राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956: धारा 4 से 36, राजस्व मंडल, राजस्व अधिकारी और उनकी शक्तियाँ
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई III, भाग ख (विधि): "Rajasthan Land Revenue Act, 1956: Sections 1, 2; Section 3 interpretation (land record officer, municipality, nazul land, panchayat circle, revenue appellate authority, settlement officer, village); Sections 4-36, 40A, 74-87, 106-137, 142-183." इस पृष्ठ पर धारा 4 से 36 हैं: राजस्व मंडल, प्रादेशिक विभाजन, राजस्व अधिकारी और उनकी शक्तियाँ, तथा पटवारी और कानूनगो। अधिनियम के छह पृष्ठ: (1) धारा 1 से 3; (2) धारा 4 से 36; (3) धारा 40A और 74 से 87; (4) धारा 106 से 127; (5) धारा 128 से 137; (6) धारा 142 से 183। यह सामग्री परीक्षा की तैयारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- धारा 4 से 36 से अब तक कोई सीधा प्रश्न उपलब्ध छह पेपरों (2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024) के विधि खंड में नहीं आया। पर राजस्व मंडल, कलेक्टर और तहसील लोक प्रशासन खंड के विषय भी हैं; 2016 में "तहसील को मिनिएचर डिस्ट्रिक्ट क्यों कहा जाता है" और 2024 में "ब्लॉक और तहसील का अंतर" पूछा गया। यह पृष्ठ उन उत्तरों को अधिनियम की भाषा देता है।
- यही पृष्ठ बताता है कि कौन अधिकारी किसके अधीन है और किस अधिकारी के पास किस दर्जे की शक्तियाँ हैं। अगले पृष्ठ की अपील-सीढ़ी (धारा 75 और 76) इसी पदक्रम पर खड़ी है, इसलिए पदक्रम याद हो तो अपील के प्रश्न आसान हो जाते हैं।
- ये धाराएँ गिनती और समयसीमा से कम, पद और शक्तियों से अधिक भरी हैं। तालिकाओं और सीढ़ी-चित्र से इन्हें याद करना सबसे सरल रास्ता है।
पहले सरल भाषा में
किसी बड़ी कंपनी की कल्पना करें: मुख्यालय में निदेशक मंडल, हर क्षेत्र का एक क्षेत्रीय प्रबंधक, हर शहर का एक शाखा-प्रबंधक, उसके नीचे कार्यालय-प्रमुख, और सबसे नीचे गली-मोहल्ले में काम करने वाला कर्मचारी जिसके पास ग्राहकों के खाते-बही रहते हैं। ऊपर के लोग नीचे वालों की निगरानी करते हैं और नीचे वालों की ग़ैरहाज़िरी में कोई उनकी कुर्सी सँभाल लेता है।
राजस्थान का राजस्व प्रशासन इसी ढाँचे पर चलता है। सबसे ऊपर राज्य सरकार और राजस्व मंडल (Board of Revenue) हैं। नीचे संभाग का आयुक्त (Commissioner), ज़िले का कलेक्टर (Collector), उप-खंड का अधिकारी, तहसील का तहसीलदार (Tehsildar) और नायब तहसीलदार हैं। समानांतर एक पंक्ति बंदोबस्त की है, जिसमें निपटारा आयुक्त और निपटारा अधिकारी हैं, और एक पंक्ति भू-अभिलेख की है, जिसमें भू-अभिलेख निदेशक और भूमि अभिलेख अधिकारी हैं। सबसे नीचे गाँव के खाते सँभालने वाला पटवारी है।
धारा 4 से 36 इसी ढाँचे का संविधान हैं: कौन-सा पद बनेगा, कौन उसे नियुक्त करेगा, कौन किसके अधीन रहेगा, किसे कौन-सी शक्ति मिलेगी, और छुट्टी या रिक्ति की हालत में कुर्सी कौन सँभालेगा।
राजस्व मंडल (Board of Revenue): धारा 4 से 14
धारा 4 राजस्थान राज्य के लिए राजस्व मंडल की स्थापना करती है। उप-धारा (2) के अनुसार मंडल में एक अध्यक्ष (Chairman) और तीन से कम नहीं तथा बीस से अधिक नहीं अन्य सदस्य होते हैं। यह ऊपरी सीमा 2011 के राजस्थान भू-राजस्व (संशोधन) अधिनियम से बढ़कर बीस हुई है; पहले यह पंद्रह थी। नियुक्तियाँ राजपत्र में अधिसूचित होती हैं (उप-धारा (3))। अध्यक्ष और सदस्यों की योग्यता, चयन-पद्धति और सेवा-शर्तें राज्य सरकार निर्धारित करती है (उप-धारा (4))। मृत्यु, त्यागपत्र, कार्यकाल-समाप्ति या अध्यक्ष अथवा किसी सदस्य की अस्थायी अनुपस्थिति से कोई स्थान रिक्त हो जाए तो मंडल का गठन अवैध नहीं माना जाएगा (उप-धारा (5))।
धारा 5 के अनुसार सभी सदस्य राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (during the pleasure of the Governor) पद धारण करते हैं। धारा 6 मंडल का मुख्यालय अजमेर में रखती है, पर राज्य सरकार के आदेशों के अधीन मंडल अपने अधिकार-क्षेत्र में किसी भी स्थान पर बैठ सकता है। धारा 7 मंडल के लिए एक रजिस्ट्रार और आवश्यक लिपिकीय अधिकारियों की नियुक्ति की अनुमति देती है।
