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राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956: धारा 106 से 127, सर्वेक्षण, अभिलेख-कार्यवाही और अधिकार अभिलेख

3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Rajasthan Land Revenue Act, 1956: Sections 1, 2; Section 3 interpretation (land record officer, municipality, nazul land, panchayat circle, revenue appellate authority, settlement officer, village); Sections 4-36, 40A, 74-87, 106-137, 142-183." इस पृष्ठ पर धारा 106 से 127 हैं: सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही, सीमा-चिह्न, नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिका, तथा अधिकार अभिलेख (Record of Rights)। अधिनियम के छह पृष्ठ: (1) धारा 1 से 3; (2) धारा 4 से 36; (3) धारा 40A और 74 से 87; (4) धारा 106 से 127; (5) धारा 128 से 137; (6) धारा 142 से 183। यह सामग्री परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • यहाँ से सीधा प्रश्न आ चुका है: 2021 (पेपर III) में 5 अंक का प्रश्न "अधिकार अभिलेख की अन्तर्वस्तु बताइए"। उसका पूरा उत्तर धारा 114 में है और इस पृष्ठ पर हल सहित दिया गया है।
  • धारा 114 और 121 में खेवट और खतौनी की सूची है। ये दोनों शब्द राजस्थान के हर भू-अभिलेख प्रश्न की रीढ़ हैं, इसलिए इन्हें अर्थ सहित याद रखें।
  • यह पृष्ठ बताता है कि अभिलेख बनता कैसे है। अगले पृष्ठ पर वह प्रक्रिया है जिससे यही अभिलेख हर साल अद्यतन होता है, यानी वार्षिक रजिस्टर और नामांतरण।

पहले सरल भाषा में

गाँव की ज़मीन का हिसाब-किताब कैसे रखा जाता है? सोचिए एक बड़ी बही। उसमें पहले पन्ने पर गाँव का नक़्शा है और हर खेत की सीमा। फिर एक सूची है कि गाँव की ज़मीन के मालिक (संपदाधारक) कौन हैं और किसका कितना हिस्सा है। उसके बाद दूसरी सूची है कि असल में खेत जोत कौन रहा है और किस हैसियत से। एक तीसरी सूची उन लोगों की है जो ज़मीन बिना लगान या राजस्व दिए रखते हैं। इसी पूरे ढाँचे को अधिनियम अधिकार अभिलेख (Record of Rights) कहता है।

यह बही रोज़-रोज़ नहीं बनती। जब राज्य सरकार किसी इलाक़े में सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण कराती है, या पुराने अभिलेख का पुनरीक्षण कराती है, तभी भूमि अभिलेख अधिकारी (Land Records Officer) नया अभिलेख तैयार करता है। धारा 106 से 127 इसी विशेष अभियान के नियम हैं: कौन शुरू करेगा, कौन अधिकारी रहेगा, सीमा कैसे तय होगी, नक़्शा कैसा बनेगा, अभिलेख में क्या-क्या लिखा जाएगा और अगर किसी बात पर विवाद हो तो अभिलेख में क्या दर्ज होगा।

सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही: धारा 106 से 109

धारा 106: राज्य सरकार राजपत्र की अधिसूचना से निर्देश दे सकती है कि किसी स्थानीय क्षेत्र का सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण (survey or resurvey) हो। अधिसूचना की तारीख़ से वह क्षेत्र "सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही" (survey and record operations) के अधीन माना जाता है, जब तक दूसरी अधिसूचना से वे कार्यवाहियाँ बंद न घोषित हों।

धारा 107: जिस क्षेत्र का सर्वेक्षण हो चुका है, उसमें राज्य सरकार इसी तरह अभिलेखों के सामान्य या आंशिक पुनरीक्षण का निर्देश दे सकती है। तब वह क्षेत्र केवल "अभिलेख-कार्यवाही" (record operations) के अधीन होता है। इस प्रकार फ़र्क़ सीधा है: धारा 106 में नया सर्वेक्षण, धारा 107 में सर्वेक्षण हो चुके क्षेत्र का अभिलेख-पुनरीक्षण।

