंद्र सरकार "उपयुक्त सरकार" है।
तुलना: सूचना, अभिलेख और सूचना का अधिकार
| बिंदु | सूचना [2(f)] | अभिलेख [2(i)] | सूचना का अधिकार [2(j)] |
|---|---|---|---|
| स्वरूप | सामग्री, किसी भी रूप में | दस्तावेज़, फ़ाइल, माइक्रोफ़िल्म, कंप्यूटर से बनी सामग्री आदि | अधिकार, सूचना तक पहुँच के चार तरीक़ों का समूह |
| मुख्य शब्द | any material in any form | includes | held by or under the control of any public authority |
| काम | यह बताती है कि क्या माँगा जा सकता है | "record" शब्द उन धाराओं में आता है जहाँ पूरे अभिलेख या उसके हिस्से की बात होती है, जैसे धारा 10 | यह बताता है कि किस तरह पहुँच मिलेगी: निरीक्षण, प्रति, नमूना, इलेक्ट्रॉनिक |
| PYQ में स्थिति | सीधा प्रश्न नहीं पूछा गया | सीधा प्रश्न नहीं पूछा गया | 2021 का PYQ |
लोक प्राधिकारी की जाँच: प्रवाह-चित्र
निकाय का स्रोत देखें
संविधान, संसद या राज्य का क़ानून, सरकारी अधिसूचना या आदेश? हाँ तो लोक प्राधिकारी
सरकारी स्वामित्व, नियंत्रण या सारभूत वित्तपोषण?
हाँ तो लोक प्राधिकारी
ग़ैर-सरकारी संगठन: सरकारी धन से सारभूत वित्तपोषित?
हाँ तो लोक प्राधिकारी
तीनों नहीं
निकाय स्वयं लोक प्राधिकारी नहीं; उसकी सूचना किसी लोक प्राधिकारी के पास हो तो वहाँ से माँगें
मुख्य तथ्य
- अधिनियम
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम 22); संसद का अधिनियम
- स्वीकृति और पूर्ण प्रारंभ
- राष्ट्रपति की स्वीकृति 15 जून 2005; पूर्ण प्रारंभ 12 अक्टूबर 2005 (2005)
- धारा 1(3): तुरंत लागू धाराएँ
- 4(1), 5(1) और (2), 12, 13, 15, 16, 24, 27, 28; शेष 120वें दिन
- जम्मू-कश्मीर
- 31 अक्टूबर 2019 से धारा 1(2) में अपवर्जन के शब्द हटे; अब संपूर्ण भारत (2019)
- धारा 2 में परिभाषाएँ
- खंड (a) से (n), कुल 14
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026 (CIC का 18 नवंबर 2025 तक का संशोधित पाठ)
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- खंड का अक्षर ग़लत लिखना: सूचना (f), लोक प्राधिकारी (h), सूचना का अधिकार (j), तृतीय पक्षकार (n), सक्षम प्राधिकारी (e)। (i) अभिलेख और (j) सूचना का अधिकार आपस में गड़बड़ा जाते हैं।
- तृतीय पक्षकार की परिभाषा में "और इसमें लोक प्राधिकारी भी शामिल है" छोड़ देना। यही वाक्यांश पूरे अंक का अंतर बनता है।
- आज के पाठ में जम्मू-कश्मीर का अपवर्जन लिख देना। 31 अक्टूबर 2019 से धारा 1(2) में केवल संपूर्ण भारत है।
- सूचना का अधिकार केवल "जानकारी माँगने का हक़" कह देना। उत्तर में "held by or under the control of any public authority" और चारों तरीक़े (निरीक्षण, प्रति, नमूना, इलेक्ट्रॉनिक) लिखें।
- प्रत्येक निजी संस्था को लोक प्राधिकारी मान लेना। निजी संस्था तभी जब वह धारा 2(h) की किसी कसौटी पर खरी उतरे।
उदाहरण से समझें
उदाहरण (काल्पनिक)कौन सी संस्था लोक प्राधिकारी है? (काल्पनिक उदाहरण)
एक काल्पनिक ज़िले में चार संस्थाएँ हैं और चारों के बारे में किसी नागरिक को सूचना चाहिए। कौन-सी धारा 2(h) के घेरे में आती है, यह जाँचना है। (सभी पात्र और संस्थाएँ अपनी रची हुई हैं, किसी वास्तविक संस्था से संबंध नहीं।)
- 1. ज़िला परिषद का कार्यालय
- राज्य के पंचायत क़ानून से बना निकाय है, इसलिए खंड (c) की शर्त पूरी होती है। यह लोक प्राधिकारी है।
- 2. सरकारी अनुदान से मुख्यतः चलने वाला ग़ैर-सरकारी छात्रावास ट्रस्ट
- क़ानून से नहीं बना, पर उपयुक्त सरकार के धन से सारभूत रूप से वित्तपोषित NGO है। "includes" के उप-खंड (ii) से लोक प्राधिकारी माना जाएगा। यहाँ "सारभूत" का फ़ैसला तथ्यों पर होगा।
- 3. निजी कंपनी, जिसे सरकार ने एक बार ठेका दिया
- ठेका मिलना सारभूत वित्तपोषण नहीं है। कंपनी स्वयं लोक प्राधिकारी नहीं है, पर ठेके के दस्तावेज़ सरकारी विभाग के पास हों तो विभाग से माँगे जा सकते हैं, और कंपनी तृतीय पक्षकार होगी।
- 4. सरकारी आदेश से बनी राज्य स्तरीय समिति
- खंड (d) के अनुसार उपयुक्त सरकार के आदेश से गठित निकाय लोक प्राधिकारी है।
सीख
पहले यह देखें कि संस्था कैसे बनी (क़ानून, आदेश), फिर यह कि सरकार का स्वामित्व, नियंत्रण या सारभूत वित्तपोषण है या नहीं। इन दोनों में से कोई कसौटी पूरी हो तो संस्था धारा 2(h) में आती है।
चरणों में जाँचें
हल सहित उदाहरणकिसी संस्था के बारे में लोक प्राधिकारी की जाँच के चरण
दिया है
- प्रश्न: "क्या अमुक निकाय पर RTI अधिनियम लगता है?"
