मुख्य सामग्री पर जाएं
पेपर III · इकाई III · भाग ख (विधि)

राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 1 और धारा 5: परिभाषाएँ (फसलें, सायर, कृषक, अतिचारी सहित)

राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 1 और धारा 5 की सभी 32 परिभाषाएँ पाँच गुच्छों में: फसलें, सायर, कृषक, अतिचारी और काश्तकार-भूधारक के अंतर सहित; चारों पिछले प्रश्न हल सहित।

  • फसलें
  • सायर
  • कृषक
  • अतिचारी
  • काश्तकार
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Important land laws in Rajasthan: Rajasthan Tenancy Act, 1955: Section 1; Section 5 definitions (agricultural year, agriculture, agriculturist, assistant collector, board, collector, commissioner, crops, grove-holder, grove land, holding, ijara or theka, improvement, land, land cultivated personally, land holder, landless person, occupied land, pasture land, rent, revenue, revenue appellate authority, revenue court, revenue officer, sayar, settlement, sub-divisional officer, sub-tenant, tehsildar, tenant, trespasser, nalbat)". इस पृष्ठ पर धारा 1 और धारा 5 की ये सभी परिभाषाएँ हैं। धारा 14 से 17A और 31 से 37 अगले पृष्ठ पर, धारा 38 से 54A तीसरे पर, धारा 206 से 218 चौथे पर और बाक़ी धाराएँ पाँचवें पृष्ठ पर हैं। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है; संशोधनों के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • इस अधिनियम पर 2016 से 2024 के पेपरों में पाँच प्रश्न आए और उनमें से चार इसी पृष्ठ की धारा 5 के पद हैं: 2024 में "Crops" (2 अंक), 2023 में "Sayar" (5 अंक), 2018 में "Agriculturist" (2 अंक) और 2016 में "Trespasser" (2 अंक)। पाँचवाँ प्रश्न (2016, खातेदारी अधिकार न बनने वाली भूमि) अगले पृष्ठ की धारा 16 से है।
  • ये प्रश्न शुद्ध परिभाषा के हैं। 2 अंक में लगभग 15 शब्द और 5 अंक में लगभग 50 शब्द मिलते हैं, इसलिए पद का अंग्रेज़ी रूप, उसके मुख्य तत्त्व और धारा-संख्या याद रखना ही काफ़ी है। 2016 से 2024 के पेपरों में देखा गया ढर्रा यही रहा है कि इस अधिनियम पर प्रश्न परिभाषा या सूची के रूप में आते हैं।
  • धारा 5 की परिभाषाएँ आगे की हर धारा की नींव हैं: खातेदार किसे कहते हैं, लगान क्या है, कौन-सा अधिकारी किस न्यायालय की भूमिका में है। इन्हें गुच्छों में पढ़ने (भूमि के पद, व्यक्ति के पद, अधिकारी के पद, लगान के पद) से 32 पद आसानी से याद हो जाते हैं।

पहले सरल भाषा में: यह अधिनियम किसके बारे में है

शहर में मकान-मालिक और किरायेदार के बीच किराए, मरम्मत और खाली कराने के नियम होते हैं। गाँव में खेती की ज़मीन पर यही रिश्ता भूधारक (land holder) और काश्तकार (tenant) के बीच होता है, और उसके नियम राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (Rajasthan Tenancy Act, 1955) में हैं। अधिनियम का अपना उद्देश्य-वाक्य बताता है कि यह खेती की भूमि की काश्तकारियों से जुड़ी विधि को एकत्र और संशोधित करता है और भूमि-सुधार के कुछ उपाय भी करता है।

कानून में हर शब्द का एक तय मतलब होना ज़रूरी है। "किसान" बोलचाल में कोई भी हो सकता है, पर कानून को पता होना चाहिए कि लगान किससे लेना है, बेदखली किसकी हो सकती है और मुकदमा किस अदालत में जाएगा। इसीलिए धारा 5 अधिनियम की शब्दावली है: इसकी शुरुआत ही "In this Act, unless the context otherwise requires" से होती है, यानी जब तक संदर्भ कुछ और न माँगे, ये अर्थ ही चलेंगे। परीक्षा में इसी धारा से सीधे सवाल आते हैं, क्योंकि एक परिभाषा दो अंक की तैयार पंक्ति बन जाती है।

यह अधिनियम राजस्थान राज्य विधान-मंडल का अधिनियम है: राजस्थान अधिनियम संख्या 3 सन् 1955। अधिनियम-पाठ के अनुसार इसे 14 मार्च 1955 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। प्रारंभ की तिथि अधिनियम ने स्वयं तय नहीं की; धारा 1(3) के अनुसार वह तिथि राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करती है। अधिसूचित तिथि के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ।

