राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956: धारा 1 से 3, नाम, विस्तार, अप्रभावित क़ानून और परिभाषाएँ
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Rajasthan Land Revenue Act, 1956: Sections 1, 2; Section 3 interpretation (land record officer, municipality, nazul land, panchayat circle, revenue appellate authority, settlement officer, village); Sections 4-36, 40A, 74-87, 106-137, 142-183." इस पृष्ठ पर धारा 1 (संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ), धारा 2 (अधिनियम से अप्रभावित क़ानून) और धारा 3 (परिभाषाएँ) हैं। अधिनियम के छह पृष्ठ: (1) धारा 1 से 3; (2) धारा 4 से 36; (3) धारा 40A और 74 से 87; (4) धारा 106 से 127; (5) धारा 128 से 137; (6) धारा 142 से 183। यह सामग्री परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- इसी पृष्ठ से 2021 के पेपर III में 2 अंक का प्रश्न आया: "नजूल भूमि" पद की परिभाषा (धारा 3, खंड (i-b))। उपलब्ध छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) में राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम से चार प्रश्न आए हैं, वर्ष 2018, 2021 और 2024; शेष तीन (अधिकार अभिलेख, वार्षिक रजिस्टर, नामांतरण) अगले पृष्ठों की धाराओं से हैं।
- विधि खंड के प्रश्न परिभाषा-प्रधान होते हैं और 2 अंक में लगभग 15 शब्दों का उत्तर माँगते हैं। इसलिए खंड का क्रमांक, अंग्रेज़ी का सटीक पद और परिभाषा की शर्तें याद हों तो पूरे अंक मिलते हैं।
- धारा 3 के सात शब्द आगे हर अध्याय में लौटते हैं: भूमि अभिलेख अधिकारी धारा 108 से 136 में, निपटारा अधिकारी धारा 145 से 183 में, राजस्व अपीलीय प्राधिकारी धारा 20A, 27, 75, 76 और 78 में। यहाँ की पकड़ बाक़ी पाँच पृष्ठ आसान कर देती है।
पहले सरल भाषा में
किसी नई सोसायटी में रहने जाएँ तो नियम-पुस्तिका के पहले पन्ने सबसे पहले पढ़े जाते हैं: यह पुस्तिका किस इलाके पर लागू है, कब से लागू है, किन पुराने नियमों को नहीं छूती, और "सदस्य", "पदाधिकारी" या "साझा क्षेत्र" जैसे शब्दों का मतलब क्या है। राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (Rajasthan Land Revenue Act, 1956) के शुरुआती तीन पन्ने ठीक यही काम करते हैं।
यह अधिनियम राज्य में भूमि-प्रशासन की मुख्य संहिता है। इसके अध्याय राजस्व मंडल (Board of Revenue), राजस्व न्यायालयों और अधिकारियों, उनकी प्रक्रिया, अपील और पुनरीक्षण, भूमि, सर्वेक्षण और अभिलेख, बंदोबस्त (settlement), संपदा के बँटवारे और राजस्व की वसूली तक फैले हैं। सिलेबस ने इनमें से चुनी हुई धाराएँ रखी हैं, और इस पृष्ठ पर उसकी पहली कड़ी है: धारा 1, 2 और 3।
