राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956: धारा 106 से 127, सर्वेक्षण, अभिलेख-कार्यवाही और अधिकार अभिलेख
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Rajasthan Land Revenue Act, 1956: Sections 1, 2; Section 3 interpretation (land record officer, municipality, nazul land, panchayat circle, revenue appellate authority, settlement officer, village); Sections 4-36, 40A, 74-87, 106-137, 142-183." इस पृष्ठ पर धारा 106 से 127 हैं: सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही, सीमा-चिह्न, नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिका, तथा अधिकार अभिलेख (Record of Rights)। अधिनियम के छह पृष्ठ: (1) धारा 1 से 3; (2) धारा 4 से 36; (3) धारा 40A और 74 से 87; (4) धारा 106 से 127; (5) धारा 128 से 137; (6) धारा 142 से 183। यह सामग्री परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- यहाँ से सीधा प्रश्न आ चुका है: 2021 (पेपर III) में 5 अंक का प्रश्न "अधिकार अभिलेख की अन्तर्वस्तु बताइए"। उसका पूरा उत्तर धारा 114 में है और इस पृष्ठ पर हल सहित दिया गया है।
- धारा 114 और 121 में खेवट और खतौनी की सूची है। ये दोनों शब्द राजस्थान के हर भू-अभिलेख प्रश्न की रीढ़ हैं, इसलिए इन्हें अर्थ सहित याद रखें।
- यह पृष्ठ बताता है कि अभिलेख बनता कैसे है। अगले पृष्ठ पर वह प्रक्रिया है जिससे यही अभिलेख हर साल अद्यतन होता है, यानी वार्षिक रजिस्टर और नामांतरण।
पहले सरल भाषा में
गाँव की ज़मीन का हिसाब-किताब कैसे रखा जाता है? सोचिए एक बड़ी बही। उसमें पहले पन्ने पर गाँव का नक़्शा है और हर खेत की सीमा। फिर एक सूची है कि गाँव की ज़मीन के मालिक (संपदाधारक) कौन हैं और किसका कितना हिस्सा है। उसके बाद दूसरी सूची है कि असल में खेत जोत कौन रहा है और किस हैसियत से। एक तीसरी सूची उन लोगों की है जो ज़मीन बिना लगान या राजस्व दिए रखते हैं। इसी पूरे ढाँचे को अधिनियम अधिकार अभिलेख (Record of Rights) कहता है।
यह बही रोज़-रोज़ नहीं बनती। जब राज्य सरकार किसी इलाक़े में सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण कराती है, या पुराने अभिलेख का पुनरीक्षण कराती है, तभी भूमि अभिलेख अधिकारी (Land Records Officer) नया अभिलेख तैयार करता है। धारा 106 से 127 इसी विशेष अभियान के नियम हैं: कौन शुरू करेगा, कौन अधिकारी रहेगा, सीमा कैसे तय होगी, नक़्शा कैसा बनेगा, अभिलेख में क्या-क्या लिखा जाएगा और अगर किसी बात पर विवाद हो तो अभिलेख में क्या दर्ज होगा।
सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही: धारा 106 से 109
धारा 106: राज्य सरकार राजपत्र की अधिसूचना से निर्देश दे सकती है कि किसी स्थानीय क्षेत्र का सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण (survey or resurvey) हो। अधिसूचना की तारीख़ से वह क्षेत्र "सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही" (survey and record operations) के अधीन माना जाता है, जब तक दूसरी अधिसूचना से वे कार्यवाहियाँ बंद न घोषित हों।