धारा 1: संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ

उप-धाराक्या कहती है
1(1)अधिनियम का नाम: "This Act may be called the Rajasthan Tenancy Act, 1955"।
1(2)विस्तार: राजस्थान राज्य के पूरे क्षेत्र पर ("the whole of the State of Rajasthan")।
1(3)प्रारंभ: उस तिथि से जो राज्य सरकार राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना द्वारा नियत करे।
अगली धाराएँधारा 2 हटाई जा चुकी है (Omitted)। धारा 3 पुराने कानूनों के निरसन (repeal) की है और धारा 4 भी हटाई जा चुकी है। ये तीनों धाराएँ इस पाठ्यक्रम की सूची में नहीं हैं।

धारा 5 को कैसे पढ़ें: पाँच गुच्छे

धारा 5 में खंड (1) से (47) तक हैं और कई अक्षर-जुड़े खंड भी हैं, जैसे 6A, 11A, 11B, 25A, 26A, 26AA, 26B, 34A, 37A, 37B। पाठ्यक्रम ने इनमें से 32 पद चुने हैं। रटने की जगह उन्हें पाँच गुच्छों में बाँट लें: (क) खेती और भूमि के पद, (ख) भूमि के विशेष प्रकार, (ग) अधिकारी और न्यायालय, (घ) लगान, राजस्व और भुगतान, (ङ) व्यक्ति। नीचे हर गुच्छा तालिका के साथ आता है, और जिन पदों पर पेपर में प्रश्न आ चुके हैं उन पर अलग से विस्तार है।

खंड-संख्याएँ अधिनियम के वर्तमान पाठ के अनुसार हैं। संशोधनों से कई खंड हटे या जुड़े हैं (जैसे खंड 20 और 33 हटाए जा चुके हैं), इसलिए परीक्षा में खंड-संख्या से अधिक महत्त्व पद के शब्दों और तत्त्वों का है।

गुच्छा क: खेती और भूमि के पद

खंडपद (statutory term)अर्थ का सार
5(1)कृषि वर्ष (agricultural year)1 जुलाई से शुरू होकर अगली 30 जून को समाप्त होने वाला वर्ष। लगान, सायर और अपील की गणना में यही वर्ष चलता है।
5(2)कृषि (agriculture)"shall include" शब्द के साथ: बागवानी (horticulture), पशुपालन (cattle breeding), डेयरी (dairy farming), मुर्गी-पालन (poultry farming) और वन-विकास (forestry development)। यह समावेशी परिभाषा है: खेती इन सबको भी छूती है।
5(3)कृषक (agriculturist)वह व्यक्ति जो स्वयं, अपने नौकरों या काश्तकारों के ज़रिए पूर्णतः या मुख्यतः खेती से अपनी आजीविका कमाता है। 2018 का प्रश्न।
5(9)फसलें (crops)झाड़ियाँ, पौधे और बेलें, जैसे गुलाब की झाड़ी, मेहंदी की झाड़ी, केला (plantains) आदि; चारा (fodder) और प्राकृतिक उपज (natural produce) शामिल नहीं। 2024 का प्रश्न।
5(17)जोत (holding)एक पट्टे, संविदा (engagement) या, ऐसे पट्टे के अभाव में, एक अधिकार-स्वरूप (tenure) के अंतर्गत धारित ज़मीन का एक टुकड़ा या कई टुकड़े। इजारेदार या ठेकेदार के मामले में इजारा या ठेके का क्षेत्र भी इसमें आता है।
5(19)सुधार (improvement)काश्तकार की जोत के संदर्भ में: (क) उसका अपना आवासीय मकान, पशुशाला, भंडार या खेती के लिए बनाया अन्य निर्माण, और (ख) कोई भी कार्य जो जोत का मूल्य ठोस रूप में बढ़ाए और उसके उपयोग के प्रयोजन से मेल खाए; जैसे बाँध, टैंक, कुएँ, पानी की नालियाँ।
5(24)भूमि (land)वह भूमि जो खेती, उसके सहायक प्रयोजन, उद्यान-भूमि (grove land) या चराई के लिए पट्टे पर दी गई हो या धारित हो; जोत पर स्थित मकान और बाड़े, तथा सिंचाई या सिंघाड़े जैसी उपज के काम आने वाली जल-आच्छादित भूमि भी शामिल, पर आबादी भूमि (abadi land) अलग।
5(25)स्वयं जोती गई भूमि (land cultivated personally)अपने खाते पर: अपने श्रम से, या परिवार के सदस्य के श्रम से, या अपने या परिवार के सदस्य की निजी देखरेख में नकद या अनाज जैसी मज़दूरी पर रखे मज़दूरों से, पर फसल का हिस्सा देकर नहीं।
5(26A)भूमिहीन व्यक्ति (landless person)पेशे से कृषक, जो स्वयं खेती करता है या करने की उचित आशा है, पर जिसके पास कोई भूमि नहीं है (अपने या संयुक्त परिवार के किसी सदस्य के नाम पर), या जिसके पास केवल टुकड़ा (fragment) है।