तीनों धाराएँ छोटी हैं, पर काम अलग-अलग हैं। धारा 1 बताती है कि अधिनियम का नाम क्या है, कहाँ चलेगा और कब से। धारा 2 बताती है कि कौन-से पुराने क़ानून जस के तस रहेंगे। धारा 3 शब्दकोश है: कलेक्टर किस हैसियत से "भूमि अभिलेख अधिकारी" है, "नजूल भूमि" क्या होती है, और "गाँव" का अर्थ क्या है।
धारा 1: संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ (Short title, extent and commencement)
धारा 1 में तीन उप-धाराएँ हैं। उप-धारा (1) के अनुसार इस अधिनियम को "The Rajasthan Land Revenue Act, 1956" कहा जा सकता है। उप-धारा (2) कहती है कि यह राजस्थान राज्य के संपूर्ण क्षेत्र पर लागू है। उप-धारा (3) कहती है कि यह उस तारीख़ से लागू होगा जो राज्य सरकार राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना द्वारा नियत करे।
इसका सीधा मतलब यह है कि अधिनियम पारित होना और लागू होना दो अलग घटनाएँ थीं: तारीख़ तय करने का अधिकार राज्य सरकार के पास रखा गया था। अधिनियम 1956 का राजस्थान अधिनियम संख्या 15 है। प्रारंभ की सटीक तारीख़ के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ और राजपत्र की अधिसूचना।
धारा 1 एक नज़र में
| उप-धारा | विषय | मुख्य शब्द (English) | याद रखने की बात |
|---|---|---|---|
| (1) | संक्षिप्त नाम | "The Rajasthan Land Revenue Act, 1956" | नाम में वर्ष 1956 है |
| (2) | विस्तार | extends to the whole of the State of Rajasthan | पूरे राज्य पर लागू, कुछ हिस्से अपवाद नहीं |
| (3) | प्रारंभ | such date as the State Government may by notification in the Official Gazette appoint | प्रारंभ की तारीख़ राज्य सरकार की अधिसूचना से तय |
धारा 2: कौन-से क़ानून अप्रभावित रहेंगे (Enactments not affected by Act)
धारा 2 का शीर्षक ही उसका सार है। इसके अनुसार इस अधिनियम की कोई बात कुछ गिनाए गए पुराने क़ानूनों के चलने को न प्रभावित करेगी, न सीमित करेगी। यह वैसा ही है जैसे घर में नई नियम-पुस्तिका आ जाए, पर पुरानी वसीयत और बँटवारे के काग़ज़ों की मान्यता वैसी ही बनी रहे।
गिनाए गए क़ानून भूमि-सुधार, जागीर-उन्मूलन, ज़मींदारी-उन्मूलन, बंदोबस्त, काश्तकारी और पंचायत से जुड़े हैं। इनके साथ एक खुली श्रेणी भी है: "कोई अन्य क़ानून या अधिनियम, जो धारा 263 द्वारा निरसित न हुआ हो।" धारा 263 निरसन और व्यावृत्ति (repeal and savings) की धारा है। इसलिए धारा 2 के बाहर के किसी क़ानून को बचाए रखने की कसौटी यही है कि वह धारा 263 से निरसित हुआ या नहीं।
धारा 2 में नामित सात क़ानून
| क्रम | क़ानून (अधिनियम संख्या सहित) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 1 | Rajasthan Land Reforms and Resumption of Jagirs Act, 1952 (Rajasthan Act VI of 1952) | जागीर-सुधार का राजस्थान का अपना क़ानून |
| 2 | Ajmer Abolition of Intermediaries and Land Reforms Act, 1955 (Ajmer Act 3 of 1955) | अजमेर क्षेत्र का भूमि-सुधार क़ानून |