धारा 8 मंडल की हैसियत तय करती है: इस अधिनियम, काश्तकारी अधिनियम 1955 और अन्य लागू क़ानूनों के अधीन रहते हुए मंडल राजस्थान में अपील, पुनरीक्षण और निर्देश (reference) का सर्वोच्च राजस्व न्यायालय है। इसके परंतुक में एक सीमा है: दीवानी और राजस्व न्यायालय में से किसके अधिकार-क्षेत्र में मामला है, इस पर संदेह या विवाद हो तो उच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम और सभी दीवानी तथा राजस्व न्यायालयों पर बाध्यकारी है, मंडल पर भी। उप-धारा (2) मंडल को सरकार द्वारा सौंपे गए या क़ानून से मिले अन्य काम भी देती है।
धारा 9 कहती है कि सभी राजस्व न्यायालयों और अधिकारियों पर सामान्य अधीक्षण और नियंत्रण मंडल में निहित है और वे सब मंडल के अधीनस्थ हैं। धारा 10 बताती है कि मंडल की अधिकारिता एक अकेले सदस्य (अध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य) भी चला सकता है और दो या अधिक सदस्यों की खंडपीठ भी। अकेले सदस्य के निर्णय से व्यथित पक्ष एक माह के भीतर खंडपीठ में विशेष अपील कर सकता है, पर तभी जब निर्णय देने वाला सदस्य (वह मंडल से हट चुका हो तो कोई अन्य सदस्य) घोषित करे कि मामला अपील योग्य है। कार्य का वितरण और क्षेत्रीय बँटवारा अध्यक्ष करता है।
धारा 11 से 13 मतभेद और कठिन प्रश्नों की प्रक्रिया हैं। अकेला सदस्य लिखित कारण दर्ज करके विधि, विधि का बल रखने वाली रूढ़ि या किसी दस्तावेज़ के अर्थ-निर्धारण का प्रश्न खंडपीठ की राय के लिए भेज सकता है (धारा 11)। खंडपीठ को लगे कि प्रश्न जनहित का है और उच्च न्यायालय की राय लेना उचित है तो वह वहाँ भेज सकती है, और मामले का निर्णय उसी राय के अनुरूप होता है (धारा 12)। खंडपीठ में निर्णय बहुमत से होता है; सदस्य बराबर बँट जाएँ तो मामला किसी अन्य सदस्य को भेजा जाता है और उसे जोड़कर बहुमत से तय होता है (धारा 13)। धारा 14 के अनुसार मंडल कार्य के लिए आवश्यक या विहित रजिस्टर, पुस्तकें और लेखे रखवाता है।
राजस्व मंडल: धारा-वार सार
| धारा | विषय | मुख्य बात |
|---|---|---|
| 4 | स्थापना और गठन | अध्यक्ष और तीन से बीस तक अन्य सदस्य; रिक्ति से गठन अवैध नहीं |
| 5 | कार्यकाल | राज्यपाल के प्रसादपर्यंत |
| 6 | बैठक-स्थान | मुख्यालय अजमेर; राज्य सरकार के आदेशों के अधीन अन्यत्र भी बैठ सकता है |
| 7 | लिपिकीय अधिकारी | रजिस्ट्रार और अन्य आवश्यक अधिकारी |
| 8 | शक्तियाँ | अपील, पुनरीक्षण और निर्देश का सर्वोच्च राजस्व न्यायालय; अधिकार-क्षेत्र के संदेह पर उच्च न्यायालय अंतिम |
| 9 | अधीक्षण | सभी राजस्व न्यायालय और अधिकारी मंडल के अधीनस्थ |
| 10 | अधिकारिता का प्रयोग | अकेला सदस्य या दो या अधिक सदस्यों की खंडपीठ; एक माह में विशेष अपील; कार्य-वितरण अध्यक्ष करता है |
| 11 | खंडपीठ को निर्देश | विधि, रूढ़ि या दस्तावेज़ के प्रश्न पर राय के लिए, लिखित कारणों सहित |
| 12 | उच्च न्यायालय को निर्देश | जनहित का प्रश्न हो तो खंडपीठ भेज सकती है |
| 13 | मतभेद | बहुमत; बराबरी पर किसी अन्य सदस्य को भेजना |
| 14 | रजिस्टर | विहित या आवश्यक रजिस्टर, पुस्तकें, लेखे |
प्रादेशिक विभाजन: धारा 15 और 16
धारा 15 राज्य को राजस्व और सामान्य प्रशासन के लिए जितने उचित लगें उतने संभागों (divisions) और ज़िलों में बाँटने का अधिकार राज्य सरकार को देती है। हर संभाग या तो एक ज़िला होता है या एक से अधिक ज़िलों का समूह (उप-धारा (2))। ज़िले को उप-खंडों (sub-divisions) में बाँटा जा सकता है, और हर उप-खंड में एक तहसील या एक से अधिक तहसीलें हो सकती हैं (उप-धारा (3))। तहसील को उप-तहसीलों (sub-tehsils) में बाँटा जा सकता है (उप-धारा (4))। इन सबकी सीमाएँ राज्य सरकार तय करती है (उप-धारा (5)) और राजपत्र में अधिसूचित करती है (उप-धारा (6))। अधिनियम के प्रारंभ पर जो संभाग, ज़िले, उप-खंड, तहसीलें और उप-तहसीलें, चाहे स्थानीय स्तर पर किसी भी नाम से हों, पहले से थीं, वे इसी अधिनियम के अधीन गठित मानी जाती रहेंगी, जब तक कोई अन्य व्यवस्था न की जाए (उप-धारा (7))।
धारा 16 राज्य सरकार को राजपत्र की अधिसूचना से नए संभाग, ज़िले, उप-खंड, तहसीलें, उप-तहसीलें और गाँव बनाने या विद्यमान को समाप्त करने और इनकी सीमाएँ बदलने का अधिकार देती है। यानी किसी नए ज़िले या तहसील का बनना अधिनियम के अनुसार केवल एक अधिसूचना का विषय है, विधानसभा के नए क़ानून का नहीं।
प्रादेशिक सीढ़ी: धारा 15 के अनुसार
| स्तर | किससे बनता है | किसका प्रभारी |
|---|---|---|
