राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956: धारा 40A और 74 से 87, अपील, पुनरीक्षण और पुनर्विलोकन
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Rajasthan Land Revenue Act, 1956: Sections 1, 2; Section 3 interpretation (land record officer, municipality, nazul land, panchayat circle, revenue appellate authority, settlement officer, village); Sections 4-36, 40A, 74-87, 106-137, 142-183." इस पृष्ठ पर धारा 40A (लंबरदारों की सेवाओं की समाप्ति) और धारा 74 से 87 (अपील, पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन और परिसीमा) हैं। अधिनियम के छह पृष्ठ: (1) धारा 1 से 3; (2) धारा 4 से 36; (3) धारा 40A और 74 से 87; (4) धारा 106 से 127; (5) धारा 128 से 137; (6) धारा 142 से 183। यह सामग्री परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- अब तक उपलब्ध छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) के विधि खंड में धारा 74 से 87 से कोई सीधा प्रश्न नहीं आया है। फिर भी यह अधिनियम का वह हिस्सा है जिस पर सबसे सटीक प्रश्न बन सकते हैं: किस आदेश की अपील किसके पास, कितने दिन में, और कहाँ अपील नहीं होती।
- इस पृष्ठ की हर बात संख्या, पद और धारा से जुड़ी है: तीस, साठ और नब्बे दिन; कलेक्टर, राजस्व अपीलीय प्राधिकारी, बंदोबस्त आयुक्त और राजस्व मंडल। तालिकाएँ याद करने का सबसे छोटा रास्ता हैं।
- पिछले पृष्ठ का पदक्रम यहाँ काम आता है। अपील की सीढ़ी उसी पदक्रम पर बनी है।
पहले सरल भाषा में
मान लीजिए किसी तहसीलदार ने आपके खिलाफ़ फ़ैसला दिया। आप क्या कर सकते हैं? तीन रास्ते हैं। पहला, ऊपर की अदालत में अपील। दूसरा, ऊपर के अधिकारी से कहना कि पूरी फ़ाइल मँगाकर देख ले कि फ़ैसला सही हुआ या नहीं, यानी पुनरीक्षण। तीसरा, उसी अधिकारी से कहना कि अपने ही फ़ैसले को एक बार फिर देख ले, यानी पुनर्विलोकन (review)।
धारा 74 से 87 इन्हीं तीनों रास्तों का नक़्शा है। धारा 74 शुरुआत में ही एक दीवार खड़ी करती है: राजस्व न्यायालय या अधिकारी के आदेश की अपील तभी हो सकती है जब इसी अधिनियम में अपील का प्रावधान हो। यानी अपील का अधिकार सामान्य अधिकार नहीं है, क़ानून से मिला अधिकार है।
धारा 40A अलग विषय है। यह गाँव के लंबरदार (Lambardar) की व्यवस्था समाप्त करती है और लगान वसूली का काम पटवारी को सौंपती है। इसे पिछले पृष्ठ के पटवारी वाले हिस्से से जोड़कर पढ़ें।
धारा 40A: लंबरदारों की सेवाओं की समाप्ति (Termination of services of Lambardars)
धारा 40A कहती है कि राजस्थान सामान्य खंड अधिनियम 1955 या किसी अन्य प्रचलित क़ानून में कुछ भी लिखा हो, इस अधिनियम के अधीन नियुक्त या नियुक्त माने गए सभी लंबरदार राजस्थान भू-राजस्व (संशोधन) अधिनियम 1963 के प्रारंभ की तारीख़ से अपने गाँव या गाँव-समूह के लंबरदार नहीं रहे। वे इस अधिनियम से मिली शक्तियाँ भी प्रयोग नहीं करेंगे और कर्तव्य भी नहीं निभाएँगे।