| 3 | Bombay Merged Territories and Areas (Jagirs Abolition) Act, 1953 (Bombay Act XXXIX of 1954) | केवल उस सीमा तक, जहाँ तक वह आबू क्षेत्र (Abu area) पर लागू होता है |
| 4 | Madhya Bharat Zamindari Abolition Act, Samvat 2008 (Madhya Bharat Act 28 of 1954) | केवल उस सीमा तक, जहाँ तक वह सुनेल क्षेत्र (sunel area) पर लागू होता है |
| 5 | Rajasthan Land Summary Settlement Act, 1953 (Rajasthan Act XIX of 1953) | संक्षिप्त बंदोबस्त का क़ानून |
| 6 | Rajasthan Tenancy Act, 1955 (Rajasthan Act 3 of 1955) | काश्तकारी का मुख्य क़ानून; धारा 3 के खंड (vii) के अनुसार इसमें परिभाषित शब्द इस अधिनियम में वही अर्थ रखते हैं |
| 7 | Rajasthan Panchayat Act, 1953 (Rajasthan Act XXI of 1953) | पंचायत क़ानून |
अधिनियम संख्याएँ और नाम धारा 2 के पाठ के अनुसार।
धारा 3: परिभाषाएँ (Interpretation)
धारा 3 इन शब्दों से शुरू होती है: "In this Act, unless the subject or context otherwise requires", यानी परिभाषा तभी लागू होगी जब संदर्भ कुछ और न माँगे। सिलेबस ने इस धारा के सात शब्द चुने हैं: भूमि अभिलेख अधिकारी (Land Records Officer), नगरपालिका (Municipality), नजूल भूमि (Nazul Land), पंचायत सर्किल (Panchayat circle), राजस्व अपीलीय प्राधिकारी (Revenue Appellate Authority), निपटारा अधिकारी (Settlement Officer) और गाँव (Village)।
इन सात को दो टोकरियों में रखकर याद करें। तीन पद-नाम हैं: भूमि अभिलेख अधिकारी, राजस्व अपीलीय प्राधिकारी, निपटारा अधिकारी। चार क्षेत्र-नाम हैं: नगरपालिका, नजूल भूमि, पंचायत सर्किल, गाँव। क्षेत्र-नाम आपस में गुँथे हैं, क्योंकि नजूल भूमि की परिभाषा में ही नगरपालिका, पंचायत सर्किल और गाँव तीनों का ज़िक्र आता है।
धारा 3 की सात परिभाषाएँ
| खंड | शब्द | अधिनियम का अर्थ | आगे कहाँ लौटता है |
|---|---|---|---|
| (i) | Land Records Officer (भूमि अभिलेख अधिकारी) | "shall mean the Collector and shall include Additional or Assistant Land Records Officer": कलेक्टर, और उसमें अतिरिक्त या सहायक भूमि अभिलेख अधिकारी भी | धारा 20(a)(i): कलेक्टर ज़िले का भूमि अभिलेख अधिकारी भी है; धारा 108 से 136 के अधिकांश काम |
| (i-a) | Municipality (नगरपालिका) | वही अर्थ, जो Rajasthan Town Municipalities Act, 1951 (Rajasthan Act 23 of 1951) या तत्समय लागू किसी अन्य नगरपालिका क़ानून ने दिया है | नजूल भूमि की सीमा तय करने में, खंड (i-b) |
| (i-b) | Nazul Land (नजूल भूमि) | "abadi land within the limits of a municipality or a panchayat circle or a village, town or city, vesting in the State Government": नगरपालिका, पंचायत सर्किल, गाँव, कस्बे या शहर की सीमा की आबादी भूमि, जो राज्य सरकार में निहित हो | परीक्षा में प्रत्यक्ष परिभाषा-प्रश्न (2021) |