धारा 107: जिस क्षेत्र का सर्वेक्षण हो चुका है, उसमें राज्य सरकार इसी तरह अभिलेखों के सामान्य या आंशिक पुनरीक्षण का निर्देश दे सकती है। तब वह क्षेत्र केवल "अभिलेख-कार्यवाही" (record operations) के अधीन होता है। इस प्रकार फ़र्क़ सीधा है: धारा 106 में नया सर्वेक्षण, धारा 107 में सर्वेक्षण हो चुके क्षेत्र का अभिलेख-पुनरीक्षण।
धारा 108: अधिसूचना जारी होते ही राज्य सरकार को कार्यवाहियों के प्रभारी के रूप में अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी (Additional Land Records Officer) नियुक्त करना होता है, जब तक उस क्षेत्र के लिए स्थायी अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी पहले से न हो। वह चाहे तो जितने उचित लगें उतने सहायक भूमि अभिलेख अधिकारी भी नियुक्त कर सकती है। धारा 109: ये कार्यवाहियाँ भू-अभिलेख निदेशक के प्रभार में रहती हैं और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित ढंग से होती हैं।
सीमा-चिह्न और सीमा-विवाद: धारा 110 और 111
धारा 110(1): जब कोई क्षेत्र सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही में हो, भूमि अभिलेख अधिकारी उद्घोषणा जारी करके सभी संपदाधारकों और काश्तकारों को बताता है कि गाँव और खेतों की सीमाओं के सर्वेक्षण में माँगी गई सहायता देना उनका दायित्व है। धारा 110(2): वह उद्घोषणा में सीमा-चिह्नों के बारे में निर्देश दे सकता है जो पंद्रह दिन के भीतर पूरा करना होता है। उनके न मानने पर अधिकारी स्वयं सीमा-चिह्न खड़े करवा सकता है, और ख़र्च उन्हीं से लिया जाता है।
धारा 111(1) सीमा-विवाद के निपटारे का क्रम तय करती है। भूमि अभिलेख अधिकारी पहले मौजूदा सर्वेक्षण-नक़्शों के आधार पर निर्णय देता है। जहाँ यह संभव न हो या नक़्शे उपलब्ध न हों, वहाँ वास्तविक क़ब्ज़े के आधार पर। धारा 111(2): अगर जाँच के दौरान अधिकारी यह तय न कर पाए कि क़ब्ज़ा किसके पास है, या यह दिखे कि जाँच शुरू होने से पिछले तीन महीने में वैध क़ाबिज़ों को ग़लत ढंग से बेदख़ल करके क़ब्ज़ा लिया गया है, तो वह संक्षिप्त जाँच (summary inquiry) से तय करता है कि क़ब्ज़े का सबसे बेहतर हक़दार कौन है, और उसी के अनुसार सीमा तय करता है।
नक़्शा, क्षेत्र-पुस्तिका और अधिकार अभिलेख: धारा 112 से 114
धारा 112: सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही के अधीन हर क्षेत्र या उसके हिस्से के लिए भूमि अभिलेख अधिकारी राज्य सरकार के नियमों के अनुसार हर गाँव या गाँव के हिस्से का नक़्शा (map) और क्षेत्र-पुस्तिका (field book) तैयार करता है।
धारा 113: सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही या केवल अभिलेख-कार्यवाही के अधीन हर क्षेत्र के लिए वह हर गाँव या उसके हिस्से का अधिकार अभिलेख (record of rights) बनाता है।