धारा 108: अधिसूचना जारी होते ही राज्य सरकार को कार्यवाहियों के प्रभारी के रूप में अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी (Additional Land Records Officer) नियुक्त करना होता है, जब तक उस क्षेत्र के लिए स्थायी अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी पहले से न हो। वह चाहे तो जितने उचित लगें उतने सहायक भूमि अभिलेख अधिकारी भी नियुक्त कर सकती है। धारा 109: ये कार्यवाहियाँ भू-अभिलेख निदेशक के प्रभार में रहती हैं और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित ढंग से होती हैं।

सीमा-चिह्न और सीमा-विवाद: धारा 110 और 111

धारा 110(1): जब कोई क्षेत्र सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही में हो, भूमि अभिलेख अधिकारी उद्घोषणा जारी करके सभी संपदाधारकों और काश्तकारों को बताता है कि गाँव और खेतों की सीमाओं के सर्वेक्षण में माँगी गई सहायता देना उनका दायित्व है। धारा 110(2): वह उद्घोषणा में सीमा-चिह्नों के बारे में निर्देश दे सकता है जो पंद्रह दिन के भीतर पूरा करना होता है। उनके न मानने पर अधिकारी स्वयं सीमा-चिह्न खड़े करवा सकता है, और ख़र्च उन्हीं से लिया जाता है।

धारा 111(1) सीमा-विवाद के निपटारे का क्रम तय करती है। भूमि अभिलेख अधिकारी पहले मौजूदा सर्वेक्षण-नक़्शों के आधार पर निर्णय देता है। जहाँ यह संभव न हो या नक़्शे उपलब्ध न हों, वहाँ वास्तविक क़ब्ज़े के आधार पर। धारा 111(2): अगर जाँच के दौरान अधिकारी यह तय न कर पाए कि क़ब्ज़ा किसके पास है, या यह दिखे कि जाँच शुरू होने से पिछले तीन महीने में वैध क़ाबिज़ों को ग़लत ढंग से बेदख़ल करके क़ब्ज़ा लिया गया है, तो वह संक्षिप्त जाँच (summary inquiry) से तय करता है कि क़ब्ज़े का सबसे बेहतर हक़दार कौन है, और उसी के अनुसार सीमा तय करता है।

नक़्शा, क्षेत्र-पुस्तिका और अधिकार अभिलेख: धारा 112 से 114

धारा 112: सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही के अधीन हर क्षेत्र या उसके हिस्से के लिए भूमि अभिलेख अधिकारी राज्य सरकार के नियमों के अनुसार हर गाँव या गाँव के हिस्से का नक़्शा (map) और क्षेत्र-पुस्तिका (field book) तैयार करता है।

धारा 113: सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही या केवल अभिलेख-कार्यवाही के अधीन हर क्षेत्र के लिए वह हर गाँव या उसके हिस्से का अधिकार अभिलेख (record of rights) बनाता है।

धारा 114 बताती है कि अधिकार अभिलेख में क्या होगा। वह राज्य सरकार द्वारा निर्धारित ढंग से बनेगा और इन चार हिस्सों से मिलकर बनेगा। (क) खेवट (khewat): सर्वेक्षण या अभिलेख-कार्यवाही वाले क्षेत्र के सभी संपदाधारकों का रजिस्टर, जिसमें हर एक के और उसके सह-हिस्सेदारों के हित की प्रकृति और सीमा, क़ब्ज़े वाले बंधकग्राही और उससे काश्तकार के अलावा अन्य रूप में भूमि धारण करने वाले व्यक्ति (यदि हों) दर्शाए जाते हैं। (ख) खतौनी (khatauni): उस क्षेत्र में भूमि जोतने, धारण करने या क़ब्ज़े में रखने वाले सभी व्यक्तियों का रजिस्टर, जिसमें धारा 121 के ब्योरे दिए जाते हैं। (ग) उस क्षेत्र में बिना लगान या राजस्व के भूमि धारण करने वाले सभी व्यक्तियों का रजिस्टर। (घ) ऐसे अन्य रजिस्टर जो निर्धारित हों।