| (i-c) | Panchayat circle (पंचायत सर्किल) | वही अर्थ, जो Rajasthan Panchayat Act, 1953 (Rajasthan Act 21 of 1953) या तत्समय लागू किसी अन्य पंचायत क़ानून ने दिया है | नजूल भूमि की सीमा तय करने में, खंड (i-b) |
| (iii-a) | Revenue Appellate Authority (राजस्व अपीलीय प्राधिकारी) | धारा 20A के अधीन इस रूप में नियुक्त अधिकारी | धारा 20A, 27, 75, 76 और 78 |
| (iv) | Settlement Officer (निपटारा अधिकारी) | "shall include an Assistant Settlement Officer": इसमें सहायक निपटारा अधिकारी भी शामिल | धारा 145 से 183 (बंदोबस्त अध्याय) |
| (v) | Village (गाँव) | "the tract of land which has been recognised and recorded, or may hereafter be recognised and recorded to be a village": भूमि का वह भू-भाग जो गाँव के रूप में मान्य और अभिलिखित हो चुका है या आगे हो | भूमि अभिलेख और मानचित्र हर गाँव के लिए बनते हैं (धारा 112, 113) |
नजूल भूमि (Nazul Land) विस्तार से [धारा 3, खंड (i-b)]
नजूल शब्द सुनते ही अक्सर शहर के बीच की सरकारी ज़मीन याद आती है, पर परिभाषा केवल शहर तक सीमित नहीं है। अधिनियम की परिभाषा में तीन शर्तें एक साथ लागू होती हैं। पहली, भूमि "आबादी" (abadi) की हो, यानी बसावट वाले क्षेत्र की। दूसरी, वह किसी नगरपालिका, पंचायत सर्किल, गाँव, कस्बे या शहर की सीमा के भीतर हो। तीसरी, वह राज्य सरकार में निहित (vesting in the State Government) हो। तीनों में से एक भी शर्त छूटे तो भूमि इस परिभाषा में नजूल नहीं मानी जाएगी।
"आबादी" का अर्थ अधिनियम के भूमि वाले अध्याय की धारा 103(b) में दिया गया है। उसके अनुसार आबादी गाँव, कस्बे या शहर का बसावट-क्षेत्र है और इसमें उसका स्थल, धारा 92 के अधीन आबादी के विकास के लिए आरक्षित भूमि, तथा भवन-निर्माण के लिए रखी गई भूमि भी शामिल है, चाहे उस पर भवन बन चुका हो या नहीं। नजूल की परिभाषा समझने के लिए यह एक पंक्ति काफ़ी है।
"निहित" होने का अर्थ है कि भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार में है। इसलिए किसी परिवार की अपनी खरीदी हुई आबादी भूमि, चाहे वह शहर के बीचों-बीच हो, नजूल नहीं है। और किसी किसान का खेत, चाहे वह पंचायत सर्किल के भीतर हो, आबादी भूमि न होने से नजूल नहीं है। परिभाषा "कहाँ" और "किसकी" दोनों सवालों का जवाब माँगती है।
पद-संबंधी तीन परिभाषाएँ: भूमि अभिलेख अधिकारी, राजस्व अपीलीय प्राधिकारी, निपटारा अधिकारी
भूमि अभिलेख अधिकारी (Land Records Officer) की परिभाषा में एक अनोखी बात है: अधिनियम पद के लिए अलग अधिकारी नहीं बनाता, बल्कि कहता है कि यह पद कलेक्टर ही है और उसमें अतिरिक्त या सहायक भूमि अभिलेख अधिकारी भी आते हैं। धारा 20(a)(i) इसे पक्का करती है: राज्य सरकार हर ज़िले में कलेक्टर नियुक्त करेगी जो ज़िले का भूमि अभिलेख अधिकारी भी होगा। यानी कलेक्टर की दो भूमिकाएँ हैं: ज़िले के राजस्व प्रशासन का मुखिया और ज़िले के भू-अभिलेखों का अधिकारी।