इसके बाद सवाल उठता है कि लगान, राजस्व या किसी अन्य राज्य-माँग की वसूली कौन करेगा। धारा 40A का उत्तर: जब तक राज्य सरकार कोई और निर्देश न दे, यह काम सर्कल का पटवारी करेगा। धारा 31 में भी पटवारी का काम यही है कि वह अपने सर्कल के भूमिधारकों और काश्तकारों से देय लगान और राजस्व वसूले। इस प्रकार 1963 के संशोधन के बाद गाँव-स्तर की वसूली का पूरा भार पटवारी पर आ गया।
याद रखने की बात: धारा 37 से 40 निरसित हैं और धारा 41 से 50 में गाँव के कर्मचारियों से जुड़े प्रावधान "Omitted" दिखते हैं। धारा 40A इसी ख़ाली जगह में खड़ी वह धारा है जो बताती है कि लंबरदारी व्यवस्था क्यों और कब समाप्त हुई।
अपील की मूल व्यवस्था: धारा 74 से 79
धारा 74 के अनुसार किसी प्रचलित क़ानून में कुछ भी हो, राजस्व न्यायालय या अधिकारी के आदेश की अपील नहीं होगी, जब तक इस अधिनियम में उसका प्रावधान न हो। धारा 75 पहली अपील (First Appeals) और धारा 76 दूसरी अपील (Second Appeals) की सीढ़ी बनाती है। धारा 77 बताती है कि कहाँ अपील होती ही नहीं। धारा 78 समय-सीमा देती है और धारा 79 कहती है कि अपील-याचिका के साथ आदेश की प्रमाणित प्रति लगेगी, जब तक प्रति की माफ़ी न मिले।
धारा 75 की भाषा है "Save when otherwise provided in this Act", यानी अधिनियम में कहीं और अलग प्रावधान हो तो वही चलेगा। पहली अपील मूल आदेश (original order) की होती है, अपील में पारित आदेश की नहीं। इसी भेद से दूसरी अपील का रास्ता खुलता है।
पहली अपील: धारा 75(1)
| खंड | किस आदेश की | अपील किसके पास |
|---|---|---|
| (a) | तहसीलदार का मूल आदेश, बंदोबस्त या भू-अभिलेख से असंबंधित मामलों में | कलेक्टर |
| (b) | सहायक कलेक्टर, उप-खंड अधिकारी या कलेक्टर का मूल आदेश, बंदोबस्त से असंबंधित मामलों में | राजस्व अपीलीय प्राधिकारी (Revenue Appellate Authority) |
| (c) | बंदोबस्त अधिकारी के अधीनस्थ राजस्व न्यायालय या अधिकारी का मूल आदेश | बंदोबस्त अधिकारी (Settlement Officer) |
| (d) | भूमि अभिलेख अधिकारी के अधीनस्थ राजस्व न्यायालय या अधिकारी का मूल आदेश | भूमि अभिलेख अधिकारी (Land Records Officer) |
| (e) | बंदोबस्त अधिकारी या बंदोबस्त के मामलों में कलेक्टर का मूल आदेश | बंदोबस्त आयुक्त (Settlement Commissioner) |
| (f) | भूमि अभिलेख से जुड़े मामलों में भूमि अभिलेख अधिकारी का मूल आदेश | भू-अभिलेख निदेशक (Director of Land Records) |
| (g) | आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, राजस्व अपीलीय प्राधिकारी या बंदोबस्त आयुक्त का मूल आदेश | राजस्व मंडल (Board) |
दूसरी अपील: धारा 76
| खंड | किसने अपील में आदेश पारित किया | दूसरी अपील किसके पास |
|---|---|---|
| (a) | कलेक्टर, बंदोबस्त या भू-अभिलेख से असंबंधित मामलों में | राजस्व अपीलीय प्राधिकारी |
| (b) | बंदोबस्त अधिकारी, धारा 181 के अधीन कार्य करते हुए | बंदोबस्त आयुक्त |
| (c) | भूमि अभिलेख अधिकारी | भू-अभिलेख निदेशक |
| (d) | आयुक्त, राजस्व अपीलीय प्राधिकारी या बंदोबस्त आयुक्त | राजस्व मंडल |