| राज्य | सम्पूर्ण राजस्थान | राज्य सरकार, राजस्व मंडल |
| संभाग (division) | एक ज़िला या एक से अधिक ज़िले, धारा 15(2) | आयुक्त (धारा 17) |
| ज़िला (district) | राज्य का विभाजन, धारा 15(1) | कलेक्टर (धारा 20(a)(i)) |
| उप-खंड (sub-division) | एक तहसील या एक से अधिक तहसीलें, धारा 15(3) | उप-खंड का प्रभारी सहायक कलेक्टर (धारा 20(c)(i)) |
| तहसील (tehsil) | उप-खंड की इकाई | तहसीलदार (धारा 20(a)(ii)) |
| उप-तहसील (sub-tehsil) | तहसील का उप-विभाजन, धारा 15(4) | तहसीलदार या नायब तहसीलदार (धारा 20(c)(ii)) |
अधिकारियों की नियुक्ति: धारा 17 से 22
धारा 17 से 20 पदों की सूची हैं। राज्य सरकार हर संभाग में एक आयुक्त (Commissioner) नियुक्त करती है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त आयुक्त (धारा 17)। पूरे राज्य के लिए एक निपटारा आयुक्त (Settlement Commissioner) और आवश्यक अतिरिक्त निपटारा आयुक्त होते हैं (धारा 18), तथा एक भू-अभिलेख निदेशक (Director of Land Records) और आवश्यक अतिरिक्त तथा सहायक निदेशक (धारा 19)।
धारा 20 ज़िले और तहसील के पद गिनाती है। (क) राज्य सरकार प्रत्येक ज़िले में एक कलेक्टर नियुक्त करेगी, जो उस ज़िले का भूमि अभिलेख अधिकारी भी होगा, और प्रत्येक तहसील में एक तहसीलदार। (ख) वह ज़िले में अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी, एक निपटारा अधिकारी, उचित संख्या में सहायक कलेक्टर और तहसील में उचित संख्या में नायब तहसीलदार नियुक्त कर सकती है। (ग) हर उप-खंड का प्रभार एक सहायक कलेक्टर के पास और हर उप-तहसील का प्रभार तहसीलदार या नायब तहसीलदार के पास रहेगा। (घ) वह एक या अधिक ज़िलों के लिए अतिरिक्त कलेक्टर और एक या अधिक तहसीलों के लिए अतिरिक्त तहसीलदार भी नियुक्त कर सकती है। उप-खंड के प्रभारी सहायक कलेक्टर को आगे की धाराओं (जैसे धारा 24) में उप-खंड अधिकारी (Sub-Divisional Officer) कहा गया है।
धारा 20A राजस्व अपीलीय प्राधिकारी (Revenue Appellate Authority) बनाती है। राज्य सरकार जितने अधिकारी आवश्यक समझे उतने नियुक्त कर सकती है, पर संख्या तीन से कम नहीं होगी; वे राजस्व न्यायिक मामलों और क़ानून द्वारा विशेष रूप से बताए गए अन्य मामलों की अपीलें, पुनरीक्षण और निर्देश सुनेंगे और निपटाएँगे (उप-धारा (1))। हर ऐसा अधिकारी राजस्व अपीलीय प्राधिकारी कहलाएगा और राज्य सरकार जैसे स्थान निर्देशित करे वहाँ बैठेगा (उप-धारा (2))।
धारा 21 कहती है कि धारा 17, 18, 19 या 20 के अधीन कोई नियुक्ति पद के आधार पर (ex officio, यानी किसी और पद के साथ) भी की जा सकती है। धारा 22 के अनुसार धारा 17 से 21 की सभी नियुक्तियाँ राजपत्र में अधिसूचित होंगी; केवल नायब तहसीलदारों की नियुक्तियों को अधिसूचित करना आवश्यक नहीं है।
पद, नियुक्ति और प्रभार
| पद | किस धारा से | कितने | विशेष बात |
|---|---|---|---|
| आयुक्त (Commissioner) | 17 | हर संभाग में एक; अतिरिक्त आयुक्त आवश्यकतानुसार | संभाग का प्रमुख राजस्व अधिकारी |
| निपटारा आयुक्त | 18 | पूरे राज्य में एक; अतिरिक्त आवश्यकतानुसार | बंदोबस्त के सभी मामले |
| भू-अभिलेख निदेशक | 19 | पूरे राज्य में एक; अतिरिक्त और सहायक आवश्यकतानुसार | सर्वेक्षण और भू-अभिलेख की देखरेख |
| कलेक्टर | 20(a)(i) | हर ज़िले में अनिवार्य | ज़िले का भूमि अभिलेख अधिकारी भी |
| तहसीलदार | 20(a)(ii) | हर तहसील में अनिवार्य | तहसील का राजस्व अधिकारी |
| अतिरिक्त भूमि अभिलेख अधिकारी, निपटारा अधिकारी, सहायक कलेक्टर, नायब तहसीलदार | 20(b) | "may appoint": आवश्यकतानुसार | राज्य सरकार का विवेक |
| उप-खंड का प्रभारी सहायक कलेक्टर; उप-तहसील का प्रभारी तहसीलदार या नायब तहसीलदार | 20(c) | प्रभार देना अनिवार्य (उप-खंड और उप-तहसील जहाँ बनी हों) | आगे उप-खंड अधिकारी (SDO) शब्द |
| अतिरिक्त कलेक्टर, अतिरिक्त तहसीलदार | 20(d) | "may appoint" | एक या अधिक ज़िलों या तहसीलों के लिए संयुक्त भी |
| राजस्व अपीलीय प्राधिकारी | 20A | तीन से कम नहीं | अपील, पुनरीक्षण, निर्देश सुनता है |
नियंत्रण और अधीनस्थता: धारा 23 और 24