राजस्व अपीलीय प्राधिकारी (Revenue Appellate Authority) कोई परंपरागत पद-नाम नहीं, बल्कि इस अधिनियम से बना पद है। धारा 3(iii-a) कहती है कि यह वह अधिकारी है जिसे धारा 20A के अधीन इस रूप में नियुक्त किया गया हो। धारा 20A का विस्तार अगले पृष्ठ पर है; यहाँ इतना याद रखें कि अपीलों की सीढ़ी में यह अधिकारी धारा 75 और 76 में बार-बार आता है।
निपटारा अधिकारी (Settlement Officer) की परिभाषा सबसे छोटी है, पर "includes" शब्द पर ध्यान दें: सहायक निपटारा अधिकारी (Assistant Settlement Officer) अलग पद होते हुए भी इसी परिभाषा में समाहित है। बंदोबस्त के पूरे अध्याय में, लगान की दरें तय करने से लेकर परचे बाँटने तक, यही अधिकारी काम करता है।
नगरपालिका, पंचायत सर्किल और गाँव
तीनों शब्द अलग तरीके से परिभाषित हैं। नगरपालिका और पंचायत सर्किल की परिभाषा अधिनियम ने स्वयं नहीं गढ़ी, बल्कि दूसरे क़ानूनों से उधार ली है: नगरपालिका के लिए Rajasthan Town Municipalities Act, 1951 या तत्समय लागू कोई अन्य नगरपालिका क़ानून, और पंचायत सर्किल के लिए Rajasthan Panchayat Act, 1953 या तत्समय लागू कोई अन्य पंचायत क़ानून। "तत्समय लागू किसी अन्य क़ानून" वाले शब्दों का सीधा असर यह है कि पुराने क़ानून के बदल जाने पर भी परिभाषा खाली नहीं पड़ती, वह चालू क़ानून से अर्थ लेती है।
गाँव (Village) का रास्ता अलग है। वह लोगों की बसावट नहीं, बल्कि भूमि का एक भू-भाग (tract of land) है, जिसे गाँव के रूप में मान्यता मिली हो और जो अभिलिखित हो। "recognised and recorded" दो शब्द साथ आते हैं: राजस्व अभिलेखों में दर्ज हुए बिना कोई भू-भाग इस अधिनियम का "गाँव" नहीं बनता। परिभाषा "भविष्य में मान्य और अभिलिखित" होने वाले भू-भागों को भी समेटती है, इसलिए नए गाँव बनने पर परिभाषा को बदलना नहीं पड़ता।
चार क्षेत्र-शब्द साथ-साथ
| शब्द | अर्थ किससे आता है | किस पर टिका है | नजूल की परिभाषा में भूमिका |
|---|---|---|---|
| नगरपालिका (Municipality) | Rajasthan Town Municipalities Act, 1951 या तत्समय लागू अन्य नगरपालिका क़ानून | दूसरे क़ानून का अर्थ | सीमा का एक विकल्प |
| पंचायत सर्किल (Panchayat circle) | Rajasthan Panchayat Act, 1953 या तत्समय लागू अन्य पंचायत क़ानून | दूसरे क़ानून का अर्थ | सीमा का दूसरा विकल्प |
| गाँव (Village) | इसी अधिनियम का खंड (v) | मान्य और अभिलिखित भू-भाग | सीमा का तीसरा विकल्प (साथ में कस्बा और शहर) |
| नजूल भूमि (Nazul Land) | इसी अधिनियम का खंड (i-b) | आबादी भूमि जो राज्य सरकार में निहित हो | स्वयं परिभाषित पद |
नजूल भूमि की जाँच: प्रवाह-चित्र
आबादी (बसावट) की भूमि?
नहीं तो नजूल नहीं
नगरपालिका, पंचायत सर्किल, गाँव, कस्बे या शहर की सीमा में?
नहीं तो नजूल नहीं
राज्य सरकार में निहित?