अधिकार अभिलेख के चार हिस्से: धारा 114

खंडरजिस्टरकिनका ब्योराविशेष बात
(a)खेवट (khewat)सभी संपदाधारक (estate-holders)हर एक और उसके सह-हिस्सेदारों के हित की प्रकृति और सीमा; क़ब्ज़ेदार बंधकग्राही; काश्तकार के अलावा भूमि धारकों का ब्योरा
(b)खतौनी (khatauni)भूमि जोतने, धारण करने या क़ब्ज़े में रखने वाले सभी व्यक्तिधारा 121 के ब्योरे अनिवार्य
(c)लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टरजो बिना लगान या राजस्व के भूमि रखते हैंअलग रजिस्टर
(d)अन्य रजिस्टरजो निर्धारित होंराज्य सरकार निर्धारित करती है

खतौनी में क्या लिखा जाता है: धारा 121

खतौनी के हर काश्तकार के लिए धारा 121(1) आठ बातें दर्ज करने को कहती है: (a) उसके स्वत्व की प्रकृति और वर्ग (nature and class of his tenure), जैसा राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 या अन्य लागू क़ानून से तय हो; (b) खातेदारी अधिकार प्राप्त करने के लिए दिया गया प्रीमियम, यदि कोई हो; (c) खातेदारी पर्चे की तारीख़ और उसके द्वारा किए गए अंतरण, उनके ब्योरे सहित; (d) उसकी जोत में आने वाले हर खेत का खसरा नंबर और क्षेत्रफल; (e) देय वार्षिक लगान; (f) स्वत्व की कोई अन्य शर्त, चाहे लिखित पट्टे में हो या न हो; (g) खातेदार काश्तकार से भिन्न व्यक्ति के मामले में, उसके पास वर्तमान भूमि कितने वर्ष से है; (h) अन्य निर्धारित ब्योरे।

धारा 121(2): खतौनी में उन संपदाधारकों का भी ब्योरा होगा जो काश्तकारी अधिनियम के अनुसार खुदकाश्त के रूप में भूमि रखते हैं, और उस भूमि पर वे कितने वर्ष से हैं।

बिना मालिक की भूमि और अन्य दर्ज बातें: धारा 115 से 120

धारा 115: भूमि अभिलेख अधिकारी उस क्षेत्र की ऐसी भूमियों की सूची बनाता है जिनका कोई वैध स्वामी नहीं दिखता, और उद्घोषणा करता है कि वह उन्हें राज्य की संपत्ति के रूप में सीमांकित करना चाहता है। दावा रखने वाला कोई भी व्यक्ति उद्घोषणा की तारीख़ से तीन महीने के भीतर लिखित याचिका दे सकता है। याचिका आने पर अधिकारी आवश्यक जाँच करके उसे संक्षेप में तय करता है (उप-धारा 2)।

धारा 116: कोई दावा न आए, या भूमि राज्य की संपत्ति ठहरे, पर पास के गाँव के लोग साबित करें कि वे उसे चराई या अन्य कृषि-उपयोग के लिए बरतते आए हैं, तो अधिकारी उन गाँवों को उतनी भूमि दे सकता है जितनी वह आवश्यक समझे और शेष को राज्य की संपत्ति के रूप में चिह्नित कर देगा। धारा 117: अगर ऐसी भूमि पर विशेष स्वामित्व से कम कोई अधिकार सिद्ध हो, तो अधिकारी दावेदार को उसकी संपत्ति के रूप में निश्चित हिस्सा दे सकता है, या राज्य सरकार की मंज़ूरी से राजस्थान भूमि अर्जन अधिनियम 1953 के अनुसार मुआवज़ा दे सकता है। ऐसा देना या मुआवज़ा उस उपयोग या उपभोग के सारे दावे समाप्त कर देता है।