धारा 23 नियंत्रण की दो पटरियाँ बनाती है। राजस्व से जुड़े सभी ग़ैर-न्यायिक (non-judicial) मामलों का नियंत्रण, बंदोबस्त से जुड़े मामलों को छोड़कर, राज्य सरकार में निहित है। सभी न्यायिक मामलों का और बंदोबस्त से जुड़े सभी मामलों का नियंत्रण राजस्व मंडल में निहित है। "न्यायिक मामला" की परिभाषा उप-धारा (2) में है: ऐसी कार्यवाही, जिसमें राजस्व न्यायालय या अधिकारी को पक्षों के अधिकार और दायित्व तय करने होते हैं; साथ ही प्रथम अनुसूची में बताए मामलों की कार्यवाहियाँ, आदेश, अपीलें, पुनरीक्षण और निर्देश भी न्यायिक माने जाएँगे।
इसे एक आसान उदाहरण से देखें। किसी तहसील का भूमि-नामांतरण का विवादित आदेश पक्षों के अधिकार तय करता है, इसलिए वह न्यायिक मामला है और उसकी अंतिम निगरानी मंडल की है। पर किसी राजस्व कर्मचारी का तबादला या विभागीय निर्देश अधिकारों का निर्णय नहीं है, वह ग़ैर-न्यायिक है और उसका नियंत्रण राज्य सरकार के पास है। (यह समझाने वाला उदाहरण विश्लेषण है।)
धारा 24 अधीनस्थता की सीढ़ी बनाती है, जो धारा 9 (मंडल का अधीक्षण) और धारा 23 के अधीन है। संभाग के सभी अतिरिक्त आयुक्त, कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, उप-खंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर, तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार आयुक्त के अधीनस्थ हैं। ज़िले के अतिरिक्त कलेक्टर, उप-खंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर, तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार कलेक्टर के अधीनस्थ हैं। उप-खंड के तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार उप-खंड अधिकारी के और तहसील के अतिरिक्त तहसीलदार तथा नायब तहसीलदार तहसीलदार के अधीनस्थ हैं।
बंदोबस्त और भू-अभिलेख की अपनी सीढ़ियाँ भी इसी धारा में हैं। निपटारा आयुक्त के अधीनस्थ अतिरिक्त निपटारा आयुक्त, कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, निपटारा अधिकारी, तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार हैं। भू-अभिलेख निदेशक के अधीनस्थ अतिरिक्त और सहायक निदेशक, कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, भूमि अभिलेख अधिकारी, तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार हैं। किसी तहसील में तहसीलदार आदि अपने अधिकार-क्षेत्र के निपटारा अधिकारी और भूमि अभिलेख अधिकारी के भी अधीनस्थ हैं। अध्याय VII के अधीन किसी स्थानीय क्षेत्र के लिए विशेष रूप से नियुक्त अधिकारी भूमि अभिलेख अधिकारी के, और अध्याय VIII के अधीन नियुक्त अधिकारी निपटारा अधिकारी के अधीनस्थ हैं।
दो तरह का नियंत्रण: धारा 23
| मामले का प्रकार | नियंत्रण किसके पास | कारण |
|---|---|---|
| राजस्व से जुड़े ग़ैर-न्यायिक मामले (बंदोबस्त को छोड़कर) | राज्य सरकार | प्रशासनिक निर्णय; अधिकारों का फ़ैसला नहीं |
| न्यायिक मामले | राजस्व मंडल | पक्षों के अधिकार और दायित्व तय होते हैं |
| बंदोबस्त से जुड़े सभी मामले | राजस्व मंडल | राजस्व और लगान तय करने का विशेष काम |
शक्तियाँ और कर्तव्य: धारा 25 से 29
धारा 25 हर पद को उसका कार्य-क्षेत्र देती है। आयुक्त, कलेक्टर, उप-खंड अधिकारी और तहसीलदार अपने-अपने संभाग, ज़िले, उप-खंड और तहसील में वे सभी शक्तियाँ प्रयोग करेंगे और कर्तव्य निभाएँगे जो उन्हें इस अधिनियम, काश्तकारी अधिनियम 1955 या किसी अन्य लागू क़ानून से मिले हैं (उप-धारा (1))। निपटारा आयुक्त पूरे राज्य में बंदोबस्त के सभी मामलों का प्रभारी है (उप-धारा (2)), और भू-अभिलेख निदेशक पूरे राज्य में सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेखों की तैयारी, पुनरीक्षण और रख-रखाव का प्रभारी है (उप-धारा (3))। भूमि अभिलेख अधिकारी और निपटारा अधिकारी अपने क्षेत्र में अपनी शक्तियाँ प्रयोग करते हैं (उप-धाराएँ (4) और (5))। अतिरिक्त पदों के अधिकारी, जैसे अतिरिक्त आयुक्त या अतिरिक्त कलेक्टर, उन मामलों में मुख्य पदधारी की शक्तियों का प्रयोग करते हैं जो राज्य सरकार निर्देशित करे, और उस समय वे सभी प्रयोजनों के लिए मुख्य पदधारी माने जाते हैं (उप-धारा (6))। सहायक कलेक्टर और नायब तहसीलदार वे शक्तियाँ प्रयोग करते हैं जो क़ानून से या राज्य सरकार के सामान्य या विशेष आदेश से उन्हें सौंपी गई हों (उप-धारा (7))।