नहीं तो नजूल नहीं
तीनों हाँ
धारा 3(i-b) के अनुसार नजूल भूमि
अधिनियम का नक्शा: इस सिलेबस की धाराएँ
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956
धारा 1 से 3: प्रारंभिक
- नाम, विस्तार, प्रारंभ
- अप्रभावित क़ानून
- परिभाषाएँ
धारा 4 से 36: राजस्व मंडल, न्यायालय और अधिकारी
- राजस्व मंडल
- प्रादेशिक विभाजन
- अधिकारियों की नियुक्ति, शक्तियाँ
- पटवारी और कानूनगो
धारा 40A और 74 से 87
- लंबरदारों की सेवा समाप्त
- अपील
- पुनरीक्षण और पुनर्विलोकन
धारा 106 से 137: सर्वेक्षण और अभिलेख
- सर्वेक्षण और सीमाचिह्न
- अधिकार अभिलेख
- वार्षिक रजिस्टर
धारा 142 से 183: बंदोबस्त
- लगान-दरें
- परचे
- अवधि
मुख्य तथ्य
- अधिनियम
- राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (1956 का राजस्थान अधिनियम संख्या 15)
- विस्तार
- संपूर्ण राजस्थान राज्य, धारा 1(2)
- प्रारंभ
- राज्य सरकार की राजपत्र अधिसूचना से नियत तारीख़, धारा 1(3)
- धारा 2 में नामित क़ानून
- सात, साथ में "अन्य क़ानून जो धारा 263 से निरसित न हुए हों"
- धारा 3 में सिलेबस के खंड
- (i), (i-a), (i-b), (i-c), (iii-a), (iv), (v)
- नजूल भूमि
- खंड (i-b): आबादी भूमि, सीमा के भीतर, राज्य सरकार में निहित
- हाल के संशोधन
- 2021, 2022 और 2025 के संशोधन अधिनियमों में धारा 90A, 98, 100A और 261 बदली या जोड़ी गईं; इस पृष्ठ की धाराएँ नहीं (2021, 2022, 2025)
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
राजस्थान का पहलू
यह अधिनियम राजस्थान राज्य विधान-मंडल का है और धारा 1(2) के अनुसार संपूर्ण राजस्थान पर लागू है। विश्लेषण: धारा 2 में आबू और सुनेल क्षेत्रों का नाम लेकर अन्य राज्यों के पुराने क़ानूनों को बचाना इस बात की झलक है कि राज्य के एकीकरण के समय अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग भूमि क़ानून चलते थे। अधिनियम का पाठ राज्य सरकार की भू-राजस्व वेबसाइट (landrevenue.rajasthan.gov.in) पर भी उपलब्ध है (देखा गया: 2 अक्टूबर 2026)।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- नजूल भूमि को केवल "सरकारी भूमि" लिख देना। परिभाषा की तीन शर्तें हैं: आबादी की भूमि, नगरपालिका, पंचायत सर्किल, गाँव, कस्बे या शहर की सीमा के भीतर, और राज्य सरकार में निहित। उत्तर में तीनों शब्द आने चाहिए।
- भूमि अभिलेख अधिकारी को कलेक्टर से अलग पद मान लेना। धारा 3(i) में यही पद कलेक्टर है, और उसमें अतिरिक्त या सहायक भूमि अभिलेख अधिकारी शामिल हैं।
- पंचायत सर्किल को "गाँव" का पर्याय मान लेना। पंचायत सर्किल का अर्थ पंचायत क़ानून से आता है, जबकि गाँव अभिलिखित भू-भाग है।
- निपटारा अधिकारी की परिभाषा में "सहायक निपटारा अधिकारी भी शामिल" वाला अंश छोड़ देना।
- धारा 2 में सातों नामित क़ानूनों की सूची को "सभी भूमि क़ानून" समझना। सूची के साथ यह शर्त भी है कि अन्य क़ानून तभी अप्रभावित रहते हैं जब धारा 263 से निरसित न हुए हों।
उदाहरण से समझें
उदाहरण (काल्पनिक)कौन-सी भूमि नजूल है? (काल्पनिक उदाहरण)
एक काल्पनिक क़स्बे में चार भूखंडों के बारे में पूछा गया है कि क्या वे धारा 3(i-b) के अर्थ में नजूल भूमि हैं। (सभी स्थान और पात्र अपनी रचना हैं, किसी वास्तविक भूमि से संबंध नहीं।)
- भूखंड क: नगरपालिका सीमा के भीतर की बसावट वाली भूमि, राज्य सरकार में निहित
- तीनों शर्तें पूरी: आबादी, सीमा के भीतर, राज्य सरकार में निहित। नजूल भूमि है।
- भूखंड ख: पंचायत सर्किल के भीतर के गाँव की आबादी भूमि, राज्य सरकार में निहित
- परिभाषा "or a panchayat circle or a village" तक जाती है, इसलिए गाँव की आबादी भी नजूल हो सकती है। नजूल भूमि है।
- भूखंड ग: शहर के बीच की आबादी भूमि, जिसका स्वामी एक परिवार है
- आबादी और सीमा की शर्त पूरी, पर राज्य सरकार में निहित नहीं। नजूल नहीं।
- भूखंड घ: पंचायत सर्किल के भीतर किसान का खेत
- यह आबादी भूमि नहीं है और राज्य सरकार में निहित भी नहीं। नजूल नहीं।
सीख
नजूल भूमि पहचानने के लिए "किस जगह" के साथ "किसकी" पूछना अनिवार्य है। केवल सीमा देखकर या केवल स्वामित्व देखकर निर्णय देना ग़लत होगा।
चरणों में जाँचें
हल सहित उदाहरणनजूल भूमि की चार-चरण जाँच
दिया है
- प्रश्न: "क्या अमुक भूमि नजूल भूमि है?"