धारा 114 बताती है कि अधिकार अभिलेख में क्या होगा। वह राज्य सरकार द्वारा निर्धारित ढंग से बनेगा और इन चार हिस्सों से मिलकर बनेगा। (क) खेवट (khewat): सर्वेक्षण या अभिलेख-कार्यवाही वाले क्षेत्र के सभी संपदाधारकों का रजिस्टर, जिसमें हर एक के और उसके सह-हिस्सेदारों के हित की प्रकृति और सीमा, क़ब्ज़े वाले बंधकग्राही और उससे काश्तकार के अलावा अन्य रूप में भूमि धारण करने वाले व्यक्ति (यदि हों) दर्शाए जाते हैं। (ख) खतौनी (khatauni): उस क्षेत्र में भूमि जोतने, धारण करने या क़ब्ज़े में रखने वाले सभी व्यक्तियों का रजिस्टर, जिसमें धारा 121 के ब्योरे दिए जाते हैं। (ग) उस क्षेत्र में बिना लगान या राजस्व के भूमि धारण करने वाले सभी व्यक्तियों का रजिस्टर। (घ) ऐसे अन्य रजिस्टर जो निर्धारित हों।
अधिकार अभिलेख के चार हिस्से: धारा 114
| खंड | रजिस्टर | किनका ब्योरा | विशेष बात |
|---|---|---|---|
| (a) | खेवट (khewat) | सभी संपदाधारक (estate-holders) | हर एक और उसके सह-हिस्सेदारों के हित की प्रकृति और सीमा; क़ब्ज़ेदार बंधकग्राही; काश्तकार के अलावा भूमि धारकों का ब्योरा |
| (b) | खतौनी (khatauni) | भूमि जोतने, धारण करने या क़ब्ज़े में रखने वाले सभी व्यक्ति | धारा 121 के ब्योरे अनिवार्य |
| (c) | लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टर | जो बिना लगान या राजस्व के भूमि रखते हैं | अलग रजिस्टर |
| (d) | अन्य रजिस्टर | जो निर्धारित हों | राज्य सरकार निर्धारित करती है |
खतौनी में क्या लिखा जाता है: धारा 121
खतौनी के हर काश्तकार के लिए धारा 121(1) आठ बातें दर्ज करने को कहती है: (a) उसके स्वत्व की प्रकृति और वर्ग (nature and class of his tenure), जैसा राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 या अन्य लागू क़ानून से तय हो; (b) खातेदारी अधिकार प्राप्त करने के लिए दिया गया प्रीमियम, यदि कोई हो; (c) खातेदारी पर्चे की तारीख़ और उसके द्वारा किए गए अंतरण, उनके ब्योरे सहित; (d) उसकी जोत में आने वाले हर खेत का खसरा नंबर और क्षेत्रफल; (e) देय वार्षिक लगान; (f) स्वत्व की कोई अन्य शर्त, चाहे लिखित पट्टे में हो या न हो; (g) खातेदार काश्तकार से भिन्न व्यक्ति के मामले में, उसके पास वर्तमान भूमि कितने वर्ष से है; (h) अन्य निर्धारित ब्योरे।
धारा 121(2): खतौनी में उन संपदाधारकों का भी ब्योरा होगा जो काश्तकारी अधिनियम के अनुसार खुदकाश्त के रूप में भूमि रखते हैं, और उस भूमि पर वे कितने वर्ष से हैं।
बिना मालिक की भूमि और अन्य दर्ज बातें: धारा 115 से 120
धारा 115: भूमि अभिलेख अधिकारी उस क्षेत्र की ऐसी भूमियों की सूची बनाता है जिनका कोई वैध स्वामी नहीं दिखता, और उद्घोषणा करता है कि वह उन्हें राज्य की संपत्ति के रूप में सीमांकित करना चाहता है। दावा रखने वाला कोई भी व्यक्ति उद्घोषणा की तारीख़ से तीन महीने के भीतर लिखित याचिका दे सकता है। याचिका आने पर अधिकारी आवश्यक जाँच करके उसे संक्षेप में तय करता है (उप-धारा 2)।