धारा 26 राज्य सरकार को राजपत्र की अधिसूचना से ऊपर की शक्तियाँ नीचे के अधिकारी को सौंपने देती है: नायब तहसीलदार को तहसीलदार की, तहसीलदार को सहायक कलेक्टर की, सहायक कलेक्टर को उप-खंड अधिकारी, भूमि अभिलेख अधिकारी, निपटारा अधिकारी या कलेक्टर की, उप-खंड अधिकारी को भूमि अभिलेख अधिकारी, निपटारा अधिकारी या कलेक्टर की, भूमि अभिलेख या निपटारा अधिकारी को उप-खंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर या कलेक्टर की, कलेक्टर को निपटारा अधिकारी की, आयुक्त को निपटारा आयुक्त या भू-अभिलेख निदेशक की और निपटारा आयुक्त को भू-अभिलेख निदेशक की। ये शक्तियाँ राज्य सरकार जैसे क्षेत्र और मामलों के लिए निर्देशित करे वैसे प्रयोग होंगी (उप-धारा (2)); पद के नाम से या पूरे वर्ग के लिए दी जा सकती हैं (उप-धारा (3)); और नाम से शक्ति पाया अधिकारी समान पद पर दूसरे क्षेत्र में तबादला हो तो वही शक्तियाँ वहाँ भी रखता है, जब तक राज्य सरकार अन्यथा निर्देश न दे (उप-धारा (4))।
धारा 27 "अंतर्निहित शक्तियाँ" (inherent powers) देती है, यानी ऊँचे पद में नीचे के पदों की शक्तियाँ अपने आप समाई होती हैं। राजस्व अपीलीय प्राधिकारी में कलेक्टर, उप-खंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की सभी शक्तियाँ हैं। कलेक्टर में उप-खंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की, उप-खंड अधिकारी में सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की, सहायक कलेक्टर में तहसीलदार और नायब तहसीलदार की, और तहसीलदार में नायब तहसीलदार की। भूमि अभिलेख अधिकारी या निपटारा अधिकारी में तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अध्याय VII या VIII के अधिकारी की शक्तियाँ हैं। आयुक्त को धारा 26 के खंड (g) से शक्तियाँ मिल जाएँ तो उसमें भूमि अभिलेख अधिकारी और उसके अधीनस्थ अधिकारियों की सभी शक्तियाँ आ जाती हैं।
धारा 28 और 29 कुर्सी ख़ाली होने की हालत सँभालती हैं। यदि आयुक्त, कलेक्टर, उप-खंड अधिकारी या तहसीलदार का पद स्थायी रूप से रिक्त हो जाए और कोई अधिकारी अस्थायी रूप से मुख्य कार्यकारी प्रशासन सँभाले, तो वह राज्य सरकार के आदेश आने तक उस पद की सभी शक्तियाँ प्रयोग करेगा और कर्तव्य निभाएगा (धारा 28)। जब अधिकारी केवल अस्थायी रूप से अनुपस्थित हो, तब उसके मुख्यालय पर कार्यरत समान दर्जे का अधिकारी, वह न हो तो उच्च दर्जे का, वह भी न हो तो निम्न दर्जे का अधिकारी अपना सामान्य काम न छोड़ते हुए कार्यभार सँभालता है और नियमित काम निपटाता है। यदि कोई अधिकारी उपलब्ध न हो या वह भी अनुपस्थित हो, तो कार्यालय का मुख्य लिपिक वर्ग का अधिकारी किसी मामले को केवल स्थगित (adjourn) करने की शक्ति रखता है (धारा 29)।
ऊँचे पद में निहित नीचे की शक्तियाँ: धारा 27
| पद | कौन-सी शक्तियाँ अपने आप | टिप्पणी |
|---|---|---|
| राजस्व अपीलीय प्राधिकारी | कलेक्टर, उप-खंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर, तहसीलदार | खंड (aa) |
| कलेक्टर | उप-खंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर, तहसीलदार | खंड (b) |
| उप-खंड अधिकारी | सहायक कलेक्टर, तहसीलदार | खंड (c) |
| सहायक कलेक्टर | तहसीलदार, नायब तहसीलदार | खंड (d) |
| तहसीलदार | नायब तहसीलदार | खंड (e) |
| भूमि अभिलेख अधिकारी या निपटारा अधिकारी | तहसीलदार, नायब तहसीलदार, अध्याय VII या VIII के अधिकारी | खंड (f) |
| आयुक्त | भूमि अभिलेख अधिकारी और उसके अधीनस्थों की शक्तियाँ, पर केवल धारा 26(g) से शक्ति मिलने पर | खंड (a) |
पटवारी, कानूनगो और निरीक्षक: धारा 30 से 36
गाँव के स्तर की पूरी व्यवस्था धारा 30 से 36 में है। भू-अभिलेख निदेशक राज्य सरकार की पूर्व मंज़ूरी से हर ज़िले के गाँवों को पटवारी-सर्किलों (Patwari circles) में बाँटता है और उनकी संख्या और सीमाएँ बदल सकता है (धारा 30)। कलेक्टर नियमों के अधीन हर सर्किल में एक पटवारी नियुक्त करता है। पटवारी का काम है अध्याय VII के अधीन वार्षिक रजिस्टरों और अभिलेखों का रख-रखाव और सुधार, उस सर्किल के भूमिधारकों और काश्तकारों से देय सभी लगान, राजस्व और अन्य माँगों की वसूली, और राज्य सरकार जो अन्य कर्तव्य निर्धारित करे (धारा 31)।
पटवारियों की निगरानी के लिए ऊपर दो और कड़ियाँ हैं। भू-अभिलेख निदेशक राज्य सरकार की मंज़ूरी से ज़िले के पटवारी-सर्किलों को भू-अभिलेख निरीक्षण सर्किलों (land records inspection circles) में बाँटता है (धारा 32)। हर निरीक्षण सर्किल के लिए कलेक्टर एक गिरदावर कानूनगो या भू-अभिलेख निरीक्षक (Land Record Inspector) नियुक्त करता है, जो वार्षिक रजिस्टरों और अभिलेखों की उचित निगरानी, रख-रखाव और सुधार का दायित्व निभाता है (धारा 33)। हर ज़िले में भू-अभिलेख निदेशक एक या अधिक सदर कानूनगो नियुक्त करता है, जो गिरदावर कानूनगो या निरीक्षकों और पटवारियों के काम की निगरानी करते हैं (धारा 34)।