फसलें (crops), धारा 5(9): 2024 का 2 अंक का प्रश्न

खेत की "फसल" बोलचाल में गेहूँ या सरसों समझी जाती है, पर काश्तकारी अधिनियम ने इस शब्द का दायरा अपने ढंग से तय किया है। धारा 5(9) के अनुसार "Crops" में shrubs (झाड़ियाँ), bushes, plants और climbers (बेलें) शामिल हैं, और उदाहरण के रूप में गुलाब की झाड़ियाँ (rose bushes), मेहंदी की झाड़ियाँ (mehendi bushes) और केले (plantains) जैसे पौधों के नाम दिए गए हैं; उदाहरण-सूची में "papittas" शब्द भी छपा है। परिभाषा के अंत में स्पष्ट बहिष्कार है: चारा (fodder) और प्राकृतिक उपज (natural produce) "crops" नहीं हैं।

व्यवहार में इसका अर्थ यह निकलता है कि खेत में बोई-उगाई वनस्पति "फसल" है, पर खेत में अपने-आप उग आई घास या प्राकृतिक उपज नहीं। यही रेखा आगे सायर (sayar) की परिभाषा से मिलती है, जहाँ अनधिष्ठित भूमि की घास, ईंधन और इसी तरह की उपज बटोरने के अधिकार की बात आती है (इसके लिए चुकाया गया धन सायर है, फसल की कीमत नहीं)। विश्लेषण: इसलिए परीक्षा में "crops" और "sayar" को अलग-अलग पदों के रूप में लिखना ही सुरक्षित है।

कृषक (agriculturist), धारा 5(3): 2018 का प्रश्न

धारा 5(3) कहती है कि कृषक वह व्यक्ति है जो "by himself or by servants or tenants" अपनी आजीविका "wholly or principally by agriculture" से कमाता है। तीन तत्त्व अलग करके याद रखें। पहला, खेती करने का तरीक़ा खुला है: व्यक्ति स्वयं हल चलाए, नौकर-मज़दूर रखे या काश्तकारों से खेती कराए, तीनों में वह कृषक रह सकता है। दूसरा, कमाई का साधन आजीविका है, केवल शौक़ नहीं। तीसरा, खेती उसकी आजीविका का पूर्ण या मुख्य स्रोत हो।

इसीलिए एक बड़ा ज़मींदार-खातेदार जो खुद खेत में नहीं जाता पर काश्तकारों से खेती कराकर मुख्यतः उसी आय पर जीता है, परिभाषा के भीतर आ सकता है। इसके उलट, शहर में नौकरी करने वाला व्यक्ति जिसके पास छोटा-सा खेत है और जिसकी आय का मुख्य स्रोत वेतन है, "principally" की कसौटी पर कृषक नहीं ठहरता। यह विश्लेषण परिभाषा के शब्दों पर आधारित एक पठन है, न्यायालयों का निर्णय नहीं।

कृषक और भूमिहीन व्यक्ति (landless person) में फ़र्क़ याद रखें। धारा 5(26A) का भूमिहीन व्यक्ति "agriculturist by profession" है, यानी पहले कृषक होना ज़रूरी है; फिर शर्त है कि उसके पास कोई भूमि न हो या केवल टुकड़ा (fragment) हो। विश्लेषण: इस तरह हर भूमिहीन व्यक्ति कृषक-जैसा पेशेवर है, पर हर कृषक भूमिहीन नहीं।

गुच्छा ख: भूमि के विशेष प्रकार और पट्टे

खंडपद (statutory term)अर्थ का सार
5(15) और उद्यान-धारकउद्यान-भूमि (grove land) और उद्यान-धारक (grove-holder)उद्यान-भूमि (grove land), धारा 5(15): किसी विशिष्ट टुकड़े पर इतने पेड़ लगे हों कि वह टुकड़ा या उसका बड़ा भाग मुख्यतः अन्य कृषि-प्रयोजन के काम का न रहे (पूर्ण-विकसित होने पर न रहे), और वे पेड़ मिलकर उद्यान (grove) हों। उद्यान-धारक (grove-holder): उप-धारा (14) का पाठ आधिकारिक प्रतियों में एक समान नहीं छपा है, इसलिए परिभाषा के लिए देखें: आधिकारिक अधिनियम पाठ। काश्तकार की परिभाषा, 5(43)(e), में उद्यान-धारक शामिल गिना गया है, और उसके अधिकार अध्याय XIII (धारा 194) में हैं।
5(18)इजारा या ठेका (ijara or theka)लगान वसूली के लिए दिया गया ठेका या पट्टा ("a farm or lease granted for the collection of rent"); जिस क्षेत्र से वह जुड़ा हो वह "ijara or theka area"; जिसे दिया गया वह इजारेदार (ijaradar) या ठेकेदार (thekadar)।
5(27)अधिष्ठित भूमि (occupied land)वह भूमि जो उस समय किसी काश्तकार को दी जा चुकी है और उसके कब्ज़े में है; खुदकाश्त भी इसमें शामिल। इसके विपरीत "unoccupied land" वह है जो अधिष्ठित नहीं।
5(28)चरागाह भूमि (pasture land)वह भूमि जो गाँव या गाँवों के मवेशियों की चराई के लिए प्रयुक्त है, या बंदोबस्त अभिलेख में उसी रूप में दर्ज है, या राज्य सरकार के नियमों के अनुसार चराई के लिए आरक्षित की गई।