धारा 116: कोई दावा न आए, या भूमि राज्य की संपत्ति ठहरे, पर पास के गाँव के लोग साबित करें कि वे उसे चराई या अन्य कृषि-उपयोग के लिए बरतते आए हैं, तो अधिकारी उन गाँवों को उतनी भूमि दे सकता है जितनी वह आवश्यक समझे और शेष को राज्य की संपत्ति के रूप में चिह्नित कर देगा। धारा 117: अगर ऐसी भूमि पर विशेष स्वामित्व से कम कोई अधिकार सिद्ध हो, तो अधिकारी दावेदार को उसकी संपत्ति के रूप में निश्चित हिस्सा दे सकता है, या राज्य सरकार की मंज़ूरी से राजस्थान भूमि अर्जन अधिनियम 1953 के अनुसार मुआवज़ा दे सकता है। ऐसा देना या मुआवज़ा उस उपयोग या उपभोग के सारे दावे समाप्त कर देता है।
धारा 118: भूमि अभिलेख अधिकारी खुदकाश्त (khudkasht) के रूप में धारित सारी भूमि का विस्तार तय करके उसे वैसा ही दर्ज करता है। धारा 119: हर आबाद गाँव में वह निवासियों के घरों या सहायक कार्यों के लिए आरक्षित क्षेत्र तय करता है और वह क्षेत्र उस गाँव की आबादी (abadi) माना जाएगा।
धारा 120 गाँवों का रजिस्टर (Register of villages) है। अधिकारी निर्धारित रूप में सभी गाँवों की सूची बनाता है, जिसमें दर्शाया जाता है: (a) नदी की क्रिया से प्रभावित (fluvial) क्षेत्र, (b) अनिश्चित खेती (precarious cultivation) वाला क्षेत्र, (c) उस पर निर्धारित राजस्व या लगान और जिसके माध्यम से वह देय है, (d) वह क्षेत्र जिसका राजस्व या लगान पूरा या आंशिक रूप से माफ़ किया गया हो, छोड़ा गया हो, सौंपा गया हो या समझौते से तय हुआ हो, प्राधिकारी और शर्तों सहित।
अभिलेख की प्रविष्टियाँ, विवाद और संक्रमण: धारा 122 से 127
धारा 122: अधिकार अभिलेख की सभी विवादरहित प्रविष्टियाँ हितबद्ध पक्षों से अनुप्रमाणित (attested) कराई जाती हैं। धारा 123 और 125 निरसित हैं। धारा 124: अगर देय लगान या राजस्व पर विवाद हो, तो भूमि अभिलेख अधिकारी विवाद का फ़ैसला नहीं करता। वह अभिलेख बनाने वाले वर्ष के लिए पिछले वर्ष का देय लगान या राजस्व दर्ज कर देता है, जब तक वह इस अधिनियम या काश्तकारी अधिनियम के अधीन डिक्री, आदेश या करार से बढ़ा या घटा न हो।
धारा 126: जब तक नया नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिका धारा 112 के अधीन या नया अधिकार अभिलेख धारा 114 के अधीन तैयार नहीं हो जाता, विद्यमान नक़्शा, क्षेत्र-पुस्तिका और अधिकार अभिलेख ही उस क्षेत्र के माने जाएँगे। धारा 127: जब सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही या केवल अभिलेख-कार्यवाही धारा 106 या 107 की अधिसूचना से बंद होती है, तब अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी के पास लंबित सारे आवेदन और कार्यवाहियाँ, यदि वह अधिकारी स्थायी रूप से नियुक्त नहीं है, कलेक्टर को अंतरित हो जाती हैं।
धारा-वार सार: धारा 106 से 127
| धारा | विषय | मुख्य बात |
|---|---|---|
| 106 | सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण | राज्य सरकार, राजपत्र अधिसूचना; क्षेत्र "सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही" में |
| 107 | अभिलेख-कार्यवाही | सर्वेक्षित क्षेत्र में अभिलेख का सामान्य या आंशिक पुनरीक्षण |
| 108 | अभिलेख अधिकारी | अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी अनिवार्य; सहायक भूमि अभिलेख अधिकारी वैकल्पिक |