- 1चरण 1 यह देखें कि निकाय संविधान, संसद के क़ानून, राज्य के क़ानून या उपयुक्त सरकार की अधिसूचना या आदेश से बना है। एक भी हाँ हो तो खंड (h)(a) से (d) पूरा हुआ।
- 2चरण 2 यदि नहीं, तो देखें कि वह सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में है या सरकार के धन से सारभूत रूप से वित्तपोषित है। हाँ हो तो "includes" (i) लगता है।
- 3चरण 3 यदि वह ग़ैर-सरकारी संगठन है, तो देखें कि उपयुक्त सरकार का सीधा या अप्रत्यक्ष धन उसे सारभूत रूप से मिलता है। हाँ हो तो "includes" (ii) लगता है।
- 4चरण 4 ऊपर कुछ भी पूरा न हो तो निकाय स्वयं लोक प्राधिकारी नहीं है। फिर भी उसकी कोई सूचना किसी लोक प्राधिकारी के पास क़ानून के अधीन पहुँचती हो तो खंड (f) के अंतिम भाग से वह उस प्राधिकारी से माँगी जा सकती है।
निष्कर्ष: चार में से कोई एक कसौटी पूरी होने पर लोक प्राधिकारी की स्थिति बनती है। कसौटी (सारभूत वित्तपोषण) का अर्थ तथ्य-आधारित है और अधिनियम में अंकों में परिभाषित नहीं है।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2021RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में प्रयुक्त अभिव्यक्ति 'सूचना का अधिकार' को परिभाषित कीजिए।
आदर्श उत्तर
लोक प्राधिकारी के पास या नियंत्रण में सुलभ सूचना का अधिकार; निरीक्षण, प्रतियाँ, नमूने, इलेक्ट्रॉनिक रूप सहित।
2018RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत "तृतीय पक्षकार" से आप क्या समझते हैं?
आदर्श उत्तर
सूचना माँगने वाले नागरिक से भिन्न व्यक्ति; इसमें लोक प्राधिकारी भी शामिल है (धारा 2(n))।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
"सूचना" (information) को RTI अधिनियम के अनुसार परिभाषित कीजिए।
आदर्श उत्तर
किसी भी रूप की सामग्री: अभिलेख, राय, सलाह, संविदा, डेटा; क़ानून से सुलभ निजी निकाय की सूचना।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
"लोक प्राधिकारी" किसे कहते हैं?