गुच्छा ग: अधिकारी और न्यायालय

खंडपद (statutory term)अर्थ का सार
5(4)सहायक कलक्टर (Assistant Collector)राजस्थान प्रादेशिक प्रभाग अध्यादेश, 1949 (Rajasthan Territorial Divisions Ordinance, 1949) या अन्य प्रवृत्त विधि के अधीन नियुक्त सहायक कलक्टर।
5(6)बोर्ड (Board)राज्य का राजस्व बोर्ड (Board of Revenue) जो राजस्थान राजस्व बोर्ड अध्यादेश, 1949 (Rajasthan Board of Revenue Ordinance, 1949) या अन्य प्रवृत्त विधि के अधीन स्थापित और गठित है।
5(7)कलक्टर (Collector)प्रादेशिक प्रभाग अध्यादेश, 1949 या अन्य प्रवृत्त विधि के अधीन नियुक्त कलक्टर या अतिरिक्त कलक्टर।
5(8)आयुक्त (Commissioner)संभाग का आयुक्त; अतिरिक्त आयुक्त भी इसमें शामिल।
5(34A)राजस्व अपील प्राधिकारी (revenue appellate authority)वह अधिकारी जिसे राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 20A के अधीन इस रूप में नियुक्त किया गया हो।
5(35)राजस्व न्यायालय (Revenue Court)वह न्यायालय या अधिकारी जिसे कृषि-काश्तकारी, लाभ और भूमि या उसमें अधिकार से जुड़े मामलों में वाद या कार्यवाही सुनने का क्षेत्राधिकार है और जो न्यायिक रूप से कार्य करता है। इसमें बोर्ड और उसका हर सदस्य, राजस्व अपील प्राधिकारी, कलक्टर, उपखंड अधिकारी, सहायक कलक्टर, तहसीलदार और कोई भी अन्य राजस्व अधिकारी (ऐसा कार्य करते समय) शामिल हैं।
5(36)राजस्व अधिकारी (Revenue Officer)राजस्व और लगान के कारोबार में या राजस्व अभिलेख रखने में नियोजित कोई भी अधिकारी।
5(40)उपखंड अधिकारी (Sub-Divisional Officer)एक या अधिक उप-खंडों का प्रभार सँभालने वाला सहायक कलक्टर; अध्याय III-B के प्रयोजन से उस ज़िले के सभी उप-खंडों के लिए तैनात सहायक कलक्टर भी।
5(42)तहसीलदार (Tehsildar)प्रादेशिक प्रभाग अध्यादेश, 1949 या अन्य प्रवृत्त विधि के अधीन नियुक्त तहसीलदार।

राजस्व न्यायालय और राजस्व अधिकारी में अंतर

दोनों पद पास-पास हैं, इसलिए परीक्षा में इनकी अदला-बदली आम ग़लती है। राजस्व अधिकारी (Revenue Officer, धारा 5(36)) पद का वर्णन है: वह जो राजस्व और लगान के काम में या राजस्व अभिलेख के रख-रखाव में लगा हो, जैसे राजस्व अभिलेख सँभालने वाला कर्मचारी। राजस्व न्यायालय (Revenue Court, धारा 5(35)) भूमिका का वर्णन है: वही अधिकारी तब "न्यायालय" है जब वह काश्तकारी और भूमि-अधिकार के वाद या कार्यवाही में न्यायिक रूप से निर्णय देता है। खंड स्वयं कहता है कि बोर्ड, राजस्व अपील प्राधिकारी, कलक्टर, उपखंड अधिकारी, सहायक कलक्टर और तहसीलदार "while so acting", यानी ऐसा कार्य करते समय, राजस्व न्यायालय हैं।

सबसे सरल याद-सूत्र: तहसीलदार सुबह राजस्व अधिकारी की तरह अभिलेख सँभालता है और दोपहर में किसी वाद की सुनवाई करे तो उसी कुर्सी पर राजस्व न्यायालय बन जाता है। यह उदाहरण समझाने के लिए है; किस वाद की सुनवाई कौन करेगा, यह धाराओं 207 और 217 में (चौथे पृष्ठ पर) है।