धारा 35 के अनुसार पटवारियों, गिरदावर कानूनगो या निरीक्षकों और सदर कानूनगो की योग्यता, सेवा-शर्तें और कर्तव्य राज्य सरकार के नियमों से नियंत्रित होते हैं। धारा 36 आम नागरिक पर एक कर्तव्य डालती है: जिस व्यक्ति के अधिकार, हित या दायित्व को किसी क़ानून या नियम के अनुसार पटवारी, गिरदावर कानूनगो, निरीक्षक या सदर कानूनगो को किसी सरकारी रजिस्टर में दर्ज करना है, वह माँग किए जाने पर अभिलेख को सही बनाने के लिए आवश्यक सभी जानकारी देने को बाध्य है। यानी अभिलेख की शुद्धता केवल पटवारी की नहीं, भूमि से जुड़े व्यक्ति की भी ज़िम्मेदारी है।
ग्राम-स्तर की कड़ी: धारा 30 से 36
| पद या इकाई | कौन नियुक्त करता है | काम | धारा |
|---|---|---|---|
| पटवारी-सर्किल | भू-अभिलेख निदेशक (राज्य सरकार की पूर्व मंज़ूरी से) बनाता है | कई गाँवों का समूह | 30 |
| पटवारी | कलेक्टर, नियमों के अधीन | वार्षिक रजिस्टर और अभिलेख; लगान, राजस्व और अन्य माँगों की वसूली | 31 |
| भू-अभिलेख निरीक्षण सर्किल | भू-अभिलेख निदेशक (राज्य सरकार की मंज़ूरी से) बनाता है | कई पटवारी-सर्किलों का समूह | 32 |
| गिरदावर कानूनगो या भू-अभिलेख निरीक्षक | कलेक्टर, नियमों के अधीन | वार्षिक रजिस्टरों और अभिलेखों की निगरानी, रख-रखाव, सुधार | 33 |
| सदर कानूनगो | भू-अभिलेख निदेशक, नियमों के अधीन | गिरदावर कानूनगो या निरीक्षकों और पटवारियों के काम की निगरानी | 34 |
| योग्यता, सेवा-शर्तें, कर्तव्य | राज्य सरकार के नियम | सभी चारों पदों के लिए | 35 |
| जानकारी देने का दायित्व | अधिनियम स्वयं | अभिलेख में दर्ज होने वाले व्यक्ति का दायित्व | 36 |
राजस्व प्रशासन की सीढ़ी: धारा 4 से 29
राज्य सरकार और राजस्व मंडल (अजमेर)
ग़ैर-न्यायिक मामलों पर राज्य सरकार, न्यायिक और बंदोबस्त पर मंडल
आयुक्त (संभाग)
धारा 17, धारा 24(i)
कलेक्टर (ज़िला), जो भूमि अभिलेख अधिकारी भी
धारा 20(a)(i), धारा 24(ii)
उप-खंड अधिकारी (उप-खंड)
धारा 20(c)(i), धारा 24(iii)
तहसीलदार (तहसील)
धारा 20(a)(ii), धारा 24(iv)
नायब तहसीलदार
तहसील में तहसीलदार के अधीन
मंडल से पटवारी तक: भू-अभिलेख की कड़ी
भू-अभिलेख निदेशक
धारा 19, 30, 32, 34
सदर कानूनगो
हर ज़िले में एक या अधिक, धारा 34
गिरदावर कानूनगो या भू-अभिलेख निरीक्षक
निरीक्षण सर्किल, कलेक्टर नियुक्त करता है, धारा 33
पटवारी
पटवारी-सर्किल, कलेक्टर नियुक्त करता है, धारा 31
मुख्य तथ्य
- राजस्व मंडल का मुख्यालय
- अजमेर, धारा 6
- मंडल का गठन
- अध्यक्ष और तीन से कम नहीं तथा बीस से अधिक नहीं अन्य सदस्य, धारा 4(2) (2011 के संशोधन के बाद)
- सदस्यों का कार्यकाल
- राज्यपाल के प्रसादपर्यंत, धारा 5
- मंडल की हैसियत
- अपील, पुनरीक्षण और निर्देश का सर्वोच्च राजस्व न्यायालय, धारा 8
- खंडपीठ में विशेष अपील
- एक माह के भीतर, घोषणा सहित, धारा 10(1) परंतुक
- राजस्व अपीलीय प्राधिकारी
- तीन से कम नहीं, धारा 20A
- न्यायिक और बंदोबस्त मामलों का नियंत्रण
- राजस्व मंडल; ग़ैर-न्यायिक का राज्य सरकार, धारा 23
- पटवारी की नियुक्ति
- कलेक्टर, धारा 31; सदर कानूनगो की नियुक्ति भू-अभिलेख निदेशक, धारा 34
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
राजस्थान का पहलू
राजस्थान का राजस्व मंडल अजमेर में बैठता है (धारा 6) और राजस्थान के सभी राजस्व न्यायालयों तथा अधिकारियों का अधीक्षक है (धारा 9)। मंडल के सदस्यों की ऊपरी सीमा राज्य सरकार की भू-राजस्व वेबसाइट पर उपलब्ध अधिनियम के पाठ में "बीस" है (देखा गया: 2 अक्टूबर 2026)। राजस्व मंडल की वेबसाइट अधिनियम और उसकी अपील तथा पुनरीक्षण संबंधी धाराओं की सूची भी देती है।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- राजस्व मंडल के सदस्यों की संख्या "पंद्रह" लिखना। 2011 के संशोधन के बाद वर्तमान सीमा बीस है; पुराने नोट्स में पंद्रह मिलता है। न्यूनतम तीन सदस्य और अध्यक्ष अलग से।