आदर्श उत्तर
संविधान, संसद, राज्य-क़ानून या सरकारी आदेश से बनी संस्था; सरकार-नियंत्रित या सारभूत वित्तपोषित निकाय, NGO भी।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 1 के अनुसार RTI अधिनियम का विस्तार और प्रारंभ बताइए।
आदर्श उत्तर
अधिनियम संपूर्ण भारत पर लागू है; जम्मू-कश्मीर का अपवर्जन 31 अक्टूबर 2019 से हटा। धारा 4(1), 5(1) और (2), 12, 13, 15, 16, 24, 27, 28 तुरंत लागू हुए। शेष उपबंध 120वें दिन, यानी 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुए। पहले ढाँचा बना, फिर आवेदन का अधिकार शुरू हुआ।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
"सक्षम प्राधिकारी" कौन होता है? धारा 2(e) के अनुसार बताइए।
आदर्श उत्तर
सक्षम प्राधिकारी लोक सभा और विधान सभा के लिए अध्यक्ष, राज्य सभा और विधान परिषद के लिए सभापति, उच्चतम न्यायालय के लिए भारत का मुख्य न्यायमूर्ति, उच्च न्यायालय के लिए उसका मुख्य न्यायमूर्ति, अन्य संवैधानिक प्राधिकरणों के लिए राष्ट्रपति या राज्यपाल और धारा 239 के प्रशासक के लिए प्रशासक है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
RTI अधिनियम की धारा 2 की प्रमुख परिभाषाएँ समझाइए, विशेषकर सूचना, लोक प्राधिकारी, सूचना का अधिकार और तृतीय पक्षकार।
आदर्श उत्तर
धारा 2 में खंड (a) से (n) तक चौदह परिभाषाएँ हैं। खंड (f) में सूचना किसी भी रूप की सामग्री है, जैसे अभिलेख, ई-मेल, राय, सलाह और इलेक्ट्रॉनिक डेटा। खंड (h) में लोक प्राधिकारी संविधान, संसद, राज्य के क़ानून या सरकारी आदेश से बनी संस्था है, और सरकार-नियंत्रित या सारभूत वित्तपोषित निकाय व NGO भी। खंड (j) में सूचना का अधिकार लोक प्राधिकारी के पास या नियंत्रण में सुलभ सूचना पाने का अधिकार है; इसमें निरीक्षण, नोट-प्रतियाँ, नमूने और इलेक्ट्रॉनिक रूप शामिल हैं। खंड (n) में तृतीय पक्षकार आवेदक नागरिक से भिन्न व्यक्ति है, जिसमें लोक प्राधिकारी भी आता है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
नमूना प्रश्न: "RTI अधिनियम, 2005 की धारा 2 की प्रमुख परिभाषाओं की व्याख्या कीजिए।" पहली पंक्ति में बताएँ कि धारा 2 में खंड (a) से (n) तक चौदह परिभाषाएँ हैं और उनमें से चार सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हैं। (2 अंक में केवल पूछी गई एक परिभाषा, खंड के अक्षर सहित।)
मुख्य भाग
- खंड (f) सूचना: किसी भी रूप की सामग्री, उदाहरण सहित; निजी निकाय की सुलभ सूचना
- खंड (h) लोक प्राधिकारी: चार रास्ते (a) से (d) और "includes" की दो श्रेणियाँ
- खंड (j) सूचना का अधिकार: "held by or under the control of" और चार तरह की पहुँच
- खंड (n) तृतीय पक्षकार: आवेदक से भिन्न व्यक्ति, लोक प्राधिकारी सहित; आगे धारा 11 में उपयोग
निष्कर्ष
निष्कर्ष: ये परिभाषाएँ तय करती हैं कि किससे, क्या और किस रूप में माँगा जा सकता है; इसलिए अधिनियम का पूरा ढाँचा इन्हीं पर टिका है।
अतिरिक्त मूल्य
- एक छोटा उदाहरण: सरकारी अनुदान से चलने वाली संस्था कब लोक प्राधिकारी बनती है
- धारा 1(2) में 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर के अपवर्जन का हट जाना, एक पंक्ति में
त्वरित पुनरावृत्ति
- Right to Information Act, 2005 = 2005 का अधिनियम 22; संपूर्ण भारत पर लागू (जम्मू-कश्मीर अपवर्जन 31-10-2019 से हटा)
- धारा 1(3): धारा 4(1), 5(1)-(2), 12, 13, 15, 16, 24, 27, 28 तुरंत; शेष 120वें दिन, 12 अक्टूबर 2005
- धारा 2 में खंड (a) से (n): कुल 14 परिभाषाएँ
- 2(f) सूचना: any material in any form; निजी निकाय की वह सूचना भी जो लोक प्राधिकारी क़ानून से पा सकता है
- 2(h) लोक प्राधिकारी: (a) संविधान (b) संसद-क़ानून (c) राज्य-क़ानून (d) अधिसूचना या आदेश, तथा सरकार-नियंत्रित, सारभूत वित्तपोषित निकाय और NGO
- 2(j) सूचना का अधिकार: held by or under the control of public authority; निरीक्षण, नोट-प्रतियाँ, नमूने, इलेक्ट्रॉनिक रूप
- 2(n) तृतीय पक्षकार: आवेदक नागरिक से भिन्न व्यक्ति, लोक प्राधिकारी सहित
- 2(e) सक्षम प्राधिकारी: अध्यक्ष, सभापति, मुख्य न्यायमूर्ति, राष्ट्रपति या राज्यपाल, प्रशासक
- 2(a) उपयुक्त सरकार: केंद्र या संघ राज्यक्षेत्र के धन से केंद्र सरकार; राज्य के धन से राज्य सरकार
- अधिनियम में "substantially financed" की कोई संख्या-सीमा नहीं दी गई है
याद रखने योग्य शब्द
- सूचना (information)
- लोक प्राधिकारी (public authority)
- सूचना का अधिकार (right to information)
- तृतीय पक्षकार (third party)
- सक्षम प्राधिकारी (competent authority)
- उपयुक्त सरकार (appropriate Government)
- धारा 1(3) प्रारंभ