कहाँ अपील नहीं होती: धारा 77
धारा 77(1) चार स्थितियाँ गिनाती है जिनमें कोई अपील नहीं होती। (a) वह आदेश जो परिसीमा अधिनियम 1908 की धारा 5 के आधार पर अपील या पुनर्विलोकन की अर्ज़ी स्वीकार करे (admitting an appeal or application for review on the ground specified in section 5 of the Indian Limitation Act, 1908)। (b) वह आदेश जो पुनरीक्षण या पुनर्विलोकन की अर्ज़ी को ख़ारिज करे। (c) वह आदेश जिसे अधिनियम ने स्वयं अंतिम घोषित किया हो। (d) अंतरिम आदेश (interim order)।
धारा 77(2) और (3) 1975 के राजस्थान राजस्व विधि (संशोधन) अध्यादेश से जुड़ी संक्रमणकालीन व्यवस्था हैं: उप-धारा (1) उस अध्यादेश के प्रारंभ पर लंबित सभी अर्ज़ियों और कार्यवाहियों पर लागू होगी, और अंतरिम आदेशों के विरुद्ध लंबित अपीलें उसी तारीख़ पर समाप्त (abate) मानी जाएँगी। परीक्षा के लिहाज़ से मुख्य बात खंड (d) है: अंतरिम आदेश की अपील नहीं होती।
अपील की समय-सीमा: धारा 78
| अपील किसके पास | अधिकतम अवधि | धारा-खंड |
|---|---|---|
| कलेक्टर, भूमि अभिलेख अधिकारी या बंदोबस्त अधिकारी | आदेश की तारीख़ से तीस दिन (thirty days) | 78(a) |
| राजस्व अपीलीय प्राधिकारी, बंदोबस्त आयुक्त या भू-अभिलेख निदेशक | आदेश की तारीख़ से साठ दिन (sixty days) | 78(b) |
| राजस्व मंडल | आदेश की तारीख़ से नब्बे दिन (ninety days) | 78(c) |
अपीलीय प्राधिकारी की शक्तियाँ और स्थगन: धारा 80 और 81
धारा 80(1) के अनुसार अपीलीय प्राधिकारी या तो अपील स्वीकार (admit) कर सकता है, या अभिलेख मँगाकर और अपीलकर्ता को सुनकर उसे संक्षेप में ख़ारिज कर सकता है। परंतुक: अगर अपील समय-सीमा से बाहर है या हो ही नहीं सकती, तो अभिलेख मँगाना ज़रूरी नहीं। उप-धारा (2): स्वीकार करने पर सुनवाई की तारीख़ तय होती है और प्रतिवादी को नोटिस जाता है।
उप-धारा (3): पक्षकारों को सुनकर प्राधिकारी अपील किए गए आदेश की पुष्टि कर सकता है (confirm), उसे बदल सकता है (vary) या पलट सकता है (reverse)। वह आगे की जाँच या अतिरिक्त साक्ष्य का निर्देश दे सकता है, स्वयं अतिरिक्त साक्ष्य ले सकता है, या निर्देशों के साथ मामला वापस भेज सकता है (remand)। चारों विकल्प याद रखें: पुष्टि या परिवर्तन, जाँच या साक्ष्य, स्वयं साक्ष्य, और प्रतिप्रेषण।
धारा 81 स्थगन की बात करती है। अपील स्वीकार होने पर अपीलीय प्राधिकारी फ़ैसला आने तक आदेश का निष्पादन रोक सकता है (उप-धारा 1)। आदेश पारित करने वाला राजस्व न्यायालय या अधिकारी भी, अगर अपील दायर नहीं हुई है, अपील की अवधि बीतने से पहले कभी भी निष्पादन रोक सकता है (उप-धारा 2)। स्थगन पर ज़मानत लेना या शर्तें लगाना अपीलीय प्राधिकारी या उस न्यायालय के विवेक में है (उप-धारा 3)।
पुनरीक्षण और निर्देश: धारा 82 से 85
| धारा | कौन | किन मामलों में | क्या कर सकता है |
|---|---|---|---|