| 109 | संचालन | भू-अभिलेख निदेशक के प्रभार में |
| 110, 111 | सीमा | पंद्रह दिन; पहले नक़्शे, फिर क़ब्ज़ा; तीन महीने की बेदख़ली; संक्षिप्त जाँच |
| 112 | नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिका | हर गाँव के लिए |
| 113, 114 | अधिकार अभिलेख | खेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारक रजिस्टर, अन्य निर्धारित रजिस्टर |
| 115 से 117 | बिना मालिक की भूमि | तीन महीने में दावा; चराई के लिए गाँव को; सीमित अधिकार पर हिस्सा या मुआवज़ा |
| 118, 119 | खुदकाश्त और आबादी | अधिकारी तय करके दर्ज करता है |
| 120 | गाँवों का रजिस्टर | चार मदें: (a) से (d) |
| 121 | खतौनी के ब्योरे | आठ मदें (a) से (h), और खुदकाश्त |
| 122, 124 | प्रविष्टि और लगान-विवाद | विवादरहित प्रविष्टियाँ अनुप्रमाणित; लगान-विवाद पर पिछले वर्ष का लगान |
| 126, 127 | संक्रमण | पुराना अभिलेख चलता रहेगा; लंबित मामले कलेक्टर को |
अभिलेख बनने की कड़ी: धारा 106 से 127
राज्य सरकार की अधिसूचना
धारा 106 (सर्वेक्षण) या 107 (अभिलेख-कार्यवाही)
अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी नियुक्त
धारा 108; संचालन निदेशक के प्रभार में, धारा 109
सीमा-चिह्न और सीमा-विवाद
धारा 110, 111
नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिका
धारा 112
अधिकार अभिलेख
खेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारक रजिस्टर, अन्य रजिस्टर; धारा 113, 114, 121
बंद करने की अधिसूचना
लंबित मामले कलेक्टर को, धारा 127
अधिकार अभिलेख (धारा 114) के चार रजिस्टर
अधिकार अभिलेख
खेवट
संपदाधारक और उनके हित
खतौनी
जोतने वाले और क़ाबिज़; धारा 121 के ब्योरे
लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टर
बिना लगान या राजस्व के भूमि धारक
अन्य निर्धारित रजिस्टर
राज्य सरकार निर्धारित करती है
मुख्य तथ्य
- सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण का आदेश
- राज्य सरकार, राजपत्र अधिसूचना, धारा 106
- अभिलेख-कार्यवाही
- सर्वेक्षित क्षेत्र का अभिलेख-पुनरीक्षण, धारा 107
- कार्यवाहियों का प्रभार
- भू-अभिलेख निदेशक, धारा 109; अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी की नियुक्ति धारा 108
- बिना मालिक की भूमि पर दावे
- उद्घोषणा की तारीख़ से तीन महीने, धारा 115(1)
- अधिकार अभिलेख के हिस्से
- खेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टर, अन्य निर्धारित रजिस्टर, धारा 114
- खतौनी के ब्योरे
- आठ मदें (a) से (h) और खुदकाश्त का ब्योरा, धारा 121
- अनुप्रमाणन
- विवादरहित प्रविष्टियाँ हितबद्ध पक्षों से, धारा 122
- निरसित धाराएँ
- धारा 123 और 125
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
राजस्थान का पहलू