गुच्छा घ: लगान, राजस्व और भुगतान

खंडपद (statutory term)अर्थ का सार
5(32)लगान (rent)भूमि के उपयोग या अधिष्ठान के लिए, या भूमि में किसी अधिकार के बदले, जो नकद, वस्तु (kind) या आंशिक नकद और आंशिक वस्तु के रूप में देय हो। जब तक विपरीत आशय न दिखे, इसमें सायर भी शामिल है।
5(34)राजस्व (revenue)भू-राजस्व: भूमि या उसमें किसी हित या उसके उपयोग पर किसी भी कारण से राज्य सरकार को सीधे देय वार्षिक माँग; सौंपा गया भू-राजस्व (assigned land revenue) भी शामिल।
5(37)सायर (sayar)"shall include": पट्टेदार या अनुज्ञप्तिधारी द्वारा देय वह धन जो अनधिष्ठित भूमि से घास, छप्पर की घास, लकड़ी, ईंधन, फल, लाख, गोंद, जल-फल (water-nuts) जैसी उपज बटोरने के अधिकार के बदले दिया जाए, या बिखरी हड्डियाँ और गोबर जैसा कचरा उठाने के बदले, या मछली-पालन, वन-अधिकार और कृत्रिम स्रोतों के पानी से सिंचाई के उपयोग के बदले। 2023 का प्रश्न।
5(38)बंदोबस्त (settlement)लगान या राजस्व या दोनों का बंदोबस्त या पुनः बंदोबस्त; राजस्थान भूमि संक्षिप्त बंदोबस्त अधिनियम, 1953 का संक्षिप्त बंदोबस्त भी शामिल।
5(47)नालबट (nalbat)कुएँ के मालिक को, सिंचाई के लिए उस कुएँ का उपयोग करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा नकद या वस्तु में दिया गया भुगतान।

सायर (sayar), धारा 5(37): 2023 का 5 अंक का प्रश्न

सायर शब्द को अधिनियम ने स्वयं परिभाषित किया है। धारा 5(37) के अनुसार "sayar shall include" वह सब जो पट्टेदार (lessee) या अनुज्ञप्तिधारी (licensee) अनधिष्ठित भूमि से कोई उपज बटोरने के अधिकार के बदले दे। अनधिष्ठित भूमि (unoccupied land) वह है जो किसी काश्तकार को दी नहीं गई। विश्लेषण: इसलिए सायर का रिश्ता मुख्यतः खेती की जोत से नहीं, बल्कि खुली भूमि, पानी और उपज से है।

खंड तीन तरह के भुगतानों को गिनाता है। पहला, उपज का अधिकार: घास, छप्पर की घास, लकड़ी, ईंधन, फल, लाख, गोंद, सिंघाड़ा जैसे जल-फल आदि। दूसरा, बिखरे कचरे का अधिकार: ज़मीन की सतह पर पड़ी हड्डियाँ और गोबर। तीसरा, जल और मछली से जुड़े अधिकार: मछली के अधिकार (fisheries), वन-अधिकार (forest rights) और कृत्रिम स्रोतों से सिंचाई के लिए पानी का उपयोग। 5 अंक के उत्तर के लिए पहली पंक्ति में परिभाषा, दूसरी में दो-तीन उदाहरण और तीसरी में यह जोड़ना काफ़ी है कि लगान (rent) की परिभाषा, धारा 5(32), में विपरीत आशय न हो तो सायर शामिल माना जाता है।

लगान और सायर का अंतर समझने के लिए खेत और पोखर का कल्पित उदाहरण लें। खेत के काश्तकार का देय धन लगान है। किसी पोखर से सिंघाड़ा बटोरने या मछली पकड़ने का अधिकार पट्टे पर लेने वाला जो धन दे, वह सायर की श्रेणी का है। पर अधिनियम सायर को लगान की परिभाषा में "unless the contrary intention appears" के साथ समेट लेता है, इसलिए दोनों सर्वथा पराए नहीं हैं।

लगान, राजस्व, सायर और नालबट: चार भुगतानों की तुलना

पदकौन देता हैकिसे या किसके बदलेमुख्य बिंदु
लगान (rent), 5(32)काश्तकारभूधारक को, भूमि के उपयोग या अधिष्ठान के बदलेनकद, वस्तु या आंशिक; सायर सहित (विपरीत आशय न हो तो)
राजस्व (revenue), 5(34)भूमि का धारकसीधे राज्य सरकार कोवार्षिक माँग; सौंपा गया भू-राजस्व भी इसमें
सायर (sayar), 5(37)पट्टेदार या अनुज्ञप्तिधारीउपज, कचरा, मछली-वन या कृत्रिम स्रोत के पानी के अधिकार के बदलेअनधिष्ठित भूमि से बटोरने के अधिकार पर केंद्रित
नालबट (nalbat), 5(47)कुएँ से सिंचाई करने वाला व्यक्तिकुएँ के मालिक कोनकद या वस्तु; आगे धारा 36A इसके अर्जन का अधिकार देती है