| 82 | बंदोबस्त आयुक्त, भू-अभिलेख निदेशक या कलेक्टर | अपने अधीनस्थ राजस्व न्यायालय या अधिकारी का कोई तय मामला या कार्यवाही; आदेश की वैधता, औचित्य और कार्यवाही की नियमितता जाँचने के लिए | अभिलेख मँगाकर जाँचता है। बदलाव, रद्दीकरण या पलटाव उचित लगे तो राय सहित मामला भेजता है: न्यायिक या बंदोबस्त मामला राजस्व मंडल को, ग़ैर-न्यायिक मामला राज्य सरकार को |
| 83 | राज्य सरकार | अपने अधीनस्थ अधिकारी की ग़ैर-न्यायिक, बंदोबस्त से असंबंधित कार्यवाही | अभिलेख मँगाकर उचित आदेश दे सकती है |
| 84 | राजस्व मंडल | न्यायिक या बंदोबस्त वाला मामला, जिसमें मंडल के पास अपील नहीं होती | अभिलेख मँगाकर उचित आदेश दे सकता है, यदि न्यायालय या अधिकारी ने ऐसे अधिकार का प्रयोग किया जो विधि ने नहीं दिया, या अधिकार का प्रयोग नहीं किया, या अवैध रूप से अथवा भौतिक अनियमितता से कार्य किया |
| 85 | सब पर लागू | धारा 82, 83 या 84 के अधीन आदेश | किसी के प्रतिकूल आदेश तब तक नहीं, जब तक उसे सुनवाई का अवसर न मिला हो |
पुनर्विलोकन (review) और परिसीमा: धारा 85A से 87
धारा 85A राज्य सरकार को अपनी इस अधिनियम के अधीन पारित किसी भी आदेश का स्वप्रेरणा से या पक्षकार की अर्ज़ी पर पुनर्विलोकन करने, उसे रद्द, परिवर्तित या पुष्ट करने की शक्ति देती है।
धारा 86(1): राजस्व मंडल अपने या अपने किसी सदस्य द्वारा पारित आदेश का स्वप्रेरणा से या वाद या कार्यवाही के पक्षकार की अर्ज़ी पर पुनर्विलोकन कर सकता है। धारा 86(2): हर अन्य राजस्व न्यायालय या अधिकारी अपना या अपने पूर्ववर्ती का आदेश पुनर्विलोकन कर सकता है। इसके तीन परंतुक हैं: (i) आदेश तभी बदला या पलटा जाएगा जब हितबद्ध पक्षों को सुनवाई का नोटिस मिला हो; (ii) जिस आदेश की अपील या पुनरीक्षण लंबित हो (धारा 86(2)(ii)), उसका पुनर्विलोकन नहीं; (iii) निजी व्यक्तियों के बीच अधिकार के प्रश्न वाले आदेश का पुनर्विलोकन केवल पक्षकार की अर्ज़ी पर और आदेश से नब्बे दिन के भीतर।
धारा 86(3): पुनर्विलोकन की अर्ज़ी सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की पहली अनुसूची के आदेश XLVII के नियम 1 में गिनाए आधारों पर होती है, और वह आदेश उप-धारा (1) और (2) के अधीन रहते हुए लागू होता है। धारा 87: परिसीमा अधिनियम 1908 का प्रावधान इस अधिनियम के अधीन सभी अपीलों और पुनर्विलोकन की अर्ज़ियों पर लागू होगा (धारा का पाठ इसी रूप में है)।
अपील, पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन: तीन रास्तों की तुलना
| बिंदु | अपील | पुनरीक्षण/निर्देश | पुनर्विलोकन |
|---|---|---|---|
| धारा | 74 से 81 | 82 से 85 | 85A, 86 |
| कौन सुनता है | ऊपर का प्राधिकारी | अधीक्षण करने वाला उच्च प्राधिकारी | आदेश देने वाला स्वयं, या उसका उत्तराधिकारी |
| किस पर | मूल आदेश (पहली अपील), अपील का आदेश (दूसरी) | अधीनस्थ के तय मामले की वैधता, औचित्य, नियमितता | अपना ही आदेश |
| समय-सीमा | 30, 60 या 90 दिन (धारा 78) | इन धाराओं में नहीं दी गई; पर सुनवाई का अवसर दिए बिना प्रतिकूल आदेश नहीं (धारा 85) | निजी अधिकारों में अर्ज़ी से 90 दिन (धारा 86(2)(iii)) |