खेवट, खतौनी और खसरा राजस्थान के भू-अभिलेख की रोज़मर्रा की भाषा हैं। इस अधिनियम में खेवट (धारा 114(a)) और खतौनी (धारा 114(b)) की सूची और खतौनी के आठ ब्योरे (धारा 121) राज्य की भू-अभिलेख व्यवस्था की आधार-धाराएँ हैं। इनके रख-रखाव के नियम राजस्थान भू-राजस्व (भूमि अभिलेख) नियम 1957 में हैं।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- अधिकार अभिलेख में केवल खेवट और खतौनी लिखना। धारा 114 में चार हिस्से हैं: खेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टर और अन्य निर्धारित रजिस्टर।
- खेवट को जोतने वालों का रजिस्टर समझ लेना। खेवट संपदाधारकों का रजिस्टर है, जोतने या क़ाबिज़ लोगों का रजिस्टर खतौनी है।
- धारा 106 और 107 में अंतर न करना। धारा 106 नया सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण है, धारा 107 सर्वेक्षित क्षेत्र का अभिलेख-पुनरीक्षण है।
- लगान-विवाद पर भूमि अभिलेख अधिकारी से फ़ैसला करवा देना। धारा 124 में वह फ़ैसला नहीं देता, पिछले वर्ष का लगान दर्ज करता है।
- धारा 123 और 125 को चालू मान लेना। दोनों निरसित हैं।
उदाहरण से समझें
उदाहरण (काल्पनिक)"किशनपुरा" गाँव में अभिलेख-पुनरीक्षण (काल्पनिक उदाहरण)
काल्पनिक गाँव "किशनपुरा" का पुराना अभिलेख बीस साल पुराना है। राज्य सरकार धारा 107 की अधिसूचना जारी करती है। सभी नाम और घटनाएँ अपनी रचना हैं और अधिनियम की धाराओं को समझाने के लिए हैं।
- चरण 1: अधिसूचना और अधिकारी
- धारा 107 के अधीन क्षेत्र "अभिलेख-कार्यवाही" में आ जाता है। धारा 108 के अनुसार राज्य सरकार अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी नियुक्त करती है, यदि पहले से स्थायी नहीं है। कार्य निदेशक के प्रभार में रहता है (धारा 109).
- चरण 2: नया अधिकार अभिलेख
- भूमि अभिलेख अधिकारी धारा 113 और 114 के अनुसार खेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टर और अन्य निर्धारित रजिस्टर तैयार करता है। खतौनी में धारा 121 के आठ ब्योरे लिखे जाते हैं।
- चरण 3: लगान पर विवाद
- एक काश्तकार और संपदाधारक के बीच लगान की राशि पर झगड़ा है। धारा 124: अधिकारी इस पर फ़ैसला नहीं देता। वह पिछले वर्ष का देय लगान दर्ज करेगा, जब तक डिक्री, आदेश या करार से बदलाव न हुआ हो।
- चरण 4: बिना मालिक की ज़मीन
- किशनपुरा के किनारे एक भूखंड का कोई वैध स्वामी नहीं दिखता। धारा 115: अधिकारी उद्घोषणा करता है और तीन महीने में दावे आमंत्रित करता है। दावा न आए और गाँव चराई के लिए उसका उपयोग करता रहा हो तो धारा 116 के अनुसार अधिकारी उतनी भूमि गाँव को दे सकता है और शेष राज्य की संपत्ति चिह्नित करता है।
- चरण 5: अभियान बंद होने तक
- जब तक नया अभिलेख तैयार न हो, पुराना ही अभिलेख माना जाएगा (धारा 126)। अभियान बंद होने पर लंबित मामले, अगर अधिकारी स्थायी नहीं है, कलेक्टर को चले जाएँगे (धारा 127).
सीख
अभिलेख-पुनरीक्षण की पूरी कड़ी एक ही क्रम में चलती है: अधिसूचना, अधिकारी, सीमा और नक़्शा, अधिकार अभिलेख, विवाद, और अंत में लंबित मामलों का हस्तांतरण।
चरणों में जाँचें
हल सहित उदाहरणकौन-सा रजिस्टर क्या बताता है? (धारा 114 और 121)
दिया है
- प्रश्न: "किसी गाँव में कौन-सा रजिस्टर सह-हिस्सेदारों की सूची दिखाएगा और कौन-सा खेत जोतने वाले का खसरा नंबर?"