धारा 118: भूमि अभिलेख अधिकारी खुदकाश्त (khudkasht) के रूप में धारित सारी भूमि का विस्तार तय करके उसे वैसा ही दर्ज करता है। धारा 119: हर आबाद गाँव में वह निवासियों के घरों या सहायक कार्यों के लिए आरक्षित क्षेत्र तय करता है और वह क्षेत्र उस गाँव की आबादी (abadi) माना जाएगा।

धारा 120 गाँवों का रजिस्टर (Register of villages) है। अधिकारी निर्धारित रूप में सभी गाँवों की सूची बनाता है, जिसमें दर्शाया जाता है: (a) नदी की क्रिया से प्रभावित (fluvial) क्षेत्र, (b) अनिश्चित खेती (precarious cultivation) वाला क्षेत्र, (c) उस पर निर्धारित राजस्व या लगान और जिसके माध्यम से वह देय है, (d) वह क्षेत्र जिसका राजस्व या लगान पूरा या आंशिक रूप से माफ़ किया गया हो, छोड़ा गया हो, सौंपा गया हो या समझौते से तय हुआ हो, प्राधिकारी और शर्तों सहित।

अभिलेख की प्रविष्टियाँ, विवाद और संक्रमण: धारा 122 से 127

धारा 122: अधिकार अभिलेख की सभी विवादरहित प्रविष्टियाँ हितबद्ध पक्षों से अनुप्रमाणित (attested) कराई जाती हैं। धारा 123 और 125 निरसित हैं। धारा 124: अगर देय लगान या राजस्व पर विवाद हो, तो भूमि अभिलेख अधिकारी विवाद का फ़ैसला नहीं करता। वह अभिलेख बनाने वाले वर्ष के लिए पिछले वर्ष का देय लगान या राजस्व दर्ज कर देता है, जब तक वह इस अधिनियम या काश्तकारी अधिनियम के अधीन डिक्री, आदेश या करार से बढ़ा या घटा न हो।

धारा 126: जब तक नया नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिका धारा 112 के अधीन या नया अधिकार अभिलेख धारा 114 के अधीन तैयार नहीं हो जाता, विद्यमान नक़्शा, क्षेत्र-पुस्तिका और अधिकार अभिलेख ही उस क्षेत्र के माने जाएँगे। धारा 127: जब सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही या केवल अभिलेख-कार्यवाही धारा 106 या 107 की अधिसूचना से बंद होती है, तब अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी के पास लंबित सारे आवेदन और कार्यवाहियाँ, यदि वह अधिकारी स्थायी रूप से नियुक्त नहीं है, कलेक्टर को अंतरित हो जाती हैं।

धारा-वार सार: धारा 106 से 127

धाराविषयमुख्य बात
106सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षणराज्य सरकार, राजपत्र अधिसूचना; क्षेत्र "सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही" में
107अभिलेख-कार्यवाहीसर्वेक्षित क्षेत्र में अभिलेख का सामान्य या आंशिक पुनरीक्षण
108अभिलेख अधिकारीअतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी अनिवार्य; सहायक भूमि अभिलेख अधिकारी वैकल्पिक
109संचालनभू-अभिलेख निदेशक के प्रभार में
110, 111सीमापंद्रह दिन; पहले नक़्शे, फिर क़ब्ज़ा; तीन महीने की बेदख़ली; संक्षिप्त जाँच
112नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिकाहर गाँव के लिए
113, 114अधिकार अभिलेखखेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारक रजिस्टर, अन्य निर्धारित रजिस्टर
115 से 117बिना मालिक की भूमितीन महीने में दावा; चराई के लिए गाँव को; सीमित अधिकार पर हिस्सा या मुआवज़ा
118, 119खुदकाश्त और आबादीअधिकारी तय करके दर्ज करता है
120गाँवों का रजिस्टरचार मदें: (a) से (d)
121खतौनी के ब्योरेआठ मदें (a) से (h), और खुदकाश्त
122, 124प्रविष्टि और लगान-विवादविवादरहित प्रविष्टियाँ अनुप्रमाणित; लगान-विवाद पर पिछले वर्ष का लगान
126, 127संक्रमणपुराना अभिलेख चलता रहेगा; लंबित मामले कलेक्टर को