| नहीं हो सकता जब | अंतरिम आदेश (धारा 77(1)(d)) | पुनरीक्षण: धारा 84 में मंडल के पास अपील होने वाले मामलों में नहीं | अपील या पुनरीक्षण लंबित हो (धारा 86(2)(ii)) |
सामान्य राजस्व मामले में अपील की सीढ़ी
तहसीलदार का मूल आदेश
पहली अपील कलेक्टर को, 30 दिन, धारा 75(1)(a), 78(a)
कलेक्टर का अपील-आदेश
दूसरी अपील राजस्व अपीलीय प्राधिकारी को, 60 दिन, धारा 76(a), 78(b)
राजस्व अपीलीय प्राधिकारी का आदेश
अपील राजस्व मंडल को, 90 दिन, धारा 76(d), 78(c)
राजस्व मंडल
सर्वोच्च राजस्व न्यायालय; पुनर्विलोकन धारा 86(1)
तीन उपचार: अपील, पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन
धारा 74 से 87
अपील (धारा 74 से 81)
अधिनियम में प्रावधान हो तभी; समय 30/60/90 दिन
पुनरीक्षण और निर्देश (धारा 82 से 85)
अभिलेख मँगाना; मंडल या राज्य सरकार; सुनवाई ज़रूरी
पुनर्विलोकन (धारा 85A, 86)
राज्य सरकार, मंडल और अन्य न्यायालय; 90 दिन; आदेश XLVII नियम 1
परिसीमा अधिनियम (धारा 87)
अपील और पुनर्विलोकन पर लागू
मुख्य तथ्य
- अपील का स्रोत
- केवल इसी अधिनियम में दिया प्रावधान, धारा 74
- पहली अपील कलेक्टर को
- तहसीलदार का मूल आदेश, धारा 75(1)(a)
- राजस्व अपीलीय प्राधिकारी को पहली अपील
- सहायक कलेक्टर, उप-खंड अधिकारी या कलेक्टर का मूल आदेश, धारा 75(1)(b)
- मंडल को अपील
- आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, राजस्व अपीलीय प्राधिकारी या बंदोबस्त आयुक्त के मूल आदेश (धारा 75(1)(g)); अपील में आदेश (धारा 76(d))
- अपील नहीं
- अंतरिम आदेश, पुनरीक्षण या पुनर्विलोकन की अर्ज़ी ख़ारिज करने वाला आदेश, अंतिम घोषित आदेश, धारा 77(1)
- समय-सीमा
- 30 दिन (कलेक्टर, LRO, SO); 60 दिन (RAA, बंदोबस्त आयुक्त, भू-अभिलेख निदेशक); 90 दिन (मंडल), धारा 78
- पुनर्विलोकन की अर्ज़ी
- निजी अधिकारों के आदेश में आदेश से 90 दिन, धारा 86(2)(iii)
- लंबरदारी की समाप्ति
- 1963 के संशोधन अधिनियम के प्रारंभ से; वसूली पटवारी करेगा, धारा 40A
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
राजस्थान का पहलू
राजस्थान में राजस्व मामलों की अपील-सीढ़ी राजस्व मंडल, अजमेर पर समाप्त होती है। तहसीलदार से कलेक्टर, फिर राजस्व अपीलीय प्राधिकारी, फिर मंडल: यही रास्ता सबसे आम है। इस अधिनियम का 1963 का संशोधन वही है जिसने लंबरदारी व्यवस्था समाप्त की और पटवारी को वसूली का काम दिया (धारा 40A)।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- सब अपीलों की अवधि "तीस दिन" लिखना। सही: कलेक्टर, भूमि अभिलेख अधिकारी और बंदोबस्त अधिकारी के पास तीस, राजस्व अपीलीय प्राधिकारी, बंदोबस्त आयुक्त और भू-अभिलेख निदेशक के पास साठ, राजस्व मंडल के पास नब्बे दिन (धारा 78)।
- तहसीलदार के मूल आदेश की पहली अपील राजस्व अपीलीय प्राधिकारी को बताना। सही: कलेक्टर को (धारा 75(1)(a)). राजस्व अपीलीय प्राधिकारी के पास पहली अपील उप-खंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर या कलेक्टर के मूल आदेश की जाती है (धारा 75(1)(b)).