- 1चरण 1 जाँचें कि भूमि आबादी (बसावट वाले क्षेत्र) की है या नहीं। खेती की भूमि हो तो यहीं रुकें: नजूल नहीं।
- 2चरण 2 जाँचें कि वह नगरपालिका, पंचायत सर्किल, गाँव, कस्बे या शहर में से किसी की सीमा के भीतर है। नहीं हो तो नजूल नहीं।
- 3चरण 3 जाँचें कि वह राज्य सरकार में निहित है। किसी व्यक्ति या संस्था की निजी भूमि हो तो नजूल नहीं।
- 4चरण 4 तीनों उत्तर "हाँ" हों तो भूमि धारा 3(i-b) के अर्थ में नजूल है।
निष्कर्ष: नजूल भूमि वही है जो आबादी की हो, सीमा के भीतर हो और राज्य सरकार में निहित हो।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2021RAS मुख्य परीक्षापेपर III2 अंक
'नजूल भूमि' पद की परिभाषा दीजिए।
आदर्श उत्तर
नगरपालिका, पंचायत सर्किल या गाँव-कस्बा-शहर की सीमा की आबादी भूमि, जो राज्य सरकार में निहित हो।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
"भूमि अभिलेख अधिकारी" का अर्थ बताइए।
आदर्श उत्तर
धारा 3(i): कलेक्टर, जिसमें अतिरिक्त और सहायक भूमि अभिलेख अधिकारी भी शामिल; ज़िले में यही कलेक्टर है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
"राजस्व अपीलीय प्राधिकारी" किसे कहते हैं?
आदर्श उत्तर
धारा 20A के अधीन नियुक्त अधिकारी, जो अपीलों, पुनरीक्षणों और संदर्भों की सुनवाई करता है (धारा 3(iii-a))।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 3 के अनुसार "गाँव" और "पंचायत सर्किल" का अर्थ बताइए।
आदर्श उत्तर
गाँव वह भू-भाग है जो गाँव के रूप में मान्य और अभिलिखित हो चुका है या आगे हो। पंचायत सर्किल का अर्थ Rajasthan Panchayat Act, 1953 या तत्समय लागू अन्य पंचायत क़ानून से आता है। अर्थात गाँव अभिलेख पर टिका है, पंचायत सर्किल पंचायत क़ानून पर।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 1 से 3 की मुख्य बातें लिखिए।
आदर्श उत्तर
धारा 1 अधिनियम का नाम, संपूर्ण राजस्थान में विस्तार और राज्य सरकार की राजपत्र अधिसूचना से प्रारंभ तय करती है। धारा 2 सात नामित क़ानूनों, जैसे काश्तकारी अधिनियम 1955 और पंचायत अधिनियम 1953, तथा धारा 263 से निरसित न हुए अन्य क़ानूनों को अप्रभावित रखती है। धारा 3 परिभाषाएँ देती है: भूमि अभिलेख अधिकारी यानी कलेक्टर, निपटारा अधिकारी में सहायक शामिल, गाँव अभिलिखित भू-भाग, और नजूल भूमि यानी सीमा के भीतर की आबादी भूमि, जो राज्य सरकार में निहित हो। ये परिभाषाएँ आगे के अध्यायों की नींव हैं, इसलिए इन्हें पढ़े बिना बाक़ी धाराओं के अर्थ अधूरे रहते हैं।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
नमूना प्रश्न: "राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 3 की प्रमुख परिभाषाओं की व्याख्या कीजिए।" पहली पंक्ति में लिखें कि धारा 3 में सिलेबस के सात शब्द हैं, तीन पद-संबंधी और चार क्षेत्र-संबंधी। (2 अंक में केवल पूछी गई एक परिभाषा, खंड-क्रमांक के साथ।)