- 1चरण 1 पहचानें कि सह-हिस्सेदारों का संबंध संपदाधारकों के हित से है। यह धारा 114(a) का खेवट है।
- 2चरण 2 खेत जोतने वाले और उसके खसरा नंबर का संबंध भूमि धारण करने वालों से है। यह धारा 114(b) की खतौनी है।
- 3चरण 3 खसरा नंबर का स्थान: धारा 121(1)(d), जो खतौनी में हर खेत का खसरा नंबर और क्षेत्रफल दर्ज करने को कहती है।
- 4चरण 4 उत्तर: सह-हिस्सेदार खेवट में, खसरा नंबर खतौनी में।
निष्कर्ष: खेवट संपदाधारकों का रजिस्टर है (धारा 114(a)), खतौनी भूमि जोतने या धारण करने वालों का (धारा 114(b), 121).
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2021RAS मुख्य परीक्षापेपर III5 अंक
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 में "अधिकार अभिलेख" की अन्तर्वस्तु बताइए।
आदर्श उत्तर
धारा 114 के अनुसार अधिकार अभिलेख में चार हिस्से होते हैं: खेवट, यानी सभी संपदाधारकों और उनके हित का रजिस्टर; खतौनी, यानी भूमि जोतने या क़ाबिज़ करने वालों का रजिस्टर, जिसमें धारा 121 के ब्योरे होते हैं; बिना लगान या राजस्व के भूमि रखने वालों का रजिस्टर; और अन्य निर्धारित रजिस्टर।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
"खतौनी" क्या है?
आदर्श उत्तर
खतौनी जोतने या धारण करने वालों का रजिस्टर है, धारा 121 के ब्योरों सहित (धारा 114(b))।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
धारा 106 और 107 में अंतर बताइए।
आदर्श उत्तर
धारा 106 में नया सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण, धारा 107 में सर्वेक्षित क्षेत्र के अभिलेखों का पुनरीक्षण।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 121 के अनुसार खतौनी में काश्तकार के कौन-से ब्योरे दर्ज होते हैं?
आदर्श उत्तर
खतौनी में काश्तकार का स्वत्व-वर्ग, खातेदारी के लिए दिया प्रीमियम, खातेदारी पर्चे की तारीख़ और अंतरण, हर खेत का खसरा नंबर और क्षेत्रफल, वार्षिक लगान, स्वत्व की अन्य शर्तें, खातेदार से भिन्न व्यक्ति के क़ब्ज़े के वर्ष और अन्य निर्धारित ब्योरे दर्ज होते हैं (धारा 121(1))।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
बिना मालिक की भूमि पर धारा 115 से 117 की प्रक्रिया लिखिए।
आदर्श उत्तर
भूमि अभिलेख अधिकारी ऐसी भूमि की सूची बनाकर उद्घोषणा करता है और तीन महीने में दावे बुलाता है (धारा 115)। दावा न आने पर वह चराई जैसे उपयोग वाले गाँव को भूमि दे सकता है और शेष राज्य की संपत्ति चिह्नित करता है (धारा 116)। सीमित अधिकार सिद्ध होने पर हिस्सा या मुआवज़ा देता है (धारा 117)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
सीमा-विवाद के निपटारे की प्रक्रिया धारा 110 और 111 के आधार पर समझाइए।
आदर्श उत्तर
सर्वेक्षण के दौरान भूमि अभिलेख अधिकारी उद्घोषणा से संपदाधारकों और काश्तकारों को सहायता देने को बाध्य करता है और सीमा-चिह्नों का कार्य पंद्रह दिन में पूरा कराता है, न होने पर ख़र्च वसूलकर स्वयं कराता है (धारा 110)। सीमा-विवाद में वह पहले सर्वेक्षण-नक़्शों को आधार बनाता है, उनके अभाव में वास्तविक क़ब्ज़े को (धारा 111(1))। क़ब्ज़ा तय न हो पाए या पिछले तीन महीने में ग़लत बेदख़ली हुई हो, तो संक्षिप्त जाँच से सबसे बेहतर हक़दार तय कर उसी के अनुसार सीमा निर्धारित करता है (धारा 111(2)), जिससे विवाद का निपटारा हो जाता है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