गुच्छा ङ: व्यक्ति

खंडपद (statutory term)अर्थ का सार
5(26)भूधारक (land holder)वह व्यक्ति जिसे लगान देय है, या जिसे अनुबंध (संविदा) न होता तो देय होता। इसमें शामिल: (i) संपदा-धारक (estate-holder), (ii) अनुकूल दर पर अनुदानग्राही, (iii) उप-पट्टे में पट्टा देने वाला मुख्य काश्तकार (tenant-in-chief) या उसका बंधकदार, (iv) अध्याय IX और X के प्रयोजन से इजारेदार या ठेकेदार, (v) सामान्यतः वह हर व्यक्ति जो अपने से सीधे या उसके अधीन धारण करने वालों के संबंध में उच्चतर धारक है।
5(41)उप-काश्तकार (sub-tenant)वह व्यक्ति जो किसी काश्तकार से भूमि धारण करता है (मालिक या भू-स्वामी के काश्तकार सहित) और जिसे लगान देय है या अनुबंध न होता तो देय होता।
5(43)काश्तकार (tenant)वह व्यक्ति जिसे लगान देय है (या अनुबंध न होता तो देय होता)। विपरीत आशय न हो तो इसमें शामिल: सह-काश्तकार (co-tenant), उद्यान-धारक (grove-holder), ग्राम-सेवक (village servant), खुदकाश्त का काश्तकार, काश्तकारी-अधिकारों का बंधकदार (mortgagee), उप-काश्तकार (sub-tenant), और आबू, अजमेर तथा सुनेल क्षेत्रों के कई पुराने वर्ग। शामिल नहीं: अनुकूल दर पर अनुदानग्राही, इजारेदार या ठेकेदार, और अतिचारी।
5(44)अतिचारी (trespasser)वह व्यक्ति जो बिना अधिकार (without authority) कब्ज़ा लेता या बनाए रखता है, या जो भूमि विधिवत किसी को पट्टे पर दी गई हो तो उसे उस पर कब्ज़ा करने से रोकता है। 2016 का प्रश्न।
5(26A)भूमिहीन व्यक्ति (landless person)पेशे से कृषक जिसके पास कोई भूमि नहीं या केवल टुकड़ा है (ऊपर गुच्छा क में विस्तार से)।

भूधारक, काश्तकार और उप-काश्तकार: लगान किस ओर जाता है

  1. राज्य सरकार

    भूमि का धारक राजस्व (revenue, 5(34)) चुकाता है

  2. भूधारक (land holder)

    5(26): जिसे लगान देय है

  3. काश्तकार (tenant)

    5(43): भूधारक को लगान देता है

  4. उप-काश्तकार (sub-tenant)

    5(41): काश्तकार को लगान देता है

  5. अतिचारी (trespasser)

    5(44): अधिकार नहीं; काश्तकार की परिभाषा से बाहर

यह आरेख समझाने का सरलीकरण है: राज्य को राजस्व और भूधारक को लगान देने वाले दो अलग भुगतान हैं।

काश्तकार (tenant), धारा 5(43): सूची लंबी है, पर कसौटी एक

काश्तकार की परिभाषा धारा 5 की सबसे लंबी परिभाषाओं में है, पर उसकी जड़ एक वाक्य है: काश्तकार वह है जिसे लगान देना पड़ता है, या अनुबंध न होता तो देना पड़ता। इसके बाद अधिनियम "except when the contrary intention appears" कहकर कुछ वर्ग जोड़ता है। अधिनियम आबू, अजमेर और सुनेल क्षेत्रों के अपने काश्तकारी-वर्गों को भी इसी परिभाषा में गिनाता है: आबू का permanent tenant और protected tenant, अजमेर का ex-proprietary tenant, occupancy tenant, hereditary tenant, non-occupancy tenant, Bhooswami और Kashtkar, और सुनेल का ex-proprietary tenant, pakka tenant और ordinary tenant। इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों के पुराने नाम एक ही शब्द के नीचे आ जाते हैं।

सात वर्ग ऐसे हैं जिन्हें क्षेत्रीय नामों के अलावा स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है: सह-काश्तकार (co-tenant), उद्यान-धारक (grove-holder), ग्राम-सेवक (village servant), भू-स्वामी (land owner) से धारण करने वाला काश्तकार, खुदकाश्त का काश्तकार (tenant of khudkasht), काश्तकारी-अधिकारों का बंधकदार (mortgagee of tenancy rights) और उप-काश्तकार (sub-tenant)।

अब बाहर रखे गए तीन वर्ग देखें: अनुकूल दर पर अनुदानग्राही (grantee at a favourable rate of rent), इजारेदार या ठेकेदार (ijaradar or thekadar) और अतिचारी (trespasser)। इन तीनों में कुछ-कुछ भूमि-संबंध है पर काश्तकार वाला हक़ नहीं। परीक्षा के लिहाज़ से "tenant" का 5 अंक का उत्तर इसी क्रम में बनता है: कसौटी, शामिल वर्ग, बाहर रखे गए वर्ग।

अतिचारी (trespasser), धारा 5(44): 2016 का प्रश्न

अतिचारी की परिभाषा दो हिस्सों में पढ़ें। पहला हिस्सा: जो व्यक्ति बिना अधिकार (without authority) कब्ज़ा ले या कब्ज़ा बनाए रखे। दूसरा हिस्सा: जो उस व्यक्ति को, जिसे भूमि विधिवत पट्टे पर दी जा चुकी है, उस पर कब्ज़ा करने से रोके ("prevents another person from occupying land duly let out to him")। पहले हिस्से में अवैध कब्ज़ा है और दूसरे में किसी दूसरे के वैध कब्ज़े में बाधा है।

काश्तकार की परिभाषा, धारा 5(43), स्पष्ट कहती है कि अतिचारी काश्तकार नहीं है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति पट्टे के बिना किसी की भूमि जोतने लगे, तो भले ही वह लगान जैसा कुछ देने की बात करे, वह काश्तकार नहीं बन जाता। यह अंतर आगे के उन प्रावधानों में काम आता है जो काश्तकार को बेदखली से संरक्षण देते हैं और अतिचारी को नहीं।