- अंतरिम आदेश की अपील संभव मान लेना। धारा 77(1)(d) में यह साफ़ मना है।
- पुनरीक्षण (धारा 82 से 84) और पुनर्विलोकन (धारा 85A, 86) को एक समझना। पुनरीक्षण ऊपर के अधिकारी का काम है, पुनर्विलोकन आदेश देने वाले का अपना।
- धारा 82 में सभी मामले मंडल को भेजना। सही: न्यायिक या बंदोबस्त वाले मामले मंडल को, ग़ैर-न्यायिक वाले राज्य सरकार को।
उदाहरण से समझें
उदाहरण (काल्पनिक)एक काल्पनिक नामांतरण-विवाद की अपील-यात्रा (काल्पनिक उदाहरण)
कल्पना करें कि "सीमापुर" तहसील के तहसीलदार ने एक मूल आदेश पारित किया जो बंदोबस्त या भू-अभिलेख से जुड़ा नहीं है। पीड़ित पक्ष को आदेश अनुचित लगा। सभी नाम और घटनाएँ अपनी रचना हैं, यह अध्ययन का दृष्टांत है।
- चरण 1: पहली अपील
- तहसीलदार के मूल आदेश की अपील धारा 75(1)(a) के अनुसार कलेक्टर के पास होगी, आदेश की तारीख़ से तीस दिन के भीतर (धारा 78(a))। याचिका के साथ आदेश की प्रमाणित प्रति लगेगी (धारा 79)।
- चरण 2: निष्पादन पर रोक
- अपील स्वीकार होने पर कलेक्टर, फ़ैसला आने तक आदेश का निष्पादन रोक सकता है (धारा 81(1)), चाहे ज़मानत या शर्तें लगाकर (धारा 81(3))।
- चरण 3: दूसरी अपील
- कलेक्टर ने अपील में आदेश दिया तो अगली अपील धारा 76(a) के अनुसार राजस्व अपीलीय प्राधिकारी के पास होगी, साठ दिन के भीतर (धारा 78(b))।
- चरण 4: अंतिम सीढ़ी
- राजस्व अपीलीय प्राधिकारी के अपील-आदेश की अपील धारा 76(d) के अनुसार राजस्व मंडल के पास, नब्बे दिन के भीतर (धारा 78(c))।
- चरण 5: वह जो नहीं हो सकता
- अगर किसी पड़ाव पर केवल अंतरिम आदेश दिया गया हो, तो उसकी अपील नहीं होगी (धारा 77(1)(d))।
सीख
अपील की सीढ़ी पदक्रम पर चलती है और हर पायदान की समय-सीमा अलग है: तीस, साठ, नब्बे। अंतरिम आदेश की अपील नहीं होती।
चरणों में जाँचें
हल सहित उदाहरणकिस आदेश की अपील किसके पास? (धारा 75, 76)
दिया है
- प्रश्न: "उप-खंड अधिकारी ने बंदोबस्त से असंबंधित मामले में मूल आदेश दिया। अपील कहाँ होगी और अगली अपील कहाँ?"