अभिलेख बनने की कड़ी: धारा 106 से 127

  1. राज्य सरकार की अधिसूचना

    धारा 106 (सर्वेक्षण) या 107 (अभिलेख-कार्यवाही)

  2. अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी नियुक्त

    धारा 108; संचालन निदेशक के प्रभार में, धारा 109

  3. सीमा-चिह्न और सीमा-विवाद

    धारा 110, 111

  4. नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिका

    धारा 112

  5. अधिकार अभिलेख

    खेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारक रजिस्टर, अन्य रजिस्टर; धारा 113, 114, 121

  6. बंद करने की अधिसूचना

    लंबित मामले कलेक्टर को, धारा 127

जब तक नया अभिलेख तैयार न हो, पुराना ही चलता है (धारा 126).

अधिकार अभिलेख (धारा 114) के चार रजिस्टर

अधिकार अभिलेख

खेवट

संपदाधारक और उनके हित

खतौनी

जोतने वाले और क़ाबिज़; धारा 121 के ब्योरे

लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टर

बिना लगान या राजस्व के भूमि धारक

अन्य निर्धारित रजिस्टर

राज्य सरकार निर्धारित करती है

मुख्य तथ्य

सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण का आदेश
राज्य सरकार, राजपत्र अधिसूचना, धारा 106
अभिलेख-कार्यवाही
सर्वेक्षित क्षेत्र का अभिलेख-पुनरीक्षण, धारा 107
कार्यवाहियों का प्रभार
भू-अभिलेख निदेशक, धारा 109; अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी की नियुक्ति धारा 108
बिना मालिक की भूमि पर दावे
उद्घोषणा की तारीख़ से तीन महीने, धारा 115(1)
अधिकार अभिलेख के हिस्से
खेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टर, अन्य निर्धारित रजिस्टर, धारा 114
खतौनी के ब्योरे
आठ मदें (a) से (h) और खुदकाश्त का ब्योरा, धारा 121
अनुप्रमाणन
विवादरहित प्रविष्टियाँ हितबद्ध पक्षों से, धारा 122
निरसित धाराएँ
धारा 123 और 125
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

राजस्थान का पहलू

खेवट, खतौनी और खसरा राजस्थान के भू-अभिलेख की रोज़मर्रा की भाषा हैं। इस अधिनियम में खेवट (धारा 114(a)) और खतौनी (धारा 114(b)) की सूची और खतौनी के आठ ब्योरे (धारा 121) राज्य की भू-अभिलेख व्यवस्था की आधार-धाराएँ हैं। इनके रख-रखाव के नियम राजस्थान भू-राजस्व (भूमि अभिलेख) नियम 1957 में हैं।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • अधिकार अभिलेख में केवल खेवट और खतौनी लिखना। धारा 114 में चार हिस्से हैं: खेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टर और अन्य निर्धारित रजिस्टर।
  • खेवट को जोतने वालों का रजिस्टर समझ लेना। खेवट संपदाधारकों का रजिस्टर है, जोतने या क़ाबिज़ लोगों का रजिस्टर खतौनी है।
  • धारा 106 और 107 में अंतर न करना। धारा 106 नया सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण है, धारा 107 सर्वेक्षित क्षेत्र का अभिलेख-पुनरीक्षण है।
  • लगान-विवाद पर भूमि अभिलेख अधिकारी से फ़ैसला करवा देना। धारा 124 में वह फ़ैसला नहीं देता, पिछले वर्ष का लगान दर्ज करता है।
  • धारा 123 और 125 को चालू मान लेना। दोनों निरसित हैं।