अधिनियम के वर्तमान पाठ में खंड 5(44) "takes or retains possession of and without authority" छपा है: "possession of" के बाद के शब्द संशोधन में हटे हैं, इसलिए वाक्य अटपटा दिखता है। उत्तर में भाव लिखें: बिना अधिकार कब्ज़ा लेना या रखना, और वैध पट्टेदार को कब्ज़े से रोकना।

चार व्यक्ति, एक भूमि: कौन क्या है

व्यक्तिअधिनियम में पदलगान से संबंधकाश्तकार की परिभाषा में?
जिसे लगान मिलता हैभूधारक (land holder), 5(26)लगान प्राप्त करता हैनहीं (वह काश्तकार से अलग पक्ष है)
जो लगान देकर भूमि जोतता हैकाश्तकार (tenant), 5(43)लगान देता हैहाँ
जो काश्तकार से भूमि लेकर लगान देता हैउप-काश्तकार (sub-tenant), 5(41)काश्तकार को लगान देता हैहाँ (स्पष्ट रूप से शामिल)
जो बिना अधिकार कब्ज़ा ले या वैध पट्टेदार को रोकेअतिचारी (trespasser), 5(44)कोई वैध लगान-संबंध नहींनहीं (स्पष्ट रूप से बाहर)
जिसके पास पट्टे पर लगान-वसूली का ठेका हैइजारेदार या ठेकेदार (ijaradar, thekadar), 5(18)लगान वसूल करने का अधिकारीनहीं (स्पष्ट रूप से बाहर); भूधारक में केवल अध्याय IX और X के प्रयोजन से

स्वयं जोती गई भूमि (land cultivated personally) और भूधारक: दो तकनीकी पद

धारा 5(25) का यह पद इसलिए अहम है कि आगे कई अधिकार और प्रतिबंध "स्वयं जोतने" की कसौटी पर टिके हैं। अधिनियम के अनुसार भूमि तब स्वयं जोती मानी जाती है जब वह अपने खाते पर खेती की जा रही हो और तीन में से कोई एक तरीक़ा अपनाया गया हो: (i) अपने श्रम से, (ii) परिवार के किसी सदस्य के श्रम से, या (iii) अपनी या परिवार के किसी सदस्य की निजी देखरेख में मज़दूरों या नौकरों से, जिन्हें मज़दूरी नकद या वस्तु में दी जाती है, फसल के हिस्से के रूप में नहीं। इस तीसरे तरीक़े में हिस्सा-बँटाई की खेती बाहर रह जाती है।

परंतुक (proviso) में कुछ व्यक्तियों को राहत है: विधवा, नाबालिग, शारीरिक या मानसिक अशक्तता वाला व्यक्ति, भारत की थल, जल या वायु सेना का सदस्य, और राज्य सरकार द्वारा मान्यता-प्राप्त शिक्षा-संस्था का पच्चीस वर्ष से कम आयु का विद्यार्थी। इनके लिए भूमि "personally cultivated" मानी जाएगी, चाहे निजी देखरेख न भी हो। धारा 5(26B) स्पष्ट करती है कि "member of the Military, Naval or Air Services of India" में राजस्थान सशस्त्र कांस्टेबुलरी का सदस्य भी शामिल है।

भूधारक (land holder), धारा 5(26), पाँच तरह के व्यक्तियों को शामिल करता है। संपदा-धारक (जागीरदार, बिस्वेदार, ज़मींदार या भू-स्वामी), अनुकूल दर पर अनुदानग्राही, उप-पट्टे में मुख्य काश्तकार या उसका बंधकदार, अध्याय IX और X के प्रयोजन से इजारेदार या ठेकेदार, और सामान्यतः हर वह व्यक्ति जो ऊपर वाला धारक है। पाँचवीं श्रेणी यह देखकर बनी है कि अंतिम कसौटी रिश्ता है: जो जिसके अधीन धारण करे, उसका ऊपरी स्तर भूधारक कहलाएगा।