- 1चरण 1 पहचानें कि आदेश मूल (original) है और मामला बंदोबस्त या भू-अभिलेख से जुड़ा नहीं है।
- 2चरण 2 धारा 75(1)(b) देखें: सहायक कलेक्टर, उप-खंड अधिकारी या कलेक्टर के मूल आदेश की अपील राजस्व अपीलीय प्राधिकारी के पास।
- 3चरण 3 अवधि: धारा 78(b) के अनुसार राजस्व अपीलीय प्राधिकारी के पास साठ दिन।
- 4चरण 4 अपीलीय प्राधिकारी के आदेश की अगली अपील: धारा 76(d), राजस्व मंडल के पास, नब्बे दिन के भीतर (धारा 78(c)).
निष्कर्ष: पहली अपील राजस्व अपीलीय प्राधिकारी (धारा 75(1)(b), 60 दिन), आगे राजस्व मंडल (धारा 76(d), 90 दिन)।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
धारा 78 के अनुसार अपील की समय-सीमाएँ बताइए।
आदर्श उत्तर
कलेक्टर के पास तीस, अपीलीय प्राधिकारी के पास साठ, मंडल के पास नब्बे दिन (धारा 78)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
धारा 77 के अनुसार किस आदेश की अपील नहीं होती? दो उदाहरण दीजिए।
आदर्श उत्तर
अंतरिम आदेश और पुनरीक्षण या पुनर्विलोकन अर्ज़ी ख़ारिज करने वाले आदेश की अपील नहीं होती (धारा 77)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
धारा 40A का सार लिखिए।
आदर्श उत्तर
1963 के राजस्थान भू-राजस्व (संशोधन) अधिनियम के प्रारंभ से इस अधिनियम के अधीन नियुक्त सभी लंबरदार अपने पद पर नहीं रहे और उनकी शक्तियाँ तथा कर्तव्य समाप्त हो गए। राज्य सरकार का अन्य निर्देश आने तक राजस्व, लगान और अन्य राज्य-माँगों की वसूली सर्कल का पटवारी करेगा।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
अपीलीय प्राधिकारी किन-किन तरीक़ों से अपील का निपटारा कर सकता है? (धारा 80)
आदर्श उत्तर
अपील स्वीकार या अभिलेख मँगाकर संक्षेप में ख़ारिज हो सकती है। स्वीकार होने पर सुनवाई-तिथि और नोटिस, फिर आदेश की पुष्टि, परिवर्तन या पलटाव, आगे जाँच या अतिरिक्त साक्ष्य का निर्देश, स्वयं साक्ष्य लेना या निर्देश सहित प्रतिप्रेषण। स्वीकृत अपील में प्रतिवादी को नोटिस भेजा जाता है (धारा 80)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 में अपील, पुनरीक्षण और पुनर्विलोकन की व्यवस्था समझाइए।
आदर्श उत्तर
धारा 74 अपील केवल अधिनियम के प्रावधान से देती है। धारा 75 और 76 पहली और दूसरी अपील की सीढ़ी बनाती हैं, जिसका शिखर राजस्व मंडल है। धारा 78 में तीस, साठ और नब्बे दिन की सीमा है और अंतरिम आदेश की अपील नहीं होती (धारा 77)। धारा 82 से 84 में बंदोबस्त आयुक्त, निदेशक, कलेक्टर, राज्य सरकार और मंडल पुनरीक्षण करते हैं, पर सुनवाई ज़रूरी है (धारा 85)। धारा 85A और 86 पुनर्विलोकन देती हैं, निजी अधिकारों में नब्बे दिन के भीतर। अंतिम सीढ़ी राजस्व मंडल है।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
नमूना प्रश्न: "राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 के अनुसार राजस्व मामलों में अपील और पुनर्विलोकन की प्रक्रिया बताइए।" पहली पंक्ति: अपील क़ानून से मिला अधिकार है, इसलिए केवल इसी अधिनियम में दिए प्रावधान से हो सकती है (धारा 74)। (2 अंक)