नमूना प्रश्न: "अधिकार अभिलेख क्या है? उसकी अन्तर्वस्तु बताइए।" पहली पंक्ति: अधिकार अभिलेख वह दस्तावेज़ है जो भूमि अभिलेख अधिकारी सर्वेक्षण और अभिलेख-कार्यवाही या केवल अभिलेख-कार्यवाही के अधीन हर गाँव के लिए बनाता है (धारा 113)। (2 अंक)
मुख्य भाग
- खेवट: संपदाधारकों का रजिस्टर, हित की प्रकृति और सीमा (धारा 114(a))
- खतौनी: जोतने या क़ाबिज़ करने वालों का रजिस्टर, धारा 121 के ब्योरे (धारा 114(b))
- लगान या राजस्व-मुक्त भूमि धारकों का रजिस्टर (धारा 114(c)) और अन्य निर्धारित रजिस्टर (धारा 114(d))
- तैयार करने का ढंग राज्य सरकार निर्धारित करती है
निष्कर्ष
निष्कर्ष: अधिकार अभिलेख गाँव के भू-स्वामित्व और क़ब्ज़े का आधार दस्तावेज़ है, जिसे वार्षिक रजिस्टर हर साल अद्यतन रखते हैं। (2 अंक)
अतिरिक्त मूल्य
- चार हिस्से गिनकर लिखें, परीक्षक को पूर्णता तुरंत दिखती है।
- खेवट और खतौनी के अर्थ अलग-अलग लिखें।
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राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 1 और धारा 5: परिभाषाएँ (फसलें, सायर, कृषक, अतिचारी सहित)
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 14 से 17A और 31 से 37: काश्तकारों के वर्ग, खातेदारी अधिकार और काश्तकार के अधिकार
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 38 से 54A: उत्तराधिकार, बिक्री-बंधक, पट्टा देने की सीमा, अदला-बदली और जोत का विभाजन
ज़िला राजस्व प्रशासन: संभाग, ज़िला, उपखंड, तहसील और पटवार मंडल
राजस्थान राजस्व मंडल (Board of Revenue), अजमेर
ज़िला कलेक्टर: राजस्व, क़ानून-व्यवस्था और विकास प्रशासन
त्वरित पुनरावृत्ति
- धारा 106: सर्वेक्षण या पुनः सर्वेक्षण; धारा 107: अभिलेख-कार्यवाही (सर्वेक्षित क्षेत्र का पुनरीक्षण)
- धारा 108: अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी अनिवार्य, सहायक वैकल्पिक; धारा 109: निदेशक के प्रभार में
- धारा 110: सहायता का दायित्व और सीमा-चिह्न के लिए पंद्रह दिन; धारा 111: पहले नक़्शे, फिर क़ब्ज़ा; तीन महीने की बेदख़ली; संक्षिप्त जाँच
- धारा 112: नक़्शा और क्षेत्र-पुस्तिका; धारा 113: अधिकार अभिलेख बनाना
- धारा 114: खेवट, खतौनी, लगान-मुक्त धारकों का रजिस्टर, अन्य निर्धारित रजिस्टर
- धारा 115 से 117: बिना मालिक की भूमि: तीन महीने में दावा, चराई के लिए गाँव को, सीमित अधिकार पर हिस्सा या मुआवज़ा
- धारा 118: खुदकाश्त; धारा 119: आबादी; धारा 120: गाँवों का रजिस्टर
- धारा 121: खतौनी के आठ ब्योरे (a) से (h) और खुदकाश्त; धारा 122: अनुप्रमाणन; धारा 123 और 125 निरसित; धारा 124: लगान-विवाद पर पिछले वर्ष का लगान
- धारा 126: पुराना अभिलेख चलेगा; धारा 127: लंबित मामले कलेक्टर को
याद रखने योग्य शब्द
- खेवट
- खतौनी
- अधिकार अभिलेख
- धारा 114
- धारा 121
- अभिलेख-कार्यवाही