- धारा 20A के राजस्व अपीलीय प्राधिकारी को आयुक्त समझ लेना। आयुक्त संभाग का अधिकारी है (धारा 17); राजस्व अपीलीय प्राधिकारी की नियुक्ति धारा 20A से होती है और संख्या तीन से कम नहीं हो सकती।
- धारा 27 (ऊपर वाले में नीचे की शक्तियाँ स्वतः) और धारा 26 (नीचे वाले को ऊपर की शक्ति अधिसूचना से) को उलट देना।
- धारा 23 में "बंदोबस्त" को ग़ैर-न्यायिक मामलों में गिनना। बंदोबस्त के मामले चाहे जैसे हों, उनका नियंत्रण राजस्व मंडल के पास है।
- पटवारी की नियुक्ति भू-अभिलेख निदेशक से और सदर कानूनगो की नियुक्ति कलेक्टर से बताना। सही क्रम: पटवारी और गिरदावर कानूनगो को कलेक्टर, सदर कानूनगो को निदेशक नियुक्त करता है।
उदाहरण से समझें
उदाहरण (काल्पनिक)तहसील में तीन परिस्थितियाँ (काल्पनिक उदाहरण)
एक काल्पनिक तहसील "रामपुरा" में तीन अलग-अलग परिस्थितियाँ आती हैं और देखना है कि अधिनियम की कौन-सी धारा लागू होगी। (सभी स्थान और पात्र अपनी रचना हैं।)
- परिस्थिति 1: तहसीलदार दस दिन की छुट्टी पर हैं, मुख्यालय पर कोई समान दर्जे का अधिकारी नहीं है, पर एक अतिरिक्त तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार हैं
- धारा 29: समान दर्जे का अधिकारी न हो तो उच्च दर्जे का अधिकारी कार्यभार सँभालता है। यहाँ अतिरिक्त तहसीलदार तहसीलदार के अधीन है, इसलिए वह निम्न दर्जे का है। वह भी सामान्य क्रम में तब लिया जाएगा जब उच्च दर्जे का कोई अधिकारी उपलब्ध न हो; जो भी उपलब्ध हो, वह अपना सामान्य काम न छोड़ते हुए नियमित काम निपटाएगा।
- परिस्थिति 2: कलेक्टर का पद अचानक स्थायी रूप से रिक्त हो गया और अतिरिक्त कलेक्टर ने अस्थायी रूप से ज़िले का मुख्य कार्यकारी प्रशासन सँभाल लिया
- धारा 28: राज्य सरकार का आदेश आने तक वह कलेक्टर की सभी शक्तियाँ प्रयोग करेगा और कर्तव्य निभाएगा।
- परिस्थिति 3: राज्य सरकार तहसीलदार को सहायक कलेक्टर की कुछ शक्तियाँ देना चाहती है
- धारा 26(1)(b): राजपत्र की अधिसूचना से ऐसा किया जा सकता है, और धारा 26(2) के अनुसार शक्तियाँ उन क्षेत्रों और मामलों के लिए प्रयोग होंगी जो राज्य सरकार निर्देशित करे।
सीख
अधिनियम हर रिक्ति और हर शक्ति-हस्तांतरण के लिए अलग धारा देता है। उत्तर लिखते समय परिस्थिति पहचानकर सही धारा-संख्या बताना ही अंक दिलाता है।
चरणों में जाँचें
हल सहित उदाहरणक्या कलेक्टर तहसीलदार की शक्ति प्रयोग कर सकता है? (धारा 27)
दिया है
- प्रश्न: "ज़िले का कलेक्टर एक ऐसा काम करना चाहता है जो अधिनियम ने तहसीलदार को दिया है। क्या वह कर सकता है?"
- 1चरण 1 पहचानें कि पूछा गया पद ऊपर का है या नीचे का। कलेक्टर ज़िले का प्रमुख है और तहसीलदार से ऊपर है (धारा 24)।
- 2चरण 2 धारा 27 के खंड (b) में देखें: कलेक्टर में उप-खंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर और तहसीलदार की सभी शक्तियाँ हैं।
- 3चरण 3 निष्कर्ष लिखें: हाँ, बिना किसी अधिसूचना के वह शक्ति कलेक्टर की अंतर्निहित शक्ति है।
- 4चरण 4 उलटा प्रश्न: तहसीलदार कलेक्टर की शक्ति चाहे तो? तब धारा 26 की अधिसूचना (सहायक कलेक्टर के ज़रिए क्रमशः) चाहिए, क्योंकि नीचे के पद में ऊपर की शक्ति अपने आप नहीं होती।
निष्कर्ष: ऊपर वाला नीचे वाले की शक्तियों का प्रयोग स्वतः कर सकता है (धारा 27); नीचे वाले को ऊपर की शक्ति केवल राज्य सरकार की अधिसूचना से मिलती है (धारा 26)।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
राजस्व मंडल का मुख्यालय कहाँ है?
आदर्श उत्तर
मुख्यालय अजमेर में है (धारा 6); सरकारी आदेशों के अधीन मंडल कहीं भी बैठ सकता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
राजस्व मंडल के सदस्य कितने समय तक पद पर रहते हैं?
आदर्श उत्तर
सदस्य राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (during the pleasure of the Governor) पद धारण करते हैं (धारा 5)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
राजस्व मंडल की प्रमुख शक्तियाँ बताइए।
आदर्श उत्तर
मंडल राजस्थान में अपील, पुनरीक्षण और निर्देश का सर्वोच्च राजस्व न्यायालय है (धारा 8)। सभी राजस्व न्यायालयों और अधिकारियों पर उसका सामान्य अधीक्षण है (धारा 9)। अधिकारिता अकेला सदस्य या खंडपीठ चलाती है; एक माह में खंडपीठ को विशेष अपील होती है (धारा 10)।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
न्यायिक और ग़ैर-न्यायिक राजस्व मामलों पर नियंत्रण किसका है?