मुख्य भाग
- अपील: पहली (धारा 75) और दूसरी (धारा 76), समय-सीमा 30/60/90 दिन (धारा 78), प्रमाणित प्रति (धारा 79)
- अपीलीय शक्तियाँ: स्वीकार या संक्षिप्त ख़ारिज, पुष्टि, परिवर्तन, पलटाव, प्रतिप्रेषण (धारा 80); स्थगन (धारा 81)
- पुनरीक्षण: धारा 82, 83, 84 के अनुसार, सुनवाई ज़रूरी (धारा 85)
- पुनर्विलोकन: राज्य सरकार (धारा 85A), मंडल और अन्य न्यायालय (धारा 86), निजी अधिकारों में 90 दिन
निष्कर्ष
निष्कर्ष: राजस्व मंडल अंतिम सीढ़ी है और अपील का पूरा ढाँचा पदक्रम और समय-सीमा पर टिका है। (2 अंक)
अतिरिक्त मूल्य
- तालिका या सीढ़ी-चित्र बनाएँ: इससे पूरे पदक्रम का क्रम एक नज़र में दिखता है।
- हर बिंदु के साथ धारा-संख्या लिखें।
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राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956: धारा 4 से 36, राजस्व मंडल, राजस्व अधिकारी और उनकी शक्तियाँ
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राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 1 और धारा 5: परिभाषाएँ (फसलें, सायर, कृषक, अतिचारी सहित)
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 14 से 17A और 31 से 37: काश्तकारों के वर्ग, खातेदारी अधिकार और काश्तकार के अधिकार
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 38 से 54A: उत्तराधिकार, बिक्री-बंधक, पट्टा देने की सीमा, अदला-बदली और जोत का विभाजन
ज़िला राजस्व प्रशासन: संभाग, ज़िला, उपखंड, तहसील और पटवार मंडल
राजस्थान राजस्व मंडल (Board of Revenue), अजमेर
ज़िला कलेक्टर: राजस्व, क़ानून-व्यवस्था और विकास प्रशासन
त्वरित पुनरावृत्ति
- धारा 40A: 1963 के संशोधन से लंबरदार पद समाप्त; वसूली पटवारी करेगा (राज्य सरकार का अन्य निर्देश आने तक)
- धारा 74: अपील केवल अधिनियम के प्रावधान से
- धारा 75: (a) तहसीलदार से कलेक्टर; (b) सहायक कलेक्टर, उप-खंड अधिकारी, कलेक्टर से राजस्व अपीलीय प्राधिकारी; (c) बंदोबस्त अधिकारी; (d) भूमि अभिलेख अधिकारी; (e) बंदोबस्त आयुक्त; (f) भू-अभिलेख निदेशक; (g) राजस्व मंडल
- धारा 76: दूसरी अपील: कलेक्टर से राजस्व अपीलीय प्राधिकारी; बंदोबस्त अधिकारी (धारा 181) से बंदोबस्त आयुक्त; भूमि अभिलेख अधिकारी से निदेशक; आयुक्त, RAA, बंदोबस्त आयुक्त से मंडल
- धारा 77: अपील नहीं: परिसीमा-आधार पर स्वीकृति, ख़ारिज पुनरीक्षण या पुनर्विलोकन, अंतिम घोषित, अंतरिम आदेश
- धारा 78: 30 दिन (कलेक्टर, LRO, SO), 60 दिन (RAA, SC, DLR), 90 दिन (मंडल)
- धारा 80: स्वीकार या संक्षिप्त ख़ारिज; पुष्टि, परिवर्तन, पलटाव, प्रतिप्रेषण; धारा 81: स्थगन
- धारा 82 से 84: पुनरीक्षण; न्यायिक या बंदोबस्त मामला मंडल, ग़ैर-न्यायिक मामला राज्य सरकार; धारा 85: सुनवाई का अवसर
- धारा 85A: राज्य सरकार का पुनर्विलोकन; धारा 86: मंडल और अन्य; 90 दिन; आदेश XLVII नियम 1; धारा 87: परिसीमा अधिनियम
याद रखने योग्य शब्द
- धारा 74
- 30/60/90 दिन
- अंतरिम आदेश
- पुनर्विलोकन
- धारा 40A
- राजस्व मंडल