मुख्य भाग
- भूमि अभिलेख अधिकारी: कलेक्टर, जिसमें अतिरिक्त और सहायक शामिल
- निपटारा अधिकारी: सहायक निपटारा अधिकारी सहित; राजस्व अपीलीय प्राधिकारी: धारा 20A का अधिकारी
- गाँव: मान्य और अभिलिखित भू-भाग; नगरपालिका और पंचायत सर्किल: अन्य क़ानूनों से अर्थ
- नजूल भूमि: आबादी, सीमा के भीतर, राज्य सरकार में निहित
निष्कर्ष
निष्कर्ष: ये परिभाषाएँ तय करती हैं कि किस अधिकारी के पास कौन-सा काम जाएगा और किस भूमि पर कौन-से उपबंध लगेंगे, इसलिए आगे के अध्यायों की समझ इन्हीं पर टिकी है।
अतिरिक्त मूल्य
- एक पंक्ति का उदाहरण: शहर की निजी आबादी भूमि नजूल नहीं, क्योंकि वह राज्य सरकार में निहित नहीं।
- खंड-क्रमांक, जैसे (i-b), लिखने से उत्तर सटीक दिखता है।
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राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 1 और धारा 5: परिभाषाएँ (फसलें, सायर, कृषक, अतिचारी सहित)
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 14 से 17A और 31 से 37: काश्तकारों के वर्ग, खातेदारी अधिकार और काश्तकार के अधिकार
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 38 से 54A: उत्तराधिकार, बिक्री-बंधक, पट्टा देने की सीमा, अदला-बदली और जोत का विभाजन
ज़िला राजस्व प्रशासन: संभाग, ज़िला, उपखंड, तहसील और पटवार मंडल
राजस्थान राजस्व मंडल (Board of Revenue), अजमेर
ज़िला कलेक्टर: राजस्व, क़ानून-व्यवस्था और विकास प्रशासन
त्वरित पुनरावृत्ति
- राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 = 1956 का राजस्थान अधिनियम संख्या 15; संपूर्ण राजस्थान पर लागू (धारा 1(2))
- धारा 1(3): प्रारंभ राज्य सरकार की राजपत्र अधिसूचना से
- धारा 2: सात नामित क़ानून अप्रभावित, साथ में कोई भी अन्य क़ानून जो धारा 263 से निरसित न हुआ हो
- धारा 3 के सात सिलेबस-शब्द: (i) LRO, (i-a) municipality, (i-b) nazul land, (i-c) panchayat circle, (iii-a) RAA, (iv) SO, (v) village
- LRO = कलेक्टर (+ अतिरिक्त/सहायक); धारा 20(a)(i) में कलेक्टर ही ज़िले का LRO
- RAA = धारा 20A के अधीन नियुक्त अधिकारी
- SO में Assistant Settlement Officer शामिल
- Village = tract of land recognised and recorded (मान्य और अभिलिखित भू-भाग)
- Nazul Land = abadi land within limits of municipality/panchayat circle/village, town or city, vesting in State Government
- Municipality और panchayat circle के अर्थ दूसरे क़ानूनों (या तत्समय लागू अन्य क़ानून) से
याद रखने योग्य शब्द
- नजूल भूमि
- आबादी
- निहित
- भूमि अभिलेख अधिकारी
- पंचायत सर्किल
- धारा 3(i-b)