गुच्छा ख, ग और घ के बचे हुए पद: एक झलक

पदमुख्य बिंदु जो उत्तर में अवश्य लिखें
जोत (holding), 5(17)एक पट्टे या एक अधिकार-स्वरूप के अंतर्गत ज़मीन का एक या अधिक टुकड़ा; इजारा या ठेके का क्षेत्र भी; अध्याय III-B के प्रयोजन से परंतुक में पूरे राज्य में किसी एक व्यक्ति के सारे टुकड़े उसकी एक जोत गिने जाते हैं, और सह-काश्तकारों का हिस्सा अलग जोत माना जाता है।
सुधार (improvement), 5(19)चार-पाँच चीज़ें गिनें: बाँध, टैंक, कुएँ, पानी की नालियाँ; जल-निकासी के काम; भूमि का सुधार, घेराबंदी, समतलीकरण; जोत के निकट (आबादी भूमि के बाहर) उपयोगी भवन; ऊपर के कामों का पुनर्निर्माण या परिवर्तन जो साधारण मरम्मत न हो। अस्थायी कुएँ, नालियाँ और बाड़े जो काश्तकार सामान्य खेती में बनाता है, इसमें नहीं आते।
भूमि (land), 5(24)खेती, उसके सहायक प्रयोजन, उद्यान-भूमि और चराई के लिए पट्टे पर या धारित; आबादी भूमि अलग; भूमि के लाभ और उससे जुड़ी वस्तुएँ भी शामिल।
अधिष्ठित भूमि (occupied land), 5(27)वह भूमि जो काश्तकार को दी जा चुकी और उसके कब्ज़े में है; खुदकाश्त भी शामिल। उलटा: unoccupied land।
बंदोबस्त (settlement), 5(38)लगान या राजस्व का बंदोबस्त या पुनः बंदोबस्त; संक्षिप्त बंदोबस्त भी। यह वही शब्द है जो आगे भू-राजस्व अधिनियम में सर्वेक्षण-बंदोबस्त के रूप में मिलेगा।

मुख्य तथ्य

अधिनियम
The Rajasthan Tenancy Act, 1955, राजस्थान अधिनियम संख्या 3 सन् 1955; राष्ट्रपति की स्वीकृति 14 मार्च 1955
धारा 1
(1) संक्षिप्त नाम; (2) पूरे राजस्थान राज्य पर विस्तार; (3) राज्य सरकार की राजपत्र-अधिसूचना से प्रारंभ
धारा 5 की शुरुआत
"In this Act, unless the context otherwise requires": संदर्भ भिन्न न हो तब तक ये अर्थ
कृषि वर्ष
1 जुलाई से अगली 30 जून तक, धारा 5(1)
कृषक
पूर्णतः या मुख्यतः खेती से आजीविका, स्वयं, नौकरों या काश्तकारों के ज़रिए, धारा 5(3)
फसलें
shrubs, bushes, plants, climbers; चारा और प्राकृतिक उपज बाहर, धारा 5(9)
सायर
अनधिष्ठित भूमि की उपज, कचरे, मछली-वन और कृत्रिम जल-स्रोत से सिंचाई के अधिकार के बदले देय धन, धारा 5(37); लगान में सम्मिलित जब तक विपरीत आशय न हो, धारा 5(32)
अतिचारी
बिना अधिकार कब्ज़ा लेने या रखने वाला, या वैध पट्टेदार को रोकने वाला, धारा 5(44); काश्तकार की परिभाषा से बाहर
कौन-से पद अध्यादेश से जुड़े
सहायक कलक्टर, कलक्टर, तहसीलदार, उपखंड अधिकारी: राजस्थान प्रादेशिक प्रभाग अध्यादेश, 1949 या अन्य प्रवृत्त विधि; बोर्ड: राजस्थान राजस्व बोर्ड अध्यादेश, 1949
अंतिम जाँच
2 अक्तूबर 2026

राजस्थान का पहलू

काश्तकारी अधिनियम के पाठ से: (1) "State" का अर्थ वह राजस्थान राज्य है जो States Reorganisation Act, 1956 की धारा 10 से बना (धारा 5(39)); (2) काश्तकार की परिभाषा में आबू, अजमेर और सुनेल क्षेत्रों के पुराने काश्तकारी-वर्ग नाम लेकर गिनाए गए हैं। स्रोत: अधिनियम का पाठ, इंडिया कोड (देखा गया: 2 अक्तूबर 2026)। यहाँ कोई अन्य अधिसूचित आँकड़ा नहीं दिया गया है।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • चारा (fodder) और प्राकृतिक उपज को "crops" में गिन लेना: परिभाषा इन्हें स्पष्ट रूप से बाहर रखती है।
  • सायर को केवल "लगान का एक रूप" लिख देना: पहले उसकी स्वतंत्र परिभाषा (अनधिष्ठित भूमि से उपज, कचरा, मछली-वन, कृत्रिम स्रोत के पानी का अधिकार) लिखें, फिर लगान से संबंध।
  • कृषक की परिभाषा में केवल "खेती करने वाला" लिखना: तीनों तत्त्व चाहिए: स्वयं, नौकरों या काश्तकारों के ज़रिए; आजीविका; पूर्ण या मुख्य।
  • अतिचारी को काश्तकार का एक प्रकार मान लेना: धारा 5(43) उसे काश्तकार से बाहर रखती है। साथ ही परिभाषा के दोनों हिस्से (अधिकार-रहित कब्ज़ा और वैध पट्टेदार को रोकना) लिखें।
  • राजस्व अधिकारी और राजस्व न्यायालय की अदला-बदली: एक पद का वर्णन है, दूसरा भूमिका का।
  • लगान (rent) को राजस्व (revenue) समझ लेना: लगान काश्तकार से भूधारक को, राजस्व सीधे राज्य सरकार को।
  • खंड-संख्या रटकर गड़बड़ करना: जहाँ संख्या पक्की न हो वहाँ "धारा 5" लिखकर पद का नाम अंग्रेज़ी में लिखना सुरक्षित है।