आदर्श उत्तर
धारा 23 के अनुसार बंदोबस्त को छोड़कर ग़ैर-न्यायिक राजस्व मामलों का नियंत्रण राज्य सरकार के पास है। सभी न्यायिक मामलों और बंदोबस्त से जुड़े सभी मामलों का नियंत्रण राजस्व मंडल के पास है। न्यायिक मामला वह है जिसमें पक्षों के अधिकार और दायित्व तय होते हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 के अनुसार राजस्व अधिकारियों का पदक्रम और अधीनस्थता समझाइए।
आदर्श उत्तर
राज्य में संभाग का आयुक्त (धारा 17), ज़िले का कलेक्टर, जो भूमि अभिलेख अधिकारी भी है, और तहसील का तहसीलदार अनिवार्य पद हैं (धारा 20)। धारा 24 के अनुसार संभाग के कलेक्टर आदि आयुक्त के, ज़िले के उप-खंड अधिकारी, तहसीलदार आदि कलेक्टर के और तहसील के नायब तहसीलदार तहसीलदार के अधीनस्थ हैं। धारा 27 में ऊँचे पद के पास नीचे की शक्तियाँ स्वतः हैं। सर्वोपरि अधीक्षण राजस्व मंडल का है (धारा 9)। इस प्रकार नीचे का हर अधिकारी ऊपर वाले के निर्देश, निरीक्षण और अपील के अधीन रहता है, और नियुक्तियाँ राजपत्र में अधिसूचित होती हैं (धारा 22)।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
नमूना प्रश्न: "राजस्व मंडल का गठन, शक्तियाँ और कार्य-पद्धति बताइए।" पहली पंक्ति में लिखें कि राजस्व मंडल अधिनियम की धारा 4 से 14 द्वारा स्थापित राज्य का सर्वोच्च राजस्व न्यायालय है। (2 अंक में केवल मुख्यालय या गठन में से जो पूछा हो।)
मुख्य भाग
- गठन: अध्यक्ष और तीन से बीस तक अन्य सदस्य (धारा 4); राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (धारा 5); मुख्यालय अजमेर (धारा 6)
- शक्तियाँ: अपील, पुनरीक्षण और निर्देश का सर्वोच्च राजस्व न्यायालय; सभी राजस्व अधिकारियों पर अधीक्षण (धारा 8, 9)
- कार्य-पद्धति: अकेला सदस्य या खंडपीठ; एक माह में विशेष अपील; बहुमत से निर्णय (धारा 10 से 13)
- सीमा: अधिकार-क्षेत्र के संदेह में उच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम (धारा 8 परंतुक)
निष्कर्ष
निष्कर्ष: मंडल अधिनियम की राजस्व न्याय-व्यवस्था की सर्वोच्च कड़ी है और ग़ैर-न्यायिक मामलों में राज्य सरकार के साथ दो-पटरी नियंत्रण बनाता है (धारा 23)।
अतिरिक्त मूल्य
- एक पंक्ति का तुलना-बिंदु: ग़ैर-न्यायिक मामले राज्य सरकार के पास, न्यायिक और बंदोबस्त मंडल के पास।
- धारा-संख्या हर बिंदु के साथ लिखें।
संबंधित विषय
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राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956: धारा 40A और 74 से 87, अपील, पुनरीक्षण और पुनर्विलोकन
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956: धारा 106 से 127, सर्वेक्षण, अभिलेख-कार्यवाही और अधिकार अभिलेख
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राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 14 से 17A और 31 से 37: काश्तकारों के वर्ग, खातेदारी अधिकार और काश्तकार के अधिकार
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955, धारा 38 से 54A: उत्तराधिकार, बिक्री-बंधक, पट्टा देने की सीमा, अदला-बदली और जोत का विभाजन
ज़िला राजस्व प्रशासन: संभाग, ज़िला, उपखंड, तहसील और पटवार मंडल
राजस्थान राजस्व मंडल (Board of Revenue), अजमेर
ज़िला कलेक्टर: राजस्व, क़ानून-व्यवस्था और विकास प्रशासन
त्वरित पुनरावृत्ति
- राजस्व मंडल: अध्यक्ष और तीन से बीस तक अन्य सदस्य (धारा 4(2)); राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (धारा 5); मुख्यालय अजमेर (धारा 6)
- धारा 8: अपील, पुनरीक्षण और निर्देश का सर्वोच्च राजस्व न्यायालय; अधिकार-क्षेत्र के संदेह में उच्च न्यायालय अंतिम
- धारा 9: सभी राजस्व न्यायालय और अधिकारी मंडल के अधीनस्थ; धारा 10: अकेला सदस्य या खंडपीठ; एक माह में विशेष अपील
- धारा 11 से 13: खंडपीठ को निर्देश, उच्च न्यायालय को निर्देश, बहुमत और बराबरी पर अन्य सदस्य
- धारा 15 और 16: संभाग, ज़िला, उप-खंड, तहसील, उप-तहसील; बनाना और बदलना राजपत्र की अधिसूचना से
- धारा 17 से 20: आयुक्त, निपटारा आयुक्त, भू-अभिलेख निदेशक, कलेक्टर (जो LRO भी), तहसीलदार; धारा 20A: राजस्व अपीलीय प्राधिकारी, तीन से कम नहीं
- धारा 23: ग़ैर-न्यायिक (बंदोबस्त को छोड़कर) राज्य सरकार; न्यायिक और बंदोबस्त मंडल
- धारा 24: अधीनस्थता की सीढ़ी; धारा 27: ऊँचे पद में नीचे की शक्तियाँ स्वतः; धारा 26: ऊपर की शक्ति अधिसूचना से
- धारा 28: स्थायी रिक्ति पर अस्थायी उत्तराधिकारी; धारा 29: अनुपस्थिति पर समान, उच्च, फिर निम्न दर्जे का अधिकारी; अंत में मुख्य लिपिक केवल स्थगन
- धारा 30 से 36: पटवारी (कलेक्टर), गिरदावर कानूनगो (कलेक्टर), सदर कानूनगो (निदेशक); धारा 36: जानकारी देने का दायित्व
याद रखने योग्य शब्द
- राजस्व मंडल
- अजमेर
- प्रसादपर्यंत
- धारा 27
- राजस्व अपीलीय प्राधिकारी
- पटवारी